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कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में पहली बार राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी से प्रभावी हो सकती है। इसे लेकर गृह विभाग द्वारा विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 शहरी थानों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों के 15 थानों के लिए अलग से ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं लागू होंगी। यह मॉडल पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में लागू किया गया था, लेकिन वहां इसे व्यावहारिक कठिनाइयों और समन्वय की कमी के चलते असफल माना गया। बाद में यूपी सरकार ने पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया था। अब इसी मॉडल को रायपुर में लागू करने की तैयारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी पुलिस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं। शहरी-ग्रामीण विभाजन से सामने आ सकती हैं ये समस्याएं 1. वीआईपी मूवमेंट में बढ़ेगी जटिलताअगर कमिश्नरी सिस्टम केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहता है, तो पुराने रायपुर से नवा रायपुर के बीच वीआईपी मूवमेंट के दौरान दो अलग-अलग कारकेड लगाने पड़ेंगे। नगर निगम सीमा तक कमिश्नरी पुलिस और उसके आगे ग्रामीण पुलिस द्वारा सुरक्षा संभालने की व्यवस्था करनी होगी। 2. प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बंटेगी दो हिस्सों मेंइस प्रस्तावित सिस्टम में एयरपोर्ट ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। वहीं सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास, राजभवन और मंत्री बंगलों की सुरक्षा पुलिस कमिश्नर के जिम्मे होगी। दूसरी ओर, नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास, विधानसभा, मंत्रालय और सचिवालय की सुरक्षा ग्रामीण एसपी के अधीन रहेगी। 3. अपराध की जांच में सीमा विवादहत्या, लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों में शहरी और ग्रामीण सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में घटना होने पर जांच एजेंसी तय करने में देरी और आपसी समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रशासनिक अनुमतियों के लिए शासन स्तर पर निर्भरता बढ़ेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो। पुलिस कमिश्नर को धारा 144 लागू करने, हथियार लाइसेंस, जिला बदर और आबकारी से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनका मानना है कि आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाना चाहिए, ताकि अनुभव के आधार पर बेहतर निर्णय लिए जा सकें। एक शहर, दो पुलिसिंग पर सवाल स्थानीय विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि एक ही शहर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था प्रशासनिक भ्रम और जवाबदेही का संकट पैदा कर सकती है। नवा रायपुर जैसे आधुनिक और विकसित क्षेत्र को ग्रामीण श्रेणी में रखना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब राजधानी, कलेक्टर और प्रशासनिक ढांचा एक है, तो पुलिस व्यवस्था भी एक समान होनी चाहिए। अन्यथा पुलिस सुधार के नाम पर यह व्यवस्था आधा-अधूरा प्रयोग साबित हो सकती है। भारत में पुलिसिंग के दो प्रमुख मॉडल भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रणालियों पर आधारित है—सुपरिटेंडेंट सिस्टम, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लागू होता है, जहां कानून-व्यवस्था के अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।वहीं कमिश्नरेट सिस्टम बड़े शहरों में लागू होता है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी दी जाती है और वे सीधे कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं।

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रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत, फांसी लगाने का आरोप; जेल के बाहर परिजनों और समाज का धरना

