NEWS 22 BHARAT

कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल का हमला, ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर उठाए सवाल

रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा से मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूतों के लखमा और अन्य लोगों को परेशान किया जा रहा है और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि फिलहाल कवासी लखमा का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें जेल में जरूरी दवाइयां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात के दौरान लखमा को सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की थी। इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा जांच कर इलाज कराया गया। जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप भूपेश बघेल ने कहा कि सबसे गंभीर विषय यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस और तथ्यात्मक सबूतों का अभाव है, इसके बावजूद लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे केवल परेशान करने और दबाव बनाने की रणनीति बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत के निर्देश पर अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, लेकिन आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रोडक्शन वारंट जारी कर कवासी लखमा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है। ‘एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर समझ रही हैं’ भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कुछ जांच एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर मानने लगी हैं, जो लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा, तो यह न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर तंज डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं के मुंह से अनजाने में सच्चाई निकल रही है। उन्होंने कहा कि अरुण साव, केदार कश्यप और रामविचार नेताम जैसे नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि कवासी लखमा एक निर्दोष आदिवासी नेता हैं, जो पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब खुद भाजपा नेता उन्हें निर्दोष मान रहे हैं, तो फिर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई आखिर किस आधार पर जारी है। आदिवासी राजनीति से जुड़ा मामला राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कवासी लखमा का मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भूपेश बघेल के लगातार आक्रामक बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बना सकती है। आदिवासी समाज में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल का हमला, ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर उठाए सवाल Read Post »

Bhilai / Durg, Bilaspur, Chhattisgarh, Political, Raipur

बिलासपुर के मोपका सब स्टेशन में भीषण आग, आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप, मची अफरा-तफरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मोपका क्षेत्र स्थित शहर के सबसे बड़े और पुराने बिजली सब स्टेशन में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि उसकी लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं। घटना के चलते शहर के बड़े हिस्से की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई, जिससे आधे शहर में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। बिजली विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अमला भी मौके पर मौजूद है। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं मिली है। आग से प्रभावित हुई बिजली आपूर्ति प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 25 साल पुराना यह सब स्टेशन 480 मेगावॉट क्षमता का है। इसमें से लगभग 320 मेगावॉट बिजली बिलासपुर शहर के बड़े हिस्से को सप्लाई की जाती है। आग लगते ही सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई, जिससे आवासीय इलाकों, बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में अचानक अंधेरा छा गया। बिजली गुल होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानों में काम ठप हो गया, वहीं घरों में भी अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, बिजली विभाग और प्रशासन की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद नुकसान का आकलन किया जाएगा और जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे।

बिलासपुर के मोपका सब स्टेशन में भीषण आग, आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप, मची अफरा-तफरी Read Post »

Accident, Bilaspur, Chhattisgarh, State

रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां उन्होंने शराब घोटाले के मामले में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों और भाजपा पर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़वा लिया, जबकि हकीकत यह है कि उसे अदालत से जमानत मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, “अगर मेरे हाथ में होता, तो मेरा बेटा जेल जाता ही नहीं। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई, तभी जाकर उसे जमानत मिली।” कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखने की कोशिश भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा को जानबूझकर लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर जवाब दाखिल नहीं किया, जिससे मामले का फैसला टल गया। उन्होंने दावा किया कि यदि एजेंसी समय पर जवाब पेश करती, तो 17 दिसंबर को ही निर्णय आ सकता था। लेकिन जवाब रोका गया ताकि लखमा को जेल में रखा जा सके। भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बयानों से सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कवासी लखमा को निर्दोष बताया जा रहा है, तो फिर EOW और ED की कार्रवाई क्यों जारी है। साथ ही भाजपा नेताओं को “घड़ियाली आंसू” न बहाने की सलाह दी। कौन हैं कवासी लखमा कवासी लखमा बस्तर अंचल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो जीवित बच पाए थे। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से गिने-चुने नेता ही अपनी सीट बचा पाए, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले में एसीबी में दर्ज FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। ED के अनुसार, पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता Read Post »

