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छत्तीसगढ़ के जांजगीर‑चांपा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है

जहां एक पिता ने अपने ही 6 साल के बेटे की नहर में डुबोकर हत्या कर दी। मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने आरोपी पिता रेशम यादव को गिरफ्तार कर लिया है। 🚔 जानकारी के अनुसार, रेशम यादव शराब का आदी था और इसी बात को लेकर उसकी पत्नी से अक्सर झगड़ा और मारपीट होती रहती थी। परेशान होकर पत्नी अपनी दो बेटियों को लेकर मायके भिलौनी में रहने लगी, जबकि बेटा आयुष पिता के पास ही रह गया। बताया जा रहा है कि आरोपी पत्नी को बार-बार फोन कर धमकी देता था कि वह पहले बेटे को मार देगा और फिर खुद भी जान दे देगा। 13 मार्च की शाम वह बेटे को साथ लेकर निकला और देर रात उसे नहर में डुबो दिया। कुछ घंटे बाद वह बच्चे का शव लेकर पत्नी के घर पहुंचा और पहले दावा किया कि नशे की हालत में साइकिल समेत नहर में गिरने से हादसा हुआ। पुलिस की पूछताछ में सच्चाई सामने आ गई। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने कबूल किया कि पत्नी के वापस न आने से वह गुस्से में था और उसी गुस्से में उसने बेटे की हत्या कर दी। 😢 पुलिस के मुताबिक पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पत्नी ने भी बयान में बताया कि पति शराब पीकर गाली-गलौज और मारपीट करता था, जिससे तंग आकर वह मायके में रह रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया, मामला दर्ज किया और अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। ⚖️

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Chhattisgarh

दुर्ग में पुलिस पर मारपीट का आरोप: बीजेपी नेता के भाई को बंदूक के बट से मारा, CCTV सामने

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिसकर्मियों पर एक युवक से मारपीट करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह युवक भाजपा किसान मोर्चा राजनांदगांव के जिला उपाध्यक्ष आनंद साहू का छोटा भाई नागेश साहू है। घटना पावर हाउस रेलवे स्टेशन के पास की बताई जा रही है, जिसका CCTV वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, 12 मार्च की रात नागेश साहू अपने कुछ साथियों के साथ स्टेशन के पास खड़े थे। इसी दौरान छावनी थाने में पदस्थ दो कॉन्स्टेबल वहां पहुंचे और आसपास खड़े लोगों को हटाने लगे। अधिकतर लोग पुलिस को देखकर वहां से चले गए, लेकिन नागेश और उनके साथी वहीं खड़े रहे। आरोप है कि इस पर एक कॉन्स्टेबल ने बंदूक को उल्टा कर उसके बट से नागेश पर वार किया और उनका कॉलर पकड़कर पीछे धकेल दिया। इसके बाद उन्हें वहां से भगा दिया गया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मी कुछ अन्य लोगों से सामान्य तरीके से बात करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि नागेश साहू अपने एक पूर्व कर्मचारी से बकाया पैसे लेने के सिलसिले में भिलाई आए थे। उनका राजनांदगांव में ढाबा है, जिसे वे संचालित करते हैं। आनंद साहू ने पुलिस पर गुंडागर्दी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भाई ने कोई गलत काम नहीं किया था, इसलिए वहां से हटने की कोई वजह नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित पुलिसकर्मी संभवतः नशे में थे। इस मामले में वे पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की मांग करेंगे। सूत्रों के अनुसार, घटना में शामिल दोनों कॉन्स्टेबल की उस रात ड्यूटी पावर हाउस के सराफा बाजार में लगाई गई थी, लेकिन वे रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पहुंच गए थे। हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान या शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh

ओवरब्रिज हादसे में मौत के बाद अर्थी रखकर चक्काजाम: हत्या का केस दर्ज करने की मांग

बीना के खुरई ओवरब्रिज पर देर रात हुए सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। तेज रफ्तार कार ने सड़क किनारे टहल रहे दो लोगों को टक्कर मार दी, जिसमें गुलाब चंद जैन की मौके पर ही जान चली गई, जबकि दूसरा व्यक्ति घायल हो गया। अर्थी रखकर किया विरोध घटना से आक्रोशित परिजन और जैन समाज के लोग मृतक की अर्थी लेकर सर्वोदय चौराहा पहुंचे और सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। इस विरोध के चलते कुछ समय के लिए शहर का यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। ओवरब्रिज की सुरक्षा पर सवाल समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ओवरब्रिज पर पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नहीं है और भारी वाहनों की आवाजाही भी नियंत्रित नहीं है, जिसके कारण अक्सर हादसे होते रहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की। हत्या का केस दर्ज करने की मांग लोगों की मुख्य मांग थी कि कार चालक के खिलाफ केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या का मामला दर्ज किया जाए। उनका आरोप है कि तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने समझाकर खुलवाया जाम सूचना मिलने पर थाना प्रभारी अनूप यादव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम हटवाया, जिसके बाद यातायात फिर से सामान्य हो सका। पुलिस के अनुसार, दुर्घटना में शामिल कार को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है। यदि जांच में जानबूझकर टक्कर मारने के प्रमाण मिलते हैं तो आरोपी पर और सख्त धाराएं लगाई जाएंगी।

