March 2026

रायपुर में अतिक्रमण पर कार्रवाई: महोबा बाजार से टाटीबंध तक 30 ठेले हटाए, 15 अवैध दुकानें तोड़ी

राजधानी रायपुर में सड़क किनारे बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम ने सख्त अभियान चलाया है। Raipur Municipal Corporation की जोन-8 टीम ने महोबा बाजार चौक से टाटीबंध चौक और बिलासपुर मुख्य मार्ग तक कार्रवाई करते हुए करीब 30 अवैध ठेले और गुमटियों को हटाया। इसके अलावा सड़क किनारे बनी लगभग 15 अवैध दुकानों को भी तोड़ दिया गया। यह कार्रवाई निगम आयुक्त Vishwadeep के निर्देश पर की गई। अभियान का नेतृत्व जोन-8 की जोन कमिश्नर Rajeshwari Patel ने किया। कार्रवाई के दौरान कार्यपालन अभियंता अतुल चोपड़ा, सहायक अभियंता अमन चंद्राकर, अनुराग पाटकर, उप अभियंता लोचन चौहान, अबरार खान, नगर निवेश विभाग की टीम, टीम प्रहरी और पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, जोन-8 के वार्ड क्रमांक-21 शहीद भगत सिंह वार्ड और वार्ड क्रमांक-1 वीर सावरकर नगर में लंबे समय से सड़क किनारे अवैध ठेले, गुमटियां और अस्थायी दुकानें लगाई जा रही थीं। इससे सड़क संकरी हो रही थी और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अभियान के दौरान निरीक्षण में पाया गया कि कुछ लोगों ने सड़क किनारे टीन और त्रिपाल की मदद से स्थायी दुकानें बना ली थीं। इन्हें अवैध मानते हुए निगम की टीम ने मौके पर ही लगभग 15 दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई की। नगर निगम का कहना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती थी, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाकर सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि शहर में अतिक्रमण हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा। सड़क किनारे अवैध रूप से ठेले या दुकान लगाने वालों को पहले ही चेतावनी दी गई है। यदि इसके बाद भी नियमों का उल्लंघन किया गया तो सामान जब्त करने के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कमर्शियल गैस की कमी से रायपुर में 20 से ज्यादा रेस्टोरेंट बंद

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब रायपुर के होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 114 रुपए की बढ़ोतरी के साथ ही होटल और रेस्टोरेंट्स को मिलने वाली गैस सप्लाई पर रोक लगने से राजधानी में व्यापार प्रभावित हो रहा है। मंगलवार को राजधानी रायपुर में गैस सिलेंडर नहीं मिलने के कारण 20 से अधिक रेस्टोरेंट और कैफे बंद रहे। कारोबारियों का कहना है कि अगर अगले दो दिनों में गैस सप्लाई शुरू नहीं हुई तो और भी होटल व रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं। कई व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो उन्हें अस्थायी रूप से अपना कारोबार बंद करना पड़ेगा। दरअसल, राजधानी सहित प्रदेश के अधिकांश होटल, रेस्टोरेंट और कैफे की रसोई पूरी तरह एलपीजी गैस पर निर्भर है। इलेक्ट्रिक कुकिंग की व्यवस्था बहुत सीमित है, इसलिए गैस सप्लाई बंद होने पर स्टॉक खत्म होते ही किचन संचालन मुश्किल हो जाएगा। इसका असर आने वाले दिनों में केटरिंग व्यवसाय पर भी पड़ सकता है। छत्तीसगढ़ में मार्च और अप्रैल के दौरान शादियों के कई शुभ मुहूर्त हैं। ऐसे में यदि कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति बाधित रहती है तो शादी समारोहों और बड़े आयोजनों की कैटरिंग व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। छत्तीसगढ़ होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरनजीत सिंह होरा के मुताबिक रायपुर में 100 से अधिक बड़े होटल संचालित हैं और ज्यादातर के पास केवल 2 से 3 दिनों का ही एलपीजी स्टॉक बचा है। यदि जल्द ही सप्लाई शुरू नहीं हुई तो कई होटल बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं। वहीं छत्तीसगढ़ रेस्टोरेंट्स एंड कैफे एसोसिएशन के महासचिव मिक्की दत्ता ने बताया कि मंगलवार को राजधानी के करीब 20 रेस्टोरेंट और कैफे बंद रहे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि व्यापार संचालन के लिए कम से कम एक निश्चित कोटा तय किया जाए, ताकि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को राहत मिल सके। अगर स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो राजधानी में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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रायपुर में गन लाइसेंस की होगी सख्त जांच, सभी लाइसेंसी हथियारों का होगा भौतिक सत्यापन

राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद गन लाइसेंस को लेकर सख्ती बढ़ा दी गई है। पुलिस की अनुशंसा पर अब जिले में सभी लाइसेंसी हथियारों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। प्रशासन की ओर से यह पता लगाया जाएगा कि वर्तमान में कितने लोगों के पास वैध गन लाइसेंस है और उनके पास कितने हथियार मौजूद हैं। इस जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि चुनाव के समय कितने लाइसेंसी हथियार पुलिस के पास जमा कराए जाते हैं। साथ ही ऐसे लोगों की भी पहचान की जाएगी जिन्होंने अपने गन लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है, लेकिन उनके पास अभी भी हथियार मौजूद हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेशभर में करीब 13,242 लोगों को गन लाइसेंस जारी किए गए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा रायपुर जिले में 1,927 लाइसेंस धारक हैं। वर्ष 2025 में जिले में 85 से अधिक लोगों ने नए गन लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन इनमें से केवल 25 लोगों को ही लाइसेंस जारी किया गया। गन लाइसेंस रखने वालों में नेता, ठेकेदार, सुरक्षा गार्ड, निशानेबाज खिलाड़ी और कारोबारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। हर महीने करीब 12 से 15 नए आवेदन भी मिल रहे हैं। प्रशासन ने गन लाइसेंस से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अब डिजिटल कर दिया है। नए लाइसेंस के आवेदन के साथ-साथ लाइसेंस के नवीनीकरण, हथियारों के ट्रांसफर और स्टेट बढ़ाने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन कर दी गई है। इसके लिए आवेदकों को केंद्र सरकार के पोर्टल https://www.ndal-alis.gov.in पर जाकर आवेदन करना होगा। ऑनलाइन आवेदन के बाद जरूरत पड़ने पर आवेदक को दस्तावेजों की जांच के लिए एडीएम कार्यालय बुलाया जा सकता है। इसके बाद पुलिस टीम आवेदक के घर जाकर भौतिक सत्यापन करेगी और पड़ोसियों से भी जानकारी लेगी। पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करेगी। इसके बाद अंतिम निर्णय जिला कलेक्टर द्वारा लिया जाएगा कि लाइसेंस जारी किया जाए या नहीं। एडीएम और नोडल अधिकारी उमाशंकर बांदे के अनुसार अब सभी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से समय की बचत होगी और फाइलों के गुम होने जैसी समस्याएं भी समाप्त होंगी। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से गन लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।

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छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: धर्मांतरण पर सख्ती, कर्मचारी चयन मंडल का गठन, रजिस्ट्री होगी सस्ती

मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा स्थित समिति कक्ष में मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें धर्मांतरण से जुड़े कानून, नई भर्ती व्यवस्था और संपत्ति रजिस्ट्री से जुड़े फैसले शामिल हैं। कैबिनेट ने राज्य में धर्मांतरण को नियंत्रित करने के लिए नए कानून के प्रारूप को मंजूरी दी है। प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से धर्मांतरण कराता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में जेल की सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान रहेगा। इस विधेयक को विधानसभा के वर्तमान सत्र में पेश किया जाएगा। बैठक में सरकारी भर्तियों को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल के गठन को भी मंजूरी दी गई है। यह मंडल तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती प्रक्रिया का संचालन करेगा। इसके साथ ही परीक्षाओं में नकल और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए “अनुचित साधनों की रोकथाम विधेयक 2026” के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई है। कैबिनेट ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए संपत्ति रजिस्ट्री पर लगने वाले 12 प्रतिशत अतिरिक्त उपकर को समाप्त करने का फैसला किया है। यह उपकर पहले राजीव गांधी मितान क्लब योजना के लिए लगाया गया था। इसके हटने से जमीन और मकान की रजिस्ट्री सस्ती होने की उम्मीद है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी और रियल एस्टेट बाजार को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए Rajnandgaon District Cricket Association को 5 एकड़ शासकीय भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। यहां आधुनिक क्रिकेट मैदान और अकादमी का निर्माण किया जाएगा। कैबिनेट ने सौर ऊर्जा और बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। Chhattisgarh State Renewable Energy Development Agency के माध्यम से सोलर हाईमास्ट संयंत्रों के लिए 1.50 लाख रुपये तक का राज्य अनुदान दिया जाएगा, जबकि घरेलू बायोगैस संयंत्रों पर 9 हजार रुपये प्रति यूनिट की सब्सिडी तय की गई है। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े 13 मामलों को न्यायालय से वापस लेने की मंजूरी भी दे दी है। इन फैसलों को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र और आम नागरिकों को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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रायपुर में एलपीजी आपूर्ति को लेकर कलेक्टर की बैठक, कालाबाजारी पर सख्ती के निर्देश

रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने मंगलवार देर शाम जिले में एलपीजी गैस की आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों और एलपीजी डीलर्स के साथ बैठक की। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में एलपीजी गैस की सप्लाई सुचारू रूप से बनी रहनी चाहिए और आम उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। कलेक्टर ने डीलर्स को निर्देशित किया कि गैस सिलेंडर की बुकिंग के बाद उपभोक्ताओं को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित की जाए। साथ ही वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी कहा गया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गैस की कालाबाजारी या वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिले में एलपीजी गैस का स्टॉक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। यदि किसी उपभोक्ता को गैस आपूर्ति से जुड़ी समस्या आती है तो वे जिला कलेक्टर कॉल सेंटर के नंबर 9977222564, 9977222574, 9977222584 और 9977222594 पर संपर्क कर सकते हैं। बैठक में खाद्य नियंत्रक भूपेन्द्र मिश्रा, गैस एजेंसियों के संचालक और ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। डीलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी उपभोक्ताओं से अपील की कि वे पैनिक न हों और सहयोग बनाए रखें। इंडेन डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष और ऑल एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स के जिला अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि होली के कारण कुछ दिनों तक गैस वितरण में थोड़ी देरी हुई थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य हो रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वर्तमान में और भविष्य में एलपीजी गैस को लेकर किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होगी। वहीं भारत गैस वितरक संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुरारी गौड़ ने बताया कि फिलहाल कॉमर्शियल कनेक्शन में अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जाएगी। इधर, छत्तीसगढ़ होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी को देखते हुए होटलों और रेस्टोरेंट्स के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें जरूरत पड़ने पर इंडक्शन कुकटॉप, इलेक्ट्रिक हॉट प्लेट, इलेक्ट्रिक राइस कुकर जैसे इलेक्ट्रिक उपकरणों के उपयोग की सलाह दी गई है, ताकि रसोई संचालन प्रभावित न हो।

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रायपुर में एयरफोर्स के विंग कमांडर ने की आत्महत्या, विधायक कॉलोनी के घर में फांसी पर मिला शव

राजधानी रायपुर से एक दुखद खबर सामने आई है। पुरैना स्थित विधायक कॉलोनी में भारतीय वायुसेना के एक विंग कमांडर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान हरियाणा निवासी विपुल यादव (39) के रूप में हुई है, जो रायपुर में पदस्थ थे। पुलिस के अनुसार, घटना विधायक कॉलोनी के बंगला नंबर-79 की है। बुधवार सुबह घर की मेड जब काम के लिए पहुंची तो उसने बेडरूम में विपुल यादव को पंखे से लटका हुआ पाया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। बताया जा रहा है कि उस समय घर के दूसरे कमरे में उनके दोनों बच्चे सो रहे थे, जबकि उनकी पत्नी काम के सिलसिले में दिल्ली गई हुई थीं। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। जानकारी के मुताबिक, विपुल यादव छत्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन से जुड़े दायित्व भी निभा रहे थे। उनकी शादी साल 2014 में लव मैरिज के रूप में हुई थी। उनकी पत्नी पहले एयरफोर्स में कार्यरत थीं और फिलहाल आईटी सेक्टर में काम कर रही हैं। प्रारंभिक जांच में पति-पत्नी के बीच विवाद की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आत्महत्या की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के कारणों का खुलासा हो सकेगा।

