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DSP कल्पना–कारोबारी विवाद की जांच में नया मोड़, जांच अधिकारी का तबादला

दंतेवाड़ा में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा और रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन के बीच चल रहे विवाद की जांच के दौरान बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मामले की जांच कर रहे एएसपी कीर्तन राठौर का तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब राजनांदगांव में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर एएसपी कीर्तन राठौर इस संवेदनशील मामले की जांच कर रहे थे। तबादले से पहले उन्होंने डीएसपी कल्पना वर्मा और कारोबारी दीपक टंडन—दोनों के अलग-अलग बयान दर्ज किए थे। जांच के बाद उनकी रिपोर्ट दो से तीन दिनों में सीनियर अधिकारियों को सौंपे जाने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही उनका ट्रांसफर हो गया। कारोबारी ने लगाए गंभीर आरोप, डिजिटल सबूत सौंपे बयान के दौरान कारोबारी दीपक टंडन ने आरोप लगाया कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने उन्हें प्रेम संबंध का झांसा देकर करोड़ों रुपये लिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि महादेव सट्टा मामले से जुड़े काम को लेकर विवाद हुआ। कारोबारी ने अपने आरोपों के समर्थन में डिजिटल साक्ष्य भी जांच अधिकारी को सौंपे हैं। डीएसपी कल्पना वर्मा ने लगाए पलटवार के आरोप वहीं डीएसपी कल्पना वर्मा ने सोमवार, 22 दिसंबर को एएसपी कार्यालय पहुंचकर करीब दो घंटे तक अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने कारोबारी पर परिजनों के पैसे नहीं लौटाने और जानबूझकर उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया है। विवाद की पृष्ठभूमि इस पूरे मामले की शुरुआत 10 दिसंबर को हुई, जब कारोबारी दीपक टंडन ने मीडिया के सामने बयान देकर आरोप लगाया कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने उन्हें भावनात्मक रूप से फंसाकर करोड़ों रुपये लिए और अब पत्नी को छोड़ने का दबाव बना रही हैं। मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद डीएसपी कल्पना वर्मा ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कारोबारी पर बदनाम करने का आरोप लगाया और कानूनी कार्रवाई की बात कही। इसके बाद कारोबारी दीपक टंडन के खिलाफ अलग-अलग मामलों में केस दर्ज होने और वारंट जारी होने की जानकारी सामने आई। इसी दौरान कारोबारी से मारपीट का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसके बाद दीपक टंडन ने आईजी और डीजीपी को शिकायत भेजी, जिसमें डीएसपी कल्पना वर्मा और महादेव सट्टा नेटवर्क का उल्लेख किया गया। पहली बार 22 दिसंबर को दर्ज हुए बयान शिकायत के बाद डीएसपी कल्पना वर्मा पहली बार 22 दिसंबर को एसएसपी कार्यालय पहुंचीं और जांच अधिकारी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। इसके बाद कारोबारी दीपक टंडन ने भी एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अपना पक्ष रखा। कैसे शुरू हुई दोस्ती जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2021 में जब डीएसपी कल्पना वर्मा महासमुंद में पदस्थ थीं, तब वे अपने कुछ सहयोगियों के साथ कारोबारी टंडन के होटल पहुंची थीं। कल्पना के एक बैचमेट और टंडन के बीच पहले से जान-पहचान थी, जिसके जरिए दोनों की मुलाकात हुई। इसके बाद फोन नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और संपर्क बढ़ता गया। आरोप है कि इसके बाद दोनों के बीच मुलाकातें बढ़ीं और साथ घूमने-फिरने व छोटे टूर पर जाने का सिलसिला शुरू हुआ। चेक बाउंस केस भी विवाद में शामिल कारोबारी दीपक टंडन का दावा है कि एक डील के तहत उनकी पत्नी के खाते से भुगतान होना था, लेकिन बाद में सौदा पूरा नहीं हो पाया। जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो दूसरे पक्ष ने चेक देने से इनकार कर दिया। इसके कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी के खिलाफ चेक बाउंस का केस दर्ज करा दिया गया। टंडन का आरोप है कि इसी दौरान उन्हें यह एहसास हुआ कि उनके साथ ठगी की गई है। उन्होंने दावा किया कि डीएसपी कल्पना वर्मा को उन्होंने दो करोड़ रुपये से अधिक की रकम और सामान दिया है।