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गिरिडीह रेलवे स्टेशन पर गार्ड पर हमला: चोरी की नीयत से आए बदमाशों ने तोड़ा पैर, मोबाइल-चाबी लेकर फरार

झारखंड के गिरिडीह रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार देर रात ड्यूटी पर तैनात गार्ड पर अज्ञात बदमाशों ने हमला कर दिया। हमले में गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका पैर टूट गया। घटना रात करीब 2:30 बजे की बताई जा रही है। संदिग्ध गतिविधि पर टोका तो किया हमला जानकारी के अनुसार कुछ संदिग्ध युवक स्टेशन परिसर के स्टोर रूम के पास घूम रहे थे। ड्यूटी पर मौजूद गार्ड ने जब उनसे पूछताछ की तो बदमाश भड़क गए और डंडों से हमला कर दिया। घायल गार्ड की पहचान घायल गार्ड की पहचान 48 वर्षीय महुरु साव के रूप में हुई है, जो हजारीबाग जिले के चौपारण थाना क्षेत्र के बेला गांव के निवासी हैं। वह पिछले सात वर्षों से रेलवे स्टेशन परिसर में पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग विभाग के तहत सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत हैं और रात में सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। डंडों से पीटकर तोड़ा पैर हमले के दौरान बदमाशों ने गार्ड के पैर पर जोरदार वार किया, जिससे उसकी हड्डी टूट गई। मोबाइल और चाबियां लूटकर फरार हमलावर गार्ड का मोबाइल फोन और स्टोर रूम की चाबियां छीनकर मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद गार्ड ने शोर मचाया, जिसके बाद अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल पहुंचाया। पहले सदर अस्पताल, फिर आसनसोल रेफर घायल को पहले गिरिडीह सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर देखते हुए आसनसोल रेलवे अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्टेशन परिसर में हुई इस घटना से रेलवे कर्मचारियों में दहशत का माहौल है। पुलिस आसपास के इलाकों में बदमाशों की तलाश कर रही है।

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Crime, jharkhand, State

यूपी बोर्ड की नई मार्कशीट 2026: न फटेगी, न पानी से खराब होगी, 16 सुरक्षा फीचर शामिल

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने 2026 की परीक्षाओं के बाद जारी होने वाली मार्कशीट में बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों को इस बार पहले से ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ मार्कशीट मिलेगी। बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी हैं और अब परिणाम के साथ नई तकनीक वाली मार्कशीट जारी की जाएगी। पानी और फटने से सुरक्षित नई मार्कशीट विशेष मजबूत सामग्री पर तैयार की जाएगी, जिससे यह आसानी से फटेगी नहीं और भीगने पर भी खराब नहीं होगी। इसका उद्देश्य दस्तावेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है। 16 नए सुरक्षा फीचर इस बार मार्कशीट में करीब 16 प्रकार के सुरक्षा फीचर जोड़े जा रहे हैं। इनमें कुछ फीचर सामान्य तौर पर दिखाई देंगे, जबकि कुछ ऐसे होंगे जिन्हें केवल विशेष उपकरण या जांच के माध्यम से ही देखा जा सकेगा। इससे नकली मार्कशीट बनाना बेहद कठिन हो जाएगा। होलोग्राम और कोडिंग मार्कशीट पर विशेष होलोग्राम, कोडिंग और सुरक्षा चिह्न शामिल किए जाएंगे, जिससे उसकी सत्यता आसानी से जांची जा सकेगी। छेड़छाड़ करना होगा मुश्किल नई डिजाइन में ओवरराइटिंग या किसी भी तरह की फेरबदल की कोशिश तुरंत पकड़ में आ सकेगी। इससे फर्जी प्रमाण पत्र के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। बदलाव का उद्देश्य बोर्ड का मानना है कि नई व्यवस्था से छात्रों के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और नौकरी, प्रवेश या अन्य प्रक्रियाओं में सत्यापन आसान होगा।

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2 लाख पौधों से बनेगा ‘बी कॉरिडोर’: हाईवे किनारे फूलों की हरियाली, मधुमक्खियों के लिए खास पहल

