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रायपुर गैस एजेंसी निलंबित: देरी, बदतमीजी और ज्यादा पैसे मांगने पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाली एक गैस एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की गई है। लगातार शिकायतों के बाद फाफाडीह चौक के पास स्थित रायपुर गैस एजेंसी को निलंबित कर दिया गया है। यह पहली बार है जब सिलेंडर वितरण में गड़बड़ी के चलते किसी एजेंसी पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। आरोप है कि एजेंसी ग्राहकों को समय पर सिलेंडर नहीं दे रही थी। जहां सामान्यतः 25 दिनों में डिलिवरी होनी चाहिए, वहां 35 दिन बीतने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा था। इसके अलावा ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे मांगने और उनके साथ अभद्र व्यवहार करने की शिकायतें भी सामने आई थीं। कार्रवाई के बाद एजेंसी के करीब 12 हजार ग्राहकों को दूसरी एजेंसियों में शिफ्ट कर दिया गया है। इनमें से लगभग 11 हजार उपभोक्ताओं को राजेंद्र एचपी गैस एजेंसी और करीब 1 हजार को शांति एचपी एजेंसी से जोड़ा गया है। अब ये सभी उपभोक्ता इन एजेंसियों से गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकेंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, एजेंसी के बाहर अक्सर “स्टॉक खत्म” का बोर्ड लगा दिया जाता था। लोग सुबह से लाइन में लगते थे, लेकिन कई घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाता था। इस वजह से कई बार वहां विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनी। जिला खाद्य नियंत्रक के अनुसार, एजेंसी के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। जिन उपभोक्ताओं को नई एजेंसियों में जोड़ा गया है, उनके लिए वितरण केंद्र भी शुरू कर दिए गए हैं और सप्लाई को सुचारु करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि किसी प्रकार की समस्या आती है, तो उसे जल्द दूर करने का आश्वासन दिया गया है।

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पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 2025-26: आवेदन की आखिरी तारीख तय, 18 से 22 अप्रैल तक पूरी करें प्रक्रिया

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सत्र 2025-26 के लिए आवेदन और स्वीकृति से जुड़ी अंतिम तिथियों की घोषणा कर दी गई है। रायपुर जिले के सभी शासकीय और निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग संस्थानों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। छात्रवृत्ति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से विभागीय पोर्टल पर संचालित की जा रही है। पात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को निर्धारित समय के भीतर पंजीयन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, ताकि समय पर स्वीकृति और भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। निर्देशों के अनुसार, संस्थानों को लंबित प्रस्तावों को लॉक कर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर को भेजने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके बाद शासकीय संस्थानों और जिला स्तर पर स्वीकृति आदेश लॉक करने की आखिरी तारीख 20 अप्रैल है। वहीं राज्य कार्यालय को भुगतान प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी तय की गई है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपए और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1 लाख रुपए रखी गई है। आवेदन के लिए स्थायी जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और पिछली कक्षा का परीक्षा परिणाम अनिवार्य होगा। सत्र 2025-26 से कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। अब संस्थानों के लिए जियो-टैगिंग और विद्यार्थियों के लिए NSP पोर्टल पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य कर दिया गया है।

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छत्तीसगढ़ में 18 अप्रैल को निजी स्कूल बंद: RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध तेज

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन अब और तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 17 और 18 अप्रैल को लेकर अहम फैसले लिए हैं, जिससे स्कूल संचालन प्रभावित होगा। एसोसिएशन के अनुसार, 1 मार्च से शुरू हुए आंदोलन के तहत पहले ही यह तय किया गया था कि शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत लॉटरी से चयनित वंचित वर्ग के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हाल ही में 14 अप्रैल को हुई कार्यकारिणी बैठक में दो नए निर्णय लिए गए। इसके तहत 17 अप्रैल को स्कूल संचालक और शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे, जबकि 18 अप्रैल को पूरे प्रदेश के निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। एसोसिएशन ने इन फैसलों की जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री को दे दी है। साथ ही मांग की है कि सरकार शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च को सार्वजनिक करे, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके। पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जिससे निजी स्कूलों को लगातार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।

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छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक बोतल शराब नीति पर बवाल: सप्लाई घटी, सस्ती शराब दुकानों से गायब

