Chhattisgarh

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: रजनीश सिंह बघेल अध्यक्ष निर्वाचित, अनिल त्रिपाठी बने सचिव

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 2026-2028 कार्यकाल के लिए संपन्न हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर एडवोकेट रजनीश सिंह बघेल ने जीत हासिल की है। उन्होंने सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव को 137 मतों के अंतर से पराजित किया। सचिव पद पर अनिल त्रिपाठी निर्वाचित हुए हैं। वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में गौतम खेत्रपाल और महिला उपाध्यक्ष के रूप में मांडवी भारद्वाज ने जीत दर्ज की। परिणाम घोषित होते ही अधिवक्ताओं के बीच उत्साह का माहौल रहा और समर्थकों ने जश्न मनाया। 85 प्रतिशत से अधिक मतदान गुरुवार को हुए मतदान में कुल 1418 पंजीकृत मतदाताओं में से 1213 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इस प्रकार कुल मतदान प्रतिशत 85.54 रहा, जो बार एसोसिएशन चुनाव के लिए उल्लेखनीय माना जा रहा है। चुनाव में 17 पदों के लिए 61 उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान के बाद शुक्रवार सुबह 11 बजे से मतगणना शुरू हुई और देर शाम तक परिणाम घोषित कर दिए गए। अन्य पदों पर भी घोषित हुए परिणाम अध्यक्ष पद के लिए इस बार कुल 7 प्रत्याशी मैदान में थे। संयुक्त सचिव पद पर एडवोकेट विजय साहू, संयुक्त सचिव (महिला) पद पर आस्था शुक्ला विजयी रहीं। पुस्तकालय सचिव के रूप में राहुल मिश्रा, खेल सचिव (पुरुष) पद पर अमन पांडेय और खेल सचिव (महिला) पद पर प्रज्ञा पांडेय ने जीत दर्ज की। कार्यकारिणी सदस्य पद के परिणाम कार्यकारिणी के पांच पदों पर एडवोकेट अभिषेक पांडेय, त्रिवेणी शंकर साहू, आशुतोष मिश्रा, शरद मिश्रा और उज्ज्वल चौबे निर्वाचित हुए। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा, बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा वकीलों के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

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मई 2026 से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, 2027 तक प्रक्रिया पूरी, 2028 में जारी होंगे अंतिम आंकड़े

