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रायपुर में अग्निवीर भर्ती शुरू: 1 अप्रैल 2026 तक भरें ऑनलाइन फॉर्म

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी 13 फरवरी 2026 से आवेदन कर सकते हैं, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 1 अप्रैल 2026 तय की गई है। ऐसे में युवाओं को सलाह दी गई है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करते हुए जल्द से जल्द अपना फॉर्म भर लें। इस भर्ती के लिए 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष तक के युवा पात्र हैं। शैक्षणिक योग्यता के रूप में 8वीं पास से लेकर स्नातक और डिप्लोमा धारक उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में युवाओं को सेना में शामिल होने का अवसर मिल रहा है। रायपुर जिले में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देश पर अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए विशेष हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। ये हेल्प डेस्क रोजगार कार्यालय, नगरीय निकाय, पॉलिटेक्निक कॉलेज, शासकीय महाविद्यालय, आईटीआई, जनपद पंचायत और नगर पंचायतों में संचालित किए जा रहे हैं, जहां आवेदन से जुड़ी जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध है। यदि किसी अभ्यर्थी को ऑनलाइन आवेदन में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो वह रोजगार कार्यालय रायपुर में स्थापित हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकता है। यहां सेना भर्ती से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और तकनीकी सहायता दी जा रही है।

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छत्तीसगढ़ में IPS प्रमोशन में देरी: 23 साल बाद मिल रहा पद, देश में 19वें स्थान पर राज्य

छत्तीसगढ़ में पुलिस अधिकारियों को भारतीय पुलिस सेवा में प्रमोशन मिलने में काफी देरी हो रही है। स्थिति यह है कि वर्ष 2002 बैच के अधिकारियों को लगभग 23 साल की सेवा के बाद अब जाकर IPS पदोन्नति दी गई है, जिससे राज्य इस मामले में देश में 19वें स्थान पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, कर्नाटक, गुजरात, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और सिक्किम जैसे राज्यों में बाद के बैच के अधिकारियों को भी पहले ही IPS प्रमोशन मिल चुका है। इससे साफ है कि अन्य राज्यों में प्रमोशन प्रक्रिया ज्यादा तेज है। इस देरी को लेकर राज्य के पुलिस अधिकारियों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कैडर रिव्यू कराने और IPS पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य में कम से कम 60 नए IPS पद बढ़ाए जाने चाहिए ताकि प्रमोशन प्रक्रिया तेज हो सके। राज्य में कई अहम पद अब भी स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं। रायपुर में कमिश्नर और पांच DCP पद मंजूर नहीं हुए हैं। वहीं नए जिले मोहला-मानपुर और सारंगढ़-बिलाईगढ़ में भी IPS स्तर के SP पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। कैडर रिव्यू की प्रक्रिया भी समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। नियम के अनुसार हर पांच साल में यह प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन पिछले 25 साल में केवल चार बार ही कैडर रिव्यू हुआ है। वर्ष 2017 में 22 पदों के लिए प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें से सिर्फ 11 पदों को ही मंजूरी मिली। जहां पुलिस विभाग में प्रमोशन की गति धीमी है, वहीं अन्य सेवाओं में स्थिति बेहतर है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को करीब 13 साल में ही प्रमोशन मिल रहा है। प्रमोशन में देरी के पीछे विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक का देर से होना, पदों की कमी और कैडर रिव्यू में देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह अक्सर जनवरी-फरवरी तक खिंच जाती है।

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अबूझमाड़ बदल रहा है: जहां कभी था नक्सलियों का खौफ, अब बन रही सड़क और लौट रहे लोग

