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दुर्ग में प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन में सिपाही झुलसा, कांग्रेस पर केस; रेप केस में उबाल

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के प्रयास के मामले को लेकर रविवार को कांग्रेस ने उतई थाना क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया। मिनी माता चौक पर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय बिगड़ गई, जब कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री का पुतला जलाने की कोशिश की। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच इस दौरान खींचतान हुई और पुतला दहन के दौरान एक पुलिसकर्मी आग की चपेट में आकर झुलस गया। घायल आरक्षक गिरधर मंडावी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि उनके हाथ लगभग 10 प्रतिशत तक झुलस गए हैं और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने तीन पुतले लाए थे, जिनमें से दो को पुलिस ने पहले ही जब्त कर लिया था। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने एक अन्य पुतला अलग वाहन में छिपाकर रखा था, जिसे मौके मिलते ही पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। पुलिसकर्मियों ने तुरंत पानी और रेत डालकर आग पर काबू पाया। इस घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि आरोपी के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण यह घटना हुई। उन्होंने जिले में कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। बताया गया कि घटना के बाद बच्ची को बोरे में भरकर फेंक दिया गया था, लेकिन स्थानीय बच्चों की सतर्कता से उसकी जान बचाई जा सकी। इस मामले को लेकर इलाके में आक्रोश बना हुआ है। वहीं, समाज के लोगों ने भी आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा है और उसके घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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बेलतरा में विकास की रफ्तार तेज, विधायक ने सिटी बस सेवा शुरू कर किया सफर

बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र में रविवार को विकास कार्यों को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान 12 करोड़ 16 लाख 97 हजार रुपए की लागत से विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। विधायक सुशांत शुक्ला ने कोनी स्थित बस डिपो से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सिटी बस सेवा की शुरुआत की और खुद भी बस में सफर कर इसका शुभारंभ किया। इस मौके पर विधायक ने कहा कि सिटी बस सेवा शुरू होने से शहर और गांवों के बीच आवागमन आसान और सस्ता होगा। बस सेवा को लेकर क्षेत्र के लोगों में उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने बस में सवारी कर इस पहल का समर्थन किया। सिटी बस सेवा शुरू होने के बाद जनप्रतिनिधि बस से राजकिशोर नगर पहुंचे, जहां हरश्रृंगार कॉलोनी में सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया गया। विधायक ने कहा कि इस भवन से मध्यमवर्गीय परिवारों को सामाजिक आयोजनों के लिए किफायती और सुविधाजनक स्थान मिलेगा। नई बस सेवा के तहत विभिन्न रूट तय किए गए हैं, जो बिलासपुर रेलवे स्टेशन से होते हुए शहर और ग्रामीण इलाकों को जोड़ेंगे। इनमें गढ़वट, बेलतरा और रानीगांव-रतनपुर तक के मार्ग शामिल हैं, जिससे दूरदराज के गांवों को भी परिवहन सुविधा मिलेगी। विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि क्षेत्र में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है और भविष्य में बेलतरा को आदर्श विधानसभा बनाने का लक्ष्य है। उन्होंने लोगों से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने और सहयोग करने की अपील भी की। महापौर पूजा विधानी ने कहा कि सिटी बस सेवा से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शहर तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी और उनका खर्च भी कम होगा। वहीं, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने भी लंबे समय से लंबित सड़कों और अन्य मांगों के पूरे होने पर आभार जताया। इस दौरान सामुदायिक भवन, सड़क, पुल, उद्यान और आंगनबाड़ी भवन जैसे कई विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

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बिलासपुर में दो सगी बहनें गांजा तस्करी में गिरफ्तार, 6 किलो गांजा और लाखों कैश बरामद

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस ने गांजा तस्करी के मामले में दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो आपस में सगी बहनें हैं। दोनों अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर शहर के अलग-अलग इलाकों में गांजा बेचने का काम कर रही थीं। पुलिस ने उनके पास से करीब 6 किलो गांजा, 5.98 लाख रुपये नकद, एक कार और दो स्कूटी जब्त की हैं। मामला सामने तब आया जब पुलिस को सूचना मिली कि मोपका के पाटलीपुत्र नगर और राजकिशोर नगर क्षेत्र में दो महिलाएं नशीले पदार्थ की बिक्री कर रही हैं। इसके बाद एसीसीयू और सरकंडा थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से योजना बनाकर छापेमारी की और दोनों को रंगे हाथ पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान महिलाएं वाहन में गांजा रखकर सप्लाई करते हुए मिलीं। तलाशी में उनके पास से नकदी, मोबाइल फोन, घड़ियां और वाहन भी बरामद किए गए। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 15.78 लाख रुपये आंकी गई है। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान मानकी केंवट उर्फ विनिता जोशी (30) और सुदामा केंवट उर्फ रानी यादव (40) के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से मस्तूरी क्षेत्र के जयराम नगर की रहने वाली हैं और फिलहाल सरकंडा इलाके में रह रही थीं। पूछताछ में सामने आया कि वे अपनी पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करती थीं। पुलिस के अनुसार, दोनों पहले भी एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई झेल चुकी हैं। गांजा बिक्री से कमाए पैसों से उन्होंने स्कूटी खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल सप्लाई के लिए किया जाता था। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर

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रायपुर में पुलिस की तड़के रेड, 132 बदमाशों की जांच; 11 वारंटी गिरफ्तार

राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को सख्त करने के उद्देश्य से पुलिस ने रविवार सुबह बड़ा अभियान चलाया। सेंट्रल ज़ोन में चलाए गए इस विशेष ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 132 हिस्ट्रीशीटर और निगरानी बदमाशों की जांच की, साथ ही 11 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (सेंट्रल ज़ोन) उमेश प्रसाद गुप्ता और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में की गई। इस अभियान में कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा, गंज, सिविल लाइन, देवेंद्र नगर और तेलीबांधा थाना पुलिस ने मिलकर भाग लिया। अभियान के तहत पुराने अपराधियों को थानों में बुलाकर उनकी परेड कराई गई और उनकी गतिविधियों की जांच की गई। खासकर चाकूबाजी जैसे गंभीर मामलों में शामिल आरोपियों पर विशेष निगरानी रखी गई। पुलिस टीमों ने अलग-अलग इलाकों में दबिश देकर फरार वारंटियों की तलाश की, जिसमें 8 स्थायी वारंटी सहित कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि करीब 28 प्रतिशत बदमाश थाने पहुंचकर सत्यापन प्रक्रिया में शामिल हुए, जबकि लगभग 20 प्रतिशत आरोपी अपने घरों से गायब मिले। इनकी तलाश के लिए अलग से कार्रवाई की जा रही है। वहीं करीब 24 प्रतिशत आरोपी पहले से जेल में बंद पाए गए, जबकि बाकी आरोपियों के घर पहुंचकर पुलिस ने उनकी जांच की। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने सभी बदमाशों को सख्त चेतावनी देते हुए अपराध से दूर रहने, नियमित रूप से थाने में हाजिरी देने और कानून का पालन करने के निर्देश दिए। साथ ही उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए फिंगरप्रिंट लेकर NAFIS सिस्टम में दर्ज किया गया। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त तारकेश्वर पटेल ने बताया कि इस तरह के सघन अभियान आगे भी जारी रहेंगे, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे और आम लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सके।

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छत्तीसगढ़ के आत्मानंद स्कूलों में बड़ा बदलाव, अब प्रिंसिपल भी पढ़ाएंगे और रोज होगी पढ़ाई की समीक्षा

छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में आने वाले सत्र से पढ़ाई के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नया अकादमिक मॉडल लागू किया है, जिसमें अब ध्यान केवल प्रशासन नहीं बल्कि पढ़ाई, निगरानी और छात्रों के समग्र विकास पर रहेगा। नई व्यवस्था के तहत प्रिंसिपल की भूमिका में अहम बदलाव किया गया है। अब वे सिर्फ प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें अकादमिक लीडर की जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्हें रोजाना शिक्षकों के साथ बैठकर पढ़ाई की समीक्षा करनी होगी और साथ ही प्रतिदिन कम से कम एक पीरियड पढ़ाना भी अनिवार्य किया गया है। हर हफ्ते क्लास के अनुसार पढ़ाई का लक्ष्य तय किया जाएगा, ताकि सिलेबस समय पर पूरा हो सके और छात्रों की प्रगति पर नजर रखी जा सके। स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली बार पूरे सत्र के लिए विस्तृत अकादमिक कैलेंडर तैयार किया है। इसमें हर महीने पढ़ाए जाने वाले पाठ पहले से निर्धारित होंगे और उसी के अनुसार परीक्षाओं की योजना भी बनाई गई है। स्कूलों में अनुशासन और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए वंदे मातरम को अनिवार्य किया गया है, जिसके लिए हर स्कूल को साउंड सिस्टम खरीदने हेतु 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। हर शनिवार को अब “गतिविधि दिवस” के रूप में विकसित किया गया है। इस दिन छात्र बिना बैग के स्कूल आएंगे और योग के बाद उन्हें अलग-अलग समूहों में बांटा जाएगा। एक समूह गार्डनिंग, क्राफ्ट जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेगा, जबकि दूसरा समूह टेस्ट देकर अपनी तैयारी का आकलन करेगा। इससे एक ही दिन में कौशल विकास और पढ़ाई दोनों को बढ़ावा मिलेगा। पढ़ाई को स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के त्योहारों और परंपराओं का भी कैलेंडर तैयार किया गया है। बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों की पारंपरिक गतिविधियों को स्कूलों में शामिल किया जाएगा, ताकि बच्चे अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहें। इसके अलावा बच्चों को महापुरुषों के जीवन और विचारों से परिचित कराने के लिए विशेष कैलेंडर बनाया गया है। हर महीने दो महान व्यक्तित्वों की जयंती या पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें छात्र उनके आदर्शों पर चर्चा और भाषण देंगे। शिक्षा सत्र जून 2026 से शुरू होगा, जिसमें 1 से 20 जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी और 22 जून को शाला प्रवेशोत्सव के साथ नई कक्षाएं शुरू होंगी। इस पूरे मॉडल का उद्देश्य शिक्षा के स्तर में सुधार लाना, अनुशासन बढ़ाना और छात्रों को बेहतर वातावरण देना है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के अनुसार, इस पहल के जरिए आत्मानंद स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता के साथ-साथ बच्चों को संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।

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केमिकल आपदा से निपटने की तैयारी: 23 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में मॉक ड्रिल

केंद्र सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में रासायनिक और औद्योगिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 23 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। पहले इस अभ्यास में केवल 10 जिलों को शामिल किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए एनडीएमए ने 1 मार्च 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए थे। मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की जा रही है। 10 अप्रैल को ओरिएंटेशन और समन्वय बैठक हो चुकी है, जबकि 21 अप्रैल को ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ के तहत संभावित आपदा स्थितियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 23 अप्रैल को जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति जैसा अभ्यास किया जाएगा। इस ड्रिल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर की आपदा प्रबंधन योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता की जांच करना है। अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे और राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं तथा आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह तैनात रहेंगी। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों के इलाज और बचाव कार्यों का रिहर्सल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित कई अन्य विभाग जैसे नगर सेना, ऊर्जा, जल संसाधन, लोक निर्माण और नगरीय निकाय मिलकर काम करेंगे। मॉक ड्रिल के बाद 20 मई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। औद्योगिक हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले तीन वर्षों में 296 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 तक के 13 महीनों में 171 हादसों में 124 लोगों की जान गई और 86 घायल हुए हैं।केंद्र सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में रासायनिक और औद्योगिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए 23 अप्रैल को राज्य के सभी जिलों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। पहले इस अभ्यास में केवल 10 जिलों को शामिल किया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से किया जा रहा है। इसके लिए एनडीएमए ने 1 मार्च 2026 को दिशा-निर्देश जारी किए थे। मॉक ड्रिल तीन चरणों में आयोजित की जा रही है। 10 अप्रैल को ओरिएंटेशन और समन्वय बैठक हो चुकी है, जबकि 21 अप्रैल को ‘टेबल टॉप एक्सरसाइज’ के तहत संभावित आपदा स्थितियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 23 अप्रैल को जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति जैसा अभ्यास किया जाएगा। इस ड्रिल का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर की आपदा प्रबंधन योजनाओं और मानक संचालन प्रक्रियाओं की प्रभावशीलता की जांच करना है। अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे और राहत शिविर, मेडिकल सुविधाएं तथा आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह तैनात रहेंगी। प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों के इलाज और बचाव कार्यों का रिहर्सल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग सहित कई अन्य विभाग जैसे नगर सेना, ऊर्जा, जल संसाधन, लोक निर्माण और नगरीय निकाय मिलकर काम करेंगे। मॉक ड्रिल के बाद 20 मई 2026 तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। औद्योगिक हादसों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले तीन वर्षों में 296 श्रमिकों की मौत हो चुकी है। वहीं जनवरी 2026 तक के 13 महीनों में 171 हादसों में 124 लोगों की जान गई और 86 घायल हुए हैं। मॉक ड्रिल के लिए अलग-अलग जिलों को विशेष परिदृश्य दिए गए हैं। इनमें स्टील प्लांट, सीमेंट फैक्ट्री, केमिकल इकाइयां, पाइपलाइन, पेपर मिल और खदान जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में संभावित हादसों को शामिल किया गया है। इसके अलावा टैंकर दुर्घटना, अस्पताल में आग, बस हादसा और ट्रेन टक्कर जैसे आपात हालात पर भी अभ्यास किया जाएगा।