Bhilai / Durg, Bilaspur, Chhattisgarh, Political, Raigarh, Raipur, State

रायगढ़ में बंद मकानों को बनाया निशाना, दो घरों से नकदी व जेवरात समेत 2.10 लाख की चोरी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चोरों ने त्योहार के दौरान सूने पड़े मकानों को निशाना बनाते हुए दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम दिया है। अज्ञात चोरों ने दोनों घटनाओं में कुल 2 लाख 10 हजार रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। दोनों ही परिवार घर में ताला लगाकर त्योहार मनाने बाहर गए हुए थे। मामलों में संबंधित थानों में अपराध दर्ज कर पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। जूटमिल थाना क्षेत्र में पहली वारदात पहली घटना जूटमिल थाना क्षेत्र के मिट्ठुमुड़ा इलाके की है। पीड़ित शिव कुमार साव (42) ने पुलिस को बताया कि वे पीडी कॉमर्स कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं। शनिवार सुबह वे अपने परिवार के साथ बड़े भंडार पर्व मनाने के लिए घर बंद कर बाहर गए थे। सोमवार को घर लौटने पर उन्होंने देखा कि कमरे का ताला टूटा हुआ है और घर का सामान बिखरा पड़ा है। अलमारी का लॉकर भी तोड़ दिया गया था, जिसमें रखे 80 हजार रुपये नकद और करीब 1 लाख 20 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो चुके थे। आसपास पूछताछ के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने जूटमिल थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली थाना क्षेत्र में दूसरी चोरी दूसरी चोरी की घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के रामभांठा इलाके में सामने आई है। यहां रहने वाले अनिल कुजूर (52) जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत हैं। वे 26 दिसंबर को अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए अपने गृह ग्राम बासाडीह, जिला जशपुर चले गए थे। अगले दिन मकान मालिक से उन्हें सूचना मिली कि घर का ताला टूटा हुआ है। रायगढ़ लौटने पर उन्होंने पाया कि अलमारी का लॉकर तोड़ा गया है और उसमें रखे करीब 90 हजार रुपये के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो गए हैं। इसके बाद अनिल कुजूर ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुटी दोनों मामलों में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही चोरों को गिरफ्तार कर चोरी का खुलासा किया जाएगा।

रायगढ़ में बंद मकानों को बनाया निशाना, दो घरों से नकदी व जेवरात समेत 2.10 लाख की चोरी Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raigarh

दुर्ग में शिवनाथ नदी पर ठेकेदार का 30 साल पुराना अवैध एनीकट ध्वस्त, पुलिस बल की मौजूदगी में चली बुलडोजर कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी पर वर्षों से चल रही एक बड़ी अनियमितता सामने आई है। ईंट-भट्टा व्यवसाय से जुड़े ठेकेदार ने अपने निजी फायदे के लिए नदी पर अवैध एनीकट (अस्थायी पुल) का निर्माण कर लिया था, जिसकी जानकारी प्रशासन को करीब 30 साल बाद मिली। मामला सामने आते ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार (5 जनवरी) को पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को हटवा दिया। जानकारी के मुताबिक, ठेकेदार नीलकंठ पांडे ने अपने ईंट-भट्टे के लिए कच्चा माल लाने-ले जाने की सुविधा के उद्देश्य से शिवनाथ नदी पर मिट्टी और पाइप डालकर अस्थायी पुल बना लिया था। यह पुल पथरिया और रवेलीडीह पंचायत के बीच बनाया गया था, जबकि इस क्षेत्र में पहले से ही वैकल्पिक पुल मौजूद हैं। 10 किलोमीटर की दूरी बचाने बनाया निजी रास्ता स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार ने करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर बचाने के लिए नदी के ऊपर ही निजी रास्ता तैयार कर लिया था। हैरानी की बात यह है कि उसी क्षेत्र में एक पुराना एनीकट और एक नया पक्का पुल पहले से बना हुआ है, इसके बावजूद ठेकेदार ने अपने फायदे के लिए अवैध निर्माण कर लिया। बताया जा रहा है कि इसी तरह पिछले लगभग तीन दशकों से शिवनाथ नदी पर अस्थायी बांध बनाकर ईंट-भट्टे का संचालन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने किया विरोध सोमवार को जब प्रशासन ने एनीकट हटाने की कार्रवाई शुरू की, तो दो थानों की पुलिस फोर्स मौके पर तैनात की गई थी। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने विरोध शुरू कर दिया और जेसीबी मशीन को भी बंद करवा दिया। इसके बाद पुलिस और तहसीलदार की मौजूदगी में दोबारा मशीन चालू कर एक छोर से पुल तोड़ने की कार्रवाई की गई। दोनों पंचायतों के सरपंचों ने जताया विरोध पथरिया पंचायत के सरपंच मीत कुमार निषाद ने बताया कि ईंट-भट्टा ठेकेदार ने पंचायत से किसी तरह की अनुमति नहीं ली थी। वर्षों से मिट्टी का बांध बनाकर नदी का उपयोग किया जा रहा था, जिससे ठेकेदार को लाखों रुपये का फायदा हो रहा था। वहीं रवेलीडीह पंचायत के सरपंच माधोलाल देवांगन ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने अपने निजी लाभ के लिए नदी पर बांध बनाया। इससे ईंट और मिट्टी के परिवहन में उसे सुविधा मिलती थी। उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदार ने पंचायत की जमीन किराए पर ली है, लेकिन उसका किराया भी नहीं दिया जा रहा है। ठेकेदार का दावा, प्रशासन का सख्त रुख ठेकेदार नीलकंठ पांडे का कहना है कि नदी में बनाए गए बांध में पानी के बहाव के लिए पाइप लगाए गए थे और इसका उपयोग ग्रामीण किसान भी करते थे। उनका दावा है कि नियमों के तहत ही यह व्यवस्था की गई थी और इससे सभी को फायदा हो रहा था। हालांकि प्रशासन ने इस दावे को खारिज करते हुए कार्रवाई जारी रखी। कलेक्टर बोले—बिना अनुमति नदी में निर्माण गलत दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि शिवनाथ नदी में मिट्टी डालकर रास्ता बनाना नियमों के खिलाफ है। इस निर्माण के लिए किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। जल संसाधन विभाग और एसडीएम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की है। जो हिस्सा अभी बचा है, उसे भी हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि नदी पर इस तरह के अवैध बांध से कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी।

