Bilaspur

बिलासपुर के पचपेड़ी इलाके में दिखा भालू, VIDEO वायरल: ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग अलर्ट

Bilaspur जिले के पचपेड़ी परिक्षेत्र में भालू दिखाई देने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया है। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे पचपेड़ी और ध्रुवाकारी गांव के बीच नहर किनारे घूम रहे लोगों ने अचानक जंगली भालू को देखा, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए भालू को आबादी वाले क्षेत्र की ओर आने से रोकने की कोशिश की। इसके बाद भालू केवंतरा और सुकुलकारी गांव की तरफ बढ़ते हुए भरारी जंगल की दिशा में चला गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इलाके में लगातार निगरानी की जा रही है। डिप्टी रेंजर Baghel ने बताया कि भालू की लोकेशन ट्रैक करने के लिए टीम जंगल और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान चला रही है। भालू के मिलने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। खेतों में काम करने वाले किसानों और सुबह-शाम बाहर निकलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। विभाग ने साफ कहा है कि किसी भी स्थिति में भालू के पास जाने या उसे उकसाने की कोशिश न करें और तुरंत वन अमले को सूचना दें।

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बिलासपुर में फैक्ट्री हादसा: 25 फीट ऊंचाई से गिरने पर मजदूर की मौत, सुरक्षा लापरवाही के आरोप

Bilaspur जिले के सीपत थाना क्षेत्र में एक बोरा फैक्ट्री में काम के दौरान दर्दनाक हादसा हो गया। प्लांट में सफाई करते समय एक मजदूर करीब 25 फीट ऊंचाई से नीचे गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। जानकारी के मुताबिक ग्राम जांजी निवासी Laxmi Prasad Dheewar (45) सोमवार सुबह रोज की तरह फैक्ट्री में काम करने पहुंचे थे। दोपहर करीब 3 बजे वे प्लांट के ऊपरी हिस्से में सफाई का काम कर रहे थे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से वे ऊंचाई से नीचे गिर पड़े। बताया जा रहा है कि मजदूर को काम के दौरान हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे। हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल मजदूर को इलाज के लिए Shri Ram Care Hospital ले जाया गया, जहां देर रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका कहना है कि फैक्ट्री में पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि मजदूरों से लंबे समय तक काम कराया जाता है और श्रम कानूनों का भी ठीक से पालन नहीं होता। परिवार ने मृतक के लिए उचित मुआवजा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं Chhattisgarh Police ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही है।

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बिलासपुर में शराब की किल्लत के बीच ब्लैक मार्केटिंग: 80 रुपए की देसी शराब 200 में बेचने का VIDEO वायरल

Bilaspur में सरकारी शराब दुकानों में स्टॉक की कमी के बीच अवैध शराब बिक्री का मामला सामने आया है। कोटा शराब दुकान के बाहर खुलेआम ब्लैक में शराब बेचने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में 80 रुपए की देसी शराब 200 रुपए में बेचे जाने का दावा किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर की शराब दुकानों में सप्लाई प्रभावित होने के कारण कई जगहों पर शराब की भारी कमी बनी हुई है। बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल से शराब की पैकेजिंग पीईटी प्लास्टिक बोतलों में करने के आदेश के बाद डिस्टलरियों को पर्याप्त मात्रा में बोतलें नहीं मिल पा रही हैं, जिससे उत्पादन और वितरण प्रभावित हुआ है। सूत्रों के अनुसार, राज्य की करीब 800 शराब दुकानों को उनकी मांग के मुकाबले काफी कम स्टॉक मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि जो शराब दुकानों तक पहुंच रही है, वह कुछ ही घंटों में खत्म हो जा रही है। इसका असर देसी और अंग्रेजी दोनों तरह की शराब पर देखा जा रहा है। वहीं बीयर की मांग में भी तेजी आई है। बताया जा रहा है कि बिलासपुर जिले की 42 शराब दुकानों में रोज करीब 4500 पेटी शराब की मांग रहती है, लेकिन फिलहाल केवल 1000 से 1500 पेटी तक ही सप्लाई हो पा रही है। इसी वजह से कई दुकानों के बाहर शराब लेने वालों की भीड़ बढ़ रही है और ब्लैक मार्केटिंग को बढ़ावा मिल रहा है। Kota स्थित शराब दुकान के बाहर चखना सेंटर के जरिए अवैध बिक्री किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ लोग दुकान से शराब लेकर बाहर अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। शराब खरीदने वालों का कहना है कि यह सब आबकारी विभाग की मिलीभगत से हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए झूनझाट इलाके में दबिश दी। इस दौरान Rohan Sahu नामक युवक के पास से 16 पाव देसी शराब जब्त की गई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक दूसरे युवक के पास से शराब नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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बिलासपुर में कॉन्स्टेबल की मौत पर घिरा श्रीराम केयर अस्पताल, MLA दिलीप लहरिया ने लाइसेंस रद्द करने की मांग उठाई

