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दुर्ग में बिना हेलमेट चालकों पर कड़ा एक्शन, 4 महीनों में 23 हजार चालान

दुर्ग में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए यातायात पुलिस ने बिना हेलमेट दोपहिया चलाने वालों के खिलाफ सख्त अभियान चला रखा है। साल 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 23,088 वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक, इन चालानों से अब तक कुल 1 करोड़ 15 लाख 44 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया है। यह आंकड़ा बताता है कि नियमों के उल्लंघन पर इस बार कार्रवाई पहले के मुकाबले काफी तेज हुई है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 में 1653 मामलों में 8.26 लाख रुपए, 2024 में 3961 मामलों में 19.80 लाख रुपए और 2025 में 2328 मामलों में 11.64 लाख रुपए का जुर्माना वसूला गया था। इससे साफ है कि 2026 में अभियान और ज्यादा सख्ती के साथ चलाया जा रहा है। हादसों के आंकड़े भी चिंताजनक हैं। साल 2025 में बिना हेलमेट सड़क हादसों में 230 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2026 के पहले चार महीनों में ही 26 लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि हेलमेट पहनने से इनमें से कई जानें बचाई जा सकती थीं। यातायात विभाग का दावा है कि लगातार सख्ती के कारण लोगों में जागरूकता बढ़ी है और अब पहले की तुलना में ज्यादा लोग हेलमेट पहन रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी कई लोग नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, जिस पर पुलिस नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। शहर के विभिन्न हिस्सों में रोजाना चेकिंग की जा रही है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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गर्मी और शादी सीजन का असर, रायपुर से ट्रेनों में ‘नो रूम’… वेटिंग 150 पार

गर्मी की छुट्टियों और शादी के सीजन की वजह से रायपुर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मई तक ज्यादातर ट्रेनों में सीटें फुल हो चुकी हैं और वेटिंग लिस्ट 100 से 150 के पार पहुंच गई है। कई ट्रेनों में ‘नो रूम’ की स्थिति बन गई है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रायपुर से मुंबई, दिल्ली और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा दबाव है। इन रूट्स पर कंफर्म टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। ऐसे में यात्रियों के लिए तत्काल टिकट ही आखिरी विकल्प बचता है, लेकिन वह भी राहत नहीं दे पा रहा है। रेलवे के आरक्षण काउंटर पर स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। मुख्य आरक्षण कार्यालय में सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। काउंटर खुलते ही कुछ ही मिनटों में तत्काल टिकट खत्म हो जा रहा है। कई यात्रियों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। लाइन में लगे यात्रियों का कहना है कि वे कई दिनों से लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन हर बार टिकट नहीं मिल पा रहा। छुट्टियों के चलते परिवार के साथ यात्रा करने की मजबूरी है, लेकिन कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। हर साल गर्मी के मौसम में यात्रियों की संख्या बढ़ने से ट्रेनों में दबाव बढ़ता है। इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है। हालांकि रेलवे द्वारा समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं, लेकिन बढ़ती मांग के सामने ये भी नाकाफी साबित हो रही हैं। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जिन रूट्स पर यात्रियों की संख्या ज्यादा है, वहां सर्वे किया जा रहा है और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त समर स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।

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महिला आरक्षण पर छत्तीसगढ़ में सियासी घमासान, साय सरकार बुलाएगी विशेष सत्रc

महिला आरक्षण बिल को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति तेज हो गई है। विष्णुदेव साय की सरकार इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। यह सत्र इसी महीने आयोजित हो सकता है, जिसमें विपक्ष के रुख के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही जा रही है। रायपुर में आयोजित जनआक्रोश रैली के दौरान मुख्यमंत्री साय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर उनका रवैया निराशाजनक रहा है। इस रैली का आयोजन भाजपा महिला मोर्चा द्वारा किया गया था, जो बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंची, जहां सभा आयोजित हुई। विशेष सत्र बुलाने की प्रक्रिया के तहत पहले राज्य कैबिनेट इसकी मंजूरी देती है, जिसके बाद प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जाता है। उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही विधानसभा सत्र आयोजित किया जाता है। महिला आरक्षण को लेकर भाजपा ने देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में 20 अप्रैल से प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो 27 अप्रैल तक जारी रहेंगे। 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विपक्ष के कारण पारित नहीं हो सका। उन्होंने विपक्षी दलों पर महिलाओं की उम्मीदों को तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ पार्टियां “फूट डालो और राज करो” की नीति पर काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी महिलाओं की भागीदारी 21-22 प्रतिशत है। वहीं, नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाने पर महिलाओं से माफी मांगी। उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उनकी राजनीति के कारण यह बिल पारित नहीं हो सका। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल आवश्यक बहुमत नहीं जुटा सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 352 वोटों की जरूरत थी। इस प्रस्ताव में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान शामिल था।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पिता की हत्या के मामले में बेटे की सजा उम्रकैद से घटाकर 10 साल

