Chhattisgarh

रायपुर में डीएड और CAF अभ्यर्थियों पर सख्ती, मंत्रालय घेराव से पहले 175 से अधिक को जेल भेजा गया

राजधानी रायपुर के तूता स्थित धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे डीएड और CAF अभ्यर्थियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को डीएड अभ्यर्थियों द्वारा आत्मदाह की कोशिश के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए थे। इसके बाद करीब 125 डीएड अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया, जिनमें 45 महिलाएं और 80 पुरुष शामिल हैं। गुरुवार को मंत्रालय घेराव के लिए निकले CAF अभ्यर्थियों को भी पुलिस ने तूता प्रदर्शन स्थल के प्रवेश द्वार पर रोक दिया। लंबी बातचीत और समझाइश के बाद भी जब प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए 50 से अधिक अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर सेंट्रल जेल भेज दिया। फिलहाल सभी का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। 60 दिनों से जारी है आंदोलन दोनों समूह के अभ्यर्थी पिछले 60 दिनों से अधिक समय से धरने पर बैठे हैं। अब तक आंदोलन के दौरान 200 से ज्यादा युवाओं की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति आक्रामक प्रदर्शन या घेराव की इजाजत नहीं दी जाएगी। डीएड अभ्यर्थियों का आरोप: आरक्षित पदों पर भी नियुक्ति नहीं डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में कुल 2300 पद निकाले गए थे, जिनमें लगभग 1600 पद अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित थे। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह स्थिति तब है जब राज्य में आदिवासी समाज से आने वाले मुख्यमंत्री की सरकार है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने 2 अप्रैल 2024 और 26 सितंबर 2025 को आदेश दिए थे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने भी 28 अगस्त 2024 को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद राज्य सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया है। CAF वेटिंग लिस्ट अभ्यर्थियों की पीड़ा CAF अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2018 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। मेरिट लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन वेटिंग लिस्ट में शामिल 417 अभ्यर्थियों को यह कहकर रोक दिया गया कि पद रिक्त नहीं हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाद में कई चयनित उम्मीदवार मेडिकल में अयोग्य घोषित हुए या उन्होंने नौकरी छोड़ दी, जिससे पद खाली हुए, लेकिन वेटिंग लिस्ट वालों को मौका नहीं दिया गया। समय बीतने के साथ 417 में से 250 से अधिक अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और अब नई भर्ती में शामिल होने के पात्र नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से गुहार लगाने की बात कही है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है। अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

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रायपुर में शिवाजी जयंती पर कुनबी समाज का भव्य महोत्सव: शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी

रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में कुनबी समाज द्वारा भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम कोटा स्थित कुनबी समाज भवन में आयोजित होगा, जहां समाज के लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को जोड़ने की पहल समाज के अध्यक्ष महेश्वर धाण्डेकर ने बताया कि सुबह से ही विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। बच्चों और युवाओं के लिए रंगोली, निबंध लेखन और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताएं रखी गई हैं। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिवाजी महाराज के जीवन, शौर्य और राष्ट्रभक्ति के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का उद्देश्य है। उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया जाएगा। शोभायात्रा बनेगी मुख्य आकर्षण कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भव्य शोभायात्रा होगी। यह यात्रा कुनबी समाज भवन से शुरू होकर जगन्नाथ चौक, रामनगर और भारत माता चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगी। शोभायात्रा में शिवाजी महाराज के जीवन प्रसंगों पर आधारित झांकियां, पारंपरिक परिधान में कलाकारों की प्रस्तुति और ढोल-ताशों की गूंज माहौल को उत्सवमय बनाएगी। जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति आयोजन में राजेश मूणत, मीनल चौबे, पार्षद अमन ठाकुर और श्रीकुमार मेनन विशेष रूप से शामिल होंगे। जनप्रतिनिधि शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालेंगे। समाज पदाधिकारियों—उपाध्यक्ष लखाराम बेदरे, सचिव राधेश्याम टोंडरे, कोषाध्यक्ष मानिक सिलारे, संयुक्त सचिव दिनेश मिसार और कार्यकारिणी सदस्य कुलेश्वर पारधी व रूपेश घोरमोड़े—ने सभी नागरिकों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

