Raipur

बोरझारा की अऊम इंजिनियरिंग में श्रम विवाद गहराया, 30 अप्रैल को उग्र धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

रायपुर के बोरझारा स्थित अऊम इंजिनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में श्रमिकों के साथ कथित अन्याय का मामला सामने आया है, जिसने अब बड़ा रूप ले लिया है। दो कर्मचारियों—कृष्ण कुमार कुजूर और किशोर मिर्धा—ने फैक्ट्री प्रबंधन पर बिना कारण बताए नौकरी से निकालने और बकाया भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, कृष्ण कुमार कुजूर लगभग 6 महीने से क्वालिटी इंचार्ज और किशोर मिर्धा करीब 1 महीने से सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। दोनों का दावा है कि उनके काम को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं की गई। इसके बावजूद 22 अप्रैल 2026 को अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उन्हें काम से निकाल दिया गया और फैक्ट्री गेट बंद कर दिया गया। आरोप यह भी है कि काम के दौरान उनका नाम ESIC और PF (PAF) में दर्ज नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है। कर्मचारियों का कहना है कि जब उन्होंने अपने बकाया वेतन और हिसाब-किताब की मांग की, तो प्रबंधन ने भुगतान करने से इनकार कर दिया और धमकी भरे लहजे में बात की। इस मामले में आवेदक बेदराम साहू ने बताया कि उन्होंने दो बार फोन के माध्यम से फैक्ट्री प्रबंधन से बातचीत कर मजदूरों का भुगतान कराने का प्रयास किया, लेकिन यश गुप्ता नामक व्यक्ति ने गलत नियमों का हवाला देते हुए भुगतान से साफ मना कर दिया। श्रम कानूनों के तहत अब किशोर मिर्धा को दो महीने का नोटिस पेमेंट और कृष्ण कुमार कुजूर को एक महीने का नोटिस पेमेंट मिलना चाहिए। कुल मिलाकर कृष्ण कुजूर के 34,660 रुपये और किशोर मिर्धा के 43,200 रुपये बकाया बताए गए हैं। आवेदक ने फैक्ट्री प्रबंधन को दो दिन के भीतर भुगतान करने की चेतावनी दी है। अन्यथा 30 अप्रैल 2026 को फैक्ट्री गेट के सामने मजदूर परिवार और स्थानीय लोगों के साथ धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। साथ ही, इस दौरान होने वाली किसी भी स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

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छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट कल 2:30 बजे जारी: 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्रों का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (Chhattisgarh Board of Secondary Education) कल दोपहर 2:30 बजे हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षा के नतीजे घोषित करेगा। इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए दी। इस साल करीब 5.66 लाख छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनकी मेहनत का परिणाम अब सामने आने वाला है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्र अपना रोल नंबर दर्ज कर आसानी से रिजल्ट देख सकेंगे। इस बार 10वीं में 3,20,535 और 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थी शामिल हुए। आंकड़ों के मुताबिक, 10वीं के छात्रों की संख्या 12वीं से लगभग 31 प्रतिशत अधिक रही, जो हर साल की तरह इस बार भी ट्रेंड को दिखाता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार कुल परीक्षार्थियों की संख्या लगभग स्थिर रही है, हालांकि 12वीं में छात्रों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 75% उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण करीब 1400 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। रिजल्ट का इंतजार सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और स्कूलों के लिए भी बेहद अहम होता है। 10वीं के छात्र जहां आगे के विषय और स्ट्रीम का चयन करेंगे, वहीं 12वीं के छात्र कॉलेज एडमिशन और करियर की दिशा तय करेंगे। पिछले साल की तरह इस बार भी सभी की नजर पास प्रतिशत, मेरिट लिस्ट और टॉपर्स पर टिकी हुई है। मंडल ने छात्रों से अपील की है कि वे रिजल्ट को सकारात्मक रूप से लें। अच्छे अंक आने पर आगे की तैयारी में जुटें, और यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हो तो निराश होने के बजाय नए अवसरों पर ध्यान दें।

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AI वीडियो विवाद: भूपेश बघेल और सौम्या चौरसिया का कथित वीडियो वायरल, FIR दर्ज, जांच तेज

