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ट्रंप के टैरिफ का विरोध करने वाले 10 वैश्विक हस्तियों ने 90 दिनों के ठहराव से पहले उठाई आवाज

एलन मस्क, वॉरेन बफे से लेकर जस्टिन ट्रूडो तक ने ट्रंप के टैरिफ को ‘अनावश्यक’ बताते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संकट की चेतावनी दी। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया इन आपत्तियों के बीच नए टैरिफ पर 90 दिनों का ठहराव लगा, लेकिन नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर यह नीति जारी रही तो इसके दूरगामी आर्थिक नुकसान होंगे।

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अमेरिका ने चीन में तैनात अपने कर्मियों पर लगाया प्रेम संबंधों पर प्रतिबंध

बीजिंग/वाशिंगटन: अमेरिकी सरकार ने चीन में तैनात अपने राजनयिकों, सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के सदस्यों के लिए एक नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत उन्हें चीनी नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार के रोमांटिक या यौन संबंध बनाने से रोक दिया गया है। प्रमुख बिंदु: क्यों लगाया गया यह प्रतिबंध? पृष्ठभूमि: इस नए निर्देश से स्पष्ट है कि अमेरिका चीन में अपने कर्मियों की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर गंभीर है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।

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अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी से भारतीय निर्यात को झटका, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

नई दिल्ली, 3 अप्रैल: अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिफल टैरिफ—5 अप्रैल से 10% और 9 अप्रैल से 27%—का भारतीय निर्यात पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल जैसे प्रमुख क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। किन उद्योगों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर? क्या इससे भारतीय विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा? विशेषज्ञों का मानना – नहीं भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के प्रोफेसर विश्वजीत धर के अनुसार, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश इस मामले में भारत से आगे हैं। भारत की रणनीति: सौदेबाजी और रियायतें अमेरिका को खुश करने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं, जैसे: लेकिन धर का मानना है कि “अमेरिका के साथ मोलभाव करना ही अब सबसे अच्छा विकल्प है।” आगे क्या? अमेरिका-भारत के बीच 45 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है, और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। हालाँकि, ट्रंप के ताज़ा कदम से लगता है कि अमेरिका अभी संतुष्ट नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या भारत अपनी कूटनीति और आर्थिक रणनीति से नुकसान कम कर पाता है—या फिर निर्यातकों को मुश्किल दौर का सामना करना पड़ेगा।

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इजरायली शोधकर्ताओं ने विकसित की दवाओं के प्रति कोशिकाओं की प्रतिक्रिया समझने वाली AI तकनीक

तेल अवीव विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ‘scNET’ नामक एक नया AI उपकरण विकसित किया है जो कोशिकाओं के व्यवहार और दवाओं के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं को समझने में क्रांति ला सकता है। प्रमुख विशेषताएं: शोधकर्ताओं का विश्लेषण: “यह उपकरण नमूने में मौजूद कोशिका समूहों की अधिक सटीक पहचान करने में सक्षम है,” शोधकर्ता रॉन शेनिन ने बताया। “इससे विभिन्न स्थितियों में जीन्स के सामान्य व्यवहार और उपचारों के प्रति प्रतिक्रिया के जटिल तंत्र को समझना संभव होगा।” प्रकृति पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में, टीम ने पाया कि यह तकनीक पहले अज्ञात टी कोशिकाओं की ट्यूमर-विरोधी गतिविधि में वृद्धि का पता लगाने में सफल रही, जो पारंपरिक विधियों से संभव नहीं था। भविष्य की संभावनाएं: शोधकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार की AI तकनीकें जटिल जैविक व्यवहारों को समझने और नई चिकित्सा विधियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। यह अध्ययन कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा चिकित्सा अनुसंधान में क्रांति लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार फंगल संक्रमण के इलाज और डायग्नोस्टिक टेस्ट्स पर दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स जारी की हैं, जो इन बीमारियों के खिलाफ दवाओं और जांच उपकरणों की गंभीर कमी को उजागर करती हैं।

मुख्य बिंदु: 1. जानलेवा फंगल संक्रमण बढ़ रहे हैं 2. दवाओं की कमी और धीमा रिसर्च 3. डायग्नोस्टिक टेस्ट्स की समस्या क्यों है यह चिंताजनक? WHO की सिफारिशें: ✔ नई दवाओं और टेस्ट्स पर शोध बढ़ाना✔ सस्ती और आसानी से उपलब्ध जांच प्रणाली विकसित करना✔ स्वास्थ्यकर्मियों को फंगल संक्रमण के प्रति जागरूक करना यह रिपोर्ट दुनिया को चेतावनी देती है कि फंगल संक्रमण एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन सकते हैं, अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार फंगल संक्रमण के इलाज और डायग्नोस्टिक टेस्ट्स पर दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स जारी की हैं, जो इन बीमारियों के खिलाफ दवाओं और जांच उपकरणों की गंभीर कमी को उजागर करती हैं। Read Post »

