April 2026

दुर्ग में बड़ा फर्जीवाड़ा: निलंबित शिक्षक ने खुद की बहाली का फर्जी आदेश जारी किया, जांच शुरू

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां निलंबित शिक्षक ने कथित रूप से फर्जी ई-मेल के जरिए अपनी बहाली का आदेश जारी कर दिया। आरोपी ने सामान्य प्रशासन विभाग के नकली लेटरहेड का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश तैयार किया और अधिकारियों को भेज दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब आदेश की भाषा और शब्दावली पर अधिकारियों को संदेह हुआ। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि ई-मेल में इस्तेमाल किए गए शब्द सामान्य शासकीय आदेशों से मेल नहीं खाते थे। यह मामला District Education Office Durg के संज्ञान में आने के बाद तुरंत जांच शुरू की गई। अधिकारियों के अनुसार यदि यह आदेश फर्जी साबित होता है तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा और केस पुलिस को सौंप दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक शेषनारायण साहू पहले प्राथमिक शाला खुर्सीडीह में पदस्थ था। उन पर कार्य में लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन न करने और शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग न देने जैसे आरोप लगे थे। जांच के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत गंभीर कदाचार का दोषी पाया गया और 21 जनवरी 2026 को निलंबित कर दिया गया था। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, छुरिया (जिला राजनांदगांव) निर्धारित किया गया था। मामले में नया मोड़ तब आया जब 7 अप्रैल 2026 को ई-मेल के माध्यम से एक कथित बहाली आदेश सामने आया, जिसमें दावा किया गया कि विभागीय जांच के बाद उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया है और उन्हें पुनः शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला में पदस्थ किया गया है। इस ई-मेल ने विभाग में कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर दी, लेकिन बाद में जांच में इसकी वैधता पर सवाल उठे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि यह ई-मेल शिक्षक के निजी आईडी से भेजा गया हो सकता है, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और मजबूत हो गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी बहाली आदेश केवल सक्षम प्राधिकरण द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाते हैं, ऐसे में यह ई-मेल आदेश पूरी तरह नियमों के विपरीत है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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मस्तूरी गोलीकांड: फरार कांग्रेस नेता के घर आधी रात पुलिस का सर्च ऑपरेशन, नहीं मिला आरोपी

बिलासपुर के मस्तूरी में हुए गोलीकांड मामले में फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। इसी क्रम में पुलिस ने कांग्रेस नेता और इनामी आरोपी नागेंद्र राय के ठिकाने पर आधी रात को सर्च ऑपरेशन चलाया। पुलिस की टीम रात करीब एक बजे तोरवा क्षेत्र के लालखदान-महमंद स्थित उसके घर पहुंची। कार्रवाई के दौरान डॉग स्क्वायड और हथियारबंद जवान भी मौजूद थे। टीम ने घर के हर कमरे की बारीकी से तलाशी ली, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। छापेमारी के दौरान नागेंद्र राय के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और बहसबाजी भी की। परिजनों ने देर रात की गई कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए पुलिस को रोकने की कोशिश की। इसके चलते मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। करीब ढाई घंटे तक चले इस सर्च ऑपरेशन के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल सका। पुलिस का कहना है कि इस दौरान परिजनों द्वारा शासकीय कार्य में बाधा भी डाली गई, जिसके चलते उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस मामले में फरार आरोपी नागेंद्र राय और टाकेश्वर पाटले पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी अपने घर पर छिपा हो सकता है, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि वह वहां नहीं मिला, जिससे आशंका जताई जा रही है कि आरोपी राज्य से बाहर भी हो सकता है। यह मामला 29 अक्टूबर को मस्तूरी बस स्टैंड स्थित एक ऑफिस में हुई फायरिंग से जुड़ा है, जहां नकाबपोश हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी। जवाबी कार्रवाई में भी फायरिंग हुई, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए थे। जांच में यह मामला आपसी रंजिश और वर्चस्व से जुड़ा पाया गया, जिसमें कई लोगों की भूमिका सामने आई है। अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता अब भी फरार हैं।

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छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट के दो मामले वायरल: कोरबा और बिलासपुर में मामूली विवाद पर हिंसा

