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AI वीडियो विवाद: भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया का कथित वीडियो वायरल, FIR दर्ज, जांच तेज

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया से जुड़ा एक कथित AI जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य के अलग-अलग 8 थानों में शिकायत दर्ज कराई है। मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां पुलिस ने संबंधित इंस्टाग्राम आईडी संचालक के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित इंस्टाग्राम पेज को भी बैन कर दिया गया है। यह वीडियो ‘कांग्रेस पोल खोल’ और ‘रैंडम छत्तीसगढ़’ नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया था, जिसे कांग्रेस नेताओं ने आपत्तिजनक और भ्रामक बताया है। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत केस दर्ज किया है। इस मुद्दे को लेकर 26 अप्रैल को कांग्रेस नेताओं ने एसएसपी विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद जिले के कई थाना क्षेत्रों—जामगांव आर, कुम्हारी, भिलाई-3, नंदिनी नगर अहिवारा, जामुल, धमधा, अंडा, जेवरा सिरसा और रानीतराई—में कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। फिलहाल पुलिस ने जिन इंस्टाग्राम आईडी से वीडियो पोस्ट किया गया था, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटवा दिया है और अब उन अकाउंट्स को संचालित करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। मामले की जांच साइबर टीम को सौंपी गई है, जो वीडियो के स्रोत, एडिटिंग और अपलोड की पूरी प्रक्रिया का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों तक पहुंचकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इधर राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और दुर्ग के एसएसपी को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा है कि तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की छवि खराब करना, खासकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना, गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

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21 करोड़ की फोरेंसिक वैन खड़ी, जांच ठप: जिलों में न पहुंचने से रायपुर लैब पर बढ़ा दबाव

राज्य में अपराध जांच को आधुनिक और तेज बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 21.35 करोड़ रुपए खर्च कर 35 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदीं, लेकिन खरीदी के करीब चार महीने बाद भी ये वाहन जिलों तक नहीं पहुंच पाए हैं और अमलेश्वर में खड़े हैं। इसका सीधा असर जांच प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसी केस की फोरेंसिक रिपोर्ट 2-3 दिनों में मिल जाती थी, अब वही रिपोर्ट आने में 3 से 4 हफ्ते लग रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के किसी भी जिले में गंभीर अपराध होने पर अब भी सैंपल जांच के लिए रायपुर की फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं, जिससे वहां काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार के नए बीएनएस कानून के तहत गंभीर मामलों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य किए जाने के बावजूद संसाधनों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। रायपुर की हाईटेक लैब में डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य, हथियार, विस्फोटक और विभिन्न जैविक नमूनों की जांच की जा रही है, लेकिन पूरे राज्य का भार एक ही जगह होने से प्रक्रिया धीमी हो गई है। वहीं, मोबाइल फोरेंसिक वैन का मुख्य उद्देश्य यही था कि घटनास्थल पर ही साक्ष्य एकत्र कर उनकी प्राथमिक जांच की जा सके। इन वैन के जरिए मौके पर ही फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग, सीन स्केच और साक्ष्यों की सुरक्षित पैकेजिंग जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जिससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होता। हालांकि विभाग का कहना है कि वाहनों को जिलों में भेजने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और एक सप्ताह के भीतर इन्हें रवाना कर दिया जाएगा, जिसके बाद जांच व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

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भीषण गर्मी में राहत: छत्तीसगढ़ के बांध 63% तक भरे, जल संकट का खतरा टला

छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट राहत देने वाली साबित हुई है। 24 अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक राज्य के बड़े और मध्यम बांधों में 62.06% से अधिक पानी भरा हुआ है, जो पिछले दो सालों की तुलना में लगभग दोगुना है। तुलना करें तो 2024 में इसी समय जलस्तर केवल 31.82% था, जबकि 2025 में यह करीब 39.82% दर्ज किया गया था। ऐसे में इस वर्ष जल भंडारण में हुई बढ़ोतरी को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश के कुल 46 प्रमुख जलाशयों, जिनमें 12 बड़े और 34 मध्यम बांध शामिल हैं, में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से गर्मी के दौरान संभावित जल संकट की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई-जून की तीखी लू से पहले 60% से अधिक जलस्तर होना राज्य के लिए बेहद लाभकारी है। इससे शहरों में पेयजल की आपूर्ति सुचारू रह सकेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की जरूरत भी आसानी से पूरी हो पाएगी। वर्तमान में गंगरेल, दुधावा और तांदुला जैसे प्रमुख बांधों से नहरों के माध्यम से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे खेती और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जल उपलब्धता बनी हुई है। इस बेहतर जलस्तर से उम्मीद की जा रही है कि इस बार गर्मी के बावजूद पानी की कमी जैसी स्थिति नहीं बनेगी।

