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ग्रामीण सेवा नहीं करने वाले 43 डॉक्टरों से 17 करोड़ की वसूली करेगी सरकार

राज्य के ग्रामीण इलाकों में नियुक्ति मिलने के बावजूद ज्वाइन नहीं करने वाले 43 डॉक्टरों पर अब स्वास्थ्य विभाग सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। इनमें 15 एमबीबीएस डॉक्टर और 28 विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं। विभाग इन डॉक्टरों से कुल 17 करोड़ 75 लाख रुपए की पेनल्टी वसूलने की तैयारी कर रहा है। स्वास्थ्य संचालनालय ने मंगलवार से कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अधिकारियों को इस मामले में कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों के लिए दो साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देना अनिवार्य होता है। इसके लिए पढ़ाई के दौरान डॉक्टरों से बांड भरवाया जाता है। एमबीबीएस छात्रों के लिए 25 लाख रुपए और पीजी छात्रों के लिए 50 लाख रुपए का बांड तय किया गया है। बांड में साफ तौर पर उल्लेख होता है कि यदि डॉक्टर पढ़ाई पूरी होने के बाद तय अवधि तक ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा नहीं देंगे तो उनसे बांड की राशि वसूली जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने 2025 में 655 मेडिकल ऑफिसर्स और 155 विशेषज्ञ डॉक्टरों की ग्रामीण क्षेत्रों में संविदा नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। इन डॉक्टरों को दो साल की सेवा के लिए पदस्थ किया गया था। जब विभाग ने दिसंबर 2025 में ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों को नोटिस भेजना शुरू किया, तब 54 डॉक्टरों ने जल्दबाजी में अपनी ज्वाइनिंग दे दी। इनमें 37 यूजी और 17 पीजी डॉक्टर शामिल थे। इन डॉक्टरों ने मेडिकल सर्टिफिकेट और ज्वाइनिंग दस्तावेज जमा कर दिए, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि 43 डॉक्टरों ने नोटिस का जवाब देने के बावजूद अपनी पोस्टिंग वाली जगह पर ज्वाइन नहीं किया। कई डॉक्टरों ने ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी, बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी और छोटे बच्चों की पढ़ाई जैसी वजहें बताईं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बांड भरते समय डॉक्टरों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता है कि उनकी नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में की जाएगी। इसके बावजूद बांड स्वीकार करने के बाद सेवा नहीं देना नियमों का उल्लंघन है। अब विभाग ने इन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टरों को भी सूचना भेज दी है।

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छत्तीसगढ़ BJP कोर कमेटी में बड़ा बदलाव: ओपी चौधरी, विजय शर्मा और अमर अग्रवाल शामिल, कई वरिष्ठ नेता बैठक से दूर

छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन में बड़ा बदलाव किया गया है। पार्टी की कोर कमेटी का पुनर्गठन करते हुए कई नए चेहरों को शामिल किया गया है, जबकि कुछ पुराने सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नई सूची में मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और पूर्व मंत्री व विधायक अमर अग्रवाल को कोर कमेटी में जगह दी गई है। इसके साथ ही संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण फेरबदल माना जा रहा है। हालांकि कोर कमेटी की हालिया बैठक में पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन अग्रवाल और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल नहीं हुए। उनकी अनुपस्थिति के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कोर ग्रुप के पुनर्गठन की पुष्टि की है। वहीं पार्टी के अंदर इसे संगठन को नई दिशा देने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन को बूथ और ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने, आगामी रणनीति और विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा पर चर्चा की गई थी। बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। अब प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पर भी सभी की नजरें टिकी हैं, जहां आगामी रणनीति और संगठनात्मक दिशा को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा में यह बदलाव सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर बड़े पुनर्गठन की तैयारी के संकेत मिल रहे हैं। कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की भी चर्चाएं हैं। इसके साथ ही मंत्रिमंडल और संगठन में भविष्य में और बदलाव की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं, जिससे छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीतिक रणनीति नए मोड़ पर जाती दिख रही है।

