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बिलासपुर में 12 फरार आरोपियों पर इनाम घोषित, सूचना देने पर मिलेगा 5-5 हजार रुपए

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने फरार आरोपियों के खिलाफ सख्ती बढ़ा दी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों से फरार 12 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम घोषित किया है। इन आरोपियों के बारे में पुख्ता सूचना देने वाले को 5-5 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। पुलिस के अनुसार ये आरोपी विभिन्न गंभीर अपराधों में शामिल हैं और लंबे समय से फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए जिले के सकरी, तोरवा, कोटा, तखतपुर और बिल्हा थाना क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सकरी थाना क्षेत्र के आरोपी प्रशांत तिवारी (काठाकोनी) और रौनक धुर्वे (आसमा सिटी) भी सूची में शामिल हैं। वहीं तोरवा थाना क्षेत्र से मोनिस हटकेश्वर, वासू हटकेश्वर, हनी हटकेश्वर (बापूनगर निवासी), पवन कुमार यादव (जांजगीर-चांपा) और हिम बहादुर सोनार (सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल) पर भी इनाम घोषित किया गया है। कोटा थाना क्षेत्र के आरोपी धार्मिक भाई सवन्नी (सूरत, गुजरात) और संतोष कुमार पोर्ते (कोरबा) भी फरार हैं। इसके अलावा तखतपुर थाना क्षेत्र के परमेश्वर वैष्णव और बिल्हा थाना क्षेत्र के गुरुजी उर्फ मेवालाल टंडन (मुंगेली) की जानकारी देने वालों को भी इनाम दिया जाएगा। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि इन आरोपियों के बारे में कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। जानकारी देने के लिए पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जिनमें बिलासपुर एसएसपी कार्यालय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस कंट्रोल रूम और संबंधित थाना प्रभारियों के नंबर शामिल हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर 07752-223330; अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शहर बिलासपुर 9479193002; पुलिस नियंत्रण कक्ष, बिलासपुर 07758-228504 और 9479193099। इसके अतिरिक्त, थाना प्रभारी सकरी 9479191721, तोरवा 9479193021, कोटा 9479193028, तखतपुर 9479193027 और बिल्हा 9479193038 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

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छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 हाईकोर्ट में चुनौती, उम्रकैद के प्रावधान पर मसीही समाज ने उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ को लेकर विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने इस कानून के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इसके कई प्रावधानों को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की है। राज्य सरकार द्वारा लाए गए इस विधेयक में जबरन, लालच या धोखे से धर्मांतरण कराने पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। कानून के अनुसार अवैध धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है। साथ ही बड़े पैमाने पर या संगठित तरीके से धर्म परिवर्तन कराने पर और कठोर दंड का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता क्रिस्टोफर पॉल का कहना है कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने विशेष रूप से उम्रकैद जैसी सजा को अनुचित और असंवैधानिक बताया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि विधेयक में इस्तेमाल की गई कई परिभाषाएं स्पष्ट नहीं हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा यह व्यक्तिगत निजता और आस्था की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करता है। मसीही समाज की ओर से यह आशंका भी जताई गई है कि इस कानून का उपयोग किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। उनके अनुसार, कठोर सजा और अस्पष्ट शब्दावली के कारण उत्पीड़न का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है, लेकिन सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। राज्य सरकार का पक्ष है कि यह कानून धर्मांतरण को रोकने के लिए नहीं, बल्कि गैरकानूनी तरीकों जैसे दबाव, प्रलोभन और धोखाधड़ी के जरिए कराए जा रहे धर्म परिवर्तन पर नियंत्रण के उद्देश्य से लाया गया है। आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की जनसंख्या 3 करोड़ से अधिक है, जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग निवास करते हैं। राज्य में ईसाई समुदाय की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है और यहां लगभग 900 चर्च बताए जाते हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

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19 अप्रैल तक रायपुर-दुर्ग और बिलासपुर में हीट वेव का अलर्ट, तापमान में 3°C तक बढ़ोतरी के आसार

छत्तीसगढ़ में गर्मी लगातार तेज होती जा रही है। बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेशभर में अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले तीन दिनों तक तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद हल्की गिरावट की संभावना जरूर है, लेकिन इससे गर्मी से खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। प्रदेश के रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के कई इलाकों में 19 अप्रैल तक लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। तेज गर्मी को देखते हुए स्कूलों में 20 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिया गया है। फिलहाल पूरे राज्य में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई है। मौसम से जुड़ा कोई सक्रिय सिस्टम नहीं होने के कारण आने वाले दिनों में भी बारिश के आसार नहीं हैं। बीते दिन प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 43.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में दर्ज हुआ। राजधानी रायपुर में भी लू चलने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान करीब 43 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगले दो दिनों तक प्रदेश में गर्म और शुष्क मौसम बना रहेगा और कुछ स्थानों पर हीट वेव की स्थिति बनी रह सकती है। फिलहाल लोगों को गर्मी से राहत मिलने के कोई संकेत नहीं हैं।

