January 2026

रायपुर रेप केस: 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी की अवैध दुकान ढही, नगर निगम ने चलाया बुलडोजर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी (65) की अवैध रूप से बनी दुकान को नगर निगम ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने नाबालिग बच्ची के साथ लगातार पांच दिनों तक दुष्कर्म किया। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। गिरफ्तारी के बाद नगर निगम प्रशासन ने भी आरोपी के अवैध निर्माण पर कार्रवाई की। चॉकलेट का लालच देकर बुलाता था घर पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 7 से 11 जनवरी के बीच अपने ही मोहल्ले में रहने वाली 9 साल की बच्ची को चॉकलेट और खाने-पीने की चीजों का लालच देकर कई बार अपने घर बुलाया। इसी दौरान उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। 12 जनवरी की सुबह बच्ची असहनीय दर्द के कारण रोती हुई जमीन पर पड़ी थी। जब उसकी चाची उसे नहलाने ले गई और दर्द की वजह पूछी, तब बच्ची ने पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया गया। धमकी देकर चुप रहने को कहता था आरोपी बच्ची ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आरोपी हर बार गलत काम के बाद उसे धमकाता था कि अगर किसी को बताया तो मार देगा। इसी डर की वजह से वह कई दिनों तक चुप रही। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अवैध निर्माण पर नगर निगम की कार्रवाई रेप के आरोपी के खिलाफ नगर निगम ने भी सख्त रुख अपनाया। रायपुर की मेयर मीनल चौबे के निर्देश पर आरोपी की दुकान को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किया गया था। 16 जनवरी को दुकान पर नोटिस चस्पा कर जवाब देने का समय दिया गया, लेकिन तय अवधि में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद नगर निगम की टीम ने बुलडोजर चलाकर दुकान को ढहा दिया। निगम अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की दुकान नगर निगम के नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई थी। नगर निगम प्रशासन ने साफ किया है कि गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है और अवैध निर्माण पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। रायपुर में बढ़ते अपराध चिंता का विषय रायपुर पुलिस द्वारा पेश किए गए वार्षिक अपराध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जिले में कुल 15,896 अपराध दर्ज किए गए। इनमें 280 रेप के मामले सामने आए, जबकि 92 हत्याएं दर्ज की गईं। बीते तीन वर्षों में अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में 543 चाकूबाजी की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं। सबसे अधिक एफआईआर खमतराई थाना क्षेत्र में दर्ज की गईं, जहां एक साल में 1,013 मामले सामने आए।

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BJP में छत्तीसगढ़ की बढ़ती अहमियत: नड्डा के बाद नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य से दिल्ली तक बदलेगा सियासी संतुलन

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की भूमिका लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। पहले जेपी नड्डा और अब छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन का बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। बीजेपी के इतिहास में यह दूसरी बार है जब छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल चुके किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। इससे पहले जेपी नड्डा ने भी छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए संगठनात्मक प्रयोग किए थे, जिनका असर बाद में राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ से जुड़े अनुभव अब राष्ट्रीय रणनीति में नितिन नवीन को 2023 में छत्तीसगढ़ बीजेपी का को-इंचार्ज बनाया गया था, जब ओम माथुर प्रदेश प्रभारी थे। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली सफलता में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। टिकट वितरण, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिलों और मंडलों से फीडबैक लेना और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, वहां संगठन को संतुलन में रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। नितिन नवीन ने इन जमीनी हालात को समझते हुए अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। संगठनात्मक सख्ती और स्पष्ट संदेश पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ बीजेपी को कांग्रेस सरकार, स्थानीय मुद्दों और आंतरिक गुटबाजी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान नितिन नवीन ने संगठन को नीचे तक सक्रिय रखने पर जोर दिया। मंडल से लेकर जिला स्तर तक नियमित फीडबैक और संगठनात्मक बदलाव किए गए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन की कार्यशैली शांत लेकिन निर्णायक रही है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल जरूरी है। इसी नीति के तहत कई जिलों में संगठनात्मक फेरबदल भी किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को संभावित फायदे नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य से जुड़े मुद्दे जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र, आदिवासी इलाकों का विकास, शहरी प्रशासन और कानून-व्यवस्था अब सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी पर नियंत्रण की कोशिश तेज हो सकती है। राष्ट्रीय नेतृत्व से सीधे जुड़े होने के कारण संतुलन साधने की भूमिका और मजबूत हो सकती है। टिकट वितरण और नेतृत्व चयन में बदलाव के संकेत आने वाले समय में नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू होगी। ऐसे में पार्टी सूत्रों का मानना है कि अब टिकट वितरण में नाम से ज्यादा काम और जमीनी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। युवा नेताओं को आगे लाने और अनुभवी नेताओं के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। नितिन नवीन पहले भी छत्तीसगढ़ में यह संदेश दे चुके हैं कि जिम्मेदारी प्रदर्शन के आधार पर तय होगी। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय राष्ट्रीय अध्यक्ष का छत्तीसगढ़ से सीधा जुड़ाव केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाएं भी बढ़ाता है। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह लागू और प्रस्तुत किया जाए, इस पर रणनीति और स्पष्ट हो सकती है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में। जेपी नड्डा मॉडल की पुनरावृत्ति? जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बना था। अब नितिन नवीन के चयन को भी उसी मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मिले संगठनात्मक अनुभव को पार्टी अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है। बीजेपी अब राज्य में ज्यादा संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है। सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर विपक्ष का दबाव बढ़ने की संभावना है। कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश है कि छत्तीसगढ़ में किए गए संगठनात्मक काम और जमीनी फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व गंभीरता से लेता है। इससे संगठन में भरोसा और सक्रियता बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य को पार्टी किस तरह की प्राथमिकता देती है।

