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रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज: 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सेवा से बदल सकती है तस्वीर

रायपुर। राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के फैलते दायरे के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब बुनियादी जरूरत बन चुका है। कई योजनाएं बनीं, बस सेवाएं शुरू भी हुईं, लेकिन आज भी आम लोगों को सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ‘रायपुर मांगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ अभियान के तहत आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने खुलकर अपनी बात रखी। 350 बसें चलें तो बढ़े भरोसा पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि नवा रायपुर और सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बस सुविधा नहीं है। आम लोगों को मंत्री या अधिकारियों से मिलने के लिए 400–500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। उनका सुझाव है कि कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूट पर चलाई जाएं। उन्होंने निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत बस संचालन को व्यावहारिक विकल्प बताया, ताकि सरकारी फंड की देरी से बचा जा सके। मिनी बसें और लंबी दूरी के रूट जरूरी पुरंदर मिश्रा ने कहा कि शहर के अंदरूनी इलाकों के लिए मिनी सिटी बसें शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद सेवा लगभग ठप हो गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का मानना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सफल बनाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। लंबी दूरी के रूट पर समयबद्ध बस सेवा शुरू होने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा। जाम से राहत का समाधान राजेश मूणत ने कहा कि शहर में कई बस स्टॉप बने हैं, लेकिन बसें नियमित नहीं चल रहीं। जब तक सिटी बस सेवा व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म नहीं होगी। वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और रूट प्लानिंग की कमी रही। अब केंद्र की योजनाओं के तहत सुधार की कोशिश की जा रही है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि सस्ती और भरोसेमंद बस सेवा जनता का अधिकार है। सरकार को किराया और रूट निर्धारण पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। परिवहन विभाग की स्थिति परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल ने बताया कि 30 सिटी बसों के परमिट जारी हैं, लेकिन कितनी बसें संचालित हो रही हैं, इसकी जानकारी निगम के पास है। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए किराया निर्धारित है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पीएम ई-बस योजना पर फोकस केंद्र सरकार की पीएम ई-बस योजना के तहत रायपुर को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। जरवाय में करीब 2 हेक्टेयर में बस डिपो का निर्माण किया जा रहा है, जो चार महीने में तैयार होने की संभावना है। इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सरोना से 33 केवी लाइन बिछाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समयबद्ध, सस्ती और पर्याप्त संख्या में बसें चलाई जाएं तो रायपुर में निजी वाहनों की निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी।

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नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की चपेट में आने से युवती की मौत, युवक गंभीर

भिलाई में शुक्रवार रात नेशनल हाईवे पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ बाइक पर सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना रायपुर से भिलाई आने वाले मार्ग पर चरोदा जीआरपी चौकी के पास रात करीब 10 से 11 बजे के बीच हुई। मृतका की पहचान गूंजा चतुर्वेदी निवासी सुभाष मार्केट, जोन-2, वार्ड 31, बापू नगर खुर्सीपार के रूप में हुई है। घायल युवक 41 वर्षीय दीपक मोंगराज बताया गया है, जो ओडिया मोहल्ला, वार्ड 33, खुर्सीपार भिलाई का रहने वाला है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह प्राथमिक जानकारी के अनुसार दोनों रायपुर से भिलाई लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाइक तेज गति में थी और संतुलन बिगड़ने के बाद एक ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना भिलाई-3 थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलते ही भिलाई-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। हादसे के कारणों की पुष्टि के लिए आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन विस्तृत जांच जारी है।

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1600 आदिवासी शिक्षक पदों की नियुक्ति को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को भेजे हजारों पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत रिक्त पड़े 1600 अनुसूचित जनजाति (ST) पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पीड़ित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से हजारों पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। नियुक्ति नहीं होने से नाराज अभ्यर्थी आमरण अनशन पर अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालयों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इससे आक्रोशित अभ्यर्थी और उनके परिजन 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। 2300 पदों में 1600 ST, फिर भी नियुक्ति शून्य प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के अनुसार, सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद घोषित किए गए थे, जिनमें से करीब 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद आज तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है।आदिवासी समाज का आरोप है कि यह स्थिति तब बनी हुई है, जब राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार है। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप आंदोलनरत अभ्यर्थियों का दावा है कि अनशन के दौरान बिगड़ी 200 से अधिक युवाओं की तबीयत आदिवासी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। आंदोलन के दौरान 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई अभ्यर्थियों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। आदिवासी परिवारों पर बढ़ा सामाजिक-आर्थिक दबाव आदिवासी संगठनों का कहना है कि वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। इससे आदिवासी परिवार गहरे सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें आंदोलन और तेज करने की चेतावनी अभ्यर्थियों और आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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उधारी के पैसे को लेकर युवक की हत्या: NSUI नेता और साथियों ने होटल में बंधक बनाकर पीटा, इलाज के दौरान मौत