देश में अगली जनगणना मई 2026 से शुरू होकर 2027 तक पूरी की जाएगी, जबकि अंतिम आंकड़े वर्ष 2028 में जारी किए जाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के अपनी सही जानकारी उपलब्ध करा सकें। पिछली जनगणना के दौरान यह सामने आया था कि कई लोग निजी जानकारी साझा करने में संकोच करते हैं। डेटा की सुरक्षा और दुरुपयोग की आशंका के कारण कुछ परिवारों ने अधूरी या गलत जानकारी दी थी। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जनगणना-2026-27 को मोबाइल एप आधारित बनाया जा रहा है। मोबाइल एप और जियो-टैगिंग का उपयोग इस बार गणक (एन्यूमरेटर) स्मार्टफोन एप के माध्यम से सीधे डेटा दर्ज करेंगे। जानकारी तत्काल केंद्रीय सर्वर पर भेजी जाएगी। एप हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। अधिकांश प्रश्नों के लिए पूर्वनिर्धारित विकल्प दिए जाएंगे, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी और डेटा प्रोसेसिंग तेज होगी। पहली बार नागरिकों को “सेल्फ-एन्यूमरेशन” की सुविधा भी मिलेगी। वे वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। साथ ही जियो-टैगिंग तकनीक से मकानों और स्थानों की सटीक पहचान सुनिश्चित की जाएगी। दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी।पहला चरण (मई 2026): मकानों की सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक घर के सदस्यों की मूल जानकारी एकत्र की जाएगी। यह चरण दूसरे चरण के लिए आधार तैयार करेगा। दूसरा चरण (फरवरी 2027): इसमें व्यक्ति आधारित विस्तृत जानकारी ली जाएगी, जैसे नाम, उम्र, लिंग, जाति, शिक्षा, रोजगार और आय आदि। अधिकारियों के अनुसार पहला चरण किसी ढांचे की तरह होगा, जबकि दूसरे चरण में विस्तृत विवरण जोड़ा जाएगा। सर्वे टीम को विशेष प्रशिक्षण जनगणना से पहले तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सर्वे टीम को यह सिखाया जाएगा कि लोगों से सही और स्पष्ट जानकारी कैसे प्राप्त की जाए। कई बार लोग गोपनीयता के डर से गलत उत्तर दे देते हैं, जैसे पक्के मकान को कच्चा बताना या बेरोजगार होने के बावजूद खुद को कार्यरत बताना। ऐसी स्थिति में टीम को तथ्यों की पुष्टि कर विवेकपूर्ण ढंग से जानकारी दर्ज करनी होगी। गलत जानकारी से योजनाओं पर असर जनगणना निदेशालय छत्तीसगढ़ के ज्वाइंट डायरेक्टर अशोक मिश्रा के अनुसार जनगणना केवल जनसंख्या गणना नहीं है, बल्कि यही आंकड़े सरकार की नीतियों और विकास योजनाओं की आधारशिला होते हैं। शिक्षा, रोजगार, गरीबी और साक्षरता से जुड़े गलत आंकड़े भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। निदेशक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि तकनीकी दक्षता को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को जनगणना कार्य में शामिल किया जाता है। उन्हें एप संचालन और डेटा एंट्री से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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हर एफआईआर की डिजिटल मॉनिटरिंग से तेज हुई कार्रवाई: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए गृह विभाग ने कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि अब प्रदेश में दर्ज होने वाली हर एफआईआर की डिजिटल निगरानी की जा रही है। पहले मामलों की समीक्षा मैन्युअल तरीके से होती थी, जिससे विवेचना में देरी होती थी। अब एक विशेष अपराध समीक्षा एप्लीकेशन के माध्यम से एफआईआर का विश्लेषण, समय-सीमा में जांच और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित पर्यवेक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली से त्वरित कार्रवाई संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है, जो देश में अपनी तरह की अनूठी पहल है। किसी भी शिकायत के पीएचक्यू पहुंचते ही वह संबंधित एसपी, डीएसपी और थाने तक तत्काल प्रेषित हो जाती है। उन्होंने बताया कि यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का निराकरण नहीं होता, तो सिस्टम में स्वतः अलार्म सक्रिय हो जाता है। इससे लंबित मामलों की मॉनिटरिंग और कार्रवाई की रफ्तार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नशे और ऑनलाइन जुए के खिलाफ कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई जारी है। इसके साथ ही अनधिकृत ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स पर पहली बार व्यापक कार्रवाई करते हुए 255 ऑनलाइन लिंक और पोर्टल्स को ब्लॉक किया गया है। साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने कई संदिग्ध खातों को सीज किया है। फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले 165 पीओएस संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। गौ-वंश तस्करी पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ने बताया कि गौ-वंश तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां गौ-वंश वध, अवैध परिवहन और व्यापार से जुड़े आदतन आरोपियों की सूची तैयार की गई है। ऐसे 19 आरोपियों की लगातार निगरानी की जा रही है। गौ-वंश वध और अवैध परिवहन के मामलों में 142 वाहनों को राजसात किया गया है, जिनमें से 27 वाहनों की नीलामी भी की जा चुकी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ और डीजी (जेल) हिमांशु गुप्ता भी उपस्थित रहे।

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राजधानी में 10 साल से 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क बकाया, कार्रवाई शून्य

राजधानी Raipur में बीते दस वर्षों के दौरान करीब 8 करोड़ रुपये का डायवर्सन शुल्क वसूल नहीं हो पाया है। हर साल की तरह इस बार भी तहसील कार्यालयों ने दो हजार से अधिक भू-स्वामियों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन वसूली की रफ्तार अब भी बेहद धीमी है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सालाना डायवर्सन शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में किसी बड़े बकायादार के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोग नोटिस को गंभीरता से नहीं ले रहे। बड़े बकायादारों में कौन? जांच में सामने आया है कि शुल्क न चुकाने वालों में अस्पताल संचालक, राइस मिलर, निजी स्कूल संचालक, पेट्रोल पंप संचालक और नए उद्योग स्थापित करने वाले व्यवसायी शामिल हैं। इन सभी ने कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित कराया, लेकिन इसके बाद नियमित वार्षिक शुल्क जमा नहीं किया। बकाया के बावजूद हो रही रजिस्ट्री सबसे बड़ी समस्या यह है कि किस जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है, इसकी जानकारी अब तक पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। पंजीयन कार्यालय के पास ऐसा कोई एकीकृत सॉफ्टवेयर नहीं है, जिससे जमीन की रजिस्ट्री के समय बकाया राशि की जांच की जा सके। इसी कारण लाखों रुपये बकाया होने के बावजूद जमीन की खरीदी-बिक्री होती रही है। कई मामलों में नोटिस मिलने पर संबंधित व्यक्ति यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि जमीन पहले ही बेची जा चुकी है। नया डिजिटल सिस्टम लागू करने की तैयारी राजस्व विभाग का दावा है कि डायवर्सन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए नया एप और सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसके जरिए आवेदन करते ही संबंधित जमीन पर लंबित शुल्क की जानकारी सामने आ जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बकाया शुल्क जमा नहीं किया जाएगा, तब तक नई डायवर्सन प्रक्रिया को स्वीकृति नहीं दी जाएगी। हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल परीक्षण चरण में है और पूरी तरह लागू होना बाकी है। क्या हो सकती है कार्रवाई? तहसील अधिकारियों के मुताबिक, नियमों के तहत बकाया शुल्क न चुकाने पर— हालांकि, अब तक राजधानी के किसी भी तहसील क्षेत्र में इस प्रकार की सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है। नियम क्या कहते हैं? कृषि भूमि का उपयोग बदलने के लिए डायवर्सन कराना अनिवार्य है। पहली बार लैंड यूज परिवर्तन के समय शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद हर वर्ष निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य है, जब तक कि जमीन पर निर्माण पूर्ण न हो जाए या वह नगरीय निकाय के रिकॉर्ड में दर्ज न हो जाए। नियमों में वार्षिक शुल्क से छूट का कोई प्रावधान नहीं है। प्रशासन का दावा राजस्व विभाग ने सभी तहसीलदारों को वसूली तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार नोटिस के बाद भी शुल्क जमा न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और बकाया राशि हर हाल में वसूल की जाएगी।