कभी ‘नो-गो एरिया’, अब खुल रहा रास्ता अबूझमाड़, जो कभी नक्सलियों का गढ़ माना जाता था, अब तेजी से बदल रहा है। नारायणपुर से करीब 50 किमी दूर इस इलाके में अब पहली बार सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ है। जहां पहले नक्सलियों के बैरिकेड लगे होते थे और दिन में भी लोगों का आना-जाना मुश्किल था, अब वहां सुरक्षा बलों की मौजूदगी में विकास कार्य जारी हैं। सड़क के साथ बदलती जिंदगी अबूझमाड़ के अंदर क्रूसनार, बासिंघ, सोनपुर, ढोढ़रीबेड़ा, मसपुर और होरादी जैसे गांवों को जोड़ते हुए सड़क बनाई जा रही है। यह सड़क आगे महाराष्ट्र तक कनेक्ट करेगी। रास्ते में कई पुलिस कैंप बनाए गए हैं और सड़क किनारे अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का निर्माण भी शुरू हो चुका है। लोगों की जुबानी पुराने हालात स्थानीय महिला सुकमती मेटामी बताती हैं कि पहले यहां हालात बेहद डरावने थे। अब गांव में अस्पताल बन रहा है और बस सेवा भी शुरू हो चुकी है, जिससे लोगों को राहत मिल रही है। अनाज तक छीन लेते थे नक्सली गांव के निवासी बताते हैं कि नक्सली पहले से सूचना देकर अनाज इकट्ठा करने को कहते थे।चाहे फसल हो या न हो, गांववालों को अपना पेट काटकर भी उन्हें अनाज देना पड़ता था। अगर कोई शहर चला जाता, तो उसे सजा दी जाती थी। कई लोग डर के कारण गांव छोड़कर चले गए थे। आत्मसमर्पण कर बदल रहे हालात गांव में सुरक्षा बलों के साथ मौजूद अनथ कवची जैसे लोग भी हैं, जो पहले नक्सली थे और अब आत्मसमर्पण कर चुके हैं।वे अब सुरक्षा बलों की मदद कर रहे हैं और बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ अभियान में शामिल हैं। बस्तर में तेजी से घट रहा नक्सल प्रभाव बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान ने बड़ी सफलता हासिल की है। विजय शर्मा के अनुसार: विकास बना सबसे बड़ा हथियार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय लोग अब मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।लगातार ऑपरेशन, आत्मसमर्पण और विकास कार्यों ने मिलकर हालात बदले हैं। एक तस्वीर, बड़ा संदेश हाल ही में विजय शर्मा की अबूझमाड़ में मॉर्निंग वॉक की तस्वीर सामने आई।यह सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि यह संकेत है कि जहां कभी गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहां अब शांति और सामान्य जीवन लौट रहा है।

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प्रदूषण पर सख्ती: रात में सिस्टम बंद करने वाले 30 उद्योग सील, बिजली कनेक्शन काटे

प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर बड़ा एक्शन राजधानी रायपुर में हवा को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। जनवरी से अब तक उरला, सिलतरा और धरसींवा क्षेत्र के 30 उद्योगों को पूरी तरह बंद कर उनकी बिजली सप्लाई काट दी गई है। इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी पर्यावरणीय कार्रवाई माना जा रहा है। रात में बंद कर देते थे प्रदूषण कंट्रोल सिस्टम जांच में सामने आया कि कई उद्योग मुनाफा बढ़ाने के लिए रात के समय ईएसपी (इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसीपिटेटर) और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद कर देते थे। बार-बार चेतावनी और नोटिस के बावजूद सुधार नहीं होने पर मंडल ने सीधे क्लोजर ऑर्डर जारी कर पावर कट कर दिया। बड़े उद्योग भी कार्रवाई की जद में कार्रवाई के दायरे में कई बड़े नाम भी आए हैं, जिनमें जैसे उद्योग शामिल हैं। वहीं Sharda Energy and Minerals Limited के खिलाफ बिना अनुमति फ्लाई ऐश डंपिंग का मामला भी दर्ज किया गया है। कार्रवाई का पूरा रिपोर्ट कार्ड भारी जुर्माने का प्रावधान नियमों के अनुसार बिना अनुमति राखड़ फेंकने पर 5 लाख से 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि उद्योग चेतावनी के बाद भी प्रदूषण नियंत्रण उपकरण चालू नहीं करते, तो जल और वायु अधिनियम के तहत उनकी बिजली काटने की कार्रवाई की जाती है। सुधार के बाद ही मिलेगा संचालन की अनुमति मंडल ने साफ कर दिया है कि अब “पहले उत्पादन, बाद में सुधार” की नीति नहीं चलेगी।उद्योगों को पहले सभी पर्यावरण मानकों का पालन करना होगा, तभी संचालन की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी का बयान मंडल के सदस्य सचिव राजू अगासीमानी के अनुसार, नोटिस देने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही सिस्टम चालू किए गए, इसलिए सख्त कार्रवाई की गई है।

