Health

तिल्दा-नेवरा में शराब पीकर बाइक चलाने वाले युवक पर कार्रवाई, 10 हजार का चालान

तिल्दा-नेवरा में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पुलिस लगातार वाहन चेकिंग अभियान चला रही है। इसी दौरान शराब के नशे में बाइक चलाते पकड़े गए एक युवक पर पुलिस ने 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई तिल्दा-नेवरा थाना प्रभारी निरीक्षक रमाकांत तिवारी के नेतृत्व में की गई। पुलिस टीम शहर के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की जांच कर रही थी। चेकिंग के दौरान एक युवक मोटरसाइकिल CG-04 CW-6204 से व्यस्त सड़क पर संदिग्ध तरीके से वाहन चलाते हुए नजर आया। पुलिस ने उसे रोककर जांच की तो पता चला कि वह शराब के नशे में वाहन चला रहा था। इसके बाद पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत उस पर 10 हजार रुपए का चालान किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि शराब पीकर वाहन चलाने से बचें और यातायात नियमों का पालन करें, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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राजधानी एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में पक रहा था खाना, प्रतिबंध के बावजूद लापरवाही; IRCTC से मांगा गया जवाब

रेलवे बोर्ड द्वारा एक्सप्रेस ट्रेनों की पेंट्रीकार में खाना पकाने पर रोक के बावजूद बिलासपुर स्टेशन पर नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर खड़ी बिलासपुर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में स्टाफ को भोजन बनाते पाया गया। खास बात यह रही कि मौके पर IRCTC से जुड़े अधिकारी भी मौजूद थे। सोमवार दोपहर करीब 1:15 बजे जब राजधानी एक्सप्रेस की रैक प्लेटफॉर्म पर लगी, तब कुछ मीडिया कर्मियों ने पेंट्रीकार का निरीक्षण किया। अंदर तीन हीटर पर बर्तन चढ़े थे, जिनमें दाल और चावल पक रहे थे। एक बर्तन में पानी उबल रहा था, जबकि उबले हुए आलू, कटे हुए बैंगन और कच्ची सब्जियां भी रखी थीं। पैकेट में बंद रोटियां और अन्य सामग्री भी पाई गई। इस दौरान सीसीआई मनोज साहा और स्टेशन मास्टर ओझा मौके पर पहुंचे और जांच की। पूछताछ में पेंट्रीकार स्टाफ ने बताया कि भोजन स्टाफ के लिए तैयार किया जा रहा था। पेंट्रीकार के मैनेजर ने खुद को IRCTC दिल्ली से जुड़ा अधिकारी बताया, जो ट्रेन के साथ यात्रा करता है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में कुछ ट्रेनों की पेंट्रीकार में गैस सिलेंडर से आग लगने की घटनाओं के बाद रेलवे बोर्ड ने सख्ती बरतते हुए एक्सप्रेस ट्रेनों में खाना पकाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। नियम के अनुसार भोजन बेस किचन से तैयार होकर ही ट्रेन में लोड किया जाना चाहिए। इस मामले में रेलवे प्रशासन ने IRCTC के क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही घटना की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। राजधानी एक्सप्रेस में सामने आए मामले की भी अलग से जांच की जा रही है।

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होली से पहले खाद्य विभाग की सख्त कार्रवाई, 23 लाख की संदिग्ध मिठाइयां जब्त, 87 सैंपल जांच के लिए भेजे

होली पर्व के मद्देनजर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने राजधानी में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया। इस दौरान विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर करीब 23 लाख रुपए की संदिग्ध और मिलावटी मिठाइयां, पनीर, खोवा और अन्य खाद्य सामग्री जब्त की गई। अभियान के तहत अधिकारियों ने कुल 87 खाद्य नमूने एकत्र किए हैं, जिन्हें परीक्षण के लिए राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित दुकानदारों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान 62 पैकेट नमकीन, 53 पैकेट रसगुल्ला, 15 पैकेट पान मसाला सहित अन्य खाद्य सामग्री अमानक पाई गई, जिन्हें तत्काल जब्त कर लिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि त्योहार तक यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सकें। इन क्षेत्रों में हुई जांच भाठागांव, टाटीबंध, गुढ़ियारी, पंडरी, जय स्तंभ चौक, सड्डू, टिकरापारा और गोलबाजार समेत कई प्रमुख बाजारों में मिठाई दुकानों, होटलों, बेकरी और डेयरी प्रतिष्ठानों की जांच की गई। इस दौरान मिलावटी खोवा, नकली पनीर से बनी मिठाइयां, दूषित मसाले और खराब गुणवत्ता वाली सामग्री बरामद की गई। खाद्य विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे खरीदारी के दौरान गुणवत्ता और पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दें तथा संदिग्ध खाद्य पदार्थों की जानकारी विभाग को दें।

