Chhattisgarh

सरेंडर नक्सली भूपति का बयान: कहा- गद्दार नहीं, हालात ने बदलने पर किया आत्मसमर्पण; संगठन में बढ़ा वैचारिक संकट

छत्तीसगढ़ के कुख्यात और डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली मोजुल्ला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने आत्मसमर्पण के बाद एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में भूपति ने कहा कि संगठन के कुछ लोग उन्हें गद्दार कह रहे हैं, लेकिन वह गद्दार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं, इसलिए अपने 60 साथियों के साथ हथियार डालने का निर्णय लिया। भूपति ने कहा कि नक्सली संगठन में अब भी कई साथी सत्ता और इलाके पर कब्जे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन इस रास्ते ने हमें जनता से दूर कर दिया है। यह साबित करता है कि हिंसा का रास्ता नाकाम रहा है। हमने अपने साथियों को खोने के बाद सरेंडर करने का फैसला लिया। अब हम जनता के बीच रहकर, लोकतांत्रिक तरीके से उनके लिए काम करना चाहते हैं। भूपति ने साथियों से भी सरेंडर की अपील की भूपति ने नक्सल संगठन में मौजूद अपने साथियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमने कई साथियों को खोया है, इसलिए बदलाव जरूरी है। सेंट्रल कमेटी स्थिति समझ रही है, लेकिन बदलाव को लेकर तैयार नहीं है। अब समय बंदूक छोड़ने और जनता के बीच आने का है।” भूपति ने अपने साथियों से संपर्क के लिए एक नंबर 8856038533 जारी किया है। साथ ही, सरेंडर नक्सली रूपेश का नंबर 6267138163 भी साझा किया है ताकि जो नक्सली हिंसा छोड़ना चाहें, वे संपर्क कर सकें। “अब लोकतंत्र के दायरे में रहकर करेंगे काम” भूपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नेता रूपेश के साथ सैकड़ों नक्सलियों ने भी हिंसा छोड़ दी है। अब हम कानून के दायरे में रहकर जनता के बीच काम करेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन के अंदर वैचारिक संकट गहराता जा रहा है और बंदूक से नहीं बल्कि विचारों से लड़ाई लड़ी जानी चाहिए। रूपेश ने भी माओवाद संगठन पर उठाए सवाल भूपति के आत्मसमर्पण के बाद सेंट्रल कमेटी मेंबर रूपेश ने भी सरकार के सामने हथियार डाले और एक वीडियो जारी किया। रूपेश ने कहा कि महासचिव बसवा राजू संघर्ष विराम चाहते थे, लेकिन उनके एनकाउंटर के बाद पार्टी की दिशा भटक गई। उन्होंने कहा कि पार्टी अब साथियों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। नक्सल संगठन ने बताया “गद्दार” दरअसल, 17 अक्टूबर को जगदलपुर में 210 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था। इनमें 1 करोड़ का इनामी सीसी मेंबर रूपेश भी शामिल था। इसके बाद नक्सल संगठन ने अभय के नाम से एक पर्चा जारी कर इन सरेंडर नक्सलियों को गद्दार करार दिया था।

सरेंडर नक्सली भूपति का बयान: कहा- गद्दार नहीं, हालात ने बदलने पर किया आत्मसमर्पण; संगठन में बढ़ा वैचारिक संकट Read Post »

Chhattisgarh, Top News

कोरबा में 8 साल के बच्चे की मौत: खेल-खेल में निगला सिक्का, सीने में फंसने से सांस रुक गई; इलाज के अभाव में रास्ते में तोड़ा दम