छत्तीसगढ़ में सड़क पर मारपीट की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। एक मामला कोरबा का है, जबकि दूसरा बिलासपुर का बताया जा रहा है। दोनों ही घटनाओं में मामूली विवाद के बाद जमकर लात-घूंसे चले। कोरबा जिले के सिविल लाइन रामपुर थाना क्षेत्र में 11 अप्रैल की रात निहारिका स्थित अंग्रेजी शराब दुकान के बाहर यह घटना हुई। शराब खरीदने के दौरान भीड़ में हाथ टकराने को लेकर दो पक्षों में बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इस दौरान एक युवक ने सुरक्षा कर्मी के डंडे से हमला किया, जिसके बाद दूसरे पक्ष ने भी उसे पकड़कर पिटाई कर दी। कुछ देर तक मौके पर हंगामा चलता रहा, बाद में मामला शांत हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों के व्यवहार को देखते हुए उनके खिलाफ कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। दूसरी घटना बिलासपुर के तोरवा थाना क्षेत्र की है। यहां सिरगिट्टी के गणेश नगर निवासी शेख इकबाल रात में रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल से खाना लेकर लौट रहा था। इसी दौरान लक्की दास और पंकज से उसका विवाद हो गया। विवाद के बाद आरोपियों ने अपने साथियों को बुला लिया और युवक को घेरकर मारपीट की, जिससे वह घायल हो गया। पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक को जमीन पर गिराकर लात-घूंसे से पीटते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित होटल देर रात तक खुला रहता है, जिससे वहां भीड़ जमा रहती है और अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं।

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प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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बिलासपुर में लॉ छात्रा ने की आत्महत्या: पिता की फटकार और शादी के दबाव के बाद उठाया कदम

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में Guru Ghasidas Central University की एक छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना कोनी थाना क्षेत्र की है। मृतका की पहचान दृष्टि गुप्ता (20) के रूप में हुई है, जो बीए एलएलबी सेकंड ईयर की छात्रा थी और रायगढ़ की रहने वाली थी। जानकारी के अनुसार, दृष्टि पिछले दो साल से कोनी स्थित रिवर व्यू कॉलोनी में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। सोमवार को कॉलेज से लौटने के बाद उसकी परिजनों से बातचीत हुई थी। इसके बाद वह दोस्तों के साथ बाहर गई और रात में उनके साथ समय बिताया। मंगलवार सुबह घर लौटने के बाद उसके पिता से उसकी बात हुई, जिसमें पढ़ाई को लेकर उसे डांट भी पड़ी थी। इसके बाद वह अपने कमरे में चली गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर आसपास के छात्रों ने उसे आवाज दी, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां छात्रा का शव पंखे से लटका मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि छात्रा के परिवार की ओर से उस पर शादी को लेकर दबाव बनाया जा रहा था और वह इसका विरोध कर रही थी। साथ ही परिजनों ने बताया कि उसका स्वभाव गुस्सैल था और पढ़ाई को लेकर फटकार के बाद वह तनाव में आ गई थी। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और मर्ग कायम कर आगे की कार्रवाई जारी है।

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सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम लागू, लेकिन व्यवस्था अधूरी: 4 रंग के डस्टबिन नियम पर अमल नहीं

छत्तीसगढ़ में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारी अधूरी दिखाई दे रही है। नए नियम के तहत अब घरों, दुकानों और कार्यालयों से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग डस्टबिन में रखना अनिवार्य किया गया है। इस व्यवस्था के तहत गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और विशेष/सैनिटरी कचरे को अलग-अलग रंग के डिब्बों में संग्रहित करना होगा। नियम का पालन न करने पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, लेकिन अब तक जुर्माने की राशि तय नहीं की गई है। नए नियम के अनुसार गीले कचरे के लिए हरे रंग का डस्टबिन, सूखे कचरे के लिए नीला, खतरनाक कचरे के लिए लाल और विशेष कचरे के लिए काला डिब्बा निर्धारित किया गया है। गीले कचरे में भोजन के अवशेष, सब्जी-फल के छिलके और बगीचे का कचरा शामिल होता है, जिससे कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। सूखे कचरे में प्लास्टिक, कागज, धातु और कांच जैसी सामग्री आती है, जिन्हें रीसाइक्लिंग के लिए अलग रखा जाता है। खतरनाक कचरे में बैटरी, केमिकल, पेंट, डायपर और बल्ब जैसे सामान शामिल हैं, जबकि विशेष कचरे में मास्क, ग्लव्स और मेडिकल वेस्ट जैसी सामग्री आती है। हालांकि नियम कागजों में लागू हो चुके हैं, लेकिन शहरों में इसकी तैयारी पूरी नहीं हो सकी है। रायपुर में करीब 250 कचरा गाड़ियों में से केवल 100 गाड़ियों में ही चार कंपार्टमेंट की व्यवस्था है, जबकि बाकी अभी भी दो कंपार्टमेंट वाली ही हैं। अन्य जिलों में स्थिति और भी कमजोर बताई जा रही है। कई नगरीय निकायों में न तो नई गाड़ियां पूरी तरह उपलब्ध हैं और न ही कचरा संग्रहण प्रणाली में बदलाव किया गया है। इस कारण पुराने तरीके से ही कचरा उठाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, संसाधनों की कमी और जुर्माने की स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण सख्ती नहीं हो पा रही है। राज्य में 27 जनवरी को अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन उसके बाद भी आवश्यक तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। नगरीय प्रशासन विभाग का कहना है कि सभी निकायों को चार कंपार्टमेंट वाली गाड़ियां अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए गए हैं और जुर्माने की राशि तय करने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी।

