April 2026

भिलाई के सेक्टर-7 में पीलिया का प्रकोप: 15 नए मरीज मिले, 2 बच्चों की हालत गंभीर, पानी सप्लाई की जांच तेज

Bhilai के सेक्टर-7 इलाके में पीलिया फैल गया है। सड़क 37-38 के आसपास रहने वाले कई लोग, खासकर बच्चे, इस बीमारी की चपेट में आ गए हैं। इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को सर्वे कर 15 नए मरीजों की पहचान की है। इनमें 2 बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी भी कुछ मरीजों का इलाज चल रहा है। टीम ने कुल 110 घरों में जाकर जांच की। साथ ही पानी के सैंपल भी लिए गए हैं, जिन्हें लैब में जांच के लिए भेजा गया है। Bhilai Steel Plant और नगर निगम की टीम ने भी पानी की जांच की है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे उबला हुआ पानी पीएं, बाहर का खाना न खाएं और साफ-सफाई का ध्यान रखें। बीमारी के कारण पुरानी पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने की आशंका जताई गई है। इसी वजह से पुराने पाइप बदलने का काम शुरू कर दिया गया है और टैंकर से पानी की सप्लाई की जा रही है। अब तक इलाके में कुल करीब 25 मरीज सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार पीलिया गंदे पानी और दूषित भोजन से फैलता है, इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है।

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बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद गोलीकांड के आरोपियों का वीडियो वायरल: मुलाकात के दौरान रील बनाई, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

Bilaspur सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मस्तूरी गोलीकांड के आरोपी जेल में रहते हुए भी सोशल मीडिया पर एक्टिव नजर आए। उनके रिश्तेदार और दोस्त मुलाकात के दौरान मोबाइल फोन ले जाकर वीडियो बनाते दिखे, जो बाद में इंस्टाग्राम पर वायरल हो गया। वीडियो में आरोपियों को एक गाने के साथ दिखाया गया है, जिसमें “सीधा ठोक दू शहर में जो दादा बनता…” जैसे बोल शामिल हैं। यह वीडियो कथित तौर पर जेल के मुलाकाती कक्ष में बनाया गया है। मामला मस्तूरी क्षेत्र की उस फायरिंग घटना से जुड़ा है, जिसमें पुरानी रंजिश और वर्चस्व को लेकर गोलीबारी हुई थी। इस घटना में कई लोग शामिल थे और पुलिस ने अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इनमें एक नाबालिग को बाल संरक्षण गृह में रखा गया है। आरोपियों का यह वीडियो सोशल मीडिया पर एक इंस्टाग्राम आईडी से अपलोड किया गया, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब बनाया गया था। इसी अकाउंट से पहले भी गैंग से जुड़े वीडियो पोस्ट किए गए थे। इस घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि जेल में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद मुलाकात के दौरान वीडियो बनना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है। जेल प्रशासन ने कहा है कि इस मामले की जांच की जा रही है और वीडियो बनाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। पुलिस के अनुसार इस मामले में दो आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

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रायपुर में पुलिस का सख्त एक्शन: अड्डेबाजों, वारंटियों और अवैध हथियार रखने वालों पर बड़ी कार्रवाई, 10 आरोपी जेल भेजे

Raipur में पुलिस ने गुरुवार शाम से देर रात तक बड़ा चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान कोतवाली डिवीजन के अंतर्गत कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा और गंज थाना क्षेत्रों में पुलिस ने सड़कों पर उतरकर संदिग्ध लोगों की जांच की। पुलिस ने अड्डेबाजी करने वाले, नशा करने वाले, वारंटियों और अवैध हथियार रखने वालों पर सख्त कार्रवाई की। कई जगहों पर शराब दुकानों के आसपास और सुनसान इलाकों में जांच की गई। इस अभियान में अड्डेबाजी और नशाखोरी में शामिल 8 लोगों पर कार्रवाई की गई। सभी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से 7 लोगों को जेल भेज दिया गया। इसके अलावा पुलिस ने 2 फरार वारंटियों को भी गिरफ्तार किया। साथ ही 8 जमानती वारंट और 7 गिरफ्तारी वारंट भी पूरे किए गए। चेकिंग के दौरान गंज थाना पुलिस ने तेलघानी नाका चौक के पास एक युवक को पकड़ा, जिसके पास से एक अवैध चाकू मिला। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने ई-रिक्शा और अन्य वाहनों की भी जांच की। अधिकारियों ने कहा कि शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी

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दुर्ग में 5 साल की बच्ची के साथ दर्दनाक घटना: चॉकलेट लेने गई बच्ची का अपहरण, रेप के बाद बोरे में फेंका, आरोपी गिरफ्तार