बिलासपुर के श्रीराम केयर अस्पताल में पथरी के इलाज के दौरान आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत के मामले में अब राजनीतिक विवाद भी गहराने लगा है। मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की चेतावनी भी दी है। मामले में कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता ने मृतक के परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण सत्यकुमार की हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों के मुताबिक, शुरुआत में डॉक्टरों ने किडनी में इंफेक्शन होने की बात कही थी, लेकिन बाद में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। इसके बाद सिम्स के चार डॉक्टरों की टीम ने बिसरा जांच कराने की सलाह दी है। परिवार ने मामले को दबाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। बुधवार को विधायक दिलीप लहरिया मृतक आरक्षक के पिता और अन्य परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर संजय अग्रवाल को शिकायत सौंपी। विधायक ने कहा कि श्रीराम केयर अस्पताल में इलाज में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अस्पताल के खिलाफ शिकायतें और मुद्दे उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्यकुमार केवल सामान्य पथरी का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन गलत इलाज और लापरवाही के चलते उनकी मौत हो गई। विधायक ने कहा कि अस्पताल में हुई अन्य मौतों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है और पूरे मामले को विधानसभा में उठाया जाएगा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जांच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विधायक ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है। कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। क्या है पूरा मामला? मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी 36 वर्षीय सत्यकुमार पाटले पुलिस विभाग में आरक्षक थे और उनकी पोस्टिंग सरकंडा थाने में थी। 26 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत के बाद वे नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे थे। जांच के बाद डॉक्टरों ने पथरी बताकर ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अगले दिन तक सत्यकुमार सामान्य थे, लेकिन अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इस दौरान करीब चार घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचा। समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी हालत गंभीर हुई और बाद में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने जमकर हंगामा किया था। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

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बिलासपुर गौधाम में अव्यवस्था: 10×26 शेड में 205 मवेशी, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक के लाखासार स्थित गौधाम में गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आई हैं। यहां महज 10×26 फीट के छोटे से शेड में 200 से अधिक मवेशियों को रखा गया है, जिससे उनके बैठने तक की जगह नहीं बची है। इस मामले को लेकर Chhattisgarh High Court ने राज्य सरकार से शपथपत्र के माध्यम से जवाब मांगा है। जानकारी के अनुसार, इस गौधाम का उद्घाटन 14 मार्च को मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने किया था। करीब 25 एकड़ में बने इस परिसर में पशु संरक्षण और विकास के लिए कई घोषणाएं भी की गई थीं, जिनमें प्रशिक्षण भवन, काऊ कैचर और पशु एम्बुलेंस शामिल हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, छोटे से शेड में 205 मवेशियों को ठूंसकर रखा गया है, जबकि पशु चिकित्सकों के अनुसार एक मवेशी के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट जगह आवश्यक होती है। इस स्थिति में पशुओं के बीमार होने और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। गौधाम में चारा और पानी की भी कमी बताई जा रही है। पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध नहीं है और पूरे परिसर की देखरेख केवल एक चौकीदार के भरोसे है, जिसे सीमित वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके अलावा, नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखने की बात भी सामने आई है, जो पशु कल्याण के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गौधाम का उद्देश्य सड़कों से मवेशियों को हटाना था, लेकिन अब भी आसपास की सड़कों पर बड़ी संख्या में मवेशी घूमते नजर आते हैं। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ में हुई। अगली सुनवाई 14 मई को निर्धारित की गई है।

