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छत्तीसगढ़ में आचरण नियमों पर सरकार का यू-टर्न, 24 घंटे में ही आदेश पर लगी रोक

छत्तीसगढ़ सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के लिए हाल ही में जारी किए गए सख्त आचरण नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने पहले सभी विभागों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को इन नियमों को लागू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब इस आदेश को अगले निर्देश तक स्थगित कर दिया गया है। 21 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या संगठन से नहीं जुड़ेगा और न ही किसी तरह की राजनीतिक गतिविधि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाग ले सकेगा। इसके अलावा, बिना अनुमति किसी संस्था, समिति या संगठन में पद लेने पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि कर्मचारी ऐसा कोई पद या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेंगे, जिससे उनके काम की निष्पक्षता प्रभावित हो। नियमों के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। हालांकि, 22 अप्रैल 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग ने नया आदेश जारी कर इन सभी निर्देशों को फिलहाल के लिए रोक दिया। उप सचिव अंशिका पांडेय द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि 21 अप्रैल के निर्देश अभी लागू नहीं होंगे और इन पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई भी अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। बताया जा रहा है कि कर्मचारी संगठनों के विरोध के बाद यह फैसला लिया गया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि कर्मचारी संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखते हैं और यह आदेश उस व्यवस्था के खिलाफ था। उन्होंने बताया कि विभाग के अधिकारियों के सामने विरोध दर्ज कराया गया, जिसके बाद सरकार ने आदेश पर रोक लगा दी।

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राजनांदगांव में बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए जल सेवा अभियान, स्वास्तिक समिति ने बांटे कोटना

राजनांदगांव में बढ़ती गर्मी के बीच मूक पशु-पक्षियों के लिए पानी का संकट गहराने लगा है। इस समस्या को देखते हुए स्वास्तिक जनसमर्पण सेवा समिति ने ‘कोटना (जल पात्र) वितरण अभियान’ की शुरुआत की है, ताकि बेजुबान जीवों को गर्मी में राहत मिल सके। भदोरिया चौक स्थित समिति कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनसहयोग से एकत्र किए गए जल पात्रों का वितरण किया गया। अभियान की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ की गई। इस दौरान उन लोगों को जल पात्र सौंपे गए, जिन्होंने उनकी नियमित साफ-सफाई और पानी भरने की जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया। समिति ने सभी से यह वचन भी लिया कि इन पात्रों का उपयोग केवल पशु-पक्षियों के लिए जल उपलब्ध कराने में ही किया जाएगा। समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, यह पहल कोविड काल में छोटे स्तर पर शुरू हुई थी, लेकिन अब यह जिले में एक बड़े जन अभियान का रूप ले चुकी है। इस बार भी व्यवस्थित योजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जल पात्रों का वितरण किया जा रहा है। इस सामाजिक पहल में शहर के कई जनप्रतिनिधि और नागरिक भी शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने इस कार्य की सराहना की। समिति ने बताया कि यह अभियान केवल वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल पात्रों की नियमित निगरानी भी की जाएगी, ताकि उनका सही उपयोग सुनिश्चित हो सके। साथ ही भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और जल बचाने को लेकर नई योजनाओं पर भी काम किया जाएगा, जिसमें युवाओं की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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दुर्ग में अवैध हथियार-नशीली दवाओं पर सख्ती, कूरियर कंपनियों को संदिग्ध पार्सल की जानकारी देना अनिवार्य

