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शराब घोटाला केस: जेल में बंद कवासी लखमा से मिलने पहुंचे PCC चीफ दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज शुक्रवार को शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान दीपक बैज ने लखमा की सेहत का हाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ही कवासी लखमा की आंखों की सर्जरी हुई थी। दीपक बैज की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब कथित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार जारी है और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता हैं कवासी लखमा कवासी लखमा को बस्तर अंचल के सबसे प्रभावशाली और मजबूत आदिवासी नेताओं में गिना जाता है। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2013 में हुए दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो बाल-बाल बच गए थे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कवासी लखमा को आबकारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 13 मंत्रियों में से केवल चार ही अपनी सीट बचा पाए थे, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला? छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। ED के मुताबिक, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का भंडाफोड़, 6 आरोपी गिरफ्तार; ₹37.50 लाख नकद व लग्जरी कारें जब्त

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। गंज थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 31 जनवरी 2026 की रात कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से भारी मात्रा में नकदी, मोबाइल फोन और तीन लग्जरी कारें बरामद की गई हैं। पुलिस को सूचना मिली थी कि नागोराव गली अंडरब्रिज के पास कुछ लोग महिंद्रा थार और नेक्सा एक्सएल कारों में बैठकर मोबाइल के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा चला रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दो कारों में सवार 6 लोगों को हिरासत में लिया। गिरफ्तार आरोपियों में रखब देव पाहुजा, पीयूष जैन, जितेन्द्र कुमार कृपलानी उर्फ जित्तू, दीपक अग्रवाल, कमल राघवानी और सचिन जैन शामिल हैं। तलाशी में करोड़ों की संपत्ति जब्त पुलिस तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से ₹37.50 लाख नकद, 10 मोबाइल फोन, 2 महिंद्रा थार और 1 नेक्सा एक्सएल कार बरामद की गई। जब्त संपत्ति की कुल अनुमानित कीमत करीब ₹92.50 लाख बताई जा रही है। जांच में सामने आया कि आरोपी jmdbet777.com और Classic777.com जैसी ऑनलाइन सट्टा वेबसाइटों के माध्यम से मास्टर आईडी बनाकर क्रिकेट सट्टा चला रहे थे। पूछताछ के दौरान आरोपी कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला गंज थाना पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम 2022 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 112(2) के तहत मामला दर्ज किया है। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क बड़े स्तर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल आरोपियों के मोबाइल, डिजिटल लेन-देन और संपर्कों की गहन जांच जारी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां व खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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110 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन: बिलासपुर–भूपदेवपुर चौथी रेल लाइन पर हाई-स्पीड ट्रायल सफल

बिलासपुर–झारसुगुड़ा चौथी रेल लाइन परियोजना के तहत कोतरलिया–रायगढ़–किरोड़ीमल नगर–भूपदेवपुर के बीच 26.1 किलोमीटर लंबी नई चौथी रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। शुक्रवार को इस खंड पर 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक किया गया। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) बीके मिश्रा ने इस नई लाइन का निरीक्षण कर स्पीड ट्रायल लिया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर रेल मंडल अंतर्गत नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बिलासपुर–झारसुगुड़ा रेल खंड पर लगभग 206 किलोमीटर लंबी विद्युतीकृत चौथी रेल लाइन का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। परियोजना के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में कोतरलिया से भूपदेवपुर तक नई लाइन तैयार कर ली गई है। इंटरलॉकिंग सहित सभी तकनीकी कार्य पूर्ण होने के बाद CRS बीके मिश्रा रायगढ़ पहुंचे। गुरुवार को उन्होंने नई चौथी लाइन का प्रारंभिक परीक्षण किया, जबकि शुक्रवार को विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्टेशनों के केबिन, पैनल रूम, यार्ड, इंटरलॉकिंग व्यवस्था, प्वाइंट, क्रॉसिंग, ओएचई लाइन, ब्रिज और सिग्नलिंग उपकरणों की गहन जांच की गई। इसके साथ ही मोटर ट्रॉली के माध्यम से भी पूरे खंड का निरीक्षण किया गया। बाद में ओएमएस कोच के साथ हाई-स्पीड ट्रेन चलाकर स्पीड ट्रायल लिया गया। इधर, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत बैकुंठ–उरकुरा खंड के बीच 26.40 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के निर्माण को भी रेल मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना पर लगभग 426.01 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह खंड बिलासपुर–रायपुर–नागपुर मुख्य रेल मार्ग का अहम हिस्सा है और मुंबई–हावड़ा उच्च घनत्व नेटवर्क रूट में शामिल है। नई लाइनों के शुरू होने से यात्री और मालगाड़ी संचालन को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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80 करोड़ के फर्जी बिल, 14 करोड़ की GST चोरी: DGGI ने रायपुर से कारोबारी को किया गिरफ्तार

