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ताड़मेटला नरसंहार पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: 16 साल बाद भी 76 जवानों के हत्यारों का दोष साबित नहीं

साल 2010 में छत्तीसगढ़ के ताड़मेटला में हुए भीषण नक्सली हमले को देश के सबसे बड़े CRPF नरसंहारों में गिना जाता है। इस हमले में 75 सीआरपीएफ जवानों और एक राज्य पुलिसकर्मी ने शहादत दी थी। लेकिन घटना के 16 साल बाद भी किसी आरोपी के खिलाफ अपराध साबित नहीं हो सका। अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां हमले में शामिल वास्तविक आरोपियों की पहचान तक कानूनी रूप से साबित नहीं कर सकीं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इतने बड़े हमले के बावजूद जांच और अभियोजन पक्ष अदालत के सामने ऐसे विश्वसनीय और स्वीकार्य साक्ष्य पेश नहीं कर पाए, जिनके आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके। अदालत ने इसे बेहद पीड़ादायक और चिंताजनक स्थिति बताया। हमले के बाद पुलिस ने जांच करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश, दंगा, डकैती, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी नक्सली संगठन से जुड़े हुए थे और हमले में उनकी भूमिका थी। हालांकि दंतेवाड़ा की सत्र अदालत ने 7 जनवरी 2013 को सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि अभियोजन पक्ष आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। बाद में राज्य सरकार ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के निर्णय को सही माना। ताड़मेटला हमले का मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली कमांडर Madvi Hidma को माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में हुए कई बड़े नक्सली हमलों के पीछे उसका नाम सामने आता रहा। बाद में नवंबर 2025 में आंध्र प्रदेश के मारेडूमिल्ली जंगलों में एक ऑपरेशन के दौरान हिड़मा के मारे जाने का दावा किया गया था।

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राजधानी में बढ़ते अपराधों पर कांग्रेस का हमला: बम सामग्री, गैंगवार और हत्याओं को लेकर सरकार पर उठे सवाल

रायपुर में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि राजधानी में अपराधियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं और सरकार हालात संभालने में विफल साबित हो रही है। कांग्रेस नेताओं ने उरला इलाके में कथित तौर पर बम बनाने की सामग्री मिलने की घटना और मेकाहारा अस्पताल के पास हुई गैंगवार का जिक्र करते हुए कहा कि शहर में खुलेआम हथियार लहराए जा रहे हैं। इसके साथ ही हाल ही में दो युवतियों की गोली मारकर हत्या और पुराने विधानसभा क्षेत्र के पास व्यापारी से करोड़ों की लूट जैसी घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष Sushil Anand Shukla ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार कानून व्यवस्था बेहतर होने का दावा कर रही है, जबकि जमीनी स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में हत्या, लूट, चाकूबाजी और डकैती जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कांग्रेस का कहना है कि अपराधियों में पुलिस और कानून का डर खत्म होता जा रहा है। पार्टी ने दावा किया कि राजधानी में आए दिन गोलीबारी और हिंसक घटनाएं हो रही हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा और कहा कि दुष्कर्म एवं उत्पीड़न की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपराध पर नियंत्रण करने में नाकाम रही है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। कांग्रेस ने कहा कि मुख्यमंत्री और गृह विभाग प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था संभालने में असफल साबित हो रहे हैं।

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रायपुर डबल मर्डर केस में नया खुलासा: हत्या के बाद मेडिकल स्टोर में घुसा आरोपी, फायरिंग कर मांगी कार की चाबी

