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भोपाल में धर्मांतरण और शोषण का जाल उजागर: मुंगेली की ब्यूटिशियन से दुष्कर्म, दो बहनें गिरफ्तार

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कथित धर्मांतरण और यौन शोषण से जुड़े एक हाईप्रोफाइल मामले का खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की रहने वाली एक ब्यूटिशियन और उसकी सहेली ने भोपाल के बाग सेवनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने दो सगी बहनों—अमरीन और आफरीन—को गिरफ्तार कर लिया। मामले में चंदन यादव को भी पकड़ा गया है, जबकि बिलाल, चानू और यासिर फरार बताए जा रहे हैं। इंस्टाग्राम से शुरू हुआ संपर्क, फिर जाल में फंसाया पीड़िताओं की आपसी पहचान इंस्टाग्राम चैट के जरिए हुई थी। आरोप है कि अमरीन और आफरीन गरीब घरों की लड़कियों को निशाना बनाती थीं। पहले उन्हें घरेलू काम के बहाने अपने पास रखतीं, फिर हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल का लालच देकर पार्टियों में ले जातीं। वहां अमीर युवकों के साथ जबरन संबंध बनाने का दबाव डाला जाता था। पीड़िताओं के अनुसार, उन्हें शराब और नशीले पदार्थ लेने के लिए मजबूर किया गया और कई बार अलग-अलग लोगों के साथ दुष्कर्म कराया गया। विरोध करने पर बदनाम करने और जान से मारने की धमकी दी जाती थी। धर्म परिवर्तन का दबाव भोपाल की एक पीड़िता ने बताया कि चंदन यादव ने उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। शादी का लालच देकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए राजी किया गया। इसके बाद उसे बुर्का पहनने और नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। मुंगेली की पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे गुजरात और मुंबई भी ले जाया गया, जहां अन्य आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। झुग्गी से आलीशान विला तक पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी बहनें भोपाल के अब्बास नगर की झुग्गी से निकलकर आशिमा मॉल के पास स्थित सागर रॉयल विला में रहने लगी थीं। पुलिस को उनके मोबाइल फोन से कई संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप और युवतियों की तस्वीरें मिली हैं। मोबाइल जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। देह व्यापार से जुड़े होने के संकेत पुलिस को शुरुआती जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी बहनें देह व्यापार से जुड़े गिरोह का संचालन कर रही थीं। पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें 10 हजार रुपए मासिक वेतन पर घर में रखा जाता था और पार्टियों में ले जाया जाता था। काम छोड़ने की बात करने पर हत्या की धमकी दी जाती थी। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर और क्राइम ब्रांच की टीम भी जांच में जुटी है।

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रायपुर: ट्रांसपोर्ट नगर की पार्किंग में जुआ, 19 आरोपी गिरफ्तार; 5 लाख से अधिक की रकम और सामान जब्त

राजधानी रायपुर में जुआ खेलने के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 19 आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मामला ट्रांसपोर्ट नगर स्थित पार्किंग नंबर-6 का है, जहां आरोपी 52 पत्ती ताश से हार-जीत का दांव लगा रहे थे। खमतराई थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दीदी के ढाबा के पास कुछ लोग पार्किंग परिसर में बैठकर जुआ खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और सभी आरोपियों को पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 2,52,520 रुपए नकद और 20 मोबाइल फोन जब्त किए। कुल जब्त माल की कीमत 5,02,520 रुपए आंकी गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) मयंक गुर्जर के निर्देश पर की गई। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आकाश मरकाम और सहायक पुलिस आयुक्त उरला पूर्णिमा लामा के नेतृत्व में टीम ने रेड की। नॉर्थ जोन क्षेत्र में असामाजिक तत्वों, जुआरियों और संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। गिरफ्तार आरोपी पुलिस ने जिन 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वे रायपुर के अलग-अलग इलाकों—धनेली, रावाभाठा, उरकुरा, बंजारी नगर, भनपुरी, खुडमुडी और दोन्देकला—के निवासी हैं। सभी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद शहर में अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। पुलिस का दावा है कि ऐसी कार्रवाई से अपराधियों पर अंकुश लगेगा और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।

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57 करोड़ की तीन मल्टीलेवल पार्किंग बेअसर: सुरक्षा और सिस्टम फेल, कमिश्नरेट के बाद रिपोर्ट तैयार

