Political

रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी की तैयारी, पूरे जिले में लागू करने के संकेत

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम के दायरे को लेकर बड़ा फैसला जल्द हो सकता है। संकेत हैं कि नवा रायपुर के साथ-साथ पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू की जा सकती है। इस संबंध में आज कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया जा सकता है। कमिश्नरी सिस्टम के विस्तार का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। एक सर्वे में करीब 90 फीसदी लोगों ने नवा रायपुर को भी पुलिस कमिश्नरी के अंतर्गत लाने की मांग की थी। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी पूरे जिले में इसे लागू करने का समर्थन किया है। निवेश और रोजगार से जुड़ा है मजबूत कानून व्यवस्था मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व डीजी स्तर के अधिकारियों का मानना है कि जहां कानून व्यवस्था मजबूत होती है, वहां निवेश बढ़ता है और रोजगार के नए अवसर बनते हैं। इससे जनता का सरकार पर भरोसा भी मजबूत होता है। उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि सख्त लॉ एंड ऑर्डर का सीधा असर शासन की स्थिरता पर पड़ता है। 31 दिसंबर को ऐलान, लेकिन खाका अब तक अधूरा 31 दिसंबर 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 23 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करने का निर्णय लिया गया था। गृह विभाग को इसका पूरा ढांचा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन 21 दिन बीतने के बाद भी खाका तैयार नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को पूरे जिले में कमिश्नरी लागू करने पर आपत्ति है। उनका मानना है कि पुलिस को प्रशासन के अधीन ही रहना चाहिए। इसी कारण प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है। सरकार की मंशा पूरे जिले में सिस्टम लागू करने की डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कई बार पूरे रायपुर जिले में पुलिस कमिश्नरी लागू करने को लेकर पत्राचार किया है। एडीजी स्तर की कमेटी ने भी पुलिस कमिश्नर को पूर्ण अधिकार देने की सिफारिश की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी अधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा की है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार मजबूत और प्रभावी कमिश्नरी सिस्टम लागू करना चाहती है। दोहरी पुलिसिंग से बढ़ेगा खर्च अगर रायपुर शहर में कमिश्नरी और ग्रामीण इलाकों में देहात पुलिस सिस्टम लागू किया गया, तो सरकार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। देहात क्षेत्र के लिए अलग से एसपी, एएसपी, डीएसपी कार्यालय, पुलिस लाइन, कंट्रोल रूम, वायरलेस सिस्टम और वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। इस पर 50 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने का अनुमान है। थानों की दूरी बढ़ने से जनता को होगी परेशानी देहात पुलिसिंग लागू होने पर नगर निगम सीमा से लगे कई इलाकों को ग्रामीण थानों में शामिल किया जाएगा। इससे थानों की दूरी बढ़ेगी और आम लोगों को शिकायत दर्ज कराने में परेशानी होगी। विधानसभा थाना क्षेत्र से जुड़े सेमरिया, नरदहा और बरोंदागांव जैसे इलाके ग्रामीण थानों में चले जाएंगे। जहां विधानसभा थाना मात्र एक किलोमीटर दूर है, वहीं खरोरा या सिलतरा थाना 25 से 35 किलोमीटर दूर पड़ता है। विशेषज्ञों की राय: पूरे अधिकारों के साथ लागू हो कमिश्नरी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधे-अधूरे अधिकारों के साथ कमिश्नरी लागू करना पुलिस को कमजोर करेगा। औद्योगिक क्षेत्र, एयरपोर्ट, मंत्रालय और सचिवालय को भी कमिश्नरी के दायरे में लाया जाना चाहिए। दिल्ली, मुंबई और कानपुर जैसे शहरों की तरह रायपुर में भी पूरे जिले में यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सके।

रायपुर में मजबूत पुलिस कमिश्नरी की तैयारी, पूरे जिले में लागू करने के संकेत Read Post »