रायपुर के चर्चित मोवा डबल मर्डर केस में एक और सनसनीखेज वीडियो सामने आया है। दो सालियों की हत्या के बाद आरोपी जितेंद्र वर्मा भागते हुए मोवा इलाके के एक मेडिकल स्टोर पहुंचा, जहां उसने हथियार लहराकर एक व्यक्ति से कार की चाबी मांगने की कोशिश की। इस दौरान आरोपी ने स्टोर के अंदर फायरिंग भी की, जिससे वहां मौजूद लोग डरकर बाहर भाग गए। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात पारिवारिक विवाद ने खूनी रूप ले लिया। आरोपी अपनी पत्नी और 16 महीने की बेटी से जुड़ा विवाद लेकर ससुराल पहुंचा था। घर में कहासुनी बढ़ने के बाद उसने अपनी पत्नी की दोनों बहनों गीतांजलि और दुर्गेश्वरी पर गोलियां चला दीं। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की मां सावित्री बाई ने बताया कि आरोपी ने उनकी आंखों के सामने बेटियों को गोली मारी। उन्होंने कहा कि वह लगातार हाथ जोड़कर रोकने की कोशिश करती रहीं, लेकिन आरोपी नहीं रुका। घटना के बाद घर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। आरोपी की पत्नी खिलेश्वरी ने भी पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शादी के कुछ साल बाद से आरोपी का व्यवहार बदल गया था। वह शराब पीकर मारपीट करता था, परिवार पर शक करता था और कई बार पिस्टल दिखाकर धमकाता था। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने उसकी बहनों के साथ गलत हरकतें भी की थीं। परिवार के अनुसार आरोपी पहले भी घर की दीवारों पर गोली चला चुका था। घटना से कुछ दिन पहले भी उसने हथियार निकालकर धमकी दी थी, जिसके बाद पत्नी अपनी बच्ची को लेकर रिश्तेदार के घर चली गई थी। इस हत्याकांड के बाद आरोपी के लाइसेंसी हथियार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने VIP सिक्योरिटी का हवाला देकर साल 2020 में पिस्टल का लाइसेंस लिया था। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि लाइसेंस जारी करते समय उसके व्यवहार और रिकॉर्ड की सही तरीके से जांच हुई थी या नहीं। फिलहाल पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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रायगढ़ में सस्ती और देशी शराब की कमी, पसंदीदा ब्रांड के लिए भटक रहे लोग

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इन दिनों देशी और सस्ती शराब की कमी से शराब प्रेमियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले की कई शराब दुकानों में पर्याप्त स्टॉक नहीं पहुंचने के कारण लोग अपनी पसंद की शराब के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटक रहे हैं। यह समस्या पिछले कई दिनों से बनी हुई है। जिले में कुल 37 शराब दुकानें संचालित हैं, जिनमें 2 प्रीमियम, 15 कंपोजिट, 9 देशी और 11 अंग्रेजी शराब दुकानें शामिल हैं। शहर के सिग्नल चौक, बड़पारा, पुराना सारंगढ़ बस स्टैंड, विजयपुर और पहाड़ मंदिर रोड स्थित दुकानों में सबसे ज्यादा बिक्री होती है। जानकारी के अनुसार अप्रैल महीने से देशी शराब, गोवा ब्रांड और कम कीमत वाले क्वार्टर एवं हाफ बोतलों की सप्लाई प्रभावित है। इसके चलते कम दाम में शराब खरीदने वाले ग्राहकों को काफी दिक्कत हो रही है। कई दुकानों में केवल महंगी शराब की बोतलें उपलब्ध हैं, जबकि कहीं सिर्फ महंगे क्वार्टर ही बिक रहे हैं। ऐसे में सस्ती शराब पसंद करने वाले लोगों को मजबूरी में महंगे ब्रांड खरीदने पड़ रहे हैं। बीयर के शौकीनों को भी उनकी पसंद के ब्रांड नहीं मिल पा रहे हैं। लोग लगातार अलग-अलग दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। शराब खरीदने पहुंचे मंतोष चौहान ने बताया कि वह गोवा ब्रांड की शराब लेने आए थे, लेकिन स्टॉक खत्म होने के कारण उन्हें दूसरी दुकान जाना पड़ रहा है। वहीं अशोक नाम के ग्राहक ने कहा कि कई दुकानों में घूमने के बावजूद मनपसंद शराब नहीं मिल रही है। मामले में जिला आबकारी अधिकारी क्रिस्टोफर खलखो ने कहा कि नई नीति और प्लास्टिक बोतलों के सेटअप में बदलाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि एक-दो सप्ताह के भीतर स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है और लोगों को जल्द उनकी पसंद की शराब मिलने लगेगी।

