Chhattisgarh

रिसाली में करंट लगने से ठेका श्रमिक की मौत, चालू लाइन पर काम के दौरान हादसा; ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप

छत्तीसगढ़ के रिसाली क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में बिजली करंट की चपेट में आने से एक ठेका श्रमिक की मौत हो गई। मृतक की पहचान 22 वर्षीय रोशन कुमार देवांगन के रूप में हुई है, जो नगर निगम में अनस्किल्ड लाइनमैन के रूप में कार्य कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, दुर्ग जिले के गणेश नगर इलाके में बिजली लाइन सुधार का काम चल रहा था। इसी दौरान रोशन चालू लाइन पर काम कर रहा था, तभी अचानक तेज करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही नेवई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक को न तो सही प्रशिक्षण दिया गया था और न ही पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे। बिना सेफ्टी किट के लाइव लाइन पर काम कराना गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का आरोप है कि ठेका श्रमिकों से जोखिम भरे काम तो कराए जाते हैं, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं होता। घटना के बाद नगर निगम की महापौर शशि सिन्हा ने तुरंत आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और परिषद सदस्य शामिल होंगे, जहां सुरक्षा व्यवस्था, ठेकेदार की भूमिका और लापरवाही के पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। महापौर ने कहा है कि श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, पुलिस भी ठेका कंपनी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है, ताकि हादसे के असली कारणों का पता लगाया जा सके।

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छत्तीसगढ़ में पहली बार हाई-टेक हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद, भिलाई में 2 युवक गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘हाई-टेक’ तरीके से तैयार किया गया हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ा गया है। भिलाई के भिलाई नगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो पुड़िया बनाकर इस महंगे और ज्यादा असरदार गांजे की सप्लाई कर रहे थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि रुआबांधा इलाके में बीज विकास निगम के पास कुछ युवक नशीले पदार्थों की बिक्री कर रहे हैं। मौके पर पहुंचकर जब जांच की गई, तो सामान्य गांजे के साथ छोटे पैकेट में हाइड्रोपोनिक गांजा भी बरामद हुआ। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विक्रम साहू (29) और यश विश्वकर्मा (27) के रूप में हुई है, जो भिलाई के ही निवासी हैं। पुलिस ने इनके पास से करीब 2 किलो सामान्य गांजा, 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा, 40 हजार रुपए नकद और नशे से जुड़ा सामान जब्त किया है। कुल जब्ती की कीमत करीब 1.75 लाख रुपए आंकी गई है। पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इस अवैध कारोबार में शामिल हुए थे। फिलहाल दुर्ग पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह हाई-टेक गांजा शहर में कहां से सप्लाई हो रहा था। यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक इस तरह का हाइड्रोपोनिक गांजा बड़े शहरों और हाई-प्रोफाइल सर्कल तक ही सीमित माना जाता था। छोटे शहर में इसकी एंट्री ने पुलिस और लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा? हाइड्रोपोनिक गांजा एक आधुनिक तकनीक से उगाया जाता है, जिसमें मिट्टी की जरूरत नहीं होती। पौधों को पानी और विशेष पोषक तत्वों की मदद से बंद कमरे या लैब जैसे माहौल में तैयार किया जाता है। इसमें जड़ों को सीधे मिनरल युक्त पानी में रखा जाता है, जबकि कोको कॉयर, रॉकवूल या पेर्लाइट जैसे माध्यम सिर्फ सपोर्ट देने के लिए उपयोग किए जाते हैं। रोशनी के लिए LED या HPS लाइट्स का इस्तेमाल होता है, जो सूर्य की कमी पूरी करती हैं। पानी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम का संतुलित मिश्रण दिया जाता है और एयर पंप के जरिए ऑक्सीजन भी मिलाई जाती है। यह प्रक्रिया महंगी होती है, लेकिन इससे तैयार गांजा ज्यादा ताकतवर और महंगा होता है।

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‘कच्चा कारोबार’ पर सख्ती: 1.5 लाख से ज्यादा व्यापारी GST से बाहर, 10 अप्रैल के बाद नोटिस

