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रायपुर में बड़ा एक्शन: शराब-जुआ सिंडिकेट चलाने वाला आरोपी कोर्ट के बाहर गिरफ्तार

Raipur के गंज इलाके में अवैध शराब तस्करी और जुआ संचालन से जुड़े एक बड़े आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी दीपक मुदलियार को उस वक्त पकड़ा गया, जब वह गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की कोशिश कर रहा था। क्राइम ब्रांच और गंज थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की। पुलिस को पहले ही सूचना मिल गई थी कि आरोपी गुपचुप तरीके से कोर्ट में सरेंडर करने की योजना बना रहा है। इसके बाद एसीपी कोतवाली के नेतृत्व में टीम ने कोर्ट परिसर के आसपास सादे कपड़ों में घेराबंदी की और मौके पर पहुंचते ही आरोपी को दबोच लिया। पुलिस के अनुसार दीपक मुदलियार गंज क्षेत्र में अवैध शराब और जुआ का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। उसके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज हैं और वह लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। बताया जा रहा है कि इलाके में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए आरोपी धमकी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का भी सहारा लेता था। साथ ही उसे कथित तौर पर कुछ स्थानीय राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त था, जिसके चलते उसका अवैध कारोबार लंबे समय तक चलता रहा। इस मामले की शुरुआत गंज मंडी के एक व्यापारी की शिकायत से हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की। पहले चरण की कार्रवाई में आरोपी के कुछ साथियों को गिरफ्तार किया गया और उसके ठिकानों से बड़ी मात्रा में अवैध शराब भी बरामद की गई थी, लेकिन मुख्य आरोपी फरार हो गया था। लगातार दबिश और तलाश के बाद आखिरकार पुलिस ने सोमवार को उसे गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट के निर्देश पर आरोपी को जेल भेज दिया गया है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

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नक्सलवाद पर निर्णायक जीत: 72 हजार जवानों के ऑपरेशन से ढहा लाल आतंक, सैकड़ों ढेर और हजारों ने किया सरेंडर

करीब पांच दशकों तक देश के लिए चुनौती बने नक्सलवाद पर अब निर्णायक जीत का दावा किया जा रहा है। यह सफलता सुरक्षा बलों के साहस, रणनीति और लगातार चलाए गए अभियानों का परिणाम मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार अब तक 535 नक्सली मारे जा चुके हैं, जबकि 2898 ने आत्मसमर्पण किया है और महज 23 सक्रिय नक्सली ही शेष बताए जा रहे हैं। नक्सलवाद की शुरुआत साल 1968 में हुई, जब आंध्रप्रदेश के रास्ते यह अविभाजित मध्यप्रदेश के बस्तर क्षेत्र में पहुंचा। शुरुआत में यह एक विचारधारा तक सीमित था, लेकिन समय के साथ संगठन ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली। लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई, विस्फोटक बनाने के तरीके सिखाए गए और ‘जनताना सरकार’ के नाम पर समानांतर व्यवस्था खड़ी की गई। 1990 के दशक में यह समस्या सरगुजा तक फैल गई और 2010 तक अपने चरम पर पहुंच गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने सख्त कार्रवाई शुरू की और 2015 में सरगुजा को नक्सलमुक्त घोषित कर दिया गया। हालांकि बस्तर क्षेत्र अब भी चुनौती बना रहा, क्योंकि अन्य इलाकों से भागे नक्सली यहां आकर छिप गए थे। घने जंगल, पहाड़ी इलाका और इंद्रावती नदी जैसे भौगोलिक कारक नक्सलियों के लिए सुरक्षा कवच बने हुए थे। साथ ही तेलंगाना, ओडिशा, आंध्रप्रदेश और झारखंड की सीमाओं से सटे होने के कारण वे आसानी से एक राज्य से दूसरे राज्य में भाग जाते थे। साल 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के निर्देशन में केंद्र और राज्यों ने संयुक्त रणनीति के तहत बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया। करीब 72 हजार सुरक्षाबल के जवानों ने डेढ़ साल तक लगातार ऑपरेशन चलाया। तकनीकी सहायता के लिए ISRO समेत कई एजेंसियों की मदद ली गई। इस अभियान में कई बड़े नक्सली नेताओं को मार गिराया गया। 21 मई 2025 को महासचिव बसवराजू के मारे जाने को एक अहम मोड़ माना गया, जिसके बाद संगठन में तेजी से टूटन शुरू हुई। इसके बाद 18 नवंबर 2025 को हिड़मा की मौत ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी और बड़े पैमाने पर आत्मसमर्पण होने लगे। केंद्र सरकार ने पहले ही 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलमुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। अब तक की स्थिति के अनुसार छत्तीसगढ़ लगभग पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुका है। हालांकि तेलंगाना और झारखंड में कुछ बड़े नक्सली नेता अब भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक राज्य में बचे हुए नक्सली अब गांवों में छिपे हुए हैं और उन्हें आत्मसमर्पण के लिए लगातार संदेश भेजे जा रहे हैं। नक्सलवाद के दौर में कई दर्दनाक घटनाएं भी सामने आईं। कांकेर जिले के एक गांव में स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने वाले युवक मनेश नुरेटी की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। इस घटना ने उस दौर के भय और अत्याचार की तस्वीर को उजागर किया, जब आम नागरिकों को देशभक्ति दिखाने की भी कीमत चुकानी पड़ती थी। आज सुरक्षा बलों की इस सफलता को लोकतंत्र की बड़ी जीत माना जा रहा है, जिसमें जवानों के बलिदान और निरंतर प्रयासों ने अहम भूमिका निभाई है।