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक दर्दनाक हादसे में 8 साल के मासूम शिवम सारथी की मौत हो गई। बच्चे ने खेल-खेल में सिक्का निगल लिया था, जो उसके सीने में फंस गया। परिजनों को जब तबीयत बिगड़ने का पता चला, तब तक देर हो चुकी थी। परिजनों ने उसे तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां एक्स-रे में सिक्का फंसे होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में इस तरह का इलाज संभव नहीं है और बच्चे की हालत बेहद नाजुक है। परिजन उसे निजी अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही शिवम ने दम तोड़ दिया। 💬 परिजनों का आरोप — “इलाज नहीं मिला, इसलिए गई जान” शिवम के पिता मदन सारथी ने बताया कि वे मूल रूप से धर्मजयगढ़ (रायगढ़) के रहने वाले हैं। कुछ दिनों पहले बेटे के कंधे की चोट का इलाज कराने वे कोरबा आए थे और गोढ़ी गांव में रिश्तेदारों के यहां ठहरे हुए थे। 31 अक्टूबर की रात शिवम की अचानक तबीयत बिगड़ी। उसे सांस लेने में दिक्कत और हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगे। जिला अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि सीने में सिक्का फंसा है, लेकिन अस्पताल में इस स्थिति का उपचार नहीं हो सकता। शिवम को अन्य अस्पताल ले जाने की तैयारी चल ही रही थी कि उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। 🧒 कब निगला सिक्का, किसी को नहीं पता परिवार को यह नहीं पता कि शिवम ने सिक्का कब और कैसे निगला। पिता ने आशंका जताई कि खेलते समय उसने गलती से सिक्का मुंह में डाल लिया होगा। 🏥 अस्पताल प्रबंधन का बयान जिला मेडिकल कॉलेज के सह अधीक्षक डॉ. रविकांत जाटवर ने बताया कि बच्चे को रात करीब 12 बजे अस्पताल लाया गया था। एक्स-रे में सिक्का जैसी आकृति दिखाई दी थी, परंतु पोस्टमॉर्टम में सिक्का नहीं मिला। ⚠️ विशेषज्ञों की सलाह — बच्चों को छोटे सामान से रखें दूर शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. आर.के. वर्मा ने कहा कि छोटे बच्चे अक्सर खेलते-खेलते सिक्का, चना, मूंगफली या छोटे खिलौने निगल लेते हैं, जो गले या श्वासनली में फंस सकता है। ऐसे में तुरंत पास के अस्पताल में ले जाना चाहिए। माता-पिता को बच्चों को छोटे वस्तुओं से दूर रखना चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

कोरबा में 8 साल के बच्चे की मौत: खेल-खेल में निगला सिक्का, सीने में फंसने से सांस रुक गई; इलाज के अभाव में रास्ते में तोड़ा दम Read Post »

Chhattisgarh, Crime

कोरबा में मजदूर की संदिग्ध मौत: परिजनों ने जिंदा समझ अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने किया मृत घोषित; पुलिस जांच में जुटी

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र में एक मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह घटना 1 नवंबर की है। जानकारी के अनुसार, रवानाडांड गांव निवासी शिवलाल (25 वर्ष) रात में खाना खाकर अपने कमरे में सोने गया था, लेकिन अगली सुबह देर तक नहीं उठा। जब परिजनों ने आवाज दी और कोई जवाब नहीं मिला तो वे कमरे में पहुंचे, जहां उसे अचेत अवस्था में पाया। परिजनों ने सोचा कि शिवलाल बेहोश है, इसलिए तुरंत उसे निजी वाहन से जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। ⚒️ रोजी-मजदूरी कर करता था परिवार की मदद मृतक के बड़े भाई सुंदरलाल ने बताया कि शिवलाल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था। घटना वाले दिन वह काम से लौटने के बाद भैंसमा बाजार गया था। घर आकर खाना खाकर अपने कमरे में सो गया और फिर सुबह नहीं उठा। परिजनों ने बताया कि उसे किसी भी तरह की बीमारी या स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। शिवलाल तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटा था और घर का मेहनती सदस्य था, जो आर्थिक रूप से परिवार की मदद करता था। 👮‍♂️ पुलिस जांच में जुटी जिला अस्पताल चौकी प्रभारी ने अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। फिलहाल मौत के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कोरबा में मजदूर की संदिग्ध मौत: परिजनों ने जिंदा समझ अस्पताल पहुंचाया, डॉक्टरों ने किया मृत घोषित; पुलिस जांच में जुटी Read Post »