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपसचिव सौम्या चौरसिया से जुड़ा एक कथित AI जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य के अलग-अलग 8 थानों में शिकायत दर्ज कराई है। मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां पुलिस ने संबंधित इंस्टाग्राम आईडी संचालक के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित इंस्टाग्राम पेज को भी बैन कर दिया गया है। यह वीडियो ‘कांग्रेस पोल खोल’ और ‘रैंडम छत्तीसगढ़’ नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किया गया था, जिसे कांग्रेस नेताओं ने आपत्तिजनक और भ्रामक बताया है। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग (ग्रामीण) के अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने इस पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत केस दर्ज किया है। इस मुद्दे को लेकर 26 अप्रैल को कांग्रेस नेताओं ने एसएसपी विजय अग्रवाल से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद जिले के कई थाना क्षेत्रों—जामगांव आर, कुम्हारी, भिलाई-3, नंदिनी नगर अहिवारा, जामुल, धमधा, अंडा, जेवरा सिरसा और रानीतराई—में कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। फिलहाल पुलिस ने जिन इंस्टाग्राम आईडी से वीडियो पोस्ट किया गया था, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटवा दिया है और अब उन अकाउंट्स को संचालित करने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। मामले की जांच साइबर टीम को सौंपी गई है, जो वीडियो के स्रोत, एडिटिंग और अपलोड की पूरी प्रक्रिया का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों तक पहुंचकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इधर राज्य महिला आयोग ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है और दुर्ग के एसएसपी को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा है कि तकनीक का दुरुपयोग कर किसी की छवि खराब करना, खासकर महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक सामग्री तैयार करना, गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

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21 करोड़ की फोरेंसिक वैन खड़ी, जांच ठप: जिलों में न पहुंचने से रायपुर लैब पर बढ़ा दबाव

राज्य में अपराध जांच को आधुनिक और तेज बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 21.35 करोड़ रुपए खर्च कर 35 मोबाइल फोरेंसिक वैन खरीदीं, लेकिन खरीदी के करीब चार महीने बाद भी ये वाहन जिलों तक नहीं पहुंच पाए हैं और अमलेश्वर में खड़े हैं। इसका सीधा असर जांच प्रक्रिया पर देखने को मिल रहा है। जहां पहले किसी केस की फोरेंसिक रिपोर्ट 2-3 दिनों में मिल जाती थी, अब वही रिपोर्ट आने में 3 से 4 हफ्ते लग रहे हैं। दरअसल, प्रदेश के किसी भी जिले में गंभीर अपराध होने पर अब भी सैंपल जांच के लिए रायपुर की फोरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं, जिससे वहां काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार के नए बीएनएस कानून के तहत गंभीर मामलों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य किए जाने के बावजूद संसाधनों का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है। रायपुर की हाईटेक लैब में डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य, हथियार, विस्फोटक और विभिन्न जैविक नमूनों की जांच की जा रही है, लेकिन पूरे राज्य का भार एक ही जगह होने से प्रक्रिया धीमी हो गई है। वहीं, मोबाइल फोरेंसिक वैन का मुख्य उद्देश्य यही था कि घटनास्थल पर ही साक्ष्य एकत्र कर उनकी प्राथमिक जांच की जा सके। इन वैन के जरिए मौके पर ही फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग, सीन स्केच और साक्ष्यों की सुरक्षित पैकेजिंग जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जिससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में सुधार होता। हालांकि विभाग का कहना है कि वाहनों को जिलों में भेजने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और एक सप्ताह के भीतर इन्हें रवाना कर दिया जाएगा, जिसके बाद जांच व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

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नगर निगम सभा में हंगामा: महिला सशक्तिकरण पर तीखी बहस, माइक छीना तो बढ़ा विवाद

नगर निगम की विशेष सामान्य सभा में महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर जमकर राजनीतिक टकराव देखने को मिला। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे माहौल काफी गरमा गया। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने बिना किसी का नाम लिए ‘अंग्रेजों के मुखबिर’ जैसी टिप्पणी कर दी। इस बयान पर भाजपा पार्षद नाराज हो गए और विरोध जताते हुए उनका माइक छीनने तक पहुंच गए। इसके चलते करीब 15 मिनट तक हंगामा और नारेबाजी होती रही, जिसके बाद स्थिति को संभालने के लिए सभापति को बैठक कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। करीब साढ़े पांच घंटे तक चली इस बैठक में आखिरकार महिला सशक्तिकरण को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। इससे पहले भाजपा पार्षद महिला आरक्षण संशोधन के विरोध में काले कपड़े और काले रिबन पहनकर सभा में पहुंचे थे। बैठक खत्म होने के बाद उन्होंने निगम मुख्यालय से कोतवाली चौक तक रैली निकालकर अपना विरोध भी दर्ज कराया। बैठक के दौरान सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिला अधिकारों के मुद्दे पर सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है और शहर की मूलभूत समस्याएं जैसे पेयजल, सफाई और सड़क को नजरअंदाज किया जा रहा है। महापौर मीनल चौबे ने महिला सशक्तिकरण को एक जरूरी पहल बताते हुए विपक्ष की आलोचना की, जबकि विपक्ष ने इसे महज राजनीतिक एजेंडा करार दिया।