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रायपुर: बम बनाने की सामग्री मामले में आरोपी गिरफ्तार, महापौर से रिश्तेदारी की चर्चा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बम बनाने से जुड़ी संदिग्ध सामग्री मिलने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी विनय देवांगन को गिरफ्तार किया है। आरोपी को खमतराई थाना क्षेत्र के रावाभाठा इलाके से पकड़ा गया है। जानकारी के अनुसार, 7 मई को रावाभाठा इलाके में एक संदिग्ध युवक के पास पिस्टल और बम निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री मिलने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना के बाद पुलिस और बम निरोधक दस्ता (BDDS) मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई। जांच के दौरान टीम को लो एक्सप्लोसिव क्षमता वाली सामग्री, बैटरी, दो केमिकल की बोतलें, तार और डेटोनेटर बरामद हुए थे। मामले के सामने आने के बाद आरोपी फरार हो गया था, जिसकी पुलिस लगातार तलाश कर रही थी। अब उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि आरोपी की मंशा क्या थी और क्या इस घटना में अन्य लोग भी शामिल हैं। आरोपी विनय देवांगन को लेकर यह भी जानकारी सामने आई है कि वह बीरगांव नगर निगम के महापौर और एक पार्षद का रिश्तेदार है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।

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बिलासपुर में पुलिस की सख्ती: हुड़दंगियों और तीन सवारी बाइकर्स पर कार्रवाई, 513 लोग गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस ने देर रात सड़कों पर उपद्रव करने वाले बदमाशों और नियम तोड़ने वाले बाइकर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। तीन सवारी बैठाकर बाइक चलाने, बिना नंबर प्लेट के घूमने और शराब पीकर वाहन चलाने वालों को पकड़कर सख्त चेतावनी दी गई। कार्रवाई के दौरान कई युवकों से उठक-बैठक भी कराई गई और उन्हें दोबारा गलती न करने की हिदायत दी गई। इस पूरी कार्रवाई का वीडियो भी सामने आया है। जिले में लगातार बढ़ रही चाकूबाजी और असामाजिक गतिविधियों को देखते हुए पुलिस ने विशेष अभियान शुरू किया है। देर रात सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग मचाने और लोगों में डर का माहौल बनाने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सोमवार रात एएसपी पंकज पटेल और सीएसपी निमितेश सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कई इलाकों में जांच अभियान चलाया। इस दौरान कुछ संदिग्ध युवकों के पास से हथियार भी बरामद किए गए। पुलिस को सिरगिट्टी क्षेत्र के अंडरब्रिज के पास शराबखोरी और बदमाशों के जमावड़े की लगातार शिकायत मिल रही थी। इसके बाद पुलिस ने इलाके में घेराबंदी कर चेकिंग अभियान चलाया। अलग-अलग स्थानों पर जवान तैनात किए गए थे ताकि भागने की कोशिश करने वालों को तुरंत पकड़ा जा सके। कार्रवाई के दौरान 7 बाइक जब्त की गईं और 12 युवकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। पुलिस को देखकर भागने की कोशिश कर रहे कई युवकों को दौड़ाकर पकड़ा गया। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर अप्रैल 2026 से 12 मई 2026 तक जिलेभर में चलाए गए विशेष अभियान में कुल 513 लोगों के खिलाफ वैधानिक और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पुलिस का फोकस खासतौर पर चाकू लेकर घूमने वाले, सार्वजनिक स्थानों पर डर फैलाने वाले और कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले लोगों पर रहा। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सिविल लाइन थाना क्षेत्र में धारा 151 के तहत 55, धारा 107/116 के तहत 76 और आर्म्स एक्ट के 11 मामलों में कार्रवाई हुई। वहीं सरकंडा थाना क्षेत्र में धारा 107/116 के तहत सबसे ज्यादा 130 मामले दर्ज किए गए। कोतवाली थाना क्षेत्र में धारा 151 के 21 और धारा 107/116 के 93 मामलों में कार्रवाई हुई। तोरवा थाना क्षेत्र में चाकूबाजी के 2 मामले सामने आए, जबकि सिरगिट्टी और चकरभाठा क्षेत्रों में भी आर्म्स एक्ट और प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियार लेकर घूमने और अशांति फैलाने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।

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रायपुर नगर निगम में 2.23 करोड़ के टैंकर टेंडर पर विवाद: नेता प्रतिपक्ष ने लगाया घोटाले और मिलीभगत का आरोप