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Chhattisgarh, Political, Top News

राजनांदगांव में पकड़ा गया धर्मांतरण का विदेशी नेटवर्क, अमेरिका से आया मुख्य आरोपी

त्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पुलिस ने धर्मांतरण के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क में विदेशी फंडिंग, संदिग्ध प्रशिक्षण मॉड्यूल और ‘पॉल’ जैसे कोड नेम वाले जमीनी स्तर के कार्यकर्ता शामिल थे। मामला लालबाग थाना क्षेत्र का है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी डेविड चाको पहले अमेरिका में पढ़ाता था और भारत लौटने के बाद उसे बड़ी रकम मिली। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह पैसा किस रास्ते भारत आया, किन खातों में जमा हुआ और डॉलर को रुपए में कैसे बदला गया। संदेह है कि इस रकम का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर धर्मांतरण की गतिविधियों में किया गया। पुलिस को आश्रम और चर्च से कई संदिग्ध पुस्तकें और प्रशिक्षण सामग्री भी मिली हैं। इन सामग्री में इस्तेमाल कोड और प्रचार के तरीकों की विशेषज्ञों से जांच कराई जा रही है। दिसंबर 2025 में ग्राम पनेका में चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किया गया था, जिसमें अन्य जिलों से अधिकारी शामिल हुए थे। प्रशिक्षण में जमीनी कार्यकर्ताओं को ‘पॉल’ जैसे नाम दिए गए और भुगतान ट्रैवल वाउचर के जरिए किया गया। 8 जनवरी को ग्राम धर्मापुर से लिखित शिकायत मिली थी कि आश्रम में नाबालिग बच्चों को रखा गया है और धर्मांतरण की गतिविधियां हो रही हैं। SP अंकिता शर्मा और टीम ने कार्रवाई करते हुए बच्चों को CWC के हवाले कर दिया। छापेमारी में सोलर-आधारित प्रोजेक्टर्स, लैपटॉप, टैबलेट, प्रीमियम मोबाइल फोन और फाइनेंशियल रिकॉर्ड जब्त किए गए। इन प्रोजेक्टर्स और डिजिटल दस्तावेजों का इस्तेमाल ब्रेनवॉश करने के लिए किया जाता था। राजनांदगांव SP अंकिता शर्मा ने कहा कि मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जा रही है और सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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आवारा पशुओं पर सरकार का बड़ा दावा: 46 शेल्टर होम में 4,160 मवेशी, 36 गौधामों को मिली मंजूरी