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छत्तीसगढ़ में RTE से प्री-स्कूल बाहर: 38 हजार बच्चों पर असर, सरकार बनाम स्कूल एसोसिएशन आमने-सामने

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्री-स्कूल (नर्सरी, LKG, UKG) कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया है। 16 दिसंबर 2025 को जारी इस आदेश का असर राज्य के करीब 38 हजार गरीब बच्चों पर पड़ने की आशंका है। इस फैसले को लेकर विवाद भी तेज हो गया है। छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे संविधान के खिलाफ बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि आज के समय में शिक्षा की शुरुआत प्री-स्कूल स्तर से होती है, ऐसे में गरीब बच्चों को इस शुरुआती चरण से बाहर करना उन्हें आगे की पढ़ाई में भी पीछे धकेल सकता है। सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया है कि RTE अधिनियम मूल रूप से 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों, यानी कक्षा 1 से 8 तक के लिए बनाया गया है। ऐसे में प्री-स्कूल को इसमें शामिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया है। सरकार के अनुसार यदि प्री-स्कूल को RTE के तहत रखा जाता है, तो हर साल लगभग 60 से 70 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। सरकार का यह भी कहना है कि पहले प्री-स्कूल को RTE में शामिल करना एक प्रशासनिक त्रुटि थी, जिसे अब सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इस फैसले का एक अलग पक्ष भी है। साल 2015-16 में राज्य सरकार ने खुद यह निर्णय लिया था कि प्री-स्कूल को RTE के दायरे में लाया जाए, ताकि 3 से 6 साल के बच्चों को शुरुआती स्तर पर बेहतर शिक्षा मिल सके। उस समय सरकार का मानना था कि प्रारंभिक शिक्षा से बच्चों का मानसिक विकास बेहतर होता है और भविष्य में ड्रॉपआउट दर भी कम होती है। साथ ही, यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए भी अहम माना गया था, ताकि गरीब और अमीर बच्चे एक साथ पढ़ सकें। सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि छोटे बच्चों में ड्रॉपआउट दर अधिक होती है और प्री-स्कूल के नाम पर कई नए संस्थान खुल रहे हैं, जिससे कानून के दुरुपयोग की आशंका है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े इस दावे पर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 से 8 साल के बच्चों में ड्रॉपआउट दर लगभग 2 से 3 प्रतिशत के बीच है, जो बहुत अधिक नहीं मानी जाती। हालांकि, नामांकन में कमी जरूर देखी गई है, जहां 16 से 28 प्रतिशत तक बच्चे अब भी प्री-प्राइमरी शिक्षा से बाहर हैं। वर्तमान में यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि प्री-स्कूल कक्षाएं दोबारा RTE के दायरे में आएंगी या नहीं, और राज्य की शिक्षा नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी

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रायपुर में गुपचुप पानी में मिलावट का खुलासा: 20 लीटर रंगीन पानी नष्ट, 27 ठेलों पर कार्रवाई

राजधानी रायपुर में खाद्य एवं औषधि विभाग ने मिलावट के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। ‘सही दवा, शुद्ध आहार’ थीम के तहत चल रहे इस 15 दिवसीय अभियान के पहले ही दिन गुपचुप में इस्तेमाल हो रहे रंगीन पानी का मामला सामने आया। जांच के दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में चाट और गुपचुप के ठेलों की जांच की गई। कई जगहों पर पाया गया कि गुपचुप का पानी कृत्रिम रंग मिलाकर तैयार किया जा रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने करीब 20 लीटर ऐसा पानी मौके पर ही नष्ट करवा दिया। इस अभियान के तहत कुल 27 चाट और गुपचुप सेंटरों की जांच की गई। साथ ही समोसा, चाट और दही बड़ा के सैंपल भी जांच के लिए लिए गए। निरीक्षण के दौरान एक्सपायरी ब्रेड भी मिली, जिसे जब्त कर लगभग 2 किलो सामग्री को तुरंत नष्ट किया गया। अधिकारियों ने सभी संचालकों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के मुताबिक यह अभियान 11 मई तक लगातार जारी रहेगा। इस दौरान मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और आम लोगों को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री लोगों तक पहुंच सके।

