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रायपुर में पुलिस की तड़के रेड, 132 बदमाशों की जांच; 11 वारंटी गिरफ्तार

राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को सख्त करने के उद्देश्य से पुलिस ने रविवार सुबह बड़ा अभियान चलाया। सेंट्रल ज़ोन में चलाए गए इस विशेष ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 132 हिस्ट्रीशीटर और निगरानी बदमाशों की जांच की, साथ ही 11 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल ज़ोन) उमेश प्रसाद गुप्ता और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में की गई। इस अभियान में कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा, गंज, सिविल लाइन, देवेंद्र नगर और तेलीबांधा थाना पुलिस ने मिलकर भाग लिया। अभियान के तहत पुराने अपराधियों को थानों में बुलाकर उनकी परेड कराई गई और उनकी गतिविधियों की जांच की गई। खासकर चाकूबाजी जैसे गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों पर विशेष निगरानी रखी गई। पुलिस टीमों ने अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर फरार वारंटियों की तलाश की, जिसमें 8 स्थायी वारंटी सहित कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि करीब 28 प्रतिशत बदमाश थाने पहुंचकर सत्यापन प्रक्रिया में शामिल हुए, जबकि लगभग 20 प्रतिशत आरोपी अपने घरों से गायब मिले। इनकी तलाश के लिए अलग से कार्रवाई की जा रही है। वहीं करीब 24 प्रतिशत आरोपी पहले से जेल में बंद पाए गए, जबकि बाकी आरोपियों के घर पहुंचकर पुलिस ने उनकी जांच की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने सभी बदमाशों को सख्त चेतावनी देते हुए अपराध से दूर रहने, नियमित रूप से थाने में हाजिरी देने और कानून का पालन करने के निर्देश दिए। साथ ही उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए फिंगरप्रिंट लेकर NAFIS सिस्टम में दर्ज किया गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल ने बताया कि इस तरह के सघन अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे और आम लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

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छत्तीसगढ़ के आत्मानंद स्कूलों में बड़ा बदलाव, अब प्रिंसिपल भी पढ़ाएंगे और रोज होगी पढ़ाई की समीक्षा

छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में आने वाले सत्र से पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नया अकादमिक मॉडल लागू किया है, जिसमें अब ध्यान केवल प्रशासन नहीं बल्कि पढ़ाई, निगरानी और छात्रों के समग्र विकास पर रहेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रिंसिपल की भूमिका में अहम बदलाव किया गया है। अब वे सिर्फ प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें अकादमिक लीडर की जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्हें रोजाना शिक्षकों के साथ बैठकर पढ़ाई की समीक्षा करनी होगी और साथ ही प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड पढ़ाना भी अनिवार्य किया गया है। हर हफ्ते क्लास के अनुसार पढ़ाई का लक्ष्य तय किया जाएगा, ताकि सिलेबस समय पर पूरा हो सके और छात्रों की प्रगति पर नजर रखी जा सके। स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली बार पूरे सत्र के लिए विस्तृत अकादमिक कैलेंडर तैयार किया है। इसमें हर महीने पढ़ाए जाने वाले पाठ पहले से निर्धारित होंगे और उसी के अनुसार परीक्षाओं की योजना भी बनाई गई है। स्कूलों में अनुशासन और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए वंदे मातरम को अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए हर स्कूल को साउंड सिस्टम खरीदने हेतु 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। हर शनिवार को अब “गतिविधि दिवस” के रूप में विकसित किया गया है। इस दिन छात्र बिना बैग के स्कूल आएंगे और योग के बाद उन्हें अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा। एक समूह गार्डनिंग, क्राफ्ट जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेगा, जबकि दूसरा समूह टेस्ट देकर अपनी तैयारी का आकलन करेगा। इससे एक ही दिन में कौशल विकास और पढ़ाई दोनों को बढ़ावा मिलेगा। पढ़ाई को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के त्योहारों और परंपराओं का भी कैलेंडर तैयार किया गया है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों की पारंपरिक गतिविधियों को स्कूलों में शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहें। इसके अलावा बच्चों को महापुरुषों के जीवन और विचारों से परिचित कराने के लिए विशेष कैलेंडर बनाया गया है। हर महीने दो महान व्यक्तित्वों की जयंती या पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें छात्र उनके आदर्शों पर चर्चा और भाषण देंगे। शिक्षा सत्र जून 2026 से शुरू होगा, जिसमें 1 से 20 जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 22 जून को शाला प्रवेशोत्सव के साथ नई कक्षाएं शुरू होंगी। इस पूरे मॉडल का उद्देश्य शिक्षा के स्तर में सुधार लाना, अनुशासन बढ़ाना और छात्रों को बेहतर वातावरण देना है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार, इस पहल के जरिए आत्मानंद स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ-साथ बच्चों को संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