छत्तीसगढ़ में आवारा पशुओं के कारण बढ़ते सड़क हादसों और फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। शासन ने शपथपत्र के माध्यम से बताया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस समय 46 अस्थायी मवेशी शेल्टर होम संचालित किए जा रहे हैं, जहां कुल 4,160 मवेशियों को सुरक्षित रखा गया है। सरकार ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि आवारा पशुओं के स्थायी समाधान के लिए राज्य में 36 गौधामों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन गौधामों में मवेशियों के लिए शेड, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें से तीन गौधाम फिलहाल संचालित हो रहे हैं, जबकि आठ में मरम्मत और आवश्यक अधोसंरचना का कार्य जारी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सरकार के जवाब के बाद इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान पशुधन विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने बताया कि फसलों की सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी शेल्टर बनाए गए हैं। फसल कटाई के बाद मवेशियों को उनके मालिकों को सौंप दिया जाता है या इच्छुक ग्रामीणों में वितरित किया जाता है। बेलतरा और सुकुलकारी ग्राम पंचायतों में इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया है। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप गृह विभाग, एनएचएआई और सड़क सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के रजिस्ट्रार को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पशु चिकित्सकों को गौधामों और शेल्टर होम का नियमित निरीक्षण कर पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और चारा-पानी की स्थिति की मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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Chhattisgarh

रायगढ़ में फ्लाईएश परिवहन बना ग्रामीणों की परेशानी, नियम उल्लंघन पर भड़का विरोध

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के नवापारा क्षेत्र में फ्लाईएश से लदे वाहनों से सड़क पर गिर रहे राख ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लंबे समय से जारी इस समस्या के खिलाफ सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। टीआरएन कंपनी से निकलने वाली फ्लाईएश से भरी गाड़ियों को ग्रामीणों ने रोककर विरोध प्रदर्शन किया और परिवहन में हो रहे नियमों के उल्लंघन पर सवाल उठाए। जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 8 बजे टेंडा-नवापारा मार्ग से कई ओवरलोड फ्लाईएश वाहन गुजर रहे थे। वाहनों को ढंकने और सुरक्षित ढुलाई के नियमों का पालन नहीं होने के कारण चलते वाहनों से फ्लाईएश सड़क पर गिरने लगा। इससे न सिर्फ सड़कें खराब हो रही हैं, बल्कि राहगीरों और दोपहिया चालकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति बिगड़ते देख नाराज ग्रामीणों ने मौके पर 8 से 10 फ्लाईएश वाहनों को रोक लिया और कंपनी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कंपनी और संबंधित विभाग कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे समस्या लगातार बनी हुई है। वाहनों को रोके जाने की सूचना मिलने पर कंपनी के फ्लाईएश साइट इंचार्ज और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि आगे से परिवहन में नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा और ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होगी। इसके बाद सड़क पर गिरे फ्लाईएश को हटाने का काम शुरू कराया गया। लगभग पांच घंटे बाद जाकर ग्रामीणों ने अपना विरोध समाप्त किया। गांव के पंच परमेश्वर गुप्ता ने बताया कि टेंडा नवापारा, कटंगडीह, चारमार, डोंगाभौना और छाल-भोजिया मार्ग पर रोजाना इसी तरह फ्लाईएश गिरती है, जिससे कई गांव प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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Raigarh

बिलासपुर में अवैध OYO होटल पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई, रिहायशी इलाके में संचालित भवन किया गया सील

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में नगर निगम ने नियमों की अनदेखी कर संचालित एक OYO होटल पर सख्त कार्रवाई की है। सरकंडा थाना क्षेत्र के देवनंदन नगर स्थित रिहायशी इलाके में बिना अनुमति बनाए गए तीन मंजिला भवन में अवैध रूप से होटल का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद नगर निगम ने सोमवार को उक्त भवन को सील कर दिया। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, देवनंदन नगर के निवासियों ने शिकायत की थी कि उनके रिहायशी क्षेत्र में OYO होटल चलाया जा रहा है, जहां रोजाना युवक-युवतियों का संदिग्ध आना-जाना रहता है। इससे मोहल्ले का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा था और खासकर महिलाएं व युवतियां खुद को असुरक्षित महसूस कर रही थीं। शिकायत मिलने के बाद निगम की भवन शाखा ने मौके पर जांच की। जांच में पाया गया कि भवन का नक्शा रिहायशी उपयोग के लिए स्वीकृत कराया गया था, लेकिन अंदर होटल के तौर पर कमरों का निर्माण किया गया है। यह पूरी तरह से व्यवसायिक गतिविधि की श्रेणी में आता है, जिसके लिए अलग से अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना किसी वैध अनुमति के लंबे समय से इस भवन में OYO होटल का संचालन किया जा रहा था। स्थानीय लोगों ने निगम कमिश्नर को भी इस मामले की शिकायत करते हुए कहा था कि होटल के कारण क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा है। जांच में अवैध संचालन की पुष्टि होने के बाद नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए होटल को सील कर दिया। नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में बिना अनुमति निर्माण और अवैध व्यवसायिक गतिविधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों और संचालकों के खिलाफ न सिर्फ सीलिंग की कार्रवाई होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। जानकारी के अनुसार, सील किए गए OYO होटल का संचालन अंकित सिंह द्वारा किया जा रहा था।