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नारनौल के सोमेश को बड़ी जिम्मेदारी: खेलो इंडिया में बने शूटिंग डायरेक्टर

30 मार्च से रायपुर में होने वाले जनजातीय खेलों में निभाएंगे अहम भूमिका, युवाओं को देंगे प्रशिक्षण खेलो इंडिया में मिला अहम पद खेलो इंडिया जनजातीय खेल का आयोजन 30 मार्च से 3 अप्रैल तक रायपुर में होने जा रहा है।इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए जारी 25 सदस्यीय टीम में नारनौल के तीरंदाज सोमेश को शूटिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। हरियाणा से इकलौते प्रतिनिधि इस सूची में हरियाणा से केवल सोमेश को ही यह जिम्मेदारी दी गई है, जिससे उनके क्षेत्र में खुशी का माहौल है।परिवार, मित्र और खेल प्रेमियों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया है। पहले भी निभा चुके अहम जिम्मेदारियां सोमेश इससे पहले कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुके हैं।हालांकि, खेलो इंडिया जैसे बड़े मंच पर शूटिंग डायरेक्टर बनना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण सोमेश अपनी तीरंदाजी अकादमी के माध्यम से युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं।उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर बेहतर प्रदर्शन कर चुके हैं। वरिष्ठ पदाधिकारियों का जताया आभार अपनी नियुक्ति पर सोमेश ने अर्जुन मुंडा, वीरेंद्र सचदेवा और कोच सुरेंद्र शर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी उनके लिए सम्मान की बात है और वे इसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे।

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सरगुजा में आकाशीय बिजली का कहर: पेड़ के नीचे खड़ी बच्ची की मौत, रायपुर में आज भी मौसम अलर्ट

प्रदेश में हल्की बारिश और आंधी के आसार, आने वाले दिनों में तापमान 2-3 डिग्री तक गिरने की संभावना सरगुजा में दर्दनाक हादसा सरगुजा जिले में तेज आंधी-बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से एक नाबालिग बच्ची की मौत हो गई। घटना लुंड्रा थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि बच्ची बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी अचानक बिजली गिर गई। पास के दूसरे पेड़ के नीचे खड़ी दो अन्य लड़कियां भी इसकी चपेट में आईं, लेकिन उनकी जान बच गई। मौसम में बदलाव का असर राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई इलाकों में मौसम अचानक बदला है। तेज हवाओं और बारिश के कारण तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल से ओडिशा तक बने ट्रफ के प्रभाव से प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में आंधी और बारिश की स्थिति बनी हुई है। तापमान का हाल पिछले 24 घंटों में मौसम विभाग का कहना है कि अगले 4 दिनों तक तापमान में खास बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। रायपुर में मौसम का पूर्वानुमान रायपुर में आज बादल छाए रहने की संभावना है। अलर्ट और सावधानी

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25 मीटर के पूल में तैयारी, 50 मीटर में मुकाबला: सपना कोरसा ने हारकर भी जीता सबका दिल

