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वैलेंटाइन डे पर दुर्ग में हाई अलर्ट: 33 पेट्रोलिंग टीमें तैनात, पार्क और मॉल में विशेष निगरानी

वैलेंटाइन डे के मद्देनजर दुर्ग जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। शनिवार को जिलेभर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि, हुड़दंग या असामाजिक तत्वों की हरकतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष ड्यूटी वैलेंटाइन डे को देखते हुए 1 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 5 नगर पुलिस अधीक्षक और 30 थाना प्रभारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। ये अधिकारी पार्क, गार्डन, मॉल, प्रमुख बाजार, पर्यटन स्थलों और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहेंगे और स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे। 33 अतिरिक्त पेट्रोलिंग पार्टियां सक्रिय पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में 33 अतिरिक्त पेट्रोलिंग टीमें लगाई हैं। ये टीमें सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गश्त करेंगी। इसके अलावा 21 प्रमुख स्थानों पर फिक्स प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां पुलिस बल स्थायी रूप से मौजूद रहेगा। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील स्थानों पर विशेष महिला सुरक्षा टीम तैनात की गई है। पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं व युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डायल-112, कंट्रोल रूम और रिजर्व बल को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। ट्रैफिक विभाग को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। भीम आर्मी ने सौंपा ज्ञापन वैलेंटाइन डे के दौरान प्रेमी युगलों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर भीम आर्मी ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मांग की है कि मोरल पुलिसिंग या संस्कृति के नाम पर हिंसा करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रेमी युगलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कानून हाथ में लेने वालों पर होगी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणिशंकर चंद्रा ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी तरह की अव्यवस्था फैलाने, हुड़दंग करने या कानून हाथ में लेने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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हर एफआईआर की डिजिटल मॉनिटरिंग से तेज हुई कार्रवाई: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए गृह विभाग ने कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि अब प्रदेश में दर्ज होने वाली हर एफआईआर की डिजिटल निगरानी की जा रही है। पहले मामलों की समीक्षा मैन्युअल तरीके से होती थी, जिससे विवेचना में देरी होती थी। अब एक विशेष अपराध समीक्षा एप्लीकेशन के माध्यम से एफआईआर का विश्लेषण, समय-सीमा में जांच और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित पर्यवेक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली से त्वरित कार्रवाई संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है, जो देश में अपनी तरह की अनूठी पहल है। किसी भी शिकायत के पीएचक्यू पहुंचते ही वह संबंधित एसपी, डीएसपी और थाने तक तत्काल प्रेषित हो जाती है। उन्होंने बताया कि यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का निराकरण नहीं होता, तो सिस्टम में स्वतः अलार्म सक्रिय हो जाता है। इससे लंबित मामलों की मॉनिटरिंग और कार्रवाई की रफ्तार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नशे और ऑनलाइन जुए के खिलाफ कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई जारी है। इसके साथ ही अनधिकृत ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स पर पहली बार व्यापक कार्रवाई करते हुए 255 ऑनलाइन लिंक और पोर्टल्स को ब्लॉक किया गया है। साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने कई संदिग्ध खातों को सीज किया है। फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले 165 पीओएस संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। गौ-वंश तस्करी पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ने बताया कि गौ-वंश तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां गौ-वंश वध, अवैध परिवहन और व्यापार से जुड़े आदतन आरोपियों की सूची तैयार की गई है। ऐसे 19 आरोपियों की लगातार निगरानी की जा रही है। गौ-वंश वध और अवैध परिवहन के मामलों में 142 वाहनों को राजसात किया गया है, जिनमें से 27 वाहनों की नीलामी भी की जा चुकी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ और डीजी (जेल) हिमांशु गुप्ता भी उपस्थित रहे।

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को दिल्ली तलब: खड़गे-राहुल संग अहम बैठक आज, आंदोलनों की बनेगी रणनीति