Chhattisgarh, State

रायगढ़ सड़क हादसा: तेज रफ्तार कार ने तीन लोगों को रौंदा, महिला समेत दो बाइक सवारों की मौके पर मौत; CCTV में कैद पूरी घटना

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे का CCTV फुटेज सामने आया है। यह हादसा 30 अक्टूबर को धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम खम्हा के चाल्हा चौक मोड़ के पास हुआ था। फुटेज में एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़ी महिला और बाइक पर जा रहे दो युवकों को रौंदती नजर आ रही है। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। 🚗 रॉन्ग साइड से आई कार, तीनों की गई जान पुलिस जांच में सामने आया है कि कार चालक पूरी तरह लापरवाही से गाड़ी चला रहा था और वाहन रॉन्ग साइड से आ रहा था। हादसे के तुरंत बाद कार में सवार तीन लोग मौके से फरार हो गए। अभी तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार एक युवती चला रही थी, जिसके साथ दो युवक मौजूद थे। 💥 हादसे में मारे गए तीनों की पहचान मृतकों की पहचान ललिता मिंज (35 वर्ष), निवासी रामपुर, फकीर मोहन पटेल (33 वर्ष), निवासी परसदा, और अमित किंडो (26 वर्ष), निवासी सुगापानी मैनपाट, के रूप में हुई है।घटना के वक्त ललिता मिंज सड़क किनारे खड़ी थीं, जबकि फकीर मोहन और अमित बाइक से कापू की ओर जा रहे थे। अचानक आई कार ने तीनों को रौंद दिया। 👀 प्रत्यक्षदर्शी ने बताई घटना की पूरी कहानी हादसे की चश्मदीद प्रभा तिर्की ने बताया कि वह पास की होटल में समोसा लेने गई थी। तभी उसने देखा कि तेज गति से आ रही कार ने पहले महिला को टक्कर मारी और फिर बाइक सवारों को बुरी तरह कुचल दिया। प्रभा के अनुसार, कार में दो युवक और एक युवती सवार थे, जिसमें युवती ही वाहन चला रही थी। 🛑 पुलिस ने दर्ज किया मामला, जल्द होगी गिरफ्तारी डीएसपी सुशांतो बनर्जी ने बताया कि मामले की गहन जांच चल रही है। पुलिस ने कार चालक के खिलाफ धारा 184-MOT और 106(1)-BNS के तहत अपराध दर्ज किया है। जांच पूरी होते ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

रायगढ़ सड़क हादसा: तेज रफ्तार कार ने तीन लोगों को रौंदा, महिला समेत दो बाइक सवारों की मौके पर मौत; CCTV में कैद पूरी घटना Read Post »

Chhattisgarh, Crime

सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाने वालों पर दुर्ग पुलिस का शिकंजा: 4 दिनों में 14 लोगों पर कार्रवाई, नाबालिगों को दी चेतावनी