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बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर रायपुर में आक्रोश, पंडरी मंडी गेट पर यूनुस का पुतला दहन

गृहमंत्री विजय शर्मा बोले – जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई रायपुर में नए साल से पहले ड्रग्स से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक युवक और युवती ड्रग्स, नकदी और मोबाइल के साथ नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो अमलीडीह इलाके का बताया जा रहा है। करीब 17 सेकेंड के इस वीडियो में युवक मोबाइल पर किसी से बातचीत करता दिखाई दे रहा है, जबकि युवती खुद वीडियो बनाते हुए गालियां देती नजर आती है। वीडियो में टेबल पर संभावित MDMA या कोकीन की 19 लाइन साफ दिखाई दे रही हैं। इसके साथ ही टेबल पर नकदी और एक क्रेडिट कार्ड भी रखा हुआ नजर आता है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो खुद युवती ने ही रिकॉर्ड किया था, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। गृहमंत्री का बयान इस मामले पर प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। वायरल वीडियो की जांच करवाई जा रही है और दोषियों की पहचान के बाद उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस एंड-टू-एंड इन्वेस्टिगेशन कर रही है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले करीब 6 महीने पहले भी रायपुर में ड्रग्स से जुड़े वीडियो सामने आए थे, जिसके बाद पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 79 ड्रग्स पैडलर्स को गिरफ्तार किया था। उस कार्रवाई में करोड़ों रुपये का नशीला सामान जब्त किया गया था। हालांकि कुछ समय की शांति के बाद, नए साल के मद्देनजर एक बार फिर ड्रग्स नेटवर्क सक्रिय होता दिख रहा है। MDMA क्या है और कितना खतरनाक? MDMA यानी मिथाइलीनडाइऑक्सी मेथाम्फेटामाइन, जिसे मेफेड्रोन या एक्सटेसी भी कहा जाता है। यह एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसकी कीमत करीब 15 हजार रुपये प्रति ग्राम बताई जाती है। नशा करने के बाद व्यक्ति में अत्यधिक उत्तेजना और मदहोशी आती है। ज्यादा मात्रा में सेवन जानलेवा भी साबित हो सकता है। रायपुर में कौन-कौन से नशे बिक रहे? रायपुर पुलिस ने 2025 में अब तक 700 से ज्यादा नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गांजा, MDMA, LSD, विदेशी गांजा (OG), हेरोइन, नशीली गोलियां, अफीम और कफ सिरप जैसे नशे शहर में बेचे जा रहे हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी ओडिशा से गांजा, जबकि महाराष्ट्र, दिल्ली और पंजाब-हरियाणा से ड्रग्स लाकर रायपुर सहित अन्य जिलों में सप्लाई कर रहे हैं। शहर के होटल, पब और फार्म हाउस में होने वाली प्राइवेट पार्टियों में कोडवर्ड के जरिए ड्रग्स बेचे जाने की बात भी पहले सामने आ चुकी है।

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बांग्लादेश में हिंदू युवक की हत्या पर रायपुर में आक्रोश, पंडरी मंडी गेट पर यूनुस का पुतला दहन