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भिलाई में रिश्वत लेते ट्रैफिक SI का VIDEO वायरल, 200 रुपए लेते दिखा अधिकारी

दुर्ग जिले के भिलाई से पुलिस विभाग से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक वीडियो में ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर युवक से चालान के बदले 200 रुपए लेते दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरे वीडियो में एक कॉन्स्टेबल धारा 307 के आरोपी से हाथ मिलाते और गले लगते नजर आ रहा है। पहला मामला दुर्ग ट्रैफिक विभाग से जुड़ा है। वायरल वीडियो में ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर महेश्वर देवांगन युवक से पैसे लेते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में यह भी सुनाई दे रहा है कि अधिकारी युवक को पैसे गिनने के लिए कह रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए ट्रैफिक एसआई महेश्वर देवांगन को लाइन अटैच कर दिया है। ट्रैफिक टीआई टीडी चंद्रा ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि वीडियो सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई की गई है। वहीं दूसरा वीडियो पावर हाउस रेलवे स्टेशन के सामने का बताया जा रहा है। इसमें छावनी थाना में पदस्थ कॉन्स्टेबल प्रमोद साहू एक युवक से हाथ मिलाते और गले लगते नजर आ रहे हैं। युवक की पहचान बाबू खान के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक बाबू खान के खिलाफ जामुल थाना में धारा 307 के तहत मामला दर्ज है और वह फिलहाल जमानत पर बाहर है। बताया जा रहा है कि वह पहले भी जेल जा चुका है। हालांकि दूसरे वीडियो को लेकर अब तक पुलिस विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और न ही किसी तरह की कार्रवाई की पुष्टि हुई है।

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रायपुर में IPL टिकटों की कालाबाजारी, 3000 का टिकट 6 हजार में बिक रहा

आईपीएल के रोमांच के बीच रायपुर में टिकटों की कालाबाजारी का मामला सामने आया है। शहीद वीरनारायण सिंह क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले मुकाबलों को लेकर क्रिकेट फैंस में भारी उत्साह है, लेकिन ऑनलाइन टिकट बुकिंग शुरू होते ही अधिकांश टिकट कुछ ही समय में सोल्ड आउट हो गए। 10 मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और मुंबई इंडियंस के बीच मुकाबला होना है, जबकि 13 मई को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने-सामने होंगी। मैचों को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह है, लेकिन टिकट नहीं मिलने से फैंस परेशान हैं। इसी बीच शहर में टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग का नेटवर्क सक्रिय हो गया है। जानकारी के मुताबिक 3 हजार रुपए कीमत वाला टिकट 6 हजार रुपए या उससे ज्यादा में बेचा जा रहा है। मामले की पड़ताल के दौरान एक एजेंट से संपर्क किया गया, जिसने खुले तौर पर ऊंचे दामों पर टिकट उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की। एजेंट ने बताया कि अपर स्टैंड का टिकट 6 हजार रुपए, लोअर स्टैंड का टिकट 7 हजार रुपए और ए-बी स्टैंड या डग आउट टिकट 16 हजार रुपए तक में उपलब्ध हैं। एजेंट ने यह भी दावा किया कि टिकट पूरी तरह कन्फर्म होंगे और स्टेडियम में प्रवेश में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। बातचीत से साफ हुआ कि टिकटों की कालाबाजारी संगठित तरीके से की जा रही है। आधिकारिक टिकट रेट आयोजकों के अनुसार टिकट केवल आरसीबी की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। टिकटों की कीमत 2000 रुपए से शुरू होकर 2500, 3500, 5000 और 8000 रुपए तक तय की गई है। क्रिकेट फैंस की नाराजगी राहुल वर्मा नाम के एक क्रिकेट फैन ने कहा कि वह कई दिनों से टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर बार टिकट सोल्ड आउट दिख रहे हैं। उनका कहना है कि एजेंटों के पास टिकट मौजूद हैं और आम लोगों से कई गुना ज्यादा कीमत वसूली जा रही है। वहीं रायपुर के निलेश साहू ने भी कहा कि आईपीएल मैच शहर में होना खुशी की बात है, लेकिन टिकटों की कालाबाजारी के कारण असली क्रिकेट फैंस स्टेडियम से दूर हो रहे हैं। पुलिस ने क्या कहा रायपुर पुलिस कमिश्नर संजय शुक्ला ने कहा कि टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग को लेकर अब तक कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है। यदि किसी के खिलाफ टिकट ब्लैक में बेचने की जानकारी मिलती है, तो पुलिस मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई करेगी।

