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हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: मंत्री विजय शाह पर शाम 6 बजे तक एफआईआर दर्ज करने के निर्देश, कर्नल सोफिया पर की गई टिप्पणी बनी मुसीबत

मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह द्वारा सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी अब उनके लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार को शाम 6 बजे तक उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने चार घंटे के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट का यह फैसला उस समय आया है जब देशभर में मंत्री के बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इंदौर के समीप महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने पाकिस्तान के खिलाफ बोलते-बोलते आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कर्नल सोफिया के संदर्भ में विवादित टिप्पणी कर दी थी। उन्होंने कहा था कि “हमारी बेटियों के सिंदूर उजाड़ने वालों को हमने उनकी ही बहन से बदला दिलवाया”, जो कि न सिर्फ असंवेदनशील थी, बल्कि सामाजिक और सैन्य मर्यादाओं के भी खिलाफ मानी गई। बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर आलोचना का तूफान आ गया। चौतरफा घिरने के बाद मंत्री शाह ने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए सफाई दी कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। बावजूद इसके, बीजेपी को मामले को संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के बाद विजय शाह से स्पष्टीकरण मांगा, वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने परिवार से मिलकर क्षमा याचना भी की। पार्टी के पूर्व विधायक मानवेंद्र सिंह खुद कर्नल सोफिया के छतरपुर स्थित निवास पहुंचे और परिजनों से माफी मांगी। कांग्रेस इस मुद्दे पर हमलावर है और विजय शाह को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग कर रही है। हाईकोर्ट का यह कड़ा रुख इस मामले में सरकार पर दबाव और बढ़ा सकता है।

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तुर्की की पोल खुली: पाकिस्तान को भारत पर हमले में दी थी बड़ी मदद, एयरस्ट्राइक में मारे गए तुर्की ऑपरेटर्स

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस एयरस्ट्राइक में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। जवाबी कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों को ड्रोन्स और मिसाइलों से निशाना बनाया, लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है—पाकिस्तान ने भारत पर हमले के लिए तुर्की से मदद ली थी। सूत्रों के अनुसार, तुर्की ने पाकिस्तान को 350 से ज्यादा ड्रोन उपलब्ध कराए और उन्हें ऑपरेट करने के लिए अपने सैन्य विशेषज्ञ भी भेजे। ड्रोन अटैक की योजना और क्रियान्वयन में तुर्की के सैन्य सलाहकारों की सीधी भागीदारी थी। पाकिस्तानी कार्रवाई से पहले तुर्की का एक युद्धपोत कराची बंदरगाह पर भी पहुंचा था, जिसे लेकर पाक मीडिया ने दावा किया कि उसमें हथियार थे। हालांकि, तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने इसे झूठा बताया था। अब ताजा रिपोर्ट्स से यह पुष्टि हो गई है कि तुर्की ने पाकिस्तान को हथियार और सैन्य सहायता प्रदान की थी। भारत की जवाबी कार्रवाई में सिर्फ पाकिस्तानी सैनिक ही नहीं, बल्कि तुर्की के दो ड्रोन ऑपरेटर्स भी मारे गए। इसके अलावा पाकिस्तान के कई सैन्य अड्डों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बीच एक और गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। भारत की एयरस्ट्राइक से पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुशाफ एयरबेस और किराना हिल्स इलाके में परमाणु विकिरण फैलने की खबरें हैं। किराना हिल्स में ही पाकिस्तान की परमाणु हथियार भंडारण सुविधा मौजूद है। विकिरण खतरे को देखते हुए अमेरिका ने अपने ऊर्जा विभाग की परमाणु आपातकालीन टीम का विमान मौके पर भेजा है, ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके अलावा मिस्र ने भी बोरोन नामक रसायन, जो रेडिएशन को कम करने में इस्तेमाल होता है, विमान से पाकिस्तान भेजा है। हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर न ही पाकिस्तान और न ही अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया है।