छत्तीसगढ़ में शराब की पैकेजिंग को लेकर सरकार की नई नीति विवाद का कारण बन गई है। कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक (PET) बोतलों में शराब बेचने के फैसले का डिस्टिलर्स और बोतल एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है। इसका असर अब सीधे बाजार और उपभोक्ताओं पर दिखने लगा है। राज्य की कई सरकारी शराब दुकानों में सस्ती शराब की उपलब्धता अचानक कम हो गई है या पूरी तरह खत्म हो गई है। बताया जा रहा है कि विरोध के चलते कई डिस्टिलर्स ने उत्पादन और सप्लाई धीमी कर दी है, जिससे खासकर लो-कॉस्ट देसी और विदेशी शराब की कमी देखने को मिल रही है। सरकार का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल करने से ट्रांसपोर्ट आसान होगा, टूट-फूट कम होगी और लागत में भी कमी आएगी। लेकिन डिस्टिलर्स और बोतल निर्माता कंपनियों का तर्क है कि यह फैसला बिना पर्याप्त तैयारी के लिया गया है और इससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। इसी बीच, विभागीय स्तर पर भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ फील्ड अफसरों ने अलग समूह बनाकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कई जगह शराब दुकानों के बाहर चालानी कार्रवाई भी तेज कर दी गई है, जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मुद्दे पर बॉटलिंग एसोसिएशन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना विरोध दर्ज करा चुका है। उनका कहना है कि इस फैसले से करीब 15 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं, खासकर वे लोग जो कांच की बोतलों की रीसाइक्लिंग से जुड़े हैं। फिलहाल, सरकार और उद्योग से जुड़े संगठनों के बीच जारी इस खींचतान का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें दुकानों में मनचाहा उत्पाद नहीं मिल पा रहा है।

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रायपुर टिंबर मार्केट में भीषण आग: देर रात गोदाम जला, लाखों का नुकसान, शॉर्ट सर्किट की आशंका

राजधानी रायपुर के खमतराई क्षेत्र स्थित टिंबर मार्केट में गुरुवार देर रात एक गोदाम में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। देखते ही देखते आग ने तेज़ी से फैलकर पूरे गोदाम को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, सबसे पहले गोदाम से धुआं उठता नजर आया और कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। गोदाम में बड़ी मात्रा में लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिससे आग और तेजी से फैलती चली गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम शुरू किया। आग की तीव्रता को देखते हुए कई फायर ब्रिगेड वाहन मौके पर तैनात किए गए हैं और लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के इलाके को खाली कराया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो सके। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस आगजनी में लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। फिलहाल आग लगने की असली वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है। आग पूरी तरह बुझने और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी।

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दुर्ग में बड़ा फर्जीवाड़ा: निलंबित शिक्षक ने खुद की बहाली का फर्जी आदेश जारी किया, जांच शुरू

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां निलंबित शिक्षक ने कथित रूप से फर्जी ई-मेल के जरिए अपनी बहाली का आदेश जारी कर दिया। आरोपी ने सामान्य प्रशासन विभाग के नकली लेटरहेड का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश तैयार किया और अधिकारियों को भेज दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब आदेश की भाषा और शब्दावली पर अधिकारियों को संदेह हुआ। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि ई-मेल में इस्तेमाल किए गए शब्द सामान्य शासकीय आदेशों से मेल नहीं खाते थे। यह मामला District Education Office Durg के संज्ञान में आने के बाद तुरंत जांच शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार यदि यह आदेश फर्जी साबित होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा और केस पुलिस को सौंप दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक शेषनारायण साहू पहले प्राथमिक शाला खुर्सीडीह में पदस्थ था। उन पर कार्य में लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन न करने और शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग न देने जैसे आरोप लगे थे। जांच के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचार का दोषी पाया गया और 21 जनवरी 2026 को निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, छुरिया (जिला राजनांदगांव) निर्धारित किया गया था। मामले में नया मोड़ तब आया जब 7 अप्रैल 2026 को ई-मेल के माध्यम से एक कथित बहाली आदेश सामने आया, जिसमें दावा किया गया कि विभागीय जांच के बाद उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया है और उन्हें पुनः शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला में पदस्थ किया गया है। इस ई-मेल ने विभाग में कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर दी, लेकिन बाद में जांच में इसकी वैधता पर सवाल उठे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि यह ई-मेल शिक्षक के निजी आईडी से भेजा गया हो सकता है, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और मजबूत हो गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी बहाली आदेश केवल सक्षम प्राधिकरण द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाते हैं, ऐसे में यह ई-मेल आदेश पूरी तरह नियमों के विपरीत है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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मस्तूरी गोलीकांड: फरार कांग्रेस नेता के घर आधी रात पुलिस का सर्च ऑपरेशन, नहीं मिला आरोपी