Durg जिले के उतई इलाके में एक बहुत ही शर्मनाक घटना हुई है। यहां एक 5 साल की मासूम बच्ची का अपहरण कर उसके साथ गलत काम किया गया। बच्ची स्कूल से घर आने के बाद पास की दुकान पर चॉकलेट लेने गई थी। उसी समय आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया। आरोपी उसी मोहल्ले का रहने वाला है और बच्ची उसे पहले से जानती थी। आरोपी ने बच्ची के साथ गलत काम किया और फिर उसे मारने की कोशिश की। उसने बच्ची के मुंह को कपड़े से बांधा और उसे बोरे में डालकर घर के पीछे कुएं के पास फेंक दिया। कुछ घंटों बाद गांव के लोगों को एक बोरा हिलता हुआ दिखा। जब उन्होंने बोरा खोला तो उसमें बच्ची मिली। बच्ची बहुत डरी हुई थी और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है और उसकी हालत अब ठीक बताई जा रही है। इस घटना की खबर फैलते ही गांव के लोग गुस्से में आ गए और थाने पहुंच गए। लोगों ने आरोपी को सख्त सजा देने की मांग की। पुलिस ने आरोपी धनेश्वर साहू को पकड़ लिया है। जांच में पता चला है कि बच्ची के साथ गलत काम हुआ है। पुलिस ने उसके घर से कुछ सबूत भी बरामद किए हैं। पुलिस ने मामला POCSO Act के तहत दर्ज किया है। आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजा जाएगा ताकि जल्दी सजा मिल सके।

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दुर्ग में 40 साल पुराना मुआवजा विवाद: जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सैकड़ों किसानों का प्रदर्शन, मुआवजा या जमीन वापसी की मांग

Durg जिले के धमधा ब्लॉक के परसकोल और खैरझीटी गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीण अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर एकत्रित हुए थे और किसान बंधु संगठन के नेतृत्व में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का मुख्य कारण वर्ष 1983-84 में गोरपा नहर निर्माण के लिए की गई जमीन अधिग्रहण की लंबित मुआवजा राशि है। किसानों का कहना है कि करीब 17 किसानों की जमीन अधिग्रहित किए 40 से 45 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं और जनदर्शन सहित विभिन्न मंचों पर आवेदन दे चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। जनवरी 2026 में कलेक्टर से मुलाकात के दौरान भी मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है। किसानों ने प्रशासन से साफ मांग की है कि या तो उन्हें उनकी जमीन का वर्तमान बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा दिया जाए या फिर उनकी जमीन वापस की जाए। इसके साथ ही वर्षों तक जमीन के उपयोग का किराया और क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मुआवजा न मिलने के कारण वे अपनी जमीन का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और खाता बंटवारे की प्रक्रिया भी अटकी हुई है, जिससे परिवारों में विवाद की स्थिति बन रही है। ग्रामीण कमल नारायण सुपंथक ने बताया कि जमीन अधिग्रहण के बाद से न तो खेती हो पा रही है और न ही कोई लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि चार दशक बीत जाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा ग्रामीणों ने खैरझीटी गांव के जर्जर प्राथमिक स्कूल भवन की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों से बच्चे पंचायत भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने जल्द नया स्कूल भवन बनाने की मांग की है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। बाद में तहसीलदार ने ग्रामीणों से चर्चा कर कलेक्टर से मुलाकात का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। प्रशासन ने मामले के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है।

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छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री का नया रिकॉर्ड: 4 महीने में 3 लाख लोगों को 650 करोड़ की छूट, अब हर साल नहीं बदलेगी गाइडलाइन