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रायपुर में साइबर ठगी का बड़ा खेल: 3 लोगों से 8 लाख की ठगी, लोन-रिवॉर्ड पॉइंट के नाम पर जाल

एक तरफ छत्तीसगढ़ में गर्मी के साथ “वार्म नाइट” का खतरा बढ़ रहा है, वहीं राजधानी रायपुर में साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। अलग-अलग तरीकों से तीन लोगों को निशाना बनाकर करीब 8 लाख रुपए की ठगी की गई है। पुलिस ने तीनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों में टिकरापारा के विशाल गुप्ता, सरस्वती नगर क्षेत्र के सूबेदार हरिश्चंद्र सिंह और अमलीडीह निवासी कारोबारी जयकुमार वाधवानी शामिल हैं। पहले मामले में विशाल गुप्ता ने ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन किया था। ठगों ने अधिक रकम मंजूर होने का लालच देकर उनके मोबाइल का डेटा एक्सेस कर लिया। इसके बाद उनकी निजी तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर वायरल करने की धमकी दी गई और ब्लैकमेल कर करीब 6 लाख रुपए वसूल लिए गए। दूसरे मामले में एक महिला ने खुद को बैंक कर्मचारी बताकर सूबेदार हरिश्चंद्र सिंह को कॉल किया। क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के बहाने उन्हें एक फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर कार्ड डिटेल भरवाई गई। जानकारी डालते ही उनके खाते से लगभग 2 लाख रुपए निकल गए। पीड़ित ने तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। तीसरे मामले में जयकुमार वाधवानी को बीमा पॉलिसी में नुकसान का डर दिखाया गया। ठगों ने कंज्यूमर कोर्ट में केस करने का झांसा देकर नया प्लान और “फ्रीजिंग कोड” के नाम पर लिंक भेजा। लिंक पर क्लिक करते ही उनके खाते से 55 हजार रुपए ट्रांसफर हो गए। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश जारी है।

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छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी का कहर: 2 दिन लू का अलर्ट, फिर मिलेगी राहत

छत्तीसगढ़ में इस समय तेज गर्मी लोगों को परेशान कर रही है और आने वाले दो दिनों तक हालात ऐसे ही बने रहने की संभावना है। मध्य छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। राजनांदगांव में तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। हालांकि मौसम विभाग ने राहत की भी उम्मीद जताई है। अगले तीन दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ सकती है, जिससे गर्मी से थोड़ी राहत मिलेगी। उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक बनी ट्रफ लाइन के असर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ इलाकों में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। सोमवार को बिलासपुर और मुंगेली में तेज आंधी और बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली। राजधानी रायपुर में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। दोपहर या शाम तक बादल छा सकते हैं। यहां अधिकतम तापमान करीब 43 डिग्री और न्यूनतम 30 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल दो दिन तक गर्मी और लू का असर रहेगा, लेकिन उसके बाद तापमान में गिरावट आ सकती है। यानी अभी लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ेगा, लेकिन सप्ताह के आगे बढ़ने पर राहत मिल सकती है।

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रायपुर में नाबालिग की चाकू मारकर हत्या: मामूली विवाद बना जानलेवा, इलाके में तनाव

राजधानी रायपुर में एक मामूली विवाद ने खतरनाक रूप ले लिया, जहां चाकूबाजी की घटना में 16 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। घटना सोमवार देर रात सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पंचशील नगर के पास जोगी मोहल्ला इलाके में हुई। मृतक की पहचान कुश बाघ के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि देर रात करीब 11:30 बजे से 12 बजे के बीच कुछ युवकों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई। इस दौरान आरोपियों ने दो नाबालिगों पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में कुश बाघ को गंभीर चोटें आईं और ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसका एक साथी घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद मंगलवार सुबह मृतक के परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने सिविल लाइन थाने का घेराव कर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को आश्वासन दिया कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस मामले में चार संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की असली वजह सामने आएगी। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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