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दुर्ग अफीम खेती मामला: कांग्रेस का ऐलान, 12 मार्च को प्रदेशभर में भाजपा कार्यालयों का करेगी घेराव

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 12 मार्च को पूरे प्रदेश में भाजपा जिला कार्यालयों के घेराव का ऐलान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार को भाजपा नेताओं का संरक्षण मिल रहा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर की भूमिका संदिग्ध है, लेकिन उन्हें मुख्य आरोपी बनाने के बजाय सह-अभियुक्त बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि केवल निलंबन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जाना चाहिए। बच्चों को मिला अफीम का पौधा, खुला मामला जानकारी के मुताबिक, समोदा गांव में पिछले करीब पांच वर्षों से अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब 6 मार्च 2026 को गांव के कुछ बच्चों ने खेत में अजीब तरह के पौधे देखे। बच्चों ने उसकी तस्वीर इंटरनेट पर खोजी तो पता चला कि वह अफीम का पौधा है। इसके बाद मामला गांव में फैल गया और प्रशासन तक पहुंच गया। पुलिस ने जब्त किए करोड़ों के पौधे सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए खेत से करीब 8 करोड़ रुपए कीमत के अफीम के पौधे बरामद किए। इस मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर को गिरफ्तार किया गया है और जांच जारी है। ग्रामीणों ने लगाए दबदबे के आरोप गांव के लोगों का कहना है कि आरोपी का इलाके में काफी दबदबा था। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी उसके खेतों के आसपास जाने की हिम्मत नहीं करता था। कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गांव के कई सार्वजनिक स्थानों, जैसे शौचालय और जल स्रोतों पर भी उसका कब्जा था। चारों तरफ से बंद था फार्महाउस ग्रामीणों के मुताबिक, जिस जगह अफीम की खेती हो रही थी वहां चारों ओर गेट लगाए गए थे। इससे आम लोगों का उस इलाके में जाना लगभग नामुमकिन था। इसी वजह से लंबे समय तक इतनी बड़ी खेती का किसी को पता नहीं चल पाया। लीज पर ली गई जमीन पर हो रही थी खेती पुलिस जांच में सामने आया है कि जिस जमीन पर अफीम उगाई जा रही थी वह जमीन राजस्थान के जोधपुर निवासी आचल दास ने लीज पर ली थी। गिरफ्तार आरोपी विकास विश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वह करीब चार साल से गांव में रहकर ताम्रकर की लगभग 13 एकड़ जमीन पर खेती कर रहा था। मामले को लेकर बढ़ा विरोध अफीम खेती के खुलासे के बाद गांव में विरोध भी तेज हो गया है। ग्रामीणों ने आरोपी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कार्रवाई की मांग की है। इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। कांग्रेस ने कहा है कि अगर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो 12 मार्च को प्रदेशभर में भाजपा जिला कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा।

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रायपुर में सरकारी अधिकारी की पत्नी से दुष्कर्म का आरोप: सेकंड हैंड कार कारोबारी गिरफ्तार, एट्रोसिटी एक्ट में केस

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी अधिकारी की पत्नी ने सेकंड हैंड गाड़ियों का व्यापार करने वाले एक व्यक्ति पर जबरदस्ती बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, घटना 8 मार्च की बताई जा रही है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसे अपने कब्जे में लेकर बंधक बनाया और उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। किसी तरह वहां से निकलने के बाद महिला सीधे थाने पहुंची और पूरी घटना की जानकारी पुलिस को दी। आरोपी कारोबारी गिरफ्तार शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आरोपी की पहचान स्वर्णभूमि इलाके में रहने वाले गोपाल गोयल के रूप में हुई। वह सेकंड हैंड कारों का व्यापार करता है। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। एट्रोसिटी एक्ट के तहत भी केस पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की दुष्कर्म से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का कराया गया मेडिकल घटना के बाद पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसके बयान भी दर्ज किए गए हैं। सिविल लाइन थाना प्रभारी यमन देवांगन ने बताया कि मामले की जांच जारी है और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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रायगढ़ में दो दोस्तों ने की आत्महत्या: जन्मदिन की पार्टी के बाद एक ही साड़ी से पेड़ पर लटके मिले शव