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प्रदेश में खरीफ सीजन से फार्मर आईडी अनिवार्य: बिना आईडी नहीं मिलेगा यूरिया और अन्य खाद

प्रदेश में आने वाले खरीफ सीजन से खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे खाद केवल उन्हीं किसानों को मिलेंगे, जिनके पास फार्मर आईडी होगी। नई व्यवस्था के तहत Urea Fertilizer सहित सभी प्रमुख खाद समितियों से केवल फार्मर आईडी दिखाने पर ही उपलब्ध होंगे। जिन किसानों के पास आईडी नहीं होगी, उन्हें खाद नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, निजी दुकानों से खाद खरीदने पर भी किसान की जानकारी जैसे नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और अनियमितता तथा कालाबाजारी को रोकना है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में खाद की उपलब्धता को लेकर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए यह व्यवस्था पहले से लागू की जा रही है ताकि वास्तविक किसानों तक समय पर खाद पहुंच सके। यदि किसान फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं, तो उन्हें न केवल खाद बल्कि अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित होना पड़ सकता है। प्रदेश में इस समय बड़ी संख्या में किसान अभी भी एग्री-टेक रजिस्ट्रेशन से नहीं जुड़े हैं, जिन्हें जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी गई है। यह नियम 2026-27 के खरीफ सीजन से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।

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रायपुर में अग्रवाल महिला मंडल की पहल: वाटर कूलर लगाए, दिव्यांग बालिका को व्हीलचेयर, UPSC टॉपर का सम्मान

रायपुर में सामाजिक सेवा की मिसाल पेश करते हुए Agarwal Mahila Mandal ने भीषण गर्मी के बीच जरूरतमंदों की मदद के लिए कई पहल की हैं। मंडल की अध्यक्ष ममता अग्रवाल के नेतृत्व में शहर में दो स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। इनमें से एक वाटर कूलर कोर्ट परिसर में स्थापित किया गया, जिसे सुनील अग्रवाल ने अपने माता-पिता की स्मृति में भेंट किया। वहीं दूसरा वाटर कूलर सड्डू स्थित Maa Baglamukhi Temple परिसर में लगाया गया, जहां श्रद्धालुओं और राहगीरों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। दोनों वाटर कूलरों का उद्घाटन अग्रवाल सभा के अध्यक्ष विजय अग्रवाल द्वारा किया गया। इसके अलावा मंडल ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए लाभांडी के एक शासकीय स्कूल में पढ़ने वाली एक जरूरतमंद दिव्यांग बालिका को व्हीलचेयर प्रदान की। यह सहायता नीरू अग्रवाल के सहयोग से दी गई, जिससे छात्रा की पढ़ाई और दैनिक जीवन में सहूलियत मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान कोषाध्यक्ष प्रेम अग्रवाल, कार्यकारिणी सदस्य सुभाष अग्रवाल सहित महिला मंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। इसी अवसर पर मंडल ने यूपीएससी परीक्षा में देशभर में 35वां स्थान हासिल करने वाली Vaibhavi Agrawal का उनके निवास पर जाकर सम्मान किया। मंडल की टीम ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस पूरे आयोजन की जानकारी मीडिया प्रभारी ज्योति अग्रवाल ने दी।

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रायपुर में रील बनाना पड़ा महंगा पड़ सकता है: स्पीडोमीटर के सामने दौड़ने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी