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छत्तीसगढ़ में गर्मी का असर: 20 अप्रैल से स्कूलों की छुट्टियां, पहले 1 मई से होना था अवकाश

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और लू को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां पहले ही घोषित कर दी हैं। अब प्रदेश के सभी सरकारी, अनुदान प्राप्त, निजी और अन्य स्कूलों में 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। पहले जारी आदेश के अनुसार, स्कूलों में छुट्टियां 1 मई से शुरू होनी थीं, लेकिन मौजूदा तापमान और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि तेज गर्मी में बच्चों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह छुट्टियां केवल छात्रों के लिए लागू होंगी। शिक्षकों के लिए अवकाश की तारीखों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और उन्हें पूर्व निर्धारित निर्देशों के अनुसार कार्य करना होगा। सरकार ने यह कदम बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उठाया है, ताकि बढ़ती गर्मी से उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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बिलासपुर में ASI पर गंभीर आरोप: केस की जानकारी मांगने पर पीड़ित को जड़े थप्पड़, सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। रतनपुर थाने में अपने केस की जानकारी लेने पहुंचे एक व्यक्ति के साथ एएसआई ने कथित तौर पर मारपीट की। आरोप है कि एएसआई दिनेश तिवारी ने गुस्से में आकर पीड़ित को 15 से 20 थप्पड़ जड़ दिए, जिससे उसका कान सुन्न हो गया। पीड़ित विनोद जायसवाल के मुताबिक, जब उन्होंने अपने पुराने केस की स्थिति और जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को लेकर जानकारी मांगी, तो एएसआई भड़क गया। इस दौरान गाली-गलौज करते हुए उसे धमकाया गया कि उसकी “नेतागिरी” निकाल दी जाएगी और जेल भेज दिया जाएगा। घटना के समय थाने में अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के बदले पैसे की मांग की जा रही थी। मामले की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एएसआई दिनेश तिवारी को निलंबित कर दिया है। साथ ही पीड़ित की शिकायत के आधार पर उसी थाने में एएसआई के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। यह घटना 12 अप्रैल की बताई जा रही है, जब बनियापारा निवासी विनोद जायसवाल दोपहर में थाने पहुंचे थे। बाद में उन्होंने इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की, जिस पर त्वरित कार्रवाई की गई। घटना के बाद पीड़ित को सुनने में परेशानी और सिरदर्द की शिकायत है। पुलिस ने मेडिकल जांच के साथ आगे की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पीड़ित पहले कोयला कारोबार से जुड़ा रहा है और स्थानीय राजनीतिक हलकों में सक्रिय रहा है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

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रायपुर गैस एजेंसी निलंबित: देरी, बदतमीजी और ज्यादा पैसे मांगने पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में लापरवाही बरतने वाली एक गैस एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की गई है। लगातार शिकायतों के बाद फाफाडीह चौक के पास स्थित रायपुर गैस एजेंसी को निलंबित कर दिया गया है। यह पहली बार है जब सिलेंडर वितरण में गड़बड़ी के चलते किसी एजेंसी पर इस तरह की कार्रवाई की गई है। आरोप है कि एजेंसी ग्राहकों को समय पर सिलेंडर नहीं दे रही थी। जहां सामान्यतः 25 दिनों में डिलिवरी होनी चाहिए, वहां 35 दिन बीतने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा था। इसके अलावा ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे मांगने और उनके साथ अभद्र व्यवहार करने की शिकायतें भी सामने आई थीं। कार्रवाई के बाद एजेंसी के करीब 12 हजार ग्राहकों को दूसरी एजेंसियों में शिफ्ट कर दिया गया है। इनमें से लगभग 11 हजार उपभोक्ताओं को राजेंद्र एचपी गैस एजेंसी और करीब 1 हजार को शांति एचपी एजेंसी से जोड़ा गया है। अब ये सभी उपभोक्ता इन एजेंसियों से गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकेंगे। स्थानीय लोगों के अनुसार, एजेंसी के बाहर अक्सर “स्टॉक खत्म” का बोर्ड लगा दिया जाता था। लोग सुबह से लाइन में लगते थे, लेकिन कई घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पाता था। इस वजह से कई बार वहां विवाद और हंगामे की स्थिति भी बनी। जिला खाद्य नियंत्रक के अनुसार, एजेंसी के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर यह कदम उठाया गया है। जिन उपभोक्ताओं को नई एजेंसियों में जोड़ा गया है, उनके लिए वितरण केंद्र भी शुरू कर दिए गए हैं और सप्लाई को सुचारु करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि किसी प्रकार की समस्या आती है, तो उसे जल्द दूर करने का आश्वासन दिया गया है।

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पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप 2025-26: आवेदन की आखिरी तारीख तय, 18 से 22 अप्रैल तक पूरी करें प्रक्रिया

पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सत्र 2025-26 के लिए आवेदन और स्वीकृति से जुड़ी अंतिम तिथियों की घोषणा कर दी गई है। रायपुर जिले के सभी शासकीय और निजी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग संस्थानों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। छात्रवृत्ति की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से विभागीय पोर्टल पर संचालित की जा रही है। पात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को निर्धारित समय के भीतर पंजीयन कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, ताकि समय पर स्वीकृति और भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। निर्देशों के अनुसार, संस्थानों को लंबित प्रस्तावों को लॉक कर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास रायपुर को भेजने की अंतिम तिथि 18 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके बाद शासकीय संस्थानों और जिला स्तर पर स्वीकृति आदेश लॉक करने की आखिरी तारीख 20 अप्रैल है। वहीं राज्य कार्यालय को भुगतान प्रस्ताव भेजने की अंतिम तिथि 22 अप्रैल 2026 निर्धारित की गई है। छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा भी तय की गई है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लिए वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख रुपए और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1 लाख रुपए रखी गई है। आवेदन के लिए स्थायी जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और पिछली कक्षा का परीक्षा परिणाम अनिवार्य होगा। सत्र 2025-26 से कुछ नई व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं। अब संस्थानों के लिए जियो-टैगिंग और विद्यार्थियों के लिए NSP पोर्टल पर वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) अनिवार्य कर दिया गया है।

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छत्तीसगढ़ में 18 अप्रैल को निजी स्कूल बंद: RTE प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध तेज

छत्तीसगढ़ में निजी स्कूलों का असहयोग आंदोलन अब और तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने 17 और 18 अप्रैल को लेकर अहम फैसले लिए हैं, जिससे स्कूल संचालन प्रभावित होगा। एसोसिएशन के अनुसार, 1 मार्च से शुरू हुए आंदोलन के तहत पहले ही यह तय किया गया था कि शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत लॉटरी से चयनित वंचित वर्ग के छात्रों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। हाल ही में 14 अप्रैल को हुई कार्यकारिणी बैठक में दो नए निर्णय लिए गए। इसके तहत 17 अप्रैल को स्कूल संचालक और शिक्षक काली पट्टी बांधकर काम करेंगे, जबकि 18 अप्रैल को पूरे प्रदेश के निजी स्कूल बंद रखे जाएंगे। एसोसिएशन ने इन फैसलों की जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री को दे दी है। साथ ही मांग की है कि सरकार शासकीय स्कूलों में प्रति छात्र होने वाले खर्च को सार्वजनिक करे, ताकि उसी आधार पर निजी स्कूलों को RTE के तहत मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय की जा सके। पदाधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2011 के बाद से प्रतिपूर्ति राशि में कोई संशोधन नहीं किया गया है, जिससे निजी स्कूलों को लगातार आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालने की मांग की है।

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छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक बोतल शराब नीति पर बवाल: सप्लाई घटी, सस्ती शराब दुकानों से गायब

छत्तीसगढ़ में शराब की पैकेजिंग को लेकर सरकार की नई नीति विवाद का कारण बन गई है। कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक (PET) बोतलों में शराब बेचने के फैसले का डिस्टिलर्स और बोतल एसोसिएशन ने विरोध शुरू कर दिया है। इसका असर अब सीधे बाजार और उपभोक्ताओं पर दिखने लगा है। राज्य की कई सरकारी शराब दुकानों में सस्ती शराब की उपलब्धता अचानक कम हो गई है या पूरी तरह खत्म हो गई है। बताया जा रहा है कि विरोध के चलते कई डिस्टिलर्स ने उत्पादन और सप्लाई धीमी कर दी है, जिससे खासकर लो-कॉस्ट देसी और विदेशी शराब की कमी देखने को मिल रही है। सरकार का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों का इस्तेमाल करने से ट्रांसपोर्ट आसान होगा, टूट-फूट कम होगी और लागत में भी कमी आएगी। लेकिन डिस्टिलर्स और बोतल निर्माता कंपनियों का तर्क है कि यह फैसला बिना पर्याप्त तैयारी के लिया गया है और इससे उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ेगा। इसी बीच, विभागीय स्तर पर भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुछ फील्ड अफसरों ने अलग समूह बनाकर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कई जगह शराब दुकानों के बाहर चालानी कार्रवाई भी तेज कर दी गई है, जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मुद्दे पर बॉटलिंग एसोसिएशन पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना विरोध दर्ज करा चुका है। उनका कहना है कि इस फैसले से करीब 15 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं, खासकर वे लोग जो कांच की बोतलों की रीसाइक्लिंग से जुड़े हैं। फिलहाल, सरकार और उद्योग से जुड़े संगठनों के बीच जारी इस खींचतान का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिन्हें दुकानों में मनचाहा उत्पाद नहीं मिल पा रहा है।

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प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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