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चैलेंज का खतरनाक ट्रेंड: दहदहा स्कूल के 35 छात्रों की कलाई पर कट के निशान, प्रशासन जांच में जुटा

धमतरी/कुरूद। शासकीय माध्यमिक स्कूल दहदहा में 35 विद्यार्थियों की कलाई पर कट के निशान मिलने से प्रशासन, अभिभावक और ग्रामीण चिंतित हैं। मामले का खुलासा 13 फरवरी को हुआ, जबकि घटना करीब एक महीने पुरानी बताई जा रही है। बुधवार को प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने स्कूल पहुंचकर जांच की। क्या सामने आया? जांच में पाया गया कि स्कूल में पंजीकृत 92 बच्चों में से 35 के हाथों पर नुकीली वस्तु से बनाए गए कट के निशान हैं। इनमें 14 छात्राएं और 21 छात्र शामिल हैं, जिनकी उम्र 11 से 14 वर्ष के बीच है। अधिकांश जख्म भर चुके हैं, केवल निशान दिखाई दे रहे हैं। प्राथमिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि कुछ बच्चों ने आपसी “चैलेंज” के तहत ऐसा किया। कुछ निशान 4–6 महीने पुराने बताए जा रहे हैं, जबकि कुछ हाल के हैं। ऑलपिन, ब्लेड या नुकीली लकड़ी के उपयोग की आशंका जताई गई है। मोबाइल गेमिंग या टैटू बनाने के शौक से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। नशे के आरोपों पर स्थिति कुछ अभिभावकों ने गांव में अवैध नशे के कारोबार का आरोप लगाया, हालांकि रागिनी मिश्रा ने ऐसी पुष्टि से इनकार किया है। उनके अनुसार, अब तक की जांच में नशे के नेटवर्क का ठोस प्रमाण नहीं मिला है। अफसरों का निरीक्षण और काउंसलिंग बुधवार को नभसिंह कोसले और एसडीओपी रागिनी मिश्रा ने स्कूल का दौरा कर बच्चों से व्यक्तिगत बातचीत की। हर छात्र को 8–10 मिनट देकर सवाल-जवाब किए गए। तहसीलदार, बीईओ, टीआई और स्कूल स्टाफ भी मौजूद रहे। प्रशासन ने बच्चों की काउंसलिंग शुरू कर दी है और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है।

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जान से खिलवाड़: पीलिया के नाम पर झाड़-फूंक और टोटकों का जाल, अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बिगड़ रही हालत

रायपुर। पीलिया (जॉन्डिस) को हल्की बीमारी समझकर देरी करना और अंधविश्वासी तरीकों पर भरोसा करना मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर से लेकर गांव तक नाभि पर अंडा रखने, अमरबेल का रस पिलाने, आंखों में पत्तियों का रस डालने, राख-चूने से झाड़ने और जड़ी-माला पहनाने जैसे “इलाज” खुलेआम किए जा रहे हैं—जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। नतीजा यह कि मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब हालत गंभीर हो चुकी होती है। क्लिनिकल रिकॉर्ड में चौंकाने वाले संकेत 50 से अधिक मरीजों के क्लिनिकल रिकॉर्ड के विश्लेषण में सामने आया कि बड़ी संख्या में लोग हफ्तों-महीनों तक टोना-टोटका करवाते रहे। कई मामलों में सामान्य पीलिया समझकर देरी की गई, जबकि मरीज ऑब्स्ट्रक्टिव जॉन्डिस (पित्त नली में रुकावट) से जूझ रहे थे। इस देरी से बिलीरुबिन खतरनाक स्तर तक पहुंच गया और कुछ मरीजों में इलाज जटिल हो गया—यहां तक कि कैंसर रोगियों को समय पर कीमोथेरेपी देना भी संभव नहीं रहा। मेकाहारा और अंबेडकर अस्पताल की स्टडी मेकाहारा अस्पताल में सामने आए मामलों में पाया गया कि अंधविश्वासी उपचार के कारण मरीज गंभीर अवस्था में पहुंचे। वहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग की 2023–2025 के बीच 250 से अधिक गंभीर मरीजों पर आधारित अध्ययन में भी यही रुझान दिखा। अनुमान है कि हर महीने करीब 20 मामले ऐसे मिलते हैं जिनमें देसी-टोटकों के कारण उपचार में देरी हुई। 251 रुपए की “माला” और मंत्र का दावा राजधानी के महादेव घाट इलाके में 251 रुपए में “मंत्र पढ़ी माला” देकर 15 दिन पहनने का दावा किया जा रहा है। जड़ी-बूटी और तंत्र-सामग्री का हवाला देकर इलाज का भरोसा दिलाया जाता है, जबकि इसका कोई चिकित्सीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ⚠️ ऑब्स्ट्रक्टिव जॉन्डिस क्यों खतरनाक? ऑब्स्ट्रक्टिव जॉन्डिस तब होता है जब पित्त नली में रुकावट आ जाती है। पित्त की पथरी, ट्यूमर, सूजन या कैंसर इसके कारण हो सकते हैं। यह छिपे हुए कैंसर का शुरुआती संकेत भी बन सकता है।पीलिया दो तरह का माना जाता है— सलाह: पीलिया के लक्षण (आंख-त्वचा पीली, गाढ़ा पेशाब, कमजोरी) दिखें तो तुरंत ब्लड टेस्ट और सोनोग्राफी कराएं। इलाज केवल योग्य डॉक्टर से कराएं; देरी जानलेवा हो सकती है।