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक सनसनीखेज हत्या का मामला सामने आया है, जहां उधारी के पैसे को लेकर NSUI के एक नेता और उसके साथियों ने मिलकर एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी। होटल के कमरे में बंधक बनाकर लात-घूंसों से पीटे गए युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में NSUI जिला उपाध्यक्ष सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक की पहचान ऋषि निर्मलकर (19) के रूप में हुई है। वह अपने पिता की कपड़े प्रेस करने की दुकान में हाथ बंटाता था। यह घटना दुर्ग सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है। पैसे नहीं लौटाए तो उठा लिया रास्ते से पुलिस जांच में सामने आया है कि NSUI जिला उपाध्यक्ष मेजर सागर ने ऋषि को कुछ पैसे उधार दिए थे। जब ऋषि ने पैसे लौटाने में देर की और फोन उठाना बंद कर दिया, तो आरोपी गुस्से में आ गए। 20 जनवरी को ऋषि अपने एक दोस्त के साथ बाइक से घूम रहा था। इसी दौरान स्टेशन रोड पर पीछे से कार में आए मेजर सागर और उसके साथियों ने उसे रोक लिया। जबरदस्ती बाइक से उतारकर उसे कार में बैठाया गया और सीधे दुर्ग स्थित “36 इन होटल” ले जाया गया। होटल के कमरे में बंधक बनाकर की पिटाई बताया जा रहा है कि जिस होटल में ऋषि को ले जाया गया, वहां आरोपी मेजर सागर ही मैनेजर था। होटल के एक कमरे में ऋषि को बंद कर सभी आरोपियों ने उसकी लात-घूंसों से जमकर पिटाई की। अधमरा हालत में उसे होटल के बाहर फेंक दिया गया। इसके बाद ऋषि ने अपने दोस्त को फोन कर बुलाया और किसी तरह घर पहुंचा। घरवालों ने चोटों के बारे में पूछा, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया। दो दिन बाद बिगड़ी हालत, अस्पताल में मौत घटना के दो दिन बाद ऋषि की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया, फिर हालत गंभीर होने पर भिलाई के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 25 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गंभीर अंदरूनी चोटें बताया गया है। पांच आरोपी गिरफ्तार, सभी ने कबूला जुर्म परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने 26 जनवरी को हत्या का मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पहले 27 जनवरी को दो आरोपियों—NSUI जिला संयोजक प्रशांत राव (26) और लक्की उर्फ किशन ध्रुवे (18) को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 2 फरवरी को पुलिस ने मुख्य आरोपी मेजर सिंह सागर उर्फ राज सिंह सागर (19), काके उर्फ हरविंदर सिंह (20) और अंकित झा (22) को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया। सभी आरोपी दुर्ग के निवासी हैं और पूछताछ में उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है और मामले की आगे जांच जारी है।

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भिलाई के कल्याण कॉलेज में हंगामा: प्राचार्य से अभद्रता और सरकारी काम में बाधा, दो आरोपी गिरफ्तार