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बिलासपुर में कॉन्स्टेबल की मौत पर घिरा श्रीराम केयर अस्पताल, MLA दिलीप लहरिया ने लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई

बिलासपुर के श्रीराम केयर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत के मामले में अब राजनीतिक विवाद भी गहराने लगा है। मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की चेतावनी भी दी है। मामले में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता ने मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण सत्यकुमार की हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों के मुताबिक, शुरुआत में डॉक्टरों ने किडनी में इंफेक्शन होने की बात कही थी, लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इसके बाद सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है। परिवार ने मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को विधायक दिलीप लहरिया मृतक आरक्षक के पिता और अन्य परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर संजय अग्रवाल को शिकायत सौंपी। विधायक ने कहा कि श्रीराम केयर अस्पताल में इलाज में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल के खिलाफ शिकायतें और मुद्दे उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्यकुमार केवल सामान्य पथरी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन गलत इलाज और लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई। विधायक ने कहा कि अस्पताल में हुई अन्य मौतों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है और पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। क्या है पूरा मामला? मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी 36 वर्षीय सत्यकुमार पाटले पुलिस विभाग में आरक्षक थे और उनकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। 26 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत के बाद वे नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी बताकर ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अगले दिन तक सत्यकुमार सामान्य थे, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान करीब चार घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत गंभीर हुई और बाद में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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रायपुर में ग्लोबल हॉस्पिटल पर निगम की कार्रवाई, नाले पर बने अवैध कब्जे पर चला बुलडोजर

राजधानी रायपुर में नाले पर अवैध कब्जा करने के मामले में नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्लोबल हॉस्पिटल परिसर के पास बने अवैध निर्माण को हटाया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर वार्ड क्रमांक-40 में निगम की टीम ने जेसीबी की मदद से नाले पर बनाए गए अवैध पाटे को तोड़ दिया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। बताया जा रहा है कि नगर निगम को इस संबंध में जनशिकायत मिली थी, जिसके बाद जांच कर कार्रवाई की गई। जोन कमिश्नर क्षीरसागर नायक के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और शिकायत सही पाई। इसके बाद तत्काल बुलडोजर बुलाकर नाले के ऊपर करीब 50 मीटर तक बनाए गए अवैध पाटे को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान नाले से लगभग दो ट्रक मलबा भी निकाला गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण के कारण नाले की सफाई और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। मौके पर जोन स्वास्थ्य अधिकारी संदीप वर्मा, स्वच्छता निरीक्षक दिलीप साहू और प्रेम मानिकपुरी सहित निगम की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन को भविष्य में दोबारा इस तरह का अतिक्रमण नहीं करने की चेतावनी दी है। नगर निगम ने साफ किया है कि शहर में नालों और सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। जनशिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी ताकि सफाई और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित न हो।

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शिवाजी महाराज की ‘जगदंबा’ तलवार लौटाने की मांग, छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने किंग चार्ल्स को भेजा कानूनी अल्टीमेटम