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सूरजपुर में दर्दनाक हादसा: बंद कमरे में जलती सिगड़ी से दम घुटा, दंपती और 4 साल की बेटी की मौत

सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। ठंड से बचने के लिए कमरे में जलाई गई सिगड़ी एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुई। चंद्रपुर गांव में कोयले के धुएं से दम घुटने के कारण पति-पत्नी और उनकी 4 वर्षीय बेटी की मौत हो गई। कैसे हुआ हादसा? मिली जानकारी के अनुसार, कंवल सिंह मंगलवार रात परिवार के साथ भोजन करने के बाद सोने चले गए। अधिक ठंड होने के कारण वे अपनी पत्नी कुंती (25 वर्ष) और 4 साल की छोटी बेटी के साथ पास में बने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने कमरे में सोए। कमरे को गर्म रखने और सुबह जल्दी भोजन बनाने की सुविधा के लिए कुंती जलती हुई सिगड़ी कमरे के अंदर ले गई। कमरे में न तो खिड़की थी और न ही रोशनदान, जिससे पूरी रात धुआं और जहरीली गैस भीतर ही जमा होती रही। सुबह हुआ खुलासा सुबह जब 5 वर्षीय बड़ी बेटी अपनी मां को जगाने पहुंची, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज देने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। अनहोनी की आशंका पर कंवल सिंह के बड़े भाई ने दीवार में छेद कर अंदर झांका। टॉर्च की रोशनी में तीनों को अचेत अवस्था में पड़ा देखा गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। ⚠️ कार्बन मोनोऑक्साइड: अदृश्य और जानलेवा कोयला जलने पर कई गैसें निकलती हैं, जिनमें सबसे खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड होती है। यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसका पता लगाना मुश्किल होता है। जब यह गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है, तो रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन की जगह ले लेती है। इससे शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और दम घुटने से मौत तक हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में सिगड़ी या अंगीठी जलाकर सोना बेहद खतरनाक हो सकता है। ठंड के मौसम में सावधानी बरतना जरूरी है।

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रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज: 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सेवा से बदल सकती है तस्वीर