Chhattisgarh, Political, Raipur, State

BJP में छत्तीसगढ़ की बढ़ती अहमियत: नड्डा के बाद नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य से दिल्ली तक बदलेगा सियासी संतुलन

भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की भूमिका लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। पहले जेपी नड्डा और अब छत्तीसगढ़ के प्रभारी रह चुके नितिन नवीन का बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना इस बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है। यह फैसला सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। बीजेपी के इतिहास में यह दूसरी बार है जब छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभाल चुके किसी नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। इससे पहले जेपी नड्डा ने भी छत्तीसगढ़ प्रभारी रहते हुए संगठनात्मक प्रयोग किए थे, जिनका असर बाद में राष्ट्रीय स्तर पर देखने को मिला। छत्तीसगढ़ से जुड़े अनुभव अब राष्ट्रीय रणनीति में नितिन नवीन को 2023 में छत्तीसगढ़ बीजेपी का को-इंचार्ज बनाया गया था, जब ओम माथुर प्रदेश प्रभारी थे। इसके बाद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को मिली सफलता में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। टिकट वितरण, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिलों और मंडलों से फीडबैक लेना और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल बनाना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जहां आदिवासी, ग्रामीण और शहरी मतदाताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, वहां संगठन को संतुलन में रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। नितिन नवीन ने इन जमीनी हालात को समझते हुए अपनी रिपोर्ट सीधे केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। संगठनात्मक सख्ती और स्पष्ट संदेश पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ बीजेपी को कांग्रेस सरकार, स्थानीय मुद्दों और आंतरिक गुटबाजी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान नितिन नवीन ने संगठन को नीचे तक सक्रिय रखने पर जोर दिया। मंडल से लेकर जिला स्तर तक नियमित फीडबैक और संगठनात्मक बदलाव किए गए। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नितिन नवीन की कार्यशैली शांत लेकिन निर्णायक रही है। उन्होंने साफ संदेश दिया कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल जरूरी है। इसी नीति के तहत कई जिलों में संगठनात्मक फेरबदल भी किए गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को संभावित फायदे नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से छत्तीसगढ़ को राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य से जुड़े मुद्दे जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र, आदिवासी इलाकों का विकास, शहरी प्रशासन और कानून-व्यवस्था अब सीधे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकते हैं। इसके साथ ही, प्रदेश बीजेपी में लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी पर नियंत्रण की कोशिश तेज हो सकती है। राष्ट्रीय नेतृत्व से सीधे जुड़े होने के कारण संतुलन साधने की भूमिका और मजबूत हो सकती है। टिकट वितरण और नेतृत्व चयन में बदलाव के संकेत आने वाले समय में नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू होगी। ऐसे में पार्टी सूत्रों का मानना है कि अब टिकट वितरण में नाम से ज्यादा काम और जमीनी प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी। युवा नेताओं को आगे लाने और अनुभवी नेताओं के साथ संतुलन बनाने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है। नितिन नवीन पहले भी छत्तीसगढ़ में यह संदेश दे चुके हैं कि जिम्मेदारी प्रदर्शन के आधार पर तय होगी। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय राष्ट्रीय अध्यक्ष का छत्तीसगढ़ से सीधा जुड़ाव केंद्र और राज्य संगठन के बीच बेहतर समन्वय की संभावनाएं भी बढ़ाता है। केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में किस तरह लागू और प्रस्तुत किया जाए, इस पर रणनीति और स्पष्ट हो सकती है, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में। जेपी नड्डा मॉडल की पुनरावृत्ति? जेपी नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बना था। अब नितिन नवीन के चयन को भी उसी मॉडल से जोड़कर देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मिले संगठनात्मक अनुभव को पार्टी अन्य राज्यों में भी लागू कर सकती है। कांग्रेस के लिए बढ़ेगी चुनौती नितिन नवीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के लिए मुकाबला और कठिन हो सकता है। बीजेपी अब राज्य में ज्यादा संगठित और आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ सकती है। सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर विपक्ष का दबाव बढ़ने की संभावना है। कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए भी संदेश है कि छत्तीसगढ़ में किए गए संगठनात्मक काम और जमीनी फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व गंभीरता से लेता है। इससे संगठन में भरोसा और सक्रियता बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि राज्य को पार्टी किस तरह की प्राथमिकता देती है।