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सुनील महानंद (30) के रूप में हुई है, जो पॉक्सो प्रकरण में 11 नवंबर 2025 से जेल में बंद था। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक की पत्नी ललिता महानंद जेल परिसर के बाहर बेहोश हो गईं। इसके बाद परिजन, समाज के लोग और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता जेल के बाहर धरने पर बैठ गए और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप परिजनों का आरोप है कि सुनील महानंद को जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि वह कई बार फोन और मुलाकात के दौरान अपनी परेशानी बता चुका था। इसी के विरोध में परिजनों और समाज के लोगों ने जेल के बाहर प्रदर्शन करते हुए जेलर पर कार्रवाई की मांग की और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कैसे हुई घटना? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:45 बजे सुनील महानंद जेल परिसर में टहलते हुए पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। वहां उसने गमछे से फंदा बनाकर पेड़ की टहनी पर फांसी लगा ली। मौके पर मौजूद जेल प्रहरी ने उसे तुरंत नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। इसके बाद उसे तत्काल मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। यह पूरी घटना जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कैदी को फांसी लगाते हुए देखा गया है, जिसके आधार पर पुलिस फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। बिना सूचना दिए भेजा गया शव? परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद बिना जानकारी दिए शव को चोरी-छिपे मॉर्चुरी भेज दिया गया। उन्हें इस घटना की सूचना काफी देर बाद दी गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें जानकारी दी जाती, तो वे मौके पर पहुंच सकते थे। उन्होंने जेल प्रशासन पर जानबूझकर सूचना देने में देरी करने का आरोप लगाया है। सामान और पैसे छीनने के आरोप मृतक के परिजनों ने बताया कि सुनील पिछले दो महीनों से जेल में बंद था और वे नियमित रूप से उससे मिलने जाते थे। सुनील ने उन्हें बताया था कि जेल में उसके कपड़े, खाने-पीने का सामान और पैसे छीन लिए जाते थे। परिजनों का दावा है कि उन्होंने उसे स्वेटर, कपड़े और खाने का सामान दिया था, जो उसे नहीं मिलता था। इसके अलावा पेटीएम के जरिए भेजी गई राशि भी उसे नहीं दी गई। जेल प्रशासन का पक्ष इस मामले पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। फिलहाल मामले ने तूल पकड़ लिया है और जेल प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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रायपुर: मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं बिहान योजना की महिलाएं, मंत्री से मुलाकात तक धरना जारी रखने का ऐलान

रायपुर में एनआरएलएम (बिहान योजना) से जुड़ी महिलाएं अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतर आईं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से राजधानी पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं राजीव गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक संबंधित विभाग के मंत्री से सीधी बातचीत नहीं होती, वे सड़क से नहीं हटेंगी। महिलाएं अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले कई घंटों से प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है और न ही नौकरी की कोई सुरक्षा दी गई है। बेहद कम मानदेय, बढ़ता आर्थिक दबाव धरने में शामिल महिलाओं ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र 1910 रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। महिलाओं का कहना है कि इतनी कम राशि में न तो परिवार का खर्च चल पाता है और न ही काम से जुड़े जरूरी खर्च पूरे हो पाते हैं। उन्होंने मांग की कि उनका मानदेय छत्तीसगढ़ शासन के न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप बढ़ाया जाए। महिलाओं ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में इसी तरह कार्यरत महिलाओं को 6000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की समान हिस्सेदारी होती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में बेहद कम मानदेय देना उनके साथ अन्याय है। निजी संसाधनों से कराया जा रहा सरकारी काम बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार ऑनलाइन कार्य कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए न तो सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराया गया है और न ही इंटरनेट खर्च दिया जाता है। महिलाएं अपने निजी मोबाइल और स्वयं के पैसे से रिचार्ज कर सरकारी काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी कैडर को सरकारी मोबाइल या मोबाइल-इंटरनेट भत्ता देने की मांग की। यात्रा और बैठक भत्ते की भी मांग प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से मीटिंग, प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के लिए बुलाया जाता है, लेकिन इसके बदले न तो यात्रा भत्ता दिया जाता है और न ही कोई मीटिंग या दैनिक भत्ता मिलता है, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। जबरन हटाने और भुगतान में देरी के आरोप महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगहों पर वर्षों से काम कर रही सक्रिय महिलाओं को जबरदस्ती काम से हटाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कई ब्लॉकों में मानदेय 5 से 6 महीने देरी से मिलता है और कई बार बिना कारण राशि काट ली जाती है। महिलाओं की मांग है कि मानदेय हर महीने समय पर और सीधे बैंक खाते में दिया जाए। नियमितीकरण और नियुक्ति पत्र की मांग प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें आज तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। उन्होंने अपने नियमितीकरण की भी मांग की है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मंत्री स्तर पर बातचीत नहीं हुई और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: 6 से 8 जनवरी तक चयन ट्रायल, रायपुर और बिलासपुर में होंगे आयोजन

छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य की टीमों के चयन हेतु 6 से 8 जनवरी 2026 तक रायपुर और बिलासपुर में चयन ट्रायल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी, जबकि बिलासपुर में तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के लिए ट्रायल होंगे। इन ट्रायल्स के माध्यम से विभिन्न खेलों में प्रतिभावान आदिवासी खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अनुसार, इच्छुक खिलाड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए खिलाड़ी विभागीय वेबसाइट sportsyw.cg.gov.in पर उपलब्ध रजिस्ट्रेशन लिंक और क्यूआर कोड का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, सभी ट्रायल स्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

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कांकेर में दिनदहाड़े खेतों में घूमते दिखे दो भालू, तारसगांव में दहशत; महिला पर हमले के बाद बढ़ी चिंता

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के चारामा वन परिक्षेत्र अंतर्गत तारसगांव के पास दिन के उजाले में दो भालुओं के खेतों में घूमते देखे जाने से ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है। यह क्षेत्र गांव से सटा हुआ और घनी आबादी वाला इलाका है, जिससे किसी बड़ी घटना की आशंका जताई जा रही है। भालुओं का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जंगल से सटे गांवों में अब भालू और तेंदुए जैसे जंगली जानवरों की आवाजाही आम होती जा रही है। भोजन और पानी की तलाश में ये जानवर रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला पर भालुओं के हमले से मचा था हड़कंप कुछ दिन पहले चारामा के तेलगुड़ा गांव में दो भालुओं ने एक महिला पर हमला कर दिया था। बताया गया कि महिला सुबह घर के बाहर झाड़ू लगा रही थी, तभी अचानक भालुओं ने हमला कर दिया। इस हमले में महिला के सिर, कमर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। फिलहाल महिला चारामा अस्पताल में इलाजरत है। वन विभाग ने जारी की चेतावनी लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि लोग शाम 6 बजे के बाद घर से बाहर न निकलें और अपने पालतू जानवरों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखें। साथ ही वन विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में ठोस और स्थायी कदम उठाने की मांग की जा रही है।

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नववर्ष पर दर्दनाक हादसा: कोरबा में जर्जर पुल बना जानलेवा, युवक की मौत, दो दोस्त घायल

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नववर्ष के पहले ही दिन एक हृदयविदारक सड़क हादसा सामने आया। बांगो थाना क्षेत्र के पोड़ी-उपरोड़ा इलाके में तान नदी पर बने जर्जर गुरसिया पुल पर स्कूटी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में पुरानी बस्ती, कोरबा निवासी 21 वर्षीय प्रकाश श्रीवास की जान चली गई। वहीं, उसके दोस्त अनमोल गोस्वामी और हरि गोस्वामी घायल हो गए हैं। कैसे हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, तीनों युवक एक ही स्कूटी पर सवार होकर परला की ओर जा रहे थे। गुरुवार देर रात जब वे गुरसिया पुल से गुजर रहे थे, तब पुल पर बने गड्ढों से बचने के दौरान स्कूटी अनियंत्रित हो गई और सीधे पुल की रेलिंग से जा टकराई। टक्कर इतनी तेज थी कि प्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गया। मोबाइल से खुला पूरा मामला हादसे के बाद घायल युवकों ने न तो तत्काल पुलिस को सूचना दी और न ही परिजनों को। रात में बांगो पुलिस को सूचना मिली कि सड़क पर एक युवक घायल अवस्था में पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रकाश को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान नहीं हो पाने के कारण पुलिस प्रयास कर रही थी। इसी दौरान सुबह मृतक के मोबाइल पर आए कॉल से पुलिस को उसकी पहचान और घटना की पूरी जानकारी मिल सकी। इसके बाद परिजनों को सूचित किया गया, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं बनी चिंता यह हादसा जिले में खराब सड़कों और जर्जर पुलों की समस्या को उजागर करता है। आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की मरम्मत को लेकर गंभीर कदम उठाने की जरूरत बताई जा रही है। फिलहाल पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोड़ी-उपरोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मर्च्युरी में रखवा दिया है और मामले की जांच जारी है।

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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से जमानत, DGP को कड़ी फटकार

