Raipur

सरकारी शिक्षकों पर नई शर्त: टीईटी पास नहीं किया तो खतरे में नौकरी, 80 हजार पर असर

Chhattisgarh के सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू हुआ है, जिसके चलते अब टीईटी क्वालिफाई किए बिना शिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में कुल लगभग 1.93 लाख शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से करीब 42 प्रतिशत यानी लगभग 80 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। इन शिक्षकों को अब परीक्षा पास करनी होगी, तभी उनकी सेवा जारी रह सकेगी। इस फैसले से राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हुए हैं। खासतौर पर कोंडागांव, महासमुंद, बलौदाबाजार, सरगुजा, रायगढ़ और सूरजपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो टीईटी क्वालिफाई नहीं हैं। इस बीच शिक्षक संगठनों ने लंबे समय से मांग की है कि आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए। उनका कहना है कि वे वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनकी योग्यता पहले ही सिद्ध हो चुकी है। हाल ही में फरवरी में Chhattisgarh Professional Examination Board द्वारा आयोजित सीजी टीईटी परीक्षा में कई शिक्षक शामिल हुए थे, लेकिन बहुत कम ही सफल हो पाए। शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा का स्तर काफी कठिन था और लंबे समय बाद दोबारा परीक्षा देना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। शिक्षक संगठनों ने सुझाव दिया है कि या तो टीईटी से छूट दी जाए या फिर विभागीय परीक्षा आयोजित कर राहत दी जाए। इस मामले में फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोई अंतिम निर्देश जारी नहीं हुआ है। राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रही है और ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे किसी शिक्षक को नुकसान न हो।

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नक्सलवाद पर निर्णायक जीत: 72 हजार जवानों के ऑपरेशन से ढहा लाल आतंक, सैकड़ों ढेर और हजारों ने किया सरेंडर

करीब पांच दशकों तक देश के लिए चुनौती बने नक्सलवाद पर अब निर्णायक जीत का दावा किया जा रहा है। यह सफलता सुरक्षा बलों के साहस, रणनीति और लगातार चलाए गए अभियानों का परिणाम मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक 535 नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि 2898 ने आत्मसमर्पण किया है और महज 23 सक्रिय नक्सली ही शेष बताए जा रहे हैं। नक्सलवाद की शुरुआत साल 1968 में हुई, जब आंध्रप्रदेश के रास्ते यह अविभाजित मध्यप्रदेश के बस्तर क्षेत्र में पहुंचा। शुरुआत में यह एक विचारधारा तक सीमित था, लेकिन समय के साथ संगठन ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई, विस्फोटक बनाने के तरीके सिखाए गए और ‘जनताना सरकार’ के नाम पर समानांतर व्यवस्था खड़ी की गई। 1990 के दशक में यह समस्या सरगुजा तक फैल गई और 2010 तक अपने चरम पर पहुंच गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई शुरू की और 2015 में सरगुजा को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया। हालांकि बस्तर क्षेत्र अब भी चुनौती बना रहा, क्योंकि अन्य इलाकों से भागे नक्सली यहां आकर छिप गए थे। घने जंगल, पहाड़ी इलाका और इंद्रावती नदी जैसे भौगोलिक कारक नक्सलियों के लिए सुरक्षा कवच बने हुए थे। साथ ही तेलंगाना, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और झारखंड की सीमाओं से सटे होने के कारण वे आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य में भाग जाते थे। साल 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के निर्देशन में केंद्र और राज्यों ने संयुक्त रणनीति के तहत बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। करीब 72 हजार सुरक्षाबल के जवानों ने डेढ़ साल तक लगातार ऑपरेशन चलाया। तकनीकी सहायता के लिए ISRO समेत कई एजेंसियों की मदद ली गई। इस अभियान में कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया। 21 मई 2025 को महासचिव बसवराजू के मारे जाने को एक अहम मोड़ माना गया, जिसके बाद संगठन में तेजी से टूटन शुरू हुई। इसके बाद 18 नवंबर 2025 को हिड़मा की मौत ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण होने लगे। केंद्र सरकार ने पहले ही 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। अब तक की स्थिति के अनुसार छत्तीसगढ़ लगभग पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुका है। हालांकि तेलंगाना और झारखंड में कुछ बड़े नक्सली नेता अब भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक राज्य में बचे हुए नक्सली अब गांवों में छिपे हुए हैं और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं। नक्सलवाद के दौर में कई दर्दनाक घटनाएं भी सामने आईं। कांकेर जिले के एक गांव में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने वाले युवक मनेश नुरेटी की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। इस घटना ने उस दौर के भय और अत्याचार की तस्वीर को उजागर किया, जब आम नागरिकों को देशभक्ति दिखाने की भी कीमत चुकानी पड़ती थी। आज सुरक्षा बलों की इस सफलता को लोकतंत्र की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिसमें जवानों के बलिदान और निरंतर प्रयासों ने अहम भूमिका निभाई है।

