State

दो साल का रिपोर्ट कार्ड: पीक आवर्स में बिजली बचाने पर मिलेगी छूट, रायपुर-बिलासपुर में लाइनें होंगी अंडरग्राउंड

राज्य के ऊर्जा विभाग ने अपने दो साल के कामकाज का ब्यौरा पेश करते हुए बिजली प्रबंधन से जुड़ी कई अहम योजनाओं की जानकारी दी। विभाग के अनुसार सुबह 5 से 8 बजे और शाम 5 से रात 11 बजे तक बिजली की मांग सबसे अधिक रहती है। इन पीक आवर्स में आपूर्ति का दबाव बढ़ने से पावर कंपनियों को निजी स्रोतों से 8–10 रुपये प्रति यूनिट तक की महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि इस अतिरिक्त खर्च को कम करने के लिए “टाइम ऑफ डे (TOD)” मॉडल लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत उपभोक्ताओं को पीक समय में खपत कम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि उपभोक्ता निर्धारित समय में उपयोग घटाते हैं तो उन्हें मासिक बिल में 2 से 3 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। विभाग उपभोक्ताओं को मैसेज और जागरूकता अभियानों के माध्यम से भारी खपत वाले उपकरण—जैसे वॉशिंग मशीन और प्रेस—का उपयोग पीक समय में टालने की सलाह देगा। सौर ऊर्जा उत्पादन सुबह-शाम कम होने से ग्रिड पर दबाव बढ़ता है। इसी को संतुलित करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जिनसे हर आधे घंटे और प्रतिदिन की खपत की जानकारी मिल रही है। उपभोक्ता “मोर बिजली” एप के जरिए अपनी बिजली खपत की निगरानी कर सकते हैं और अनावश्यक उपयोग कम कर सकते हैं। रायपुर और बिलासपुर में अंडरग्राउंड होंगी बिजली लाइनें राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर में बिजली लाइनों को भूमिगत करने की बड़ी योजना बनाई गई है। रायपुर में 5394 किमी लाइन को अंडरग्राउंड करने पर लगभग 7600 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि बिलासपुर में 2150 किमी लाइन को करीब 3100 करोड़ रुपये में भूमिगत किया जाएगा। रायपुर के नयापारा में 18 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला जीआईएस आधारित 33 केवी सबस्टेशन स्थापित किया जाएगा। साथ ही 2027-28 तक 2000 मेगावॉट क्षमता का बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की योजना है, जिसमें से 1260 मेगावॉट के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है। इससे दिन में सौर ऊर्जा से बनी बिजली का उपयोग रात में किया जा सकेगा। 524 गांवों में ग्रिड विस्तार के जरिए बिजली पहुंचाई जाएगी। कोरबा में राखड़ बांध पर 32 मेगावॉट की सौर परियोजना (बैटरी स्टोरेज सहित) स्थापित करने की भी तैयारी है। एनटीपीसी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं ऊर्जा विभाग ने बताया कि करीब 2000 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए NTPC Green Energy Limited और राज्य की पावर जनरेशन कंपनी के साथ संयुक्त कंपनी बनाई गई है। इसके अलावा सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों के सहयोग से 32100 मेगावॉट क्षमता के बिजली संयंत्र स्थापित करने के लिए लगभग 3.4 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किए गए हैं। ऊर्जा सचिव ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में विकसित करना लक्ष्य है। इस अवसर पर वितरण कंपनी के एमडी भीम सिंह, ट्रांसमिशन कंपनी के एमडी राजेश कुमार शुक्ला और जनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

दो साल का रिपोर्ट कार्ड: पीक आवर्स में बिजली बचाने पर मिलेगी छूट, रायपुर-बिलासपुर में लाइनें होंगी अंडरग्राउंड Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय को मिला नया नेतृत्व, प्रो. मनोज दयाल बने कुलपति

