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​थाईलैंड पर्यटन महोत्सव 2025 का 43वां संस्करण 26 से 30 मार्च तक बैंकॉक के क्वीन सिरिकिट नेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है।

​थाईलैंड पर्यटन महोत्सव 2025 का 43वां संस्करण 26 से 30 मार्च तक बैंकॉक के क्वीन सिरिकिट नेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया जा रहा है। यह महोत्सव प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से रात 9:00 बजे तक खुला रहता है और इसमें प्रवेश निःशुल्क है।​ इस वर्ष का महोत्सव “थाईलैंड में करने योग्य 5 अनिवार्य अनुभव” थीम पर केंद्रित है और कार्बन-न्यूट्रल पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देता है। आगंतुकों के लिए नौ विभिन्न क्षेत्रों में थाईलैंड की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता, प्रामाणिक क्षेत्रीय व्यंजन, और पारंपरिक प्रदर्शन प्रस्तुत किए जा रहे हैं। ​ महोत्सव में आने वाले लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। क्वीन सिरिकिट नेशनल कन्वेंशन सेंटर एमआरटी स्टेशन के माध्यम से स्थल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह महोत्सव थाईलैंड की पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने और सतत पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

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​अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक पेश किए जाने से पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।

​अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर पर प्रतिबंध लगाने के लिए नया विधेयक पेश किए जाने से पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है।​ यह विधेयक, जिसे “पाकिस्तान डेमोक्रेसी एक्ट” कहा जाता है, अमेरिकी कांग्रेस में प्रतिनिधि जो विल्सन और जिम्मी पनेटा द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों के उत्पीड़न में शामिल व्यक्तियों की पहचान करना और उन पर प्रतिबंध लगाना है, जिसमें वीज़ा प्रतिबंध और अमेरिका में प्रवेश पर रोक शामिल है। ​ विधेयक विशेष रूप से जनरल मुनीर पर “राजनीतिक विरोधियों के गलत तरीके से उत्पीड़न और कैद” में संलिप्त होने का आरोप लगाता है। यह पाकिस्तान में सैन्य शासन समाप्त करने, नागरिक नेतृत्व वाली लोकतंत्र की बहाली, और सभी गलत तरीके से हिरासत में लिए गए राजनीतिक बंदियों की रिहाई की स्थिति में प्रतिबंध हटाने की अनुमति देता है। ​ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, जिन्हें 2022 में अविश्वास मत के माध्यम से पद से हटाया गया था और अगस्त 2023 में भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, उनके समर्थकों का दावा है कि ये आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और उन्हें सत्ता में लौटने से रोकने के लिए सैन्य द्वारा आयोजित किए गए हैं। ​ यह विधेयक अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में महत्वपूर्ण तनाव पैदा कर सकता है, क्योंकि यह पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के कार्यों की सीधी आलोचना करता है और लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली की मांग करता है।

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​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस को उनकी नई जिम्मेदारियां संभालने पर शुभकामनाएं दी हैं।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस को उनकी नई जिम्मेदारियां संभालने पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि बांग्लादेश में शीघ्र ही सामान्य स्थिति बहाल होगी, जिसमें हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत शांति, सुरक्षा और विकास के लिए दोनों देशों के लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बांग्लादेश के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। ​ प्रधानमंत्री मोदी और प्रोफेसर यूनुस के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के दौरान, प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन की पुष्टि की। उन्होंने विभिन्न विकास पहलों के माध्यम से बांग्लादेश के लोगों का समर्थन करने की भारतीय प्रतिबद्धता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा एवं संरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व को भी रेखांकित किया। प्रोफेसर यूनुस ने आश्वासन दिया कि अंतरिम सरकार बांग्लादेश में हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यक समूहों की सुरक्षा, संरक्षा एवं रक्षा को प्राथमिकता देगी। ​ बांग्लादेश में हाल ही में हुए राजनीतिक उथल-पुथल के बाद, प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस्तीफे और देश छोड़ने के तीन दिन बाद, प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को देश में नए सिरे से चुनाव कराने का काम सौंपा गया है। प्रोफेसर यूनुस, जिन्हें “गरीबों के बैंकर” के रूप में जाना जाता है, ने ग्रामीण बैंक की स्थापना की और 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किए गए। उन्होंने गांवों में रहने वाले गरीबों को छोटे-छोटे कर्ज देकर लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में मदद की है। उनके इस मॉडल ने दुनिया भर में कई योजनाओं को प्रेरित किया है, जिसमें अमेरिका जैसे विकसित देश भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश और दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत होते संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के नेताओं के बीच यह संवाद क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है