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब सड़कों के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रहा है। योजना के तहत हाईवे किनारे मधुमक्खियों के लिए विशेष “बी कॉरिडोर” विकसित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में फूलदार पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल की शुरुआत छत्तीसगढ़ से की जा रही है। सबसे पहले नेशनल हाईवे‑53 के आरंग से सरायपाली मार्ग पर यह कॉरिडोर बनाया जाएगा। अन्य हाईवे भी होंगे शामिल इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रमुख मार्गों पर भी परियोजना लागू होगी, जिनमें — सालभर मिलेगा मधुमक्खियों को भोजन कॉरिडोर में विभिन्न प्रजातियों के फूलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों को पूरे वर्ष पराग और मधुरस मिलता रहे। इससे शहद उत्पादन, परागण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। हाईवे किनारे विकसित हरित पट्टी में करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश और जामुन जैसे पेड़ लगाए जाएंगे। अनुमान है कि इस परियोजना के तहत करीब 2 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिससे सड़क किनारे फूलों की हरियाली भी बढ़ेगी। गांवों से दूरी पर बनाया जाएगा कॉरिडोर अधिकारियों के अनुसार इन कॉरिडोर को गांवों से औसतन 5 से 6 किलोमीटर दूर विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और मधुमक्खियों के लिए सुरक्षित वातावरण बन सके। जल्द होगी अधिकारियों की बैठक परियोजना को लेकर रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में संबंधित जिलों के अधिकारियों और प्रोजेक्ट डायरेक्टरों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें कार्ययोजना तय की जाएगी।

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आरटीई सीट निर्धारण में गड़बड़ी: अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी के आधार पर भर दी सीटें, 11 अधिकारियों को नोटिस

राजधानी रायपुर में आरटीई (Right to Education) कोटे की सीटों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निजी स्कूलों में सीट निर्धारण प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 11 स्कूलों के नोडल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या और माध्यम (हिंदी/अंग्रेजी) के अनुसार सीटें तय नहीं की गईं। कुछ स्कूल अंग्रेजी माध्यम के होने के बावजूद हिंदी माध्यम के आधार पर सीटें सुरक्षित कर दी गईं। क्या है मुख्य गड़बड़ी जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, सीट प्रोटेक्शन प्रक्रिया में गलत आधार अपनाया गया। कई मामलों में छात्र संख्या कम या ज्यादा होने के बावजूद सीटें पुराने आंकड़ों के अनुसार भर दी गईं। बाद में समीक्षा के बाद संशोधित सूची जारी की गई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। डीईओ हिमांशु भारतीय ने बताया कि जहां-जहां त्रुटियां मिली हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। जिन क्षेत्रों के स्कूलों में मामला सामने आया मामला मंदिर हसौद, उरला, फुंडहर, रामनगर बस्ती, पारसदा, अमलीडीह और अन्य इलाकों के निजी स्कूलों से जुड़ा है। मंदिर हसौद और उरला क्षेत्र के कई स्कूलों में माध्यम के आधार पर गलत सीट निर्धारण पाया गया। सीट संख्या में भी बदलाव जांच के बाद कई स्कूलों में सीट संख्या भी बदली गई। उदाहरण के तौर पर कहीं 26 सीटों के स्थान पर 30, 86 के स्थान पर 89 और 12 के स्थान पर 13 सीटें तय की गईं। प्रमुख स्कूल जहां त्रुटियां मिलीं आरटीई सीटों को लेकर पहले से विवाद प्रदेश में आरटीई कोटे की सीटों की संख्या कम होने को लेकर पहले से ही अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में सीट निर्धारण में गड़बड़ी का मामला सामने आने से विवाद और बढ़ सकता है।

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महुआ बीनने के लिए जंगलों में लगाई जा रही आग, हर साल झुलस रही छत्तीसगढ़ की हरियाली

छत्तीसगढ़ में गर्मियों के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ताजा मामला बलरामपुर जिले के लमना चोटिया गांव के पास का है, जहां बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग के आसपास पहाड़ियों पर महुआ के फूल बीनने के लिए जंगल में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों द्वारा सूखी पत्तियां जलाई जाती हैं ताकि जमीन पर गिरे महुआ के फूल साफ दिखाई दें और उन्हें आसानी से इकट्ठा किया जा सके। लेकिन इस प्रक्रिया से हर साल जंगलों को भारी नुकसान पहुंचता है। वन्यजीव और जैव विविधता पर खतरा वन विभाग और सैटेलाइट निगरानी के अनुसार, ऐसी आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं बल्कि छोटे जीव-जंतु, पक्षी और संपूर्ण जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरगुजा संभाग के कई पहाड़ी क्षेत्रों में हर वर्ष बड़े इलाके इस आग की चपेट में आ जाते हैं। मार्च से मई के बीच बढ़ते हैं मामले गर्मी के मौसम में, खासकर मार्च से मई के बीच जंगल की आग की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं। राज्य में हर साल औसतन 2000 से 2500 दावानल की घटनाएं दर्ज होती हैं, जिनमें अधिकांश आग मानव गतिविधियों के कारण लगती है। इस साल भी बढ़े फायर अलर्ट प्रदेश में इस वर्ष अब तक करीब 205 स्थानों पर जंगल में आग के अलर्ट दर्ज किए जा चुके हैं, जो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका को दर्शाते हैं।