रायपुर।बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की कथित निर्मम हत्या को लेकर देशभर में रोष देखा जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 📍पंडरी मंडी गेट पर आज रायपुर युवा मोर्चा द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद पर बैठे मोहम्मद यूनुस का पुतला दहन किया। पुलिस हिरासत में था दीपू, फिर भी नहीं बचाई गई जान इस मामले में बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, दीपू चंद्र दास की हत्या से पहले वह पुलिस की हिरासत में था, लेकिन इसके बावजूद उसे कट्टरपंथी भीड़ से नहीं बचाया गया। तस्लीमा नसरीन ने दावा किया कि दीपू पर दो बार हमला हुआ—पहली बार भीड़ द्वारा और दूसरी बार उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें घटना से पहले के हालात दिखाई देने का दावा किया गया है। झूठे ईशनिंदा आरोप का दावा तस्लीमा नसरीन ने कहा कि दीपू के साथ काम करने वाले एक मुस्लिम सहकर्मी ने निजी रंजिश के चलते उस पर पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी करने का झूठा आरोप लगाया था। दीपू ने इस पूरे मामले की शिकायत पहले ही पुलिस से की थी, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ बताया जा रहा है कि दीपू चंद्र दास अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी आमदनी से उसके दिव्यांग पिता, मां, पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण होता था। तस्लीमा नसरीन ने सवाल उठाते हुए कहा कि अब इस परिवार का भविष्य क्या होगा और उन्हें न्याय कौन दिलाएगा। फैक्ट्री का वीडियो भी आया सामने घटना से पहले का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें कपड़ा फैक्ट्री के अंदर दीपू को भीड़ द्वारा घेरते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर अव्रो नील हिंदू द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया है कि दीपू अपने बकाया पैसे मांग रहा था, इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और बाद में हिंसा भड़क गई। रायपुर में कड़ा विरोध, न्याय की मांग रायपुर में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ हो रही हिंसा मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस की मौजूदगी में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। फिलहाल यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बना हुआ है और लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

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रायपुर में गांजा तस्करी के साथ वन्यजीव तस्करी का खुलासा: स्कूटी की डिक्की से मिले 2 गोह, 5 किलो गांजा और 1.27 लाख नकद

रायपुर में गांजा तस्करी के साथ वन्यजीव तस्करी का खुलासा: स्कूटी की डिक्की से मिले 2 गोह, 5 किलो गांजा और 1.27 लाख नकद रायपुर जिले के आरंग थाना क्षेत्र में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसके पास से न सिर्फ अवैध गांजा बल्कि संरक्षित वन्यजीव मॉनिटर लिजर्ड (गोह) भी बरामद किए गए हैं। आरोपी के कब्जे से 5 किलो गांजा, 2 जीवित गोह और 1 लाख 27 हजार 260 रुपये नकद जब्त किए गए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख 77 हजार रुपये आंकी गई है। थाना प्रभारी हरीश साहू के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक स्कूटी से गांजा लेकर आरंग इलाके में सप्लाई करने आ रहा है। सूचना के आधार पर इंदिरा चौक के पास घेराबंदी कर संदिग्ध स्कूटी सवार को रोका गया। तलाशी लेने पर आरोपी के पास से गांजा, नकदी और स्कूटी की डिक्की में रखे दो संरक्षित वन्यजीव बरामद हुए। पुलिस ने मौके पर ही गांजा, कैश और स्कूटी जब्त कर ली। पकड़े गए व्यक्ति की पहचान हुकूमत साहू (उम्र 37 वर्ष), निवासी तेलीबांधा के रूप में हुई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी पर पहले से हत्या, मारपीट समेत करीब 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इस मामले में आरोपी के खिलाफ NDPS एक्ट और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अब इस तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है। बरामद दोनों गोह को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ दिया गया है। क्या है मॉनिटर लिजर्ड (गोह)?मॉनिटर लिजर्ड, जिसे आमतौर पर गोह कहा जाता है, एक बड़ा सरीसृप होता है जो खेतों और खुले इलाकों में पाया जाता है। यह तेज दौड़ने, पेड़ों पर चढ़ने और तैरने में सक्षम होता है। चूहे, कीड़े-मकोड़े और छोटे जीव इसका भोजन होते हैं। यह दिखने में बड़ी छिपकली जैसा होता है, जिसकी पकड़ काफी मजबूत होती है। विशेषज्ञों के अनुसार गोह को लेकर यह भ्रांति है कि वह जहरीली होती है, जबकि वास्तव में उसमें किसी प्रकार का जहर नहीं होता और वह इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाती। मॉनिटर लिजर्ड वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है। इसके शिकार, खरीद-बिक्री या किसी भी अंग को रखना कानूनन गंभीर अपराध है। यह प्रजाति CITES की एपेंडिक्स-1 सूची में भी दर्ज है, जिसके तहत इसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है।

