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छत्तीसगढ़ में पहली बार सामने आया दुर्लभ मामला: ब्रश करते समय फट गई गर्दन की नस, 6 घंटे की जटिल सर्जरी से बची जान

छत्तीसगढ़ की राजधानी में मेडिकल साइंस का एक अत्यंत दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां 40 वर्षीय युवक की गर्दन की प्रमुख धमनी कैरोटिड आर्टरी अचानक फट गई। हैरानी की बात यह रही कि यह घटना किसी दुर्घटना या बीमारी से नहीं, बल्कि साधारण रूप से ब्रश करते समय हल्का स्ट्रेन पड़ने से हुई। घटना के दौरान युवक को अचानक गले में तेज दर्द हुआ और गर्दन तेजी से सूजने लगी। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। परिजन उसे तुरंत मेकाहारा अस्पताल के इमरजेंसी विभाग लेकर पहुंचे। प्राथमिक जांच के बाद मरीज को हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में रेफर किया गया। जांच में सामने आई गंभीर स्थिति डॉक्टरों ने मरीज की तत्काल सीटी एंजियोग्राफी कराई, जिसमें पता चला कि उसकी दाईं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी है और उसके आसपास गुब्बारे जैसी संरचना बन गई है। इस स्थिति को कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म कहा जाता है, जिसमें कुछ ही मिनटों में मरीज की जान जा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार यह मामला स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर का है, जो पूरी दुनिया में अब तक गिने-चुने मामलों में दर्ज किया गया है। यह दुनिया का लगभग 10वां और छत्तीसगढ़ का पहला मामला बताया जा रहा है। हर पल जोखिम भरा था ऑपरेशन मरीज को बचाने के लिए डॉक्टरों ने बिना देरी किए सर्जरी का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गर्दन में अत्यधिक रक्तस्राव के कारण फटी धमनी को पहचानना था। जरा सी चूक से स्ट्रोक या ब्रेन डेड होने का खतरा बना हुआ था। करीब 6 घंटे तक चली अत्यंत जटिल सर्जरी में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की मदद से धमनी की सफल मरम्मत की गई। राहत की बात यह रही कि सर्जरी के बाद मरीज को लकवे का कोई लक्षण नहीं हुआ और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टरों की टीम ने रचा मेडिकल इतिहास इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व मुख्य सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने किया। टीम में कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर आयुषी, अंशिका, ख्याति, आकांक्षा साहू, डॉ. संजय, डॉ. ओमप्रकाश समेत नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियन शामिल रहे। सभी के समन्वित प्रयास से मरीज को नई जिंदगी मिल सकी। क्या है स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर? कैरोटिड आर्टरी गर्दन की मुख्य धमनी होती है, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाती है। सामान्यतः यह धमनी दुर्घटना, संक्रमण, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर या एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण फटती है। लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के इसका फटना मेडिकल दुनिया में बेहद दुर्लभ माना जाता है और यह जानलेवा हो सकता है।

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तीसरे बजट सत्र की तैयारी में साय सरकार, आज से मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू

छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तीसरे बजट की तैयारियों को रफ्तार दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार इस बजट के जरिए विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में वित्त विभाग ने मंत्री-स्तरीय बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। 6 से 9 जनवरी तक चलने वाली इन बैठकों की अध्यक्षता वित्त मंत्री ओपी चौधरी करेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा कर उनके विभागों के बजट प्रस्तावों और प्राथमिकताओं की समीक्षा करेंगे। पहले दिन 4 मंत्री रखेंगे विभागीय प्रस्ताव मंगलवार को पहले दिन चार मंत्री अपने-अपने विभागों के बजट प्रस्ताव वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। 📅 6 जनवरी की बैठक का कार्यक्रम 📅 7 जनवरी का शेड्यूल 📅 8 जनवरी की बैठक 8 जनवरी को उप मुख्यमंत्री अरुण साव की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण तथा नगरीय प्रशासन विभागों के बजट प्रस्तावों पर चर्चा होगी।इसके बाद दोपहर 2.30 बजे स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग और विधि-विधायी विभागों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। 📅 9 जनवरी का कार्यक्रम सरकार का उद्देश्य इन बैठकों के माध्यम से बजट को ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि राज्य के विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा दी जा सके।

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छत्तीसगढ़ की वोटर लिस्ट में फिर बढ़ेगी मतदाताओं की संख्या, 2.74 लाख से ज्यादा लोगों ने दोबारा आवेदन किया