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक अहम बैठक आज दिल्ली में होने जा रही है। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ एआईसीसी मुख्यालय में शाम 5 बजे आयोजित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को विशेष रूप से दिल्ली बुलाया गया है। बैठक में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत शामिल होंगे। इनके अलावा दिल्ली पहुंचे अन्य प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारी भी इस बैठक का हिस्सा रहेंगे। संगठन और जनहित के मुद्दों पर मंथन पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में संगठनात्मक नियुक्तियों, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और मनरेगा व एसआईआर जैसे अहम जनहित से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्यभर में होने वाले विरोध प्रदर्शन, धरना और आंदोलन की रूपरेखा भी इसी बैठक में तय की जा सकती है। राहुल गांधी की अध्यक्षता में होगी बैठक राहुल गांधी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन को मजबूत करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनज़र पार्टी की रणनीति को धार देना है। बैठक में यह भी तय होगा कि किन जिलों और क्षेत्रों में कांग्रेस को ज्यादा सक्रियता दिखानी है और किन मुद्दों को जनता के बीच प्राथमिकता से उठाया जाएगा। दीपक बैज और महंत पेश करेंगे रिपोर्ट पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत संगठन की मौजूदा स्थिति और जमीनी फीडबैक पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। वहीं, भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की मौजूदगी को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों नेताओं का अनुभव और जनाधार पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। आगामी आंदोलनों को मिलेगी दिशा इस बैठक के बाद कांग्रेस छत्तीसगढ़ में आने वाले आंदोलनों और राजनीतिक कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा कर सकती है। पार्टी का दावा है कि बैठक में लिए गए फैसले केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका सीधा असर कार्यकर्ताओं और आम जनता तक पहुंचेगा। कुल मिलाकर, आज की यह बैठक छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है और इसके नतीजे आने वाले हफ्तों में प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय कर सकते हैं।

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कमिश्नरी सिस्टम के बाद रायपुर पुलिस का बड़ा एक्शन, अपराधियों को CSP ऑफिस में सख्त चेतावनी

रायपुर।रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस ने अपराध नियंत्रण को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी कड़ी में आज खमतराई CSP कार्यालय में आदतन अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। डिप्टी कमिश्नर मयंक गुज्जर के निर्देश पर खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को खमतराई CSP ऑफिस में पेश किया गया। इस दौरान CSP पूर्णिमा लामा, उरला थाना प्रभारी रोहित मालेकर, गुढ़ियारी थाना प्रभारी बी.एल. चंद्राकर और खमतराई थाना प्रभारी राजेश सिंह मौजूद रहे। खमतराई, उरला और गुढ़ियारी थाना क्षेत्र के आदतन अपराधियों को CSP ऑफिस में पेश किया गया। पुलिस अधिकारियों ने सभी अपराधियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि वे दोबारा किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि अब अपराध को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस ने अपराधियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने, अपराध से दूर रहने और शांतिपूर्ण जीवन जीने की सलाह दी। साथ ही यह भी साफ किया गया कि कमिश्नरी सिस्टम के तहत पुलिस अब पहले से ज्यादा सख्ती और निगरानी के साथ काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों से शहर में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी। रायपुर पुलिस ने भरोसा जताया है कि आने वाले दिनों में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिलेगा।

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डेंटल कॉलेज के पीजी-इंटर्न छात्र अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्टाइपेंड समानता और गर्ल्स हॉस्टल की मांग