रायपुर। राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के फैलते दायरे के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब बुनियादी जरूरत बन चुका है। कई योजनाएं बनीं, बस सेवाएं शुरू भी हुईं, लेकिन आज भी आम लोगों को सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ‘रायपुर मांगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ अभियान के तहत आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने खुलकर अपनी बात रखी। 350 बसें चलें तो बढ़े भरोसा पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि नवा रायपुर और सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बस सुविधा नहीं है। आम लोगों को मंत्री या अधिकारियों से मिलने के लिए 400–500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। उनका सुझाव है कि कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूट पर चलाई जाएं। उन्होंने निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत बस संचालन को व्यावहारिक विकल्प बताया, ताकि सरकारी फंड की देरी से बचा जा सके। मिनी बसें और लंबी दूरी के रूट जरूरी पुरंदर मिश्रा ने कहा कि शहर के अंदरूनी इलाकों के लिए मिनी सिटी बसें शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद सेवा लगभग ठप हो गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का मानना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सफल बनाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। लंबी दूरी के रूट पर समयबद्ध बस सेवा शुरू होने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा। जाम से राहत का समाधान राजेश मूणत ने कहा कि शहर में कई बस स्टॉप बने हैं, लेकिन बसें नियमित नहीं चल रहीं। जब तक सिटी बस सेवा व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म नहीं होगी। वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और रूट प्लानिंग की कमी रही। अब केंद्र की योजनाओं के तहत सुधार की कोशिश की जा रही है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि सस्ती और भरोसेमंद बस सेवा जनता का अधिकार है। सरकार को किराया और रूट निर्धारण पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। परिवहन विभाग की स्थिति परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल ने बताया कि 30 सिटी बसों के परमिट जारी हैं, लेकिन कितनी बसें संचालित हो रही हैं, इसकी जानकारी निगम के पास है। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए किराया निर्धारित है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पीएम ई-बस योजना पर फोकस केंद्र सरकार की पीएम ई-बस योजना के तहत रायपुर को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। जरवाय में करीब 2 हेक्टेयर में बस डिपो का निर्माण किया जा रहा है, जो चार महीने में तैयार होने की संभावना है। इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सरोना से 33 केवी लाइन बिछाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समयबद्ध, सस्ती और पर्याप्त संख्या में बसें चलाई जाएं तो रायपुर में निजी वाहनों की निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी।

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सुपेबेड़ा में फिर किडनी मरीज की मौत: एम्स रायपुर में उपचार के दौरान तोड़ा दम, मृतकों की संख्या 133 पहुंची

गरियाबंद। सुपेबेड़ा गांव में किडनी बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और मरीज की मौत के बाद गांव में शोक और चिंता का माहौल है। 49 वर्षीय प्रेमजय क्षेत्रपाल ने एम्स रायपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। साल 2005 से अब तक गांव में किडनी रोग से मरने वालों की संख्या बढ़कर 133 हो गई है। पांच साल से घर पर करवा रहे थे डायलिसिस जानकारी के मुताबिक, प्रेमजय पिछले पांच वर्षों से घर पर पेरिटोनियल डायलिसिस करा रहे थे। करीब 20 दिन पहले उनके पेट में लगा डायलिसिस फिस्टुला ब्लॉक हो गया, जिससे नियमित उपचार बाधित हो गया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें एक सप्ताह पहले एम्स रायपुर में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने उनके हाथ में नया फिस्टुला लगाने की कोशिश की, लेकिन मरीज की सहमति नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। बीएमओ प्रकाश साहू ने मौत की पुष्टि की है। परिवार में पहले भी कई मौतें प्रेमजय के परिवार पर इस बीमारी का गहरा असर पड़ा है। उनके माता-पिता और एक भाई समेत परिवार के आठ से अधिक सदस्य पहले ही किडनी रोग से जान गंवा चुके हैं। गांव में अब भी 40 से ज्यादा मरीज पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 से अब तक 133 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 70 से 80 बताई जाती है। वर्तमान में गांव में 40 से अधिक मरीज किडनी रोग से जूझ रहे हैं, जिनमें से तीन का इलाज एम्स में जारी है। आधे से अधिक मरीज बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक ग्रामीणों में बीमारी का डर इतना बढ़ गया है कि कई लोगों ने खून की जांच कराना बंद कर दिया है। पिछले दो वर्षों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में किसी विशेषज्ञ टीम के साथ स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया गया है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। यहां भेजी गई डायलिसिस मशीन भी स्थापित नहीं हो पाई है। दो स्वीकृत डॉक्टरों में से केवल एक ही कार्यरत है और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्वच्छ पेयजल की योजना भी अधूरी पड़ी है।

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बदमाश “मम्मा” की रंगदारी: पैसे नहीं देने पर मैकेनिक समेत 4 से मारपीट, फतेशाह मार्केट में देर रात हंगामा