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पिता की हत्या के आरोप में सजा काट रहे बेटे को राहत देते हुए उसकी सजा कम कर दी है। अदालत ने उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कठोर कारावास में बदल दिया है। यह निर्णय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल शामिल थे, ने सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए विवाद और गुस्से में अंजाम दी गई। ऐसे मामलों में हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता, इसलिए इसे हत्या (IPC 302) के बजाय गैर-इरादतन हत्या (IPC 304 भाग-1) के तहत माना जाना चाहिए। दरअसल, यह मामला वर्ष 2020 का है, जो बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के रामचंद्रपुर थाना क्षेत्र के हरिहरपुर गांव का है। यहां लकड़ी रखने को लेकर पिता और बेटे के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान बेटे महात्मा यादव ने गुस्से में आकर अपने पिता जंगली यादव को पिकअप वाहन से कुचल दिया था। इस घटना में पिता गंभीर रूप से घायल हो गए थे और इलाज के दौरान करीब 9 दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी बेटे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट पेश की गई और निचली अदालत ने ट्रायल के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि घटना अचानक हुई थी और इसमें पूर्व योजना का कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि, आरोपी को यह पता था कि उसका कृत्य जानलेवा हो सकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सजा में संशोधन करते हुए हत्या की धारा को बदल दिया और उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 साल कर दिया। अदालत ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि आरोपी को अब शेष सजा जेल में ही पूरी करनी होगी।

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कोरिया में अवैध कोयला खनन पर बड़ी कार्रवाई, सुरंगों को ब्लास्ट कर बंद करने की तैयारी

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध कोयला खनन के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए लगातार दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रखी। रायपुर से पहुंची सेंट्रल फ्लाइंग स्क्वॉड की टीम ने देवखोल और भालूमाड़ा क्षेत्रों का निरीक्षण किया और अवैध खनन स्थलों का चिन्हांकन किया। अधिकारियों ने इन सुरंगों को ब्लास्टिंग के जरिए स्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले को सामने आने के बाद जिला स्तर पर गठित टास्क फोर्स ने पूरे इलाके में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। हालांकि निरीक्षण के दौरान मौके पर कोयला या खनन सामग्री नहीं मिली, लेकिन अधिकारियों के अनुसार यहां पहले बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जाता रहा है। इससे एक दिन पहले शनिवार को भी संयुक्त टीम ने पटना तहसील के देवखोल जंगल क्षेत्र में सघन अभियान चलाया था। इस दौरान करीब 6 टन से अधिक अवैध कोयला जब्त किया गया था और कई सुरंगों को ध्वस्त किया गया, जिनका उपयोग लंबे समय से खनन के लिए किया जा रहा था। अभियान के दौरान टीम ने करीब 150 लंबी सुरंगों के भीतर जाकर जांच की। यहां से कोयले के साथ-साथ खनन में उपयोग होने वाले उपकरण जैसे फावड़ा, गेती, विद्युत पंप, पाइप और बड़ी मात्रा में बिजली के तार भी जब्त किए गए। यह दर्शाता है कि अवैध खनन संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था। रविवार को हुई कार्रवाई में कोरिया के अलावा सूरजपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही जिलों के खनिज अधिकारी, पुलिस, वन विभाग और राजस्व विभाग की टीम भी शामिल रही। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे अभियान में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चिन्हित सभी अवैध खनन स्थलों को ब्लास्टिंग कर बंद किया जाएगा, ताकि भविष्य में इनका दोबारा उपयोग न हो सके। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में लगातार निगरानी और संयुक्त अभियान जारी रखने की योजना बनाई गई है। इस सख्त कार्रवाई के बाद अवैध खनन में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा, ताकि अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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रायपुर में आज कई रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्जन, बीजेपी की आक्रोश रैली के चलते असर