BJP में छत्तीसगढ़ की बढ़ती अहमियत: नड्डा के बाद नितिन नवीन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्य से दिल्ली तक बदलेगा सियासी संतुलन Read Post »

Chhattisgarh, Political, Top News

छत्तीसगढ़ में दागी विधायकों की संख्या बढ़ी, 21 जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले दर्ज

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आपराधिक मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। राज्य के 21 मौजूदा विधायकों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में आपराधिक प्रकरण लंबित हैं। बीते दो वर्षों के भीतर ही चार विधायकों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिससे साफ है कि दागी जनप्रतिनिधियों की सूची लगातार बढ़ रही है। ताजा मामला जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू से जुड़ा है। उन पर एक किसान से करीब 42.78 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस ने इस मामले में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में हलचल मच गई है। इससे पहले पूर्व मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा भी भ्रष्टाचार के एक मामले में जेल में बंद हैं। वहीं सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप है, जबकि जशपुर की भाजपा विधायक रायमुनी भगत पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में प्रकरण दर्ज किया गया है। ऐसे मामलों ने प्रदेश में जनप्रतिनिधियों की छवि को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव 2023 के आंकड़ेवर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले 90 विधायकों में से 17 ने अपने चुनावी शपथ पत्र में यह स्वीकार किया था कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और छत्तीसगढ़ इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट में सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन 17 में से छह विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यदि पिछले चुनावों से तुलना करें तो 2018 के विधानसभा चुनाव में 24 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी, जिनमें 13 पर गंभीर धाराएं लगी थीं। वहीं 2013 में यह संख्या 14 थी। पार्टीवार स्थितिपार्टी के हिसाब से देखें तो 2023 में भाजपा के 54 विजेता उम्मीदवारों में से 12 और कांग्रेस के 35 विजेता उम्मीदवारों में से पांच ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की थी। गंभीर मामलों के संदर्भ में भाजपा के चार और कांग्रेस के दो विधायकों ने अपने शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया था। देशभर की स्थिति भी चिंताजनकएडीआर की वर्ष 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में स्थिति और भी गंभीर है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के करीब 45 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। एडीआर ने 28 राज्यों और विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 4,092 विधायकों के शपथ पत्रों का विश्लेषण किया था। राज्यवार आंकड़ों में आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर है, जहां 174 में से 138 विधायक (करीब 79 प्रतिशत) आपराधिक मामलों वाले हैं। वहीं सिक्किम में यह प्रतिशत सबसे कम है, जहां 32 में से सिर्फ एक विधायक ने अपने खिलाफ किसी मामले की जानकारी दी है। छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने एक बार फिर राजनीति के अपराधीकरण पर बहस को तेज कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में दागी विधायकों की संख्या बढ़ी, 21 जनप्रतिनिधियों पर आपराधिक मामले दर्ज Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Political, Raipur, Top News

पंजाब के सरपंच की मैरिज-पैलेस में हत्या, 2 शूटर रायपुर से अरेस्ट: गैंगस्टर ने ली जिम्मेदारी