रायपुर शहर में करीब 57 करोड़ रुपये की लागत से बनी तीन मल्टीलेवल पार्किंग सुविधाएं उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, पास सिस्टम और निगरानी की कमी के कारण लोग इन पार्किंग भवनों का उपयोग करने से बच रहे हैं। अब पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने के बाद पहली बार इन पार्किंग व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जा रही है और पुख्ता बदलाव के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। नगर निगम को यह सवाल परेशान कर रहा है कि सैकड़ों वाहनों की क्षमता होने के बावजूद लोग अपनी गाड़ियां सड़कों पर क्यों खड़ी कर रहे हैं। कमिश्नरेट लागू होने के बाद पुलिस कमिश्नर ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पार्किंग शुल्क, पास सिस्टम और सुरक्षा इंतजामों पर सुझाव मांगे गए हैं। सड़कों पर 2 घंटे में 87 हजार वाहन केंद्र सरकार की एजेंसी राइट्स के सर्वे के अनुसार, जिन इलाकों में मल्टीलेवल पार्किंग बनाई गई है, वहां हर दो घंटे में करीब 87 हजार वाहन सड़कों पर खड़े रहते हैं। इसके बावजूद पार्किंग भवन खाली नजर आते हैं। एमजी रोड, सदर बाजार, जीई रोड, मालवीय रोड, गोल बाजार, कोतवाली चौक और रवि भवन जैसे इलाकों में सड़क किनारे पार्किंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। तीनों पार्किंग की स्थिति कलेक्टोरेट पार्किंग (22 करोड़ रुपये)छह मंजिला इस पार्किंग में 406 कार और 140 दोपहिया वाहन खड़े करने की क्षमता है, लेकिन यहां रोजाना तोड़फोड़ और वाहन चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। जवाहर बाजार पार्किंग (20 करोड़ रुपये)यहां 246 कार और 400 दोपहिया वाहनों की क्षमता है, लेकिन रात में अंधेरा और प्रभावी निगरानी की कमी बड़ी समस्या है। स्थानीय कारोबारियों के दबदबे के कारण कई गाड़ियां बिना शुल्क के खड़ी की जा रही हैं। जयस्तंभ चौक पार्किंग (15 करोड़ रुपये)240 कार और 350 दोपहिया की क्षमता वाली इस पार्किंग में पास सिस्टम में गड़बड़ी है। एक पास पर कई गाड़ियां खड़ी होने और एंट्री-एग्जिट जांच के अभाव की शिकायतें मिल रही हैं। नए पार्किंग भवन की जरूरत राइट्स की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शहर के व्यस्त इलाकों—एमजी रोड (शारदा चौक से गुरुनानक चौक), जीई रोड, सदर बाजार रोड, फाफाडीह से रेलवे स्टेशन चौक और कोतवाली चौक से फायर ब्रिगेड चौक—के बीच छोटे या मध्यम आकार के नए पार्किंग भवन बनाए जाएं, ताकि बाजार आने वाले लोग सड़क पर वाहन खड़े करने के बजाय पार्किंग सुविधा का उपयोग करें। “सिस्टम में बड़े बदलाव होंगे” नगर निगम आयुक्त विश्वदीप के अनुसार, तीनों मल्टीलेवल पार्किंग के बेहतर उपयोग के लिए व्यापक योजना पर काम हो रहा है। सुरक्षा, निगरानी और शुल्क व्यवस्था में बदलाव कर इन्हें अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि लोग स्वेच्छा से यहां वाहन पार्क करें। कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार पार्किंग सिस्टम को दुरुस्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित बदलाव ट्रैफिक जाम की समस्या को कितना कम कर पाते हैं।

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छत्तीसगढ़ बजट 2026-27: पेशी से पहले मंदिर पहुंचे वित्त मंत्री ओपी चौधरी, महिलाओं के लिए खास प्रावधान के संकेत

छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री ओपी चौधरी साय सरकार का तीसरा बजट सदन में प्रस्तुत करेंगे। बजट पेश करने से पहले वे अपने सरकारी निवास स्थित मंदिर में पत्नी अदिति चौधरी के साथ पूजा-अर्चना करने पहुंचे। अदिति चौधरी ने कहा कि इस बार का बजट महिलाओं के लिए विशेष रहेगा। पूजा के बाद वित्त मंत्री राम मंदिर के लिए रवाना हुए और वहां से सीधे विधानसभा पहुंचेंगे। बजट दोपहर 12:30 बजे पेश किया जाएगा। सीएम साय ने दी शुभकामनाएं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बजट को प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि नवीन विधानसभा भवन में पेश हो रहा यह तीसरा बजट विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के विजन को मजबूती देगा। बड़े ऐलानों की संभावना इस बार के बजट में कई बड़े फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है। इनमें जल बोर्ड गठन, ‘जी राम जी’ (Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission – Gramin) योजना के तहत ग्राम पंचायतों के विकास, स्टार्टअप और MSME को प्रोत्साहन, तथा राजधानी को मेट्रो सिटी की तर्ज पर विकसित करने जैसे प्रस्ताव शामिल हो सकते हैं। सरकार गुड गवर्नेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित प्रशासनिक सुधारों पर भी फोकस कर सकती है। ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान संभव हैं। युवा, किसान और महिला वर्ग पर फोकस युवाओं के लिए रोजगार सृजन और स्टार्टअप नीति में नए प्रावधानों की घोषणा हो सकती है। MSME सेक्टर को निवेश प्रोत्साहन योजनाओं से मजबूती दी जा सकती है। किसानों के लिए समर्थन मूल्य, सिंचाई और कृषि अधोसंरचना में अतिरिक्त बजट का प्रावधान संभव है। महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं को मजबूत करने के संकेत भी मिले हैं। आयुष्मान योजना और पीएम सूर्यघर योजना के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपए तक का प्रावधान किए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजधानी और ग्रामीण विकास मुख्यमंत्री राजधानी विकास योजना के तहत राजधानी को आधुनिक सुविधाओं से लैस मेट्रो सिटी के रूप में विकसित करने की तैयारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में ‘जी राम जी’ योजना के जरिए सड़क, नाली, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ा बजट रखा जा सकता है। खेल, संस्कृति और शिक्षा पर भी ध्यान शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में उनकी प्रतिमा स्थापना के लिए लगभग 1.86 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा जा सकता है। सारंगढ़ इंडोर स्टेडियम के नवीनीकरण और छोटे शहरों में खेल मैदान विकसित करने की योजना भी चर्चा में है। इसके अलावा जिलों में नालंदा लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए फंड जारी होने की संभावना है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को लाभ मिलेगा। कुल मिलाकर यह बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल गवर्नेंस, औद्योगिक विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन साधने वाला माना जा रहा है। अब सभी की नजरें वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी हैं।

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रायपुर पुलिस कमिश्नरी को एक माह: 15,836 अपराध दर्ज, शहर में दुष्कर्म-चोरी तो देहात में हत्या के मामले ज्यादा

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुए एक माह पूरा हो गया है। इस दौरान 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 800 से ज्यादा बदमाशों की गिरफ्तारी की गई है। नई व्यवस्था के तहत शहर को तीन जोन—सेंट्रल, वेस्ट और नॉर्थ—में विभाजित किया गया है, जिनमें 21 थानों को शामिल किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कमिश्नरी सिस्टम से पुलिसिंग मजबूत होगी और अपराधों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। हालांकि, पिछले एक वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि जिले के 33 थानों में कुल 15,836 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें शहरी क्षेत्र के 21 थानों में दुष्कर्म, चोरी और जालसाजी के मामले अधिक रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 12 थानों में हत्या, मारपीट, दहेज मृत्यु और सड़क हादसों में मौत के मामले ज्यादा सामने आए। वेस्ट जोन-2 सबसे संवेदनशील आंकड़ों के अनुसार कमिश्नरेट क्षेत्र में वेस्ट जोन-2 को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां के 9 थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में 4,072 अपराध दर्ज हुए, जो अन्य जोनों की तुलना में अधिक हैं। “शुरुआत में आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं” रिटायर्ड डीजी अन्वेष मंगलम का कहना है कि कमिश्नरी लागू होने के बाद थानों का पुनर्गठन हुआ है, इसलिए शुरुआत में अपराध के आंकड़े ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। उनका मानना है कि अधिकारी-आधारित पुलिसिंग, नियमित पेट्रोलिंग और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले समय में अपराध में कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हर शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना जरूरी है, ताकि अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। हर दिन 43 अपराध, रोज 5 से ज्यादा चोरी रायपुर जिले में औसतन प्रतिदिन 43 अपराध दर्ज हो रहे हैं। चोरी की घटनाएं सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल 1,921 चोरी के मामले दर्ज हुए, जिनमें 1,442 वाहन चोरी और 479 मकान चोरी के मामले शामिल हैं। इसके अलावा, औसतन हर दिन एक अपहरण का मामला भी सामने आ रहा है। बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर जोर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, फिलहाल बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। जोनवार अपराधों की समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस प्रकार की घटनाएं अधिक हो रही हैं और उसी आधार पर रणनीति बनाई जाएगी। कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत को लेकर प्रशासन आश्वस्त है कि सख्त कार्रवाई और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले महीनों में अपराध दर में गिरावट देखने को मिलेगी।