छत्तीसगढ़ में टैक्स चोरी पर रोक लगाने के लिए स्टेट GST विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। विभाग के सर्वे में सामने आया है कि बड़ी संख्या में व्यापारी और सेवा प्रदाता जीएसटी के दायरे में आने के बावजूद अब तक पंजीयन नहीं करा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के नियमों के अनुसार, जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर 40 लाख रुपए से अधिक है और सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपए से ज्यादा आय है, उनके लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके बावजूद करीब 3.5 लाख संभावित कारोबारियों में से केवल 2 लाख ने ही पंजीयन कराया है, यानी लगभग डेढ़ लाख लोग अब भी सिस्टम से बाहर हैं। इसी अंतर को देखते हुए विभाग ने 10 अप्रैल के बाद ऐसे अपंजीकृत कारोबारियों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए बैंकों और छत्तीसगढ़ राज्य बिजली वितरण कंपनी से उन क्षेत्रों की जानकारी जुटाई जा रही है जहां बिजली खपत अचानक बढ़ी है। ऐसे इलाकों में चल रहे उद्योगों और व्यवसायों की जांच कर उनके टर्नओवर का आकलन किया जाएगा। जांच में यह भी सामने आया है कि नॉन-ब्रांडेड सामान जैसे जूते-चप्पल, कपड़े, फर्नीचर, बर्तन और प्लास्टिक उत्पादों का कारोबार करने वाले कई व्यापारी जीएसटी से बच रहे हैं। जबकि ब्रांडेड कंपनियां नियमों का पालन कर रही हैं, स्थानीय और छोटे कारोबारी बिना पंजीयन के ही बड़े स्तर पर व्यापार कर रहे हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन के बाद व्यापारियों को अपनी दुकान, दफ्तर या फैक्ट्री के बाहर जीएसटी नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 30 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। अभी तक कई मामलों में चेतावनी देकर समय दिया जाता था, लेकिन अब सीधे कार्रवाई की जाएगी। विभाग के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत व्यापारी अभी भी यह जानकारी प्रदर्शित नहीं कर रहे हैं। कोयला और ट्रांसपोर्टिंग सेक्टर को लेकर भी विभाग सतर्क है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बिना बिल के लेनदेन और टैक्स चोरी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। विभाग का कहना है कि पहले ऐसे व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा, लेकिन जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। स्टेट जीएसटी कमिश्नर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने कहा है कि इस साल हर हाल में पंजीकृत व्यापारियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और टैक्स चोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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बस्तर में इंद्रावती पर 930 मीटर का पुल फिर शुरू: नक्सल बाधा के बाद री-टेंडर जारी, सुरक्षा में होगा निर्माण

बस्तर के संवेदनशील इलाके में विकास की एक बड़ी परियोजना फिर पटरी पर लौटती दिख रही है। इंद्रावती नदी पर बेदरे में बन रहा 930 मीटर लंबा अंतरराज्यीय पुल, जो नक्सली दहशत के कारण वर्षों से रुका हुआ था, अब दोबारा शुरू होने जा रहा है। ब्रिज कॉर्पोरेशन ने इसके लिए 28 करोड़ रुपए का नया टेंडर जारी किया है। यह प्रोजेक्ट 2020-21 में शुरू हुआ था और शुरुआती चरण में 8 पिलर तैयार भी हो चुके थे, लेकिन नक्सलियों द्वारा ठेकेदार के कर्मचारियों के अपहरण और धमकी के बाद काम पूरी तरह बंद हो गया था। इसके बाद कोई भी ठेकेदार इस हाई-रिस्क जोन में काम करने के लिए तैयार नहीं था। अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा बलों की मजबूत तैनाती के चलते भरोसा लौटा है और इंद्रावती नदी किनारे जवानों का स्थायी कैंप भी स्थापित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस बार कड़ी सुरक्षा के बीच हर हाल में पुल निर्माण पूरा किया जाएगा। यह पुल बीजापुर जिले को सीधे महाराष्ट्र से जोड़ेगा। बेदरे से महाराष्ट्र के भंवरागढ़ की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है। पुल बनते ही बीजापुर से नागपुर और आगे मुंबई तक का सफर आसान हो जाएगा, जिससे अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। अबूझमाड़ क्षेत्र में बन रहा यह पुल विकास के लिहाज से टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इसके बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही सड़क, मोबाइल नेटवर्क और परिवहन सुविधाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह पुल उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा और नदी पार करने का जोखिम खत्म होगा। इंद्रावती नदी पर बनने वाला यह अब तक का सबसे लंबा पुल होगा, जो बस्तर और महाराष्ट्र के बीच संपर्क को नई दिशा देगा।

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छत्तीसगढ़ के 3 युवा क्रिकेटर NCA कैंप के लिए चयनित, U-16 लेवल पर बड़ी उपलब्धि

छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ के तीन होनहार खिलाड़ियों का चयन नेशनल क्रिकेट अकादमी द्वारा आयोजित अंडर-16 एलीट और हाई परफॉर्मेंस कैंप के लिए किया गया है। यह चयन ऑल इंडिया जूनियर सिलेक्शन कमेटी ने किया है, जिसे राज्य क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हाई परफॉर्मेंस कैंप के लिए अर्शवीर सिंह भाटिया का चयन हुआ है। यह कैंप बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 18 मई से 13 जून 2026 तक आयोजित होगा। वहीं अंडर-16 एलीट कैंप के लिए प्रतीक गंधर्व और अरहम नाहर को चुना गया है। एलीट कैंप 11 मई से 6 जून 2026 तक देश के अलग-अलग सेंटरों पर होगा, जहां गंधर्व देहरादून और नाहर अनंतपुर में ट्रेनिंग लेंगे। इस कैंप में खिलाड़ियों को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के टॉप कोचिंग स्टाफ की निगरानी में ट्रेनिंग मिलेगी। इसमें बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग के साथ-साथ फिटनेस, स्ट्रेंथ और प्रोफेशनल रूटीन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। NCA कैंप को युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म माना जाता है, जहां परफॉर्मेंस एनालिसिस, वीडियो स्टडी और डेटा के जरिए खेल को बेहतर बनाया जाता है। यही नहीं, यह कैंप आगे चलकर अंडर-19, रणजी और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का महत्वपूर्ण रास्ता भी बनता है। देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका मिलने से इन खिलाड़ियों को अच्छा एक्सपोजर मिलेगा और चयनकर्ताओं की नजर में आने का अवसर भी मिलेगा। छत्तीसगढ़ के इन खिलाड़ियों से आने वाले समय में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है।

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जनगणना 2027: 16 अप्रैल से मकानों की गिनती शुरू, ऑनलाइन फॉर्म की भी सुविधा

देश में होने वाली जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत 16 अप्रैल से होगी। इस चरण में मकानों की गिनती के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों से जुड़ी अहम जानकारी जुटाई जाएगी। इसमें परिवार के सदस्यों की संख्या, मुखिया का नाम, मकान कच्चा है या पक्का और घर में मौजूद प्रमुख सामानों का भी विवरण लिया जाएगा। इस बार जनगणना में लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा भी दी गई है। 16 से 30 अप्रैल के बीच लोग खुद पोर्टल पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो दिन में घर पर नहीं रहते और सर्वे टीम के आने पर अक्सर घर बंद मिलता है। अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे के दौरान कई बार घर बंद मिलने पर “डोर लॉक” एंट्री कर दी जाती है, जिससे सही जानकारी दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में ऑनलाइन फॉर्म भरना सबसे आसान और बेहतर विकल्प माना जा रहा है। इस प्रक्रिया में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है और फॉर्म जमा करने के बाद 11 अंकों की एक यूनिक आईडी मिलती है। जब प्रगणक घर आएंगे तो सिर्फ यह आईडी दिखाकर प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। जनगणना के इस चरण में यह भी स्पष्ट किया गया है कि व्यक्ति जहां रहता है, उसे उसी मकान की जानकारी देनी होगी। यदि किसी के पास एक से अधिक मकान हैं, तो केवल उसी घर का विवरण देना होगा जहां वह वर्तमान में रह रहा है। बाकी मकानों में रहने वाले किरायेदार अपनी जानकारी अलग से देंगे। हॉस्टल में रहने वाले छात्र-छात्राओं को भी वहीं की जानकारी दर्ज करनी होगी जहां वे रह रहे हैं। सरकार के अनुसार, यह डेटा भविष्य की योजनाओं जैसे पानी, सड़क, बिजली और अन्य सुविधाओं की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। गलत या अधूरी जानकारी देने से किसी क्षेत्र को जरूरी संसाधन मिलने में दिक्कत आ सकती है। अगर कोई परिवार फॉर्म नहीं भरता और घर बंद मिलता है, तो अधूरी जानकारी दर्ज होने की संभावना रहती है, जिसे बाद में सुधारना मुश्किल हो सकता है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे समय रहते सही जानकारी दर्ज करें। ऑनलाइन स्व-गणना के लिए लोगों को आधिकारिक पोर्टल https://se.census.gov.in पर लॉगिन करना होगा, जहां परिवार का रजिस्ट्रेशन, लोकेशन मार्क करना और घर से जुड़े सवालों का जवाब देना होगा। फॉर्म सबमिट करने के बाद मिलने वाली आईडी को सुरक्षित रखना जरूरी है। 30 अप्रैल के बाद, 1 मई से प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। जिन लोगों ने ऑनलाइन फॉर्म भर दिया होगा, उनसे आईडी लेकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जबकि बाकी लोगों से सीधे जानकारी ली जाएगी। इस कार्य के लिए प्रदेशभर में करीब 53 हजार प्रगणक तैनात किए जाएंगे और पहले चरण की प्रक्रिया लगभग एक महीने तक चलेगी।