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बस्तर संभाग में निवेश का विस्तार, हजारों युवाओं को मिला रोजगार

छत्तीसगढ़ में निवेश का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसका असर अब आदिवासी बहुल इलाकों तक साफ दिखाई देने लगा है। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने शुक्रवार को नवा रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि नवंबर 2024 से अब तक राज्य को कुल 7.83 लाख करोड़ रुपये के 219 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन परियोजनाओं के जरिए 43 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। मंत्री देवांगन के मुताबिक, छत्तीसगढ़ अब सिर्फ निवेश आमंत्रित ही नहीं कर रहा, बल्कि परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर भी उतार रहा है। निवेश प्रस्ताव सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सीमेंट, बिजली और मैन्युफैक्चरिंग जैसे 18 अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि निवेश अब केवल रायपुर तक सीमित नहीं है। कुल प्रस्तावित निवेश में करीब 21 प्रतिशत बस्तर संभाग में होने की संभावना है, जबकि 33 प्रतिशत रायपुर संभाग और शेष 46 प्रतिशत निवेश बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में प्रस्तावित है। कुल परियोजनाओं में 57 ऐसी हैं, जिनमें निवेश राशि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है, वहीं 34 परियोजनाएं एक हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार देने वाली हैं। वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि 6,063 करोड़ रुपये की 9 बड़ी परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनमें उत्पादन चालू हो गया है। इनसे अब तक 5,500 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधारों से विवेकाधिकार कम हुआ है और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ी है, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि कुल निवेश प्रस्तावों में से 58 प्रतिशत परियोजनाएं आतिथ्य एवं स्वास्थ्य, फूड प्रोसेसिंग, आईटी, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और फार्मा जैसे प्राथमिक क्षेत्रों से जुड़ी हैं। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेश प्रस्ताव मिलने के बाद परियोजनाएं अटकें नहीं। तेज भूमि आवंटन, डिजिटल मंजूरी और बे

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कांग्रेस ने एसपी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन, पुलिस पर शिकायत न लेने का आरोप

बीजेपी आईटी सेल के खिलाफ शिकायत दर्ज न किए जाने को लेकर कांग्रेस ने एसपी कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे बीते कई दिनों से पुलिस प्रशासन से शिकायत दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिलाध्यक्ष श्रीकुमार मेनन के नेतृत्व में कांग्रेस के नेता और पदाधिकारी करीब एक घंटे से एसपी कार्यालय के बाहर बैठकर नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लगातार एसपी से मिलने का समय मांग रहे हैं, लेकिन अभी तक मुलाकात नहीं हो पाई है। धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए और तत्काल कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी शिकायत दर्ज नहीं की जाती, तब तक उनका धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

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रायपुर: गुरु घासीदास जयंती की शोभायात्रा में चाकूबाजी, डांस को लेकर हुए विवाद में युवक की मौत

रायपुर में गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मोवा रोड इलाके में DJ पर नाचने को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक 18 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में करीब छह युवकों को हिरासत में लिया है, जिनमें कुछ नाबालिग भी बताए जा रहे हैं। घटना गुरुवार देर रात मोवा बाजार के पास हुई। शोभायात्रा में धुमाल बैंड की धुन पर नाचते समय कुछ युवकों के बीच कथित छेड़खानी को लेकर कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते विवाद धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गया। इसी दौरान किसी युवक ने धारदार हथियार से 18 वर्षीय दिनेश निषाद, पिता गोपाल निषाद, निवासी डबरीपारा (मोवा तालाब के पास) पर हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल दिनेश को देर रात अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जोमैटो डिलीवरी ब्वॉय था मृतक पंडरी थाना प्रभारी स्वराज त्रिपाठी ने बताया कि मृतक दिनेश निषाद जोमैटो में डिलीवरी ब्वॉय के तौर पर काम करता था। घटना के बाद पुलिस ने आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पंडरी थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का दावा है कि शनिवार तक पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। समाज के लोगों ने जताया आक्रोश घटना से नाराज समाज के पदाधिकारी शुक्रवार शाम पंडरी थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि शोभायात्रा में कई बस्तियों के लोग शामिल थे। भीड़ में धुमाल बैंड के साथ घुसे कुछ युवकों को बाहर निकालने के दौरान विवाद हुआ, जो बाद में हिंसक रूप ले बैठा। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और CCTV फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