दुर्ग में शिवनाथ नदी पर ठेकेदार का 30 साल पुराना अवैध एनीकट ध्वस्त, पुलिस बल की मौजूदगी में चली बुलडोजर कार्रवाई Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Crime

डिप्टी सीएम अरुण साव पर टिप्पणी को लेकर भूपेश बघेल घिरे, साहू समाज ने जताया विरोध, 10 दिन में माफी की मांग

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भूपेश बघेल के बयान से साहू समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे अपमानजनक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। बिलासपुर में साहू समाज ने इस मामले को लेकर एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि भूपेश बघेल ने 10 दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। जंगल की कहानी से कसा था तंज दरअसल, बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने एक कथित उदाहरण देते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि जंगल में राजा चुनने की प्रक्रिया में सभी जानवरों ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया। यह टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हुई, जिसे साहू समाज ने सीधे तौर पर अरुण साव का अपमान बताया। बयान सामने आने के बाद प्रदेश के कई जिलों में साहू समाज के लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किए और कुछ जगहों पर पुतला दहन भी किया गया। 29 दिसंबर को बिलासपुर में दिया गया था बयान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 29 दिसंबर 2025 को बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र पहुंचे थे। यहां वे बस्ती हटाने के विरोध में चल रहे आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए थे। इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विधायक अमर अग्रवाल पर तीखी टिप्पणियां की थीं। उन्होंने लिंगियाडीह क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे और स्थानीय लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की थी। इसी भाषण के दौरान उन्होंने अरुण साव को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसे अब समाज विशेष के अपमान के रूप में देखा जा रहा है। जशपुर में सौंपा गया ज्ञापन जशपुर जिले में भी साहू समाज ने पूर्व मुख्यमंत्री के बयान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने जशपुरनगर में एसएसपी शशि मोहन सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए 10 दिनों के भीतर माफी की मांग की है। जिला साहू संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव साहू समाज के प्रतिनिधि हैं और एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत बल्कि पूरे समाज का अपमान है। सक्ती जिले में भी आक्रोश सक्ती जिले में भी 5 जनवरी को जिला साहू संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। जिला अध्यक्ष डॉ. खिलावन साहू ने प्रेस वार्ता में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की टिप्पणी असंवेदनशील और निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहू समाज अपनी गरिमा से समझौता नहीं करेगा और यदि माफी नहीं मांगी गई तो संगठित रूप से आंदोलन किया जाएगा।

डिप्टी सीएम अरुण साव पर टिप्पणी को लेकर भूपेश बघेल घिरे, साहू समाज ने जताया विरोध, 10 दिन में माफी की मांग Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Political, Raipur, Religion

जिला अस्पतालों में चार गुना बढ़ेगा दवाओं का स्टॉक, अब गांव के अस्पतालों में भी मिलेंगी शुगर-थायराइड की दवाएं

