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छत्तीसगढ़ बजट 2026: सीएम साय बोले- समावेशी विकास और सुशासन को नई मजबूती देगा बजट

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण के विज़न को मजबूती देगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बजट समावेशी विकास, सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाएगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ आमजन के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नकाल में जल संसाधन विभाग पर चर्चा सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस विधायक भोलाराम साहू ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि जल संसाधन विभाग के किन-किन कार्यों को बजट में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने जवाब में बताया कि वर्ष 2024-25 में 16 कार्य शामिल थे, जिनमें से एक कार्य को 13 अगस्त 2025 को स्वीकृति मिली। पाइपलाइन से जुड़े कार्य को पूरा कर लिया गया है, जिस पर 24.51 करोड़ रुपये खर्च हुए। खुज्जी विधानसभा क्षेत्र से जुड़े 15 अन्य कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। शेष कार्यों की समय-सीमा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा। मोबाइल टावर स्थापना पर उठा सवाल विधायक सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर जिले में भवनों की उपयुक्तता जांच के बिना मोबाइल टावर लगाए जाने का मुद्दा उठाया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि बिना परीक्षण के टावर लगाए गए हैं तो लिखित शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल टावर स्थापना के लिए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के “राइट ऑफ वे” पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अपनाई जाती है। सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता भाजपा विधायक सुनील सोनी के प्रश्न के जवाब में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि बीते एक वर्ष में प्रदेश में 6,898 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु हुई है। इनमें से 621 मौतें रायपुर जिले में दर्ज की गईं। मंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा सुधारने और यातायात व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। सदन में सवाल-जवाब के इस दौर के बीच अब सभी की निगाहें बजट के विस्तृत प्रावधानों और घोषणाओं पर टिकी हैं, जिससे प्रदेश के विभिन्न वर्गों को बड़ी उम्मीदें हैं।

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57 करोड़ की तीन मल्टीलेवल पार्किंग बेअसर: सुरक्षा और सिस्टम फेल, कमिश्नरेट के बाद रिपोर्ट तैयार

रायपुर शहर में करीब 57 करोड़ रुपये की लागत से बनी तीन मल्टीलेवल पार्किंग सुविधाएं उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, पास सिस्टम और निगरानी की कमी के कारण लोग इन पार्किंग भवनों का उपयोग करने से बच रहे हैं। अब पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पहली बार इन पार्किंग व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जा रही है और पुख्ता बदलाव के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। नगर निगम को यह सवाल परेशान कर रहा है कि सैकड़ों वाहनों की क्षमता होने के बावजूद लोग अपनी गाड़ियां सड़कों पर क्यों खड़ी कर रहे हैं। कमिश्नरेट लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पार्किंग शुल्क, पास सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर सुझाव मांगे गए हैं। सड़कों पर 2 घंटे में 87 हजार वाहन केंद्र सरकार की एजेंसी राइट्स के सर्वे के अनुसार, जिन इलाकों में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई गई है, वहां हर दो घंटे में करीब 87 हजार वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं। इसके बावजूद पार्किंग भवन खाली नजर आते हैं। एमजी रोड, सदर बाजार, जीई रोड, मालवीय रोड, गोल बाजार, कोतवाली चौक और रवि भवन जैसे इलाकों में सड़क किनारे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। तीनों पार्किंग की स्थिति कलेक्टोरेट पार्किंग (22 करोड़ रुपये)छह मंजिला इस पार्किंग में 406 कार और 140 दोपहिया वाहन खड़े करने की क्षमता है, लेकिन यहां रोजाना तोड़फोड़ और वाहन चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। जवाहर बाजार पार्किंग (20 करोड़ रुपये)यहां 246 कार और 400 दोपहिया वाहनों की क्षमता है, लेकिन रात में अंधेरा और प्रभावी निगरानी की कमी बड़ी समस्या है। स्थानीय कारोबारियों के दबदबे के कारण कई गाड़ियां बिना शुल्क के खड़ी की जा रही हैं। जयस्तंभ चौक पार्किंग (15 करोड़ रुपये)240 कार और 350 दोपहिया की क्षमता वाली इस पार्किंग में पास सिस्टम में गड़बड़ी है। एक पास पर कई गाड़ियां खड़ी होने और एंट्री-एग्जिट जांच के अभाव की शिकायतें मिल रही हैं। नए पार्किंग भवन की जरूरत राइट्स की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शहर के व्यस्त इलाकों—एमजी रोड (शारदा चौक से गुरुनानक चौक), जीई रोड, सदर बाजार रोड, फाफाडीह से रेलवे स्टेशन चौक और कोतवाली चौक से फायर ब्रिगेड चौक—के बीच छोटे या मध्यम आकार के नए पार्किंग भवन बनाए जाएं, ताकि बाजार आने वाले लोग सड़क पर वाहन खड़े करने के बजाय पार्किंग सुविधा का उपयोग करें। “सिस्टम में बड़े बदलाव होंगे” नगर निगम आयुक्त विश्वदीप के अनुसार, तीनों मल्टीलेवल पार्किंग के बेहतर उपयोग के लिए व्यापक योजना पर काम हो रहा है। सुरक्षा, निगरानी और शुल्क व्यवस्था में बदलाव कर इन्हें अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि लोग स्वेच्छा से यहां वाहन पार्क करें। कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार पार्किंग सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित बदलाव ट्रैफिक जाम की समस्या को कितना कम कर पाते हैं।