रायपुर। राजधानी रायपुर के फतेशाह मार्केट में मंगलवार देर रात रंगदारी को लेकर जमकर बवाल हुआ। कोतवाली थाना क्षेत्र में आने वाले इस बाजार में एक निगरानी बदमाश ने पैसे नहीं देने पर मैकेनिक और अन्य लोगों के साथ मारपीट कर दी। घटना के बाद घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और देर रात थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। क्या है पूरा मामला? शिकायतकर्ता इमरान खान ने पुलिस को बताया कि वह फतेशाह मार्केट में “न्यू प्रीमियर ऑटो रिपेयरिंग वर्कशॉप” नाम से दुकान संचालित करता है। 18 फरवरी की रात करीब 9:20 बजे वसीम खान उर्फ “मम्मा” नशे की हालत में दुकान पर पहुंचा और शराब खरीदने के लिए 500 से 1000 रुपए की मांग की। इमरान द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर आरोपी ने उसे धक्का दिया और दुकान में काम कर रहे फैजान से भी पैसों की मांग की। फैजान के मना करने पर आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। हथौड़ी से हमला करने की कोशिश मारपीट के दौरान दुकान पर अपनी गाड़ी ठीक कराने आए ग्राहक मोईन से भी आरोपी ने पैसे मांगे। मना करने पर उसने कथित रूप से हथौड़ी उठाकर हमला करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद राहगीरों ने बीच-बचाव किया, लेकिन आरोपी ने वहां मौजूद अन्य लोगों—मोहम्मद फैजान खान, मोहम्मद जुबैर और वसीम अहमद—के साथ भी मारपीट की। घायलों को इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। थाने में शिकायत, कार्रवाई की मांग घटना के बाद पीड़ित इमरान खान और अन्य लोग देर रात कोतवाली थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों का आरोप है कि विवाद के बाद आरोपी दोबारा पहुंचा और जान से मारने की धमकी दी। कोतवाली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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वैलेंटाइन डे पर दुर्ग में हाई अलर्ट: 33 पेट्रोलिंग टीमें तैनात, पार्क और मॉल में विशेष निगरानी

वैलेंटाइन डे के मद्देनजर दुर्ग जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। शनिवार को जिलेभर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि, हुड़दंग या असामाजिक तत्वों की हरकतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष ड्यूटी वैलेंटाइन डे को देखते हुए 1 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 5 नगर पुलिस अधीक्षक और 30 थाना प्रभारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। ये अधिकारी पार्क, गार्डन, मॉल, प्रमुख बाजार, पर्यटन स्थलों और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहेंगे और स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे। 33 अतिरिक्त पेट्रोलिंग पार्टियां सक्रिय पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में 33 अतिरिक्त पेट्रोलिंग टीमें लगाई हैं। ये टीमें सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गश्त करेंगी। इसके अलावा 21 प्रमुख स्थानों पर फिक्स प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां पुलिस बल स्थायी रूप से मौजूद रहेगा। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील स्थानों पर विशेष महिला सुरक्षा टीम तैनात की गई है। पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं व युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डायल-112, कंट्रोल रूम और रिजर्व बल को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। ट्रैफिक विभाग को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। भीम आर्मी ने सौंपा ज्ञापन वैलेंटाइन डे के दौरान प्रेमी युगलों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर भीम आर्मी ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मांग की है कि मोरल पुलिसिंग या संस्कृति के नाम पर हिंसा करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रेमी युगलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कानून हाथ में लेने वालों पर होगी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणिशंकर चंद्रा ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी तरह की अव्यवस्था फैलाने, हुड़दंग करने या कानून हाथ में लेने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की चपेट में आने से युवती की मौत, युवक गंभीर

भिलाई में शुक्रवार रात नेशनल हाईवे पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ बाइक पर सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना रायपुर से भिलाई आने वाले मार्ग पर चरोदा जीआरपी चौकी के पास रात करीब 10 से 11 बजे के बीच हुई। मृतका की पहचान गूंजा चतुर्वेदी निवासी सुभाष मार्केट, जोन-2, वार्ड 31, बापू नगर खुर्सीपार के रूप में हुई है। घायल युवक 41 वर्षीय दीपक मोंगराज बताया गया है, जो ओडिया मोहल्ला, वार्ड 33, खुर्सीपार भिलाई का रहने वाला है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह प्राथमिक जानकारी के अनुसार दोनों रायपुर से भिलाई लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाइक तेज गति में थी और संतुलन बिगड़ने के बाद एक ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना भिलाई-3 थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलते ही भिलाई-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। हादसे के कारणों की पुष्टि के लिए आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन विस्तृत जांच जारी है।

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