राज्य सरकार ने ग्रामीण और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में सर्दी-जुकाम, बुखार और उल्टी-दस्त के साथ-साथ शुगर, थायराइड और खून पतला करने वाली दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। अभी तक ये दवाएं केवल जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में ही मिलती थीं, जिससे ग्रामीण मरीजों को बार-बार शहर जाना पड़ता था। स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक दवाओं की सूची में बड़ी बढ़ोतरी की है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की संख्या 146 से बढ़ाकर 247 कर दी गई है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में यह संख्या 196 से बढ़कर 365 हो जाएगी। इससे गांवों में रहने वाले मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिल सकेगा। जिला अस्पतालों में 208 से बढ़कर 807 होंगी दवाएं जिला अस्पतालों में भी दवाओं के स्टॉक में बड़ा इजाफा किया गया है। वर्तमान में जहां जिला अस्पतालों में 208 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 807 की जा रही है। इसका मतलब यह है कि जो दवाएं अब तक केवल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मिलती थीं, वे सुविधा अब जिला अस्पतालों में भी मरीजों को मिलेंगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने के बावजूद दवाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता था। दवाओं की उपलब्धता बढ़ने से अब अधिकतर मरीजों का इलाज जिला अस्पतालों में ही संभव हो सकेगा, जिससे मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत लिया गया फैसला यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इंडियन प्राइमरी हेल्थ सिस्टम के तहत लिया गया है। इस प्रणाली के अनुसार गांव-गांव के अस्पतालों में अधिकतम दवाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इसी दिशा में कदम उठाते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का फैसला किया है। उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी बढ़ेंगी सुविधाएं अब उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी केवल सामान्य दवाओं तक सीमित व्यवस्था नहीं रहेगी। यहां 146 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें एंटीबायोटिक और दर्द निवारक इंजेक्शन भी शामिल होंगे। इससे उप स्वास्थ्य केंद्रों में वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित थीं। सीएचओ देंगे दवाएं, जांच जरूरी राज्य के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) मरीजों को शुगर और थायराइड जैसी बीमारियों की दवाएं देंगे। हालांकि, मरीज को कम से कम एक बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अनिवार्य होगा। ग्रामीण मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत स्वास्थ्य संचालक संजीव झा ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में दवाओं की कमी से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब गंभीर बीमारियों की दवाएं नजदीक मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था की नियमित समीक्षा भी की जाएगी और यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर किया जाएगा, ताकि यह सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर सके।

जिला अस्पतालों में चार गुना बढ़ेगा दवाओं का स्टॉक, अब गांव के अस्पतालों में भी मिलेंगी शुगर-थायराइड की दवाएं Read Post »

Chhattisgarh, Health, Raipur, Top News

रायपुर में संदिग्ध हालात में युवक का शव बरामद, हादसे से मौत की आशंका

राजधानी रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक झारखंड का रहने वाला बताया जा रहा है और मजदूरी के सिलसिले में रायपुर आया हुआ था। युवक के पैर में गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे पुलिस को आशंका है कि उसकी मौत सड़क दुर्घटना में हुई हो सकती है। हालांकि, मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने मृतक की पहचान शुभम राणा (25) के रूप में की है, जो झारखंड के देवघर जिले का निवासी था। वह रायपुर में एक निर्माणाधीन मकान में कारपेंटरी का काम कर रहा था और अन्य मजदूरों के साथ वहीं रह रहा था। जानकारी के मुताबिक, शुभम बीती रात करीब 11 बजे अपने कमरे से बाहर निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। अगले दिन जब उसके साथ काम करने वाले मजदूरों ने आसपास तलाश शुरू की, तो पास ही स्थित एक निर्माणाधीन मकान के नजदीक उसका शव पड़ा मिला। शव देखते ही साथी मजदूर घबरा गए और तत्काल पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस सूचना मिलते ही विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में मामला दुर्घटना से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, क्योंकि शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। परिजनों ने जताई संदेह, जांच की मांग घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन झारखंड से रायपुर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि शुभम का किसी से कोई विवाद नहीं था और उसकी मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। विधानसभा थाना पुलिस ने बताया कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। इसके साथ ही शुभम के साथ काम करने वाले साथियों और परिचितों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।

रायपुर में संदिग्ध हालात में युवक का शव बरामद, हादसे से मौत की आशंका Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur

रायपुर में स्विगी डिलीवरी बॉय से चाकू की नोक पर लूट, ऑर्डर कैंसल के बहाने दिया वारदात को अंजाम