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छत्तीसगढ़ में होली पर ड्राई डे: सरकार का यू-टर्न, राज्यभर में बंद रहेंगी शराब दुकानें

छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने होली पर शराब बिक्री की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। आबकारी विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करेगा। आदेश जारी होने के बाद राज्यभर में होली के दिन सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। दरअसल, नई आबकारी नीति में पहले तय सात ड्राई डे में से तीन दिन—होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी निर्वाण दिवस)—को हटाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि इन अवसरों पर शराब दुकानें खुली रहेंगी। लेकिन अब सरकार ने अपना रुख बदलते हुए होली पर फिर से ड्राई डे लागू करने का निर्णय लिया है। कानून-व्यवस्था और सामाजिक पहलू को देखते हुए फैसला सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। होली जैसे बड़े त्योहार के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से शराब बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। हालांकि, अन्य ड्राई डे पूर्व निर्धारित नीति के अनुसार ही लागू रहेंगे। 2026-27 में सिर्फ चार तय ड्राई डे नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत फिलहाल केवल चार दिन ही ड्राई डे घोषित किए गए हैं: इन तिथियों पर राज्यभर में शराब बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। 30 जनवरी को खुले दुकानों पर हुआ था विरोध गौरतलब है कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे और नियमों में बदलाव की मांग की थी। अब होली को लेकर सरकार के ताजा निर्णय से स्थिति साफ हो गई है कि त्योहार के दिन शराब बिक्री नहीं होगी। हालांकि, आबकारी विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही अंतिम स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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भोपाल में छत्तीसगढ़ की ब्यूटीशियन से दुष्कर्म का आरोप: धर्म परिवर्तन का दबाव, तीन आरोपी फरार

भोपाल/मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की 30 वर्षीय ब्यूटीशियन ने भोपाल में तीन युवकों और एक महिला के खिलाफ दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की शिकायत दर्ज कराई है। मामला बागसेवनिया थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। होटल पार्टी से शुरू हुई पहचान पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 31 दिसंबर 2024 को शाहपुरा स्थित एक होटल में आयोजित जन्मदिन पार्टी के दौरान उसकी मुलाकात एक युवती से हुई। बाद में दोनों साथ रहने लगीं। जनवरी 2025 में वे बागसेवनिया क्षेत्र में रहने वाली अमरीन उर्फ माहिरा के पास शिफ्ट हो गईं। कुछ समय बाद उसे जानकारी मिली कि उसकी सहेली ने अमरीन के कहने पर धर्म परिवर्तन कर उसके भाई से शादी कर ली है। अलग-अलग समय पर दुष्कर्म का आरोप पीड़िता का आरोप है कि अगस्त 2025 में अमरीन का परिचित चंदन यादव उसे बहन से मिलाने के बहाने ले गया और धमकी देकर दुष्कर्म किया। बदनाम करने की धमकी देकर उसे चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद अलग-अलग समय पर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। पीड़िता ने यह भी बताया कि उसे छोटे कपड़े पहनाकर शहर के पब और लाउंज में ले जाया जाता था और अनजान लोगों से मेलजोल बढ़ाने का दबाव बनाया जाता था। इसी दौरान उस पर धर्म परिवर्तन करने के लिए भी दबाव डाला गया। नशीला पदार्थ देने का आरोप नवंबर 2025 में अमरीन उसे गांधी नगर स्थित अब्बास नगर में अपने परिजनों से मिलाने ले गई। आरोप है कि वहां अमरीन के भाई बिलाल ने चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोशी की हालत में दुष्कर्म किया। अहमदाबाद में भी वारदात का आरोप पीड़िता का कहना है कि दिसंबर 2025 में उसे काम के बहाने अहमदाबाद ले जाया गया, जहां यासिर नाम के युवक से मिलवाया गया और वहां भी दुष्कर्म किया गया। जनवरी 2026 में वह भोपाल छोड़कर छत्तीसगढ़ में अपने मामा के घर चली गई। दूसरी युवती के संपर्क में आने के बाद शिकायत हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से एक अन्य युवती ने भी अमरीन और उसके साथियों पर इसी तरह के आरोप लगाए। इसके बाद पीड़िता भोपाल पहुंची और बागसेवनिया थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आरोपियों की तलाश जारी है। सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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CGPSC प्रीलिम्स 2026: पेपर ने बढ़ाई उलझन, कटऑफ घटने के संकेत; रायपुर में 4,500 से ज्यादा अभ्यर्थी अनुपस्थित