दुर्ग। सोशल मीडिया पर खुद को डॉन दिखाने वाले बदमाशों के खिलाफ दुर्ग पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। बीते चार दिनों में पुलिस ने 100 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की, जिनमें हथियारों के साथ फोटो या वीडियो पोस्ट करने वाले 14 युवकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं, 20 से ज्यादा नाबालिगों और युवाओं को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया है। 📱 सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाना बना फैशन पिछले कुछ महीनों में जिले में चाकूबाजी और आपराधिक वारदातें बढ़ी हैं। जांच में सामने आया कि कई युवक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे Amazon, Flipkart और Meesho से चाकू और अन्य घातक हथियार मंगाकर सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर पोस्ट कर रहे थे। इनमें से कई पोस्ट में आरोपी खुद को “डॉन” या “गैंगस्टर” के रूप में दिखाते हुए आम लोगों में डर फैलाने की कोशिश कर रहे थे। 🚨 पुलिस की सख्ती: पोस्ट डिलीट कराई गई, परिजनों को बुलाया गया दुर्ग पुलिस ने इन संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान कर संबंधित थानों को कार्रवाई के निर्देश दिए। जिन नाबालिगों ने हथियारों के साथ पोस्ट डाली थी, उनके परिजनों को थाने बुलाकर समझाइश दी गई और सभी से पोस्ट डिलीट करवाई गई। 🔍 पुलिस की टेक्निकल टीम कर रही निगरानी एएसपी राठौर के अनुसार, पुलिस की टेक्निकल सेल और एसीसीयू टीम लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की निगरानी कर रही है। चार दिनों में ही सैकड़ों अकाउंट की जांच की गई है। थाना कोतवाली क्षेत्र में दो लोगों पर आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है, जबकि छावनी क्षेत्र से 12 अवैध हथियार जब्त किए गए हैं। ⚔️ चाकू खरीदने वालों की सूची तैयार पुलिस ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से चाकू खरीदने वालों की सूची तैयार की है। अब तक 300 से अधिक लोगों को समझाइश दी गई है कि वे किसी भी अवैध हथियार की खरीद-फरोख्त से दूर रहें। 🧾 ऑनलाइन कंपनियों को भी चेतावनी दुर्ग पुलिस ने Amazon, Flipkart और Meesho जैसी ऑनलाइन कंपनियों को पत्र लिखकर घातक हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने को कहा है। पुलिस ने कंपनियों से आग्रह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध वस्तु की डिलीवरी से पहले जांच करें और यदि कोई मामला संदिग्ध लगे तो तुरंत नजदीकी थाने को सूचित करें।

सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाने वालों पर दुर्ग पुलिस का शिकंजा: 4 दिनों में 14 लोगों पर कार्रवाई, नाबालिगों को दी चेतावनी Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Top News

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी का खुलासा: युवक ने सायबर अपराधियों को दिया अपना बैंक खाता, ठगी की रकम उसी में जमा

दुर्ग जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे युवक को पकड़ा है जिसने अपने बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए किया। यह कार्रवाई भारत सरकार के समन्वय पोर्टल से मिली शिकायत के बाद की गई। पुलिस के मुताबिक, पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर जांच की गई तो पता चला कि आरोपी ने अपना बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध कराया था, जिसके माध्यम से ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। 💻 ठगी की रकम आई आरोपी के खाते में जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी रोहित कुमार श्रीवास्तव (25 वर्ष) ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खाता खुलवाया था। इसी खाते में 22 मार्च 2025 को ऑनलाइन माध्यम से ₹23,310 की ठगी की राशि जमा की गई थी।आरोपी को यह जानकारी थी कि यह रकम साइबर ठगी से जुड़ी है, इसके बावजूद उसने पैसे स्वीकार कर आर्थिक लाभ उठाया। 🔍 पुलिस की तकनीकी जांच जारी पद्मनाभपुर पुलिस ने आरोपी के बैंक रिकॉर्ड जब्त कर लिए हैं और अब यह जांच की जा रही है कि उसका खाता किसी बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़ा तो नहीं है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क देशभर में ऑनलाइन ठगी के पैसों का लेनदेन कर रहा है। 🚫 नागरिकों से अपील पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी अजनबी व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या यूपीआई आईडी का उपयोग किसी और को न करने दें। ऐसे मामलों में लापरवाही भारी आर्थिक नुकसान और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।

म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर ठगी का खुलासा: युवक ने सायबर अपराधियों को दिया अपना बैंक खाता, ठगी की रकम उसी में जमा Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, State

छात्रों की आत्महत्या रोकने बड़ा कदम: अब स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में होंगे मनोचिकित्सक, शिक्षा विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन

छात्रों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के आधार पर विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत अब प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में प्रमाणित मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता (काउंसलर) की तैनाती अनिवार्य होगी। समग्र शिक्षा राज्य परियोजना द्वारा जारी 14 बिंदुओं की इस गाइडलाइन को सभी जिलों के कलेक्टरों को भेजा गया है और इसके पालन के सख्त निर्देश दिए गए हैं। कोविड-19 के बाद बढ़ी छात्रों की मानसिक समस्या शिक्षा विभाग ने माना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है, जिसके चलते आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है।इसी को ध्यान में रखते हुए अब स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और सुरक्षा उपायों को लागू करने के आदेश दिए गए हैं। हर संस्थान में काउंसलर या मनोवैज्ञानिक अनिवार्य गाइडलाइन के अनुसार, जिन शिक्षण संस्थानों में 100 या उससे अधिक छात्र हैं, वहां स्थायी काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति करनी होगी।छोटे संस्थानों को जरूरत पड़ने पर बाहरी परामर्शदाताओं से रेफरल सिस्टम बनाना होगा। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर इग्नू से गाइडेंस एंड काउंसलिंग में डिप्लोमा प्राप्त शिक्षक भी काउंसलिंग की जिम्मेदारी निभा सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए भी यह नियम अनिवार्य रहेगा। सुरक्षा उपाय और अनुशासनिक बदलाव नई गाइडलाइन में संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि— अब नहीं बनेंगे ‘मेधावी छात्रों’ के अलग बैच शिक्षा विभाग ने यह भी साफ किया है कि अब किसी भी संस्थान में छात्रों की क्षमता या अंकों के आधार पर अलग-अलग बैच नहीं बनाए जाएंगे।विभागीय सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने सभी जिलों के कलेक्टरों को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जिला स्तरीय निगरानी समिति बनेगी गाइडलाइन के अनुसार, आत्महत्या रोकथाम उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी।इसमें शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, आदिवासी विकास, समाज कल्याण, पुलिस, स्वास्थ्य और बाल संरक्षण विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।इसके साथ ही दो सिविल सोसायटी सदस्य और दो शिक्षाविद भी समिति में रहेंगे। समिति छात्रों से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, प्रशिक्षण और परामर्श का गोपनीय रिकॉर्ड रखेगी और हर साल उसकी रिपोर्ट तैयार करेगी। बच्चों से अपील — जीवन सबसे कीमती है शिक्षा विभाग ने छात्रों से अपील की है कि वे कभी भी गलत कदम न उठाएं।माता-पिता अपनी सीमाओं के बावजूद बच्चों को बेहतर भविष्य देने की कोशिश करते हैं।इसलिए हर छात्र को मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।हर समस्या का समाधान है, बस मदद मांगने से झिझकना नहीं चाहिए।

छात्रों की आत्महत्या रोकने बड़ा कदम: अब स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में होंगे मनोचिकित्सक, शिक्षा विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन Read Post »

Bilashpur, Chhattisgarh, Top News

रायपुर के ब्लू वाटर खदान से दो छात्रों के शव बरामद: क्लास बंक कर घूमने गए थे, गहरे पानी में डूबे; 2017 से अब तक 9 लोगों की मौत

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित ब्लू वाटर खदान में डूबे दो छात्रों के शव 36 घंटे की तलाश के बाद बरामद किए गए हैं। यह हादसा 31 अक्टूबर की शाम को हुआ था, जब कुछ छात्र क्लास बंक कर यहां घूमने पहुंचे थे। एसडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने लगातार दो दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और अंततः 2 नवंबर की सुबह दोनों छात्रों के शव पानी से बाहर निकाले। स्कूल बंक कर पहुंचे थे खदान में घटना माना थाना क्षेत्र की है। मृतकों की पहचान जयेश साहू और मृदुल के रूप में हुई है, जो दोनों 10वीं कक्षा के छात्र थे।जानकारी के अनुसार, रायपुर के छत्तीसगढ़ पब्लिक स्कूल, टाटीबंध के 9 छात्रों का एक समूह स्कूल बंक कर ब्लू वाटर खदान घूमने पहुंचा था। घूमते समय जयेश और मृदुल पानी में उतर गए। कुछ ही देर में दोनों गहरे पानी में समा गए। उनके साथियों ने शोर मचाया, लेकिन खदान क्षेत्र सुनसान होने के कारण तुरंत मदद नहीं मिल सकी। अलग-अलग दिन मिले दोनों के शव घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और SDRF टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया, लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान रोकना पड़ा।अगले दिन 1 नवंबर को जयेश साहू का शव मिला, जबकि 2 नवंबर की सुबह मृदुल का शव बरामद किया गया। घूमने आए छात्रों में मृदुल, जयेश साहू, आशुतोष पांडे, आयुष प्रताप सिंह, विरल राज, रमेश पुनिया, ऋषिराज, आदर्श शुक्ला और प्रियेश गोस्वामी शामिल थे। ब्लू वाटर खदान बना मौत का गड्ढा ब्लू वाटर खदान में यह पहला हादसा नहीं है। वर्ष 2017 से अब तक यहां डूबने से 9 लोगों की मौत हो चुकी है। यह खदान गहराई में काफी नीचे है और बारिश के मौसम में इसमें पानी भर जाने से यह तालाब जैसा दिखाई देता है। हालांकि, यहां कोई सुरक्षा व्यवस्था, बाउंड्री या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं, जिसके कारण स्थानीय लोग और बच्चे अक्सर यहां नहाने या घूमने आ जाते हैं। ब्लू वाटर खदान में अब तक हुए प्रमुख हादसे