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद गृह मंत्रालय अलर्ट मोड में, अर्धसैनिक बलों की छुट्टियाँ रद्द, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालातों के बीच, केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना द्वारा की गई कार्रवाई – ऑपरेशन सिंदूर – के बाद उत्पन्न स्थिति को देखते हुए गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। साथ ही, सभी अर्धसैनिक बलों की छुट्टियाँ तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। सूत्रों के अनुसार, जवानों को ड्यूटी पर तुरंत लौटने का आदेश दिया गया है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, मेट्रो स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। केंद्रीय एजेंसियों और राज्यों की पुलिस को चौकन्ना रहने और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके के आतंकी अड्डों पर किए गए हमलों के बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया है। गृह मंत्रालय ने यह कदम किसी भी संभावित खतरे या आतंकी जवाबी कार्रवाई को रोकने के उद्देश्य से उठाया है। इस फैसले की व्यापक चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है, जहां कई यूजर्स ने इसे भारत की सख्त और निर्णायक सुरक्षा नीति का प्रतीक बताया है। केंद्र सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर बनी रहेंगी।

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बिरगांव में फुटपाथ व्यापारियों का विरोध प्रदर्शन, नगर निगम पर भेदभाव का आरोप

रायपुर, बिरगांव 6 मई:बिरगांव क्षेत्र में वर्षों से फुटपाथ पर व्यापार कर रहे छोटे दुकानदारों ने आज नगर निगम बिरगांव के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और निगम कार्यालय का घेराव किया। इन व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले 8 से 18 सालों से बिजली विभाग के पास कपड़े, जूते-चप्पल आदि बेचकर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन अब नगर निगम उन्हें हटाकर वहां फूड ज़ोन स्थापित करने की योजना बना रहा है। प्रदर्शन के दौरान नाराज व्यापारियों ने “महापौर मुर्दाबाद”, “नगर निगम मुर्दाबाद”, और “छोटे व्यापारियों का हक मत छीनो” जैसे तीखे नारे लगाए। उन्होंने अपना सामान निगम कार्यालय के सामने रखकर यह सवाल खड़ा किया — “अब हम कहां जाएं और अपना माल कहां बेचें?” व्यापारियों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें दुकान लगाने से रोका जा रहा है, जिससे उनके परिवारों की आजीविका संकट में पड़ गई है। आज जब कुछ प्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों से बात की, तो उन्हें एक और महीने का समय देने की बात कही गई — जिसे व्यापारियों ने खोखला आश्वासन बताया। अब तक लगभग 15 दुकानों को हटा दिया गया है, और शेष दुकानदारों को भी डर सता रहा है कि वे भी जल्द उजाड़ दिए जाएंगे। लगातार दुकानें बंद रहने से इन छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में बिरगांव के पार्षद खेमलाल साहू, वेदराम देवांगन और सामाजिक कार्यकर्ता डोमेश देवांगन भी शामिल हुए। उन्होंने व्यापारियों के हक में आवाज़ उठाई और नगर निगम से उचित समाधान की मांग की। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि या तो उन्हें वहीं व्यापार की अनुमति दी जाए या फिर वैकल्पिक स्थान की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि वे अपनी रोज़ी-रोटी जारी रख सकें।

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बिरगांव में कांग्रेस ने बिजली समस्या को लेकर बिजली कार्यालय का घेराव किया

रायपुर, बिरगांव | 6 मई:बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती, खराब मरम्मत व्यवस्था और भीषण गर्मी में आम जनता को हो रही परेशानी को लेकर आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बिरगांव द्वारा बिजली कार्यालय भानपुरी (CSPDCL) का घेराव किया गया। यह प्रदर्शन व्यास तालाब चौक से प्रारंभ होकर बिजली कार्यालय तक पहुंचा, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जनसेवक पंकज शर्मा (रायपुर ग्रामीण) और ब्लॉक अध्यक्ष योगेंद्र सोलंकी ने किया। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में बिजली कटौती पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इसके साथ ही बिजली कार्यालय के लापरवाह कर्मचारियों को हटाने की मांग भी की गई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पिछले कुछ सप्ताहों से बिरगांव क्षेत्र में बिना पूर्व सूचना के बार-बार बिजली काटी जा रही है, जिससे बच्चों की पढ़ाई, व्यापारिक गतिविधियों और घरेलू जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि आम जनता की समस्या को नज़रअंदाज़ करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जल्द से जल्द स्थायी समाधान की मांग की गई