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IIM रायपुर दीक्षांत समारोह: विदेश मंत्री एस. जयशंकर बोले—विदेश नीति अब भारतीयों की सुरक्षा से भी जुड़ी

भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर में शनिवार को 15वां वार्षिक दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें 2023-25 बैच के 552 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और छात्रों को भविष्य के प्रति जिम्मेदार और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि आज के छात्र ऐसे दौर में स्नातक हो रहे हैं जब भारत जनसांख्यिकीय ऊर्जा, तकनीकी क्षमता और बढ़ती वैश्विक भागीदारी के अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने इसे अवसर और जिम्मेदारी दोनों का समय बताया और कहा कि युवा आने वाले समय में न केवल संस्थानों और उद्योगों को दिशा देंगे, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका भी तय करेंगे। उन्होंने युवाओं को लगातार सीखते रहने, मेहनत करने और रिश्तों को महत्व देने की सलाह दी। साथ ही स्पष्ट सोच और सही निर्णय क्षमता को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के पास तकनीक और जानकारी तक आसान पहुंच है, जिससे उनके अवसर पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गए हैं। वैश्विक हालात को ‘स्ट्रक्चर्ड टर्बुलेंस’ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि बदलते शक्ति संतुलन, तकनीकी बदलाव और संसाधनों के पुनर्वितरण का संकेत है। ऐसे माहौल में देशों और कंपनियों के लिए जोखिम का संतुलन और विविधता बेहद जरूरी हो गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आज की विदेश नीति सिर्फ कूटनीति या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खोलने, तकनीक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में वैश्वीकरण का पुराना मॉडल बदल रहा है और आत्मनिर्भरता पर जोर बढ़ रहा है। भारत के लिए इसका मतलब है कि खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मजबूती लाना जरूरी है। उन्होंने छात्रों को ‘भाग्यशाली पीढ़ी’ बताते हुए वैश्विक समझ विकसित करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आज करियर केवल देश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बनते हैं। युवाओं को ‘कैन-डू स्पिरिट’ के साथ आगे बढ़ने और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की सलाह दी। अंत में उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल तकनीक और बुनियादी ढांचे—जैसे हाईवे, रेल, पोर्ट और एयरपोर्ट—में निवेश कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। भारत अब दुनिया की शीर्ष-5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और आगे और भी बेहतर संभावनाएं मौजूद हैं।

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कांग्रेस की मांग: बस्तर के हर गांव को मिले 1 करोड़, सरकार से वादा निभाने की अपील

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बस्तर के विकास को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि सरकार अपने वादे के मुताबिक हर ग्राम पंचायत को तुरंत 1 करोड़ रुपए की राशि जारी करे। पार्टी का कहना है कि सरकार ने पहले घोषणा की थी कि जो गांव नक्सल मुक्त होंगे, उन्हें यह आर्थिक सहायता दी जाएगी। अब जब सरकार खुद प्रदेश को नक्सल मुक्त बताने का दावा कर रही है, तो इस घोषणा को जमीन पर उतारना जरूरी है। कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि इस फैसले से बस्तर के गांवों में विकास को गति मिलेगी और लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा। उन्होंने “डबल इंजन” सरकार से बस्तर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग भी की है, ताकि क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें। पार्टी ने यह भी कहा कि वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना जरूरी है, जिससे बस्तर के लोगों की आजीविका मजबूत हो सके। इसके साथ ही युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है, ताकि उन्हें बाहर पलायन न करना पड़े। कांग्रेस ने NMDC Limited का मुख्यालय बस्तर में स्थापित करने की मांग उठाते हुए कहा कि यहां से निकलने वाले लौह अयस्क से कंपनी को बड़ा लाभ होता है, लेकिन उसका मुख्यालय हैदराबाद में है। पार्टी का मानना है कि अब बस्तर में बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो चुकी हैं, ऐसे में मुख्यालय यहां शिफ्ट किया जाना चाहिए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही पार्टी ने बस्तर के लोगों में बढ़ रही उस चिंता का भी जिक्र किया, जिसमें खनिज संपदा और जंगलों के निजीकरण का डर जताया जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार से साफ तौर पर आश्वासन देने की मांग की है कि क्षेत्र के संसाधनों को निजी हाथों में नहीं सौंपा जाएगा और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा की जाएगी। रेल कनेक्टिविटी को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि दल्लीराजहरा से जगदलपुर तक रेल लाइन परियोजना में लगातार देरी हो रही है। इस परियोजना को 2021 तक पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका, जिससे बस्तर के लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