छत्तीसगढ़ के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय को नया कुलपति मिल गया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए प्रोफेसर मनोज दयाल की कुलपति पद पर नियुक्ति की घोषणा की है। प्रोफेसर मनोज दयाल वर्तमान में हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में जनसंचार विभाग से जुड़े हुए हैं। वे लंबे समय से मीडिया शिक्षा और अकादमिक प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनके अनुभव और शैक्षणिक पृष्ठभूमि को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय अधिनियम 2004 तथा संशोधित अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलपति का कार्यकाल, सेवा शर्तें और अधिकार संबंधित अधिनियम के नियमों के अनुरूप होंगे। नई नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी और पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शोध, प्रशिक्षण और मीडिया अध्ययन से जुड़ी गतिविधियों में भी नई ऊर्जा आने की संभावना जताई जा रही है।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय को मिला नया नेतृत्व, प्रो. मनोज दयाल बने कुलपति Read Post »

Chhattisgarh, State, Top News

वेतन विसंगति पर KVK अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल तेज, वार्ता विफल; अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के अधिकारी और कर्मचारी वेतन विसंगति, सेवा-लाभ की बहाली और पिछले 18 महीनों से लंबित देयकों के मुद्दे पर हड़ताल पर डटे हुए हैं। पांच दिवसीय कामबंद आंदोलन का आज पांचवां दिन है। चौथे दिन कुलपति के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आंदोलन और उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं। कुलपति से वार्ता में नहीं निकला समाधान धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा पहुंचे और कर्मचारियों से चर्चा की। उनके नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात की, लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि बैठक में ठोस और समयबद्ध समाधान नहीं दिया गया। कभी मामले को राज्यपाल स्तर का बताया गया तो कभी वित्त विभाग और राज्य शासन का हवाला देकर जिम्मेदारी टाल दी गई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ गई है। राजभवन के सामने धरने की चेतावनी फेडरेशन ने साफ कहा है कि यदि जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल दिया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर राजभवन (लोकभवन) के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा। ICAR के नए निर्देशों से बढ़ी समस्या विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि KVK पूरी तरह से Indian Council of Agricultural Research (ICAR) से वित्त पोषित हैं। 20 अगस्त 2024 को जारी नए निर्देशों के बाद एनपीएस अंशदान, पेंशन अनुदान और अन्य भत्तों में कटौती कर दी गई। फिलहाल ICAR केवल मूल वेतन, महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता ही जारी कर रहा है। देशभर में 731 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं और नए नियमों के बाद सभी जगह पूर्ण वेतन भुगतान में कठिनाई आ रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिया गया वेतन कर्मचारियों की याचिका पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश दिया था। इसके बाद विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में अपने संसाधनों से 1.6 करोड़ रुपए खर्च कर कर्मचारियों को पूर्ववत वेतन दिया। राज्य शासन से 3.50 करोड़ की मांग विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि उसकी स्वयं की आय सीमित है। इसलिए 2025-26 के लिए राज्य शासन से 3.50 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता मांगी गई है, ताकि वेतन भुगतान नियमित हो सके। भविष्य में यदि ICAR या राज्य शासन से पूरी राशि मिलती है, तो कर्मचारियों को सभी भत्तों सहित वेतन दिया जाएगा। सेवानिवृत्ति आयु पर स्थिति स्पष्ट प्रशासन के अनुसार KVK कर्मचारी गैर-शिक्षकीय संवर्ग में आते हैं और उनकी सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है। विश्वविद्यालय में 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु केवल शिक्षकों के लिए लागू है। परिसर में हड़ताल पर रोक विश्वविद्यालय ने परिसर में धरना-प्रदर्शन पर रोक का कारण बताते हुए कहा कि यहां कन्या छात्रावास संचालित है और परीक्षाएं जारी हैं। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।

वेतन विसंगति पर KVK अधिकारी-कर्मचारियों की हड़ताल तेज, वार्ता विफल; अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव, पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर मंथन