रायपुर के ब्लू वाटर खदान से दो छात्रों के शव बरामद: क्लास बंक कर घूमने गए थे, गहरे पानी में डूबे; 2017 से अब तक 9 लोगों की मौत Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Raipur

अमित बघेल के खिलाफ मुंबई में भी शिकायत दर्ज: भगवान झूलेलाल पर टिप्पणी से सिंधी समाज आक्रोशित, कार्रवाई की मांग तेज

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अध्यक्ष और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल के खिलाफ अब मुंबई में भी शिकायत दर्ज की गई है। बघेल पर भगवान झूलेलाल, महाराजा अग्रसेन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय को लेकर आपत्तिजनक बयान देने का आरोप है। इस बयान के बाद सिंधी समाज और अग्रवाल समाज ने कड़ा विरोध जताया है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है, वहीं अब मामला महाराष्ट्र तक पहुंच गया है। उल्हासनगर थाने में दी गई शिकायत महाराष्ट्र के उल्हासनगर निवासी कैलाश महेश सुखरामानी ने अमित बघेल के खिलाफ उल्हासनगर पुलिस स्टेशन (मुंबई) में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि भगवान झूलेलाल के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी से सिंधी समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और समाज को गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। जनप्रतिनिधियों और समाजों में विरोध तेज इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने भी अमित बघेल के बयान की निंदा करते हुए कहा कि “किसी भी धर्म या भगवान का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच की मांग की। इधर, छत्तीसगढ़ के धमतरी में आक्रोश रैली निकाली गई है, जबकि जगदलपुर में 3 नवंबर को विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ? 26 अक्टूबर को रायपुर के VIP चौक पर लगी छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना के बाद यह विवाद शुरू हुआ। घटना के विरोध में जब छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना प्रदर्शन कर रही थी, उसी दौरान अमित बघेल ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था— “पंडित दीनदयाल उपाध्याय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अग्रसेन महाराज की मूर्ति क्यों नहीं टूटती? कौन है अग्रसेन महाराज? चोर है या झूठा? पाकिस्तानी सिंधी क्या जानते हैं मछली वाले भगवान के बारे में।” इस बयान के बाद सिंधी और अग्रवाल समाज ने राज्यभर में विरोध शुरू कर दिया। रायपुर, रायगढ़, सरगुजा समेत कई जिलों में लोगों ने FIR दर्ज करने की मांग की, जिसके बाद पुलिस ने कई जगहों पर मामला दर्ज किया। अमित बघेल ने कहा – “माफी नहीं मांगूंगा” विवाद बढ़ने और FIR दर्ज होने के बाद अमित बघेल ने कहा कि वे अपने बयान पर कायम हैं और माफी नहीं मांगेंगे।उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति का अपमान हमारे पुरखों का अपमान है। हम सिर्फ अपने हक की बात कर रहे हैं। FIR से पहले किसी ने हमसे बात क्यों नहीं की? दो चिन्हारी नहीं चलेगी, छत्तीसगढ़िया रंग में रंगना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ को जानबूझकर अशांत करने की साजिश रची जा रही है।