छत्तीसगढ़ में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम पूरा होने के बाद मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जहां 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग अपने नाम दोबारा जुड़वाने के लिए सामने आ रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद प्रदेश में कुल 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 मतदाता दर्ज किए गए थे। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जिन मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हो गए थे, उनके लिए दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत अब तक 2 लाख 74 हजार से ज्यादा लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन फॉर्म भरे हैं। 45 दिन चला घर-घर सत्यापन अभियान यह विशेष अभियान 7 नवंबर से करीब 45 दिनों तक चला, जिसमें बूथ लेवल अधिकारियों ने प्रदेशभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, दोहरी प्रविष्टि वाले नाम और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाया गया। किन कारणों से हटे नाम निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए कुल 27,34,817 नामों में शामिल हैं— दावा-आपत्ति की समय-सीमा जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हैं, उन्हें चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी कर दोबारा नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। अब तक फार्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनकी जांच और स्क्रूटनी के बाद योग्य पाए गए मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। निर्वाचन आयोग का बयान निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सभी जिलों के कलेक्टरों और निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी रखा जाए। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम अवश्य जांचें। अंतिम सूची जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ में मतदाताओं की संख्या में एक बार फिर बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर: बच्चा चोरी के शक में महिला के साथ मारपीट, कॉलोनी में मचा हंगामा; पुलिस ने भीड़ से बचाया

रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत पार्वती नगर कॉलोनी में बच्चा चोरी के संदेह को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। कॉलोनी में घूम रही एक महिला पर स्थानीय लोगों ने बच्चा चोरी का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला कॉलोनी में संदिग्ध अवस्था में घूम रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उस पर शक जताया, जिसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। बिना किसी पुष्टि के लोगों ने महिला से पूछताछ शुरू की और बाद में उसके साथ हाथापाई करने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घटना के दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली सूचना मिलते ही खम्हारडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने भीड़ से महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। बच्चा चोरी की पुष्टि नहीं, जांच जारी पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक बच्चा चोरी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है कि महिला किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल थी या नहीं। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और किसी संदिग्ध स्थिति में सीधे पुलिस को सूचना दें।

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दुर्ग: पेशाब करने पर विवाद, सगनी पुन्नी मेला से लौट रहे दो युवकों पर चाकू से हमला; 13 आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मामूली बात को लेकर हुई कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। धमधा थाना क्षेत्र में सगनी पुन्नी मेला देखकर लौट रहे दो युवकों पर गांव के आउटर में चाकू से हमला कर दिया गया। इस घटना में दोनों युवक घायल हो गए। पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए 4 जनवरी को सभी 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें 11 बालिग और 2 नाबालिग शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक घायलों की हालत अब खतरे से बाहर है। मेला से लौटते वक्त हुई वारदात यह घटना 3 जनवरी की शाम करीब 5:30 बजे की है। जानकारी के अनुसार, दोनों युवक सगनी पुन्नी मेला देखकर अपने गांव लौटे थे। गांव पहुंचने के बाद घर जाने से पहले वे गांव के बाहरी हिस्से में पेशाब करने के लिए रुके। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद युवकों के एक समूह ने इस पर आपत्ति जताई और बातों-बातों में विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी मारपीट और चाकूबाजी में बदल गई। एकजुट होकर किया हमला, आरोपी मौके से फरार पुलिस के अनुसार, मौके पर मौजूद आरोपी युवक एक समूह में खड़े थे और वे नंदिनी थाना क्षेत्र के चार अलग-अलग गांवों के निवासी हैं। सभी आरोपी भी मेला देखकर लौट रहे थे। विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने मिलकर दोनों युवकों पर चाकू से वार कर दिए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां एक युवक को प्राथमिक उपचार के बाद उसी दिन छुट्टी दे दी गई, जबकि दूसरे की हालत भी अब स्थिर बताई जा रही है। दो नाबालिग समेत सभी आरोपी गिरफ्तार घटना की सूचना मिलते ही धमधा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तफ्तीश के बाद पुलिस ने 13 आरोपियों की पहचान कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग आरोपियों के खिलाफ बाल न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है।

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बिलासपुर में पुलिस का एक्शन मोड: अड्डेबाजी और नशाखोरी करने वालों पर सख्ती, चाकू के साथ युवक गिरफ्तार