छत्तीसगढ़ के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रित परिवारों से जुड़े विषयों पर समन्वित चर्चा के लिए रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम 19 और 20 फरवरी 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य सैनिक बोर्ड द्वारा आरएसबी कॉम्प्लेक्स में आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन 10 जिलों के अधिकारी शामिल कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राज्य सैनिक बोर्ड के निदेशक ब्रिगेडियर विवेक शर्मा (सेवानिवृत्त) ने की। पहले दिन राज्य के दस जिलों—रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, जशपुर, अंबिकापुर, बैकुंठपुर, जगदलपुर और कांकेर—के जिला सैनिक कल्याण अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में विभिन्न जिलों में संचालित सैनिक कल्याण योजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्र में आ रही समस्याओं, चुनौतियों और समाधान के प्रयासों को साझा किया। उद्देश्य यह है कि सभी जिलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो और कार्यप्रणाली को और प्रभावी बनाया जा सके। लंबित मामलों पर होगी विशेष चर्चा कॉन्क्लेव के दूसरे दिन 20 फरवरी को पूर्व सैनिक संगठनों और संबंधित विभागों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दौरान COSA, National Cadet Corps (NCC), Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS), Canteen Stores Department (CSD), स्टेशन मुख्यालय और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा होगी। बैठक में पूर्व सैनिकों की लंबित समस्याओं, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य कल्याणकारी मुद्दों पर ठोस समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। पूर्व सैनिकों को मिलेगा सीधा लाभ राज्य में पहली बार आयोजित यह कॉन्क्लेव पूर्व सैनिक समुदाय के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। बोर्ड का मानना है कि इस तरह के समन्वित प्रयासों से योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

रायपुर में पहली बार जिला सैनिक कल्याण अधिकारियों का दो दिवसीय कॉन्क्लेव, पूर्व सैनिकों के मुद्दों पर मंथन Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

रायपुर कलेक्टर ने धरसींवा में स्कूलों और योजनाओं का किया निरीक्षण, मध्यान्ह भोजन चखकर परखी गुणवत्ता

राजधानी रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने धरसींवा विकासखंड का दौरा कर शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न विभागीय योजनाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था, मत्स्य पालन केंद्र और पशुपालन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की। स्कूल पहुंचकर बच्चों से की बातचीत कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक शाला कांदुल में जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के साथ मध्यान्ह भोजन का स्वाद लेकर उसकी गुणवत्ता जांची। उन्होंने स्कूल में चल रहे मरम्मत कार्य को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके बाद शासकीय प्राथमिक शाला सेजबहार में बच्चों की कॉपियां देखीं और उनसे पढ़ाई के विषय में सवाल किए। उन्होंने बच्चों से पूछा कि कक्षा में क्या पढ़ाया जा रहा है और मध्यान्ह भोजन में क्या-क्या परोसा जाता है। अधिकारियों को शिक्षा स्तर और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए गए। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 17 टन मासिक उत्पादन सेजबहार में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत संचालित मत्स्य पालन केंद्र का निरीक्षण किया। यहां पांच नर्सरी और चार तालाबों में मछली पालन किया जा रहा है। नर्सरी में तैयार मछली बीज को तालाबों में छोड़ा जाता है। हितग्राहियों ने बताया कि इस केंद्र से हर महीने लगभग 17 टन मछली का उत्पादन हो रहा है। कलेक्टर ने जल संरक्षण और अधिक पौधारोपण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। कृत्रिम गर्भाधान केंद्र की समीक्षा डॉ. गौरव सिंह ने सेजबहार स्थित कृत्रिम गर्भाधान उपकेंद्र का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 1047 गाय और भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है, जिससे करीब 450 उच्च नस्ल के बछड़े-बछियों का जन्म हुआ है। कलेक्टर ने टीकाकरण व्यवस्था की जानकारी ली और खुरहा-चपका बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।