भिलाई के सेक्टर-7 स्थित कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हुई तोड़फोड़ और उपद्रव के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर कॉलेज परिसर में जबरन घुसकर हंगामा करने, प्राचार्य से दुर्व्यवहार करने, शासकीय कार्य में बाधा डालने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। भिलाई नगर थाना पुलिस ने खुर्सीपार निवासी अतुल कुमार चौधरी (19) और नेहरू नगर सुपेला निवासी केतन तिवारी (23) को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। थाना प्रभारी जितेंद्र वर्मा के अनुसार, यह घटना 9 दिसंबर की है। उस दिन कल्याण कॉलेज में प्राचार्य कक्ष के भीतर परीक्षा फॉर्म के सत्यापन और हस्ताक्षर से संबंधित शासकीय कार्य चल रहा था। इसी दौरान कॉलेज का पूर्व छात्र आकाश कन्नौजिया अपने साथ कई छात्रों को लेकर नारेबाजी करते हुए अनधिकृत रूप से कॉलेज परिसर में घुस आया। आरोप है कि सभी आरोपी एकजुट होकर प्राचार्य कक्ष में घुसे और वहां गाली-गलौज शुरू कर दी। उपद्रवियों ने प्राचार्य की टेबल का कांच तोड़ दिया, टेबल पर रखे शासकीय दस्तावेजों को फेंक दिया और कुछ दस्तावेज फाड़कर उन पर स्याही डाल दी। इतना ही नहीं, आरोपियों ने जूते की माला बनाकर प्राचार्य को पहनाने का प्रयास किया और उनके नाम पट्ट पर भी स्याही पोत दी। घटना के दौरान धक्का-मुक्की और हंगामे के कारण कॉलेज में अफरा-तफरी मच गई और शासकीय कार्य पूरी तरह से बाधित हो गया। इसके बाद प्राचार्य की शिकायत पर भिलाई नगर थाने में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस इस केस में पहले ही कुछ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एनएसयूआई के महासचिव आकाश कन्नौजिया भी शामिल है। वहीं, अतुल चौधरी और केतन तिवारी घटना के बाद से फरार चल रहे थे। लगातार दबिश, तकनीकी साक्ष्यों और सूचना तंत्र के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की। पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

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रेल मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऊंघते दिखे अफसर, वीडियो वायरल; बिलासपुर जोन को 545 करोड़ ज्यादा, नया प्रोजेक्ट शून्य

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जोनल मुख्यालय से एक हैरान करने वाला दृश्य सामने आया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय रेलवे के दो वरिष्ठ अधिकारी नींद में झपकी लेते नजर आए, जिसका वीडियो अब चर्चा का विषय बन गया है। यह वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस सोमवार को आयोजित की गई थी, जिसमें रेल मंत्री ने छत्तीसगढ़ में चल रही और प्रस्तावित रेल परियोजनाओं की जानकारी साझा की। इस दौरान बिलासपुर जोनल मुख्यालय में मौजूद रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक (PCCM) जेएस बिंद्रा और प्रमुख चीफ इंजीनियर मुरीत भटनागर कैमरे में झपकी लेते दिखाई दिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिलासपुर जोन के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, डीआरएम राकेश रंजन समेत करीब एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। रेल मंत्री ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में रेल विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इनके पूरा होने से बस्तर जैसे दूरस्थ इलाकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। रेल मंत्री ने रावघाट परियोजना, परमालकसा–खरसिया रेल कॉरिडोर सहित कई महत्वपूर्ण रेल लाइनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद राज्य में ट्रेनों की संख्या मौजूदा स्थिति की तुलना में लगभग दोगुनी हो जाएगी, जिससे ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों को भी फायदा होगा। इस वर्ष के रेल बजट में छत्तीसगढ़ को 7,470 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 545 करोड़ रुपये अधिक है। बिलासपुर जोन को भी बजट में बढ़ोतरी मिली है, लेकिन इसके बावजूद इस बार कोई भी नई रेल परियोजना स्वीकृत नहीं की गई है। वर्तमान में राज्य में करीब 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं विभिन्न चरणों में चल रही हैं। इनमें ट्रैक डबलिंग, ट्रिपलिंग, नई लाइन निर्माण, स्टेशन पुनर्विकास, यात्री सुविधाओं का विस्तार और सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। रेल मंत्री ने बताया कि बीते 11 वर्षों में छत्तीसगढ़ के रेल बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2009 से 2014 के दौरान जहां राज्य को औसतन 311 करोड़ रुपये का वार्षिक रेल बजट मिलता था, वहीं 2026–27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। राज्य में अमृत स्टेशन योजना के तहत 32 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिस पर 1,674 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें से डोंगरगढ़ (प्रथम चरण), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा स्टेशनों का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में प्रीमियम रेल सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। फिलहाल राज्य से दो जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस और एक जोड़ी अमृत भारत एक्सप्रेस का संचालन किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को तेज और आधुनिक रेल सुविधा मिल रही है।

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तेलीबांधा पार्किंग विवाद पर निगम का प्लान साफ, आम लोगों से नहीं वसूला जाएगा शुल्क