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जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा स्टेशन (FDNPS) से ALPS (Advanced Liquid Processing System) द्वारा उपचारित जल का निर्वहन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप जारी है। ​

​अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार, जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा स्टेशन (FDNPS) से ALPS (Advanced Liquid Processing System) द्वारा उपचारित जल का निर्वहन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप जारी है। ​ दिसंबर 2024 में जापान की चार दिवसीय यात्रा के दौरान, IAEA टास्क फोर्स ने ALPS-उपचारित जल के निर्वहन की तकनीकी और नियामक पहलुओं का मूल्यांकन किया। इसमें FDNPS स्थल का दौरा शामिल था, जहां उन्होंने टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी (TEPCO) द्वारा स्थापित उपकरणों और संरचनाओं का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में परमाणु नियामक प्राधिकरण (NRA), जापान के विदेश मंत्रालय (MOFA), और अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय (METI) के साथ हुई चर्चाओं का सारांश भी प्रस्तुत किया गया है। ​ रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि जापान का NRA एक व्यापक निरीक्षण योजना बनाए रखता है, जिसमें निर्वहन किए जा रहे जल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑनसाइट निगरानी शामिल है। इसके अलावा, टास्क फोर्स ने पुष्टि की कि उपकरण और सुविधाएं प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार संचालित हो रही हैं।​ IAEA की ऑनसाइट प्रयोगशाला ने पहले ग्यारह जल निर्वहन का विश्लेषण किया है, जिसमें पाया गया कि प्रत्येक बैच में ट्रिटियम की सांद्रता जापान की परिचालन सीमा से काफी नीचे है, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप है। IAEA ने दो इंटरलैबोरेटरी तुलना (ILCs) पर भी रिपोर्ट जारी की है, जो ALPS-उपचारित जल और FDNPS के निकट समुद्री पर्यावरणीय नमूनों में रेडियोन्यूक्लाइड्स के निर्धारण से संबंधित हैं। इन ILCs में विभिन्न प्रयोगशालाओं ने स्वतंत्र रूप से नमूनों का विश्लेषण किया और उनके परिणामों की विश्वसनीयता और सटीकता का मूल्यांकन किया गया। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि जापान की नमूना संग्रह प्रक्रियाएं उपयुक्त पद्धतिगत मानकों का पालन करती हैं और जापानी प्रयोगशालाओं ने उच्च स्तर की दक्षता का प्रदर्शन किया है। ​ इन निष्कर्षों के आधार पर, IAEA ने पुष्टि की है कि फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा स्टेशन से ALPS-उपचारित जल का निर्वहन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप जारी है, और इससे लोगों और पर्यावरण पर नगण्य रेडियोलॉजिकल प्रभाव पड़ता है।

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​अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी GE एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A के लिए 99 F404-IN20 इंजनों में से पहला इंजन सौंप दिया है।

​अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी GE एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A के लिए 99 F404-IN20 इंजनों में से पहला इंजन सौंप दिया है। यह डिलीवरी HAL और GE के बीच 40 वर्षों की साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ​ F404-GE-IN20 इंजन F404 परिवार का सबसे उच्च थ्रस्ट वाला संस्करण है, जिसमें GE की नवीनतम हॉट सेक्शन सामग्री और प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, साथ ही एक फुल अथॉरिटी डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल (FADEC) सिस्टम भी है, जो विश्वसनीय शक्ति और उत्कृष्ट संचालन विशेषताएं प्रदान करता है। ​ HAL ने इन इंजनों का उपयोग करके तेजस Mk1A विमानों के उत्पादन को बढ़ाने की योजना बनाई है। हालांकि, GE से इंजनों की आपूर्ति में लगभग 12 महीने की देरी हुई थी, लेकिन अब उत्पादन लाइनें स्थिर हो गई हैं, जिससे HAL अगले वित्तीय वर्ष से प्रति वर्ष 16 से 24 विमान वितरित करने की क्षमता रखता है। ​ इस डिलीवरी के बाद, HAL के शेयरों में 4% से अधिक की वृद्धि देखी गई, जो निवेशकों के सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है। ​ यह विकास भारत की रक्षा उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे देश की वायु सेना की क्षमताएं बढ़ेंगी और घरेलू रक्षा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

​अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी GE एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A के लिए 99 F404-IN20 इंजनों में से पहला इंजन सौंप दिया है। Read Post »

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​दक्षिण कोरिया में मार्च 2025 के दौरान भीषण जंगल की आग ने देश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों को प्रभावित किया है

दक्षिण कोरिया में मार्च 2025 के दौरान भीषण जंगल की आग ने देश के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिससे व्यापक विनाश और जनजीवन में अवरोध उत्पन्न हुआ है। इन आगजनी घटनाओं ने न केवल संपत्ति का नुकसान किया है, बल्कि मानवीय जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डाला है।​ आग की उत्पत्ति और प्रसार: सबसे बड़ी आग सांचेओंग काउंटी में शुक्रवार को शुरू हुई, जो दक्षिण ग्योंगसांग प्रांत में स्थित है। तेज हवाओं और सूखी परिस्थितियों के कारण, यह आग तेजी से फैलकर 500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैल गई। इस आग के कारण 260 से अधिक लोगों को अपने घर छोड़कर अस्थायी आश्रयों में शरण लेनी पड़ी। ​ प्रभावित क्षेत्र और जनसंख्या: उत्तरी ग्योंगसांग प्रांत के यूसेओंग काउंटी में भी आग ने 300 हेक्टेयर से अधिक भूमि को प्रभावित किया, जिससे 400 से अधिक लोगों को अपने घरों से निकलना पड़ा। इसके अलावा, गिम्हे शहर में भी आग के कारण दर्जनों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। इन आगजनी घटनाओं ने दक्षिण-पूर्वी कोरिया प्रायद्वीप के कई हिस्सों में हाईवे बंद होने जैसी समस्याएं उत्पन्न कीं, जिससे आवागमन में बाधा आई। ​ सरकारी प्रतिक्रिया और राहत कार्य: आग की गंभीरता को देखते हुए, कोरिया फॉरेस्ट सर्विस ने 1,600 से अधिक आपातकालीन कर्मियों, 35 हेलीकॉप्टरों और दर्जनों वाहनों को आग बुझाने के कार्य में लगाया है। हालांकि, पहाड़ी इलाकों और तेज हवाओं के कारण केवल 35% आग पर ही काबू पाया जा सका है। सरकार ने उत्तरी और दक्षिणी ग्योंगसांग प्रांतों और उल्सान शहर में आपातकाल की घोषणा की है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से राहत और बचाव कार्य किए जा सकें। ​ मौसम और पर्यावरणीय चुनौतियाँ: तेज हवाओं और सूखी मौसम स्थितियों ने आग के प्रसार को बढ़ावा दिया है, जिससे आग बुझाने के प्रयासों में कठिनाई हो रही है। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण, आग पर पूर्ण नियंत्रण पाने में अधिक समय लग सकता है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान की संभावना बढ़ गई है। ​ आगे की चुनौतियाँ: दक्षिण कोरिया की सरकार और आपातकालीन सेवाएँ वर्तमान में आग पर काबू पाने और प्रभावित लोगों की सहायता करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। हालांकि, तेज हवाओं और सूखी परिस्थितियों के कारण आग बुझाने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और राहत कार्यों की प्रगति पर निर्भर करेगा कि आग पर कब तक पूर्ण नियंत्रण पाया जा सकेगा।​ इस संकट ने न केवल दक्षिण कोरिया के पर्यावरण पर, बल्कि वहां के निवासियों के जीवन पर भी गहरा प्रभाव डाला है। आग से प्रभावित लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और पर्यावरण की बहाली के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को दीर्घकालिक रणनीतियाँ बनानी होंगी।

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अल्लू अर्जुन बने सबसे महंगे एक्टर, एटली की फिल्म के लिए ले रहे 175 करोड़!