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म्यांमार भूकंप से भारी तबाही, ISRO के सैटेलाइट इमेज ने दिखाई विनाशलीला

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने म्यांमार में 28 मार्च, 2025 को आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप से हुए नुकसान की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं। यह भूकंप म्यांमार के साथ-साथ पड़ोसी देशों में भी महसूस किया गया था। इस प्राकृतिक आपदा ने म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई है। अब तक 1,700 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बचाव दल अभी भी मलबे में फंसे लोगों को खोज रहे हैं। ISRO ने कैप्चर की हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेज ISRO के अर्थ इमेजिंग सैटेलाइट कार्टोसैट-3 ने पृथ्वी से 500 किलोमीटर की ऊंचाई से ये तस्वीरें खींची हैं, जिनकी रिज़ॉल्यूशन क्षमता 50 सेंटीमीटर से भी कम है। सैटेलाइट इमेज में क्या दिखा? इस भूकंप के झटके थाईलैंड तक महसूस किए गए, जहां भी आपातकालीन सेवाएं सक्रिय कर दी गईं। म्यांमार में आपातकाल, भारत ने भेजी मदद म्यांमार की सैन्य सरकार ने आपातकाल घोषित कर दिया है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन मरने वालों की संख्या 2,900 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि हज़ारों लोग घायल हैं। भारत ने इस संकट की घड़ी में म्यांमार की मदद के लिए राहत दल और सहायता सामग्री भेजकर तुरंत सहयोग का हाथ बढ़ाया है।

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​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति न देने की स्थिति में बमबारी की धमकी देने के बाद, ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं में मिसाइलों को लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में रखा है

​अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति न देने की स्थिति में बमबारी की धमकी देने के बाद, ईरान ने अपनी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं में मिसाइलों को लॉन्च के लिए तैयार स्थिति में रखा है। तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये मिसाइलें देशभर में स्थित उन भूमिगत ठिकानों में तैनात हैं, जो हवाई हमलों को सहने के लिए बनाए गए हैं।​ रविवार को एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “यदि वे समझौता नहीं करते हैं, तो बमबारी होगी। यह ऐसी बमबारी होगी जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होगी।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान पर “सेकेंडरी टैरिफ” लगाए जाएंगे। ​ इन धमकियों के जवाब में, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने टेलीविजन पर प्रसारित एक संबोधन में कहा, “हम वार्ता से नहीं बचते हैं; यह वादों का उल्लंघन है जिसने अब तक हमारे लिए समस्याएं पैदा की हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें यह साबित करना होगा कि वे विश्वास बना सकते हैं।” ​ इन बढ़ते तनावों के बीच, ईरान ने हाल ही में एक वीडियो जारी किया है जिसमें उसकी भूमिगत मिसाइल सुविधाओं को दिखाया गया है। “मिसाइल सिटी” कहे जाने वाले इन ठिकानों में उन्नत हथियार प्रणाली और सैनिकों को इजरायली झंडे पर कदम रखते हुए दिखाया गया है। इसके अलावा, ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें संभावित हमले की स्थिति में मध्य पूर्व में स्थित विभिन्न अमेरिकी ठिकानों को लक्षित करने की संभावना जताई गई है।​ इन घटनाओं से पता चलता है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध कितने नाजुक हो गए हैं, दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं और परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है

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​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, “वरिष्ठ जनरल मिन आंग हलाइंग से बातचीत की। विनाशकारी भूकंप में हुई जनहानि पर गहरी संवेदना प्रकट की। एक करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में, भारत इस कठिन समय में म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा है।”​ भारत ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया है, जिसके तहत आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, और खोज एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजे जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “आपदा राहत सामग्री, मानवीय सहायता, खोज एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से भेजे जा रहे हैं।” ​ इस अभियान के तहत, भारत ने पहले ही 15 टन राहत सामग्री म्यांमार भेजी है, जिसमें टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, तैयार-खाने के पैकेट, जल शुद्धिकरण उपकरण, स्वच्छता किट, सौर लैंप, जनरेटर सेट और आवश्यक दवाएं शामिल हैं। शुक्रवार को म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,000 से अधिक हो गई है, क्योंकि ढही हुई इमारतों के मलबे से और शव बरामद किए गए हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि अब तक 1,002 लोगों की मौत हुई है, 2,376 घायल हुए हैं, और 30 अन्य लापता हैं। ​ भूकंप का केंद्र मंडाले के निकट था, और इसके झटके 640 मील दूर बैंकॉक तक महसूस किए गए, जहां इमारतें हिल गईं और कई लोग घायल हुए। म्यांमार और पड़ोसी देशों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं, और कई देशों से सहायता पहुंच रही है। ​ भारत की इस त्वरित सहायता से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी आएगी और म्यांमार के लोगों को इस कठिन समय में आवश्यक समर्थन मिलेगा।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को म्यांमार के सैन्य नेतृत्व वाले सरकार के प्रमुख, मिन आंग हलाइंग, से फोन पर बातचीत की और विनाशकारी भूकंप से हुई जनहानि पर गहरी संवेदना व्यक्त की Read Post »

