April 2026

शराब के नशे में दूल्हा पहुंचा बारात, दुल्हन ने तोड़ी शादी; बवाल के बीच हर्जाने को लेकर विवाद

छत्तीसगढ़ के Bilaspur जिले में एक शादी उस वक्त टूट गई जब दूल्हा नशे की हालत में बारात लेकर पहुंचा। Sirgitti थाना क्षेत्र से जुड़ा यह मामला Kasdol का है, जहां दुल्हन ने नशे में धुत दूल्हे से शादी करने से साफ इनकार कर दिया। जानकारी के मुताबिक, कोरमी निवासी राजू मांडले की शादी कसडोल की सुनीता से तय हुई थी। तय तारीख 27 अप्रैल को दूल्हा अपने परिजनों और दोस्तों के साथ बारात लेकर दुल्हन के घर पहुंचा। शुरुआत में माहौल सामान्य था और बाराती डीजे पर नाचते-गाते पहुंचे। लेकिन जैसे ही द्वार-चार की रस्म के लिए दूल्हे को गाड़ी से उतारा गया, वह नशे में लड़खड़ाने लगा। उसकी हालत देखकर लड़की पक्ष हैरान रह गया और तुरंत रस्में रोक दी गईं। जब यह बात दुल्हन तक पहुंची, तो उसने बिना देर किए शादी से इनकार कर दिया और कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ जीवन नहीं बिता सकती। दुल्हन के इस फैसले का परिवार ने भी समर्थन किया, जिसके बाद शादी वहीं रद्द कर दी गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और विवाद शुरू हो गया। लड़के पक्ष का आरोप है कि दूल्हे, उसके पिता और कुछ रिश्तेदारों को रोककर रखा गया और शादी में हुए खर्च की भरपाई की मांग की गई। बताया जा रहा है कि पहले 20 लाख रुपए की मांग की गई, बाद में बातचीत के दौरान इसे घटाकर 7 लाख रुपए तक लाया गया। वहीं लड़की पक्ष का कहना है कि उन्होंने किसी को बंधक नहीं बनाया, बल्कि सामाजिक बैठक के जरिए खर्च की भरपाई को लेकर बातचीत चल रही थी। घटना की जानकारी मिलने पर कसडोल पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, किसी को बंधक नहीं बनाया गया था और लोग वहीं रुके हुए थे। सिरगिट्टी थाना प्रभारी ने बताया कि मामला उनके क्षेत्र का नहीं होने के कारण संबंधित थाने को सूचित कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बीच समझाइश कर रही है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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गुवाहाटी में हिरासत में रायपुर पुलिस टीम, 24 घंटे बाद रिहा; डिजिटल अरेस्ट केस में पैसों के लेन-देन के आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से गई पुलिस टीम को असम की राजधानी Guwahati में हिरासत में लिए जाने की घटना ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी। यह मामला टिकरापारा थाने में दर्ज डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें करीब 17.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी हुई थी। जानकारी के अनुसार, इस केस में आरोपियों की तलाश में रायपुर पुलिस की टीम Raipur से गुवाहाटी पहुंची थी। टीम में थाना प्रभारी रविंद्र यादव सहित चार पुलिसकर्मी शामिल थे। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान टीम ने कुछ आरोपियों को पकड़ने के बाद कथित रूप से पैसों के बदले दो अन्य संदिग्धों को छोड़ दिया। इसी आरोप के आधार पर असम पुलिस ने रायपुर पुलिस टीम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। कार्रवाई के दौरान करीब 2.50 लाख रुपए भी जब्त किए गए, जिन्हें स्थानीय पुलिस ने संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा बताया है। वहीं, जिन आरोपियों को छोड़े जाने का दावा किया गया, उनकी शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज की गई। हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि यह रकम ठगी के केस में रिकवरी का हिस्सा थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के दौरान ठगी गई राशि वापस ली जा रही थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसे रिश्वत का मामला बताकर विरोध किया और पुलिस को सूचना दे दी। पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई। वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद करीब 24 घंटे की पूछताछ के पश्चात असम पुलिस ने रायपुर पुलिस टीम को छोड़ दिया। इसके बाद टीम वापस छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गई। यह मामला टिकरापारा क्षेत्र के एक निवासी शरद कुमार से जुड़ा है, जिन्हें वीडियो कॉल के जरिए खुद को सरकारी अधिकारी बताने वाले ठग ने डराकर बैंक डिटेल हासिल कर ली थी। आरोपी ने अलग-अलग किश्तों में करीब 17 लाख 15 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए थे। जब पीड़ित को रकम वापस नहीं मिली, तब उसने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। फिलहाल इस मामले की जांच दोनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने स्तर पर कर रही है और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने का इंतजार है।