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शराब कारोबारी के बेटे शोएब ढेबर फरार, रोडरेज में स्कूल संचालक को धमकी का आरोप

रायपुर के तेलीबांधा इलाके में रोडरेज के एक मामले में आरोपी शोएब ढेबर फरार हो गया है। स्कूल संचालक आरबी मिश्रा को कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। FIR दर्ज होने के बाद से ही आरोपी अंडरग्राउंड बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के घर पर अब तक चार बार दबिश दी जा चुकी है, लेकिन वह गिरफ्त में नहीं आया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि उसका मोबाइल फोन बंद है और वह लगातार ठिकाना बदल रहा है। पुलिस टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है। क्या है पूरा मामला पीड़ित आरबी मिश्रा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 6 फरवरी की रात करीब 10 बजे वे विधायक कॉलोनी से वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर दर्शन के लिए गए थे। मंदिर से लौटते समय उनकी कार (CG-04-PY-5003) के पास एक तेज रफ्तार कार आकर टकरा गई, जिससे वाहन में स्क्रैच आ गया। मिश्रा का आरोप है कि जब उन्होंने चालक को सावधानी से गाड़ी चलाने की बात कही, तो उसने बीच सड़क पर वाहन रोक दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद मिश्रा ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला कायम किया। पुलिस का बयान तेलीबांधा थाना प्रभारी अविनाश सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज है और उसे पकड़ने के लिए टीम रवाना की गई है। कई बार दबिश के बावजूद आरोपी हाथ नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कौन है शोएब ढेबर शोएब ढेबर कथित शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर का बेटा है और रायपुर नगर निगम के पूर्व महापौर एजाज ढेबर का भतीजा बताया जा रहा है। 8 फरवरी को दर्ज शिकायत के बाद से ही वह चर्चा में है। पहले भी विवादों में रहा नाम बताया जाता है कि शोएब ढेबर का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। 7 अगस्त 2025 को वह बिना अनुमति जेल के मुलाकात कक्ष में प्रवेश कर गया था, जहां अभद्र व्यवहार की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने उस पर तीन महीने तक मुलाकात पर रोक लगा दी थी। इस मामले में गंज थाने में भी प्रकरण दर्ज हुआ था। इसके अलावा क्लब में मारपीट और कोरोना काल के दौरान पुलिसकर्मियों से बहस के वीडियो भी वायरल हो चुके हैं।

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दुर्ग में गांजा तस्करी पर कार्रवाई: झोले में रखकर बेच रहा था युवक, 2 किलो से अधिक गांजा जब्त