बॉलीवुड और टॉलीवुड में नया रिकॉर्ड साउथ सुपरस्टार अल्लू अर्जुन ने एक बार फिर अपनी लोकप्रियता और स्टार पावर को साबित कर दिया है। ‘पुष्पा: द रूल’ की अपार सफलता के बाद, उन्होंने बॉलीवुड और टॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक एटली के साथ एक बड़ी फिल्म साइन की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फिल्म के लिए अल्लू अर्जुन ने 175 करोड़ रुपये की फीस ली है, जो अब तक किसी भी भारतीय अभिनेता द्वारा ली गई सबसे ज्यादा फीस में से एक है। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म के मुनाफे में 15% हिस्सेदारी की भी मांग की है। इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डील में से एक इस मेगा डील को सन पिक्चर्स प्रोडक्शन हाउस ने फाइनल किया है, जो पहले भी कई सुपरहिट फिल्में दे चुका है। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह सौदा भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की सबसे महंगी डील्स में से एक मानी जा रही है। अल्लू अर्जुन के साथ एटली का जुड़ना इस प्रोजेक्ट को और भी खास बना रहा है, क्योंकि एटली की फिल्मों में मास एंटरटेनमेंट, हाई-ऑक्टेन एक्शन और दमदार ड्रामा देखने को मिलता है। पहले सलमान खान के साथ थी योजना इस फिल्म को लेकर पहले खबरें आई थीं कि एटली इसे सलमान खान के साथ करने वाले थे। हालांकि, बाद में फिल्म के लीड रोल के लिए अल्लू अर्जुन को फाइनल किया गया। यह खबर आते ही सोशल मीडिया पर फैंस की जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली। फैंस अब बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि अल्लू अर्जुन और एटली की यह जोड़ी बड़े पर्दे पर क्या धमाल मचाने वाली है। फिल्म में होगी जबरदस्त एक्शन और एंट्री सीक्वेंस मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह फिल्म एक हाई-ऑक्टेन एक्शन ड्रामा होगी, जिसमें अल्लू अर्जुन को बेहद दमदार और मास एपील वाले किरदार में देखा जाएगा। उनकी स्टाइलिश मास एंट्री, दमदार फाइट सीन्स और ग्रैंड विजुअल्स इस फिल्म की यूएसपी होंगे। फैंस में जबरदस्त उत्साह इस अनाउंसमेंट के बाद से ही सोशल मीडिया पर फैंस की जबरदस्त एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है। ‘पुष्पा’ के बाद अल्लू अर्जुन की जबरदस्त फैन फॉलोइंग बढ़ी है, और अब एटली के साथ उनकी इस नई फिल्म से उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। जल्द होगी आधिकारिक घोषणा फिल्म की आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी, और इसके बाद स्टार कास्ट, शूटिंग लोकेशन और रिलीज डेट जैसी जानकारियों का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल, यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी और महंगी फिल्मों में से एक बनने की पूरी संभावना रखती है। आप इस जोड़ी के बारे में क्या सोचते हैं? क्या अल्लू अर्जुन और एटली बॉक्स ऑफिस पर नया इतिहास रचेंगे? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं!

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​रूस-यूक्रेन युद्ध के हालिया घटनाक्रमों में, क्रेमलिन ने घोषणा की है कि रूस और अमेरिका के अधिकारी शांति वार्ता और काला सागर समझौते पर चर्चा के लिए सऊदी अरब में बैठक करेंगे।

​रूस-यूक्रेन युद्ध के हालिया घटनाक्रमों में, क्रेमलिन ने घोषणा की है कि रूस और अमेरिका के अधिकारी शांति वार्ता और काला सागर समझौते पर चर्चा के लिए सऊदी अरब में बैठक करेंगे। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यह बैठक दोनों देशों के बीच संवाद के माध्यम से समस्याओं को हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ​ इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के लक्ष्यों के खिलाफ सीमित युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, जिसे पुतिन ने स्वीकार किया। व्हाइट हाउस ने इसे “शांति की दिशा में पहला कदम” बताया, जिसमें काला सागर में समुद्री युद्धविराम, पूर्ण युद्धविराम और स्थायी शांति समझौते पर बातचीत शामिल है। ​ हालांकि, पुतिन ने पूर्ण युद्धविराम के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें यूक्रेन द्वारा नए सैनिकों की भर्ती और प्रशिक्षण को रोकना, विदेशी सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक शामिल हैं। इसके अलावा, पुतिन ने यूक्रेन के चार आंशिक रूप से कब्जे वाले दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों—डोनेट्स्क, लुहान्स्क, जापोरिजिया, खेरसॉन—के साथ-साथ क्रीमिया प्रायद्वीप के विलय को स्वीकार करने की मांग की है। इन शर्तों के बावजूद, क्रेमलिन ने संकेत दिया है कि रूस शांति वार्ता के लिए तैयार है, बशर्ते कि वार्ता इस्तांबुल में 2022 में हुई समझौतों और वर्तमान युद्धक्षेत्र की वास्तविकताओं पर आधारित हो। पेस्कोव ने यह भी उल्लेख किया कि यूक्रेन द्वारा रूसी नेतृत्व के साथ संपर्क पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना आवश्यक होगा ताकि वार्ता आगे बढ़ सके। ​ इन घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि रूस और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की दिशा में प्रगति हो रही है, जिसमें काला सागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास शामिल हैं।