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22,466 करोड़ का स्कूल शिक्षा बजट पास: पहली कक्षा से योग-वैदिक गणित, खेल पीरियड अनिवार्य, मार्कशीट डिजिटल

राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22,466 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया है। विधानसभा में इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिली। सरकार का कहना है कि यह बजट शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि अब सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई शुरू होगी और वैदिक गणित को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही हर स्कूल में अंतिम पीरियड खेल गतिविधियों के लिए अनिवार्य होगा। पीएम श्री योजना के तहत आधुनिक स्कूल पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब, खेल सुविधाएं, ग्रीन कैंपस और करियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शिक्षकों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिया जाएगा। 150 उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में संचालित होंगे। नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन नवा रायपुर में शिक्षा विभाग का आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर 5.90 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यहां लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे कार्यालय संचालित होंगे। दस्तावेज होंगे पूरी तरह डिजिटल छात्रों की मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी होगी, जिससे उसकी डिजिटल सत्यता तुरंत जांची जा सकेगी। तीसरी कक्षा की परीक्षा टैबलेट पर देशभर में बुनियादी साक्षरता और गणना क्षमता मापने के लिए तीसरी कक्षा के छात्रों की परीक्षा अब टैबलेट पर ली जाएगी। पहले यह परीक्षा ओएमआर शीट पर होती थी। यह सर्वे सीबीएसई द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें तकनीकी मार्गदर्शन एनसीईआरटी की इकाई परख दे रही है। इस अभियान में देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 776 जिलों के 10 हजार से अधिक स्कूल और एक लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। स्कूलों के लिए निर्देश जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीख पर विद्यालय खुला रखना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। सर्वे टीम को प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग भी देना होगा।

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दंगों के बाद बेघर 15 परिवार: 40 दिन से राहत शिविर में जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर संकट

छत्तीसगढ़ के खपरी दूधकईया गांव में 1 फरवरी की रात हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद 15 परिवारों के 52 लोग पिछले 40 दिनों से घर से दूर शरण लेने को मजबूर हैं। ये सभी लोग फिलहाल बैजनाथपारा स्थित मुस्लिम हॉल में रह रहे हैं और राहत पर निर्भर जीवन जी रहे हैं। दंगों में इनके घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे बिजली-पानी की व्यवस्था खत्म हो गई और वापस लौटना संभव नहीं हो पा रहा है। सुरक्षा में रायपुर लाए गए घटना के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा के बीच प्रभावित परिवारों को गांव से निकालकर रायपुर पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ रखने के लिए समाज के हॉल में ठहराया गया, जहां किराया नहीं लिया जा रहा है। मदद पर चल रही जिंदगी राहत शिविर में रह रहे परिवारों को भोजन, कपड़े और जरूरी सामान सामाजिक संगठनों व आम लोगों की मदद से मिल रहा है। अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग सहायता के लिए आगे आए हैं। फिर भी लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह मदद कब तक मिलेगी और वे अपने घर कब लौट पाएंगे। जीवनभर की कमाई खत्म प्रभावित लोगों का कहना है कि दंगों में उनकी जमा-पूंजी, जेवर और जरूरी सामान चोरी या नष्ट हो गया। कई परिवारों के आधार कार्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी जल गए, जिससे पहचान और भविष्य दोनों संकट में पड़ गए हैं। उनका आरोप है कि अब तक मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। बच्चों की पढ़ाई ठप राहत शिविर में रह रहे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई है। कई छात्र-छात्राओं की वार्षिक परीक्षाएं छूट गईं क्योंकि उन्हें अचानक गांव छोड़ना पड़ा। किताबें, बैग और स्कूल ड्रेस जल जाने से वे पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं। बच्चों का कहना है कि पूरे साल की मेहनत बेकार हो गई और उन्हें नहीं पता कि वे अगली कक्षा में कैसे पहुंचेंगे। घर वापसी को लेकर अनिश्चितता हॉल में रह रही महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मानसिक तनाव में हैं। वे दिनभर एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हैं, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है।

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