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रायपुर निगम बजट 2026-27: इलेक्ट्रॉनिक मार्केट से वुमन हॉस्टल तक बड़ी घोषणाएं, हंगामे के बीच पेश हुआ बजट

Raipur नगर निगम में महापौर Meenal Choubey ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2130 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। यह बजट पिछले साल की तुलना में 601 करोड़ अधिक है, लेकिन इसके बावजूद 206 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान जताया गया है, जिससे वित्तीय संतुलन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बजट में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास कार्यों की कई नई घोषणाएं की गई हैं। शंकरनगर और डूमरतराई में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट विकसित किए जाएंगे, जबकि भाठागांव में पार्किंग सुविधा तैयार होगी। सड्डू क्षेत्र में करीब 38.93 करोड़ की लागत से पानी की टंकी और फिल्टर प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही पंडरी-सिद्धार्थ चौक के पास वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान करते हुए स्वरोजगार, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और जोन कार्यालयों में सेनेटरी नैपकिन की सुविधा देने की बात कही गई है। इसके अलावा 5 करोड़ रुपए से शांति गृह और 48 करोड़ रुपए से वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने की योजना शामिल है। शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सड़क चौड़ीकरण, नाला-नाली निर्माण, जलापूर्ति व्यवस्था और रोबोटिक सफाई पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। हर जोन में दो नए उद्यान विकसित करने, खेल परिसर निर्माण और अखाड़ों के जीर्णोद्धार की योजना भी शामिल है। साथ ही खारुन महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा मंदिरों से फूल संग्रह के लिए वाहन, पे-एंड-यूज शौचालय, कारी तालाब में पार्किंग और वेंडिंग जोन, तथा शहर में 15 नए वेंडिंग जोन विकसित करने की घोषणा की गई है। बजट पेश होने के दौरान निगम सभाकक्ष में राजनीतिक माहौल भी गरमाया रहा। सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच करीब आधे घंटे तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने पिछले बजट की घोषणाओं पर चर्चा की मांग की और सरकार को अधूरे वादों पर घेरा। महापौर ने अपने करीब दो घंटे के भाषण में पिछले कार्यों का विवरण देते हुए नई योजनाओं की जरूरत पर जोर दिया। वहीं विपक्ष ने इस बजट को “जुमलों का पुलिंदा” बताते हुए आरोप लगाया कि पुरानी घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं और नए वादे सिर्फ कागजी हैं। खास बात यह रही कि कई योजनाएं, जैसे वर्किंग वुमन हॉस्टल, लाइब्रेरी, तालाब विकास और रिवर फ्रंट, पहले भी बजट में शामिल थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी प्रगति सीमित रही। इसी वजह से इन्हें इस बार फिर से बजट में शामिल किया गया है।

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रायपुर में नि:संतान दंपती बच्चों की पढ़ाई के लिए बने फरिश्ता, पड़ोसी ने घर भी दिया

रायपुर के राजीव और नैना पटले सात साल की शादी के बाद भी संतान सुख से वंचित रहे। इसके बावजूद उन्होंने दूसरों के बच्चों की जिंदगी को रोशन करने का निर्णय लिया। अब यह दंपती उन बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिनकी मांएं घरों में काम करती हैं या दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। वर्तमान में वे करीब 70 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। अकेली मांएं अपने बच्चों को सुबह दंपती के पास छोड़ आती हैं। जो माता-पिता सक्षम हैं, वे फीस देते हैं; जो नहीं दे सकते, उनके लिए शिक्षा निःशुल्क है। शुरू में यह कोचिंग सेंटर था, लेकिन अब यह डे-बोर्डिंग स्कूल जैसी सुविधा बन गई है। पड़ोसी का सहयोग पटले दंपती को उनकी पड़ोसी रेखा केशरवानी ने अपना खाली घर नि:शुल्क दे दिया। उन्होंने कहा कि यह बच्चों को यह महसूस कराने के लिए है कि वे असली स्कूल में पढ़ रहे हैं। फीस का इस्तेमाल जरूरतमंद बच्चों के लिए राजीव (MBA) और नैना (MA) ने बताया कि उनका इलेक्ट्रिक पंप का बिजनेस 2017-2019 में बंद हो गया। कोविड के दौरान उन्होंने मोहल्ले के बच्चों की पढ़ाई शुरू की। संपन्न परिवारों से मिली फीस से उनका खर्च चलता है और बाकी जरूरतमंद बच्चों के लिए कॉपियां, बैग और ड्रेस खरीदी जाती हैं। व्यक्तिगत संघर्ष और शिक्षा की जिम्मेदारी डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में राजीव की मृत्यु हो गई। नंदिनी राव और अन्य माता-पिता अब बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के लिए दंपती पर भरोसा करते हैं। नैना मैम ने जिम्मेदारी संभाली और बच्चों की पढ़ाई को सुनिश्चित किया। माँ पद्मिनी यादव ने बताया कि उनकी बेटी गीत और बेटा योग अच्छे अंक ला रहे हैं। दूसरी मां नंदिनी राव कहती हैं कि उनके बच्चों को पहले पिता ने लावारिस छोड़ दिया था, लेकिन अब वे सुरक्षित और पढ़ाई में ध्यान दे रहे हैं।