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मऊगंज में भाईचारे पर हमला: परिवार के चार सदस्य पर जानलेवा हमले का आरोप, प्रशासन मौन

मऊगंज थाना क्षेत्र के अमोखर गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों — केसरी चौबे, नीलेश चौबे, विभा चौबे और सुषमा चौबे — पर अपने ही बड़े भाई पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि इन चारों ने मिलकर धारदार हथियार और लाठी-डंडों से गंभीर रूप से मारपीट की। यह हमला पुरानी रंजिश के चलते किया गया, और इससे पहले भी इन्हीं लोगों द्वारा एक साल पहले जान से मारने की कोशिश की गई थी, जिसकी रिपोर्ट मऊगंज थाने में दर्ज है और मामला अब भी अदालत में विचाराधीन है। पीड़ित परिवार का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के चलते यह चौथी बार हमला हुआ है। बुजुर्ग पीड़ित गांव में अकेले रहते हैं, जिससे उन्हें हमेशा अपनी जान का खतरा बना रहता है। पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता के चलते पीड़ित परिवार अब मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की गुहार लगा रहा है। सवाल यह है कि कब होगी प्रशासन की नींद खुली, और कब मिलेगा पीड़ित को इंसाफ

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बिरगांव के शिवाजी चौक पर पाकिस्तान के खिलाफ फूटा आक्रोश, मांग उठी सख्त कार्रवाई की

बिरगांव, 27 अप्रैल 2025 — कश्मीर के पहलगाम में हुए बर्बर आतंकी हमले ने पूरे देश को गम और गुस्से से भर दिया है। 28 मासूम पर्यटकों को धर्म के आधार पर चुनकर मौत के घाट उतारने की इस वीभत्स घटना के खिलाफ अब हर कोने से विरोध की आवाजें उठने लगी हैं। बिरगांव के शिवाजी चौक में रविवार को बजरंग दल बंजारी प्रखंड के कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तान के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। चौक के बीचोंबीच पाकिस्तान का झंडा बनाया गया, जिसे आम नागरिकों और राहगीरों ने अपने पैरों तले रौंदा। गाड़ियों ने भी उसे कुचलते हुए अपना आक्रोश जाहिर किया। “पाकिस्तान मुर्दाबाद” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर चेहरे पर शहीदों के लिए दर्द और आतंक के खिलाफ गुस्सा साफ नजर आ रहा था। स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल निंदा और बयानबाजी से काम नहीं चलेगा — देश को ठोस कार्रवाई करनी होगी। आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने की मांग पूरे देश में तेजी से उठ रही है। आज पूरा भारत एकजुट होकर एक ही स्वर में कह रहा है:“शहीदों का खून बेकार नहीं जाएगा।”

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छत्तीसगढ़: पहलगाम आतंकी हमले के बाद दुर्ग पुलिस अलर्ट, मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में छापामारी, फरार वारंटी गिरफ्तार

दुर्ग, 27 अप्रैल 2025:जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। इसी कड़ी में दुर्ग पुलिस ने रविवार तड़के जिले के विभिन्न मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। कार्रवाई में फरार चार वारंटियों को हिरासत में लिया गया है। दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के निर्देश पर तीन अलग-अलग टीमें गठित की गई थीं, जिनका नेतृत्व एडिशनल एसपी सुखनंदन राठौर, अभिषेक झा और पद्मश्री तंवर कर रहे थे। सभी टीमों ने रविवार सुबह 4 बजे से छापेमारी शुरू की। एएसपी अभिषेक झा के नेतृत्व में मोहन नगर थाना क्षेत्र के उरला स्थित बॉम्बे आवास में छापा मारा गया, वहीं एएसपी सिटी सुखनंदन राठौर ने भिलाई तीन थाना क्षेत्र के हथखोज इलाके में और एएसपी पद्मश्री तंवर ने सुपेला थाना क्षेत्र में सुपेला मस्जिद के पीछे के इलाके में कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने हर घर की गहन तलाशी ली, निवास से संबंधित दस्तावेजों की जांच की और स्थानीय निवासियों के फिंगर प्रिंट लिए। इन फिंगर प्रिंट्स को पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड डेटाबेस से मिलान किया जाएगा। बॉम्बे आवास क्षेत्र से फरार चल रहे चार वारंटियों को हिरासत में लिया गया है। एएसपी अभिषेक झा ने बताया कि छापेमारी की कार्रवाई रविवार तड़के 4:30 बजे शुरू हुई थी। पुलिस की इस सघन कार्रवाई का मकसद संभावित संदिग्धों की पहचान कर राज्य में किसी भी आपराधिक या आतंकी गतिविधि को रोकना है। छत्तीसगढ़ सरकार ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद राज्य भर में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध नागरिकों की भी तलाश की जा रही है।