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Bilashpur, Chhattisgarh

मेडिकल PG में MBBS छात्रों को बड़ी राहत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 50% संस्थागत आरक्षण को दी मंजूरी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल पीजी प्रवेश को लेकर अपने पहले के फैसले में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए प्रदेश के एमबीबीएस छात्रों को बड़ी राहत दी है। अब राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को पोस्ट ग्रेजुएट (PG) कोर्स में मैरिट के आधार पर 50 प्रतिशत संस्थागत आरक्षण मिल सकेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था संवैधानिक रूप से वैध है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनाया। बेंच ने अपने पूर्व आदेश के उस हिस्से को हटा दिया, जिसमें राज्य सरकार को उम्मीदवारों के बीच श्रेणी के आधार पर भेदभाव न करने का निर्देश दिया गया था। इस बदलाव के साथ ही संस्थागत कोटा के तहत आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने छत्तीसगढ़ मेडिकल पीजी प्रवेश नियम 2025 के नियम 11(a) और 11(b) को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन नियमों के तहत राज्य के मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही थी। इस पर 20 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक करार दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की। 18 दिसंबर 2025 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह छूट दी कि वह हाईकोर्ट से यह स्पष्ट कराए कि संस्थागत कोटे के तहत कितनी सीटों का आरक्षण उचित होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्पष्टीकरण याचिका दाखिल की। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने दलील दी कि निवास आधारित आरक्षण समाप्त कर दिया गया है और अब केवल संस्थान आधारित प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 1 दिसंबर 2025 को नियमों में संशोधन कर 50 प्रतिशत सीटें संस्थागत आरक्षण और 50 प्रतिशत ओपन मेरिट के लिए निर्धारित कर दी गई हैं। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि पीजी मेडिकल सीटों में निवास आधारित आरक्षण गलत है, लेकिन सीमित दायरे में संस्थागत प्राथमिकता दी जा सकती है। इस आदेश के बाद राज्य सरकार अब तन्वी बहल केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप संस्थागत आरक्षण लागू कर सकेगी।

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Chhattisgarh, Education

अवैध शराब कारोबार पर पुलिस का शिकंजा: देसी व कच्ची शराब के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, बाइक जब्त

दुर्ग जिले की नगपुरा चौकी पुलिस ने अवैध शराब के परिवहन और बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से भारी मात्रा में देसी शराब और कच्ची महुआ शराब बरामद की है, साथ ही शराब ढोने में इस्तेमाल की जा रही बाइक भी जब्त की गई है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 73 हजार 650 रुपये आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 19 जनवरी को नगपुरा चौकी की टीम मालूद–नगपुरा के बीच चिखली रोड पर नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि दो व्यक्ति बाइक क्रमांक CG-07-CW-0849 से उरला भट्ठी की ओर से नगपुरा की दिशा में अवैध शराब लेकर आ रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध बाइक को रोककर तलाशी ली। देसी और कच्ची शराब बरामद तलाशी के दौरान आरोपी राजू पारधी के कब्जे से शोले मसाला मदिरा के 133 पौवा बरामद किए गए, जिसकी कुल मात्रा 23.940 बल्क लीटर है। बरामद देसी शराब की अनुमानित कीमत करीब 11 हजार 900 रुपये बताई गई है। वहीं दूसरे आरोपी रामधारी पारधी के पास से 7 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 1 हजार 750 रुपये आंकी गई है। पानी की बोतलों में करता था शराब की बिक्री पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब को पानी की बोतलों में भरकर बिक्री करता था, ताकि आसानी से किसी को शक न हो। इसके अलावा शराब की ढुलाई में प्रयुक्त बाइक, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 60 हजार रुपये है, को भी जब्त किया गया है। न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अवैध रूप से शराब के परिवहन और बिक्री में संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) और 49(1) के तहत मामला दर्ज कर विधिवत गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

