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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ा फैसला, रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी निरंजन दास को जमानत दे दी है। निरंजन दास पूर्व आबकारी आयुक्त रह चुके हैं और जांच एजेंसियों के मुताबिक वे कथित सिंडिकेट के अहम सदस्य माने जा रहे थे। उन पर आबकारी नीति तैयार करने और शराब कारोबार से जुड़े फैसलों में प्रभावशाली भूमिका निभाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि निरंजन दास ने आबकारी नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे कुछ लोगों को कथित रूप से फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार किस जिले में कौन अधिकारी तैनात होगा, किस ब्रांड की शराब बिकेगी और सप्लाई व्यवस्था कैसी होगी, इन फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। जांच में यह भी दावा किया गया कि उन्हें 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला। यह मामला सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ में सुना गया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर निरंजन दास को भी जमानत दी गई। हालांकि कोर्ट ने शर्त रखी है कि निरंजन दास को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। वे केवल जांच और अदालत में पेशी के लिए ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। वहीं, कारोबारी अनवर ढेबर ने भी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े भ्रष्टाचार और अवैध कमीशन मामले में सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से 3 जून तक जवाब मांगा है। इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट 13 मई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, कथित शराब घोटाले को तत्कालीन आबकारी सिस्टम और कारोबारी नेटवर्क के जरिए संचालित किया गया। ED और EOW की जांच में दावा किया गया है कि डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी शराब पर कमीशन लिया जाता था और नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब सरकारी दुकानों तक पहुंचाई जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि प्रदेश के 15 जिलों को शराब खपाने के लिए चिन्हित किया गया था। आरोप है कि नकली होलोग्राम लगी शराब बिना शुल्क के सरकारी दुकानों तक पहुंचाई जाती थी और इस पूरे नेटवर्क में कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका रही। बताया जा रहा है कि अब तक शराब, कोयला, DMF और अन्य आर्थिक घोटालों से जुड़े मामलों में कई बड़े अधिकारियों और कारोबारियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। इनमें रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा, निलंबित IAS रानू साहू, समीर विश्नोई, पूर्व मंत्री कवासी लखमा और अन्य नाम शामिल हैं। इन सभी को राज्य से बाहर रहने जैसी शर्तों के साथ राहत दी गई है।

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शराब घोटाला मामला: अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, कई शर्तें लागू

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। अदालत ने यह फैसला सोमवार को सुनवाई के दौरान सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिल टुटेजा 21 अप्रैल 2024 से जेल में बंद थे और उनके मामले में अभी कई गवाहों से पूछताछ बाकी है, जिससे ट्रायल में समय लग सकता है। अदालत ने यह भी माना कि इसी मामले के कई अन्य आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं। कोर्ट ने जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। आदेश के अनुसार, अनिल टुटेजा को जमानत मिलने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे किसी भी सरकारी अधिकारी से संपर्क नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा, उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करने का निर्देश दिया गया है। ईडी के अनुसार, यह मामला 2019 से 2022 के बीच का है, जब राज्य में कांग्रेस सरकार थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान एक संगठित नेटवर्क के जरिए शराब नीति में गड़बड़ी कर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की गई। ईडी का अनुमान है कि इस कथित घोटाले से लगभग 2800 से 3000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। जांच में कई अधिकारियों, नेताओं और कारोबारियों के शामिल होने का दावा किया गया है। मामले की जांच अभी जारी है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की सच्चाई का फैसला ट्रायल के दौरान ही होगा।

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शराब घोटाला केस: जेल में बंद कवासी लखमा से मिलने पहुंचे PCC चीफ दीपक बैज

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज शुक्रवार को शराब घोटाले के मामले में जेल में बंद वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा से मुलाकात करने पहुंचे। जेल में हुई इस मुलाकात के दौरान दीपक बैज ने लखमा की सेहत का हाल जाना और उनके स्वास्थ्य को लेकर जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले ही कवासी लखमा की आंखों की सर्जरी हुई थी। दीपक बैज की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब कथित शराब घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार जारी है और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता हैं कवासी लखमा कवासी लखमा को बस्तर अंचल के सबसे प्रभावशाली और मजबूत आदिवासी नेताओं में गिना जाता है। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। वर्ष 2013 में हुए दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो बाल-बाल बच गए थे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कवासी लखमा को आबकारी मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 13 मंत्रियों में से केवल चार ही अपनी सीट बचा पाए थे, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला? छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें करीब 3,200 करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का दावा किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। ED के मुताबिक, तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन MD एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। फिलहाल मामले में ED की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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IAS और नेताओं ने उड़ाए कोल स्कैम के करोड़ों: चुनाव से लेकर जेवर तक में खर्च हुई रकम — ED की चार्जशीट में बड़ा खुलासा