बातचीत बेनतीजा, अस्पताल सेवाएं प्रभावित राजधानी रायपुर स्थित शासकीय डेंटल कॉलेज के पीजी और इंटर्न छात्र अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। छात्र पिछले 6 दिनों से आंदोलन कर रहे थे, जिसे अब और तेज करते हुए उन्होंने पूर्ण हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हड़ताल के दौरान छात्रों ने कॉलेज और अस्पताल परिसर में डॉक्टरों, मरीजों और स्टाफ की आवाजाही रोक दी, जिससे दंत चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गईं। हालात को देखते हुए कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा आंदोलनकारी छात्रों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। छात्रों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड में समानता और गर्ल्स हॉस्टल की कमी को दूर करना शामिल है। प्रशासन से बातचीत, नहीं निकला हल हड़ताल की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और छात्रों से लंबी चर्चा की। अधिकारियों ने छात्रों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की, लेकिन बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों को बसों में भरकर तूता धरना स्थल छोड़ दिया। हालांकि इसके बावजूद हड़ताल जारी रही। मरीजों को हो रही परेशानी हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना परामर्श लौटना पड़ा।पीड़ित शिव कुमार महानंद ने बताया कि उनके पिता का एक्सीडेंट हुआ है, जिसमें उनका बायां जबड़ा टूट गया, लेकिन छात्रों की हड़ताल के कारण इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलन के दो प्रमुख मुद्दे 1. स्टाइपेंड में समानता की मांगपीजी और इंटर्न छात्रों का कहना है कि मेडिकल और आयुर्वेदिक कॉलेजों के छात्रों को जिस दर से स्टाइपेंड मिलता है, डेंटल कॉलेज के छात्रों को उससे कम भुगतान किया जा रहा है।छात्रों का तर्क है कि ड्यूटी टाइम, ओपीडी, सर्जरी और मरीजों की जिम्मेदारियां समान होने के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। वे मेडिकल कॉलेज के अनुरूप स्टाइपेंड और उसे बैकडेट से लागू करने की मांग कर रहे हैं। 2. गर्ल्स हॉस्टल की कमीछात्रों ने महिला पीजी छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने का मुद्दा भी उठाया है। कई छात्राओं को बाहर किराए के मकान या पीजी में रहना पड़ता है, जिससे सुरक्षा और आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। छात्र कॉलेज परिसर में अतिरिक्त गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका हड़ताल के चलते गुरुवार को अधिकांश ओपीडी और उपचार सेवाएं प्रभावित रहीं। कई विभागों में कुर्सियां खाली नजर आईं।छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन और उग्र होगा। लंबे समय तक हड़ताल जारी रहने पर दंत चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही है।

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रायपुर में आंशिक कमिश्नरेट सिस्टम लागू, पुलिस दो हिस्सों में बंटी

21 थाने कमिश्नर के अधीन, 12 थाने SP के नियंत्रण में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। 23 जनवरी 2026 से रायपुर जिले के एक हिस्से में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस संबंध में गृह विभाग ने बुधवार शाम आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। नए सिस्टम के तहत रायपुर की पुलिस व्यवस्था को दो भागों में बांटा गया है। जिले के 21 थाने पुलिस कमिश्नर के अंतर्गत आएंगे, जबकि 12 थाने एसपी (SP) के अधीन काम करेंगे। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के भोपाल और इंदौर मॉडल पर आधारित बताई जा रही है, जहां शहरी और ग्रामीण इलाकों की पुलिसिंग अलग-अलग ढांचे में संचालित होती है। पूरे जिले में लागू नहीं हुआ सिस्टम कमिश्नरेट सिस्टम को लेकर पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इसे पूरे रायपुर जिले में लागू किया जाएगा। गृहमंत्री विजय शर्मा ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया था और इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष रखा गया था। हालांकि 21 जनवरी को हुई कैबिनेट बैठक में IAS लॉबी के विरोध के चलते इस पर चर्चा नहीं हो सकी। बाद में भोपाल-इंदौर मॉडल के अनुसार आंशिक रूप से सिस्टम लागू करने पर सहमति बनी। IPS लॉबी ने जताई नाराजगी वहीं IPS अधिकारियों का मानना है कि अधूरे कमिश्नरेट सिस्टम से जिले में भ्रम की स्थिति बनेगी। अधिकारियों के अनुसार अब पुलिस के लिए दो अलग-अलग प्रशासनिक स्ट्रक्चर तैयार करने होंगे, जबकि विभाग के पास न तो पर्याप्त मैनपावर है और न ही संसाधन। दो अधिकारियों के नियंत्रण में जिले की पुलिस रहने से यह व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह सकती है। IPS लॉबी का कहना है कि इससे कानून-व्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ने की बजाय व्यवस्थागत समस्याएं बढ़ेंगी। सीमाओं के बंटवारे पर सवाल अधिकारियों के मुताबिक कमिश्नरेट और ग्रामीण पुलिसिंग की सीमाएं मनमाने तरीके से तय की गई हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के बावजूद उरला थाना क्षेत्र को कमिश्नरेट में शामिल किया गया, ताकि पंचायत क्षेत्रों पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं मुजगहन सहित करीब 10 थानों को ग्रामीण पुलिस के अधीन कर दिया गया, जहां पंचायतों से प्रशासनिक रुचि कम बताई जा रही है। कमेटी की रिपोर्ट भी नजरअंदाज एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और अपराध दर को देखते हुए पूरे जिले में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी। कमेटी ने भुवनेश्वर मॉडल को अधिक प्रभावी बताते हुए अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी थी, लेकिन अब तक इस पर न चर्चा हुई और न ही कमेटी से कोई फीडबैक लिया गया। पुलिस बल की भारी कमी राजधानी के अनुरूप रायपुर के एक थाने में कम से कम 75 पुलिसकर्मियों की जरूरत है, जबकि फिलहाल औसतन 30 से 35 जवान ही तैनात हैं। अब कमिश्नरेट सिस्टम के चलते मौजूदा बल का भी बंटवारा होगा, जिससे फील्ड ड्यूटी में कमी आने की आशंका है। जानकारी के अनुसार रायपुर जिले में प्रभावी पुलिसिंग के लिए 7500 से अधिक पुलिस बल की आवश्यकता है। अधिकारियों की संख्या बढ़ने से थानों की बजाय दफ्तरों में स्टाफ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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धान खरीदी में भारी कटौती से नाराज़ किसान सड़क पर उतरे, रायगढ़–पुसौर मार्ग रहा जाम