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रायपुर पुलिस कमिश्नरी को एक माह: 15,836 अपराध दर्ज, शहर में दुष्कर्म-चोरी तो देहात में हत्या के मामले ज्यादा

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुए एक माह पूरा हो गया है। इस दौरान 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 800 से ज्यादा बदमाशों की गिरफ्तारी की गई है। नई व्यवस्था के तहत शहर को तीन जोन—सेंट्रल, वेस्ट और नॉर्थ—में विभाजित किया गया है, जिनमें 21 थानों को शामिल किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कमिश्नरी सिस्टम से पुलिसिंग मजबूत होगी और अपराधों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। हालांकि, पिछले एक वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि जिले के 33 थानों में कुल 15,836 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें शहरी क्षेत्र के 21 थानों में दुष्कर्म, चोरी और जालसाजी के मामले अधिक रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 12 थानों में हत्या, मारपीट, दहेज मृत्यु और सड़क हादसों में मौत के मामले ज्यादा सामने आए। वेस्ट जोन-2 सबसे संवेदनशील आंकड़ों के अनुसार कमिश्नरेट क्षेत्र में वेस्ट जोन-2 को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां के 9 थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में 4,072 अपराध दर्ज हुए, जो अन्य जोनों की तुलना में अधिक हैं। “शुरुआत में आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं” रिटायर्ड डीजी अन्वेष मंगलम का कहना है कि कमिश्नरी लागू होने के बाद थानों का पुनर्गठन हुआ है, इसलिए शुरुआत में अपराध के आंकड़े ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। उनका मानना है कि अधिकारी-आधारित पुलिसिंग, नियमित पेट्रोलिंग और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले समय में अपराध में कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हर शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना जरूरी है, ताकि अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। हर दिन 43 अपराध, रोज 5 से ज्यादा चोरी रायपुर जिले में औसतन प्रतिदिन 43 अपराध दर्ज हो रहे हैं। चोरी की घटनाएं सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल 1,921 चोरी के मामले दर्ज हुए, जिनमें 1,442 वाहन चोरी और 479 मकान चोरी के मामले शामिल हैं। इसके अलावा, औसतन हर दिन एक अपहरण का मामला भी सामने आ रहा है। बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर जोर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, फिलहाल बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। जोनवार अपराधों की समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस प्रकार की घटनाएं अधिक हो रही हैं और उसी आधार पर रणनीति बनाई जाएगी। कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत को लेकर प्रशासन आश्वस्त है कि सख्त कार्रवाई और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले महीनों में अपराध दर में गिरावट देखने को मिलेगी।