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अटल यूनिवर्सिटी में NSUI का घेराव, कुलसचिव को हटाने की मांग तेज

बिलासपुर स्थित Atal Bihari Vajpayee Vishwavidyalaya में मंगलवार को National Students’ Union of India (NSUI) ने प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हुई चाकूबाजी, छात्राओं से मारपीट और परीक्षा परिणामों में गड़बड़ियों को लेकर कुलसचिव को पद से हटाने की मांग उठाई। NSUI के प्रदेश सचिव रंजेश सिंह के नेतृत्व में छात्र नेताओं ने कुलपति को नारियल भेंट कर विरोध जताया और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इसमें कुलसचिव के कार्यकाल में अनियमितताओं, छात्रहित की अनदेखी और हाल की हिंसक घटनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाया गया। ज्ञापन में 4 मई को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हुई चाकूबाजी की घटना का विशेष उल्लेख किया गया, जिसमें एक कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुआ था और उसे कई टांके लगाने पड़े थे। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि इतने बड़े कार्यक्रम के बावजूद स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं दी गई, जो गंभीर लापरवाही है। उनका कहना है कि इससे छात्रों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है और इसकी जिम्मेदारी प्रशासन को लेनी चाहिए। NSUI ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है। छात्रों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और कई विभागों में क्लासरूम की भी कमी है। वहीं, परीक्षा परिणामों में लगातार त्रुटियां आने से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। छात्र संगठन ने पुनर्मूल्यांकन और पुनर्गणना की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए इसे कमाई का जरिया बताया। NSUI ने कुलपति से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो और कुलसचिव के कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्हें पद से हटाया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

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नारियल खरीदने के विवाद में पिता-पुत्र पर हमला, कैंची से वार कर किया लहूलुहान

बिलासपुर जिले के मस्तूरी थाना क्षेत्र में मामूली विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जहां नारियल खरीदने को लेकर हुए झगड़े में पिता और बेटे पर धारदार कैंची से हमला कर दिया गया। इस घटना में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर किया गया है। जानकारी के अनुसार, यह घटना 4 मई की रात करीब 8 बजे की है। रूपचंद केवट को सूचना मिली कि उनके भाई रूपेश केवट और पिता मनहरण केवट पर मोहल्ले के ही एक युवक ने हमला कर दिया है। जब वे मौके पर पहुंचे तो दोनों घायल अवस्था में मेडिकल स्टोर के सामने पड़े मिले। मनहरण केवट की पीठ से लगातार खून बह रहा था। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तुरंत मस्तूरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने के कारण उन्हें सिम्स अस्पताल बिलासपुर भेजा गया। फिलहाल दोनों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विवाद की शुरुआत नारियल खरीदने को लेकर हुई थी। इसी दौरान आरोपी ज्ञान उर्फ लक्की श्रीवास मौके पर पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उसने कैंची जैसे धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में रूपेश के होंठ, हाथ, सीने और पेट पर गंभीर चोटें आईं, जबकि मनहरण केवट की पीठ पर गहरा घाव हुआ है। घटना के दौरान परिवार की बेटी लगातार अपने पिता को बचाने के लिए मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन आरोपी ने हमला जारी रखा। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद धाराओं में बदलाव किया जा सकता है।

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छत्तीसगढ़ में नकली मसाले का खुलासा, एवरेस्ट मसाला के नाम पर बेचा जा रहा संदिग्ध माल