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केमिकल आपदा से निपटने की तैयारी: 23 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में मॉक ड्रिल

केंद्र सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में रासायनिक और औद्योगिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 23 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। पहले इस अभ्यास में केवल 10 जिलों को शामिल किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए एनडीएमए ने 1 मार्च 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए थे। मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की जा रही है। 10 अप्रैल को ओरिएंटेशन और समन्वय बैठक हो चुकी है, जबकि 21 अप्रैल को ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ के तहत संभावित आपदा स्थितियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 23 अप्रैल को जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति जैसा अभ्यास किया जाएगा। इस ड्रिल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर की आपदा प्रबंधन योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता की जांच करना है। अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे और राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं तथा आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह तैनात रहेंगी। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों के इलाज और बचाव कार्यों का रिहर्सल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित कई अन्य विभाग जैसे नगर सेना, ऊर्जा, जल संसाधन, लोक निर्माण और नगरीय निकाय मिलकर काम करेंगे। मॉक ड्रिल के बाद 20 मई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। औद्योगिक हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले तीन वर्षों में 296 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 तक के 13 महीनों में 171 हादसों में 124 लोगों की जान गई और 86 घायल हुए हैं।केंद्र सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में रासायनिक और औद्योगिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 23 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। पहले इस अभ्यास में केवल 10 जिलों को शामिल किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए एनडीएमए ने 1 मार्च 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए थे। मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की जा रही है। 10 अप्रैल को ओरिएंटेशन और समन्वय बैठक हो चुकी है, जबकि 21 अप्रैल को ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ के तहत संभावित आपदा स्थितियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 23 अप्रैल को जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति जैसा अभ्यास किया जाएगा। इस ड्रिल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर की आपदा प्रबंधन योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता की जांच करना है। अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे और राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं तथा आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह तैनात रहेंगी। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों के इलाज और बचाव कार्यों का रिहर्सल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित कई अन्य विभाग जैसे नगर सेना, ऊर्जा, जल संसाधन, लोक निर्माण और नगरीय निकाय मिलकर काम करेंगे। मॉक ड्रिल के बाद 20 मई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। औद्योगिक हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले तीन वर्षों में 296 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 तक के 13 महीनों में 171 हादसों में 124 लोगों की जान गई और 86 घायल हुए हैं। मॉक ड्रिल के लिए अलग-अलग जिलों को विशेष परिदृश्य दिए गए हैं। इनमें स्टील प्लांट, सीमेंट फैक्ट्री, केमिकल इकाइयां, पाइपलाइन, पेपर मिल और खदान जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में संभावित हादसों को शामिल किया गया है। इसके अलावा टैंकर दुर्घटना, अस्पताल में आग, बस हादसा और ट्रेन टक्कर जैसे आपात हालात पर भी अभ्यास किया जाएगा।

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रायपुर में नकली पनीर का बड़ा खुलासा: 1200 किलो जब्त, सेहत के लिए बना ‘धीमा जहर’