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छत्तीसगढ़ में होली पर ड्राई डे: सरकार का यू-टर्न, राज्यभर में बंद रहेंगी शराब दुकानें

छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने होली पर शराब बिक्री की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। आबकारी विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करेगा। आदेश जारी होने के बाद राज्यभर में होली के दिन सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। दरअसल, नई आबकारी नीति में पहले तय सात ड्राई डे में से तीन दिन—होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी निर्वाण दिवस)—को हटाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि इन अवसरों पर शराब दुकानें खुली रहेंगी। लेकिन अब सरकार ने अपना रुख बदलते हुए होली पर फिर से ड्राई डे लागू करने का निर्णय लिया है। कानून-व्यवस्था और सामाजिक पहलू को देखते हुए फैसला सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। होली जैसे बड़े त्योहार के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से शराब बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। हालांकि, अन्य ड्राई डे पूर्व निर्धारित नीति के अनुसार ही लागू रहेंगे। 2026-27 में सिर्फ चार तय ड्राई डे नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत फिलहाल केवल चार दिन ही ड्राई डे घोषित किए गए हैं: इन तिथियों पर राज्यभर में शराब बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। 30 जनवरी को खुले दुकानों पर हुआ था विरोध गौरतलब है कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे और नियमों में बदलाव की मांग की थी। अब होली को लेकर सरकार के ताजा निर्णय से स्थिति साफ हो गई है कि त्योहार के दिन शराब बिक्री नहीं होगी। हालांकि, आबकारी विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही अंतिम स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: कवासी लखमा की वापसी, भाजपा नेताओं से गले मिले; आर्थिक सर्वेक्षण पेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण के साथ हुई। पहले ही दिन सदन में राजनीतिक और वित्तीय दोनों ही मोर्चों पर हलचल देखने को मिली। लंबे समय बाद सदन पहुंचे पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने भाजपा नेताओं से गले मिलकर मुलाकात की, वहीं वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की। सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। अभिभाषण में बताया गया कि रायपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना की जाएगी। साथ ही पिछले दो वर्षों में 532 नक्सलियों के न्यूट्रलाइज होने का दावा भी किया गया। एक साल बाद सदन में कवासी लखमा की वापसी करीब एक वर्ष तक जेल में रहने के बाद कवासी लखमा सत्र में शामिल हुए। सदन पहुंचते ही उन्होंने भाजपा नेता अजय चंद्राकर, रामविचार नेताम और धर्मजीत सिंह से गले मिलकर अभिवादन किया। सदन में अजय चंद्राकर ने उनकी पीठ थपथपाकर स्वागत भी किया। उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्हें सशर्त रूप से सत्र में भाग लेने की अनुमति दी गई है। विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वे केवल सदन की कार्यवाही में शामिल होंगे और अपने मामले से संबंधित किसी भी विषय पर वक्तव्य नहीं देंगे। उनकी आवाजाही और उपस्थिति का औपचारिक रिकॉर्ड रखा जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश, बजट कल वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। 24 फरवरी को राज्य का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं पर फोकस सूत्रों के अनुसार इस बार का बजट गुड गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और उद्योग पर केंद्रित रहेगा। युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए विशेष योजनाएं प्रस्तावित हैं। दो अहम विधेयक भी सूची में सत्र के दौरान दो महत्वपूर्ण विधेयक लाए जाने की संभावना है — इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। सवालों की बौछार से घिरेगी सरकार बजट सत्र के लिए अब तक 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अविलंबनीय चर्चा, अशासकीय संकल्प और याचिकाएं भी सूचीबद्ध हैं। इससे स्पष्ट है कि सत्र के दौरान सरकार को कई अहम मुद्दों पर जवाब देना होगा। राजनीतिक और वित्तीय दृष्टि से यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां सरकार बजट के माध्यम से अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। अगले एक महीने तक राज्य की राजनीति का केंद्र विधानसभा ही रहेगा।

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छत्तीसगढ़ में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या 1.87 करोड़ पार, दुर्ग में सबसे ज्यादा नए वोटर जुड़े