रायपुर।छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और ACB/EOW द्वारा दर्ज मामलों में हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने जमानत आदेश जारी करते हुए जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने खास तौर पर सह-आरोपी लक्ष्मी नारायण बंसल को गिरफ्तार न किए जाने को लेकर नाराजगी जताई और इसे कानून का ‘चुनिंदा इस्तेमाल’ बताया। सह-आरोपी पर कार्रवाई नहीं, जांच की पारदर्शिता पर सवाल हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष लक्ष्मी नारायण बंसल के बयान पर भरोसा कर रहा है, लेकिन उसके खिलाफ स्थायी वारंट होने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार, आरोपी को खुला छोड़ना जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने इस लापरवाही को “Grave Violation of Law” करार देते हुए राज्य के DGP को व्यक्तिगत रूप से मामले की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सभी पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है। जुलाई से जेल में थे चैतन्य बघेल चैतन्य बघेल 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। ED ने उन्हें पिछले साल मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था, जबकि ACB/EOW ने भ्रष्टाचार मामले में सितंबर में तब गिरफ्तार किया जब वे पहले से जेल में थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। ED और ACB के आरोप ED का आरोप है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के संरक्षक थे और उन्होंने करीब 1000 करोड़ रुपए के लेनदेन को संभाला।वहीं ACB का दावा है कि उन्हें 200 से 250 करोड़ रुपए की अवैध राशि मिली और पूरे घोटाले की रकम 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। भूपेश बघेल का बयान बेटे को जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। आज सत्य की जीत हुई है।” जमानत की खबर के बाद समर्थकों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। बचाव पक्ष की दलील चैतन्य बघेल के वकील फैजल रिजवी ने कहा कि गिरफ्तारी केवल सह-आरोपी के बयान के आधार पर की गई, जो खुद नॉन-बेलेबल वारंट का आरोपी है और खुलेआम घूम रहा था।उन्होंने दावा किया कि चैतन्य बघेल ने जांच में पूरा सहयोग किया, बावजूद इसके उन्हें कभी समन नहीं भेजा गया और सीधे गिरफ्तार कर लिया गया। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच के अनुसार, भूपेश सरकार के कार्यकाल में शराब सिंडिकेट के जरिए— इस कथित सिंडिकेट में तत्कालीन IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारी शामिल बताए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी होने के आसार, पावर कंपनी ने 24% टैरिफ बढ़ाने का दिया प्रस्ताव

रायपुर।छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 से बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लग सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर करीब 6 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया है। इसी के आधार पर कंपनी ने औसतन 24 प्रतिशत तक बिजली दरें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अगर नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को आंशिक या पूरी तरह से स्वीकार करता है, तो प्रदेश के घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली बिल में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। दिसंबर में दाखिल की गई याचिका नियमों के अनुसार पावर कंपनी को हर साल दिसंबर में आगामी वित्तीय वर्ष के टैरिफ निर्धारण के लिए याचिका दाखिल करनी होती है। इस बार कंपनी ने 31 दिसंबर की समय-सीमा से एक दिन पहले 30 दिसंबर को ही आयोग में अपनी याचिका प्रस्तुत कर दी। याचिका में कंपनी ने 2026-27 के लिए अनुमानित आय, खर्च, संभावित लाभ और पूर्व वर्षों के घाटे का विस्तृत ब्यौरा दिया है। कंपनी का कहना है कि नए सत्र में होने वाले लाभ को पुराने घाटे में समायोजित करने के बाद भी लगभग 6 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व की जरूरत पड़ेगी। 24% तक दर बढ़ाने का सुझाव पावर कंपनी ने याचिका के साथ नया टैरिफ प्लान भी जमा किया है, जिसमें बिजली दरों में औसतन 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव शामिल है। अब इस पर राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा गहन समीक्षा की जाएगी। प्रक्रिया के तहत आम उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से दावा-आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इसके बाद जनसुनवाई आयोजित होगी, जिसमें लोग अपनी राय और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद आयोग अंतिम टैरिफ का फैसला करेगा। पहले भी किया था घाटे का दावा यह पहला मौका नहीं है जब पावर कंपनी ने बड़े घाटे का हवाला दिया हो। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने करीब 5 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा किया था। हालांकि, नियामक आयोग ने उस दावे को पूरी तरह स्वीकार न करते हुए घाटा केवल 500 करोड़ रुपये ही माना था। उस समय कंपनी ने 28,397.64 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता बताई थी, लेकिन आयोग ने केवल 25,636.38 करोड़ रुपये को ही मंजूरी दी थी। तब मामूली बढ़ोतरी पर लगी थी मुहर यदि पिछली बार कंपनी का पूरा घाटा मान लिया जाता, तो बिजली दरों में लगभग 20 प्रतिशत तक वृद्धि होती। लेकिन आयोग के हस्तक्षेप के चलते बिजली दरें दो प्रतिशत से भी कम बढ़ाई गई थीं। अब एक बार फिर सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार नियामक आयोग पावर कंपनी के घाटे को कितनी मान्यता देता है। इसी पर तय होगा कि छत्तीसगढ़ के लोगों को आने वाले दिनों में बिजली कितनी महंगी पड़ेगी।