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी (CCS) ने ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स-III को पत्र भेजकर छत्रपति शिवाजी Maharaj की प्रसिद्ध ‘जगदंबा’ तलवार और ‘वाघ नख’ समेत भारत की 211 ऐतिहासिक धरोहरों को वापस लौटाने की मांग की है। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि 6 जून 2026 तक ये धरोहरें भारत नहीं लौटाई गईं, तो इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में 5 ट्रिलियन डॉलर का मुकदमा दायर किया जाएगा। संस्था के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा कि यह केवल ऐतिहासिक वस्तुओं की वापसी का मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि भारत की ऐतिहासिक धरोहरों को औपनिवेशिक काल में बाहर ले जाया गया और अब उन्हें वापस लाने का समय आ चुका है। CCS ने 6 जून 2026 की समयसीमा इसलिए तय की है क्योंकि इसी दिन छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। संस्था का कहना है कि ब्रिटेन में रखी गई भारतीय धरोहरें “लूटी गई सांस्कृतिक संपत्ति” हैं। डॉ. सोलंकी के अनुसार, ब्रिटिश संग्रहालयों ने पिछले करीब 150 वर्षों से भारतीय धरोहरों को प्रदर्शित कर आर्थिक लाभ कमाया है। संस्था ने कमाई, ब्याज और मुद्रास्फीति के आधार पर 5 ट्रिलियन डॉलर के दावे का आंकड़ा तैयार किया है। संस्था ने आरोप लगाया है कि भारतीय धरोहरों का प्रदर्शन सांस्कृतिक शोषण और अवैध लाभ कमाने जैसा है। रिक्लेमेशन सूची में अमरावती मार्बल्स, चोल कालीन नटराज प्रतिमाएं, ब्राह्मी लिपि वाले अशोक शिलालेख और मुगल-राजपूत कालीन दुर्लभ चित्रकला जैसी कई ऐतिहासिक वस्तुएं शामिल हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि ब्रिटेन द्वारा खुद को “विश्व इतिहास का संरक्षक” बताना केवल औपनिवेशिक दौर की लूट को सही ठहराने का प्रयास है। संस्था का दावा है कि आत्मनिर्भर भारत अब अपनी सांस्कृतिक विरासत वापस लेने के लिए तैयार है। CCS का कहना है कि यदि मामला ICJ तक पहुंचता है, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। इससे एशिया और अफ्रीका के अन्य पूर्व उपनिवेश देशों में भी यूरोपीय देशों से अपनी सांस्कृतिक धरोहरों और मुआवजे की मांग तेज हो सकती है।

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भीषण गर्मी में खराब खाना बेचने वालों पर प्रशासन सख्त, शहर की 12 से ज्यादा दुकानों में छापा

राजधानी में बढ़ती गर्मी के बीच खराब और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद बुधवार को खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने शहर में एक साथ 12 से ज्यादा दुकानों, बेकरी, कैंटीन और पानी बनाने वाली यूनिट्स पर छापेमारी की। जांच के दौरान टीम ने तीन अस्पताल कैंटीन, पांच पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर निर्माता और विक्रेता फर्मों के साथ ही छह आइसक्रीम विक्रेताओं की जांच की। कई जगहों से खाद्य सामग्री के सैंपल लिए गए, जिन्हें जांच के लिए लैब भेजा गया है। अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान करीब 5 किलो एक्सपायर्ड ब्रेड मौके पर ही नष्ट करवाई। वहीं दो फर्मों को सुधार सूचना नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल कैंटीनों में साफ-सफाई की खराब व्यवस्था देखकर अधिकारी नाराज नजर आए। सभी संचालकों को साफ चेतावनी दी गई है कि गंदगी या खराब खाद्य सामग्री मिलने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। प्रशासन के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण कुल्फी, आइसक्रीम, जूस और अन्य ठंडी चीजों की मांग तेजी से बढ़ी है। अधिक मुनाफा कमाने के लिए कई दुकानदार गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं और खराब सामग्री या अस्वच्छ पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसी खाद्य सामग्री के सेवन से लोगों में उल्टी, दस्त और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। खासतौर पर बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है। कई दुकानों में पुराने केक, पेस्ट्री और नाश्ते की चीजों को फ्रिज में रखकर दोबारा बेचे जाने की शिकायतें भी मिली हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि इस तरह की लापरवाही रोकने के लिए अभियान लगातार चलाया जाएगा, जो जून तक जारी रहेगा।

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