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फिल्म सिटी के लिए कट रहे 50 साल पुराने पेड़, 150 से अधिक पेड़ ढहे, 1500 और चिन्हित

नवा रायपुर के माना-तूता क्षेत्र में प्रस्तावित फिल्म सिटी परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 96 एकड़ जमीन पर बनने वाली इस फिल्म सिटी के लिए अब तक 150 से अधिक पुराने पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि लगभग 1500 और पेड़ों की कटाई की तैयारी बताई जा रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इन पेड़ों को 1980 के दशक में बड़े पैमाने पर लगाया गया था। लगभग पांच हजार पौधों से विकसित हुआ यह हरित क्षेत्र अब एक घना मानव निर्मित वन बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि नवा रायपुर में पर्याप्त खाली जमीन उपलब्ध है, ऐसे में हरे-भरे पेड़ों को काटकर निर्माण कार्य करना उचित नहीं है। वे लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। राजनीतिक विरोध भी तेज कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन शुरू किया है। कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने कहा कि पार्टी फिल्म सिटी के निर्माण के खिलाफ नहीं है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाकर विकास स्वीकार्य नहीं है। उनका सुझाव है कि सरकार वैकल्पिक जमीन पर इस परियोजना को स्थापित करे। पेड़ों के स्थानांतरण की मांग छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने भी कहा कि कोशिश होनी चाहिए कि पेड़ों की कटाई टाली जाए। जहां संभव हो, पेड़ों को स्थानांतरित कर संरक्षित किया जाए ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे। फिल्म सिटी परियोजना जहां राज्य के मनोरंजन उद्योग के विकास की दिशा में अहम मानी जा रही है, वहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठ रहे सवालों ने इस योजना को विवादों में ला दिया है।

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अंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में खटमलों का प्रकोप, मरीजों की नींद हराम

अंबेडकर अस्पताल परिसर स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (ACI) में भर्ती मरीज इन दिनों इलाज से ज्यादा खटमलों की समस्या से जूझ रहे हैं। जनरल वार्ड से लेकर बेड, स्टूल, फाइलों और दीवारों तक खटमल रेंगते नजर आ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि रात होते ही स्थिति और भयावह हो जाती है। रातभर खटमल मारते गुजरती है रात मरीजों का आरोप है कि जैसे ही वार्ड की लाइटें धीमी होती हैं, खटमलों का प्रकोप बढ़ जाता है। कई मरीज रातभर सो नहीं पा रहे और चादरें झाड़कर खटमल मारते रहते हैं। कुछ मरीजों ने बताया कि गद्दों की सिलाई और नीचे की सतह पर बड़ी संख्या में खटमल छिपे रहते हैं। एक मरीज के परिजन ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि मच्छर काट रहे हैं, लेकिन टॉर्च की रोशनी में चादर हटाने पर खटमल दिखाई दिए। लगातार काटने से शरीर पर लाल दाने और सूजन उभर आई है। खुजली, जलन और संक्रमण का खतरा त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.के. निगम के अनुसार खटमल के काटने से तेज खुजली, लाल चकत्ते और सूजन हो सकती है। संवेदनशील मरीजों में एलर्जिक रिएक्शन की आशंका रहती है। लगातार खुजलाने से बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है, जो हृदय रोगियों के लिए गंभीर हो सकता है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि कार्डियोलॉजी विभाग में वुडन इंटीरियर के कारण यह समस्या सामने आई है। फिलहाल कीटनाशक उपचार किया जा रहा है और रेनोवेशन के दौरान संबंधित हिस्सों को बदला जाएगा। मरीजों की मांग मरीजों और परिजनों का कहना है कि हृदय रोग से जूझ रहे लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने वार्डों में नियमित फ्यूमिगेशन और साफ-सफाई की प्रभावी व्यवस्था की मांग की है।

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रायपुर में औचक निरीक्षण: उप स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी बंद मिलने पर कार्रवाई

रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सरोना क्षेत्र का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सरोना स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र और बाजार चौक का आंगनबाड़ी केंद्र बंद पाए गए, जिस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उप स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने पर कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया कि जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं। इसके बाद चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ नर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर एक दिन का वेतन काटने का आदेश दिया गया। निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन, डीसीपी ट्रैफिक विकास कुमार और एसडीएम नंदकुमार चौबे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। आंगनबाड़ी केंद्र भी मिला बंद इसके बाद कलेक्टर बाजार चौक, सरोना स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे, जहां केंद्र बंद मिला। उन्होंने मौके पर व्यवस्थाओं की जांच की। रसोई व्यवस्था की स्थिति जानने के लिए स्वयं गैस चूल्हा और बर्तनों का निरीक्षण किया। कलेक्टर के निर्देश पर जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर ने सीडीपीओ अनुपमा तिवारी, सुपरवाइजर गार्गी शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुंती सोनकर और सहायिका रेवती साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि सभी केंद्रों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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जान से खिलवाड़: पीलिया के नाम पर झाड़-फूंक और टोटकों का जाल, अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बिगड़ रही हालत

रायपुर। पीलिया (जॉन्डिस) को हल्की बीमारी समझकर देरी करना और अंधविश्वासी तरीकों पर भरोसा करना मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर से लेकर गांव तक नाभि पर अंडा रखने, अमरबेल का रस पिलाने, आंखों में पत्तियों का रस डालने, राख-चूने से झाड़ने और जड़ी-माला पहनाने जैसे “इलाज” खुलेआम किए जा रहे हैं—जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। नतीजा यह कि मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब हालत गंभीर हो चुकी होती है। क्लिनिकल रिकॉर्ड में चौंकाने वाले संकेत 50 से अधिक मरीजों के क्लिनिकल रिकॉर्ड के विश्लेषण में सामने आया कि बड़ी संख्या में लोग हफ्तों-महीनों तक टोना-टोटका करवाते रहे। कई मामलों में सामान्य पीलिया समझकर देरी की गई, जबकि मरीज ऑब्स्ट्रक्टिव जॉन्डिस (पित्त नली में रुकावट) से जूझ रहे थे। इस देरी से बिलीरुबिन खतरनाक स्तर तक पहुंच गया और कुछ मरीजों में इलाज जटिल हो गया—यहां तक कि कैंसर रोगियों को समय पर कीमोथेरेपी देना भी संभव नहीं रहा। मेकाहारा और अंबेडकर अस्पताल की स्टडी मेकाहारा अस्पताल में सामने आए मामलों में पाया गया कि अंधविश्वासी उपचार के कारण मरीज गंभीर अवस्था में पहुंचे। वहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग की 2023–2025 के बीच 250 से अधिक गंभीर मरीजों पर आधारित अध्ययन में भी यही रुझान दिखा। अनुमान है कि हर महीने करीब 20 मामले ऐसे मिलते हैं जिनमें देसी-टोटकों के कारण उपचार में देरी हुई। 251 रुपए की “माला” और मंत्र का दावा राजधानी के महादेव घाट इलाके में 251 रुपए में “मंत्र पढ़ी माला” देकर 15 दिन पहनने का दावा किया जा रहा है। जड़ी-बूटी और तंत्र-सामग्री का हवाला देकर इलाज का भरोसा दिलाया जाता है, जबकि इसका कोई चिकित्सीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ⚠️ ऑब्स्ट्रक्टिव जॉन्डिस क्यों खतरनाक? ऑब्स्ट्रक्टिव जॉन्डिस तब होता है जब पित्त नली में रुकावट आ जाती है। पित्त की पथरी, ट्यूमर, सूजन या कैंसर इसके कारण हो सकते हैं। यह छिपे हुए कैंसर का शुरुआती संकेत भी बन सकता है।पीलिया दो तरह का माना जाता है— सलाह: पीलिया के लक्षण (आंख-त्वचा पीली, गाढ़ा पेशाब, कमजोरी) दिखें तो तुरंत ब्लड टेस्ट और सोनोग्राफी कराएं। इलाज केवल योग्य डॉक्टर से कराएं; देरी जानलेवा हो सकती है।

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सुपेबेड़ा में फिर किडनी मरीज की मौत: एम्स रायपुर में उपचार के दौरान तोड़ा दम, मृतकों की संख्या 133 पहुंची