Raipur Police ने शहर में सड़कों पर लगे स्पीडोमीटर के सामने रील बनाने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी दी है। हाल के दिनों में कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें लोग सड़क पर दौड़ लगाकर अपनी स्पीड मापते हुए सोशल मीडिया पर रील पोस्ट कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि ये स्पीडोमीटर मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने और सड़क हादसों को रोकने के लिए लगाए गए हैं। इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन सकती हैं। पुलिस ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए कहा कि “रील के चक्कर में अपनी असली जिंदगी को जोखिम में न डालें। बीच सड़क पर दौड़ना खुद के साथ दूसरों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ है।” छत्तीसगढ़ में बढ़ते सड़क हादसों को ध्यान में रखते हुए परिवहन विभाग ने पहली बार लेडार आधारित आधुनिक स्पीड कैमरे लगाए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 1.90 करोड़ रुपए की लागत से 7 कैमरे स्थापित किए गए हैं। ये कैमरे रायपुर के मरीन ड्राइव, वीआईपी रोड और मंदिर हसौद क्षेत्र के अलावा बिलासपुर बायपास, अंबिकापुर, जगदलपुर और धमतरी के कुरूद इलाके में लगाए गए हैं। इन स्थानों का चयन ट्रैफिक दबाव और दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर किया गया है। वाई-फाई से जुड़े ये कैमरे 100 मीटर दूर से भी वाहनों की गति को सटीक रूप से माप सकते हैं। दो लेन सड़कों पर एक साथ कई वाहनों की निगरानी कर उनकी जानकारी रिकॉर्ड की जा सकती है। यदि कोई वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक चलता है, तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट स्कैन कर फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करता है। इसके आधार पर ऑटोमैटिक ई-चालान जारी होता है, जो व्हाट्सएप और ईमेल के माध्यम से वाहन मालिक तक पहुंचता है। इन कैमरों में नाइट विजन की सुविधा भी है, जिससे रात में और खराब मौसम में भी निगरानी संभव है। फिलहाल इनकी टेस्टिंग चल रही है, लेकिन जल्द ही इन्हें पूरी तरह लागू कर सख्ती से नियमों का पालन कराया जाएगा।

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सीबीएसई का बड़ा कदम: कक्षा 3 से 8 तक AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग कोर्स शुरू

Central Board of Secondary Education ने स्कूली शिक्षा को आधुनिक और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (CT&AI) नाम से नया कोर्स शुरू किया है। इस पहल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के छात्रों को एआई के प्रति जागरूक और सक्षम बनाना है। नए सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में चल रहे पुराने एआई कोर्स को बंद कर दिया जाएगा। वहीं 9वीं से 12वीं तक के लिए National Council of Educational Research and Training विशेष मॉड्यूल तैयार कर रहा है। सीबीएसई के अनुसार, यह नया कोर्स छात्रों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा। इसके लिए बनाई गई रिसोर्स बुक्स एनसीईआरटी की गणित की किताबों के साथ जुड़ी होंगी। गणित के हर अध्याय के साथ संबंधित एआई और कंप्यूटेशनल गतिविधियां कराई जाएंगी, जिससे छात्रों को अवधारणाएं बेहतर तरीके से समझ आएंगी। इस पाठ्यक्रम में रटने की बजाय समझ और सोच पर जोर दिया जाएगा। इसमें ऐसे प्रश्न और गतिविधियां शामिल होंगी, जो छात्रों की तार्किक क्षमता और समस्या समाधान कौशल को विकसित करेंगी। सीबीएसई ने छात्रों और शिक्षकों के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हैंडबुक्स भी जारी कर दी हैं और स्कूलों को इन्हें लागू करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों के लिए भी नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब पारंपरिक पढ़ाने के बजाय ‘फैसिलिटेटर’ की भूमिका पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों को सलाह दी गई है कि वे छात्रों को सीधे जवाब देने के बजाय उन्हें खुद सोचने और सीखने के लिए प्रेरित करें। कक्षा 9 से 12 के लिए तैयार किए जा रहे एनसीईआरटी मॉड्यूल 2026-27 सत्र से इंटरनल असेसमेंट का हिस्सा होंगे। हालांकि वर्तमान में 10वीं के छात्र पुराने पाठ्यक्रम के अनुसार ही अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे। इस नए कोर्स में साइबर सिक्योरिटी, बेसिक नेटवर्किंग, डेटा आधारित निर्णय, और एआई के नैतिक पहलुओं जैसे विषय शामिल होंगे। साथ ही पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए गेमिंग, वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।

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