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर धान मंडी में धान खरीदी के दौरान की जा रही भारी कटौती को लेकर किसानों का गुस्सा बुधवार को सड़कों पर फूट पड़ा। धान खरीदी में कटौती बंद कराने की मांग को लेकर किसानों ने रायगढ़–पुसौर मुख्य मार्ग पर धरना-प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया। 30 से 50 प्रतिशत तक धान काटे जाने का आरोप बुधवार सुबह किसान जब पुसौर ब्लॉक के धान उपार्जन केंद्र पहुंचे, तो वहां धान की गुणवत्ता के नाम पर 30 से 50 प्रतिशत तक कटौती किए जाने का आरोप लगाया गया। किसानों का कहना था कि वे जितना धान लेकर मंडी पहुंचे थे, उतनी मात्रा में खरीदी नहीं की जा रही थी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा था। कई गांवों के किसान आंदोलन में हुए शामिल धान कटौती से नाराज़ किसानों ने किसान नेता लल्लू सिंह के नेतृत्व में सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। इस आंदोलन में पुसौर, सारसमाल, कर्राजोर, घींच, सलोनी और तड़ोला समेत आसपास के 5 से 6 गांवों के किसान शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें रखीं। चक्काजाम से वाहनों की लगी लंबी कतार किसानों के सड़क पर बैठने से रायगढ़–पुसौर मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आम यात्रियों और मालवाहक वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने बातचीत कर दिया भरोसा घटना की जानकारी मिलते ही नायब तहसीलदार और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर उन्हें आश्वासन दिया कि धान खरीदी में अनावश्यक कटौती नहीं की जाएगी और उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा। आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त प्रशासन की ओर से भरोसा मिलने के बाद किसानों ने अपना धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया। किसान नेता लल्लू सिंह ने बताया कि यदि कटौती जारी रहती तो किसान तय समय में धान नहीं बेच पाते, इसलिए मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा।

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रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी की तैयारी, पूरे जिले में लागू करने के संकेत