राजधानी रायपुर में गर्मी के दौरान पानी सप्लाई के लिए जारी किए गए टैंकर टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रायपुर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले कई वर्षों से कुछ चुनिंदा फर्मों को ही लगातार काम दिया जा रहा है। आकाश तिवारी ने कहा कि नगर निगम हर साल वार्डों में पानी सप्लाई के लिए टैंकर टेंडर जारी करता है, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता दिखाई नहीं देती। उनका आरोप है कि पिछले वर्ष जिन छह फर्मों को टेंडर मिला था, इस बार भी उन्हीं कंपनियों को काम सौंपा गया है। नेता प्रतिपक्ष ने जिन फर्मों का नाम लिया उनमें मेसर्स केशव प्रसाद पांडे, प्रज्ञा कंस्ट्रक्शन, परिमल कश्यप, अरविंद सिंह ठाकुर, प्रवीण दीक्षित और रफीक अहमद शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल यही फर्में कैसे चयनित हो जाती हैं। तिवारी ने आरोप लगाया कि निविदा की शर्तें भी ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के हिसाब से तय की जाती हैं। उन्होंने कहा कि सभी निविदा दाताओं के रेट और तारीखों का एक जैसा होना संदेह पैदा करता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल लगभग 1 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया था, लेकिन बाद में टैंकर संचालन के नाम पर करीब 2.06 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। उनका कहना है कि टेंडर राशि कम रखी जाती है और बाद में भुगतान बढ़ा दिया जाता है, जिससे पूरे मामले पर सवाल खड़े होते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने टैंकरों में GPS सिस्टम नहीं लगाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिना GPS मॉनिटरिंग के यह पता लगाना मुश्किल है कि टैंकरों ने वास्तव में कहां और कितनी पानी सप्लाई की। आकाश तिवारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।

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हमर अस्पताल में एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई का आरोप: कांग्रेस ने सरकार और CGMSC पर उठाए सवाल

रायपुर के गुढ़ियारी स्थित हमर अस्पताल में एक्सपायरी और कम अवधि वाली दवाइयों की सप्लाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता Vikas Upadhyay ने अस्पताल और CGMSC वेयरहाउस का निरीक्षण करने के बाद दावा किया कि वहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां मिली हैं। उन्होंने इस मामले में FIR दर्ज कराने और प्रदेशभर में जांच की मांग की है। विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में ऐसी दवाइयां पहुंचाई जा रही हैं जिनकी एक्सपायरी डेट नजदीक है या जो उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उनका कहना है कि इससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है और यदि पूरे प्रदेश में जांच की जाए तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जिन दवाइयों पर सवाल उठ रहे हैं उनमें नवजात शिशुओं और बच्चों को दी जाने वाली दवाइयां भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कम अवधि या एक्सपायरी दवाओं का उपयोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले CGMSC के जरिए सप्लाई की गई कैल्शियम दवाओं, मेडिकल किट, दस्ताने, सिरिंज और अन्य सर्जिकल सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ चुके हैं। कांग्रेस ने सरकार और दवा सप्लाई एजेंसियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर दिए जा रहे हैं। विकास उपाध्याय ने दावा किया कि कुछ कंपनियों में भाजपा नेताओं और उनके परिजनों की भूमिका होने के कारण कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि इस मामले पर सरकार या CGMSC की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कांग्रेस ने राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की बात कही है।

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NEET UG 2026 परीक्षा रद्द: पेपर लीक के आरोप के बाद NTA का बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ के 45 हजार छात्र फिर देंगे एग्जाम