Chhattisgarh में पंजीयन विभाग ने इस बार नया रिकॉर्ड बनाया है। राज्य गठन के बाद पहली बार किसी एक वित्तीय वर्ष में रजिस्ट्री से मिलने वाला राजस्व 3000 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया है। खास बात यह है कि कलेक्टर गाइडलाइन में 30 प्रतिशत तक की छूट देने के बावजूद यह उपलब्धि हासिल हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को कुल 3036.85 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 5 प्रतिशत अधिक है। दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच लागू छूट का सीधा फायदा आम लोगों को मिला। इस दौरान करीब 3 लाख लोगों ने रजिस्ट्री कराई, जिससे उन्हें लगभग 650 करोड़ रुपए की राहत मिली। सरकार को छूट देने के बावजूद आय में वृद्धि दर्ज की गई है। अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह आंकड़ा 5000 करोड़ रुपए के पार जा सकता है। नई व्यवस्था के तहत अब कलेक्टर गाइडलाइन हर साल जारी नहीं की जाएगी। इसे फ्लोटिंग सिस्टम में बदल दिया गया है, जिससे जमीन की कीमतों में समय-समय पर बदलाव संभव होगा। अब किसी क्षेत्र में विकास होने पर वहां के राजस्व अधिकारी और पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम, कलेक्टर को जमीन की कीमत बढ़ाने का प्रस्ताव भेज सकते हैं। पहले हर साल 1 अप्रैल को ही नई गाइडलाइन जारी होती थी, लेकिन अब साल के किसी भी समय सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जमीन की कीमतों में संशोधन किया जा सकेगा। राज्यभर में अलग-अलग सेक्टर में दी गई छूट का भी बड़ा असर देखने को मिला है। हेक्टेयर दर से रजिस्ट्री कराने पर करीब 300 करोड़ रुपए, सरकारी दर और बाजार मूल्य के अंतर पर 160 करोड़ रुपए और वसीयत व अन्य शुल्कों में लगभग 190 करोड़ रुपए की राहत दी गई है। सरकार के अनुसार, आने वाले समय में महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री कराने पर 50 प्रतिशत छूट और सेस खत्म करने जैसे फैसलों से लोगों को और अधिक लाभ मिलेगा। इसके साथ ही रजिस्ट्री प्रक्रिया में मौजूद कई खामियों को भी दूर किया गया है।

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रायपुर में अंतरराज्यीय महिला चेन स्नेचिंग गैंग का खुलासा: लग्जरी कार में घूमकर करती थीं वारदात, 8 आरोपी गिरफ्तार

राजधानी Raipur में चेन स्नेचिंग की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक अंतरराज्यीय महिला गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह लग्जरी कार में घूमकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में महिलाओं को निशाना बनाता था। पुलिस ने इस मामले में कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 7 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। सभी आरोपी Indore के रहने वाले बताए जा रहे हैं। ये लोग अलग-अलग राज्यों में जाकर वारदात को अंजाम देते थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब डी.डी. नगर थाना क्षेत्र के चंगोराभाठा बाजार में 66 वर्षीय महिला से सोने की चेन छीनी गई। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में कुछ संदिग्ध महिलाएं घटना के दौरान आसपास मंडराती नजर आईं। तकनीकी जांच और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस को जानकारी मिली कि संदिग्ध वाहन भाठागांव बस स्टैंड के पास मौजूद है। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर इनोवा कार को रोका, जिसमें सभी आरोपी सवार थे। पूछताछ में पहले वे पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करते रहे, लेकिन बाद में सबूतों के आधार पर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह रायपुर के कई थाना क्षेत्रों में एक दर्जन से ज्यादा चेन स्नेचिंग की वारदातों को अंजाम दे चुका है। इसके अलावा Gujarat, Rajasthan, Maharashtra और Chhattisgarh के अलग-अलग शहरों में भी इस गिरोह की सक्रियता सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकद राशि, सोने की चेन, एक कटर, मोबाइल फोन और एक इनोवा कार जब्त की है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 11.30 लाख रुपए बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने चोरी की गई चेन बेचकर ही लग्जरी वाहन खरीदा था। फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है और अन्य वारदातों से जुड़े लिंक की भी जांच जारी है।

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छत्तीसगढ़ में स्पीड पर सख्ती: तेज गाड़ी चलाते ही घर पहुंचेगा चालान, 5 जिलों में लेडार कैमरे शुरू

छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों को नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार तकनीक से चलने वाले स्पीड कैमरों की शुरुआत की है। अब निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज वाहन चलाने पर सीधे वाहन मालिक के घर ई-चालान भेजा जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत से 7 आधुनिक कैमरे लगाए गए हैं। इन्हें रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी जिलों के प्रमुख और व्यस्त मार्गों पर स्थापित किया गया है। रायपुर में मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र में कैमरे लगाए गए हैं। वहीं अन्य जिलों में भी ऐसे स्थान चुने गए हैं जहां ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है और दुर्घटनाएं अधिक होती हैं। ये कैमरे वाई-फाई से जुड़े हुए हैं और परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर से सीधे कनेक्ट रहते हैं। करीब 100 मीटर की दूरी तक ये वाहनों की गति को सटीक रूप से माप सकते हैं। दो लेन की सड़कों पर भी ये एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर सकते हैं और उनकी जानकारी रिकॉर्ड कर लेते हैं। लेडार आधारित यह तकनीक प्रकाश किरणों के माध्यम से वाहन की स्पीड और दूरी का आकलन करती है। यदि कोई वाहन तय सीमा से तेज चलता है, तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद स्वतः ई-चालान तैयार होकर वाहन मालिक को व्हाट्सएप और ईमेल के जरिए भेज दिया जाता है। इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी दी गई है, जिससे रात के समय भी साफ निगरानी संभव है। खराब मौसम में भी ये कैमरे प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। फिलहाल इन कैमरों की टेस्टिंग चल रही है। परिवहन विभाग और पुलिस की संयुक्त निगरानी में जल्द ही इन्हें पूरी तरह से लागू किया जाएगा। शुरुआती चरण में लोगों को जागरूक किया जाएगा, उसके बाद नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और ट्रैफिक नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आने वाले समय में इस व्यवस्था को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है।