दुर्ग। दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गांजा बेचते हुए एक युवक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के पास से 2 किलो 30 ग्राम गांजा जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 लाख रुपए बताई जा रही है। इसके अलावा आरोपी से 2200 रुपए नकद भी बरामद किए गए हैं। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 8 फरवरी (रविवार) सुबह मुखबिर से सूचना मिली थी कि तितुरडीह इलाके में पुरानी शराब दुकान के पास एक व्यक्ति सफेद-हरे रंग के झोले में गांजा रखकर बिक्री कर रहा है। सूचना मिलते ही मोहन नगर थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और संदिग्ध की घेराबंदी की। पुलिस को देखते ही भागने लगा आरोपी जब पुलिस की सरकारी गाड़ी मौके पर पहुंची, तो वहां एक युवक झोला लिए खड़ा मिला। पुलिस को देखते ही वह भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम गोपाल नाग (38 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक-19, तितुरडीह, मस्जिद के पास बताया। झोले से दो पैकेट गांजा बरामद तलाशी के दौरान आरोपी के झोले से पारदर्शी सेलो टेप से लिपटे दो पैकेट बरामद किए गए। जांच करने पर दोनों पैकेटों में गांजा पाया गया। इसके साथ ही आरोपी की पेंट की जेब से 2200 रुपए नकद भी जब्त किए गए। पुलिस ने पंचनामा तैयार कर मादक पदार्थ की विधिवत जांच की, जिसमें गांजे का कुल वजन 2 किलो 30 ग्राम निकला। इसके बाद गांजे को सीलबंद कर जब्त कर लिया गया। एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज मोहन नगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 20(ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और गांजा तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की तलाश की जा रही है।

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बिलासपुर में बीच सड़क हंगामा: महिला ने ऑटो चालक की पिटाई की, बच्चियों से छेड़छाड़ का लगाया आरोप

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां एक महिला ने सार्वजनिक सड़क पर एक ऑटो चालक की पिटाई कर दी। मामला सकरी थाना क्षेत्र अंतर्गत अटल आवास के पास का बताया जा रहा है। पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बच्चियों से अभद्रता का आरोप प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के मुताबिक, महिला का आरोप है कि ऑटो चालक ने नाबालिग बच्चियों के साथ अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ की। इसी बात से आक्रोशित होकर महिला ने बीच सड़क पर ही चालक को रोक लिया और उसका कॉलर पकड़कर उसे पीटना शुरू कर दिया। हाथ जोड़कर सफाई देता रहा चालक वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि ऑटो चालक लोगों की मौजूदगी में हाथ जोड़कर खुद को निर्दोष बताता रहा और लगातार माफी की गुहार लगाता रहा। हालांकि महिला का गुस्सा शांत नहीं हुआ। घटना के दौरान मौके पर काफी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं की। ‘थाने चलो’ कहकर साथ ले गई महिला बताया जा रहा है कि कुछ देर हंगामे के बाद महिला ने चालक से कहा, “थाने चलो”, और उसे उसी के ऑटो में बैठाकर वहां से ले गई।फिलहाल इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है कि चालक के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है या नहीं। पुलिस प्रशासन की ओर से भी अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

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बलौदाबाजार–रायपुर मार्ग पर चलती बस में लगी आग, ड्राइवर की सूझबूझ से 50 यात्रियों की जान बची

रायपुर/बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में सोमवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया, जब रायपुर की ओर जा रही एक यात्री बस में अचानक आग लग गई। ड्राइवर की तत्परता से बस में सवार करीब 50 यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। हालांकि आग की चपेट में आने से बस पूरी तरह जलकर खाक हो गई। इंजन से उठा धुआं, कुछ ही मिनटों में भड़की आग प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी ट्रेवल्स की बस सुबह करीब 8 बजे बलौदाबाजार से रायपुर के लिए रवाना हुई थी। लगभग 9 बजे खरोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत भैंसा गांव के पास बस के इंजन से अचानक धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुआं आग में तब्दील हो गया और आग तेजी से बस में फैलने लगी। ड्राइवर ने दिखाई सूझबूझ स्थिति की गंभीरता को समझते हुए ड्राइवर ने तुरंत बस को सड़क किनारे रोका, सभी दरवाजे खोले और यात्रियों को बिना अफरा-तफरी के नीचे उतारा। सभी यात्रियों के बाहर निकलने के बाद आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह जल गई। यात्री पवन ने बताया कि यदि ड्राइवर समय पर बस नहीं रोकता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। खासकर बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली। इंजन खराबी से आग लगने की आशंका घटना के बाद स्थानीय लोगों ने यात्रियों को प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक जांच में इंजन में तकनीकी खराबी को आग लगने की वजह माना जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। तेलीबांधा में चलती कार में अचानक लगी आग, सभी सवार सुरक्षित इधर राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र में भी आग की एक और घटना सामने आई है। अग्रसेन चौक के पास शनिवार रात करीब 10:30 बजे चलते समय एक सूमो ग्रैंड (झारखंड पासिंग) वाहन में अचानक आग लग गई। घटना के समय गाड़ी में 6 लोग सवार थे। आग लगते ही सभी ने तुरंत वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचा ली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और एहतियातन सड़क को कुछ देर के लिए बंद कर दिया गया। राहत की बात यह रही कि दोनों ही घटनाओं में किसी प्रकार की जनहानि या चोट की सूचना नहीं है। फिलहाल पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।