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है। यह फैसला पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद लिया गया। अब देशभर के छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। छत्तीसगढ़ में लगभग 45 हजार अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। NTA ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया है। मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी। नई परीक्षा तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी। छत्तीसगढ़ में इस बार NEET परीक्षा के लिए 19 केंद्र बनाए गए थे। इनमें रायपुर के करीब 9,200 छात्र शामिल थे। NTA ने स्पष्ट किया है कि छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होगी। पुराने परीक्षा केंद्रों पर ही री-एग्जाम कराया जाएगा और नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। परीक्षा फीस भी वापस की जाएगी। जांच में सामने आया है कि पेपर छपने से पहले ही कुछ सवाल कथित नकल गिरोह तक पहुंच गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बायोलॉजी के 90 और केमिस्ट्री के 35 सवाल पहले ही लीक हो चुके थे। इस मामले के तार राजस्थान के जयपुर से जुड़ रहे हैं। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने जयपुर से मनीष नाम के एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। एजेंसियां उसके नेटवर्क और अन्य राज्यों में फैले कनेक्शन की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि लीक हुए सवालों को दूसरे प्रश्नों के साथ मिलाकर एक “क्वेश्चन बैंक” तैयार किया गया था, जिसे परीक्षा देने वाले छात्रों तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और केमिस्ट्री के 45 में से 35 सवाल हूबहू परीक्षा में आए। एजेंसियों ने कई छात्रों से पूछताछ की है। पूछताछ में पैसों के लेनदेन की बात भी सामने आई है। अब जांच एजेंसियां पूरे मनी ट्रेल की जांच कर रही हैं। NTA के अनुसार, 8 मई से ही मामले की जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंप दी गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया है ताकि परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे। राजस्थान में परीक्षा के बाद कई छात्रों के पास हाथ से लिखे गए कथित “गेस पेपर” मिले थे, जिनके सवाल असली परीक्षा से मेल खा रहे थे। 10 मई को SOG ने देहरादून, सीकर और झुंझुनूं से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया था। जांच में यह भी सामने आया कि परीक्षा से दो दिन पहले ही करीब 600 नंबर के सवाल कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, इतने बड़े स्तर पर सवालों का मैच होना सामान्य स्थिति नहीं माना जाता। यह पहला मौका नहीं है जब NTA विवादों में आया हो। इससे पहले 2024 में भी NEET UG परीक्षा पेपर लीक विवाद में घिरी थी। उस समय बिहार और झारखंड में जांच के बाद कई गिरफ्तारियां हुई थीं, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द नहीं की थी।

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दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा टला: चलती ट्रेन में चढ़ते समय फिसला यात्री, RPF जवान ने बचाई जान

दुर्ग रेलवे स्टेशन पर एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस में चढ़ने के दौरान एक यात्री का पैर फिसल गया और वह चलती ट्रेन तथा प्लेटफॉर्म के बीच फंस गया। घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार, रविवार रात बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस दुर्ग रेलवे स्टेशन से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री जल्दबाजी में चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन धीरे-धीरे गति पकड़ रही थी, तभी यात्री का संतुलन बिगड़ गया और वह प्लेटफॉर्म व ट्रेन के बीच बने गैप में फंस गया। बताया जा रहा है कि यात्री करीब 50 मीटर तक घसीटता चला गया। यह दृश्य देखकर प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं और यात्रियों ने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। इसी बीच ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के एएसआई Niranjan ने तुरंत स्थिति को समझा और बिना समय गंवाए दौड़कर यात्री को बाहर खींच लिया। उनकी सतर्कता और तेजी की वजह से बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आरपीएफ जवान की तत्परता साफ दिखाई दे रही है। स्टेशन पर मौजूद लोगों ने जवान की बहादुरी और फुर्ती की सराहना की। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

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रायपुर में मानसून से पहले जलभराव: नाले का गंदा पानी घरों में घुसा, फाफाडीह अंडरब्रिज में फिसल रहीं गाड़ियां

रायपुर में मानसून शुरू होने से पहले ही जलभराव की समस्या ने नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फाफाडीह इलाके के रमन मंदिर छहमुंहा नाले में कचरा जमा होने के कारण आसपास की बस्तियों में पानी भरने लगा है। स्थिति ऐसी हो गई कि गर्मी के मौसम में ही नाले का गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से नालों की सफाई नहीं की गई है। थोड़ी बारिश और पानी के बहाव से ही चूनाभट्टी बस्ती, फाफाडीह अंडरब्रिज और पाठक नर्सिंग होम गली में जलभराव की स्थिति बन गई। कई घरों और दुकानों में पानी घुसने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। फाफाडीह अंडरब्रिज में तेज बहाव के कारण दोपहिया वाहन चालकों के फिसलने की घटनाएं भी सामने आईं। लोगों के मुताबिक कई वाहन चालक सड़क पर गिरकर घायल हो गए। वहीं पाठक नर्सिंग होम गली में जलभराव के चलते अस्पताल परिसर और आसपास के मकानों में भी पानी भर गया। मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इलाके में धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में Shrikumar Shankar Menon और Kuldeep Juneja भी शामिल रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद, महापौर और विधायक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। धरने के दौरान निगम अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। शिकायतों के बाद जोन कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, जिसके बाद पोकलेन मशीन की मदद से नाले की सफाई शुरू कराई गई। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर गर्मी में ही यह स्थिति है तो मानसून के दौरान हालात और खराब हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर स्थायी जल निकासी व्यवस्था नहीं की गई, तो पहले जोन कार्यालय और बाद में नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।