रायपुर कलेक्टर ने धरसींवा में स्कूलों और योजनाओं का किया निरीक्षण, मध्यान्ह भोजन चखकर परखी गुणवत्ता Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज, 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सुविधा पर जोर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जरूरत एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गई है। शहर में सस्ती, सुलभ और नियमित बस सेवा नहीं होने से आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी विषय को लेकर आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने खुलकर अपनी बात रखी। सभी का मानना है कि जब तक मजबूत और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित नहीं होगा, तब तक ट्रैफिक और महंगे निजी साधनों पर निर्भरता कम नहीं होगी। 350 सिटी बसों की जरूरत पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि शहर में कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूटों पर संचालित होनी चाहिए। उन्होंने नवा रायपुर (एससीआर) तक सुगम आवागमन की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि आम नागरिक को अपनी बात रखने के लिए भी नवा रायपुर जाने में 500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जो अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बस संचालन शुरू किया जा सकता है, जिससे फंडिंग में देरी न हो और बेहतर परिणाम मिल सकें। मिनी बसों और लंबी दूरी के रूट पर फोकस रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने शहर के आंतरिक इलाकों के लिए मिनी सिटी बसों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा एक समय 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद व्यवस्था चरमरा गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शहर की “संस्कृति” का हिस्सा बनाना होगा। लंबी दूरी के रूटों पर नियमित बसें चलेंगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा। माना, सेजबहार जैसे इलाकों में भी मांग बढ़ रही है। ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने कहा कि कई जगह बस स्टॉप तो बने हैं, लेकिन बसें नहीं चल रहीं। ई-बसों के संचालन की प्रक्रिया जारी है। उनका मानना है कि सिटी बसों के नियमित संचालन से ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे। निगम और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी मेयर मीनल चौबे ने कहा कि पूर्व की व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और प्लानिंग की कमी रही, जिसके कारण सेवा प्रभावित हुई। वहीं नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सरकार से ठोस पहल की मांग की। परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल के अनुसार 30 सिटी बसों के लिए परमिट जारी किए गए हैं, लेकिन संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम की है। ऑटो और ई-रिक्शा के किराए तय हैं, उल्लंघन पर शिकायत की जा सकती है। 100 पीएम ई-बसें और नया डिपो शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए पीएम ई-बस योजना के तहत 100 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं। जरवाय क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर डिपो निर्माण कार्य जारी है, जो करीब 4 महीने में पूरा होने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। सस्ती और भरोसेमंद सेवा ही समाधान जनप्रतिनिधियों का मानना है कि अगर नागरिकों को 10-20 रुपए में समय पर बस सुविधा मिलेगी तो उनका भरोसा बढ़ेगा। मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम न केवल ट्रैफिक और प्रदूषण कम करेगा, बल्कि शहर की समग्र छवि भी बदलेगा।

रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज, 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सुविधा पर जोर Read Post »

Chhattisgarh, Education, Political, Raipur, State, Top News

पलारी जनपद पंचायत में SDO 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, खेल मैदान के काम में मांगे थे 1 लाख