अमृतसर/रायपुर। पंजाब के अमृतसर में आम आदमी पार्टी (AAP) के सरपंच जरमल सिंह की शादी समारोह के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात के बाद दो आरोपी छत्तीसगढ़ के रायपुर में अपने रिश्तेदारों के घर छिपे हुए थे। रविवार को रायपुर और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीम ने शूटरों सुखराज और कर्मवीर को ऋषभ अपार्टमेंट, राजेंद्र नगर से गिरफ्तार किया। आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर अमृतसर भेजा गया। मैरिज-पैलेस में की गई हत्या जानकारी के अनुसार, सरपंच जरमल सिंह 4 जनवरी 2026 को अमृतसर के मैरी गोल्ड रिसॉर्ट में शादी में शामिल होने गए थे। समारोह के दौरान दो बदमाश उनके पास पहुंचे और सिर में गोली मार दी। गोली लगते ही सरपंच वहीं गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। CCTV फुटेज में दोनों शूटर बिना मुंह ढके, पिस्टल लेकर सरपंच के पास आते दिखे। एक आगे बढ़कर गोली मारता है और दोनों तुरंत फरार हो जाते हैं। पूर्व हमलों और गैंगस्टर की जिम्मेदारी जांच में यह भी पता चला कि सरपंच पर पहले भी तीन बार जानलेवा हमला हो चुका था। हत्या के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई, जिसमें गैंगस्टर डोनी बल और प्रभ दासुवाल ने हत्या की जिम्मेदारी ली। पोस्ट में उन्होंने हत्या का कारण बताते हुए कहा कि सरपंच ने अपने घरों से नाजायज लड़के उठवाए और पुलिस को पैसे दिए, जिस पर हमले किए गए। राजनीतिक पृष्ठभूमि जरमल सिंह पहले अकाली दल से सरपंच चुने गए थे और बाद में उन्होंने आम आदमी पार्टी जॉइन की। मौजूदा चुनाव में भी उन्होंने AAP के समर्थन से जीत हासिल की थी। रायपुर पुलिस जांच में जुटी शूटरों के रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है। हत्या की साजिश, गैंग नेटवर्क और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

पंजाब के सरपंच की मैरिज-पैलेस में हत्या, 2 शूटर रायपुर से अरेस्ट: गैंगस्टर ने ली जिम्मेदारी Read Post »

Chhattisgarh, Crime, Political, Raipur, Top News

मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही बीजेपी सरकार: गांधी प्रतिमा के सामने उपवास, कांग्रेस का आरोप

दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में मनरेगा को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत रविवार से दुर्ग-भिलाई में कांग्रेस ने सार्वजनिक विरोध की शुरुआत कर दी है। शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता दुर्ग के गांधी प्रतिमा स्थल पर सुबह से शाम तक उपवास पर बैठे रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर मजदूर विरोधी नीतियां अपनाने और मनरेगा को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने का आरोप लगाया। 25 फरवरी तक चलेगा आंदोलन दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने बताया कि यह आंदोलन 25 फरवरी तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार देने की कानूनी गारंटी थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इस गारंटी के साथ छल किया है। उनका आरोप है कि बीते 11 वर्षों में मजदूरों को औसतन सिर्फ 38 दिन का काम मिला है और “गारंटी” शब्द को ही कानून से हटाने की कोशिश की जा रही है। हर साल घट रहे मानव दिवस राकेश ठाकुर ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि दुर्ग जिले में मनरेगा के मानव दिवस लगातार घट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह साफ संकेत है कि सरकार मनरेगा को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पहले इस योजना में केंद्र सरकार का पूरा योगदान था, लेकिन अब इसे 60:40 कर दिया गया है, जिससे राज्य सरकार पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है। सरकारी खजाने पर बढ़ाया जा रहा दबाव शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने कहा कि कांग्रेस मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ रही है। मनरेगा में लगातार कटौती कर राज्य सरकार के अंशदान को बढ़ाया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव बढ़ेगा और इसका सीधा नुकसान मजदूरों को होगा। बीजेपी अमीरों की पार्टी: कांग्रेस भिलाई जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार और काम न मिलने पर भत्ता दिया जाता था। अब न सिर्फ योजना का स्वरूप बदला जा रहा है, बल्कि बजट में भी कटौती की गई है। उन्होंने भाजपा को अमीरों की पार्टी बताते हुए कहा कि यह मजदूर विरोधी सोच का परिणाम है, जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़कों पर है। 125 दिन का वादा भी जुमला: साहू कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान में मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा की थी, लेकिन भाजपा सरकार मनरेगा कानून की मूल भावना को खत्म कर रही है। उन्होंने 125 दिन रोजगार के वादे को भी 15 लाख और 2 करोड़ नौकरियों की तरह जुमला करार दिया। योजना को खत्म करने का आरोप कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला है। पार्टी ने VB-G RAM G योजना का हवाला देते हुए कहा कि इससे मनरेगा का संवैधानिक अधिकार कमजोर होगा और ठेकेदारी व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही बीजेपी सरकार: गांधी प्रतिमा के सामने उपवास, कांग्रेस का आरोप Read Post »

Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Political, Top News

शासकीय जमीन पर बने अवैध मकान-दुकानों पर निगम का बुलडोजर, दो जोनों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर ने अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी कार्रवाई की है। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर शासकीय भूमि पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और व्यावसायिक दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जोन-9 और जोन-5 क्षेत्र में की गई। जोन-9 में 3000 वर्गफीट सरकारी जमीन कराई गई मुक्त नगर निगम के नगर निवेश विभाग की टीम ने जोन-9 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 में अभियान चलाकर करीब 3000 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जांच में सामने आया था कि यहां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकान और मकान का निर्माण किया गया था। जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा सीनियर के निर्देश पर कार्यपालन अभियंता शरद ध्रुव, सहायक अभियंता सैय्यद जोहेब और उप अभियंता अतुल बंसल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से अवैध निर्माण को तोड़ा गया। जोन-5 में नियमों के विपरीत निर्माण पर चला हथौड़ा इसी तरह जोन-5 क्षेत्र में भी नगर निगम ने अनुमति के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर कार्रवाई की। कुशालपुर रिंग रोड नंबर-1 इलाके में निर्माणाधीन भवन को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तोड़कर हटाया गया। यह कार्रवाई जोन कमिश्नर खीरसागर नायक के निर्देश पर की गई, जिसमें कार्यपालन अभियंता लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता नागेश रामटेके और उप अभियंता टिकेन्द्र चंद्राकर मौजूद रहे। अवैध निर्माण पर आगे भी जारी रहेगा अभियान नगर निगम प्रशासन ने साफ कहा है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या नियमों के खिलाफ निर्माण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

शासकीय जमीन पर बने अवैध मकान-दुकानों पर निगम का बुलडोजर, दो जोनों में बड़ी कार्रवाई Read Post »

Chhattisgarh, Political, Raipur, Top News

मुख्यमंत्री का अफसरों को सख्त संदेश: लापरवाही और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, शिकायतों पर समय पर कार्रवाई के निर्देश