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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर जंगल उजाड़, 1 लाख पेड़ों की कटाई और 265 एकड़ पर अवैध कब्जा उजागर

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बड़े स्तर पर वन विनाश का मामला सामने आया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों और ड्रोन सर्वे के जरिए खुलासा हुआ कि यहां करीब 1 लाख पेड़ों को काट दिया गया और लगभग 265 एकड़ (करीब 106 हेक्टेयर) वन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया। वन विभाग की जांच में सामने आया कि पिछले 15 वर्षों से इस क्षेत्र में लगातार जंगल की कटाई हो रही थी। हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन इमेज में साफ दिखा कि कई जगहों पर पेड़ काटकर खेत बनाए गए हैं और ठूंठ अभी भी मौजूद हैं। सैटेलाइट डेटा (2006 से 2022) से यह भी पता चला कि जहां पहले प्रति हेक्टेयर करीब 1000 पेड़ होते थे, अब वहां केवल 25 से 50 पेड़ ही रह गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, अतिक्रमणकारियों ने पेड़ों को नष्ट करने के लिए ‘गर्डलिंग’ तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूख जाते हैं और जमीन खेती के लिए तैयार हो जाती है। हैरानी की बात यह है कि कई लोगों के पास पहले से राजस्व भूमि होने के बावजूद उन्होंने वन क्षेत्र पर कब्जा किया। मामले में वन विभाग ने अब तक 166 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, जिनमें से 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। सीतानदी कोर रेंज के घुरवाड़ इलाके में हाल ही में कार्रवाई करते हुए इन लोगों को पकड़ा गया, जो जंगल की जमीन पर कब्जा कर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा रहे थे। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए विभाग डिजिटल सबूतों का सहारा ले रहा है और पुराने सैटेलाइट डेटा के आधार पर कार्रवाई तेज की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई होगी, जिसमें 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत भी जेल और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई की जाएगी। पिछले तीन वर्षों में विभाग ने करीब 850 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है और 600 से अधिक शिकारी, तस्कर और अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार किया है। अब खाली कराई गई जमीन पर जल संरक्षण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण की योजना बनाई जा रही है।

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बोरझारा की अऊम इंजिनियरिंग में श्रम विवाद गहराया, 30 अप्रैल को उग्र धरना-प्रदर्शन की चेतावनी