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बिलासपुर में आवारा कुत्ते का हमला: दो मासूम बच्चों की आंखों पर गंभीर चोट, सर्जरी से बचाई गई रोशनी

बिलासपुर जिले में आवारा कुत्ते के हमले में दो छोटे बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले में बच्चों के चेहरे, आंखों और पलकों पर गहरी चोटें आईं। दोनों का इलाज सिम्स अस्पताल में किया गया, जहां डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उनकी आंखों की रोशनी बचाई। डॉक्टरों ने इसे कैटेगरी-3 डॉग बाइट का मामला बताया है, जिसमें रेबीज संक्रमण का खतरा काफी अधिक रहता है। घटना बिल्हा विकासखंड के बटोरी गांव की है। बताया जा रहा है कि दो साल का एक लड़का और दो साल की एक बच्ची घर के बाहर खेल रहे थे, तभी एक आवारा कुत्ते ने अचानक उन पर हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चों के चेहरे और आंखों के आसपास बुरी तरह काट लिया। घटना के बाद परिजन तुरंत दोनों बच्चों को Chhattisgarh Institute of Medical Sciences लेकर पहुंचे। जांच में डॉक्टरों ने पाया कि बच्चों की पलकों और आंखों के आसपास गंभीर जख्म हैं। संक्रमण के खतरे को देखते हुए तत्काल घावों की सफाई की गई और बच्चों को एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) तथा रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) दिया गया। आंखों और पलकों को गंभीर नुकसान पहुंचने के कारण डॉक्टरों ने तुरंत ‘अर्जेंट लिड रिपेयर सर्जरी’ की। ऑपरेशन के दौरान क्षतिग्रस्त हिस्सों को सावधानीपूर्वक ठीक किया गया, ताकि आंखों की संरचना और रोशनी सुरक्षित रखी जा सके। फिलहाल दोनों बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इस जटिल इलाज में नेत्र रोग विशेषज्ञ Prabha Sonwani, Sanjay Choudhary, Aarti, Aniket के साथ निश्चेतना विभाग की Yasha Tiwari और Dropati समेत मेडिकल टीम शामिल रही। सिम्स के अधिष्ठाता Ramanesh Murti ने कहा कि कुत्ते के काटने जैसे मामलों में समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। थोड़ी भी लापरवाही मरीज की जान के लिए खतरा बन सकती है। वहीं मेडिकल सुपरिटेंडेंट Lakhan Singh ने लोगों से अपील की कि डॉग बाइट के मामलों में घरेलू इलाज या अंधविश्वास के बजाय तुरंत अस्पताल जाकर इलाज कराएं। विशेषज्ञों ने बताया कि रेबीज संक्रमित जानवर के काटने, खरोंच या लार के संपर्क से फैलने वाली बेहद खतरनाक बीमारी है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर मरीज में पानी से डर लगना, सांस लेने में परेशानी, मानसिक भ्रम और लकवा जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नगर निगम और प्रशासन से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, नसबंदी अभियान और रेबीज जागरूकता कार्यक्रम तेज करने की मांग की है। नगर निगम कमिश्नर Prakash Kumar Sarve ने बताया कि आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए घुरू-अमेरी क्षेत्र में सेंटर संचालित किया जा रहा है। पिछले साल इस अभियान पर करीब 80 लाख रुपए खर्च किए गए और 6100 कुत्तों की नसबंदी की गई। वहीं बीते दो महीनों में 680 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।

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