रायपुर। राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पूरी होने के बाद छत्तीसगढ़ की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। संशोधित आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब कुल 1 करोड़ 87 लाख 30 हजार 914 मतदाता दर्ज किए गए हैं। ड्राफ्ट सूची की तुलना में 2 लाख 34 हजार 994 नए मतदाताओं की बढ़ोतरी हुई है। दुर्ग में सर्वाधिक बढ़ोतरी जिला स्तर पर देखें तो सबसे अधिक करीब 30 हजार नए मतदाता दुर्ग जिले में जुड़े हैं। वहीं रायपुर जिले में मात्र 521 नए नाम जोड़े गए, जो सबसे कम वृद्धि है। 1 लाख से अधिक नाम हटाए गए अंतिम प्रकाशन के अनुसार राज्यभर में 1 लाख 8 हजार 807 नाम सूची से हटाए गए। इनमें मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं। सबसे ज्यादा नाम रायपुर में (करीब 30 हजार) हटाए गए, जबकि कोरबा में 15 हजार और दुर्ग में लगभग 7 हजार नाम विलोपित किए गए। चार महीने चला अभियान SIR अभियान 27 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर करीब चार महीने तक चला। इस दौरान राज्य के 33 जिलों में मिशन मोड में कार्य किया गया। 27 हजार से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर सत्यापन किया और करीब 1.84 करोड़ गणना फॉर्म का डिजिटलीकरण किया गया। दावे-आपत्तियों का समय पर निपटारा 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 तक नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के लिए आवेदन लिए गए। सभी मामलों का निराकरण 14 फरवरी 2026 तक कर लिया गया। ऑनलाइन भी देखें अपना नाम मतदाता अंतिम सूची मतदान केंद्रों के साथ-साथ आधिकारिक पोर्टल पर भी उपलब्ध है। मतदाता जिला निर्वाचन कार्यालय और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर जाकर अपने नाम की जांच कर सकते हैं। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है तो फॉर्म-6 भरकर नया पंजीकरण कराया जा सकता है, जबकि संशोधन या स्थानांतरण के लिए फॉर्म-8 भरा जाता है।

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रायपुर: चंद्रखुरी में 51 फीट ऊंची वनवासी श्रीराम की नई प्रतिमा होगी स्थापित, ग्वालियर से पहुंची 35 टन की मूर्ति

रायपुर। जिले के Chandkhuri में जल्द ही 51 फीट ऊंची वनवासी रूप में Bhagwan Shri Ram की नई भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। चंद्रखुरी को माता कौशल्या की जन्मस्थली और भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है, इसलिए यह स्थान धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। ग्वालियर में तैयार हुई प्रतिमा यह प्रतिमा ग्वालियर में तैयार की गई है। विश्व प्रसिद्ध टिडमिंट पत्थर से निर्मित इस मूर्ति में लगभग 70 टन पत्थर का उपयोग किया गया है, जबकि तैयार प्रतिमा का वजन करीब 35 टन बताया जा रहा है। मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा और उनकी 25 सदस्यीय टीम ने करीब सात महीनों तक लगातार मेहनत कर इस प्रतिमा को आकार दिया। प्रतिमा में 108 रुद्राक्ष की माला भी उकेरी गई है, जो इसकी आध्यात्मिक भव्यता को और बढ़ाती है। तीन हिस्सों में लाई जा रही प्रतिमा भारी भरकम आकार के कारण प्रतिमा को तीन हिस्सों में रायपुर लाया जा रहा है। चंद्रखुरी में इसे जोड़कर विधिवत स्थापित किया जाएगा। पहले भी रही है विशाल प्रतिमा चंद्रखुरी में पूर्व में भी भगवान श्रीराम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है। हालांकि, उसके स्वरूप को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे। नई प्रतिमा को अधिक भव्य और आकर्षक स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। पर्यटन और आस्था को मिलेगा बढ़ावा राम वनगमन पथ से जुड़े इस स्थल पर नई प्रतिमा स्थापित होने से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। स्थानीय प्रशासन और श्रद्धालुओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है। प्रतिमा की स्थापना के बाद चंद्रखुरी एक बार फिर आस्था और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में चर्चा में रहेगा।