छत्तीसगढ़ के कोयला घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नई चार्जशीट ने बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 570 करोड़ रुपए की अवैध कमाई में से 8 नेताओं और अफसरों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। इन पैसों से कुछ ने प्रॉपर्टी खरीदी, तो कुछ ने चुनावों में करोड़ों खर्च किए और यहां तक कि गहनों पर भी जमकर खर्चा हुआ। 💰 पैसा आया कहां से? ED के मुताबिक, इस घोटाले का मास्टरमाइंड सूर्यकांत तिवारी था, जो कोल ट्रांसपोर्टर्स और वाशरी संचालकों से प्रति टन 125 रुपए तक की वसूली करता था। 🧾 किसे कितना मिला और कहां खर्च हुआ? ED की चार्जशीट के अनुसार: 💬 ED ने नेताओं और सूर्यकांत की WhatsApp चैट भी पेश की चार्जशीट में नेताओं और सूर्यकांत तिवारी के बीच की WhatsApp बातचीत के स्क्रीनशॉट शामिल हैं। 📲 देवेंद्र यादव और सूर्यकांत की चैट: बातचीत में चुनाव और मुलाकातों का जिक्र है —देवेंद्र यादव ने लिखा, “भैया मैं शंकर नगर पहुंच गया हूं, कहां आना है?”सूर्यकांत ने जवाब दिया, “रेडी होकर आता हूं भाई, 10 बजे अनुपम नगर पहुंचता हूं।”बाद में यादव ने लिखा, “मुझे खैरागढ़ निकलना है, कितना समय लगेगा?”सूर्यकांत का रिप्लाई आया — “DONE.” 💍 चंद्रदेव राय की चैट: ED के अनुसार, राय ने पत्नी के लिए हार खरीदने से पहले सूर्यकांत से पूछा —“भैया जी, आपकी बहू को ये पसंद आई है, कौन-सा लूं?”सूर्यकांत ने जवाब दिया — “जो बहू को पसंद है, वही ले लो।”इसके बाद राय के ड्राइवर ने होटल से पैसे लाकर ज्वेलरी शॉप में भुगतान किया। ⚖️ ED का दावा ED ने कोर्ट में दावा किया है कि छत्तीसगढ़ कोल लेवी स्कैम में करीब 570 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हुई।वसूली के लिए ऑनलाइन परमिट सिस्टम को ऑफलाइन किया गया, ताकि नियंत्रण अधिकारियों के हाथ में रहे।इस आदेश पर तत्कालीन खनिज निदेशक IAS समीर विश्नोई के हस्ताक्षर थे। 📌 मुख्य बिंदु एक नजर में

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने ED-EOW को 3 महीने में पूरी जांच का अल्टीमेटम, बड़े अधिकारियों और भूपेश के बेटे गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला मामले सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को चेतावनी दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे दिसंबर के अंत तक पूरी जांच पूरी करें और फाइनल रिपोर्ट पेश करें। सितंबर के आखिरी सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ED और EOW ने मामले की जांच तेजी से शुरू कर दी है। आबकारी विभाग के लगभग 30 अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है, जिनमें 7 रिटायर्ड अधिकारी भी शामिल हैं। ED के वकील सौरभ पांडे ने बताया कि जांच को करीब दो साल हो चुके हैं और अब इसे मुकाम तक पहुंचाना जरूरी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़ी 13 याचिकाओं की सुनवाई हुई थी, जिनमें अलग-अलग FIR, जमानत याचिकाएं और प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट शामिल थी। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और जांच पूरी करने का निर्देश दिया। EOW के अनुसार, इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल और अन्य बड़े अधिकारियों और कारोबारी शामिल हैं। विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन और मनी लॉन्ड्रिंग का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में पता चला कि करीब 3,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर सिंडिकेट बनाया और घोटाले को अंजाम दिया। अनवर ढेबर ने पैसे को रिश्तेदारों और कंपनियों के नाम निवेश किया। घोटाले की रणनीति: फरवरी 2019 में अनवर ढेबर ने होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और अधिकारियों की मीटिंग कर कमीशन और शराब सप्लाई की रणनीति तय की थी। ED और EOW की जांच जारी है और कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि तीन महीने के अंदर पूरी जांच और पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जाए।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से 4 दिन की अंतरिम जमानत

छत्तीसगढ़ के बड़े शराब घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिन की अंतरिम जमानत दी है। जमानत मां के खराब स्वास्थ्य के कारण दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल पारिवारिक परिस्थिति के लिए है और 4 दिन बाद उन्हें फिर से जेल लौटना होगा। ढेबर के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि उनकी मां गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे समय में परिवार के पास रहने का अवसर मिलना चाहिए। 🔹 छत्तीसगढ़ शराब घोटाले का मामला ED की जांच में सामने आया कि 3,000 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला हुआ। तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के MD AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर ने मिलकर सिंडिकेट बनाया। अनवर ढेबर ने रिश्तेदारों और CA के नाम कंपनियों में निवेश कर कमीशन का पैसा छिपाया। EOW के अनुसार, शराब डिस्टलर्स से कमीशन और बी पार्ट की बिक्री से 15% रकम अनवर ढेबर को जाती थी। इसे ढेबर के करीबी विकास अग्रवाल और सुब्बू इकट्ठा करते थे। 🔹 फरवरी 2019 में बना सिंडिकेट अनवर ढेबर ने फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और आबकारी अधिकारियों की बैठक कर सिंडिकेट बनाया। इसमें नवीन केडिया, भूपेंदर पाल सिंह भाटिया, प्रिंस भाटिया, राजेंद्र जायसवाल और AP त्रिपाठी समेत अन्य शामिल थे। सिंडिकेट ने शराब बिक्री के लेन-देन को ए, बी और सी पार्ट में बांटा: A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन B: नकली होलोग्राम वाली शराब C: डिस्टलरी सप्लाई एरिया बदलकर अवैध वसूली 🔹 गिरफ्तारी EOW ने इस मामले में कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा, सुनील दत्त समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया।पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बाद पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को भी शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इस जमानत का लाभ ढेबर केवल परिवार के साथ समय बिताने के लिए ले सकेंगे, और चार दिन बाद उन्हें जेल लौटना अनिवार्य है।

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