रायपुर में वस्तु एवं सेवा कर (GST) चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की रायपुर जोनल यूनिट ने करीब 80 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस बनाकर 14 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी करने के आरोप में कारोबारी संतोष वाधवानी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को 29 जनवरी की रात लगभग 9 बजे रायपुर से हिरासत में लिया गया। DGGI की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड फर्म मेसर्स विजय लक्ष्मी ट्रेड कंपनी का संचालन किया और इसी फर्म के माध्यम से बिना किसी वास्तविक माल या सेवा की आपूर्ति किए फर्जी इनवॉइस जारी किए। इन इनवॉइस के आधार पर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ उठाया गया, जिससे सरकारी खजाने को करीब 14 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट और उन्नत डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की गई। जांच के दौरान बैंक स्टेटमेंट, ई-वे बिल डेटा और अन्य वित्तीय लेन-देन का गहन विश्लेषण किया गया, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में स्पष्ट हुआ कि इन लेन-देन के पीछे कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी। आरोपी के खिलाफ CGST अधिनियम, 2017 की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी की गई है। यह अपराध अधिनियम की धारा 132 के अंतर्गत दंडनीय है। गिरफ्तारी के बाद संतोष वाधवानी को रायपुर जिला न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में रायपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। DGGI रायपुर जोनल यूनिट ने स्पष्ट किया है कि GST चोरी और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने कारोबारियों से GST कानूनों का सख्ती से पालन करने की अपील करते हुए चेतावनी दी है कि फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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180 दिन की निगरानी के बाद DRI की बड़ी कार्रवाई: रायपुर एयरपोर्ट से नाइजीरियन ड्रग पैडलर गिरफ्तार