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छत्तीसगढ़ में लोहा कारोबारियों पर IT की बड़ी कार्रवाई, 50 स्थानों पर छापेमारी जारी

छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने लोहा और स्टील से जुड़े कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 50 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और रायगढ़ जिलों में स्पंज आयरन, स्टील रोलिंग मिल, पावर प्लांट संचालकों और रियल एस्टेट कारोबारियों के प्रतिष्ठानों पर टीमों ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक CRPF जवान सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। सभी ठिकानों पर वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की गहन जांच की जा रही है। जमीन खरीद-फरोख्त में शामिल कारोबारियों के घर और दफ्तर भी सर्च ऑपरेशन की सूची में हैं। 5 दिन पहले हुई थी ED की बड़ी रेड 30 नवंबर को मेडिकल कॉलेजों की मान्यता से जुड़े कथित रिश्वतखोरी मामले में ED ने देशभर के 8 राज्यों में छापे मारे थे, जिनमें रायपुर स्थित रावतपुरा सरकार मेडिकल कॉलेज भी शामिल था।इस दौरान ED ने मोबाइल फोन, DVR, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव जैसे डिजिटल सबूत जब्त किए थे। कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी से पूछताछ भी की गई थी और बैंक खातों का विवरण मांगा गया था। सभी डिजिटल डिवाइस की जांच तकनीकी टीम कर रही है। 11 दिन पहले ACB–EOW ने 19 ठिकानों पर दी थी दबिश 24 नवंबर को ACB और EOW की टीमों ने शराब घोटाले और DMF फंड से जुड़े मामलों में संयुक्त कार्रवाई की थी। रायपुर, बिलासपुर, कोंडागांव, अंबिकापुर और दुर्ग में कुल 19 ठिकानों पर तड़के सुबह छापेमारी की गई। DMF मामले में हरपाल सिंह अरोड़ा और उनसे जुड़े ठेकेदारों के 11 ठिकानों पर सर्च की गई थी। वहीं शराब घोटाले में जेल में बंद अनिल टुटेजा और निरंजन दास के परिजनों से जुड़े रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बस्तर के कई स्थानों पर दबिश दी गई थी।

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रायपुर में मामूली रकम को लेकर हमला: 1000 रुपए के लिए युवक ने मामा के पेट में घोंपी कैंची, आरोपी फरार

रायपुर के डीडी नगर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां डिपरापारा इलाके में मछली पकड़ने गए एक व्यक्ति पर उसके ही परिचित ने कैंची से हमला कर दिया। विवाद की वजह सिर्फ 1000 रुपए बताई जा रही है। हमले में घायल व्यक्ति को गंभीर हालत में एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, इंद्रप्रस्थ डिपरापारा निवासी राजकरण यादव ने बताया कि 10 नवंबर की शाम करीब 5 बजे वह अपने मामा देवेन्द्र यादव के साथ डिपरापारा ईंट भट्ठा के पास खारुन नदी किनारे मछली पकड़ने गया था। उसी दौरान वहां दीपक साहू नाम का युवक भी मौजूद था। बताया जाता है कि दीपक ने देवेन्द्र यादव से तत्काल 1000 रुपए मांगे। जब उसने पैसे देने से इंकार किया तो दीपक भड़क गया और गाली-गलौज करने लगा। विवाद बढ़ने पर उसने जेब से कैंची निकाली और देवेन्द्र यादव के पेट में वार कर दिया। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल देवेन्द्र यादव को परिजनों ने तुरंत एम्स रायपुर पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम ने बताया कि आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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