रायपुर के बोरझारा स्थित अऊम इंजिनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में श्रमिकों के साथ कथित अन्याय का मामला सामने आया है, जिसने अब बड़ा रूप ले लिया है। दो कर्मचारियों—कृष्ण कुमार कुजूर और किशोर मिर्धा—ने फैक्ट्री प्रबंधन पर बिना कारण बताए नौकरी से निकालने और बकाया भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, कृष्ण कुमार कुजूर लगभग 6 महीने से क्वालिटी इंचार्ज और किशोर मिर्धा करीब 1 महीने से सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे। दोनों का दावा है कि उनके काम को लेकर कभी कोई शिकायत नहीं की गई। इसके बावजूद 22 अप्रैल 2026 को अचानक बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के उन्हें काम से निकाल दिया गया और फैक्ट्री गेट बंद कर दिया गया। आरोप यह भी है कि काम के दौरान उनका नाम ESIC और PF (PAF) में दर्ज नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का उल्लंघन है। कर्मचारियों का कहना है कि जब उन्होंने अपने बकाया वेतन और हिसाब-किताब की मांग की, तो प्रबंधन ने भुगतान करने से इनकार कर दिया और धमकी भरे लहजे में बात की। इस मामले में आवेदक बेदराम साहू ने बताया कि उन्होंने दो बार फोन के माध्यम से फैक्ट्री प्रबंधन से बातचीत कर मजदूरों का भुगतान कराने का प्रयास किया, लेकिन यश गुप्ता नामक व्यक्ति ने गलत नियमों का हवाला देते हुए भुगतान से साफ मना कर दिया। श्रम कानूनों के तहत अब किशोर मिर्धा को दो महीने का नोटिस पेमेंट और कृष्ण कुमार कुजूर को एक महीने का नोटिस पेमेंट मिलना चाहिए। कुल मिलाकर कृष्ण कुजूर के 34,660 रुपये और किशोर मिर्धा के 43,200 रुपये बकाया बताए गए हैं। आवेदक ने फैक्ट्री प्रबंधन को दो दिन के भीतर भुगतान करने की चेतावनी दी है। अन्यथा 30 अप्रैल 2026 को फैक्ट्री गेट के सामने मजदूर परिवार और स्थानीय लोगों के साथ धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा। साथ ही, इस दौरान होने वाली किसी भी स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी।

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रायगढ़ में तेज आंधी से बिजली व्यवस्था ठप, खंभे गिरे और तारों में फंसे बैनर; सुबह तक बहाल हुई सप्लाई

छत्तीसगढ़ के Raigarh में सोमवार रात अचानक बदले मौसम ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। तेज हवाओं और आंधी के चलते शहर और आसपास के इलाकों में बिजली व्यवस्था बुरी तरह बाधित हो गई। कई जगह बिजली के खंभे गिर गए, जबकि कुछ स्थानों पर उड़ते हुए बैनर और फ्लैक्स बिजली तारों में फंस गए, जिससे सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई। देर रात तक लोगों को अंधेरे और परेशानी का सामना करना पड़ा। कोड़ातराई इलाके में हालात सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां तेज हवाओं के कारण 3 से 4 बिजली के खंभे गिर गए और पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद हो गई। सूचना मिलते ही बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रात में ही मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। वहीं कोतरा रोड क्षेत्र में फ्लैक्स उड़कर तारों में फंसने से कई घंटों तक बिजली बाधित रही। इसके अलावा कोतरा रोड, श्याम टॉकीज रोड, स्टेडियम के आसपास, सर्किट हाउस मरीन ड्राइव और किरोड़ीमल जैसे इलाकों में पेड़ों की डालियां टूटकर बिजली लाइनों पर गिर गईं, जिससे शहर के बड़े हिस्से में बिजली सप्लाई प्रभावित हुई। हवाएं थमने के बाद विभाग ने तेजी से काम करते हुए सुबह तक अधिकांश क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था बहाल कर दी। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर में जगह-जगह लगाए गए बैनर और फ्लैक्स भी समस्या का बड़ा कारण बने। तेज हवाओं में ये उड़कर बिजली तारों में उलझ जाते हैं, जिससे न सिर्फ सप्लाई बाधित होती है, बल्कि मरम्मत कार्य में भी दिक्कत आती है। अधीक्षण यंत्री गुंजन शर्मा के मुताबिक, कोड़ातराई, कुसमुरा और खरसिया क्षेत्रों में आंधी का असर ज्यादा देखा गया। हालांकि विभाग की तत्परता से सभी प्रभावित स्थानों पर सुधार कार्य कर लिया गया है और अब स्थिति सामान्य हो चुकी है।

