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रायपुर पुलिस कमिश्नरी को एक माह: 15,836 अपराध दर्ज, शहर में दुष्कर्म-चोरी तो देहात में हत्या के मामले ज्यादा

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू हुए एक माह पूरा हो गया है। इस दौरान 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 800 से ज्यादा बदमाशों की गिरफ्तारी की गई है। नई व्यवस्था के तहत शहर को तीन जोन—सेंट्रल, वेस्ट और नॉर्थ—में विभाजित किया गया है, जिनमें 21 थानों को शामिल किया गया है। प्रशासन का दावा है कि कमिश्नरी सिस्टम से पुलिसिंग मजबूत होगी और अपराधों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा। हालांकि, पिछले एक वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि जिले के 33 थानों में कुल 15,836 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें शहरी क्षेत्र के 21 थानों में दुष्कर्म, चोरी और जालसाजी के मामले अधिक रहे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के 12 थानों में हत्या, मारपीट, दहेज मृत्यु और सड़क हादसों में मौत के मामले ज्यादा सामने आए। वेस्ट जोन-2 सबसे संवेदनशील आंकड़ों के अनुसार कमिश्नरेट क्षेत्र में वेस्ट जोन-2 को सबसे संवेदनशील माना जा रहा है। यहां के 9 थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में 4,072 अपराध दर्ज हुए, जो अन्य जोनों की तुलना में अधिक हैं। “शुरुआत में आंकड़ों से घबराने की जरूरत नहीं” रिटायर्ड डीजी अन्वेष मंगलम का कहना है कि कमिश्नरी लागू होने के बाद थानों का पुनर्गठन हुआ है, इसलिए शुरुआत में अपराध के आंकड़े ज्यादा दिखाई दे सकते हैं। उनका मानना है कि अधिकारी-आधारित पुलिसिंग, नियमित पेट्रोलिंग और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले समय में अपराध में कमी आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि हर शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करना जरूरी है, ताकि अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। हर दिन 43 अपराध, रोज 5 से ज्यादा चोरी रायपुर जिले में औसतन प्रतिदिन 43 अपराध दर्ज हो रहे हैं। चोरी की घटनाएं सबसे ज्यादा हैं। पिछले साल 1,921 चोरी के मामले दर्ज हुए, जिनमें 1,442 वाहन चोरी और 479 मकान चोरी के मामले शामिल हैं। इसके अलावा, औसतन हर दिन एक अपहरण का मामला भी सामने आ रहा है। बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर जोर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला के अनुसार, फिलहाल बेसिक और विजिबल पुलिसिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। जोनवार अपराधों की समीक्षा कर यह तय किया जाएगा कि किस इलाके में किस प्रकार की घटनाएं अधिक हो रही हैं और उसी आधार पर रणनीति बनाई जाएगी। कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत को लेकर प्रशासन आश्वस्त है कि सख्त कार्रवाई और बेहतर मॉनिटरिंग से आने वाले महीनों में अपराध दर में गिरावट देखने को मिलेगी।

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छत्तीसगढ़ में होली पर ड्राई डे: सरकार का यू-टर्न, राज्यभर में बंद रहेंगी शराब दुकानें

छत्तीसगढ़ में होली के दिन शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव हुआ है। राज्य सरकार ने होली पर शराब बिक्री की अनुमति नहीं देने का फैसला किया है। आबकारी विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करेगा। आदेश जारी होने के बाद राज्यभर में होली के दिन सभी शराब दुकानें बंद रहेंगी। दरअसल, नई आबकारी नीति में पहले तय सात ड्राई डे में से तीन दिन—होली, मुहर्रम और 30 जनवरी (महात्मा गांधी निर्वाण दिवस)—को हटाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद यह माना जा रहा था कि इन अवसरों पर शराब दुकानें खुली रहेंगी। लेकिन अब सरकार ने अपना रुख बदलते हुए होली पर फिर से ड्राई डे लागू करने का निर्णय लिया है। कानून-व्यवस्था और सामाजिक पहलू को देखते हुए फैसला सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय सामाजिक समरसता और कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। होली जैसे बड़े त्योहार के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से शराब बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। हालांकि, अन्य ड्राई डे पूर्व निर्धारित नीति के अनुसार ही लागू रहेंगे। 2026-27 में सिर्फ चार तय ड्राई डे नई आबकारी नीति 2026-27 के तहत फिलहाल केवल चार दिन ही ड्राई डे घोषित किए गए हैं: इन तिथियों पर राज्यभर में शराब बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। 30 जनवरी को खुले दुकानों पर हुआ था विरोध गौरतलब है कि 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे महात्मा गांधी के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे और नियमों में बदलाव की मांग की थी। अब होली को लेकर सरकार के ताजा निर्णय से स्थिति साफ हो गई है कि त्योहार के दिन शराब बिक्री नहीं होगी। हालांकि, आबकारी विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही अंतिम स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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भोपाल में छत्तीसगढ़ की ब्यूटीशियन से दुष्कर्म का आरोप: धर्म परिवर्तन का दबाव, तीन आरोपी फरार