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में 12 साल की सबसे छोटी तैराक, बड़े खिलाड़ियों से मुकाबले के बावजूद दिखाई जबरदस्त हिम्मत छत्तीसगढ़ को पहले दिन 2 मेडल खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के पहले दिन छत्तीसगढ़ ने शानदार शुरुआत करते हुए 2 मेडल अपने नाम किए। 12 साल की सपना बनी चर्चा का केंद्र मेडल भले ही न जीत सकीं, लेकिन 200 मीटर फ्री-स्टाइल में हिस्सा लेने वाली सपना कोरसा ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।सिर्फ 12 साल की सपना इस प्रतियोगिता की सबसे कम उम्र की तैराक रहीं और बीजापुर की रहने वाली हैं। जब सभी फिनिश कर चुके थे, सपना अकेली तैर रही थीं रेस की शुरुआत में सपना ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन जल्द ही पीछे रह गईं। करीब डेढ़ से ढाई मिनट तक सपना अकेले पूल में तैरती रहीं। दर्शकों को लगा कि वह बीच में रेस छोड़ सकती हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिनिश लाइन तक पहुंचीं। उनके इस जज्बे को देखकर पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया और तालियों से उनका स्वागत किया गया। सपना का जज्बा: खुद से मुकाबला सपना ने कहा कि पीछे रह जाने के बाद उनका मुकाबला किसी और से नहीं, बल्कि खुद से था।अगर वह बीच में रुक जातीं, तो खुद से हार जातीं। उनका मानना है कि बेहतर तैयारी मिलती तो वह मेडल भी जीत सकती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी उपलब्धि सपना के पिता किसान हैं, जिससे आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। आधे आकार के पूल में की प्रैक्टिस सपना जिस पूल में अभ्यास करती हैं, वह सिर्फ 25 मीटर लंबा है, जबकि नेशनल और इंटरनेशनल प्रतियोगिताएं 50 मीटर के पूल में होती हैं। रायपुर के इंटरनेशनल पूल में उन्हें ज्यादा प्रैक्टिस का मौका भी नहीं मिला। सिर्फ एक बार ही वह वहां अभ्यास कर सकीं। कोच और सुविधाओं की चुनौती कोच दीप्ती वर्मा के मार्गदर्शन में सपना ने सीमित संसाधनों के बावजूद नेशनल स्तर तक का सफर तय किया।डाइट, ट्रेनिंग और सुविधाओं की कमी के बावजूद उनका प्रदर्शन प्रेरणादायक रहा। निष्कर्ष सपना कोरसा ने भले ही मेडल नहीं जीता, लेकिन अपने जज्बे, संघर्ष और हिम्मत से यह साबित कर दिया कि असली जीत हार में भी छिपी होती है।

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बिजली विभाग के नाम पर ठगी: नर्सिंग ऑफिसर से 1.64 लाख की साइबर फ्रॉड

राजधानी रायपुर के आमानाका थाना क्षेत्र में ऑनलाइन ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एम्स में कार्यरत एक नर्सिंग ऑफिसर को ठगों ने बिजली कंपनी का कर्मचारी बनकर निशाना बनाया और उनके खाते से 1.64 लाख रुपए निकाल लिए। पीड़ित हरकेश सिंह यादव (36) हीरापुर स्थित हर्षित विहार के निवासी हैं और सरोना में नया मकान बनवा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। 25 मार्च को उनके घर पर मीटर लगाया गया और अगले ही दिन 26 मार्च को उन्हें एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बिजली विभाग का कर्मचारी बताते हुए कहा कि मीटर का वेरिफिकेशन बाकी है।APK फाइल बना ठगी का जरिया ठग ने भरोसा जीतने के लिए मीटर का असली BP नंबर भी बताया। इसके बाद उसने व्हाट्सएप पर एक संदिग्ध APK फाइल भेजी और उसे डाउनलोड कर डिटेल भरने को कहा। वेरिफिकेशन के नाम पर पहले 13 रुपए जमा करवाए गए। जैसे ही पीड़ित ने अपने HDFC Bank क्रेडिट कार्ड की जानकारी भरी, उनके खाते से लगातार ट्रांजेक्शन शुरू हो गए। किन कंपनियों में ट्रांसफर हुए पैसे आमानाका पुलिस के अनुसार ठगों ने पीड़ित के खाते से रकम निकालकर Blinkit और Apple के अकाउंट में ट्रांसफर की। पुलिस ने शुरू की जांच पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच जारी है। साइबर ठगी के इस केस में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगों को मीटर की जानकारी कैसे मिली। कैसे रहें सावधान किसी भी संदेह की स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड न करें वेरिफिकेशन के नाम पर मांगी गई जानकारी साझा करने से बचें बैंक डिटेल्स या OTP किसी से साझा न करें

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छत्तीसगढ़ में गैस सिलेंडर को लेकर हंगामा: भूपेश बघेल और बीजेपी आमने-सामने, सोशल मीडिया पर मीम्स और शिकायतों की बाढ़