बिलासपुर के मस्तूरी में हुए गोलीकांड मामले में फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। इसी क्रम में पुलिस ने कांग्रेस नेता और इनामी आरोपी नागेंद्र राय के ठिकाने पर आधी रात को सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस की टीम रात करीब एक बजे तोरवा क्षेत्र के लालखदान-महमंद स्थित उसके घर पहुंची। कार्रवाई के दौरान डॉग स्क्वायड और हथियारबंद जवान भी मौजूद थे। टीम ने घर के हर कमरे की बारीकी से तलाशी ली, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। छापेमारी के दौरान नागेंद्र राय के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और बहसबाजी भी की। परिजनों ने देर रात की गई कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए पुलिस को रोकने की कोशिश की। इसके चलते मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। करीब ढाई घंटे तक चले इस सर्च ऑपरेशन के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल सका। पुलिस का कहना है कि इस दौरान परिजनों द्वारा शासकीय कार्य में बाधा भी डाली गई, जिसके चलते उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में फरार आरोपी नागेंद्र राय और टाकेश्वर पाटले पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर पर छिपा हो सकता है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि वह वहां नहीं मिला, जिससे आशंका जताई जा रही है कि आरोपी राज्य से बाहर भी हो सकता है। यह मामला 29 अक्टूबर को मस्तूरी बस स्टैंड स्थित एक ऑफिस में हुई फायरिंग से जुड़ा है, जहां नकाबपोश हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। जवाबी कार्रवाई में भी फायरिंग हुई, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे। जांच में यह मामला आपसी रंजिश और वर्चस्व से जुड़ा पाया गया, जिसमें कई लोगों की भूमिका सामने आई है। अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता अब भी फरार हैं।

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छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट के दो मामले वायरल: कोरबा और बिलासपुर में मामूली विवाद पर हिंसा

छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक मामला कोरबा का है, जबकि दूसरा बिलासपुर का बताया जा रहा है। दोनों ही घटनाओं में मामूली विवाद के बाद जमकर लात-घूंसे चले। कोरबा जिले के सिविल लाइन रामपुर थाना क्षेत्र में 11 अप्रैल की रात निहारिका स्थित अंग्रेजी शराब दुकान के बाहर यह घटना हुई। शराब खरीदने के दौरान भीड़ में हाथ टकराने को लेकर दो पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इस दौरान एक युवक ने सुरक्षा कर्मी के डंडे से हमला किया, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी उसे पकड़कर पिटाई कर दी। कुछ देर तक मौके पर हंगामा चलता रहा, बाद में मामला शांत हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों के व्यवहार को देखते हुए उनके खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। दूसरी घटना बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र की है। यहां सिरगिट्टी के गणेश नगर निवासी शेख इकबाल रात में रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल से खाना लेकर लौट रहा था। इसी दौरान लक्की दास और पंकज से उसका विवाद हो गया। विवाद के बाद आरोपियों ने अपने साथियों को बुला लिया और युवक को घेरकर मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया। पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक को जमीन पर गिराकर लात-घूंसे से पीटते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल देर रात तक खुला रहता है, जिससे वहां भीड़ जमा रहती है और अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं।

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प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू, लेकिन व्यवस्था अधूरी: 4 रंग के डस्टबिन नियम पर अमल नहीं

छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी अधूरी दिखाई दे रही है। नए नियम के तहत अब घरों, दुकानों और कार्यालयों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग डस्टबिन में रखना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और विशेष/सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रंग के डिब्बों में संग्रहित करना होगा। नियम का पालन न करने पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, लेकिन अब तक जुर्माने की राशि तय नहीं की गई है। नए नियम के अनुसार गीले कचरे के लिए हरे रंग का डस्टबिन, सूखे कचरे के लिए नीला, खतरनाक कचरे के लिए लाल और विशेष कचरे के लिए काला डिब्बा निर्धारित किया गया है। गीले कचरे में भोजन के अवशेष, सब्जी-फल के छिलके और बगीचे का कचरा शामिल होता है, जिससे कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसी सामग्री आती है, जिन्हें रीसाइक्लिंग के लिए अलग रखा जाता है। खतरनाक कचरे में बैटरी, केमिकल, पेंट, डायपर और बल्ब जैसे सामान शामिल हैं, जबकि विशेष कचरे में मास्क, ग्लव्स और मेडिकल वेस्ट जैसी सामग्री आती है। हालांकि नियम कागजों में लागू हो चुके हैं, लेकिन शहरों में इसकी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है। रायपुर में करीब 250 कचरा गाड़ियों में से केवल 100 गाड़ियों में ही चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था है, जबकि बाकी अभी भी दो कंपार्टमेंट वाली ही हैं। अन्य जिलों में स्थिति और भी कमजोर बताई जा रही है। कई नगरीय निकायों में न तो नई गाड़ियां पूरी तरह उपलब्ध हैं और न ही कचरा संग्रहण प्रणाली में बदलाव किया गया है। इस कारण पुराने तरीके से ही कचरा उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संसाधनों की कमी और जुर्माने की स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण सख्ती नहीं हो पा रही है। राज्य में 27 जनवरी को अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन उसके बाद भी आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि सभी निकायों को चार कंपार्टमेंट वाली गाड़ियां अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और जुर्माने की राशि तय करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

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