अमित बघेल के खिलाफ मुंबई में भी शिकायत दर्ज: भगवान झूलेलाल पर टिप्पणी से सिंधी समाज आक्रोशित, कार्रवाई की मांग तेज Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State

छत्तीसगढ़ में अब तक 1.70 करोड़ कॉल्स 112 पर: 4 लाख से ज्यादा घायल नागरिकों को मिली समय पर मदद, जानिए कैसे काम करता है पूरा सिस्टम

छत्तीसगढ़ में इमरजेंसी के वक्त डायल 112 लोगों की पहली पसंद बन चुका है। यह नंबर पुलिस, एम्बुलेंस और फायर सर्विस जैसी आपातकालीन सेवाएं तुरंत उपलब्ध कराता है। साल 2018 से अब तक राज्य में करीब 1.70 करोड़ कॉल्स इस नंबर पर की जा चुकी हैं, जिनमें से लगभग 46 लाख कॉल्स सहायता योग्य पाई गईं। इन्हीं कॉल्स के माध्यम से 4 लाख 27 हजार से अधिक सड़क हादसे के पीड़ितों की जान बचाई गई है। वर्तमान में यह सेवा 17 जिलों में संचालित है, और सरकार जल्द ही बाकी जिलों तक इसे विस्तार देने की तैयारी कर रही है। कैसे काम करता है 112 सिस्टम? रायपुर स्थित सेंट्रलाइज्ड कमांड सेंटर में पूरे राज्य की 112 कॉल्स रिसीव की जाती हैं। जब कोई व्यक्ति कॉल करता है, तो कॉल टेकर उसकी जानकारी जैसे – घटना का प्रकार, स्थान और स्थिति – पूछता है। इसके बाद यह जानकारी डिस्पैचर सेक्शन को दी जाती है, जो घटना स्थल के पास मौजूद इमरजेंसी रिस्पांस व्हीकल (ERV) को निर्देश देता है कि वह तुरंत मौके पर पहुंचे। गाड़ी की मूवमेंट और दूरी की जानकारी स्क्रीन पर ट्रैक की जाती है। घटना स्थल पर सहायता प्रदान करने के बाद टीम क्लोजर रिपोर्ट भेजती है, जिससे केस बंद किया जाता है। एक ही जगह से दो कॉल आने पर क्या होता है? यदि एक ही स्थान से दो लोग कॉल करते हैं, तो कॉल टेकर लोकेशन की क्रॉस-चेकिंग करता है। यदि घटना एक ही है, तो दोनों कॉल्स को एक ही इवेंट में मर्ज कर दिया जाता है। अगर घटनाएं अलग हैं, तो अलग-अलग व्हीकल्स रवाना की जाती हैं। अब सोशल मीडिया से भी मदद संभव डायल 112 सिर्फ कॉल से ही नहीं, बल्कि व्हाट्सऐप, फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से भी मदद लेता है। यह तब उपयोगी साबित होता है जब किसी स्थिति में कॉल करना संभव नहीं हो पाता। कॉलर की पहचान रहती है गोपनीय सिस्टम में यह सुनिश्चित किया गया है कि कॉल करने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। उन्हें न तो केस में गवाह बनाया जाता है और न ही कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसलिए लोग बिना झिझक मदद के लिए कॉल कर सकते हैं। किन जिलों में चल रही है सेवा फिलहाल डायल 112 सेवा रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बस्तर, कबीरधाम, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, सरगुजा, सक्ती, मानपुर-मोहला अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-गंडई-छुईखदान, गरियाबंद, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में सक्रिय है। राज्य सरकार दूसरे चरण में बाकी जिलों में भी इस सुविधा को शुरू करने की दिशा में काम कर रही है।

छत्तीसगढ़ में अब तक 1.70 करोड़ कॉल्स 112 पर: 4 लाख से ज्यादा घायल नागरिकों को मिली समय पर मदद, जानिए कैसे काम करता है पूरा सिस्टम Read Post »

Chhattisgarh, Raipur, State
Scroll to Top