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BJP नेता द्वारा CM से 1500 करोड़ मांगने के दावे पर सियासी घमासान, FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि एक भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से 1500 करोड़ रुपए की मांग की है। वीडियो सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। भाजपा ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बताते हुए इसे कांग्रेस की सोची-समझी साजिश करार दिया है। मामले को गंभीर मानते हुए रायपुर उत्तर विधानसभा से भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है। विधायक ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं और सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा जानबूझकर झूठा और भ्रामक वीडियो फैलाया गया, जिसका उद्देश्य भाजपा नेतृत्व और राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाना है। पुरंदर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई गई बातें मनगढ़ंत हैं और मुख्यमंत्री या भाजपा के किसी भी नेता ने इस तरह की कोई मांग नहीं की है। उनका कहना है कि वीडियो में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और झूठे संवाद जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई है। विधायक के मुताबिक यह दुष्प्रचार न केवल नेताओं की छवि खराब करने का प्रयास है, बल्कि इससे जनता को गुमराह कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनविश्वास पर भी चोट पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि फर्जी वीडियो के जरिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, संगठन महामंत्री अजय जम्वाल, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव और संगठन महामंत्री पवन साय पर कथित तौर पर 1500 करोड़ रुपए की ‘वसूली’ का झूठा आरोप लगाया गया है। पुरंदर मिश्रा ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच साइबर सेल को सौंपी जाए और वीडियो बनाने, अपलोड करने और वायरल करने वालों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाए। शिकायत के साथ पुलिस को वीडियो के स्क्रीनशॉट, लिंक और संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट्स की सूची भी सौंपी गई है। शिकायत के बाद सिविल लाइन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह वीडियो कांग्रेस की ओर से जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, सफाई देना उनकी जिम्मेदारी है। सुशील शुक्ला ने कहा कि अगर 1500 करोड़ रुपए के लेन-देन का आरोप लगा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि छोटे-छोटे मामलों में ईडी और ईओडब्ल्यू जांच करती है, तो इस मामले में भी जांच से क्यों डर है। एफआईआर दर्ज कराना केवल दबाव बनाने की कोशिश है।

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निजी स्कूलों में RTE से अब सिर्फ कक्षा-1 में मिलेगा दाखिला

नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 में गरीब बच्चों की एंट्री बंद, अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधान के अनुसार अब निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों को नर्सरी के बजाय सीधे कक्षा-1 से ही प्रवेश मिलेगा। यह व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। सरकार के इस फैसले से राज्य को सालाना करीब 63 करोड़ रुपए की बचत होगी, लेकिन इसका सीधा असर गरीब परिवारों और उनके बच्चों पर पड़ेगा। पहले जहां नर्सरी से ही बच्चों को मुफ्त शिक्षा मिलती थी, अब अभिभावकों को नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 की पूरी फीस खुद वहन करनी होगी। क्यों बदला गया नियम आरटीई अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इसी आधार पर निजी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। करीब 12 साल पहले छत्तीसगढ़ में नर्सरी से ही RTE के तहत दाखिले की अनुमति दी गई थी, लेकिन नए निर्देशों में इसे खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ कक्षा-1 को ही प्रवेश कक्षा माना जाएगा। गरीब बच्चों के सामने मुश्किलें इस बदलाव के बाद बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के बच्चे कक्षा-1 से पहले निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। जो अभिभावक फीस चुकाने में सक्षम होंगे, वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में दाखिला दिलाएंगे। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के पास आंगनबाड़ी या सीमित सरकारी विकल्प ही बचेंगे। अधिकांश सरकारी स्कूलों में नर्सरी की सुविधा नहीं है, सिर्फ कुछ आत्मानंद स्कूलों में ही पीपी-1 और पीपी-2 संचालित हैं। फायदे और नुकसान नुकसान फायदा शिक्षा विशेषज्ञों की चिंता शिक्षाविदों का मानना है कि 3 से 6 वर्ष की उम्र बच्चों के विकास के लिए सबसे अहम होती है। इस उम्र में भाषा, व्यवहार और सीखने की बुनियाद पड़ती है। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा से वंचित रहने पर गरीब बच्चों का शैक्षणिक स्तर कमजोर रह सकता है। इससे आत्मविश्वास में कमी, पढ़ाई में पिछड़ना और ड्रॉपआउट का खतरा बढ़ सकता है। खर्च का गणित ऐसे समझें इस सत्र में प्रदेश के 6,947 निजी स्कूलों में RTE के तहत करीब 53 हजार सीटें थीं। इनमें से लगभग 30 हजार सीटें नर्सरी स्तर की थीं। सरकार प्रति छात्र 7 हजार रुपए सालाना की प्रतिपूर्ति करती थी। यदि नर्सरी से लेकर केजी तक 90 हजार बच्चों को शामिल किया जाए, तो सरकार पर लगभग 63 करोड़ रुपए का वार्षिक खर्च आता था, जो अब बचेगा। एक्सपर्ट की राय शिक्षाविद राजीव गुप्ता के अनुसार, यह फैसला शैक्षणिक असमानता को और बढ़ाएगा। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा से वंचित बच्चे फॉनिक्स, बुनियादी शब्दावली और कक्षा की दिनचर्या से अनजान रहेंगे। इससे कक्षा-1 का अंग्रेजी माध्यम पाठ्यक्रम उनके लिए भारी साबित होगा। परिणामस्वरूप स्कूलों में रेमेडियल क्लासेस की जरूरत पड़ेगी, लेकिन संसाधनों की कमी इसे मुश्किल बना देगी। यह स्थिति अभिभावकों पर मानसिक दबाव बढ़ाएगी और बच्चों के स्कूल छोड़ने की आशंका भी बढ़ा सकती है।

निजी स्कूलों में RTE से अब सिर्फ कक्षा-1 में मिलेगा दाखिला Read Post »

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शराब घोटाला मामला: ED रिमांड पर सौम्या चौरसिया, सिंडिकेट से 2500 करोड़ की अवैध कमाई का दावा