भोपाल/मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले की 30 वर्षीय ब्यूटीशियन ने भोपाल में तीन युवकों और एक महिला के खिलाफ दुष्कर्म और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की शिकायत दर्ज कराई है। मामला बागसेवनिया थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। होटल पार्टी से शुरू हुई पहचान पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 31 दिसंबर 2024 को शाहपुरा स्थित एक होटल में आयोजित जन्मदिन पार्टी के दौरान उसकी मुलाकात एक युवती से हुई। बाद में दोनों साथ रहने लगीं। जनवरी 2025 में वे बागसेवनिया क्षेत्र में रहने वाली अमरीन उर्फ माहिरा के पास शिफ्ट हो गईं। कुछ समय बाद उसे जानकारी मिली कि उसकी सहेली ने अमरीन के कहने पर धर्म परिवर्तन कर उसके भाई से शादी कर ली है। अलग-अलग समय पर दुष्कर्म का आरोप पीड़िता का आरोप है कि अगस्त 2025 में अमरीन का परिचित चंदन यादव उसे बहन से मिलाने के बहाने ले गया और धमकी देकर दुष्कर्म किया। बदनाम करने की धमकी देकर उसे चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद अलग-अलग समय पर उसके साथ कई बार दुष्कर्म किए जाने का आरोप है। पीड़िता ने यह भी बताया कि उसे छोटे कपड़े पहनाकर शहर के पब और लाउंज में ले जाया जाता था और अनजान लोगों से मेलजोल बढ़ाने का दबाव बनाया जाता था। इसी दौरान उस पर धर्म परिवर्तन करने के लिए भी दबाव डाला गया। नशीला पदार्थ देने का आरोप नवंबर 2025 में अमरीन उसे गांधी नगर स्थित अब्बास नगर में अपने परिजनों से मिलाने ले गई। आरोप है कि वहां अमरीन के भाई बिलाल ने चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोशी की हालत में दुष्कर्म किया। अहमदाबाद में भी वारदात का आरोप पीड़िता का कहना है कि दिसंबर 2025 में उसे काम के बहाने अहमदाबाद ले जाया गया, जहां यासिर नाम के युवक से मिलवाया गया और वहां भी दुष्कर्म किया गया। जनवरी 2026 में वह भोपाल छोड़कर छत्तीसगढ़ में अपने मामा के घर चली गई। दूसरी युवती के संपर्क में आने के बाद शिकायत हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से एक अन्य युवती ने भी अमरीन और उसके साथियों पर इसी तरह के आरोप लगाए। इसके बाद पीड़िता भोपाल पहुंची और बागसेवनिया थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। आरोपियों की तलाश जारी है। सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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CGPSC प्रीलिम्स 2026: पेपर ने बढ़ाई उलझन, कटऑफ घटने के संकेत; रायपुर में 4,500 से ज्यादा अभ्यर्थी अनुपस्थित