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तंत्र-मंत्र से धन बढ़ाने का झांसा: रायपुर में BJP पार्षद से 3.50 लाख की ठगी, नकली नोटों का थैला थमाया

रायपुर। राजधानी रायपुर में तंत्र-मंत्र के जरिए पैसों को कई गुना करने का लालच देकर एक बीजेपी पार्षद से 3 लाख 50 हजार रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। ठक्कर बापा वार्ड के पार्षद रुस्तम कुर्रे को कथित तांत्रिकों ने अनुष्ठान के नाम पर नकली नोटों से भरा थैला थमा दिया और असली रकम लेकर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर गुढ़ियारी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से ठगी की पूरी रकम, एक बाइक और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पैसों को 100 गुना करने का दिया गया लालच पुलिस के अनुसार, गुढ़ियारी निवासी रुस्तम कुर्रे की मुलाकात करीब एक साल पहले भिलाई के सुपेला इलाके में रहने वाले राहुल भारती से हुई थी। राहुल ने काम की तलाश के बहाने संपर्क बढ़ाया और लगातार बातचीत करता रहा। 4 फरवरी 2026 से राहुल ने पार्षद को यह कहकर झांसे में लेना शुरू किया कि उसके संपर्क में मयंक दास नाम का तांत्रिक है, जो तंत्र-मंत्र से पैसों को 100 गुना कर सकता है। ऑफिस में कराया गया अनुष्ठान पीड़ित के मुताबिक, 6 फरवरी की शाम करीब 7 बजे राहुल भारती अपने साथी मयंक दास के साथ मंगल बाजार स्थित पार्षद के कार्यालय पहुंचा। वहां पूजा-पाठ और अनुष्ठान की तैयारी कराई गई। अनुष्ठान के दौरान मयंक दास ने नकद रकम की मांग की, जिस पर पार्षद ने 500-500 के नोटों के 7 बंडलों में कुल 3.50 लाख रुपए सौंप दिए। श्मशान की मिट्टी का बहाना बनाकर हुए फरार इसके बाद कथित तांत्रिक ने पार्षद को बाहर बैठने के लिए कहा और रात करीब 10:30 बजे तक पूजा करता रहा। फिर दोनों आरोपी श्मशान से मिट्टी लाने की बात कहकर एक थैला थमा गए और बाइक से फरार हो गए। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर जब थैला खोला गया, तो उसमें असली नोटों की जगह नकली नोटों के बंडल निकले। आरोपियों के मोबाइल फोन भी बंद मिले। इसके बाद पीड़ित ने देर रात थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। 4 घंटे में आरोपी गिरफ्तार बीजेपी पार्षद की शिकायत के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए चार घंटे के भीतर दोनों आरोपियों को भिलाई से गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पुलिस ने आरोपियों से पूरे 3.50 लाख रुपए, एक अपाचे बाइक और मोबाइल फोन जब्त किया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

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1600 आदिवासी शिक्षक पदों की नियुक्ति को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री को भेजे हजारों पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के अंतर्गत रिक्त पड़े 1600 अनुसूचित जनजाति (ST) पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पीड़ित अभ्यर्थियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल रामेन डेका, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को स्पीड पोस्ट के माध्यम से हजारों पत्र भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। नियुक्ति नहीं होने से नाराज अभ्यर्थी आमरण अनशन पर अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालयों के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इससे आक्रोशित अभ्यर्थी और उनके परिजन 24 सितंबर से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। 2300 पदों में 1600 ST, फिर भी नियुक्ति शून्य प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के अनुसार, सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद घोषित किए गए थे, जिनमें से करीब 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद आज तक इन पदों पर नियुक्ति नहीं हो पाई है।आदिवासी समाज का आरोप है कि यह स्थिति तब बनी हुई है, जब राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार है। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप आंदोलनरत अभ्यर्थियों का दावा है कि अनशन के दौरान बिगड़ी 200 से अधिक युवाओं की तबीयत आदिवासी अभ्यर्थियों का आमरण अनशन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। आंदोलन के दौरान 200 से अधिक युवाओं की तबीयत बिगड़ चुकी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। कई अभ्यर्थियों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। आदिवासी परिवारों पर बढ़ा सामाजिक-आर्थिक दबाव आदिवासी संगठनों का कहना है कि वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और पात्रता के बावजूद युवाओं को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। इससे आदिवासी परिवार गहरे सामाजिक और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें आंदोलन और तेज करने की चेतावनी अभ्यर्थियों और आदिवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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