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नगर निगम सभा में हंगामा: महिला सशक्तिकरण पर तीखी बहस, माइक छीना तो बढ़ा विवाद

नगर निगम की विशेष सामान्य सभा में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर जमकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे माहौल काफी गरमा गया। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बिना किसी का नाम लिए ‘अंग्रेजों के मुखबिर’ जैसी टिप्पणी कर दी। इस बयान पर भाजपा पार्षद नाराज हो गए और विरोध जताते हुए उनका माइक छीनने तक पहुंच गए। इसके चलते करीब 15 मिनट तक हंगामा और नारेबाजी होती रही, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए सभापति को बैठक कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। करीब साढ़े पांच घंटे तक चली इस बैठक में आखिरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इससे पहले भाजपा पार्षद महिला आरक्षण संशोधन के विरोध में काले कपड़े और काले रिबन पहनकर सभा में पहुंचे थे। बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने निगम मुख्यालय से कोतवाली चौक तक रैली निकालकर अपना विरोध भी दर्ज कराया। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिला अधिकारों के मुद्दे पर सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है और शहर की मूलभूत समस्याएं जैसे पेयजल, सफाई और सड़क को नजरअंदाज किया जा रहा है। महापौर मीनल चौबे ने महिला सशक्तिकरण को एक जरूरी पहल बताते हुए विपक्ष की आलोचना की, जबकि विपक्ष ने इसे महज राजनीतिक एजेंडा करार दिया।

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छत्तीसगढ़ में RTE से प्री-स्कूल बाहर: 38 हजार बच्चों पर असर, सरकार बनाम स्कूल एसोसिएशन आमने-सामने

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्री-स्कूल (नर्सरी, LKG, UKG) कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है। 16 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश का असर राज्य के करीब 38 हजार गरीब बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस फैसले को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे संविधान के खिलाफ बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि आज के समय में शिक्षा की शुरुआत प्री-स्कूल स्तर से होती है, ऐसे में गरीब बच्चों को इस शुरुआती चरण से बाहर करना उन्हें आगे की पढ़ाई में भी पीछे धकेल सकता है। सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया है कि RTE अधिनियम मूल रूप से 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों, यानी कक्षा 1 से 8 तक के लिए बनाया गया है। ऐसे में प्री-स्कूल को इसमें शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया है। सरकार के अनुसार यदि प्री-स्कूल को RTE के तहत रखा जाता है, तो हर साल लगभग 60 से 70 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। सरकार का यह भी कहना है कि पहले प्री-स्कूल को RTE में शामिल करना एक प्रशासनिक त्रुटि थी, जिसे अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले का एक अलग पक्ष भी है। साल 2015-16 में राज्य सरकार ने खुद यह निर्णय लिया था कि प्री-स्कूल को RTE के दायरे में लाया जाए, ताकि 3 से 6 साल के बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा मिल सके। उस समय सरकार का मानना था कि प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और भविष्य में ड्रॉपआउट दर भी कम होती है। साथ ही, यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए भी अहम माना गया था, ताकि गरीब और अमीर बच्चे एक साथ पढ़ सकें। सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि छोटे बच्चों में ड्रॉपआउट दर अधिक होती है और प्री-स्कूल के नाम पर कई नए संस्थान खुल रहे हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 से 8 साल के बच्चों में ड्रॉपआउट दर लगभग 2 से 3 प्रतिशत के बीच है, जो बहुत अधिक नहीं मानी जाती। हालांकि, नामांकन में कमी जरूर देखी गई है, जहां 16 से 28 प्रतिशत तक बच्चे अब भी प्री-प्राइमरी शिक्षा से बाहर हैं। वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्री-स्कूल कक्षाएं दोबारा RTE के दायरे में आएंगी या नहीं, और राज्य की शिक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी

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रायपुर में गुपचुप पानी में मिलावट का खुलासा: 20 लीटर रंगीन पानी नष्ट, 27 ठेलों पर कार्रवाई

राजधानी रायपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग ने मिलावट के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। ‘सही दवा, शुद्ध आहार’ थीम के तहत चल रहे इस 15 दिवसीय अभियान के पहले ही दिन गुपचुप में इस्तेमाल हो रहे रंगीन पानी का मामला सामने आया। जांच के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में चाट और गुपचुप के ठेलों की जांच की गई। कई जगहों पर पाया गया कि गुपचुप का पानी कृत्रिम रंग मिलाकर तैयार किया जा रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने करीब 20 लीटर ऐसा पानी मौके पर ही नष्ट करवा दिया। इस अभियान के तहत कुल 27 चाट और गुपचुप सेंटरों की जांच की गई। साथ ही समोसा, चाट और दही बड़ा के सैंपल भी जांच के लिए लिए गए। निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी ब्रेड भी मिली, जिसे जब्त कर लगभग 2 किलो सामग्री को तुरंत नष्ट किया गया। अधिकारियों ने सभी संचालकों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के मुताबिक यह अभियान 11 मई तक लगातार जारी रहेगा। इस दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आम लोगों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री लोगों तक पहुंच सके।

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राजधानी में FDA की सख्ती: कॉस्मेटिक दुकानों की जांच, 1000+ किलो संदिग्ध पनीर जब्त

राजधानी में उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। हाल ही में बंजारी रोड और गोल बाजार सहित कई इलाकों में कॉस्मेटिक दुकानों पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान अधिकारियों ने एक्सपायरी डेट वाले प्रोडक्ट, बिलिंग सिस्टम और लेबलिंग नियमों की गहन जांच की। निरीक्षण के दौरान कई दुकानों के दस्तावेजों को खंगाला गया, वहीं जय गुरुदेव स्टोर्स को नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए। विभाग ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी बीच, खाद्य विभाग ने मिलावटी और खराब गुणवत्ता वाले पनीर के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर में दो डेयरी यूनिट्स पर छापेमारी कर करीब 1060 किलो पनीर जब्त कर नष्ट किया गया। साथ ही पनीर के सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। भाटागांव स्थित KLP डेयरी एंड प्रोडक्शन में जांच के दौरान भारी गंदगी पाई गई, जिसके चलते 540 किलो पनीर को नगर निगम की मदद से नष्ट किया गया। वहीं परिसर से मिल्क पाउडर और तेल के टिन भी बरामद हुए, जिनकी जांच जारी है। उधर, उरला के कन्हेरा रोड स्थित SJ डेयरी प्रोडक्ट में भी कार्रवाई करते हुए 500 किलो पनीर जब्त किया गया। इस दौरान टीम को विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद पुलिस को बुलाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। फिलहाल दोनों फैक्ट्री संचालकों से पूछताछ जारी है। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर किसी प्रकार की अनियमितता या मिलावट पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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पुलिस ने लौटाए सोने-चांदी समेत 3-लाख का सामान:बिलासपुर में पुलिस को मिला था लावारिस सूटकेस, सीसीटीवी के जरिए झारखंड के युवक की हुई पहचान