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रायपुर में नकली पनीर का बड़ा खुलासा: 1200 किलो जब्त, सेहत के लिए बना ‘धीमा जहर’

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली पनीर बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। भाठागांव स्थित केसरी बगीचा इलाके में संचालित एक फैक्ट्री से करीब 1200 किलो मिलावटी पनीर जब्त किया गया। इस दौरान मौके से पामFake Dairy Products,ऑयल, दूध पाउडर, एसेटिक एसिड और अन्य रसायन भी बरामद किए गए, जिनसे यह पनीर तैयार किया जा रहा था। जानकारी के अनुसार, इस फैक्ट्री का संचालन आदर्श पराशर द्वारा किया जा रहा था। विभाग को पहले ही नकली पनीर निर्माण की सूचना मिली थी, जिसके बाद रविवार को छापेमारी की योजना बनाई गई। टीम सुबह करीब 11:30 बजे मौके पर पहुंची, जहां बड़े पैमाने पर पनीर की पैकेजिंग होती मिली। चौंकाने वाली बात यह है कि इसी फैक्ट्री पर जनवरी 2026 में भी कार्रवाई करते हुए 1700 किलो नकली पनीर जब्त कर नष्ट किया गया था। इसके बावजूद दोबारा इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन होना कई सवाल खड़े कर रहा है। कार्रवाई के लिए इस बार रायपुर की टीम को शामिल नहीं किया गया, बल्कि अन्य जिलों जैसे धमतरी, बालोद और बलौदाबाजार से अधिकारियों को बुलाकर अलग-अलग टीमें बनाई गईं। इसी दौरान उरला क्षेत्र में स्थित एक अन्य डेयरी पर भी छापा मारा गया, जहां गंदगी के बीच पनीर बनाया जा रहा था। वहां से 500 किलो पनीर नष्ट किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री पिछले करीब 6 साल से संचालित हो रही थी, जबकि इसका लाइसेंस हाल ही में 2025 में लिया गया था। फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर मध्यप्रदेश के भिंड और मुरैना के बताए जा रहे हैं, जिनके रहने की व्यवस्था भी वहीं की गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का मिलावटी पनीर सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इसके सेवन से शुरुआत में अपच और पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि लंबे समय तक उपयोग करने पर लिवर को गंभीर नुकसान, हार्ट डिजीज और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार सेवन करने से कुछ ही वर्षों में लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी शामिल है।

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रायपुर रेलवे स्टेशन पर टिकट काउंटर शिफ्ट, यात्रियों को धूप में दौड़ना पड़ रहा

राजधानी रायपुर के रेलवे स्टेशन पर अनारक्षित टिकट काउंटर को दूसरी बिल्डिंग में स्थानांतरित किए जाने से यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टिकट लेने के लिए अब यात्रियों को पहले रिजर्वेशन काउंटर वाली बिल्डिंग तक जाना पड़ता है और फिर वहां से वापस प्लेटफॉर्म तक लौटना पड़ता है। स्टेशन पर पहुंचने के बाद ही कई यात्रियों को इस बदलाव की जानकारी मिल रही है, जिससे उन्हें जल्दबाजी में भागदौड़ करनी पड़ रही है। तेज धूप में करीब 50 से 100 मीटर की दूरी तय करना उनके लिए परेशानी बढ़ा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी ट्रेन आने वाली होती है। स्थिति इसलिए और जटिल हो गई है क्योंकि पूछताछ काउंटर अभी भी प्लेटफॉर्म पर ही मौजूद है। ऐसे में टिकट लेने के बाद यात्रियों को ट्रेन का समय और प्लेटफॉर्म जानने के लिए फिर से वापस आना पड़ता है। हालांकि गेट नंबर-1 पर चार ऑटोमैटिक टिकट मशीनें लगाई गई हैं, लेकिन तकनीकी जानकारी की कमी और ऑनलाइन पेमेंट की समझ न होने के कारण अधिकांश यात्री उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इनमें से एक मशीन बंद पाई गई, जबकि बाकी पर भीड़ लगी रही। रविवार दोपहर करीब 12:25 बजे स्टेशन पर यात्रियों की भागदौड़ साफ दिखाई दी। जानकारी मिलते ही लोग काउंटर की ओर दौड़ते नजर आए। ओडिशा जाने वाले एक यात्री का ऑनलाइन भुगतान फेल होने के कारण उसे मशीन से टिकट नहीं मिल पाया और उसे काउंटर पर जाना पड़ा। जबलपुर जा रहे यात्री अरुण गुप्ता ने बताया कि उन्हें काउंटर शिफ्ट होने की जानकारी पहले से नहीं थी, जिससे उन्हें धूप में लंबी दूरी तय करनी पड़ी और लाइन में लगना पड़ा। वहीं, ओडिशा जा रहे माधव राम ने कहा कि अधिकांश लोगों को मशीन चलाना नहीं आता, इसलिए काउंटर पर निर्भर रहना पड़ता है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार स्टेशन पर विकास कार्य जारी है और पुरानी बिल्डिंग को तोड़ा जाना है। इसी कारण अनारक्षित टिकट काउंटर को अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया है। डीआरएम दयानंद ने कहा कि यह कदम विकास कार्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, ताकि यात्रियों को पहले से इसकी जानकारी हो सके।