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के दायरे को लेकर बड़ा फैसला जल्द हो सकता है। संकेत हैं कि नवा रायपुर के साथ-साथ पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस संबंध में आज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया जा सकता है। कमिश्नरी सिस्टम के विस्तार का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। एक सर्वे में करीब 90 फीसदी लोगों ने नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी के अंतर्गत लाने की मांग की थी। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पूरे जिले में इसे लागू करने का समर्थन किया है। निवेश और रोजगार से जुड़ा है मजबूत कानून व्यवस्था मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी स्तर के अधिकारियों का मानना है कि जहां कानून व्यवस्था मजबूत होती है, वहां निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर बनते हैं। इससे जनता का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होता है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त लॉ एंड ऑर्डर का सीधा असर शासन की स्थिरता पर पड़ता है। 31 दिसंबर को ऐलान, लेकिन खाका अब तक अधूरा 31 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करने का निर्णय लिया गया था। गृह विभाग को इसका पूरा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन 21 दिन बीतने के बाद भी खाका तैयार नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने पर आपत्ति है। उनका मानना है कि पुलिस को प्रशासन के अधीन ही रहना चाहिए। इसी कारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है। सरकार की मंशा पूरे जिले में सिस्टम लागू करने की डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कई बार पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी लागू करने को लेकर पत्राचार किया है। एडीजी स्तर की कमेटी ने भी पुलिस कमिश्नर को पूर्ण अधिकार देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार मजबूत और प्रभावी कमिश्नरी सिस्टम लागू करना चाहती है। दोहरी पुलिसिंग से बढ़ेगा खर्च अगर रायपुर शहर में कमिश्नरी और ग्रामीण इलाकों में देहात पुलिस सिस्टम लागू किया गया, तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। देहात क्षेत्र के लिए अलग से एसपी, एएसपी, डीएसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, कंट्रोल रूम, वायरलेस सिस्टम और वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। इस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। थानों की दूरी बढ़ने से जनता को होगी परेशानी देहात पुलिसिंग लागू होने पर नगर निगम सीमा से लगे कई इलाकों को ग्रामीण थानों में शामिल किया जाएगा। इससे थानों की दूरी बढ़ेगी और आम लोगों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी होगी। विधानसभा थाना क्षेत्र से जुड़े सेमरिया, नरदहा और बरोंदागांव जैसे इलाके ग्रामीण थानों में चले जाएंगे। जहां विधानसभा थाना मात्र एक किलोमीटर दूर है, वहीं खरोरा या सिलतरा थाना 25 से 35 किलोमीटर दूर पड़ता है। विशेषज्ञों की राय: पूरे अधिकारों के साथ लागू हो कमिश्नरी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधे-अधूरे अधिकारों के साथ कमिश्नरी लागू करना पुलिस को कमजोर करेगा। औद्योगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट, मंत्रालय और सचिवालय को भी कमिश्नरी के दायरे में लाया जाना चाहिए। दिल्ली, मुंबई और कानपुर जैसे शहरों की तरह रायपुर में भी पूरे जिले में यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।

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BJP में छत्तीसगढ़ की बढ़ती अहमियत: नड्डा के बाद नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य से दिल्ली तक बदलेगा सियासी संतुलन