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रायपुर पुलिस ने हाईटेक ड्रग्स गिरोह पकड़ा: 4 तस्कर गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के एक हाईटेक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। काशीराम नगर इलाके में घेराबंदी कर एक ड्रग कुरियर को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पास से 5.58 ग्राम एमडीएमए (MDMA) जब्त की गई। यह मामला तेलीबांधा क्षेत्र से जुड़ा है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कुणाल मंगतानी, सौरभ डोंगरे, शुभम राठौर और सौरभ यादव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह की कमान दिल्ली में बैठे मुख्य तस्करों के हाथ में थी। हाईटेक ऑपरेशन और डेड ड्रॉप डिलीवरी तस्कर फोन के माध्यम से ऑर्डर लेते और रायपुर में अपने गुर्गों को सक्रिय करते थे। आरोपी मोबाइल टैक्सी और रेपिडो राइडर के तौर पर काम करते हुए शहर के विभिन्न हिस्सों में ड्रग्स सप्लाई कर रहे थे। वे सीधे हाथों-हाथ ड्रग्स नहीं देते थे। इसके बजाय ‘डेड ड्रॉप’ पद्धति अपनाते थे। ऑर्डर मिलने के बाद ड्रग्स किसी सुनसान या सार्वजनिक जगह पर छुपाई जाती थी और ग्राहक को लाइव लोकेशन या वीडियो भेजी जाती थी। संदेह कम करने के लिए कई बार नाबालिगों के जरिए भी ड्रग्स पहुंचाए जाते थे। बाहरी राज्यों से सप्लाई प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि ड्रग्स की खेप पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मुंबई और गोवा जैसे राज्यों से ट्रेन, बस और कुरियर के माध्यम से रायपुर लायी जाती थी। पुलिस अब मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच कर मुख्य सरगनाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। हर डिलीवरी पर पैसा जांच में सामने आया कि दिल्ली में बैठे मुख्य सप्लायर रायपुर में मौजूद गुर्गों को हर डिलीवरी पर 1,000 से 1,500 रुपये देते थे। पुलिस अब यह पता कर रही है कि आरोपियों ने कितनी बार डिलीवरी की और किसके कहने पर यह काम किया। रायपुर क्राइम और साइबर सेल की टीम ने रायपुर में कार्रवाई के बाद दिल्ली में भी रेड मारकर कुछ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्हें रायपुर लाया जा रहा है और आरोपियों के पहुंचने के बाद पूरे मामले का सार्वजनिक खुलासा किया जाएगा।

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गोंदिया स्टेशन पर ट्रैक सुधार पूरा, रद्द ट्रेनें बहाल; समर स्पेशल भी शुरू

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), नागपुर मंडल ने गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 (लाइन नंबर 5) पर ‘वॉशेबल एप्रन’ को हटाकर बैलस्टेड ट्रैक में बदलने का काम पूरा कर लिया है। इस काम के पूरा होने के बाद अब यात्रियों की सुविधा के लिए पहले रद्द की गई कई एक्सप्रेस ट्रेनें बहाल कर दी गई हैं। साथ ही, गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी (नागपुर) – शालीमार (कोलकाता) के बीच साप्ताहिक समर स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी। बहाल हुई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें समर स्पेशल ट्रेन विवरण 08865 (इतवारी → शालीमार) 08866 (शालीमार → इतवारी) कोच संरचना: 02 SLRD, 04 जनरल, 10 शयनयान (SL), 03 एसी-3 टियर, 01 एसी-2 टियर, 01 पैंट्री कार, 01 VPU, कुल 21 ICF कोच। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे यात्रा से पहले पीएनआर स्टेटस और ट्रेन समय की पुष्टि 139 नंबर, NTES ऐप, RailYatri ऐप या आधिकारिक वेबसाइट indianrailways.gov.in से जरूर करें। इस सुधार और नई सुविधाओं से छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र-कोलकाता रूट पर यात्रा करने वाले हजारों मुसाफिरों को राहत मिलेगी।