बिलासपुर में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस ने असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है। गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर अड्डेबाजी, नशाखोरी और ग्रुप बनाकर हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ रविवार रात पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस ने 12 बदमाशों को खदेड़कर पकड़ा और सार्वजनिक स्थानों पर उनसे उठक-बैठक कराई, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी दी जा सके। जिलेभर में सघन अभियान, 36 से ज्यादा असामाजिक तत्व पकड़े गए पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बीते 3 से 4 दिनों में जिलेभर में चलाए गए विशेष अभियान के तहत 36 से अधिक असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें से कुछ के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं में केस दर्ज किया गया, जबकि कुछ को सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाकर सख्त हिदायत दी गई। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आम नागरिकों को सुरक्षित माहौल देने और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से की जा रही है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई सीएसपी निमितेश सिंह ने बताया कि यह अभियान एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर चलाया जा रहा है। गुंडे-बदमाशों, नशेड़ियों और समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। आने वाले दिनों में भी इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। वारदात से पहले चाकू के साथ पकड़ा गया युवक रविवार देर रात सिविल लाइन थाना पुलिस ने मगरपारा इलाके में पेट्रोलिंग के दौरान एक संदिग्ध युवक को घूमते हुए देखा। पुलिस को देखकर युवक भागने लगा, जिसके बाद थाना प्रभारी एस.आर. साहू के निर्देश पर टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। तलाशी लेने पर आरोपी अरशद खान के पास से बटनदार चाकू बरामद किया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। सूचना देने वालों की पहचान रहेगी गोपनीय पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि यदि कहीं सार्वजनिक स्थानों पर नशाखोरी, अड्डेबाजी, ग्रुप बनाकर उपद्रव या शांति भंग करने की कोशिश दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। पुलिस के अनुसार, सूचना मिलते ही कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम नंबर 9479193099, डायल 112 या सीएसपी सिविल लाइन (9479193006) पर संपर्क किया जा सकता है।

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रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत, फांसी लगाने का आरोप; जेल के बाहर परिजनों और समाज का धरना

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सुनील महानंद (30) के रूप में हुई है, जो पॉक्सो प्रकरण में 11 नवंबर 2025 से जेल में बंद था। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक की पत्नी ललिता महानंद जेल परिसर के बाहर बेहोश हो गईं। इसके बाद परिजन, समाज के लोग और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता जेल के बाहर धरने पर बैठ गए और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप परिजनों का आरोप है कि सुनील महानंद को जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि वह कई बार फोन और मुलाकात के दौरान अपनी परेशानी बता चुका था। इसी के विरोध में परिजनों और समाज के लोगों ने जेल के बाहर प्रदर्शन करते हुए जेलर पर कार्रवाई की मांग की और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कैसे हुई घटना? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:45 बजे सुनील महानंद जेल परिसर में टहलते हुए पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। वहां उसने गमछे से फंदा बनाकर पेड़ की टहनी पर फांसी लगा ली। मौके पर मौजूद जेल प्रहरी ने उसे तुरंत नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। इसके बाद उसे तत्काल मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। यह पूरी घटना जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कैदी को फांसी लगाते हुए देखा गया है, जिसके आधार पर पुलिस फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। बिना सूचना दिए भेजा गया शव? परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद बिना जानकारी दिए शव को चोरी-छिपे मॉर्चुरी भेज दिया गया। उन्हें इस घटना की सूचना काफी देर बाद दी गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें जानकारी दी जाती, तो वे मौके पर पहुंच सकते थे। उन्होंने जेल प्रशासन पर जानबूझकर सूचना देने में देरी करने का आरोप लगाया है। सामान और पैसे छीनने के आरोप मृतक के परिजनों ने बताया कि सुनील पिछले दो महीनों से जेल में बंद था और वे नियमित रूप से उससे मिलने जाते थे। सुनील ने उन्हें बताया था कि जेल में उसके कपड़े, खाने-पीने का सामान और पैसे छीन लिए जाते थे। परिजनों का दावा है कि उन्होंने उसे स्वेटर, कपड़े और खाने का सामान दिया था, जो उसे नहीं मिलता था। इसके अलावा पेटीएम के जरिए भेजी गई राशि भी उसे नहीं दी गई। जेल प्रशासन का पक्ष इस मामले पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। फिलहाल मामले ने तूल पकड़ लिया है और जेल प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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रायपुर: मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं बिहान योजना की महिलाएं, मंत्री से मुलाकात तक धरना जारी रखने का ऐलान