छत्तीसगढ़ में मशहूर ब्रांड Everest मसाला के नाम पर नकली उत्पाद बेचे जाने का मामला सामने आया है। कंपनी की शिकायत के बाद खाद्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक गोदाम पर छापा मारा, जहां बड़ी मात्रा में संदिग्ध मसाला बरामद किया गया। जानकारी के अनुसार, व्यापार विहार स्थित श्री बालाजी कार्गो मूवर्स के गोदाम में छापेमारी की गई। इस दौरान लाखों रुपये कीमत का मसाला जब्त किया गया, जिसे प्रथम दृष्टया नकली होने की आशंका जताई जा रही है। मौके पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को भी बुलाया गया, जिसने मसालों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया है। इस कार्रवाई के दौरान संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। गोदाम संचालक का कहना है कि जब्त किया गया मसाला किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वहां रखा गया था और उनका इससे सीधा संबंध नहीं है। फिलहाल, खाद्य विभाग द्वारा मामले की जांच की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि मसाला पूरी तरह नकली है या नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को बाजार में मसाले खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए और केवल विश्वसनीय दुकानों से ही सामान लेना चाहिए।

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झारखंड शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को अग्रिम जमानत, हाईकोर्ट ने लगाईं सख्त शर्तें

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कथित झारखंड शराब घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी Anil Tuteja को अग्रिम जमानत प्रदान की है। जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया है कि टुटेजा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि वे जांच में बाधा डालते हैं, तो जांच एजेंसी उनकी जमानत रद्द कराने के लिए स्वतंत्र होगी। हालांकि, इस राहत के बावजूद टुटेजा का जेल से बाहर आना फिलहाल आसान नहीं माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने टुटेजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420 व 120B के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब कारोबार के लिए एक सिंडिकेट तैयार किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव कर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया और अवैध रूप से करोड़ों रुपये का कमीशन अर्जित किया। टुटेजा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर करते हुए दावा किया था कि उन्हें लगातार अलग-अलग मामलों में फंसाकर जेल में रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड पुलिस ने इस मामले में उन्हें आरोपी तक नहीं बनाया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले पांच वर्षों में विभिन्न एजेंसियों द्वारा की गई छापेमारी में उनके पास से कोई अवैध संपत्ति बरामद नहीं हुई और न ही कोई ठोस डिजिटल या वित्तीय साक्ष्य मिला है। वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए टुटेजा को कई घोटालों का मास्टरमाइंड बताया और आरोप लगाया कि उन्होंने रायपुर में बैठकर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि टुटेजा पिछले दो वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं, इसके बावजूद जांच एजेंसी ने इस मामले में उनसे पूछताछ के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया। साथ ही, झारखंड पुलिस द्वारा उन्हें आरोपी न बनाए जाने और अन्य आरोपियों को जमानत मिलने जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत दी, लेकिन स्पष्ट किया कि जांच में सहयोग अनिवार्य होगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।

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बिलासपुर में युवक की हत्या: युवती से बातचीत के विवाद में BA छात्र का गला काटा

छत्तीसगढ़ के Bilaspur में एक मामूली विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया, जहां एक युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। Sarkanda इलाके में युवती से बातचीत को लेकर शुरू हुआ विवाद जानलेवा बन गया। मोपका निवासी अभिषेक यादव (22), जो BA सेकंड ईयर का छात्र था, अपने चचेरे भाई ओमप्रकाश (16) को बचाने के लिए मौके पर पहुंचा था। ओमप्रकाश का मोहल्ले के कुछ युवकों से एक लड़की से बातचीत को लेकर विवाद चल रहा था। शनिवार देर रात यह विवाद अचानक मारपीट में बदल गया, जहां करीब 5 युवकों ने ओमप्रकाश को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान अभिषेक अपने भाई को बचाने पहुंचा, लेकिन हमलावरों ने उस पर भी हमला कर दिया। मुख्य आरोपी ने अपने पास छिपाकर रखे चापड़ से अभिषेक के गले पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। घटना के बाद दोनों को तत्काल Apollo Hospital ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अभिषेक को मृत घोषित कर दिया, जबकि ओमप्रकाश का इलाज जारी है। इस वारदात के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नाबालिगों समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी आशीष सूर्यवंशी (22) के साथ महावीर सूर्यवंशी (23) और रघुवीर सूर्यवंशी (26) भी शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल हिरासत में हैं और आगे की कार्रवाई जारी है।

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