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​म्यांमार में शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और गहराई 10 किलोमीटर थी।

​28 मार्च 2025 को दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समयानुसार), म्यांमार में 7.7 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और गहराई 10 किलोमीटर थी। इस भूकंप के झटके थाईलैंड, बांग्लादेश, भारत, और चीन के कई हिस्सों में महसूस किए गए, जिससे व्यापक दहशत और नुकसान हुआ।​ म्यांमार में, विशेष रूप से मांडले क्षेत्र में, भारी तबाही हुई है। मांडले में कई ऐतिहासिक स्थलों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें 90 साल पुराना एवा ब्रिज का ढहना शामिल है। राजधानी नेपीदा में भी कई इमारतें गिर गईं, जिससे सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। सरकारी प्रसारणों के अनुसार, अब तक म्यांमार में 144 लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से अधिक लोग घायल हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार ने छह क्षेत्रों में आपातकाल घोषित किया है और अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है।​ थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी भूकंप के प्रभाव से एक निर्माणाधीन 30 मंजिला इमारत गिर गई, जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हुई और 81 लोग मलबे में फंस गए। बचाव कार्य जारी है, और शहर को आपदा क्षेत्र घोषित किया गया है। प्रधानमंत्री पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने स्थिति की समीक्षा के लिए अपनी आधिकारिक यात्रा को रद्द कर दिया है और आपातकालीन सेवाओं को सक्रिय कर दिया है।​ भारत में, कोलकाता और मणिपुर के कुछ हिस्सों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभावित देशों को सहायता की पेशकश की है और भारतीय अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। ​ बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने और घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने में जुटे हैं। अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से सतर्क रहने और आफ्टरशॉक्स से बचने की सलाह दी है। इस आपदा के कारण क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ है, और राहत कार्यों में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

​म्यांमार में शुक्रवार, 28 मार्च 2025 को दोपहर 12:50 बजे (स्थानीय समयानुसार) 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसका केंद्र सागाइंग शहर से 16 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था और गहराई 10 किलोमीटर थी। Read Post »

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ममता बनर्जी के भाषण के दौरान हंगामा

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में दिए गए भाषण के दौरान हंगामा हो गया। छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और उनसे तीखे सवाल पूछे। छात्रों के सवाल और ममता का जवाब ममता बनर्जी ने दावा किया कि बंगाल में लाखों करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं। एक व्यक्ति ने उनसे विशेष निवेशों के नाम बताने को कहा, तो ममता ने जवाब दिया, “बहुत सारे हैं…” इसके बाद कुछ लोगों ने उस व्यक्ति को चुप रहने को कहा, यह तर्क देते हुए कि यह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है। हंगामे के बीच क्या हुआ? SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) के छात्रों ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए। छात्रों ने आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े मुद्दों पर सवाल किए। ममता ने कहा, “यह मामला अदालत में है, राजनीति मत करो।” उन्होंने विरोध कर रहे छात्रों से कहा, “आप बंगाल जाइए और अपनी पार्टी को मजबूत कीजिए।” ममता बनर्जी का जवाब विरोध को लेकर ममता ने कहा, “आप मुझे बोलने दें, यह संस्थान का अपमान है।” उन्होंने कहा, “मैं हर धर्म का सम्मान करती हूं।” जब ‘गो अवे’ के नारे लगे, तो ममता ने जवाब दिया, “दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ता, दीदी रॉयल बंगाल टाइगर की तरह लड़ेगी।” उन्होंने कहा, “मैं जनता के सामने सिर झुकाऊंगी, लेकिन जबरदस्ती नहीं झुकूंगी।” SFI-UK ने ली जिम्मेदारी SFI-UK (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, यूके) ने विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी ली। संगठन ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल के छात्रों और श्रमिक वर्ग के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। यह घटना ममता बनर्जी की विदेश यात्राओं के दौरान हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक नई बहस छेड़ रही है।

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