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने अपनी सतर्कता और ईमानदारी का उदाहरण पेश करते हुए लावारिस सूटकेस उसके असली मालिक को सुरक्षित लौटा दिया। सूटकेस में करीब 3 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और कपड़े रखे हुए थे। यह मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, 21 अप्रैल की देर रात गश्त के दौरान पुलिस को एक लावारिस सूटकेस मिलने की सूचना मिली। पुलिस ने तुरंत सूटकेस को अपने कब्जे में लेकर थाने में सुरक्षित रखा और उसके मालिक की तलाश शुरू की। टीम ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसके आधार पर झारखंड के पलामू जिले के रहने वाले युवक की पहचान की गई। जांच में पता चला कि शेख आलमगीर नाम का युवक बिलासपुर अपने ससुराल आया था और बस से उतरने के दौरान शिवघाट इलाके में अपना सूटकेस भूल गया था। ससुराल पहुंचने के बाद जब उसे सूटकेस के गायब होने का पता चला तो वह उसे खोजने में जुट गया। इसी बीच पुलिस ने सीसीटीवी के जरिए उसकी पहचान कर उसके परिजनों से संपर्क किया और उसे थाने बुलाया। थाने में सूटकेस का ताला खोलकर जांच की गई, जिसमें करीब 3 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने और अन्य सामान मिले। सभी सामान सुरक्षित मिलने पर पुलिस ने सूटकेस उसके मालिक को सौंप दिया। अपना कीमती सामान वापस पाकर शेख आलमगीर ने पुलिस का आभार जताया और उनकी तत्परता व ईमानदारी की सराहना की।

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रायपुर में स्वच्छता पर निगम का सख्त एक्शन, डस्टबिन नहीं रखने पर 39 दुकानों पर जुर्माना

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वच्छता नियमों के उल्लंघन पर नगर निगम ने कड़ी कार्रवाई की है। जोन-2 स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रेलवे स्टेशन मार्ग और पुराने पंडरी बस स्टैंड मार्ग पर औचक निरीक्षण करते हुए 39 दुकानों पर कार्रवाई की और कुल 10 हजार रुपये का ई-चालान काटा। यह कार्रवाई स्वच्छता से संबंधित शिकायत मिलने के बाद की गई। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर जोन-2 कमिश्नर संतोष पाण्डेय के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर दुकानों की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य अधिकारी रवि लावनिया की मौजूदगी में पाया गया कि कई दुकानों में डस्टबिन नहीं रखे गए थे और आसपास गंदगी फैली हुई थी। इस पर संबंधित दुकानदारों के खिलाफ जुर्माना लगाया गया और भविष्य में नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी गई। नगर निगम द्वारा शहर में स्वच्छता को लेकर लगातार जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2026 के तहत निकाली गई जनजागरूकता रैली में जनप्रतिनिधियों, स्वच्छता दीदियों और सफाई मित्रों ने भाग लिया। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। नागरिकों से अपील की गई है कि वे कचरे को अलग-अलग श्रेणियों—गीला, सूखा, सेनेटरी और अन्य—में बांटकर निगम की गाड़ियों को दें। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि खुले में कचरा फेंकने पर नियमों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा और शहर को स्वच्छ रखने के लिए सभी से सहयोग की अपेक्षा की गई है।

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महिला आरक्षण को लेकर भाजपा-कांग्रेस में सियासी जंग तेज, भाजपा चलाएगी अभियान और निंदा प्रस्ताव, कांग्रेस ने लगाया भ्रम फैलाने का आरोप

महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश और प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी इस विषय को लेकर देशभर में अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक भ्रम फैला रही है और असल में परिसीमन से जुड़े संशोधन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति बताया है। रायपुर में कांग्रेस भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व महापौर और महिला कांग्रेस नेता हेमा देशमुख सहित अन्य नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित 106वां संविधान संशोधन, जिसे महिला आरक्षण बिल कहा जाता है, पहले ही संसद से पास होकर कानून बन चुका है और इसे लागू किया जाना चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाया गया 131वां संविधान संशोधन बिल महिला आरक्षण से सीधे जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में बदलाव का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी ने इसे “महिला आरक्षण का मुखौटा” बताया है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि यदि कानून बन चुका है तो बिना परिसीमन का इंतजार किए वर्तमान सीटों पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि विपक्षी दल इसके लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार जानबूझकर देरी कर रही है। कांग्रेस ने अपने पुराने प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि राजीव गांधी के समय पंचायत स्तर पर महिला आरक्षण की शुरुआत हुई थी, जिसे बाद में 1993 में कानून का रूप मिला। साथ ही मनमोहन सिंह सरकार में भी संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का प्रयास किया गया था। उधर भाजपा इस मुद्दे को लेकर सक्रिय है और 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इसके साथ ही राज्य के नगर निगमों और निकायों में भी सामान्य सभाएं आयोजित कर महिला आरक्षण पर चर्चा और विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की योजना है।

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