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रायपुर में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर बड़ी कार्रवाई, 159 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संडे नाइट विशेष चेकिंग अभियान चलाया। शहर के 8 प्रमुख पॉइंट्स पर सरप्राइज रैंडम चेकिंग के दौरान 159 वाहन चालक नशे की हालत में ड्राइव करते हुए पकड़े गए। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, इससे पहले अधिकतम 154 केस दर्ज हुए थे। साल 2026 के पहले तीन महीनों में ही रायपुर पुलिस ने नशे में वाहन चलाने के 1,580 मामलों में कार्रवाई की, जो साल 2025 के पूरे 1,537 मामलों के रिकॉर्ड को पार कर गया। पुलिस अब सभी आरोपियों के ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड कराने के लिए RTO को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। इस अभियान का निर्देशन पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला और डीसीपी विकास कुमार कर रहे हैं। चेकिंग के दौरान ब्रीथ एनालाइजर से जांच की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि शराब पीकर वाहन न चलाएं। वाहन चालकों को हमेशा सीट बेल्ट और दोपहिया पर हेलमेट का उपयोग करना चाहिए। बच्चों को किसी भी हालत में वाहन न चलाने दें। आने वाले दिनों में इस अभियान को लगातार जारी रखने की योजना है।

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छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसान तोरनदास साहू: गोमूत्र से जैविक खेती में सफलता

डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम बगदई के किसान तोरनदास साहू ने रासायनिक खेती छोड़कर 2015 से जैविक खेती अपनाई और अब एक एकड़ में 26 क्विंटल तक धान का उत्पादन कर रहे हैं। उन्हें गोमूत्र के गुणों का अनुभव होने के बाद खेतों में जैविक तरीके से फसल उगाने का तरीका मिला। दिसंबर 2025 में तोरनदास को नई दिल्ली में फार्मर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। तोरनदास अपनी 3 एकड़ 70 डिसमिल जमीन पर खरीफ और रबी में धान के साथ चना, मसूर, आलू, पत्तेदार सब्जियों की खेती करते हैं। उनके खेतों में गोबर और गोमूत्र से तैयार जैविक खाद, जीवामृत और नीमास्त्र का इस्तेमाल किया जाता है। यह न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है बल्कि फसल को रोग और कीटों से भी बचाता है। जैविक कीटनाशक और फसल सुरक्षा तोरनदास ने जैविक कीटनाशक ब्रह्मास्त्र और नीमास्त्र तैयार किए हैं। इसमें नीम की पत्तियां, करंज, सीताफल, धतूरे, हरी मिर्च, लहसुन और गोमूत्र का मिश्रण होता है। इसे उबालकर या 48 घंटे के लिए छांव में रखा जाता है और शाम को खेत में छिड़काव किया जाता है। इसके अलावा जीवामृत तैयार करके मिट्टी की गुणवत्ता और बीज उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। लागत और लाभ रासायनिक खेती में प्रति एकड़ खर्च लगभग 20 हजार रुपए होता है, जबकि जैविक खेती में यह केवल 15 हजार रुपए है। डीएपी और यूरिया खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। बेहतर मिट्टी प्रबंधन और जोताई से अतिरिक्त 5 हजार रुपए की बचत होती है। जैविक खेती से न केवल उत्पादन बढ़ता है, बल्कि लागत भी कम होती है और लाभ अधिक होता है। स्थानीय किसानों और प्रशिक्षण तोरनदास के अनुभव से उनके गांव के कमल साहू और श्यामलाल साहू ने भी जैविक खेती अपनाई और कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया। उन्होंने लोहे और लकड़ी से दतारी नामक यंत्र बनाया, जो ट्रैक्टर से बेहतर जोताई करता है। इसके अलावा पक्षियों और चूहों को दूर रखने के लिए भी यंत्र विकसित किया। 2023-24 में तोरनदास ने 200 कृषि सखियों को अपने गांव में जैविक खेती का प्रशिक्षण भी दिया।