राजधानी रायपुर में आज भारतीय जनता पार्टी की आक्रोश रैली के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक लोगों से वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की अपील की है। रैली को देखते हुए शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में विशेष व्यवस्था की गई है। यह रैली महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) बिल लोकसभा में पारित नहीं होने के विरोध में निकाली जा रही है। रैली की शुरुआत इंडोर स्टेडियम से होगी और यह गणेश मंदिर तिराहा, बुढ़ापारा बिजली ऑफिस चौक, महिला थाना चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंचेगी, जहां आमसभा का आयोजन किया जाएगा। अनुमान है कि इस रैली में प्रदेशभर से 15 से 20 हजार कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, बूढ़ेश्वर चौक से गणेश मंदिर तिराहा होते हुए बुढ़ापारा बिजली ऑफिस चौक, श्याम टॉकीज से गणेश मंदिर तिराहा, सदानी चौक और सदर बाजार, महिला थाना चौक से सुभाष स्टेडियम, कोतवाली चौक से सुभाष स्टेडियम, बंजारी चौक से सुभाष स्टेडियम, कालीबाड़ी चौक से कोतवाली चौक और आकाशवाणी चौक से नलघर चौक तक के मार्गों पर यातायात का दबाव रहेगा और आंशिक रूप से रास्ते बंद रह सकते हैं। लोगों की सुविधा के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कुछ वैकल्पिक मार्ग भी सुझाए हैं। बूढ़ेश्वर चौक से कैलाशपुरी ढाल, पुलिस लाइन गेट होते हुए नेहरू नगर की ओर जाने का मार्ग खुला रहेगा। इसी तरह कालीबाड़ी से महिला थाना चौक, काली माता तिराहा और अंबेडकर चौक मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि रैली के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में जवान तैनात रहेंगे, लेकिन अनावश्यक रूप से इन मार्गों पर आने से बचना बेहतर होगा। महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन प्रस्ताव के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई है। इसी के तहत रायपुर में यह आक्रोश रैली आयोजित की जा रही है। इस आयोजन को देखते हुए शहरवासियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

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महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी का प्रदर्शन आज से, रायपुर में निकलेगी जन आक्रोश यात्रा

महिला आरक्षण बिल पारित नहीं होने के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी आज से विरोध प्रदर्शन की शुरुआत कर रही है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर में 20 अप्रैल को भाजपा महिला मोर्चा द्वारा जन आक्रोश यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा दोपहर 3 बजे बलबीर जुनेजा इंडोर स्टेडियम से शुरू होकर सुभाष स्टेडियम तक पहुंचेगी, जहां एक सभा का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, डिप्टी सीएम अरुण साव, कैबिनेट मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद रूपकुमारी चौधरी, कमलेश जांगड़े और लक्ष्मी वर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल होंगे। पार्टी ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए व्यापक स्तर पर आंदोलन की तैयारी की है। भारतीय जनता पार्टी ने महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्ताव के संसद में पारित नहीं होने को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करने की रणनीति बनाई है। छत्तीसगढ़ में भी इसी क्रम में चरणबद्ध तरीके से विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 20 अप्रैल को पदयात्रा के बाद 23 और 24 अप्रैल को प्रदेशभर में महिला सम्मेलन होंगे, जबकि 26 और 27 अप्रैल को मंडल स्तर पर पुतला दहन किया जाएगा। रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के रवैये के कारण यह बिल पास नहीं हो सका। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि यह महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय है और इसके खिलाफ जनजागरूकता जरूरी है। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर पाया। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसे पारित करने के लिए अधिक मतों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में प्रस्ताव गिर गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर देश को संबोधित करते हुए महिलाओं से माफी जताई और कहा कि यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने विपक्षी दलों पर राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता आगे भी बनी रहेगी।

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सरगुजिहा बोली पर एडमिशन से इनकार, स्कूल को नोटिस; दूसरे स्कूल ने दिया फ्री प्रवेश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक बच्चे को स्थानीय सरगुजिहा बोली बोलने के कारण प्री-प्राइमरी स्कूल में प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जबकि एक अन्य स्कूल ने बच्चे को निःशुल्क प्रवेश देकर मिसाल पेश की है। जानकारी के अनुसार, अभिभावक अपने 4 वर्षीय बेटे का दाखिला कराने चोपड़ापारा स्थित एक प्राइवेट स्कूल पहुंचे थे। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान बच्चे ने सवालों के जवाब सरगुजिहा बोली में दिए। आरोप है कि डेमो क्लास के बाद स्कूल ने यह कहते हुए एडमिशन से इनकार कर दिया कि अन्य बच्चे उसकी भाषा से प्रभावित हो सकते हैं। इस मामले की शिकायत कलेक्टर अजीत वसंत से की गई, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए स्कूल को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि नियमों के उल्लंघन पर उसकी मान्यता क्यों न समाप्त कर दी जाए। साथ ही स्कूल से संबंधित दस्तावेज भी तलब किए गए हैं। दूसरी ओर, एक अन्य प्ले स्कूल ने पहल करते हुए बच्चे को मुफ्त में प्रवेश दिया है, ताकि उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो और वह स्थानीय बोली के साथ-साथ हिंदी भी सीख सके। स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के क्षेत्र में भाषा के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है। मामले को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की बात कही है, वहीं छात्र संगठन ने संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई है। शिक्षा विभाग के अनुसार, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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RTE फीस बढ़ाने की मांग पर 5 हजार निजी स्कूल बंद, असहयोग आंदोलन तेज