सिलेंडर की कमी के दावों के बीच राजनीति तेज, लोगों ने शेयर किए लंबी कतारों और देरी के वीडियो छत्तीसगढ़ के कई बड़े शहरों जैसे रायपुर, भिलाई, दुर्ग और बिलासपुर में गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर लोगों की परेशानी लगातार सामने आ रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, खाली सिलेंडर और इंतजार करते उपभोक्ता नजर आ रहे हैं।सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा और मीम्स फेसबुक, इंस्टाग्राम और X जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स लगातार अपनी समस्याएं साझा कर रहे हैं। कई लोग मीम्स और वीडियो के जरिए सिस्टम पर तंज कस रहे हैं। मीम्स में सिलेंडर को ‘कीमती सामान’ बताया जा रहा है कुछ पोस्ट में दिखाया गया कि लोग कई दिनों तक लाइन में खड़े हैं एआई वीडियो में सिलेंडर और इंडक्शन चूल्हे की बातचीत दिखाई गई कुछ यूजर्स ने लकड़ी और कंडों से खाना बनाने की बात कही भूपेश बघेल बनाम बीजेपी: सोशल मीडिया पर वार-पलटवार भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि लोगों को गैस सिलेंडर मिल रहा है या नहीं। उनके इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने जवाब दिया कि उन्हें सिलेंडर मिल रहा है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने बघेल के पोस्ट को शेयर करते हुए दावा किया कि जनता ने खुद सच्चाई बता दी है। जवाब में बघेल ने एक वीडियो पोस्ट कर ऐसे कमेंट्स दिखाए जिनमें लोगों ने सिलेंडर नहीं मिलने की शिकायत की। वायरल वीडियो और जमीनी हालात तिल्दा-नेवरा का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपने सिलेंडर कार्ड जमीन पर रखकर नंबर लगाते हुए छांव में इंतजार करते दिखे। भिलाई और दुर्ग से भी कई पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें यूजर्स ने बताया कि बुकिंग के 8–10 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा और एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। एआई कंटेंट के जरिए विरोध इस पूरे मुद्दे में एआई से बनाए गए वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। ये कंटेंट लोगों के गुस्से और व्यंग्य दोनों को दर्शा रहे हैं। प्रशासन का दावा: स्थिति सामान्य जहां एक तरफ लोग परेशानी बता रहे हैं, वहीं प्रशासन और केंद्र सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि गैस की सप्लाई सामान्य है और किसी तरह की कमी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सभी उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिल जाएगा। निष्कर्ष गैस सिलेंडर को लेकर छत्तीसगढ़ में बनी स्थिति अब सिर्फ सप्लाई का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया ट्रेंड का बड़ा विषय बन चुकी है। एक ओर लोग अपनी परेशानी जाहिर कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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मूकबधिर युवती से दुष्कर्म: इशारों और गुड़िया से दी गवाही को हाईकोर्ट ने माना, आरोपी रिश्तेदार को उम्रकैद

छत्तीसगढ़ में मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी रिश्तेदार को कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने उसे जीवनभर के लिए कारावास (मृत्यु तक) की सजा दी है। यह मामला वर्ष 2020 का है, जब युवती घर में अकेली थी और आरोपी ने घर में घुसकर अपराध को अंजाम दिया था। घटना बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र की है। पीड़िता बोल और सुन नहीं सकती थी, इसलिए उसने घटना के बाद अपनी मां को इशारों के माध्यम से पूरी बात बताई। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी नीलम कुमार देशमुख के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। अदालत में बयान दर्ज करना चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि पीड़िता जन्म से ही मूक-बधिर है। सुनवाई के दौरान साइन लैंग्वेज विशेषज्ञ की सहायता ली गई। जब कुछ तथ्यों को समझाने में कठिनाई हुई, तो कोर्ट ने एक प्लास्टिक की गुड़िया उपलब्ध कराई। पीड़िता ने उसी के जरिए संकेतों में बताया कि उसके साथ क्या हुआ था। ट्रायल कोर्ट ने इस गवाही को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को पहले ही सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि केवल किसी व्यक्ति के मूक-बधिर होने से उसकी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के जरिए दी गई जानकारी भी कानून की नजर में मौखिक साक्ष्य मानी जाती है। साथ ही मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने भी अपराध की पुष्टि की। जांच में पीड़िता और आरोपी से जुड़े नमूनों में मानव शुक्राणु मिलने की बात सामने आई थी, जिसका आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। हाईकोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2) के तहत मृत्यु तक आजीवन कारावास और धारा 450 के तहत अतिरिक्त पांच वर्ष की सजा सुनाई है। इसके अलावा उस पर 21 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपी फिलहाल जेल में बंद है और उसे पूरी सजा भुगतनी होगी। c

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