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5 दिन में सुधार का वादा, 42 दिन बाद भी हालात जस के तस: खारुन नदी में मिल रहा गंदा पानी

Raipur की जीवनदायिनी Kharun River में गंदे पानी का प्रवाह अब भी जारी है। 4 जनवरी को निरीक्षण के दौरान 5 दिन में सुधार का दावा किया गया था, लेकिन 42 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। 261 करोड़ के एसटीपी बेअसर? शहर के अलग-अलग इलाकों से निकलने वाले सीवेज को रोकने के लिए 261 करोड़ रुपये की लागत से तीन एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाए गए थे। उद्देश्य था कि गंदा पानी सीधे खारुन नदी में न पहुंचे।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चिंगरी नाला समेत अन्य स्थानों से गंदा पानी अब भी सीधे नदी में मिल रहा है। निरीक्षण में जताई गई थी नाराजगी 4 जनवरी को स्थानीय विधायक Rajesh Munat, महापौर Meenal Choubey और निगम आयुक्त Vishwadeep अधिकारियों के साथ चिंगरी नाला और चंदनीडीह एसटीपी का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान नदी में मिलते गंदे पानी को देखकर नाराजगी जताई गई और 5 दिन में व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया था। सफाई और स्क्रीनिंग रॉड तक सीमित कार्रवाई निर्देश के बाद चिंगरी नाले की सफाई कराई गई और स्क्रीनिंग रॉड लगा दी गई। अधिकारियों का दावा है कि इससे कचरा रुकता है और पानी एसटीपी की ओर जाता है। हालांकि स्थानीय स्तर पर अब भी नाले का गंदा पानी सीधे खारुन में मिलते देखा जा रहा है। क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि? विधायक राजेश मूणत का कहना है कि खारुन शहर की लाइफलाइन है और इसे स्वच्छ रखना सबकी जिम्मेदारी है। उनका आरोप है कि पिछली सरकार ने बिना ठोस प्लानिंग के प्लांट तैयार किया था। उन्होंने सुधार के लिए आवश्यक फंड देने की बात कही है। महापौर मीनल चौबे ने बताया कि पाइपलाइन पर वॉल्व चैंबर बनाना जरूरी है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और मॉनिटरिंग की जा रही है। निगम आयुक्त विश्वदीप के अनुसार, चैंबर वॉल्व निर्माण के प्रस्ताव पर स्टेट टीम सर्वे कर चुकी है और लगातार निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। सवाल अब भी कायम खारुन नदी शहर की पहचान और जलस्रोत दोनों है। ऐसे में इसका प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है।