रायपुर में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। नाइजीरिया से कोकीन लाकर छत्तीसगढ़ में सप्लाई करने वाले एक नाइजीरियन नागरिक को रायपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान हेनरी टोकहूक्यू के रूप में हुई है, जो नवा रायपुर की एक निजी यूनिवर्सिटी में छात्र था। DRI अधिकारियों ने आरोपी के पास से 245 ग्राम कोकीन बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.50 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एजेंसी के मुताबिक आरोपी बीते छह महीने से उनकी रडार पर था और 180 दिनों की लगातार रेकी के बाद उसे रंगे हाथों पकड़ा गया। छात्रों को बनाता था निशाना, सिंडिकेट बनाकर करता था सप्लाई जांच में सामने आया है कि आरोपी सिर्फ ड्रग्स लाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने स्थानीय स्तर पर एक नेटवर्क तैयार कर लिया था। वह निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को निशाना बनाकर कोकीन की सप्लाई करता था और केवल भरोसेमंद लोगों के जरिए ही सौदा करता था। ऐसे खुला पूरा खेल DRI को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि रायपुर के कुछ निजी कॉलेजों में पढ़ने वाले विदेशी छात्र नशे के कारोबार में शामिल हैं। मार्च 2025 से एजेंसी ने ऐसे छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया और संदिग्धों की एक सूची बनाई गई। जुलाई 2025 में हेनरी टोकहूक्यू का नाम सामने आया। इसके बाद DRI ने उसके संपर्कों, कॉल पैटर्न और गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी। उसके कुछ ग्राहकों को विश्वास में लेकर एजेंसी ने नेटवर्क की जानकारी जुटाई। एयरपोर्ट पर दबोचा गया आरोपी 28 जनवरी 2026 को DRI को पुख्ता सूचना मिली कि आरोपी नाइजीरिया से ड्रग्स लेकर रायपुर पहुंचने वाला है। सूचना मिलते ही DRI ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर घेराबंदी की और रायपुर एयरपोर्ट परिसर में ही आरोपी को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके बैग से कोकीन बरामद हुई। पूछताछ में आरोपी ने अपने कुछ साथियों के नाम भी बताए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। यूनिवर्सिटी में रहकर चला रहा था नेटवर्क DRI के अनुसार, हेनरी पिछले तीन साल से नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार यूनिवर्सिटी में बीएसडब्ल्यू (बैचलर ऑफ सोशल वर्क) की पढ़ाई कर रहा था और यूनिवर्सिटी हॉस्टल में रहता था। कुछ समय पहले वह नाइजीरिया गया था और लौटते वक्त ड्रग्स लेकर आया। एजेंसी को शक है कि यह खेप रायपुर, भिलाई और संभवतः नागपुर तक सप्लाई की जानी थी। मोबाइल से मिले अहम सबूत DRI ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। फोन से चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और लेनदेन से जुड़े सबूत मिले हैं। कार्रवाई वाले दिन जिन लोगों से आरोपी संपर्क में था, उन्हें नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। प्रदेश में 100 से ज्यादा विदेशी छात्र जांच एजेंसियों के मुताबिक रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में विभिन्न विश्वविद्यालयों में 100 से अधिक विदेशी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। आरोपी के संपर्क सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं थे, बल्कि कुछ अन्य निजी संस्थानों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। 2025 में ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई साल 2025 में रायपुर पुलिस और अन्य एजेंसियों ने ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की थी। विशेष अभियानों के तहत 271 मामलों में 445 आरोपियों को गिरफ्तार कर 2.78 करोड़ रुपये से ज्यादा की नशीली सामग्री जब्त की गई थी। जब्त किए गए पदार्थों में गांजा, अफीम, ब्राउन शुगर, हेरोइन, चरस, एमडीएमए, कोकीन, नशीली गोलियां, सिरप और मैजिक मशरूम शामिल थे।

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रायपुर में लेट नाइट गश्त: पुलिस ने पकड़े 23 संदिग्ध, तलाशी में बरामद चाकू और तलवार

रायपुर: राजधानी में सुरक्षा कड़ी करने के लिए पुलिस ने देर रात विशेष अभियान चलाया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देश पर शहर के सभी थाना क्षेत्रों में रात्रि गश्त बढ़ाई गई, ताकि अपराध को होने से पहले ही रोका जा सके। 28-29 जनवरी की रात अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (वेस्ट जोन) राहुल देव शर्मा और सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली दीपक मिश्रा के नेतृत्व में विभिन्न इलाकों में गश्त की गई। इस दौरान थाना प्रभारियों और पुलिस टीमों ने संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की। 23 संदिग्ध पकड़े गए चेक पोस्ट और सघन जांच पुलिस अधिकारियों ने कहा कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए रात्रि गश्त और सघन जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।

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छत्तीसगढ़ में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के नियम बदले, एक साल बाद मजिस्ट्रेट के पास आवेदन अनिवार्य