रायपुर। तेलीबांधा तालाब क्षेत्र में पार्किंग शुल्क को लेकर मचे विवाद के बीच महापौर मीनल चौबे ने निगम की स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि सुबह 12 बजे तक आने वाले लोगों से किसी भी प्रकार का पार्किंग चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही शाम के समय इवनिंग वॉक के लिए आने वालों के लिए अलग से पार्किंग स्पेस सुरक्षित रखा जाएगा। महापौर ने साफ किया कि पार्किंग शुल्क केवल उन होटल और रेस्टोरेंट संचालकों व उनके ग्राहकों से लिया जाएगा, जो घंटों तक सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर देते हैं और इससे यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाती है। “कमाई नहीं, व्यवस्था सुधार हमारा लक्ष्य” सोमवार को तेलीबांधा पार्किंग मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए महापौर मीनल चौबे ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य राजस्व कमाना नहीं, बल्कि ट्रैफिक जाम की समस्या को नियंत्रित करना है।उन्होंने आश्वासन दिया कि सुबह की मॉर्निंग वॉक और शाम की इवनिंग वॉक के दौरान आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। बोर्ड लगते ही शुरू हुआ विरोध नगर निगम द्वारा तेलीबांधा तालाब किनारे सड़क पर पार्किंग शुल्क वसूली की तैयारी के तहत जैसे ही सूचना बोर्ड लगाए गए, स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इस मुद्दे को मीडिया में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद निगम प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। फिलहाल निगम द्वारा वाहनों का डाटा संग्रह किया जा रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि किस समय, कितने वाहन और किस उद्देश्य से यहां खड़े होते हैं। कर्मचारी तैनात, जुटाया जा रहा डाटा नगर निगम ने जोन क्रमांक-3 और मुख्यालय के कर्मचारियों को दोपहर 3 बजे के बाद तेलीबांधा क्षेत्र में तैनात किया है। ये कर्मचारी— का डाटा जुटा रहे हैं। निगम का कहना है कि इसी आधार पर अंतिम व्यवस्था लागू की जाएगी। वीकेंड पर सबसे ज्यादा दबाव यातायात पुलिस के अनुसार, वीकेंड पर शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक तेलीबांधा तालाब किनारे सड़क पर— खड़ी रहती हैं। यानी हर वीकेंड करीब 1600 लोग इस क्षेत्र में शाम से देर रात तक मौजूद रहते हैं। नियम तोड़ने पर कार्रवाई जारी लेन से बाहर वाहन खड़े करने वालों पर यातायात पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। वीकेंड पर रोजाना करीब 70 वाहनों पर ई-चालान की कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा एक टीम पूरे दिन क्षेत्र में पेट्रोलिंग भी करती है।

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छत्तीसगढ़ में खुलेगा पहला अंतरिक्ष केंद्र, रायपुर बनेगा स्पेस एजुकेशन हब

रायपुर। छत्तीसगढ़ अब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। राज्य में पहली बार अंतरिक्ष केंद्र (Space Centre) की स्थापना होने जा रही है, जिससे छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां छात्रों को स्पेस टेक्नोलॉजी की व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी। यह अत्याधुनिक अंतरिक्ष केंद्र नवा रायपुर में शुरू किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ 3 फरवरी को सुबह 10 बजे, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राखी, नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे। इस मौके पर देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। छात्र बनाएंगे सैटेलाइट, रॉकेट लॉन्च की मिलेगी ट्रेनिंग इस अंतरिक्ष केंद्र के शुरू होने के बाद राज्य के छात्र: यह केंद्र छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें रियल टाइम स्पेस मिशन एक्सपीरियंस से जोड़ेगा। ‘प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी’ की शुरुआत जिला प्रशासन द्वारा आईडीवायएम फाउंडेशन और सारडा एनर्जी एंड मिनरल्स लिमिटेड के सहयोग से इस परियोजना को “प्रोजेक्ट अंतरिक्ष संगवारी” नाम दिया गया है। इसके तहत नवा रायपुर में राज्य का पहला अत्याधुनिक स्पेस सेंटर स्थापित किया गया है। शुभांशु शुक्ला होंगे ब्रांड एंबेसडर देश के दूसरे अंतरिक्ष यात्री कैप्टन शुभांशु शुक्ला इस स्पेस सेंटर के ब्रांड एंबेसडर होंगे। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान वे छात्रों से संवाद करेंगे और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसरो मानकों पर तैयार हुआ स्पेस सेंटर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के अनुसार, यह अंतरिक्ष केंद्र इसरो के मानकों के अनुरूप विकसित किया गया है। यहां— जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए स्पेस रिसर्च और इनोवेशन का नया द्वार खोलेगा।