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अंबिकापुर में दिल दहला देने वाली वारदात: अफेयर के शक में महिला से दुष्कर्म के बाद बेरहमी से हत्या, आरोपी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक बेहद क्रूर हत्या का मामला सामने आया है, जहां अवैध संबंध के शक में एक व्यक्ति ने अपनी महिला साथी के साथ पहले दुष्कर्म किया और फिर उसे बेरहमी से मार डाला। आरोपी ने पत्थर से महिला के सिर और सीने पर कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि महिला के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। उसकी 12 पसलियां टूटी हुई थीं, फेफड़े और दिल को गहरा नुकसान पहुंचा था और सिर की तीन हड्डियां भी टूटी थीं। इतना ही नहीं, महिला के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए आरोपी ने उसके प्राइवेट पार्ट में प्लास्टिक की बोतल भी डाल दी थी। घटना 3 अप्रैल की सुबह कोतवाली थाना क्षेत्र में महामाया प्रवेश द्वार के पास रिंग रोड किनारे एक झोपड़ीनुमा मटन दुकान के पास सामने आई, जहां महिला का खून से लथपथ शव मिला था। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गया था। करीब 8 दिन बाद पुलिस ने आरोपी को चिरमिरी से गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि वह ट्रेन से नागपुर हाल्ट तक गया और फिर चिरमिरी पहुंचकर एक रिश्तेदार के यहां छिप गया था, जहां वह ईंट भट्ठे में काम कर रहा था। संदिग्ध स्थिति में घूमते हुए पुलिस ने उसे पकड़ा, जिसके बाद उसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसका महिला के साथ करीब 6 साल से संबंध था और दोनों साथ में कबाड़ बीनने का काम करते थे। उसे शक था कि महिला का किसी अन्य व्यक्ति से संबंध है, जिसको लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ और उसने गुस्से में इस वारदात को अंजाम दे दिया। पुलिस ने आरोपी को अंबिकापुर लाकर घटनास्थल पर क्राइम सीन का री-क्रिएशन भी कराया। वहीं, महिला के परिजनों ने आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की है और फांसी की सजा की मांग की है। जांच में यह भी सामने आया कि महिला के पति की करीब 10 साल पहले मौत हो चुकी थी और वह किराए के घर में रहती थी। उसका एक बेटा है, लेकिन वह मां के जीवन से अलग रहता था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 35 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था और कई टीमें लगाई गई थीं। आखिरकार पुलिस ने आरोपी को पकड़कर पूरे मामले का खुलासा कर दिया है।

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गुरुग्राम में हड़ताली कर्मचारियों पर लाठीचार्ज, 20 घायल; बवाल में पुलिस वाहन फूंके

हरियाणा के गुरुग्राम के मानेसर इलाके में हड़ताली कर्मचारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली। धारा 163 लागू होने के बावजूद हजारों की संख्या में कर्मचारी इकट्ठा हो गए, जिसके बाद उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान भगदड़ मच गई और 20 से अधिक कर्मचारी घायल हो गए, जिनमें एक के सिर पर गंभीर चोट आई है। घटना के दौरान एक महिला बेहोश हो गई। इससे नाराज कर्मचारियों ने पुलिस की एक बाइक को आग के हवाले कर दिया और एक वाहन पर पथराव किया, जिससे उसके शीशे टूट गए। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पुलिसकर्मी की लाठी छीनने की कोशिश भी की, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। बताया जा रहा है कि हाल ही में एक कंपनी में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल शुरू हुई थी, जिसकी चिंगारी अन्य कंपनियों तक फैल गई। हालांकि एक कंपनी में समझौता हो गया, लेकिन कई अन्य कंपनियों के कर्मचारी अब भी हड़ताल पर हैं। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान, सुरक्षा और स्थायी नौकरी जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में पहले ही धारा 163 लागू कर धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारी नहीं माने, जिसके कारण स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। इस बीच जिला प्रशासन ने बताया कि सरकार ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की है, जो 1 अप्रैल से लागू होगी। इसके तहत अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के वेतन में लगभग 35 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है।

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