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब यदि प्रमाण पत्र बनवाने में एक साल से अधिक समय बीत गया हो, तो आवेदन न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास करना होगा। मजिस्ट्रेट जांच के बाद आदेश पारित करेंगे, फिर उप-रजिस्ट्रार प्रमाण पत्र जारी करेगा। पहले तक यह जिम्मेदारी कलेक्टर अधिकृत अधिकारी के पास थी, जो सीधे प्रमाण पत्र जारी करता था। अब नए नियमों के तहत गोद लिए गए बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र और मृत जन्म प्रमाण पत्र भी जारी किया जा सकेगा। नए नियमों के मुख्य बिंदु प्रमाण पत्र जारी करने की समय सीमा छत्तीसगढ़ सरकार ने यह नियम 2026 के जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम के तहत बनाए हैं। इसमें गर्भावधि की न्यूनतम अवधि 28 सप्ताह तय की गई है।

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CSEB में नए बिजली कनेक्शन के नाम पर साइबर ठगी, उपभोक्ताओं को कंपनी ने किया सतर्क

रायपुर: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं को साइबर ठगी के प्रति सावधान किया है। हाल ही में, कंपनी के नाम पर व्हाट्सएप के जरिए नए बिजली कनेक्शन का भुगतान करने और APK फाइल भेजने के मामले सामने आए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नए कनेक्शन या किसी भी भुगतान के लिए वह कभी भी व्हाट्सएप पर APK फाइल नहीं भेजती और न ही 10 अंकों वाले मोबाइल नंबर से कोई लिंक या संदेश भेजती है। ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश को डाउनलोड या क्लिक न करने की सलाह दी गई है। साइबर ठगी के तरीके कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ऊर्जा एवं आईटी) वी.के. साय ने बताया कि कुछ जिलों में उपभोक्ताओं को नकली APK फाइल भेजी गई, जिसे डाउनलोड करने के बाद मोबाइल हैक हो गया और बैंक खातों से पैसे चोरी हो गए। ऐसे मामलों की शिकायतें पुलिस में दर्ज कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी बिजली कनेक्शन काटने या नया कनेक्शन देने के नाम पर उपभोक्ताओं को ठगने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए, बिजली से संबंधित भुगतान केवल निर्धारित और अधिकृत माध्यमों से ही करें। आधिकारिक संपर्क और सुरक्षा उपाय CSPDCL ने बताया कि वह संदेश भेजने के लिए केवल CSPDCL-S सेंडर आईडी का उपयोग करती है। भुगतान की सुविधा केवल संबंधित बिजली कार्यालय, ATP केंद्र, Mor Bijli App या कंपनी की अधिकृत वेबसाइट पर उपलब्ध है। संपर्क और जानकारी के लिए उपभोक्ता केंद्रीकृत कॉल सेंटर 1912 या नजदीकी वितरण केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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शंकराचार्य निश्चलानंद बोले- तामझाम और अव्यवस्था के कारण रोके गए अविमुक्तेश्वरानंद, हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं

दुर्ग: शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत दुर्ग पहुंचे और यहां उन्होंने गोवर्धन मठ, पुरी के पीठाधीश्वर शंकराचार्य के बारे में सफाई दी। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया, बल्कि तामझाम और अव्यवस्था के चलते प्रशासन ने रोक लगाई थी। स्वामी निश्चलानंद ने जोर देकर कहा कि मामले को गलत तरीके से पेश किया गया। उनका कहना था कि हिंदू राष्ट्र किसी के विरोध में नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म शांति, सह-अस्तित्व और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देता है। दुर्ग में हिंदू राष्ट्र अभियान और प्रवचन स्वामी निश्चलानंद ने बताया कि हिंदू राष्ट्र अभियान के तीसरे चरण के तहत वे दुर्ग आए हैं। यहां वे भक्तों से मिलेंगे और आध्यात्मिक ज्ञान पर प्रवचन देंगे। यह कार्यक्रम दुर्ग जिले के अंडा गांव में आयोजित किया गया। अविमुक्तेश्वरानंद का प्रयागराज माघ मेला छोड़ना स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला बीच में ही छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए। उन्होंने कहा कि “मन इतना व्यथित है कि बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं। श्रद्धा के साथ आए थे, लेकिन घटना ने पूरी उम्मीद तोड़ दी।” उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित तरीके से पालकी में स्नान कराने का प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि दिल में दुख और गुस्सा होने पर पवित्र जल भी शांति नहीं दे सकता। अब उनका मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है, जहां वकील गौरव द्विवेदी ने CBI जांच की मांग करते हुए चीफ जस्टिस को लेटर पिटीशन भेजा है। विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी को पुलिस ने रोक दिया था। शिष्य पालकी ले गए और पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया, और एक साधु को चौकी में पीटा गया। शंकराचार्य नाराज हो गए और अपने समर्थकों को छुड़ाने पर अड़े रहे। पालकी को संगम से 1 किमी दूर तक ले जाया गया और यह क्षत्रप टूट गया। इसके बाद शंकराचार्य संगम के तट पर धरने पर बैठे रहे और स्नान नहीं कर पाए। प्रशासन और संत समाज की प्रतिक्रिया इस विवाद ने संत समाज को दो हिस्सों में बाँट दिया। हालांकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में रहे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। इस विवाद के बीच बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया और 24 घंटे बाद अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने भी इस्तीफा दे दिया।