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के पलारी जनपद पंचायत में पदस्थ SDO को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। ग्राम पंचायत भवानीपुर में स्कूल के खेल मैदान में मुरूम बिछाने के 10 लाख रुपए के काम की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में अधिकारी द्वारा 1 लाख रुपए की मांग की गई थी। फाइल क्लियर करने के बदले मांगी रिश्वत जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत भवानीपुर में मैदान समतलीकरण और मुरूम डालने का कार्य पूरा हो चुका था, लेकिन भुगतान और अंतिम सत्यापन की प्रक्रिया लंबित थी। आरोप है कि SDO गोपाल कृष्ण शर्मा ने अनुकूल रिपोर्ट देने और फाइल जल्द पास करने के लिए पहले 1 लाख रुपए की मांग की। बाद में बातचीत के बाद यह राशि 80 हजार रुपए में तय हुई। शिकायतकर्ता द्वारा पहले ही 20 हजार रुपए दिए जा चुके थे। इसके बाद दूसरी किस्त के रूप में 25 हजार रुपए देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। ACB ने बिछाया जाल, 25 हजार लेते ही दबोचा पीड़ित सरपंच और ग्रामीणों ने मामले की शिकायत Anti Corruption Bureau रायपुर में दर्ज कराई। प्रारंभिक सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। गुरुवार (19 फरवरी) को शिकायतकर्ता तय रकम लेकर SDO के पास पहुंचा। पहले से तैनात 15 सदस्यीय एसीबी टीम ने जैसे ही अधिकारी को 25 हजार रुपए नकद लेते देखा, तुरंत दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके पर रिश्वत की रकम जब्त कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। हाल ही में हुआ था प्रमोशन बताया जा रहा है कि गोपाल कृष्ण शर्मा पहले पलारी जनपद पंचायत में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। करीब दो महीने पहले ही उसे प्रमोट कर ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में SDO बनाया गया था। मामला गिधपुरी थाना क्षेत्र का है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज एसीबी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ जारी है और संबंधित फाइलों व दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल तो नहीं है। कार्रवाई के बाद जनपद पंचायत कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है। स्थानीय लोगों ने एसीबी की कार्रवाई का स्वागत करते हुए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

पलारी जनपद पंचायत में SDO 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, खेल मैदान के काम में मांगे थे 1 लाख Read Post »

Balodabazar, Chhattisgarh, Crime, Political, Raipur, State, Top News

रायपुर में डीएड और CAF अभ्यर्थियों पर सख्ती, मंत्रालय घेराव से पहले 175 से अधिक को जेल भेजा गया

राजधानी रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे डीएड और CAF अभ्यर्थियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को डीएड अभ्यर्थियों द्वारा आत्मदाह की कोशिश के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद करीब 125 डीएड अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया, जिनमें 45 महिलाएं और 80 पुरुष शामिल हैं। गुरुवार को मंत्रालय घेराव के लिए निकले CAF अभ्यर्थियों को भी पुलिस ने तूता प्रदर्शन स्थल के प्रवेश द्वार पर रोक दिया। लंबी बातचीत और समझाइश के बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए 50 से अधिक अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर सेंट्रल जेल भेज दिया। फिलहाल सभी का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। 60 दिनों से जारी है आंदोलन दोनों समूह के अभ्यर्थी पिछले 60 दिनों से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। अब तक आंदोलन के दौरान 200 से ज्यादा युवाओं की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति आक्रामक प्रदर्शन या घेराव की इजाजत नहीं दी जाएगी। डीएड अभ्यर्थियों का आरोप: आरक्षित पदों पर भी नियुक्ति नहीं डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद निकाले गए थे, जिनमें लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह स्थिति तब है जब राज्य में आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री की सरकार है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को आदेश दिए थे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 अगस्त 2024 को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया है। CAF वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों की पीड़ा CAF अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। मेरिट लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन वेटिंग लिस्ट में शामिल 417 अभ्यर्थियों को यह कहकर रोक दिया गया कि पद रिक्त नहीं हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाद में कई चयनित उम्मीदवार मेडिकल में अयोग्य घोषित हुए या उन्होंने नौकरी छोड़ दी, जिससे पद खाली हुए, लेकिन वेटिंग लिस्ट वालों को मौका नहीं दिया गया। समय बीतने के साथ 417 में से 250 से अधिक अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और अब नई भर्ती में शामिल होने के पात्र नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से गुहार लगाने की बात कही है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

रायपुर में डीएड और CAF अभ्यर्थियों पर सख्ती, मंत्रालय घेराव से पहले 175 से अधिक को जेल भेजा गया Read Post »

Chhattisgarh, Political, Raipur, State

रायपुर में शिवाजी जयंती पर कुनबी समाज का भव्य महोत्सव: शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी

रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में कुनबी समाज द्वारा भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम कोटा स्थित कुनबी समाज भवन में आयोजित होगा, जहां समाज के लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को जोड़ने की पहल समाज के अध्यक्ष महेश्वर धाण्डेकर ने बताया कि सुबह से ही विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बच्चों और युवाओं के लिए रंगोली, निबंध लेखन और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं रखी गई हैं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिवाजी महाराज के जीवन, शौर्य और राष्ट्रभक्ति के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उद्देश्य है। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा। शोभायात्रा बनेगी मुख्य आकर्षण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भव्य शोभायात्रा होगी। यह यात्रा कुनबी समाज भवन से शुरू होकर जगन्नाथ चौक, रामनगर और भारत माता चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगी। शोभायात्रा में शिवाजी महाराज के जीवन प्रसंगों पर आधारित झांकियां, पारंपरिक परिधान में कलाकारों की प्रस्तुति और ढोल-ताशों की गूंज माहौल को उत्सवमय बनाएगी। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति आयोजन में राजेश मूणत, मीनल चौबे, पार्षद अमन ठाकुर और श्रीकुमार मेनन विशेष रूप से शामिल होंगे। जनप्रतिनिधि शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालेंगे। समाज पदाधिकारियों—उपाध्यक्ष लखाराम बेदरे, सचिव राधेश्याम टोंडरे, कोषाध्यक्ष मानिक सिलारे, संयुक्त सचिव दिनेश मिसार और कार्यकारिणी सदस्य कुलेश्वर पारधी व रूपेश घोरमोड़े—ने सभी नागरिकों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

रायपुर में शिवाजी जयंती पर कुनबी समाज का भव्य महोत्सव: शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State, Top News

सूरजपुर में दर्दनाक हादसा: बंद कमरे में जलती सिगड़ी से दम घुटा, दंपती और 4 साल की बेटी की मौत

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई गई सिगड़ी एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई। चंद्रपुर गांव में कोयले के धुएं से दम घुटने के कारण पति-पत्नी और उनकी 4 वर्षीय बेटी की मौत हो गई। कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के अनुसार, कंवल सिंह मंगलवार रात परिवार के साथ भोजन करने के बाद सोने चले गए। अधिक ठंड होने के कारण वे अपनी पत्नी कुंती (25 वर्ष) और 4 साल की छोटी बेटी के साथ पास में बने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने कमरे में सोए। कमरे को गर्म रखने और सुबह जल्दी भोजन बनाने की सुविधा के लिए कुंती जलती हुई सिगड़ी कमरे के अंदर ले गई। कमरे में न तो खिड़की थी और न ही रोशनदान, जिससे पूरी रात धुआं और जहरीली गैस भीतर ही जमा होती रही। सुबह हुआ खुलासा सुबह जब 5 वर्षीय बड़ी बेटी अपनी मां को जगाने पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज देने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। अनहोनी की आशंका पर कंवल सिंह के बड़े भाई ने दीवार में छेद कर अंदर झांका। टॉर्च की रोशनी में तीनों को अचेत अवस्था में पड़ा देखा गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ⚠️ कार्बन मोनोऑक्साइड: अदृश्य और जानलेवा कोयला जलने पर कई गैसें निकलती हैं, जिनमें सबसे खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड होती है। यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसका पता लगाना मुश्किल होता है। जब यह गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है, तो रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। इससे शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और दम घुटने से मौत तक हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में सिगड़ी या अंगीठी जलाकर सोना बेहद खतरनाक हो सकता है। ठंड के मौसम में सावधानी बरतना जरूरी है।

सूरजपुर में दर्दनाक हादसा: बंद कमरे में जलती सिगड़ी से दम घुटा, दंपती और 4 साल की बेटी की मौत Read Post »

Chhattisgarh, Crime, State
Scroll to Top