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साहू समाज का बड़ा फैसला: प्री-वेडिंग शूट पर पूर्ण प्रतिबंध, तलाक रोकने पारिवारिक काउंसलिंग होगी शुरू

छत्तीसगढ़ में साहू समाज ने सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में अहम निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने प्री-वेडिंग शूट पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला समाज में बढ़ते दिखावे, अनावश्यक खर्च और बदलते संस्कारों पर नियंत्रण के उद्देश्य से लिया गया है। शनिवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू ने की। बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से आए जिला अध्यक्षों और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। दिखावे और फिजूलखर्ची पर रोक का प्रयास बैठक के दौरान समाज की वर्तमान स्थिति, सामाजिक परंपराओं में आ रहे बदलाव और बढ़ती दिखावटी संस्कृति पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश संयुक्त सचिव प्रदीप साहू ने बताया कि लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से प्री-वेडिंग शूट को समाजहित में बंद करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश साहू संघ का मानना है कि साहू समाज की पहचान सादगी, संस्कार और सामाजिक सौहार्द से रही है, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति समाज की परंपरागत जड़ों को कमजोर कर रही है। इस निर्णय के जरिए समाज को अपनी मूल संस्कृति की ओर लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। तलाक के मामलों पर चिंता, फैमिली काउंसलिंग की पहल बैठक में समाज के भीतर बढ़ते तलाक के मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। इस पर निर्णय लिया गया कि पारिवारिक विवादों को सुलझाने और रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए फैमिली काउंसलिंग की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करना और दांपत्य जीवन में संतुलन बनाए रखना है। सामाजिक अनुशासन और एकता पर जोर प्रदेश स्तरीय बैठक में सामाजिक एकता, अनुशासन और संस्कार विकास को सशक्त करने के लिए संगठित रूप से कार्य करने का संकल्प लिया गया। प्रदेश साहू संघ ने स्पष्ट किया कि जो परंपराएं समाज को कमजोर करती हैं, उन्हें आगे स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघ ने समाज के सभी सदस्यों से इन निर्णयों का पालन करने और समाजहित में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है।

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NEET PG कट-ऑफ विवाद: छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति से की NMC को भंग करने की मांग

देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। NEET PG परीक्षा का कट-ऑफ घटाकर ‘माइनस 40’ किए जाने के फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को तत्काल भंग करने की मांग की है। सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने इस निर्णय को चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास का एक चिंताजनक अध्याय बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले न केवल योग्यता आधारित चयन प्रणाली को कमजोर करते हैं, बल्कि भविष्य में आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। योग्यता से समझौते का आरोप राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि NMC का गठन चिकित्सा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन हालिया नीतिगत निर्णय इसके उलट परिणाम दे रहे हैं। डॉ. सोलंकी का आरोप है कि कट-ऑफ को शून्य से नीचे ले जाना पेशे की गरिमा के साथ समझौता है और इससे कम योग्य डॉक्टरों के विशेषज्ञ बनने का रास्ता खुल सकता है। NMC पर गंभीर आरोप छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने केंद्र सरकार से NMC अधिनियम 2019 की धारा 55 के तहत आयोग को भंग करने की मांग की है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आयोग चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने को प्राथमिकता दे रहा है। सोसाइटी ने सुझाव दिया है कि जब तक नया आयोग गठित न हो, तब तक ईमानदार स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रख्यात शिक्षाविदों की एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नियुक्त की जाए, जो पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर सके। ब्रेन ड्रेन और सिस्टम फेल होने का आरोप ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि गलत नीतियों के चलते मेधावी छात्र विदेशों में पढ़ाई और करियर बनाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे देश को दीर्घकालिक नुकसान हो रहा है। साथ ही, NMC पर बुनियादी ढांचे की कमी, फैकल्टी संकट और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। इस मांग के बाद अब चिकित्सा जगत और छात्रों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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