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 22 फरवरी को दो शिफ्ट में संपन्न हुई। परीक्षा 48 केंद्रों पर आयोजित की गई। इस बार प्रश्नपत्र का स्तर मॉडरेट से टफ के बीच रहा, जिससे अभ्यर्थियों में उलझन देखने को मिली। विशेषज्ञों के अनुसार कटऑफ में 5 से 10 अंकों तक गिरावट संभव है। उपस्थिति का आंकड़ा औसतन करीब 75% उपस्थिति रही, जबकि रायपुर में 4,500 से अधिक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हुए। कैसा रहा पेपर? सामान्य अध्ययन (GS-I) विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार पेपर अपेक्षाकृत कठिन रहा। सी-सैट (GS-II) सी-सैट सामान्य स्तर का रहा। गणित और रीजनिंग आसान से मध्यम स्तर के थे। हिंदी और छत्तीसगढ़ी भाषा से 20 प्रश्न पूछे गए। नियमित अभ्यास करने वाले अभ्यर्थियों के लिए क्वालिफाई करना कठिन नहीं माना जा रहा। क्यों उलझा पेपर? इसी वजह से पेपर कठिन से ज्यादा “भ्रमित करने वाला” माना जा रहा है। कटऑफ पर क्या असर? विश्लेषण के अनुसार ओवरऑल 56 प्रश्न सरल, 18 मॉडरेट और 26 कठिन रहे। अनुमान है कि इस बार जनरल वर्ग की कटऑफ 105-110 अंकों के बीच जा सकती है, जो पिछले सालों की तुलना में कम है। 238 पदों पर होगी भर्ती इस भर्ती के माध्यम से राज्य की विभिन्न सेवाओं में कुल 238 पदों पर नियुक्ति होगी। प्रमुख पद इस प्रकार हैं: पिछले दशक में पदों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया है। 2015 में 352 पदों पर भर्ती हुई थी, जबकि कोविड काल में यह संख्या घटकर 170 के आसपास रह गई थी। इस वर्ष 238 पदों के साथ प्रक्रिया जारी है। सख्त ड्रेस कोड और नियम आयोग ने परीक्षा के दौरान सख्त ड्रेस कोड लागू किया। बिना वैध फोटो पहचान पत्र प्रवेश नहीं दिया गया। प्रवेश पत्र और आईडी में नाम अंतर होने पर शपथ पत्र अनिवार्य था। आगे की रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि परिणाम की प्रतीक्षा करने के बजाय अभ्यर्थियों को तुरंत मुख्य परीक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। पेपर के पैटर्न से संकेत मिलता है कि आयोग अवधारणात्मक समझ और सूक्ष्म तथ्यों दोनों पर जोर दे रहा है।

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रायपुर सड़क हादसा: धान से भरा ट्रक कार पर पलटा, सर्जरी के बाद लौट रहे दंपती समेत 3 की मौत

रायपुर। राजधानी में रविवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। विधानसभा थाना क्षेत्र में धान से लदा ट्रक अचानक एक कार पर पलट गया। हादसे में कार सवार पति-पत्नी और ड्राइवर की मौत हो गई। दंपती अस्पताल से सर्जरी के बाद घर लौट रहे थे। पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान राजकुमार शर्मा (66) और उनकी पत्नी पद्मा शर्मा निवासी बलौदाबाजार के रूप में हुई है। कैब चालक का नाम प्रवीण बताया गया है। परिवार के बड़े बेटे ने पुणे से ऑनलाइन कैब बुक की थी, जिससे दंपती रायपुर से तिल्दा के लिए रवाना हुए थे। सर्जरी के बाद घर लौट रहे थे जानकारी के अनुसार राजकुमार शर्मा 10 फरवरी से रायपुर के एमएमआई अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी सफल बाइपास सर्जरी हुई थी। छुट्टी मिलने के बाद रविवार शाम वे पत्नी के साथ घर लौट रहे थे। जैसे ही कार पुरानी विधानसभा के पास नरदहा क्षेत्र पहुंची, हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, डीपीएस स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर के कारण कार की रफ्तार धीमी थी। उसी दौरान पीछे से आ रहा धान लदा ट्रक ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। ब्रेकर पर झटका लगने से ट्रक का लॉकिंग हुक टूट गया और वह अनियंत्रित होकर कार पर पलट गया। ट्रक और धान की बोरियां एक साथ कार पर गिर गईं। आधे घंटे में दंपती ने तोड़ा दम हादसे में कैब चालक की मौके पर ही मौत हो गई। पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल होकर कार में फंसे रहे। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू कर घायलों को बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज शुरू होने के करीब आधे घंटे के भीतर दोनों ने दम तोड़ दिया। ट्रक ड्राइवर हिरासत में डीएसपी वीरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि ट्रक पलौद के धान केंद्र से दोंदेकला कुटकी की ओर जा रहा था। ट्रक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। बताया जा रहा है कि मृतक के बड़े बेटे पुणे की एक एमएनसी में कार्यरत हैं, जबकि छोटा बेटा मनीष शर्मा रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़ा है। परिवार में शोक की लहर है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग जैसे मुद्दों पर सवाल खड़े करता है।

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रायपुर में निजी स्कूलों का बढ़ता दायरा: 10 में से 6 छात्र प्राइवेट संस्थानों में नामांकित