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की भूमिका लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। पहले जेपी नड्डा और अब छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन का बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। बीजेपी के इतिहास में यह दूसरी बार है जब छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल चुके किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। इससे पहले जेपी नड्डा ने भी छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए संगठनात्मक प्रयोग किए थे, जिनका असर बाद में राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ से जुड़े अनुभव अब राष्ट्रीय रणनीति में नितिन नवीन को 2023 में छत्तीसगढ़ बीजेपी का को-इंचार्ज बनाया गया था, जब ओम माथुर प्रदेश प्रभारी थे। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली सफलता में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। टिकट वितरण, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिलों और मंडलों से फीडबैक लेना और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, वहां संगठन को संतुलन में रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। नितिन नवीन ने इन जमीनी हालात को समझते हुए अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। संगठनात्मक सख्ती और स्पष्ट संदेश पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ बीजेपी को कांग्रेस सरकार, स्थानीय मुद्दों और आंतरिक गुटबाजी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान नितिन नवीन ने संगठन को नीचे तक सक्रिय रखने पर जोर दिया। मंडल से लेकर जिला स्तर तक नियमित फीडबैक और संगठनात्मक बदलाव किए गए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन की कार्यशैली शांत लेकिन निर्णायक रही है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल जरूरी है। इसी नीति के तहत कई जिलों में संगठनात्मक फेरबदल भी किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को संभावित फायदे नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य से जुड़े मुद्दे जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र, आदिवासी इलाकों का विकास, शहरी प्रशासन और कानून-व्यवस्था अब सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी पर नियंत्रण की कोशिश तेज हो सकती है। राष्ट्रीय नेतृत्व से सीधे जुड़े होने के कारण संतुलन साधने की भूमिका और मजबूत हो सकती है। टिकट वितरण और नेतृत्व चयन में बदलाव के संकेत आने वाले समय में नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू होगी। ऐसे में पार्टी सूत्रों का मानना है कि अब टिकट वितरण में नाम से ज्यादा काम और जमीनी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। युवा नेताओं को आगे लाने और अनुभवी नेताओं के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। नितिन नवीन पहले भी छत्तीसगढ़ में यह संदेश दे चुके हैं कि जिम्मेदारी प्रदर्शन के आधार पर तय होगी। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय राष्ट्रीय अध्यक्ष का छत्तीसगढ़ से सीधा जुड़ाव केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाएं भी बढ़ाता है। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह लागू और प्रस्तुत किया जाए, इस पर रणनीति और स्पष्ट हो सकती है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में। जेपी नड्डा मॉडल की पुनरावृत्ति? जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बना था। अब नितिन नवीन के चयन को भी उसी मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मिले संगठनात्मक अनुभव को पार्टी अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है। बीजेपी अब राज्य में ज्यादा संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है। सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर विपक्ष का दबाव बढ़ने की संभावना है। कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश है कि छत्तीसगढ़ में किए गए संगठनात्मक काम और जमीनी फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व गंभीरता से लेता है। इससे संगठन में भरोसा और सक्रियता बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य को पार्टी किस तरह की प्राथमिकता देती है।

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छत्तीसगढ़ में दागी विधायकों की संख्या बढ़ी, 21 जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आपराधिक मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य के 21 मौजूदा विधायकों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में आपराधिक प्रकरण लंबित हैं। बीते दो वर्षों के भीतर ही चार विधायकों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिससे साफ है कि दागी जनप्रतिनिधियों की सूची लगातार बढ़ रही है। ताजा मामला जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू से जुड़ा है। उन पर एक किसान से करीब 42.78 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में हलचल मच गई है। इससे पहले पूर्व मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा भी भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद हैं। वहीं सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, जबकि जशपुर की भाजपा विधायक रायमुनी भगत पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में प्रकरण दर्ज किया गया है। ऐसे मामलों ने प्रदेश में जनप्रतिनिधियों की छवि को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के आंकड़ेवर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 90 विधायकों में से 17 ने अपने चुनावी शपथ पत्र में यह स्वीकार किया था कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और छत्तीसगढ़ इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन 17 में से छह विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यदि पिछले चुनावों से तुलना करें तो 2018 के विधानसभा चुनाव में 24 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी, जिनमें 13 पर गंभीर धाराएं लगी थीं। वहीं 2013 में यह संख्या 14 थी। पार्टीवार स्थितिपार्टी के हिसाब से देखें तो 2023 में भाजपा के 54 विजेता उम्मीदवारों में से 12 और कांग्रेस के 35 विजेता उम्मीदवारों में से पांच ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की थी। गंभीर मामलों के संदर्भ में भाजपा के चार और कांग्रेस के दो विधायकों ने अपने शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया था। देशभर की स्थिति भी चिंताजनकएडीआर की वर्ष 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में स्थिति और भी गंभीर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के करीब 45 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एडीआर ने 28 राज्यों और विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 4,092 विधायकों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया था। राज्यवार आंकड़ों में आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर है, जहां 174 में से 138 विधायक (करीब 79 प्रतिशत) आपराधिक मामलों वाले हैं। वहीं सिक्किम में यह प्रतिशत सबसे कम है, जहां 32 में से सिर्फ एक विधायक ने अपने खिलाफ किसी मामले की जानकारी दी है। छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने एक बार फिर राजनीति के अपराधीकरण पर बहस को तेज कर दिया है।

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