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली पनीर बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। भाठागांव स्थित केसरी बगीचा इलाके में संचालित एक फैक्ट्री से करीब 1200 किलो मिलावटी पनीर जब्त किया गया। इस दौरान मौके से पामFake Dairy Products,ऑयल, दूध पाउडर, एसेटिक एसिड और अन्य रसायन भी बरामद किए गए, जिनसे यह पनीर तैयार किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, इस फैक्ट्री का संचालन आदर्श पराशर द्वारा किया जा रहा था। विभाग को पहले ही नकली पनीर निर्माण की सूचना मिली थी, जिसके बाद रविवार को छापेमारी की योजना बनाई गई। टीम सुबह करीब 11:30 बजे मौके पर पहुंची, जहां बड़े पैमाने पर पनीर की पैकेजिंग होती मिली। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी फैक्ट्री पर जनवरी 2026 में भी कार्रवाई करते हुए 1700 किलो नकली पनीर जब्त कर नष्ट किया गया था। इसके बावजूद दोबारा इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन होना कई सवाल खड़े कर रहा है। कार्रवाई के लिए इस बार रायपुर की टीम को शामिल नहीं किया गया, बल्कि अन्य जिलों जैसे धमतरी, बालोद और बलौदाबाजार से अधिकारियों को बुलाकर अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इसी दौरान उरला क्षेत्र में स्थित एक अन्य डेयरी पर भी छापा मारा गया, जहां गंदगी के बीच पनीर बनाया जा रहा था। वहां से 500 किलो पनीर नष्ट किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री पिछले करीब 6 साल से संचालित हो रही थी, जबकि इसका लाइसेंस हाल ही में 2025 में लिया गया था। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर मध्यप्रदेश के भिंड और मुरैना के बताए जा रहे हैं, जिनके रहने की व्यवस्था भी वहीं की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का मिलावटी पनीर सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसके सेवन से शुरुआत में अपच और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि लंबे समय तक उपयोग करने पर लिवर को गंभीर नुकसान, हार्ट डिजीज और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार सेवन करने से कुछ ही वर्षों में लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी शामिल है।

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राजनांदगांव में अवैध शराब पर सख्ती, चिचोला और घुमका में खुलीं शासकीय मदिरा दुकानें

राजनांदगांव जिले में अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को चिचोला (रंगीटोला) और घुमका में नई देशी कम्पोजिट मदिरा दुकानों की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य अवैध शराब बिक्री को रोकना और लोगों को सुरक्षित व मानक के अनुरूप मदिरा उपलब्ध कराना है। इन दोनों इलाकों में पहले कोई सरकारी शराब दुकान नहीं थी, जिसके चलते अवैध शराब बेचने वाले सक्रिय हो गए थे। ग्रामीणों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नकली और मिलावटी शराब के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। आम तौर पर शराब दुकानों का विरोध देखने को मिलता है, लेकिन यहां हालात अलग थे। ग्रामीणों ने खुद आगे आकर सामाजिक समस्याओं और अवैध गतिविधियों से छुटकारा पाने के लिए सरकारी दुकान खोलने की मांग की थी। नई दुकानों का उद्घाटन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रमुखों की मौजूदगी में किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि अब सरकारी नियंत्रण में गुणवत्ता और कीमत तय होने से पारदर्शिता बनी रहेगी। जिला आबकारी अधिकारी अभिषेक तिवारी के अनुसार, इन दुकानों को शुरू करने के पीछे तीन मुख्य मकसद हैं—अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाना, लोगों को लैब-टेस्टेड और सुरक्षित मदिरा उपलब्ध कराना, और अवैध कारोबार से होने वाले राजस्व नुकसान को रोकना। घुमका के निवासी पंकज माले ने बताया कि पहले बाहर से आने वाली मिलावटी शराब के कारण युवाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। अब सरकारी दुकान खुलने से न केवल पारदर्शी बिक्री होगी, बल्कि गांव में अवैध गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।

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महासमुंद में 3 हत्याओं से सनसनी: पारिवारिक विवाद, बदला और नशे में झगड़े में गई तीन लोगों की जान

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में तीन अलग-अलग हत्या के मामले सामने आए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पहला मामला:एक युवक Satyanarayan Dhruv को उसके ही पिता Mahesh Dhruv और छोटे भाई ने मार डाला।बताया गया कि वह शराब पीकर घर में झगड़ा करता था। गुस्से में छोटे भाई ने उस पर पत्थर से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में पिता और बेटे ने मिलकर शव को बोरी में भरकर कुएं में फेंक दिया। दूसरा मामला:एक युवक Prakash Patel की उसके दोस्तों ने हत्या कर दी।आरोपियों Chandrahas Netam, Gopal Pradhan और Jalandhar Sonwani ने पुरानी दुश्मनी के कारण उसे जंगल ले जाकर कांच की बोतल और पत्थर से मार दिया। तीसरा मामला:बच्चे की कस्टडी को लेकर हुए विवाद में Anwar Khan की चाकू मारकर हत्या कर दी गई।बताया गया कि आरोपी Rakesh Sahu ने झगड़े के दौरान हमला किया। इस घटना में मृतक के बेटे और बेटी भी घायल हो गए। तीनों मामलों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