रायपुर। जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर जारी 2026 की ताजा APAAR आईडी स्टेटस रिपोर्ट ने बड़ा संकेत दिया है। आंकड़ों के मुताबिक अब रायपुर में सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कहीं अधिक हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि जिले में कुल 5,40,869 छात्र नामांकित हैं। इनमें से 2,22,265 छात्र सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अध्ययनरत हैं, जबकि 3,18,604 छात्र निजी स्कूलों में दर्ज हैं। यानी करीब 96 हजार से अधिक छात्र निजी स्कूलों में ज्यादा हैं। सरल शब्दों में कहें तो रायपुर में हर 10 में से लगभग 6 बच्चे प्राइवेट स्कूलों में और 4 बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। राजधानी ब्लॉक में सबसे ज्यादा अंतर रायपुर शहरी ब्लॉक के आंकड़े सबसे अधिक चौंकाने वाले हैं। यहां कुल 2,34,828 छात्र नामांकित हैं, जिनमें से 1,73,825 छात्र निजी और मदरसा स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जबकि केवल 61,003 छात्र सरकारी और एडेड स्कूलों में हैं। इसका अर्थ है कि राजधानी क्षेत्र में लगभग 70 से 80 प्रतिशत छात्र निजी संस्थानों की ओर रुख कर चुके हैं। धरसींवा जैसे औद्योगिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों की पकड़ मजबूत नजर आती है। ब्लॉकवार स्थिति सरकारी स्कूल अपेक्षाकृत मजबूत निजी स्कूलों का दबदबा यह ट्रेंड दर्शाता है कि ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूल अब भी टिके हुए हैं, जबकि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में निजी स्कूलों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। APAAR रिपोर्ट क्या है? APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) केंद्र सरकार की “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल का हिस्सा है। इसके तहत हर छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाती है, जो आधार सत्यापन से जुड़ी होती है। नामांकन, आधार वैलिडेशन और आईडी जनरेशन का पूरा डेटा डिजिटल डैशबोर्ड पर दर्ज किया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार रायपुर जिले में 95.11% छात्रों की APAAR आईडी बन चुकी है, जो डिजिटल कवरेज के लिहाज से बेहतर स्थिति दर्शाती है। विशेषज्ञों की राय शिक्षाविदों का मानना है कि निजी स्कूलों में बढ़ती संख्या के पीछे कई सामाजिक और संरचनात्मक कारण हैं। अभिभावकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि निजी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम, अनुशासन और प्रतिस्पर्धी वातावरण बेहतर मिलता है। दूसरी ओर, सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी, अधोसंरचना की चुनौतियां और बार-बार तबादलों जैसी समस्याएं पढ़ाई की निरंतरता को प्रभावित करती हैं। आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं? APAAR रिपोर्ट के आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि रायपुर में शिक्षा का संतुलन अब निजी संस्थानों की ओर झुक चुका है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाएं और अभिभावकों का विश्वास कैसे मजबूत किया जाए, ताकि नामांकन का अंतर कम हो सके।

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छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र: कवासी लखमा की वापसी, भाजपा नेताओं से गले मिले; आर्थिक सर्वेक्षण पेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण के साथ हुई। पहले ही दिन सदन में राजनीतिक और वित्तीय दोनों ही मोर्चों पर हलचल देखने को मिली। लंबे समय बाद सदन पहुंचे पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने भाजपा नेताओं से गले मिलकर मुलाकात की, वहीं वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की। सदन की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। राज्यपाल के अभिभाषण में सरकार की प्राथमिकताओं और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। अभिभाषण में बताया गया कि रायपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की स्थापना की जाएगी। साथ ही पिछले दो वर्षों में 532 नक्सलियों के न्यूट्रलाइज होने का दावा भी किया गया। एक साल बाद सदन में कवासी लखमा की वापसी करीब एक वर्ष तक जेल में रहने के बाद कवासी लखमा सत्र में शामिल हुए। सदन पहुंचते ही उन्होंने भाजपा नेता अजय चंद्राकर, रामविचार नेताम और धर्मजीत सिंह से गले मिलकर अभिवादन किया। सदन में अजय चंद्राकर ने उनकी पीठ थपथपाकर स्वागत भी किया। उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्हें सशर्त रूप से सत्र में भाग लेने की अनुमति दी गई है। विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वे केवल सदन की कार्यवाही में शामिल होंगे और अपने मामले से संबंधित किसी भी विषय पर वक्तव्य नहीं देंगे। उनकी आवाजाही और उपस्थिति का औपचारिक रिकॉर्ड रखा जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश, बजट कल वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की। 24 फरवरी को राज्य का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं पर फोकस सूत्रों के अनुसार इस बार का बजट गुड गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और उद्योग पर केंद्रित रहेगा। युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए विशेष योजनाएं प्रस्तावित हैं। दो अहम विधेयक भी सूची में सत्र के दौरान दो महत्वपूर्ण विधेयक लाए जाने की संभावना है — इन विधेयकों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। सवालों की बौछार से घिरेगी सरकार बजट सत्र के लिए अब तक 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। इसके अलावा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, अविलंबनीय चर्चा, अशासकीय संकल्प और याचिकाएं भी सूचीबद्ध हैं। इससे स्पष्ट है कि सत्र के दौरान सरकार को कई अहम मुद्दों पर जवाब देना होगा। राजनीतिक और वित्तीय दृष्टि से यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जहां सरकार बजट के माध्यम से अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। अगले एक महीने तक राज्य की राजनीति का केंद्र विधानसभा ही रहेगा।