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राज्य में नई जल दरें लागू, उद्योगों के लिए पानी हुआ महंगा

रायपुर। राज्य सरकार ने औद्योगिक उपयोग में आने वाले पानी की दरों में बढ़ोतरी करते हुए नई जल शुल्क नीति लागू कर दी है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें 2 फरवरी से प्रभावी हो चुकी हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला जल संरक्षण, राजस्व बढ़ाने और भू-जल के अत्यधिक दोहन पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। नई नीति के तहत उद्योगों को अब पानी के स्रोत और उसके उपयोग के प्रकार के आधार पर अलग-अलग शुल्क चुकाना होगा। यह व्यवस्था पानी से उत्पाद तैयार करने वाले उद्योगों के साथ-साथ थर्मल और जल विद्युत परियोजनाओं पर भी लागू होगी। पानी को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल करने वालों पर ज्यादा बोझ नई दर संरचना में उन उद्योगों पर सबसे अधिक शुल्क तय किया गया है, जिनके लिए पानी कच्चा माल है। इसमें शामिल हैं— इन उद्योगों को सरकारी जलाशय से पानी लेने पर 300 रुपए प्रति घनमीटर और नहर से पानी लेने पर 360 रुपए प्रति घनमीटर शुल्क देना होगा।वहीं, प्राकृतिक या स्वयं विकसित जल स्रोतों से पानी लेने पर 150 रुपए प्रति घनमीटर की दर तय की गई है। कूलिंग और प्रोसेसिंग के लिए कम दरें जो उद्योग पानी का उपयोग केवल कूलिंग, धुलाई या प्रोसेसिंग के लिए करते हैं और जहां पानी अंतिम उत्पाद का हिस्सा नहीं बनता, उन्हें तुलनात्मक रूप से कम जल-कर देना होगा। जल विद्युत परियोजनाओं पर नई व्यवस्था सरकार ने 25 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली जल विद्युत परियोजनाओं के लिए प्रति यूनिट उत्पादन पर शुल्क निर्धारित किया है। इसके साथ हर वर्ष एस्केलेशन चार्ज भी लागू होगा।25 मेगावाट तक की परियोजनाओं के लिए अपेक्षाकृत न्यूनतम दर रखी गई है।इसके अलावा, जलाशयों की सतह या विभागीय भूमि पर लगने वाली सौर ऊर्जा परियोजनाओं से 1000 रुपए प्रति एकड़ प्रति वर्ष शुल्क वसूला जाएगा। अग्रिम भुगतान करने वालों को राहत नई नीति के अनुसार, जो उद्योग 5 से 10 साल का जल-कर एकमुश्त जमा कर देंगे, उनके लिए उस अवधि तक जल दरें स्थिर रहेंगी, भले ही आगे चलकर शुल्क बढ़ा दिया जाए। जिन उद्योगों ने जलाशय निर्माण के लिए अग्रिम जल-कर अंशदान नहीं किया है, उन्हें अनुबंध से पहले 1 करोड़ रुपए प्रति मिलियन घनमीटर की दर से एकमुश्त सुगमता शुल्क देना होगा। यह राशि न तो समायोज्य होगी और न ही वापस की जाएगी। भू-जल उपयोग पर सख्ती नई भू-जल प्रबंधन नीति के तहत, जहां सतही जल उपलब्ध है, वहां औद्योगिक उपयोग के लिए भू-जल अनुमति का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। ईटीपी नहीं लगाने पर तीन गुना शुल्क राज्य सरकार ने साफ किया है कि जिन उद्योगों ने अपशिष्ट उपचार संयंत्र (ETP) नहीं लगाया है या उसे पूरी क्षमता से संचालित नहीं कर रहे हैं, उनसे लागू जल-कर का तीन गुना शुल्क वसूला जाएगा। उद्योगों को अपने उपचारित जल का पुनः उपयोग करने की अनुमति दी गई है, लेकिन यदि उसे संयंत्र से बाहर उपयोग या सप्लाई करना हो तो विभाग की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी। माइनिंग पिट का पानी भी महंगा खनन कार्य से बने गड्ढों (माइन पिट) में जमा पानी का औद्योगिक इस्तेमाल करने पर सामान्य दर से दोगुना शुल्क लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस तरह के उपयोग को हतोत्साहित करना है।