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 22 फरवरी को दो शिफ्ट में संपन्न हुई। परीक्षा 48 केंद्रों पर आयोजित की गई। इस बार प्रश्नपत्र का स्तर मॉडरेट से टफ के बीच रहा, जिससे अभ्यर्थियों में उलझन देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार कटऑफ में 5 से 10 अंकों तक गिरावट संभव है। उपस्थिति का आंकड़ा औसतन करीब 75% उपस्थिति रही, जबकि रायपुर में 4,500 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए। कैसा रहा पेपर? सामान्य अध्ययन (GS-I) विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा। सी-सैट (GS-II) सी-सैट सामान्य स्तर का रहा। गणित और रीजनिंग आसान से मध्यम स्तर के थे। हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा से 20 प्रश्न पूछे गए। नियमित अभ्यास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए क्वालिफाई करना कठिन नहीं माना जा रहा। क्यों उलझा पेपर? इसी वजह से पेपर कठिन से ज्यादा “भ्रमित करने वाला” माना जा रहा है। कटऑफ पर क्या असर? विश्लेषण के अनुसार ओवरऑल 56 प्रश्न सरल, 18 मॉडरेट और 26 कठिन रहे। अनुमान है कि इस बार जनरल वर्ग की कटऑफ 105-110 अंकों के बीच जा सकती है, जो पिछले सालों की तुलना में कम है। 238 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती के माध्यम से राज्य की विभिन्न सेवाओं में कुल 238 पदों पर नियुक्ति होगी। प्रमुख पद इस प्रकार हैं: पिछले दशक में पदों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2015 में 352 पदों पर भर्ती हुई थी, जबकि कोविड काल में यह संख्या घटकर 170 के आसपास रह गई थी। इस वर्ष 238 पदों के साथ प्रक्रिया जारी है। सख्त ड्रेस कोड और नियम आयोग ने परीक्षा के दौरान सख्त ड्रेस कोड लागू किया। बिना वैध फोटो पहचान पत्र प्रवेश नहीं दिया गया। प्रवेश पत्र और आईडी में नाम अंतर होने पर शपथ पत्र अनिवार्य था। आगे की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि परिणाम की प्रतीक्षा करने के बजाय अभ्यर्थियों को तुरंत मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। पेपर के पैटर्न से संकेत मिलता है कि आयोग अवधारणात्मक समझ और सूक्ष्म तथ्यों दोनों पर जोर दे रहा है।

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रायपुर सड़क हादसा: धान से भरा ट्रक कार पर पलटा, सर्जरी के बाद लौट रहे दंपती समेत 3 की मौत