रायपुर में एनआरएलएम (बिहान योजना) से जुड़ी महिलाएं अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतर आईं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से राजधानी पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं राजीव गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक संबंधित विभाग के मंत्री से सीधी बातचीत नहीं होती, वे सड़क से नहीं हटेंगी। महिलाएं अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले कई घंटों से प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है और न ही नौकरी की कोई सुरक्षा दी गई है। बेहद कम मानदेय, बढ़ता आर्थिक दबाव धरने में शामिल महिलाओं ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र 1910 रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। महिलाओं का कहना है कि इतनी कम राशि में न तो परिवार का खर्च चल पाता है और न ही काम से जुड़े जरूरी खर्च पूरे हो पाते हैं। उन्होंने मांग की कि उनका मानदेय छत्तीसगढ़ शासन के न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप बढ़ाया जाए। महिलाओं ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में इसी तरह कार्यरत महिलाओं को 6000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की समान हिस्सेदारी होती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में बेहद कम मानदेय देना उनके साथ अन्याय है। निजी संसाधनों से कराया जा रहा सरकारी काम बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार ऑनलाइन कार्य कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए न तो सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराया गया है और न ही इंटरनेट खर्च दिया जाता है। महिलाएं अपने निजी मोबाइल और स्वयं के पैसे से रिचार्ज कर सरकारी काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी कैडर को सरकारी मोबाइल या मोबाइल-इंटरनेट भत्ता देने की मांग की। यात्रा और बैठक भत्ते की भी मांग प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से मीटिंग, प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के लिए बुलाया जाता है, लेकिन इसके बदले न तो यात्रा भत्ता दिया जाता है और न ही कोई मीटिंग या दैनिक भत्ता मिलता है, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। जबरन हटाने और भुगतान में देरी के आरोप महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगहों पर वर्षों से काम कर रही सक्रिय महिलाओं को जबरदस्ती काम से हटाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कई ब्लॉकों में मानदेय 5 से 6 महीने देरी से मिलता है और कई बार बिना कारण राशि काट ली जाती है। महिलाओं की मांग है कि मानदेय हर महीने समय पर और सीधे बैंक खाते में दिया जाए। नियमितीकरण और नियुक्ति पत्र की मांग प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें आज तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। उन्होंने अपने नियमितीकरण की भी मांग की है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मंत्री स्तर पर बातचीत नहीं हुई और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एक मां की आंखों से इंतज़ार खत्म नहीं हुआ

“रायपुर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक खबर… रायपुर के बिरगांव इलाके से 23 वर्षीय युवक विष्णु गोऱाई पिछले 20 दिनों से लापता हैं।जानकारी के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 की शाम करीब 8 बजे विष्णु गोऱाई घर से निकले थे,लेकिन उसके बाद से न उनका कोई पता चला है, न कोई संपर्क। विष्णु गोऱाई के पिता सुनील गोऱाई हैं।परिवार और परिजन लगातार थाने, रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में तलाश कर रहे हैं,लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। 📌 20 दिन… 480 घंटे…हर गुजरता पल परिवार की चिंता और दर्द बढ़ा रहा है। 👉 अब परिवार ने जनता से सीधी अपील की है।जो भी व्यक्ति विष्णु गोऱाई के बारे में पुख्ता जानकारी देगा,उसे ₹20,000 का इनाम देने की घोषणा की गई है। अगर आपने विष्णु गोऱाई को कहीं देखा होया उनके बारे में कोई भी जानकारी हो,तो बिना देर किए इन नंबरों पर संपर्क करें👇 📞 8109896876📞 7477228704 🙏 आपकी एक सूचनाएक बेटे को उसके घरऔर एक परिवार को उसकी खुशियाँ लौटा सकती है। 👉 ऐसी ज़मीनी, संवेदनशील और ज़रूरी खबरों के लिएजुड़े रहें News 22 Bharat के साथ।

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टीएस सिंहदेव को मिली बड़ी जिम्मेदारी, तमिलनाडु–पुडुचेरी के लिए बने कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी के चेयरपर्सन

आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस ने कई राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियों की घोषणा कर दी है। इस सूची में छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। उन्हें तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। साल 2026 में तमिलनाडु, केरल, असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए कांग्रेस संगठनात्मक तैयारियों में जुटी हुई है। उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में स्क्रीनिंग कमेटियां गठित की हैं। टीएस सिंहदेव की अहम भूमिका टीएस सिंहदेव को पार्टी ने अहम जिम्मेदारी देते हुए तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे रणनीतिक राज्यों की स्क्रीनिंग कमेटी की कमान सौंपी है। स्क्रीनिंग कमेटी का मुख्य कार्य है चुनाव से पहले उम्मीदवारों का मूल्यांकन करना और नेतृत्व को नाम सुझाना। प्रियंका गांधी को असम की कमेटी का चेयरपर्सन संगठन में और भी अहम नाम शामिल हैं। पार्टी महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को असम के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस जानकारी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। वरिष्ठ नेताओं पर भरोसा कांग्रेस का मानना है कि अनुभवी नेताओं के नेतृत्व में गठित स्क्रीनिंग कमेटियां बेहतर और मजबूत उम्मीदवार चयन में मदद करेंगी। पार्टी का फोकस आगामी विधानसभा चुनावों में संगठन को मजबूत कर रणनीतिक ढंग से मैदान में उतरने पर है।

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