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गलत कार्रवाई के आरोपों में स्मृतिनगर चौकी प्रभारी लाइन अटैच, हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद एसपी की कार्रवाई

दुर्ग जिले के स्मृतिनगर चौकी के प्रभारी उप निरीक्षक गुरविंदर सिंह संधु को बुधवार को उनके पद से हटाकर रक्षित केंद्र भेज दिया गया है। यह प्रशासनिक कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उनके आचरण की जांच कराने के निर्देश पुलिस महानिदेशक (DGP) को दिए थे। गुरविंदर सिंह पर दो व्यापारियों के खिलाफ गलत और मनमानी कार्रवाई करने के गंभीर आरोप लगे थे। इन्हीं मामलों के बाद पुलिस विभाग ने चौकी प्रभारी बदलने का फैसला लिया है। उनकी जगह भिलाई भट्टी थाना प्रभारी राजेश कुमार साहू को स्मृतिनगर चौकी का नया प्रभारी बनाया गया है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी वाला पहला मामला पहला मामला एक स्थानीय व्यवसायी सुजीत साव से जुड़ा है। इस केस में हाईकोर्ट ने चौकी प्रभारी के आचरण पर गंभीर सवाल उठाए थे। याचिकाकर्ता के अनुसार, महिला से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में गिरफ्तारी के बाद व्यवसायी को चौकी लाकर पीटा गया और फिर हथकड़ी पहनाकर सड़कों पर जुलूस निकाला गया। उसे रात करीब 9 बजे जेल दाखिल कराया गया। कोर्ट ने पाया कि इस पूरे मामले में एसआई गुरविंदर सिंह संधु की कार्रवाई नियमों के विपरीत थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने DGP को निर्देश दिया था कि उनके आचरण की उचित स्तर पर जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। दूसरा मामला: होटल कारोबारी से मारपीट, बिना FIR जेल दूसरा चर्चित मामला भिलाई के एक होटल कारोबारी से जुड़ा है। आरोप है कि जांच के नाम पर पुलिस ने होटल में दबिश दी और कारोबारी को उसकी मां के सामने ही पीटा। इसके बाद बिना एफआईआर दर्ज किए सरकारी काम में बाधा का आरोप लगाकर उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को पीड़ित को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के बाद यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूली जा सकती है। साथ ही गृह विभाग के सचिव को निर्देश दिए गए कि पुलिसकर्मियों को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद कार्रवाई इन दोनों मामलों में हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और जांच के आदेशों के बाद स्मृतिनगर चौकी प्रभारी को हटाया जाना महज संयोग नहीं माना जा रहा। पुलिस महकमे में इसे जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल ने आदेश जारी कर गुरविंदर सिंह संधु को लाइन अटैच कर दिया है। पुलिस विभाग में फेरबदल जारी आदेश के अनुसार—

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