राजधानी रायपुर में देर रात फूड डिलीवरी बॉय के साथ लूट की सनसनीखेज घटना सामने आई है। सडडू बाजार चौक के पास दो युवकों ने स्विगी डिलीवरी कर्मचारी को चाकू दिखाकर डराया और उसका मोबाइल फोन व नकदी लूटकर मौके से फरार हो गए। मामले में विधानसभा थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित की पहचान तोष यादव के रूप में हुई है, जो मूल रूप से महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छोटे टेमरी का निवासी है। वर्तमान में वह रायपुर के भैरव नगर, संतोषी नगर इलाके में किराए पर रहकर स्विगी में डिलीवरी का काम करता है। पीड़ित के मुताबिक, 4 जनवरी की रात करीब 1:30 बजे उसे शंकर नगर स्थित बर्गर किंग से एक पार्सल डिलीवरी का ऑर्डर मिला था। निर्धारित समय पर वह करीब 2 बजे सडडू बाजार चौक स्थित लोकेशन पर पहुंचा, जहां दो युवक उसका इंतजार कर रहे थे। पार्सल देने के बाद आरोपियों में से एक युवक ने ऑर्डर कैंसल कराने की बात कहते हुए अचानक जेब से बटनदार चाकू निकाल लिया और उसे डराने लगा। इसी दौरान दूसरे आरोपी ने पीछे से पकड़ लिया। दोनों ने मिलकर उसका मोबाइल फोन छीन लिया और जेब में रखे 500 रुपये भी लूट लिए। धमकी देकर फरार हुए आरोपी, सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस लूट के बाद आरोपियों ने पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गए। घटना से डरा-सहमा डिलीवरी बॉय किसी तरह परिचितों की मदद से घर पहुंचा और बाद में थाने जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

रायपुर में स्विगी डिलीवरी बॉय से चाकू की नोक पर लूट, ऑर्डर कैंसल के बहाने दिया वारदात को अंजाम Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur

कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में पहली बार राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी से प्रभावी हो सकती है। इसे लेकर गृह विभाग द्वारा विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 शहरी थानों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों के 15 थानों के लिए अलग से ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं लागू होंगी। यह मॉडल पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में लागू किया गया था, लेकिन वहां इसे व्यावहारिक कठिनाइयों और समन्वय की कमी के चलते असफल माना गया। बाद में यूपी सरकार ने पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया था। अब इसी मॉडल को रायपुर में लागू करने की तैयारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी पुलिस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं। शहरी-ग्रामीण विभाजन से सामने आ सकती हैं ये समस्याएं 1. वीआईपी मूवमेंट में बढ़ेगी जटिलताअगर कमिश्नरी सिस्टम केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहता है, तो पुराने रायपुर से नवा रायपुर के बीच वीआईपी मूवमेंट के दौरान दो अलग-अलग कारकेड लगाने पड़ेंगे। नगर निगम सीमा तक कमिश्नरी पुलिस और उसके आगे ग्रामीण पुलिस द्वारा सुरक्षा संभालने की व्यवस्था करनी होगी। 2. प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बंटेगी दो हिस्सों मेंइस प्रस्तावित सिस्टम में एयरपोर्ट ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। वहीं सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास, राजभवन और मंत्री बंगलों की सुरक्षा पुलिस कमिश्नर के जिम्मे होगी। दूसरी ओर, नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास, विधानसभा, मंत्रालय और सचिवालय की सुरक्षा ग्रामीण एसपी के अधीन रहेगी। 3. अपराध की जांच में सीमा विवादहत्या, लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों में शहरी और ग्रामीण सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में घटना होने पर जांच एजेंसी तय करने में देरी और आपसी समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रशासनिक अनुमतियों के लिए शासन स्तर पर निर्भरता बढ़ेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो। पुलिस कमिश्नर को धारा 144 लागू करने, हथियार लाइसेंस, जिला बदर और आबकारी से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनका मानना है कि आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाना चाहिए, ताकि अनुभव के आधार पर बेहतर निर्णय लिए जा सकें। एक शहर, दो पुलिसिंग पर सवाल स्थानीय विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि एक ही शहर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था प्रशासनिक भ्रम और जवाबदेही का संकट पैदा कर सकती है। नवा रायपुर जैसे आधुनिक और विकसित क्षेत्र को ग्रामीण श्रेणी में रखना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब राजधानी, कलेक्टर और प्रशासनिक ढांचा एक है, तो पुलिस व्यवस्था भी एक समान होनी चाहिए। अन्यथा पुलिस सुधार के नाम पर यह व्यवस्था आधा-अधूरा प्रयोग साबित हो सकती है। भारत में पुलिसिंग के दो प्रमुख मॉडल भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रणालियों पर आधारित है—सुपरिटेंडेंट सिस्टम, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लागू होता है, जहां कानून-व्यवस्था के अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।वहीं कमिश्नरेट सिस्टम बड़े शहरों में लागू होता है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी दी जाती है और वे सीधे कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं।

कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी Read Post »

Chhattisgarh, Education, Political, Raipur, State, Top News
Scroll to Top