गरियाबंद। सुपेबेड़ा गांव में किडनी बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और मरीज की मौत के बाद गांव में शोक और चिंता का माहौल है। 49 वर्षीय प्रेमजय क्षेत्रपाल ने एम्स रायपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। साल 2005 से अब तक गांव में किडनी रोग से मरने वालों की संख्या बढ़कर 133 हो गई है। पांच साल से घर पर करवा रहे थे डायलिसिस जानकारी के मुताबिक, प्रेमजय पिछले पांच वर्षों से घर पर पेरिटोनियल डायलिसिस करा रहे थे। करीब 20 दिन पहले उनके पेट में लगा डायलिसिस फिस्टुला ब्लॉक हो गया, जिससे नियमित उपचार बाधित हो गया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें एक सप्ताह पहले एम्स रायपुर में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने उनके हाथ में नया फिस्टुला लगाने की कोशिश की, लेकिन मरीज की सहमति नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। बीएमओ प्रकाश साहू ने मौत की पुष्टि की है। परिवार में पहले भी कई मौतें प्रेमजय के परिवार पर इस बीमारी का गहरा असर पड़ा है। उनके माता-पिता और एक भाई समेत परिवार के आठ से अधिक सदस्य पहले ही किडनी रोग से जान गंवा चुके हैं। गांव में अब भी 40 से ज्यादा मरीज पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 से अब तक 133 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 70 से 80 बताई जाती है। वर्तमान में गांव में 40 से अधिक मरीज किडनी रोग से जूझ रहे हैं, जिनमें से तीन का इलाज एम्स में जारी है। आधे से अधिक मरीज बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक ग्रामीणों में बीमारी का डर इतना बढ़ गया है कि कई लोगों ने खून की जांच कराना बंद कर दिया है। पिछले दो वर्षों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में किसी विशेषज्ञ टीम के साथ स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया गया है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। यहां भेजी गई डायलिसिस मशीन भी स्थापित नहीं हो पाई है। दो स्वीकृत डॉक्टरों में से केवल एक ही कार्यरत है और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्वच्छ पेयजल की योजना भी अधूरी पड़ी है।

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रायपुर के टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर के तार बच्चा चोर गिरोह से जुड़े?

डॉ. पहलाजानी समेत मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों पर FIR के आदेश, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी जांच रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित टेस्ट ट्यूब बेबी और सरोगेसी सेंटर से जुड़े एक बेहद संवेदनशील बच्चों की अदला-बदली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने सेंटर के संचालक डॉ. नीरज पहलाजानी, मेडिकल बोर्ड में शामिल डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच के निर्देश दिए हैं। अब इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जाएगी। यह मामला शंकर नगर स्थित पहलाजानी टेस्ट ट्यूब बेबी एंड सरोगेसी सेंटर (माता लक्ष्मी नर्सिंग होम) से जुड़ा है, जहां दो साल पहले एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। क्या है पूरा मामला पीड़ित परिवार के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 को महिला ने एक लड़का और एक लड़की को जन्म दिया था, लेकिन कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें दो लड़कियां सौंप दीं। इस पर परिवार को संदेह हुआ और शिकायत दर्ज कराई गई। मामला सामने आने के बाद कराई गई डीएनए जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि सौंपी गई दो बच्चियों में से एक बच्ची माता-पिता की जैविक संतान थी, जबकि दूसरी बच्ची का डीएनए किसी भी माता-पिता से मेल नहीं खाता था। इससे बच्चों की अदला-बदली की आशंका प्रमाणित हुई। प्रशासनिक जांच पर उठे सवाल पीड़ितों का आरोप है कि डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बावजूद तत्कालीन अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब पीड़ित परिवार ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग की, तो तत्कालीन सीएमएचओ ने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों की अगुवाई में छह डॉक्टरों की एक नई टीम गठित कर दोबारा जांच कराई, जिसने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट दे दी। बच्चा चोर गिरोह से सांठगांठ के आरोप पीड़ितों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रसूखदार डॉक्टरों और बच्चा चोर गिरोह की सांठगांठ हो सकती है। न्याय की तलाश में पीड़ित परिवार पहले हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन कानूनी कारणों से याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे गंभीर और विस्तृत जांच योग्य माना। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर भी कड़े सवाल उठाए और रायपुर एसपी को निर्देश दिया कि अपीलकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। पहले से विवादों में रहे हैं डॉ. पहलाजानी गौरतलब है कि डॉ. नीरज पहलाजानी पहले से ही ₹700 करोड़ के कोल लेवी घोटाले में जांच के दायरे में रह चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे कोल माफिया सूर्यकांत तिवारी के साथ कथित नकद लेनदेन को लेकर पूछताछ की थी। अब बच्चों की अदला-बदली जैसे गंभीर मामले में उनका नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकती है।

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CGMSC घोटाला: डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा गिरफ्तार, 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड

सरकार को तीन गुना महंगे रिएजेंट सप्लाई कराने का आरोप, साजिश की परतें खुलीं छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। नवी मुंबई स्थित डायसिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को 21 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपी को 22 जनवरी को विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 27 जनवरी 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब तक 9 से ज्यादा आरोपी गिरफ्त में CGMSC घोटाले में इससे पहले 18 जनवरी 2026 को ACB/EOW ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। वहीं, इससे पूर्व मोक्षित कॉर्पोरेशन, दुर्ग के संचालक शशांक चोपड़ा समेत पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक जिन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें इन सभी पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड गिरफ्तार आरोपियों को 19 जनवरी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उन्हें भी 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। ACB/EOW का कहना है कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना’ में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जारी है। कंपनी पॉलिसी दरकिनार कर बढ़ाई गई कीमतें जांच में यह सामने आया है कि डायसिस इंडिया ने अपने रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स के लिए पहले से निश्चित एमआरपी तय कर रखी थी। इसके बावजूद कुंजल शर्मा ने जानबूझकर कंपनी की नीति को नजरअंदाज किया और मोक्षित कॉर्पोरेशन को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए अधिक कीमतें प्रस्तावित कीं। शशांक चोपड़ा के साथ साजिश का आरोप ACB की जांच के अनुसार कुंजल शर्मा ने मोक्षित कॉर्पोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा। तय एमआरपी से कहीं अधिक दरों और शर्तों को अनधिकृत रूप से CGMSC को भेजा गया, जिससे टेंडर प्रक्रिया प्रभावित हुई और मोक्षित कॉर्पोरेशन की ऊंची दरों को मंजूरी मिल गई। तीन गुना तक महंगे दामों पर सप्लाई जांच में यह भी सामने आया है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने वास्तविक एमआरपी से तीन गुना तक महंगे दामों पर रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की आपूर्ति की। इससे राज्य सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को करोड़ों का अनुचित लाभ मिला। हमर लैब योजना की गहन जांच जारी ACB/EOW ने स्पष्ट किया है कि हमर लैब योजना के अंतर्गत हुई खरीद प्रक्रिया, भुगतान और आपूर्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। क्या है पूरा CGMSC घोटाला? CGMSC घोटाले में अधिकारियों और कारोबारियों की मिलीभगत से सरकार को करीब 411 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। आरोप है कि IAS और IFS अधिकारियों की सांठगांठ से महज 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये की खरीदी कर ली गई। इस मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर शशांक चोपड़ा फिलहाल 23 जनवरी तक ED की कस्टोडियल रिमांड पर है। 8 रुपये की चीज 2352 में, 5 लाख की मशीन 17 लाख में खरीदी जांच में सामने आया है कि इसके अलावा CGMSC ने 300 करोड़ रुपये के रिएजेंट्स की खरीद की। शिकायत से खुला घोटाले का राज दिसंबर 2024 में पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने CGMSC में अनियमितताओं की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, CBI और ED से की थी। इसके बाद केंद्र से निर्देश मिलने पर EOW ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज बंद EOW की जांच के घेरे में आने के बाद श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने अपना कारोबार बंद कर दिया। कंपनी की वेबसाइट पर फर्म की स्थिति अस्थायी रूप से बंद दर्शाई जा रही है। यह कंपनी ग्राम तर्रा, तहसील धरसींवा, रायपुर में स्थित थी। कैसे मिलता था टेंडर? EOW की रिपोर्ट के अनुसार CGMSC अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को 27 दिनों में 750 करोड़ रुपये का काम दिया। जरूरत न होने के बावजूद मेडिकल किट और मशीनों की खरीदी की गई।मोक्षित कॉर्पोरेशन और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने कार्टेल बनाकर टेंडर कोडिंग की, जबकि CGMSC अधिकारियों ने शर्तें इस तरह तय कीं कि दूसरी कंपनियां टेंडर से बाहर हो जाएं। 27 जनवरी 2025 को हुई थी बड़ी रेड 27 जनवरी 2025 को EOW की टीम ने रायपुर, दुर्ग और हरियाणा के पंचकुला में एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान मोक्षित कॉर्पोरेशन और उससे जुड़े 16 ठिकानों से अहम दस्तावेज जब्त किए गए। जरूरत न होते हुए भी 300 करोड़ की खरीदी जांच में सामने आया कि कांग्रेस शासनकाल में जनवरी 2022 से अक्टूबर 2023 के बीच जरूरत से ज्यादा रिएजेंट खरीदे गए। 200 से अधिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रिएजेंट भेजे गए, जहां न मशीन थी, न तकनीशियन।रीएजेंट की एक्सपायरी केवल 2–3 महीने शेष थी, जिससे बचाव के लिए CGMSC 600 फ्रिज खरीदने की तैयारी में था।

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