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को 14 दिन की रिमांड पर लिया है। इससे पहले उन्हें दो दिन की रिमांड पर रखा गया था। प्रारंभिक रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ED ने उन्हें दोबारा PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां विस्तारित रिमांड की अनुमति दी गई। ED ने सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयानों के आधार पर की है। जांच एजेंसी के अनुसार, सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर–चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड में कई अहम सबूत सामने आए हैं। ED का कहना है कि ACB/EOW द्वारा IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और करीब 2500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई (POC) की गई। एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले से सौम्या चौरसिया को लगभग 115.5 करोड़ रुपये मिले। डिजिटल साक्ष्यों, जब्त दस्तावेजों और लिखित बयानों से यह संकेत मिलता है कि सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं। ED के अनुसार, वे अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल सहित सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों के बीच समन्वयक और मध्यस्थ की भूमिका निभाती थीं, जिससे अवैध धन के उत्पादन और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिला। चैट्स से यह भी पता चला कि सिंडिकेट के शुरुआती गठन में उनकी अहम भूमिका रही और उन्होंने आबकारी विभाग में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों में भी हस्तक्षेप किया। इस मामले में पहले ही अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लो, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा और चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच अब भी जारी है। बचाव पक्ष का आरोपसौम्या के वकील हर्षवर्धन परगनिया ने आरोप लगाया कि ED ने उन्हें पूछताछ के नाम पर जोनल ऑफिस बुलाकर शाम 5:30 बजे अवैध रूप से गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि बिना मजिस्ट्रेट जांच के कहानी और रकम बदली गई। वहीं, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कोर्ट में पेशी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और प्रताड़ना के आरोप लगाए। पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारीED ने सौम्या चौरसिया को इससे पहले दिसंबर 2022 में कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया था। वे करीब ढाई साल जेल में रहीं और छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुई थीं। इसके बाद अब शराब घोटाले में उनकी दोबारा गिरफ्तारी हुई है। कोयला, DMF और आय से अधिक संपत्ति मामलों सहित वे अब तक चार अलग-अलग घोटालों में जेल जा चुकी हैं। व्हाट्सऐप चैट और ‘बिग बॉस’ ग्रुपED की प्रॉसीक्यूशन कंप्लेंट में सामने आया कि शराब घोटाले को संचालित करने के लिए ‘बिग बॉस’ नाम से एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया था, जिसमें सौम्या चौरसिया, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, चैतन्य बघेल और अन्य अहम लोग शामिल थे। इसी ग्रुप के जरिए पैसों के लेन-देन और निर्देश साझा किए जाते थे। 49 करोड़ से अधिक की संपत्ति अटैचACB-EOW ने हाल ही में सौम्या चौरसिया के खिलाफ 8000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी के मुताबिक, 17 साल की नौकरी में उन्हें 2.51 करोड़ रुपये वेतन मिला, जबकि उन्होंने करीब 49.69 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियां खरीदीं। इन संपत्तियों को अटैच कर लिया गया है। शराब घोटाले की कार्यप्रणालीED और EOW की जांच में सामने आया है कि यह घोटाला तीन स्तरों पर किया गया— इन सभी तरीकों से हजारों करोड़ रुपये की अवैध कमाई का दावा जांच एजेंसियों ने किया है।छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रहीं सौम्या चौरसिया को 14 दिन की रिमांड पर लिया है। इससे पहले उन्हें दो दिन की रिमांड पर रखा गया था। प्रारंभिक रिमांड अवधि पूरी होने के बाद ED ने उन्हें दोबारा PMLA कोर्ट में पेश किया, जहां विस्तारित रिमांड की अनुमति दी गई। ED ने सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयानों के आधार पर की है। जांच एजेंसी के अनुसार, सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर–चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड में कई अहम सबूत सामने आए हैं। ED का कहना है कि ACB/EOW द्वारा IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की गई थी। जांच में खुलासा हुआ कि शराब घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा और करीब 2500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई (POC) की गई। एजेंसी के मुताबिक, इस घोटाले से सौम्या चौरसिया को लगभग 115.5 करोड़ रुपये मिले। डिजिटल साक्ष्यों, जब्त दस्तावेजों और लिखित बयानों से यह संकेत मिलता है कि सौम्या चौरसिया शराब सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं। ED के अनुसार, वे अनिल टुटेजा और चैतन्य बघेल सहित सिंडिकेट के प्रमुख सदस्यों के बीच समन्वयक और मध्यस्थ की भूमिका निभाती थीं, जिससे अवैध धन के उत्पादन और मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिला। चैट्स से यह भी पता चला कि सिंडिकेट के शुरुआती गठन में उनकी अहम भूमिका रही और उन्होंने आबकारी विभाग में प्रमुख पदों पर नियुक्तियों में भी हस्तक्षेप किया। इस मामले में पहले ही अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लो, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा और चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच अब भी जारी है। बचाव पक्ष का आरोपसौम्या के वकील हर्षवर्धन परगनिया ने आरोप लगाया कि ED ने उन्हें पूछताछ के नाम पर जोनल ऑफिस बुलाकर शाम 5:30 बजे अवैध रूप से गिरफ्तार किया। उन्होंने कहा कि बिना मजिस्ट्रेट जांच के कहानी और रकम बदली गई। वहीं, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने कोर्ट में पेशी के दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और प्रताड़ना के आरोप लगाए। पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारीED ने सौम्या चौरसिया को इससे पहले दिसंबर 2022 में कोल लेवी घोटाले में गिरफ्तार किया था। वे करीब ढाई साल जेल में रहीं और छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हुई थीं। इसके बाद

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