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रायपुर निगम बजट: पार्षदों का हंगामा और अधूरी वादों पर विवाद

रायपुर नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश होने से पहले सदन में कांग्रेस पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया। सभी पार्षद हाथों में वादों के पोस्टर लेकर ‘वादा तेरा वादा’ गाते हुए पहुंचे। इस पर सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने नाराजगी व्यक्त की और तख्तियां हटाने के लिए कहा। विपक्ष ने अपने बिंदु रखते हुए कहा कि पहले अधूरी वादों पर चर्चा हो, उसके बाद ही तख्तियां वापस रखी जाएंगी। इसके अलावा, सभापति और एमआईसी सदस्य मनोज वर्मा के बीच विपक्षी पार्षदों पर कार्रवाई को लेकर तीखी बहस भी हुई। आवास और अधोसंरचना पूंजीगत व्यय के तहत लगभग 789 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत मिशन, नालों के ट्रीटमेंट प्लांट, सड़क चौड़ीकरण और अन्य बुनियादी विकास कार्य शामिल हैं। नगर निगम विज्ञापन से आय बढ़ाने के लिए ऑनलाइन होर्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने और नई विज्ञापन नीति में दरों में वृद्धि का प्रावधान किया गया है। जल और विद्युत व्यवस्था जल कार्य विभाग के लिए लगभग 68 करोड़ रुपए और विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग के लिए करीब 74 करोड़ रुपए का अनुमान है। इसमें पेयजल आपूर्ति, पंप स्थापना, स्ट्रीट लाइट और सौर ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं। जोन कार्यालयों के माध्यम से करीब 189 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की योजना है, जिसमें सफाई, सड़क निर्माण, नाली सुधार और सामुदायिक भवन निर्माण शामिल हैं। लोक निर्माण और बुनियादी सुविधाएं लोक निर्माण विभाग के लिए लगभग 97 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इसमें नालों का निर्माण, सीमेंट रोड, फुटपाथ, चौराहों का विकास और वार्ड कार्यालयों का निर्माण शामिल हैं। स्वच्छता, स्वास्थ्य और फूड विभाग के लिए 77.55 करोड़ रुपए का प्रावधान है। इसमें मच्छर नियंत्रण, आवारा कुत्तों की नसबंदी, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सफाई मित्र योजना शामिल हैं। पिछले वर्ष का बजट पिछले वित्तीय वर्ष में नगर निगम का बजट 1529.53 करोड़ रुपए था। इसमें 1528.73 करोड़ रुपए खर्च और लगभग 79 लाख रुपए का अधिशेष अनुमानित था। पिछले बजट में शहर के महानगरीय स्वरूप को ध्यान में रखते हुए उद्योग भवन, राजेंद्र नगर, सरोना और तेलीबांधा में फ्लाईओवर निर्माण, 18 प्रमुख चौक-चौराहों का पुनर्विकास, CCTV कैमरे और आधुनिक निगरानी प्रणाली, ऑटोमेटेड पार्किंग, सड़कों का डामरीकरण और वृक्षारोपण के लिए 61 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था।

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पिज्जा डिलीवरी के दौरान विवाद, डिलीवरी बॉय ने ग्राहक को पीटा, जान से मारने की धमकी

Raipur के कोटा इलाके में ऑनलाइन पिज्जा ऑर्डर करना एक युवक के लिए मुसीबत बन गया। डिलीवरी के लिए पहुंचे दो युवकों ने लोकेशन सही नहीं बताने का आरोप लगाते हुए ग्राहक के साथ मारपीट कर दी। पीड़ित लोकेश्वर सिंह ठाकुर के अनुसार, उन्होंने रविवार रात करीब 12:30 बजे Domino’s Pizza से दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। डिलीवरी के दौरान डिलीवरी बॉय ने रास्ता समझने के लिए फोन किया, लेकिन बातचीत के दौरान दोनों के बीच हल्की कहासुनी हो गई। कुछ देर बाद जब डिलीवरी बॉय उनके घर पहुंचे और पेमेंट लेने के बाद अचानक भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत लोकेशन देने की वजह से उन्हें परेशानी हुई। विवाद बढ़ने पर दोनों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। शिकायत के मुताबिक, विरोध करने पर आरोपियों ने युवक पर लात-घूंसे बरसाए और गाड़ी की चाबी से सिर पर हमला कर दिया। इस हमले में पीड़ित के सिर और हाथ में चोटें आई हैं। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने Amanaka Police Station में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जिनसे कॉल किया गया था और फूड डिलीवरी कंपनी से भी आरोपियों की जानकारी मांगी गई है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

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