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रायगढ़ में ग्रामीण की हत्या मामले में बड़ा फैसला, आरोपियों को उम्रकैद की सजा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक हत्या के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। दो आरोपियों को एक ग्रामीण की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा दी गई है। यह मामला साल 2019 का है। गांव में जंगली सुअर के मांस को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि Ratthuram Rathia और Sitaram Rathia ने गुस्से में आकर गांव के ही Shyam Lal Rathia को डंडे से बुरी तरह पीटा। हमले में श्याम लाल को सिर और चेहरे पर गंभीर चोट आई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मामले की शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा के जज Abhishek Sharma ने दोनों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

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रायगढ़ में ट्रैक्टर पलटने से युवक की मौत, शादी के दो दिन बाद हुआ हादसा

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें एक युवक की मौत हो गई और उसके तीन साथी घायल हो गए। मरने वाले युवक Devangan Sidar की शादी सिर्फ दो दिन पहले हुई थी। शादी के बाद वह अपने दोस्तों के साथ ट्रैक्टर में टेंट का सामान लेकर पास के गांव जा रहा था। रास्ते में ट्रैक्टर तेज रफ्तार में था और अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे में Devangan Sidar ट्रैक्टर के नीचे दब गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके साथ मौजूद तीन अन्य लोग भी घायल हुए। घटना के बाद सभी को अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे रायपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

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छत्तीसगढ़ में 1 मई से जनगणना का पहला चरण शुरू, 33 सवालों के साथ होगी डिजिटल सर्वे प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का पहला चरण 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 मई तक चलेगा। इस चरण में ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके लिए सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को डिजिटल रूप दिया गया है। 16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच नागरिक खुद भी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी भर सकते हैं, जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा जा रहा है। जो लोग यह प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी करेंगे, उन्हें एक यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में सर्वे के दौरान दिखाना होगा। इस चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें मकान की स्थिति, उसका उपयोग (रहने या व्यवसाय के लिए), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा या पक्का), परिवारों की संख्या और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, खाना बनाने के ईंधन, इंटरनेट, टीवी और रेडियो जैसी सुविधाओं की जानकारी भी दर्ज की जाएगी। घर में रहने वाले लोगों की संख्या और उपयोग में आने वाले वाहनों का विवरण भी लिया जाएगा। इस बार हर मकान की जियो-टैगिंग की जाएगी, जिससे उसे डिजिटल मैप पर दर्ज किया जा सकेगा। इससे आपदा प्रबंधन में तेजी आएगी और किसी भी स्थिति में तुरंत जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन, शहरी विकास की योजना, और पलायन के आंकड़ों को समझने में भी मदद मिलेगी। यह डेटा मतदाता सूची में डुप्लीकेट नामों को हटाने में भी सहायक होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल नीतिगत फैसलों और योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि केवल अधिकृत पहचान पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी दें और सही जानकारी साझा करें।

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रायपुर में महिला कॉन्स्टेबल की संदिग्ध मौत: Pooja Kushwaha का शव फंदे पर मिला, जांच जारी

राजधानी रायपुर से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां महिला कॉन्स्टेबल Pooja Kushwaha का शव उनके घर में फांसी के फंदे पर लटका हुआ मिला। यह घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र स्थित पुलिस कॉलोनी की है, जहां वह अकेले रहती थीं। शनिवार रात करीब 8:30 बजे पड़ोसियों को घटना की जानकारी मिली। खिड़की से झांककर देखने पर उन्होंने कॉन्स्टेबल को फंदे से लटका पाया, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, फिर शव को कब्जे में लिया। पुलिस ने मृतका के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है। इस घटना के बाद पुलिस कॉलोनी में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। मामले को लेकर अतिरिक्त डीसीपी Rahul Dev Sharma ने बताया कि शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन असली कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और हर पहलू से जांच की जा रही है। मृतका के पारिवारिक और निजी जीवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही सहकर्मियों और परिजनों से पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना के पीछे की वजह स्पष्ट हो सके। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

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