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रायपुर में मीटर लगाने के नाम पर साइबर ठगी: प्रोसेसिंग फीस के बहाने 1.56 लाख रुपए पार

रायपुर। राजधानी रायपुर में बिजली मीटर लगाने के नाम पर बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मुजगहन थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति से प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर 1 लाख 56 हजार 200 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए। घटना के बाद आरोपी ने मोबाइल बंद कर लिया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित रोशन देवरात्रे ने बिजली मीटर लगाने के लिए संबंधित बिजली कार्यालय में आवेदन किया था। कुछ दिनों बाद उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर (7643020953) से कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को विद्युत विभाग का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके नाम पर मीटर लगाने का आवेदन स्वीकृत हो गया है। आरोपी ने प्रोसेसिंग शुल्क जमा कराने के नाम पर एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करने को कहा। झांसे में आकर पीड़ित ने बताए गए निर्देशों का पालन किया और अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 1,56,200 रुपए ट्रांसफर कर दिए। जब पीड़ित ने मीटर लगने की प्रक्रिया की जानकारी लेने के लिए दोबारा कॉल किया तो आरोपी का मोबाइल नंबर बंद मिला। इसके बाद रोशन देवरात्रे ने बिजली कार्यालय पहुंचकर जानकारी ली, जहां उन्हें पता चला कि विभाग की ओर से कोई प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया गया है और न ही उनके खाते में कोई राशि जमा हुई है। इसके बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत मुजगहन थाने में दर्ज कराई। पुलिस ने क्या कहा? मुजगहन थाना प्रभारी निरीक्षक सिद्धेश्वर प्रताप सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा। ⚠️ साइबर ठगी से बचने के लिए सावधानी

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नया रायपुर: नाइजीरियाई छात्रों की अनुशासनहीन हरकतें, स्थानीय लोग परेशान

रायपुर। नया रायपुर के सेक्टर 30 में विदेशी मूल के नाइजीरियाई छात्रों की अनुशासनहीन हरकतों ने स्थानीय लोगों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। क्षेत्रवासियों के मुताबिक, ये छात्र विभिन्न प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं, लेकिन उनका व्यवहार अब रिहायशी इलाकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। वायरल वीडियो में कैद हुई हरकतें हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें नाइजीरियाई युवक और युवती पार्किंग एरिया में अश्लील हरकतें करते दिख रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह पहली बार नहीं हुआ; देर रात पब्लिक जगहों पर शोर-शराबा और अनुशासनहीन गतिविधियां आम हो गई हैं। स्थानीय लोग परेशान स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब वे इन हरकतों पर विरोध करते हैं, तो छात्र अक्सर मारपीट पर उतर आते हैं। लोगों की शिकायत है कि पुलिस और प्रशासन को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि सार्वजनिक स्थान सुरक्षित और शांति पूर्ण बने। प्रशासनिक कदम की मांग विरोध और विवाद बढ़ने के कारण इलाके के नागरिक प्रशासन और यूनिवर्सिटी अधिकारियों से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र में सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।

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रायपुर नॉर्थ जोन में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 58 वारंटी गिरफ्तार कर भेजे गए जेल

रायपुर। राजधानी के नॉर्थ जोन क्षेत्र में लंबे समय से फरार चल रहे वारंटियों के खिलाफ पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की है। कॉम्बिंग गश्त और लगातार दबिश के जरिए कुल 58 वारंटियों को पकड़कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। यह अभियान Raipur में पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन) मयंक गुर्जर के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आकाश मरकाम और सहायक पुलिस आयुक्त पूर्णिमा लामा के नेतृत्व में संचालित किया गया। कई गंभीर मामलों के आरोपी गिरफ्तार पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी चोरी, लूट, मारपीट, नारकोटिक्स एक्ट, आर्म्स एक्ट और आबकारी एक्ट जैसे मामलों में फरार थे। टीमों ने थाना खमतराई, उरला, गुढ़ियारी, पंडरी और खम्हारडीह इलाकों में अभियान चलाया। थानावार कार्रवाई अभियान का कुल परिणाम पुलिस अधिकारियों ने बताया कि फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए आगे भी इसी तरह के विशेष अभियान जारी रहेंगे, ताकि कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।

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