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राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक के सामने स्मार्ट सिग्नल सिस्टम बेअसर, कम वाहन होने पर भी लंबा इंतजार

रायपुर। राजधानी रायपुर में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बढ़ती आबादी और सड़कों पर बढ़ते दबाव के कारण शहर के कई प्रमुख चौराहों पर रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। ट्रैफिक को सुचारू बनाने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत वर्ष 2019 में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू किया गया था, लेकिन मौजूदा हालात में यह सिस्टम अपनी अपेक्षित भूमिका निभाता नजर नहीं आ रहा। इस परियोजना के अंतर्गत शहर के प्रमुख चौराहों पर वॉल्यूम एक्चुएटेड ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे, जो कैमरों और सेंसर के माध्यम से वाहनों की संख्या को पहचान कर सिग्नल का समय अपने आप तय करते हैं। योजना यह थी कि जहां अधिक ट्रैफिक होगा, वहां ग्रीन सिग्नल की अवधि बढ़ेगी और जहां वाहन कम होंगे, वहां सिग्नल जल्दी बदलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि कई सिग्नलों पर वाहनों की संख्या कम होने के बावजूद भी डेढ़ मिनट या उससे अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। पीक आवर्स में बढ़ती परेशानी शहर के जयस्तंभ चौक, शारदा चौक और शास्त्री चौक सहित अन्य व्यस्त चौराहों पर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक ट्रैफिक का दबाव सबसे अधिक रहता है। इन समयों में सिग्नल सिस्टम की खामियां और ज्यादा नजर आती हैं। जयस्तंभ चौक पर हालात सुबह करीब 10:30 बजे जयस्तंभ चौक पर चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। सबसे अधिक दबाव शास्त्री चौक की दिशा में था। यहां 100 सेकेंड रेड और 100 सेकेंड ग्रीन सिग्नल का चक्र चल रहा था, लेकिन इतने समय में आधे से भी कम वाहन ही चौराहा पार कर पाए। शारदा चौक पर ट्रैफिक का असर करीब 11 बजे शारदा चौक पर आजाद चौक की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव अधिक था। यहां भी 90 सेकेंड रेड और 90 सेकेंड ग्रीन का समय निर्धारित रहा। सभी वाहन पार हो गए, लेकिन जयस्तंभ चौक से जुड़े ट्रैफिक के कारण कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बनी। शास्त्री चौक पर सिस्टम की खामी दोपहर 12:30 बजे शास्त्री चौक पर मोतीबाग, तेलीबांधा और रेलवे स्टेशन की ओर से आने वाले वाहनों की संख्या काफी अधिक थी। सभी लेन में वाहनों को करीब डेढ़ मिनट तक रुकना पड़ा। वहीं जयस्तंभ चौक की ओर से आने वाली लेन अपेक्षाकृत जल्दी खाली हो गई, इसके बावजूद उस दिशा में ग्रीन सिग्नल चालू रहा। जबकि नियम के अनुसार वाहन न होने की स्थिति में सिग्नल को रेड होकर अन्य लेन को ग्रीन मिलना चाहिए था। 160 करोड़ का प्रोजेक्ट, फिर भी सवाल स्मार्ट सिटी योजना के तहत करीब 160 करोड़ रुपए की लागत से यह सिस्टम तैयार किया गया था। इसके अंतर्गत शहर के 40 चौराहों पर स्मार्ट सिग्नल, 372 से अधिक सीसीटीवी कैमरे और 23 स्थानों पर रेड लाइट उल्लंघन डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। अधिकारी बोले— तकनीकी जांच कराएंगे इस पूरे मामले पर सहायक पुलिस आयुक्त यातायात सतीश सिंह का कहना है कि वॉल्यूम एक्चुएटेड सिग्नल सिस्टम चालू है और ट्रैफिक के अनुसार स्वचालित रूप से काम करता है। अत्यधिक दबाव की स्थिति में कई बार सिग्नल को मैनुअल मोड में भी रखा जाता है।उन्होंने कहा कि यदि कहीं तकनीकी समस्या सामने आ रही है, तो उसकी जांच कराकर सुधार किया जाएगा।

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