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने सख्त कदम उठाए हैं। इस दिशा में पुलिस कंट्रोल रूम में कूरियर कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अब हर संदिग्ध पार्सल या बुकिंग की जानकारी तुरंत पुलिस को देना अनिवार्य होगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नशीली दवाओं और अवैध हथियारों से जुड़ी गतिविधियां गंभीर अपराध की श्रेणी में आती हैं और इन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है। प्रतिनिधियों को एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट से संबंधित नियमों की जानकारी दी गई, ताकि वे इन कानूनों के उल्लंघन के परिणामों को समझ सकें। साथ ही यह भी बताया गया कि इस तरह के अपराधों को रोकने में कूरियर और ई-कॉमर्स कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुलिस ने निर्देश दिया कि हर पार्सल की बुकिंग के समय भेजने वाले की पहचान की पुष्टि करना जरूरी है। इसके लिए केवाईसी प्रक्रिया को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है। किसी भी संदिग्ध पार्सल को बिना जांच आगे नहीं बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी पार्सल में किसी प्रकार का संदेह हो, तो तुरंत पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई कर अवैध सामग्री को जब्त किया जा सके। इसके अलावा डिलीवरी और पिकअप स्टाफ के लिए भी नियम तय किए गए हैं। सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है, जिससे उनकी विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। पुलिस ने हर हब और गोदाम में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को भी अनिवार्य किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच में मदद मिल सके। इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मणिशंकर चंद्रा, डीएसपी क्राइम यदुमणि सिदार समेत पुलिस विभाग के अधिकारी और विभिन्न कूरियर व ई-कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पुलिस का मानना है कि कंपनियों के सहयोग से अवैध हथियारों और नशीली दवाओं के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, अनुकंपा नियुक्ति विरासत नहीं; सास का ख्याल न रखने पर बहू की नौकरी जा सकती है

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि यह कोई व्यक्तिगत लाभ, उपहार या विरासत नहीं है, बल्कि परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के उद्देश्य से दी जाने वाली व्यवस्था है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस ए.के. प्रसाद ने कहा कि जिस व्यक्ति को अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है, उस पर परिवार के आश्रितों की जिम्मेदारी भी उतनी ही लागू होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नियुक्त व्यक्ति अपने दायित्वों से पीछे हटता है, तो उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है। यह मामला अंबिकापुर की रहने वाली एक महिला से जुड़ा है, जिनके पति पुलिस विभाग में कार्यरत थे और वर्ष 2001 में उनका निधन हो गया। इसके बाद उनके बेटे को अनुकंपा नियुक्ति मिली। बाद में बेटे की भी मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसकी पत्नी को नौकरी दी गई। आरोप है कि नौकरी मिलने के बाद बहू ने अपनी सास की देखभाल करना बंद कर दिया और उनके साथ दुर्व्यवहार करने लगी। आर्थिक रूप से कमजोर हो चुकी सास ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में यह भी बताया गया कि बहू को नौकरी इस शर्त पर दी गई थी कि वह सास का भरण-पोषण करेगी। लेकिन उसने इस जिम्मेदारी को निभाने से इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि नियुक्ति के समय बहू ने शपथ-पत्र देकर सास की देखभाल करने की बात स्वीकार की थी। ऐसे में यह जिम्मेदारी निभाना उसके लिए अनिवार्य है। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति को नौकरी देना नहीं, बल्कि पूरे परिवार को सहारा देना है। इसलिए नियुक्त व्यक्ति अपने कर्तव्यों से मुंह नहीं मोड़ सकता। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

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27 अप्रैल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का विशेष सत्र, महिला आरक्षण मुद्दे पर सरकार लाएगी निंदा प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 27 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। इस सत्र में राज्य सरकार महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन से जुड़े 131वें संवैधानिक संशोधन विधेयक के पारित न होने के विरोध में निंदा प्रस्ताव पेश करेगी। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे दुख के साथ यह बात रख रहे हैं कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का सपना पूरा नहीं हो सका। उन्होंने इसके लिए विपक्ष के रवैये को जिम्मेदार ठहराया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस फैसले से देशभर की महिलाओं की उम्मीदों को झटका लगा है। उन्होंने इसे केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। उन्होंने छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को लगभग 57 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि विधानसभा में भी 20 प्रतिशत से अधिक महिला प्रतिनिधित्व है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर समाज में विभाजन की राजनीति करने का आरोप भी लगाया और कहा कि इस तरह की राजनीति से देश को नुकसान होता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर आगे भी सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे और जनता समय आने पर उचित निर्णय लेगी।

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अग्निवीर परीक्षा की तैयारी के लिए फ्री कोचिंग, 4 मई से शुरू; 30 अप्रैल तक करें रजिस्ट्रेशन

भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती की लिखित परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए रायपुर में निःशुल्क कोचिंग की सुविधा शुरू की जा रही है। यह पहल जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र द्वारा की जा रही है, जिसमें अभ्यर्थियों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 4 मई से 4 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न विषयों के जानकार उम्मीदवारों को परीक्षा की बेहतर तैयारी कराएंगे, ताकि वे लिखित परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकें। अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 13 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 तक चली थी। इस दौरान 17 वर्ष 6 माह से 21 वर्ष तक के अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनकी शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास से लेकर स्नातक और डिप्लोमा तक है। भर्ती प्रक्रिया में जनरल ड्यूटी, तकनीकी, क्लर्क/स्टोर कीपर, ट्रेडमैन और महिला सैन्य पुलिस जैसी विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला और विकासखंड स्तर पर आयोजित किया जाएगा। अभ्यर्थियों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से संचालित किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इसका लाभ मिल सके। इच्छुक अभ्यर्थी 30 अप्रैल 2026 तक रोजगार विभाग के आधिकारिक पोर्टल erojgar.cg.gov.in पर पंजीकरण कर सकते हैं। अधिक जानकारी या किसी समस्या के लिए अभ्यर्थी रायपुर स्थित रोजगार कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं या दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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26 अप्रैल को MBSI भर्ती परीक्षा, सख्त नियम लागू; जूते-मोजे बैन, 9:30 के बाद नहीं मिलेगी एंट्री

छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा मंडी बोर्ड उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा (MBSI26) का आयोजन 26 अप्रैल को किया जाएगा। रायपुर के 104 परीक्षा केंद्रों पर होने वाली इस परीक्षा में करीब 34,168 अभ्यर्थी शामिल होंगे। परीक्षा का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक निर्धारित किया गया है। परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, घड़ी, कैलकुलेटर या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ड्रेस कोड को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए हैं। अभ्यर्थियों को हल्के रंग के आधी बांह के कपड़े पहनकर ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश मिलेगा। काले, गहरे नीले और हरे रंग के कपड़ों पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा जूते, मोजे, स्कार्फ और बेल्ट पहनने की अनुमति नहीं होगी। अभ्यर्थियों को चप्पल पहनकर आना होगा। साथ ही कान के आभूषण पहनने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। परीक्षा केंद्र में प्रवेश सुबह 9:30 बजे तक ही दिया जाएगा। इसके बाद किसी भी अभ्यर्थी को अंदर जाने की अनुमति नहीं होगी। प्रवेश से पहले सभी अभ्यर्थियों की पुलिस द्वारा जांच की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की प्रतिबंधित वस्तु अंदर न पहुंच सके। अभ्यर्थियों को केवल काले या नीले बॉल प्वाइंट पेन के साथ ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। परीक्षा प्रबंधन ने सभी उम्मीदवारों से समय पर पहुंचने और जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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सचिन तेंदुलकर का पहला बस्तर दौरा, CM साय का कार्यक्रम रद्द; अब सिर्फ छिंदनार में करेंगे बच्चों से मुलाकात

क्रिकेट के दिग्गज Sachin Tendulkar बुधवार को पहली बार बस्तर दौरे पर आ रहे हैं। वे दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां स्थानीय बच्चों, खासकर खेल से जुड़े युवाओं से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में Vishnu Deo Sai को भी शामिल होना था, लेकिन अपरिहार्य कारणों के चलते उनका दौरा पहले ही रद्द कर दिया गया। सचिन तेंदुलकर के कार्यक्रम में भी बदलाव किया गया है। पहले उनका दौरा छिंदनार के साथ-साथ गीदम के जावंगा और पनेड़ा मैदान तक प्रस्तावित था, लेकिन अब वे केवल छिंदनार में ही कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस बदलाव की वजह मौसम की अनिश्चितता बताई जा रही है। हाल ही में दंतेवाड़ा क्षेत्र में तेज बारिश, आंधी और ओलावृष्टि हुई थी, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा और फसलें भी प्रभावित हुईं। हालांकि, कुछ सूत्र सुरक्षा कारणों की भी चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अधिकारियों ने इस पर आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। इंद्रावती नदी के किनारे स्थित छिंदनार गांव में सचिन तेंदुलकर के आगमन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव में उत्साह का माहौल है और बच्चे व ग्रामीण उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित रहे इस क्षेत्र के लिए यह दौरा एक सकारात्मक संकेत और नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है, जहां खेल और प्रेरणा के जरिए बदलाव की दिशा में कदम बढ़ते नजर आ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में 3 महीने तक सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक, बिना अनुमति अवकाश पर सख्ती

छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अगले तीन महीनों तक बिना पूर्व अनुमति किसी भी कर्मचारी को अवकाश पर जाने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय जनगणना और सुशासन तिहार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि बिना स्वीकृति के छुट्टी लेना गंभीर अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निर्देशों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी सक्षम अधिकारी की मंजूरी के बिना अवकाश पर नहीं जा सकेगा। यदि कोई बिना अनुमति अनुपस्थित पाया जाता है, तो इसे सेवा में बाधा मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आपात स्थिति में भी कर्मचारियों को पहले फोन या अन्य डिजिटल माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा। बाद में कार्यालय पहुंचकर इसकी लिखित पुष्टि करनी होगी। इसके अलावा, जो कर्मचारी लंबी छुट्टी पर जाना चाहते हैं, उन्हें पहले अपने कार्यभार को किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को सौंपना जरूरी होगा। सरकार ने सभी विभागों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को प्रशासनिक कार्यों को सुचारू बनाए रखने और बड़े सरकारी कार्यक्रमों को समय पर पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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रायपुर में लेंसकार्ट शोरूम पर हंगामा, कर्मचारियों को लगाया तिलक; विवाद के बाद कंपनी की सफाई

रायपुर में एक लेंसकार्ट शोरूम के भीतर कथित तौर पर एक धार्मिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर कर्मचारियों के साथ विवाद खड़ा कर दिया। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं ने स्टाफ से उनके नाम पूछे और फिर उन्हें तिलक लगाने के लिए कहा। साथ ही कर्मचारियों से यह भी कहा गया कि वे तिलक लगाकर काम करें और अपनी धार्मिक पहचान सार्वजनिक रूप से बताएं। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला शोरूम के अंदर कर्मचारियों से बातचीत करते हुए दिखाई देती है और धार्मिक पहचान को लेकर अपनी बात रखती है। उसने यह भी कहा कि अगर अन्य धर्मों के लोग अपने प्रतीकों का पालन करते हैं, तो हिंदू कर्मचारियों को भी ऐसा करना चाहिए। मामले को लेकर यह भी दावा किया गया कि संबंधित कंपनी में कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर रोक थी, जिसे लेकर विरोध जताया गया। महिला ने खुद को कंपनी की ग्राहक बताते हुए कहा कि वह अब इस ब्रांड का बहिष्कार करेंगी। विवाद बढ़ने के बाद कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया जारी की। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान करती है। नई गाइडलाइन के अनुसार, तिलक, बिंदी, सिंदूर, कलावा, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे प्रतीकों की अनुमति दी गई है। कंपनी ने यह भी कहा कि वायरल हुआ दस्तावेज पुराना था और वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। कंपनी के संस्थापक ने भी इस भ्रम के लिए खेद जताते हुए कहा कि किसी भी धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंपनी की एक पुरानी ग्रूमिंग पॉलिसी का दस्तावेज सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें कुछ धार्मिक प्रतीकों को लेकर निर्देश दिए गए थे। इसके बाद ऑनलाइन बहिष्कार की मांग उठने लगी। कंपनी का कहना है कि वह भारत में संचालित एक ब्रांड है, जहां विभिन्न परंपराओं और संस्कृतियों का सम्मान किया जाता है। साथ ही भविष्य में नीतियों को और स्पष्ट और समावेशी बनाने का आश्वासन भी दिया गया है। कॉर्पोरेट जगत में ग्रूमिंग पॉलिसी का उद्देश्य कर्मचारियों के पहनावे और व्यवहार के लिए एक समान मानक तय करना होता है, लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसमें सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान बनाए रखना जरूरी माना जाता है।

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