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बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर फटा तिरंगा लहराया, रेलवे की लापरवाही पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के Bilaspur स्थित Bilaspur Railway Station में राष्ट्र सम्मान से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्टेशन के वीआईपी गेट नंबर-2 के बाहर लगाया गया विशाल तिरंगा फटा हुआ और गंदगी से भरा हुआ लहराता नजर आया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। देश की आन-बान और शान माने जाने वाले राष्ट्रीय ध्वज की इस स्थिति को लेकर लोगों ने इसे अपमानजनक बताया है। यह तिरंगा आमतौर पर गौरव और सम्मान का प्रतीक होता है, लेकिन मौजूदा हालात में इसकी स्थिति बदहाल दिखाई दी। झंडे का कपड़ा जगह-जगह से फटा हुआ था और उस पर धूल-मिट्टी भी जमी हुई थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि इतनी महत्वपूर्ण जगह पर लगे राष्ट्रीय ध्वज की देखरेख में आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। इस मामले ने South East Central Railway के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर रेलवे “अमृत स्टेशन योजना” जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के तहत आधुनिक सुविधाओं के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय प्रतीकों की इस तरह अनदेखी चिंता का विषय बन गई है। नियमों के अनुसार, Flag Code of India में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि तिरंगे को हमेशा साफ और सम्मानजनक स्थिति में ही फहराया जाना चाहिए। फटा या गंदा झंडा सार्वजनिक स्थान पर लगाना नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त झंडे को सम्मानपूर्वक नष्ट करने की भी प्रक्रिया निर्धारित है—या तो उसे एकांत में जलाया जाए या जमीन में दफन किया जाए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही तिरंगे को तुरंत बदलने और भविष्य में ऐसी लापरवाही न होने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की जा रही है।

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भीषण गर्मी में पशुओं की सुरक्षा के लिए एडवाइजरी जारी, 30°C से ऊपर पैदल परिवहन पर रोक

छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए Chhattisgarh State Animal Welfare Board ने पशुपालकों और आम लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि इस मौसम में पशु हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्म सतहों से जलने जैसी समस्याओं के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं, इसलिए उनकी विशेष देखभाल जरूरी है। जारी दिशा-निर्देशों में पशुओं के लिए छाया की उचित व्यवस्था करने और उन्हें दिनभर साफ व ताजा पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही चौड़े मुंह वाले मजबूत बर्तनों में पानी रखने की सलाह दी गई है, ताकि पशु आसानी से पानी पी सकें और बर्तन पलटने की संभावना कम रहे। बोर्ड ने पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करने को कहा है। निर्देशों के मुताबिक, 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में पशुओं के पैदल परिवहन पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद भी इस तरह के परिवहन से बचने को कहा गया है, ताकि पशुओं को अत्यधिक गर्मी से राहत मिल सके। एडवाइजरी में पशुपालकों को हीट स्ट्रोक के लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की भी सलाह दी गई है। यदि किसी पशु में तेज सांस चलना, अत्यधिक सुस्ती, लार गिरना, दिल की धड़कन बढ़ना या बेहोशी जैसे संकेत दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क कर इलाज कराना जरूरी है। बोर्ड ने अपील की है कि गर्मी के इस दौर में पशुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी या नुकसान से बचाया जा सके।

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CSR फंड में गड़बड़ी का आरोप: BSP के 2 करोड़ में से 40 लाख से खरीदे एसी, मरीजों को नहीं मिला लाभ

छत्तीसगढ़ के Durg जिले में सीएसआर फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। Bhilai Steel Plant (बीएसपी) ने कोरोना की तीसरी लहर के दौरान जिला अस्पताल को बेहतर सुविधाएं देने के लिए 200 लाख रुपए की राशि दी थी, लेकिन इस फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि इस राशि में से 40 लाख रुपए खर्च कर एयर कंडीशनर खरीदे गए, जो मरीजों के वार्ड की बजाय अधिकारियों और डॉक्टरों के कमरों में लगाए गए। जानकारी के मुताबिक, 5 अप्रैल 2023 को बीएसपी ने यह राशि कलेक्टर के सीएसआर खाते में ट्रांसफर की थी। ऑडिट के दौरान जब खर्च का हिसाब मांगा गया, तो स्वास्थ्य विभाग केवल 16.49 लाख रुपए का ही विवरण दे पाया, जिसमें से महज 8.24 लाख रुपए का उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया। यानी करीब दो करोड़ रुपए के फंड का पूरा हिसाब अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि 40 लाख रुपए से एसी खरीदे गए। जांच में सामने आया कि जिला अस्पताल के न्यू ओपीडी ब्लॉक में अधिकांश डॉक्टरों के कक्ष, प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के कमरों में एसी लगाए गए हैं, जबकि मरीजों के वार्ड और वेटिंग एरिया में ऐसी सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। केवल बर्न वार्ड में कुछ पुराने एसी लगाए जाने की बात सामने आई है। पिछले तीन वर्षों में बीएसपी द्वारा लगातार पत्राचार के बावजूद पूरा विवरण नहीं दिया गया। 8 जनवरी 2026 को भेजे गए 11वें पत्र में खर्च, बिल, फोटो और वीडियो मांगे गए, लेकिन अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। इतना ही नहीं, सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी पर भी विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। इस पूरे मामले ने सीएसआर फंड के उपयोग और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे फंड के उपयोग का पूरा हिसाब और उपयोगिता प्रमाण-पत्र देना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होती है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और क्या जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाती है।