छत्तीसगढ़ में आरटीई के तहत मिलने वाली फीस प्रतिपूर्ति बढ़ाने की मांग को लेकर निजी स्कूलों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। शनिवार को प्रदेशभर के करीब 5 हजार निजी स्कूलों में ताला लगा रहा। इससे पहले एक दिन स्कूल संचालकों, शिक्षकों और स्टाफ ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपनी नाराजगी जताई थी। प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने साफ कहा है कि जब तक सरकार आरटीई के तहत मिलने वाली राशि में बढ़ोतरी नहीं करती, तब तक लॉटरी से चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह आंदोलन 1 मार्च से जारी है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। स्कूल संचालकों का कहना है कि पिछले 14 वर्षों से आरटीई प्रतिपूर्ति राशि में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वर्तमान में प्राथमिक कक्षाओं के लिए प्रति छात्र 7,000 रुपये और माध्यमिक स्तर के लिए 11,400 रुपये दिए जाते हैं, जबकि स्कूल संचालन की लागत लगातार बढ़ रही है। इससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर कई बार सरकार से चर्चा की गई, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। इसी वजह से अब आंदोलन को और तेज किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें जल्द पूरी नहीं होतीं, तो विरोध और उग्र हो सकता है। फिलहाल स्कूल बंद रखकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। इधर, सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने स्कूलों की मान्यता रद्द करने के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारियों को पात्र छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि प्रदेश में गर्मी को देखते हुए 20 अप्रैल से ग्रीष्मकालीन अवकाश भी घोषित किया जा चुका है, ऐसे में स्कूल बंद रहने से छात्रों के लिए छुट्टियों जैसी स्थिति बन गई है।

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जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का विरोध, भीषण गर्मी में सर्वे को बताया अव्यवहारिक

छत्तीसगढ़ में 1 मई से शुरू होने वाली जनगणना ड्यूटी को लेकर शिक्षकों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मई-जून की तेज गर्मी में घर-घर जाकर सर्वे करना बेहद मुश्किल और जोखिम भरा होगा। एक ओर इस समय स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां रहती हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को फील्ड में काम करने के लिए भेजा जा रहा है, जिसे उन्होंने अव्यवहारिक बताया है। छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा कि इस फैसले में मौसम की गंभीरता को नजरअंदाज किया गया है। तेज धूप और उच्च तापमान में लंबे समय तक बाहर रहकर डोर-टू-डोर सर्वे करना न केवल कठिन है, बल्कि स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। शिक्षक संघ ने मांग की है कि जनगणना ड्यूटी के समय और प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा स्मार्टफोन की अनिवार्यता को लेकर भी शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। सरकारी निर्देश के अनुसार, जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों के पास एंड्रॉयड 12.0 या उससे ऊपर का मोबाइल होना जरूरी किया गया है। ऐसे में जिनके पास पुराने फोन हैं, उन्हें नया स्मार्टफोन खरीदना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। राज्य में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का डेटा एकत्र किया जाएगा। कर्मचारी निर्धारित समय में घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा गया है। इसके बाद उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे सर्वे के दौरान कर्मचारियों को दिखाना होगा। इस चरण में मकान की स्थिति, उपयोग, निर्माण की गुणवत्ता, परिवारों की संख्या समेत कुल 33 प्रकार की जानकारियां ली जाएंगी। साथ ही पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना बनाने के ईंधन, इंटरनेट और अन्य सुविधाओं से जुड़े सवाल भी शामिल रहेंगे। घर में रहने वाले सदस्यों और उपयोग किए जाने वाले वाहनों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा।

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