रायपुर। राजधानी में रविवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। विधानसभा थाना क्षेत्र में धान से लदा ट्रक अचानक एक कार पर पलट गया। हादसे में कार सवार पति-पत्नी और ड्राइवर की मौत हो गई। दंपती अस्पताल से सर्जरी के बाद घर लौट रहे थे। पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान राजकुमार शर्मा (66) और उनकी पत्नी पद्मा शर्मा निवासी बलौदाबाजार के रूप में हुई है। कैब चालक का नाम प्रवीण बताया गया है। परिवार के बड़े बेटे ने पुणे से ऑनलाइन कैब बुक की थी, जिससे दंपती रायपुर से तिल्दा के लिए रवाना हुए थे। सर्जरी के बाद घर लौट रहे थे जानकारी के अनुसार राजकुमार शर्मा 10 फरवरी से रायपुर के एमएमआई अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी सफल बाइपास सर्जरी हुई थी। छुट्टी मिलने के बाद रविवार शाम वे पत्नी के साथ घर लौट रहे थे। जैसे ही कार पुरानी विधानसभा के पास नरदहा क्षेत्र पहुंची, हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डीपीएस स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर के कारण कार की रफ्तार धीमी थी। उसी दौरान पीछे से आ रहा धान लदा ट्रक ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। ब्रेकर पर झटका लगने से ट्रक का लॉकिंग हुक टूट गया और वह अनियंत्रित होकर कार पर पलट गया। ट्रक और धान की बोरियां एक साथ कार पर गिर गईं। आधे घंटे में दंपती ने तोड़ा दम हादसे में कैब चालक की मौके पर ही मौत हो गई। पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल होकर कार में फंसे रहे। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू कर घायलों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज शुरू होने के करीब आधे घंटे के भीतर दोनों ने दम तोड़ दिया। ट्रक ड्राइवर हिरासत में डीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि ट्रक पलौद के धान केंद्र से दोंदेकला कुटकी की ओर जा रहा था। ट्रक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि मृतक के बड़े बेटे पुणे की एक एमएनसी में कार्यरत हैं, जबकि छोटा बेटा मनीष शर्मा रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़ा है। परिवार में शोक की लहर है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े करता है।

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रायपुर में निजी स्कूलों का बढ़ता दायरा: 10 में से 6 छात्र प्राइवेट संस्थानों में नामांकित

रायपुर। जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर जारी 2026 की ताजा APAAR आईडी स्टेटस रिपोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। आंकड़ों के मुताबिक अब रायपुर में सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कहीं अधिक हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि जिले में कुल 5,40,869 छात्र नामांकित हैं। इनमें से 2,22,265 छात्र सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत हैं, जबकि 3,18,604 छात्र निजी स्कूलों में दर्ज हैं। यानी करीब 96 हजार से अधिक छात्र निजी स्कूलों में ज्यादा हैं। सरल शब्दों में कहें तो रायपुर में हर 10 में से लगभग 6 बच्चे प्राइवेट स्कूलों में और 4 बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। राजधानी ब्लॉक में सबसे ज्यादा अंतर रायपुर शहरी ब्लॉक के आंकड़े सबसे अधिक चौंकाने वाले हैं। यहां कुल 2,34,828 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से 1,73,825 छात्र निजी और मदरसा स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जबकि केवल 61,003 छात्र सरकारी और एडेड स्कूलों में हैं। इसका अर्थ है कि राजधानी क्षेत्र में लगभग 70 से 80 प्रतिशत छात्र निजी संस्थानों की ओर रुख कर चुके हैं। धरसींवा जैसे औद्योगिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों की पकड़ मजबूत नजर आती है। ब्लॉकवार स्थिति सरकारी स्कूल अपेक्षाकृत मजबूत निजी स्कूलों का दबदबा यह ट्रेंड दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूल अब भी टिके हुए हैं, जबकि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में निजी स्कूलों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। APAAR रिपोर्ट क्या है? APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) केंद्र सरकार की “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल का हिस्सा है। इसके तहत हर छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाती है, जो आधार सत्यापन से जुड़ी होती है। नामांकन, आधार वैलिडेशन और आईडी जनरेशन का पूरा डेटा डिजिटल डैशबोर्ड पर दर्ज किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार रायपुर जिले में 95.11% छात्रों की APAAR आईडी बन चुकी है, जो डिजिटल कवरेज के लिहाज से बेहतर स्थिति दर्शाती है। विशेषज्ञों की राय शिक्षाविदों का मानना है कि निजी स्कूलों में बढ़ती संख्या के पीछे कई सामाजिक और संरचनात्मक कारण हैं। अभिभावकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि निजी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी वातावरण बेहतर मिलता है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अधोसंरचना की चुनौतियां और बार-बार तबादलों जैसी समस्याएं पढ़ाई की निरंतरता को प्रभावित करती हैं। आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं? APAAR रिपोर्ट के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि रायपुर में शिक्षा का संतुलन अब निजी संस्थानों की ओर झुक चुका है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाएं और अभिभावकों का विश्वास कैसे मजबूत किया जाए, ताकि नामांकन का अंतर कम हो सके।

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