​रूस-यूक्रेन युद्ध के हालिया घटनाक्रमों में, क्रेमलिन ने घोषणा की है कि रूस और अमेरिका के अधिकारी शांति वार्ता और काला सागर समझौते पर चर्चा के लिए सऊदी अरब में बैठक करेंगे। Read Post »

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नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन बाद पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए हैं। उनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर स्प्लैशडाउन हुआ।

5 जून 2024 को सुनीता और बुच बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हुए थे। यह मिशन केवल 8 दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें अंतरिक्ष में 9 महीने से अधिक समय बिताना पड़ा। ​ अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से मानव शरीर पर कई प्रभाव पड़ते हैं। माइक्रोग्रैविटी के कारण मांसपेशियों और हड्डियों की कमजोरी, दृष्टि समस्याएं, और प्रतिरक्षा प्रणाली में परिवर्तन हो सकते हैं। इसके अलावा, मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है, जैसे अकेलापन और तनाव। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सुनीता और बुच को विशेष पुनर्वास कार्यक्रमों से गुजरना होगा। ​ सुनीता विलियम्स की सुरक्षित वापसी पर भारत में खुशी की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, “धरती ने आपको याद किया।” राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उनकी दृढ़ता और समर्पण की सराहना की। अंतरिक्ष में 9 महीने बिताने के बाद, सुनीता और बुच की वापसी मानव धैर्य और साहस का प्रतीक है, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी

नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 14 दिन बाद पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए हैं। उनका ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर स्प्लैशडाउन हुआ। Read Post »

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दुबई से भारत लाने पर गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी: जानें कितना गोल्ड बिना कस्टम ड्यूटी के लाया जा सकता है

दुबई से भारत आने वाले यात्रियों के लिए गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी की सीमाएं, पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग-अलग नियम! दुबई से भारत आने वाले भारतीय यात्रियों के लिए गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी की सीमा में काफी भिन्नताएं हैं। यह नियम यात्रियों के लिंग, उम्र और यात्रा की अवधि के आधार पर तय होते हैं। भारत में गोल्ड की बढ़ती मांग और दुबई में इसे सस्ते में मिलने के कारण, भारतीय यात्रियों के लिए यह जानकारी बेहद अहम है। दुबई से भारत लाने पर गोल्ड की सीमा:केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के अनुसार, भारतीय यात्री दुबई से 1 किलोग्राम तक गोल्ड बिना कस्टम ड्यूटी के ला सकते हैं, यदि उन्होंने वहां 6 महीने से अधिक समय तक ठहराव किया हो। गोल्ड की यह सीमा मुख्य रूप से गोल्ड की मुद्रा के रूप में होती है, जैसे गोल्ड बार और गोल्ड सिक्के। इसके अलावा, निर्धारित सीमा से अधिक गोल्ड लाने पर यात्री को अपनी “ड्यूटेबल” गोल्ड की घोषणा करनी होती है और लाल चैनल से कस्टम अधिकारियों को इसे दिखाना होता है। कस्टम ड्यूटी के बिना गोल्ड की सीमा: कस्टम ड्यूटी की दर:यदि गोल्ड की सीमा से अधिक गोल्ड लाया जाता है, तो कस्टम ड्यूटी का शुल्क लागू होता है। गोल्ड लाने पर दस्तावेजों की आवश्यकता:कस्टम अधिकारियों द्वारा गोल्ड के सत्यापन के लिए, यात्रियों को सही दस्तावेज़ प्रदान करने होंगे जो यह प्रमाणित करें कि गोल्ड वैध रूप से खरीदी गई है। बच्चों को उनके माता-पिता के साथ रिश्ते का पहचान पत्र भी दिखाना होगा।

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