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दुर्ग में सरकारी कर्मचारियों के लिए हेलमेट-सीट बेल्ट अनिवार्य, नियम तोड़ने पर कार्रवाई के निर्देश

छत्तीसगढ़ के Durg जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी Abhijit Singh ने आदेश जारी करते हुए सभी शासकीय अधिकारी और कर्मचारियों के लिए वाहन चलाते समय हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जा रहा है। जारी निर्देशों के मुताबिक, दोपहिया वाहन चलाने वाले कर्मचारियों को हर स्थिति में हेलमेट पहनना होगा, जबकि चारपहिया वाहन चलाने वालों के लिए सीट बेल्ट लगाना जरूरी कर दिया गया है। कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। दुर्ग-भिलाई में ट्रैफिक पुलिस नियमित रूप से चौक-चौराहों पर चालान काट रही है, लेकिन इसके बावजूद कई लोग बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के वाहन चलाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि केवल चालान काटने से ज्यादा जरूरी लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, ताकि वे स्वेच्छा से नियमों का पालन करें। प्रशासन को उम्मीद है कि सरकारी कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्यता लागू होने के बाद आम जनता भी सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति अधिक गंभीर होगी और इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

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छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट कल 2:30 बजे जारी: 10वीं-12वीं के 5.66 लाख छात्रों का इंतजार खत्म

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (Chhattisgarh Board of Secondary Education) कल दोपहर 2:30 बजे हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) परीक्षा के नतीजे घोषित करेगा। इसकी जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री Gajendra Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए दी। इस साल करीब 5.66 लाख छात्र-छात्राओं ने बोर्ड परीक्षा दी थी, जिनकी मेहनत का परिणाम अब सामने आने वाला है। मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्र अपना रोल नंबर दर्ज कर आसानी से रिजल्ट देख सकेंगे। इस बार 10वीं में 3,20,535 और 12वीं में 2,45,785 परीक्षार्थी शामिल हुए। आंकड़ों के मुताबिक, 10वीं के छात्रों की संख्या 12वीं से लगभग 31 प्रतिशत अधिक रही, जो हर साल की तरह इस बार भी ट्रेंड को दिखाता है। पिछले साल के मुकाबले इस बार कुल परीक्षार्थियों की संख्या लगभग स्थिर रही है, हालांकि 12वीं में छात्रों की संख्या में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं 75% उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण करीब 1400 छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। रिजल्ट का इंतजार सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और स्कूलों के लिए भी बेहद अहम होता है। 10वीं के छात्र जहां आगे के विषय और स्ट्रीम का चयन करेंगे, वहीं 12वीं के छात्र कॉलेज एडमिशन और करियर की दिशा तय करेंगे। पिछले साल की तरह इस बार भी सभी की नजर पास प्रतिशत, मेरिट लिस्ट और टॉपर्स पर टिकी हुई है। मंडल ने छात्रों से अपील की है कि वे रिजल्ट को सकारात्मक रूप से लें। अच्छे अंक आने पर आगे की तैयारी में जुटें, और यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक न हो तो निराश होने के बजाय नए अवसरों पर ध्यान दें।

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