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस पर आधारित है और योजनाओं में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह बातें मुख्यमंत्री ने रायपुर के एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार 2025-26 कार्यक्रम के दौरान कहीं। इस अवसर पर जिला और विभाग स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और विभागों को सम्मानित किया गया। 10 पुरस्कार विजेताओं को किया सम्मानित कार्यक्रम में ई-गवर्नेंस, डिजिटल मॉनिटरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नवाचारों के लिए जिला और विभागीय श्रेणी में कुल 10 पुरस्कार प्रदान किए गए। यह सम्मान सुशासन दिवस के अवसर पर घोषित किए गए। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारी, विभिन्न जिलों के कलेक्टर, सीएस, एसीएस, सचिव, प्रमुख सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मौजूद रहे। इन जिलों और विभागों को मिला पुरस्कार जिला श्रेणी में बेहतर कार्य और नवाचार के लिए दंतेवाड़ा, जशपुर, गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और नारायणपुर को सम्मानित किया गया।विभागीय श्रेणी में शिक्षा विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, वाणिज्य कर (आबकारी) विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पुरस्कार मिला। सांसद-विधायकों के पत्रों पर समय पर जवाब देने के निर्देश मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से कहा कि सांसदों और विधायकों के पत्रों का समय पर जवाब देना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवेदनों को गंभीरता से लें और उनका त्वरित निराकरण करें। साथ ही योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर जनप्रतिनिधियों से नियमित फीडबैक लेने को भी कहा। सुशासन सिर्फ शब्द नहीं, काम की संस्कृति सीएम ने कहा कि सुशासन केवल एक नारा नहीं बल्कि हर नीति और निर्णय की आत्मा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में दो वर्षों में 400 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए हैं।ई-ऑफिस व्यवस्था से भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हुई हैं और इसे जल्द ही संभाग व जिला स्तर तक विस्तारित किया जाएगा। भ्रष्टाचार पर सख्ती, तकनीक बनेगी हथियार मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं की राशि को भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। जेम पोर्टल से खरीदी को अनिवार्य किया गया है, फिर भी यदि कहीं गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।खनिज से जुड़े परमिट को ऑनलाइन कर पहले होने वाले भ्रष्टाचार पर भी रोक लगाई गई है। अधिकारियों से फील्ड में जाने की अपील सीएम ने अधिकारियों से कहा कि योजनाएं तभी सफल होंगी जब उनका सही क्रियान्वयन होगा। इसके लिए अधिकारियों को फील्ड में जाकर लोगों की समस्याएं समझनी होंगी। उन्होंने नियमित समीक्षा, प्रेस कॉन्फ्रेंस और पारदर्शी कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर अधिकारी को अपने भीतर बदलाव लाना होगा, तभी विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का सपना साकार होगा।

मुख्यमंत्री का अफसरों को सख्त संदेश: लापरवाही और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, शिकायतों पर समय पर कार्रवाई के निर्देश Read Post »

Chhattisgarh, Political, Raipur, Top News

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हिट एंड रन का एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। बीजेपी विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह के बेटे बलवंत सिंह पर बाइक सवार युवक को कार से टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन थाने से ही उसे जमानत मिल गई। हादसे में घायल युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। यह घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास 5 जनवरी की देर रात करीब 1:15 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घायल युवक की हालत गंभीर हादसे में घायल युवक की पहचान त्रिभुवन सिंह ठाकुर (34) के रूप में हुई है, जो डीजे और इवेंट से जुड़ा काम करता है। वह काम खत्म कर सेरीखेड़ी से बाइक से तेलीबांधा लौट रहा था। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायल को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। कार छोड़कर फरार हुआ आरोपी पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां दुर्घटनाग्रस्त कार मौजूद थी, लेकिन चालक फरार था। जांच में सामने आया कि कार (CG 04 PC 0853) बलवंत सिंह चला रहा था। वाहन मालिक जयप्रकाश उपाध्याय, निवासी रामानुज नगर, कुशालपुर (सरगुजा) के नाम पर कार रजिस्टर्ड है, जिसने नोटिस के जवाब में पुष्टि की कि घटना के समय वाहन बलवंत सिंह के पास था। पीड़ित के भाई राज नारायण सिंह की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125(a) के तहत मामला दर्ज कर वाहन को जब्त कर लिया। गिरफ्तारी के बाद तुरंत मिली जमानत पुलिस ने 6 जनवरी की रात आरोपी बलवंत सिंह (33) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जोरा मॉल से तेलीबांधा की ओर लौट रहा था, तभी अचानक बाइक सामने आने से कार का संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही आरोपी को थाने से जमानत दे दी गई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़े सरकारी आंकड़ों के अनुसार— राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। 2023 में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं तमिलनाडु में दर्ज की गईं, जबकि सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। सड़क हादसों के प्रमुख कारण हादसों से बचाव के उपाय

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत Read Post »