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कोंडागांव में टेंट कारोबारी की हत्या, अर्धनग्न हालत में खेत में दफन मिली लाश; कई एंगल से जांच जारी

छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में एक टेंट कारोबारी की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सुरेश चौहान (53) के रूप में हुई है, जिनका शव हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पीछे एक खेत में अर्धनग्न अवस्था में दफन मिला। पुलिस ने इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, सुरेश चौहान 11 अप्रैल से लापता थे। परिजनों ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए करीब 150 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। जांच के दौरान विकास नगर ग्राउंड में खून से सनी एक बाइक मिली, जो इस मामले में अहम सुराग साबित हुई। इसके आधार पर पुलिस एक संदिग्ध तक पहुंची और पूछताछ के बाद घटनास्थल का खुलासा हुआ। पुलिस टीम संदिग्ध की निशानदेही पर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के पीछे स्थित खेत में पहुंची, जहां जमीन में दफन शव बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे लूट की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि मृतक के पास सोने के आभूषण और नकदी थी। इसके अलावा जुआ-सट्टा और व्यक्तिगत संबंधों (अफेयर) के एंगल से भी जांच की जा रही है। सुरेश चौहान को हाल ही में दंतेवाड़ा में टेंट का बड़ा ऑर्डर मिला था और वे वहां जाने की तैयारी में थे। अधिकारियों ने बताया कि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। मृतक के परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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राजनांदगांव में अवैध शराब पर सख्ती, चिचोला और घुमका में खुलीं शासकीय मदिरा दुकानें

राजनांदगांव जिले में अवैध शराब के कारोबार पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को चिचोला (रंगीटोला) और घुमका में नई देशी कम्पोजिट मदिरा दुकानों की शुरुआत की गई है। इसका उद्देश्य अवैध शराब बिक्री को रोकना और लोगों को सुरक्षित व मानक के अनुरूप मदिरा उपलब्ध कराना है। इन दोनों इलाकों में पहले कोई सरकारी शराब दुकान नहीं थी, जिसके चलते अवैध शराब बेचने वाले सक्रिय हो गए थे। ग्रामीणों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नकली और मिलावटी शराब के कारण स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। आम तौर पर शराब दुकानों का विरोध देखने को मिलता है, लेकिन यहां हालात अलग थे। ग्रामीणों ने खुद आगे आकर सामाजिक समस्याओं और अवैध गतिविधियों से छुटकारा पाने के लिए सरकारी दुकान खोलने की मांग की थी। नई दुकानों का उद्घाटन स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्राम प्रमुखों की मौजूदगी में किया गया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि अब सरकारी नियंत्रण में गुणवत्ता और कीमत तय होने से पारदर्शिता बनी रहेगी। जिला आबकारी अधिकारी अभिषेक तिवारी के अनुसार, इन दुकानों को शुरू करने के पीछे तीन मुख्य मकसद हैं—अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाना, लोगों को लैब-टेस्टेड और सुरक्षित मदिरा उपलब्ध कराना, और अवैध कारोबार से होने वाले राजस्व नुकसान को रोकना। घुमका के निवासी पंकज माले ने बताया कि पहले बाहर से आने वाली मिलावटी शराब के कारण युवाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा था। अब सरकारी दुकान खुलने से न केवल पारदर्शी बिक्री होगी, बल्कि गांव में अवैध गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।

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