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गर्मी में कारें बन रहीं ‘आग का गोला’: रायपुर में 6+ हादसे, एक्सपर्ट ने बताए कारण और बचाव

रायपुर में बढ़ती गर्मी के साथ कारों में आग लगने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं। पिछले एक महीने में 6 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें चलती और खड़ी दोनों तरह की गाड़ियां अचानक आग की चपेट में आ गईं। राहत की बात यह है कि इन हादसों में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन कई वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए। हाल के प्रमुख हादसे क्या है आग लगने की वजह? ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में कार के अंदर का तापमान 60°C तक पहुंच सकता है। इससे इंजन, वायरिंग और फ्यूल सिस्टम पर दबाव बढ़ता है।मुख्य कारण: एक्सपर्ट की चेतावनी स्थानीय ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादातर मामलों में लापरवाही ही इन घटनाओं की जड़ है। छोटी-छोटी तकनीकी समस्याओं को नजरअंदाज करना बड़े हादसे में बदल सकता है। कैसे करें बचाव? पुरानी गाड़ियों को लेकर नियम सरकार के नियमों के अनुसार: CNG और इलेक्ट्रिक कार पर क्या खतरा ज्यादा? अगर CNG किट गलत तरीके से लगाई गई हो या मेंटेनेंस सही न हो, तो खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अधिकृत सर्विस सेंटर से नियमित जांच कराई जाए तो CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने का जोखिम काफी कम रहता है। गर्मियों में थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान बन सकती है। समय पर मेंटेनेंस और सावधानी ही आपकी और आपके वाहन की सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।

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RTE में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त, छुट्टी के दिन सुनवाई; बिलासपुर की बदहाली पर भी कड़ा रुख

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत पहली कक्षा में प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया है। एक रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवकाश के दिन विशेष सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्रक्रिया में देरी पर नाराजगी जताई और राज्य सरकार से विस्तृत हलफनामा मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी। RTE में हजारों आवेदन लंबित सुनवाई में सामने आया कि कुल 38,438 आवेदनों में से सिर्फ 23,766 का ही सत्यापन हो पाया है, जबकि 16 हजार से अधिक आवेदन अब भी लंबित हैं। कोर्ट ने माना कि नोडल प्राचार्यों की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। लॉटरी प्रक्रिया पर संकट कोर्ट ने कहा कि 13 से 17 अप्रैल के बीच प्रस्तावित स्कूल आवंटन की लॉटरी प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जिससे अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। सरकार से इस पर स्पष्ट जवाब मांगा गया है। बिलासपुर की बदहाल व्यवस्था पर भी सख्ती बिलासपुर में गंदगी और अधूरी नाली निर्माण को लेकर भी हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। अधूरी नाली और टूटी पाइपलाइन से परेशानी मामला सिरगिट्टी क्षेत्र के वार्ड 12 (बन्नाक मोहल्ला) का है, जहां करीब डेढ़ महीने से नाली निर्माण अधूरा पड़ा है। 10 फीट गहरी खुदाई के बाद काम रोक दिया गया, जिससे पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और जल आपूर्ति बाधित हो गई। बीमारी का खतरा बढ़ा इलाके में गंदगी और जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला बताया। एक हफ्ते में काम पूरा करने के निर्देश हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को एक सप्ताह के भीतर नाली निर्माण पूरा करने, पाइपलाइन दुरुस्त करने, जल आपूर्ति बहाल करने और पूरे क्षेत्र में सफाई व सैनिटाइजेशन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई करने को कहा है। अगली सुनवाई RTE मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी, जबकि बिलासपुर की सफाई और निर्माण कार्य से जुड़े मामले में अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को तय की गई है, जिसमें प्रगति रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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