Accident, Chhattisgarh, Crime, Political, Raipur, State, Top News

CM विष्णुदेव साय का दावा: G-RAM-G योजना मनरेगा से अधिक प्रभावी, 125 दिन रोजगार और हफ्तेभर में भुगतान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विकसित भारत गारंटी के अंतर्गत शुरू की गई रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) – G RAM G योजना को मनरेगा की तुलना में ज्यादा असरदार बताया है। उन्होंने कहा कि नई योजना में न सिर्फ काम के दिन बढ़ाए गए हैं, बल्कि मजदूरी भुगतान को लेकर भी सख्त समय-सीमा तय की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जहां मनरेगा में प्रति परिवार 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं G-RAM-G योजना में यह सीमा बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इससे ग्रामीण परिवारों को साल में 25 दिन अतिरिक्त रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी में सीधा लाभ होगा। सीएम ने कहा कि इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि मजदूरी भुगतान एक सप्ताह के भीतर श्रमिकों के खातों में पहुंचाने का प्रावधान किया गया है। देरी पर मिलेगा अतिरिक्त भुगतान सीएम विष्णुदेव साय ने बताया कि यदि मजदूरी भुगतान में तय समय-सीमा से देरी होती है, तो श्रमिकों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब भुगतान में अनावश्यक विलंब को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण मजदूरों की आर्थिक असुरक्षा कम होने का दावा किया गया है। खेती के मौसम में योजना अस्थायी रूप से बंद मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि G-RAM-G योजना पूरे साल लागू नहीं रहेगी। भारत और छत्तीसगढ़ को कृषि प्रधान राज्य बताते हुए उन्होंने कहा कि जब खेतों में काम अधिक रहेगा, खासकर धान कटाई के मौसम में, तब यह योजना अस्थायी रूप से बंद की जाएगी। वर्ष में करीब दो महीने योजना लागू नहीं होगी, ताकि किसान और खेतिहर मजदूर कृषि कार्यों में जुट सकें। योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज मनरेगा के विकल्प के रूप में लाई गई G-RAM-G योजना को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे “नाम बदलने वाली योजना” बताते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उन्होंने फंडिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मनरेगा की पूरी राशि केंद्र सरकार देती थी, जबकि अब राज्य सरकार को 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करना होगा, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर संदेह है। क्या है G-RAM-G योजना? G RAM G (विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) अधिनियम 2025 के तहत शुरू की गई नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है, जिसे मनरेगा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस योजना में— शामिल है। हालांकि, इसमें कृषि सीजन के दौरान लगभग 60 दिनों तक कार्य विराम और फंडिंग पैटर्न में बदलाव का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का दावा है कि इस योजना का लक्ष्य 2047 तक ग्रामीण आय और विकास को नई दिशा देना है।

CM विष्णुदेव साय का दावा: G-RAM-G योजना मनरेगा से अधिक प्रभावी, 125 दिन रोजगार और हफ्तेभर में भुगतान Read Post »

Chhattisgarh, Political, Raipur

शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप, DEO ने किया निलंबित

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। लोरमी विकासखंड के लखासर स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलम के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल सख्त कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। वीडियो में शिक्षक की हालत नशे में होने जैसी नजर आ रही है। वायरल वीडियो के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने मामले की प्राथमिक जांच कर इसकी पुष्टि की और तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली एल.पी. डाहिरे को सूचना देते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शराब के नशे में स्कूल आना न केवल शासकीय सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे छात्रों की सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर भी सीधा असर पड़ता है। शिक्षा विभाग ने इस कृत्य को विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। नियमों के तहत किया गया निलंबन जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 (1), (2) और (3) का उल्लंघन करार दिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (नियंत्रण, वर्गीकरण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(ए) के तहत सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में अनुशासन और बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप, DEO ने किया निलंबित Read Post »

Bijapur, Chhattisgarh, Crime, Education, Kanker, Political, Sukma
Scroll to Top