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां दो युवकों ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। बताया जा रहा है कि दोनों दोस्त रविवार रात जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुए थे और शराब पीने के बाद सोमवार देर रात आत्महत्या कर ली। यह घटना पुसौर थाना क्षेत्र की है। मृतकों की पहचान तेतला निवासी दीपक बरैठ (20) और कटंगपाली निवासी शिवशरण (21) के रूप में हुई है। जन्मदिन की पार्टी के बाद उठाया कदम जानकारी के मुताबिक, सोमवार को दीपक का जन्मदिन था। इसी मौके पर वह अपने दोस्त लाभों के साथ पहले शिवशरण के पास गया। कुछ समय बाद तीनों चिखली लौट आए। इसके बाद लाभों अपने घर चला गया, जबकि दीपक और शिवशरण बाजार की ओर निकल गए। बताया जा रहा है कि चिखली बाजार में दोनों दोस्तों ने शराब पी और इसके बाद पास स्थित शासकीय माध्यमिक शाला परिसर में पहुंच गए। पेड़ पर एक ही साड़ी से लगाई फांसी रात के दौरान दोनों ने स्कूल परिसर में मौजूद बबूल के पेड़ पर एक ही साड़ी के अलग-अलग छोर से फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। सुबह ग्रामीणों ने देखा शव मंगलवार सुबह ग्रामीणों ने दोनों युवकों के शव पेड़ पर लटके हुए देखे और तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और पोस्टमॉर्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। जांच में जुटी पुलिस घटनास्थल से पुलिस को शराब की बोतल भी मिली है। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।

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बेलतरा की 75 साल पुरानी नेवसा सिंचाई योजना को मंजूरी, 48.92 करोड़ से 1800 हेक्टेयर खेतों को मिलेगा पानी

छत्तीसगढ़ के बेलतरा क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से लंबित नेवसा उद्वहन सिंचाई योजना को आखिरकार सरकार से मंजूरी मिल गई है। करीब 75 वर्षों के इंतजार के बाद इस परियोजना के लिए 48.92 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के लागू होने से लगभग 1800 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल सकेगी। इस योजना की स्वीकृति में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। उन्होंने इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी का आभार व्यक्त किया है। लिफ्ट इरिगेशन से खेतों तक पहुंचेगा पानी विधायक के अनुसार, नेवसा उद्वहन सिंचाई योजना के तहत लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम विकसित किया जाएगा। इस प्रणाली में जल स्रोत से पानी को पंप या मोटर की मदद से ऊपर उठाकर पाइपलाइन के जरिए खेतों तक पहुंचाया जाता है। इससे ऊंचाई पर स्थित खेतों को भी सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी सिंचाई परियोजना के तहत खारंग जलाशय से सोलर पंप और पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 1400 हेक्टेयर खरीफ और 400 हेक्टेयर रबी फसल के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे कुल मिलाकर करीब 1800 हेक्टेयर कृषि भूमि को लाभ मिलेगा। 15 से ज्यादा गांवों को मिलेगा फायदा इस योजना से नेवसा, गिधौरी, कर्रा, जाली, टेकर, गढ़वट, अकलतरी, बाम्हु, बेलतरा, कड़री, सलखा और लिम्हा सहित 15 से अधिक गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि खूंटाघाट बांध के पास होने के बावजूद इस क्षेत्र के किसान दशकों से सिंचाई सुविधा के अभाव में खेती में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। अब योजना के क्रियान्वयन से किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने के साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है। ग्रामीणों और किसानों ने इस महत्वपूर्ण योजना के लिए राज्य सरकार और विधायक सुशांत शुक्ला के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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