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रायपुर समाचार: सेंट्रल जेल में कैदी ने की आत्महत्या, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रायपुर। राजधानी रायपुर के सेंट्रल जेल से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जेल में बंद एक कैदी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक कैदी की पहचान ओमप्रकाश के रूप में हुई है। वह अपने बैरक में फंदे पर लटका हुआ पाया गया। यह घटना जेल प्रशासन के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा कर रही है, क्योंकि इससे जेल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र की खामियां उजागर हुई हैं। फिलहाल जेल प्रशासन और पुलिस घटना की जांच में जुटे हुए हैं। आत्महत्या के कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी रायपुर सेंट्रल जेल में आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं। इसी साल जनवरी माह में एक अफ्रीकी ड्रग्स डीलर ने भी अपने सेल में फांसी लगाकर जान दे दी थी। वह वर्ष 2021 में गिरफ्तार किया गया था। सिर्फ आत्महत्या ही नहीं, नवंबर 2024 में जेल परिसर में फायरिंग की भी एक बड़ी घटना घटित हुई थी, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। इन लगातार होती घटनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और जेल प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की गहन जांच कर रहे हैं और आत्महत्या के कारणों की तलाश में जुटे हैं।

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CG News: वक्फ अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के दबाव में केंद्र सरकार फिर बैकफुट पर, पहले भी देशद्रोह और 370 पर झुकी

वक्फ से पहले देशद्रोह, 370 पर भी सुप्रीम कोर्ट में झुक चुकी है सरकार केंद्र सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के सामने बैकफुट पर नजर आई है। वक्फ अधिनियम 2025 के दो विवादास्पद प्रावधान—‘वक्फ बाय यूज’ और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति—को लागू न करने का आश्वासन देकर सरकार ने एक और संभावित न्यायिक टकराव को टालने की कोशिश की है। नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के सामने बैकफुट पर नजर आई है। वक्फ अधिनियम 2025 के दो विवादास्पद प्रावधान—‘वक्फ बाय यूज’ और वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति—को लागू न करने का आश्वासन देकर सरकार ने एक और संभावित न्यायिक टकराव को टालने की कोशिश की है। गुरुवार को हुई सुनवाई में जब सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश कर रहे थे, ने “वक्फ बाय यूज” के संवैधानिक प्रभावों पर सवाल उठाया, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि इन प्रावधानों को लागू नहीं किया जाएगा और राज्यों को गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति की अनुमति नहीं दी जाएगी। मझौता (सितंबर 2023) 370 हटाने के मामले में जब कोर्ट ने पूछा कि क्या संसद को किसी राज्य को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने का अधिकार है, तब केंद्र ने आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा, जिससे कोर्ट ने संवैधानिक सवाल पर फैसला देने से परहेज किया। दिल्ली दंगे और साफूरा जरगर की रिहाई (जून 2020) दिल्ली दंगों में आरोपी साफूरा जरगर की जमानत पर केंद्र ने कोर्ट में मानवीय आधार पर विरोध न करने की बात कही, जो सरकार की रणनीतिक नरमी का संकेत था। न्यायिक दबाव में रणनीतिक नरमी इन सभी मामलों में स्पष्ट है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के उल्लंघन या अधिकारों के हनन की आशंका जताई, तो केंद्र सरकार ने संभावित प्रतिकूल फैसलों से बचने के लिए रणनीतिक रूप से अपने रुख में नरमी बरती। यह प्रवृत्ति जहां सरकार की कानूनी रणनीति को दर्शाती है, वहीं सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक निगरानी की शक्ति को भी रेखांकित करती है।

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