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रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज, 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सुविधा पर जोर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के विस्तार के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जरूरत एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गई है। शहर में सस्ती, सुलभ और नियमित बस सेवा नहीं होने से आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी विषय को लेकर आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने खुलकर अपनी बात रखी। सभी का मानना है कि जब तक मजबूत और भरोसेमंद पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित नहीं होगा, तब तक ट्रैफिक और महंगे निजी साधनों पर निर्भरता कम नहीं होगी। 350 सिटी बसों की जरूरत पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि शहर में कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूटों पर संचालित होनी चाहिए। उन्होंने नवा रायपुर (एससीआर) तक सुगम आवागमन की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना है कि आम नागरिक को अपनी बात रखने के लिए भी नवा रायपुर जाने में 500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं, जो अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत बस संचालन शुरू किया जा सकता है, जिससे फंडिंग में देरी न हो और बेहतर परिणाम मिल सकें। मिनी बसों और लंबी दूरी के रूट पर फोकस रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने शहर के आंतरिक इलाकों के लिए मिनी सिटी बसों की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा एक समय 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद व्यवस्था चरमरा गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का कहना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को शहर की “संस्कृति” का हिस्सा बनाना होगा। लंबी दूरी के रूटों पर नियमित बसें चलेंगी तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा। माना, सेजबहार जैसे इलाकों में भी मांग बढ़ रही है। ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत ने कहा कि कई जगह बस स्टॉप तो बने हैं, लेकिन बसें नहीं चल रहीं। ई-बसों के संचालन की प्रक्रिया जारी है। उनका मानना है कि सिटी बसों के नियमित संचालन से ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगे। निगम और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी मेयर मीनल चौबे ने कहा कि पूर्व की व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और प्लानिंग की कमी रही, जिसके कारण सेवा प्रभावित हुई। वहीं नगर निगम नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने सरकार से ठोस पहल की मांग की। परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल के अनुसार 30 सिटी बसों के लिए परमिट जारी किए गए हैं, लेकिन संचालन की जिम्मेदारी नगर निगम की है। ऑटो और ई-रिक्शा के किराए तय हैं, उल्लंघन पर शिकायत की जा सकती है। 100 पीएम ई-बसें और नया डिपो शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए पीएम ई-बस योजना के तहत 100 इलेक्ट्रिक बसें प्रस्तावित हैं। जरवाय क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर डिपो निर्माण कार्य जारी है, जो करीब 4 महीने में पूरा होने की संभावना है। इसके लिए आवश्यक विद्युत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। सस्ती और भरोसेमंद सेवा ही समाधान जनप्रतिनिधियों का मानना है कि अगर नागरिकों को 10-20 रुपए में समय पर बस सुविधा मिलेगी तो उनका भरोसा बढ़ेगा। मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम न केवल ट्रैफिक और प्रदूषण कम करेगा, बल्कि शहर की समग्र छवि भी बदलेगा।

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पलारी जनपद पंचायत में SDO 25 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, खेल मैदान के काम में मांगे थे 1 लाख

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के पलारी जनपद पंचायत में पदस्थ SDO को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। ग्राम पंचायत भवानीपुर में स्कूल के खेल मैदान में मुरूम बिछाने के 10 लाख रुपए के काम की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में अधिकारी द्वारा 1 लाख रुपए की मांग की गई थी। फाइल क्लियर करने के बदले मांगी रिश्वत जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत भवानीपुर में मैदान समतलीकरण और मुरूम डालने का कार्य पूरा हो चुका था, लेकिन भुगतान और अंतिम सत्यापन की प्रक्रिया लंबित थी। आरोप है कि SDO गोपाल कृष्ण शर्मा ने अनुकूल रिपोर्ट देने और फाइल जल्द पास करने के लिए पहले 1 लाख रुपए की मांग की। बाद में बातचीत के बाद यह राशि 80 हजार रुपए में तय हुई। शिकायतकर्ता द्वारा पहले ही 20 हजार रुपए दिए जा चुके थे। इसके बाद दूसरी किस्त के रूप में 25 हजार रुपए देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। ACB ने बिछाया जाल, 25 हजार लेते ही दबोचा पीड़ित सरपंच और ग्रामीणों ने मामले की शिकायत Anti Corruption Bureau रायपुर में दर्ज कराई। प्रारंभिक सत्यापन के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। गुरुवार (19 फरवरी) को शिकायतकर्ता तय रकम लेकर SDO के पास पहुंचा। पहले से तैनात 15 सदस्यीय एसीबी टीम ने जैसे ही अधिकारी को 25 हजार रुपए नकद लेते देखा, तुरंत दबिश देकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। मौके पर रिश्वत की रकम जब्त कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। हाल ही में हुआ था प्रमोशन बताया जा रहा है कि गोपाल कृष्ण शर्मा पहले पलारी जनपद पंचायत में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत था। करीब दो महीने पहले ही उसे प्रमोट कर ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में SDO बनाया गया था। मामला गिधपुरी थाना क्षेत्र का है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज एसीबी अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पूछताछ जारी है और संबंधित फाइलों व दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में कोई अन्य कर्मचारी या अधिकारी शामिल तो नहीं है। कार्रवाई के बाद जनपद पंचायत कार्यालय में हड़कंप की स्थिति है। स्थानीय लोगों ने एसीबी की कार्रवाई का स्वागत करते हुए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।

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