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रायपुर निगम बजट 2026-27: इलेक्ट्रॉनिक मार्केट से वुमन हॉस्टल तक बड़ी घोषणाएं, हंगामे के बीच पेश हुआ बजट

Raipur नगर निगम में महापौर Meenal Choubey ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2130 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। यह बजट पिछले साल की तुलना में 601 करोड़ अधिक है, लेकिन इसके बावजूद 206 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान जताया गया है, जिससे वित्तीय संतुलन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बजट में शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में विकास कार्यों की कई नई घोषणाएं की गई हैं। शंकरनगर और डूमरतराई में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट विकसित किए जाएंगे, जबकि भाठागांव में पार्किंग सुविधा तैयार होगी। सड्डू क्षेत्र में करीब 38.93 करोड़ की लागत से पानी की टंकी और फिल्टर प्लांट स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही पंडरी-सिद्धार्थ चौक के पास वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान करते हुए स्वरोजगार, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और जोन कार्यालयों में सेनेटरी नैपकिन की सुविधा देने की बात कही गई है। इसके अलावा 5 करोड़ रुपए से शांति गृह और 48 करोड़ रुपए से वर्किंग वुमन हॉस्टल बनाने की योजना शामिल है। शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सड़क चौड़ीकरण, नाला-नाली निर्माण, जलापूर्ति व्यवस्था और रोबोटिक सफाई पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। हर जोन में दो नए उद्यान विकसित करने, खेल परिसर निर्माण और अखाड़ों के जीर्णोद्धार की योजना भी शामिल है। साथ ही खारुन महोत्सव शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा मंदिरों से फूल संग्रह के लिए वाहन, पे-एंड-यूज शौचालय, कारी तालाब में पार्किंग और वेंडिंग जोन, तथा शहर में 15 नए वेंडिंग जोन विकसित करने की घोषणा की गई है। बजट पेश होने के दौरान निगम सभाकक्ष में राजनीतिक माहौल भी गरमाया रहा। सत्ता और विपक्ष के पार्षदों के बीच करीब आधे घंटे तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा। नेता प्रतिपक्ष Akash Tiwari ने पिछले बजट की घोषणाओं पर चर्चा की मांग की और सरकार को अधूरे वादों पर घेरा। महापौर ने अपने करीब दो घंटे के भाषण में पिछले कार्यों का विवरण देते हुए नई योजनाओं की जरूरत पर जोर दिया। वहीं विपक्ष ने इस बजट को “जुमलों का पुलिंदा” बताते हुए आरोप लगाया कि पुरानी घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं और नए वादे सिर्फ कागजी हैं। खास बात यह रही कि कई योजनाएं, जैसे वर्किंग वुमन हॉस्टल, लाइब्रेरी, तालाब विकास और रिवर फ्रंट, पहले भी बजट में शामिल थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी प्रगति सीमित रही। इसी वजह से इन्हें इस बार फिर से बजट में शामिल किया गया है।

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छत्तीसगढ़ में महंगा हुआ सफर, 1 अप्रैल से बढ़े टोल टैक्स

National Highways Authority of India ने छत्तीसगढ़ में नेशनल हाईवे पर टोल दरों में बढ़ोतरी का फैसला लिया है। नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी, जिसके बाद हर टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों को पहले के मुकाबले अधिक शुल्क देना होगा। जानकारी के अनुसार, बिलासपुर से रायपुर, कोरबा, अंबिकापुर और रायगढ़ जैसे प्रमुख मार्गों पर सभी टोल प्लाजा में न्यूनतम 5 रुपए की वृद्धि की गई है। वहीं अलग-अलग श्रेणियों के वाहनों के लिए यह बढ़ोतरी 5 से 20 रुपए तक पहुंच सकती है। सालाना पास धारकों पर भी इसका असर पड़ेगा। पहले जो वार्षिक पास 3000 रुपए में बनता था, वह अब 3075 रुपए में मिलेगा। हालांकि स्थानीय पासधारकों को राहत देते हुए पुराने दर ही लागू रहेंगे। बिलासपुर जिले के भोजपुरी, मुढ़ीपार, पाराघाट और बगदेवा टोल प्लाजा से रोजाना गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को इस बढ़ोतरी का सीधा असर झेलना पड़ेगा, जिससे रोजाना यात्रा करने वालों का खर्च बढ़ेगा। यह संशोधन वार्षिक समीक्षा प्रक्रिया के तहत किया गया है, जिसमें टोल दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय होती हैं। सड़क की लंबाई और उपलब्ध सुविधाओं जैसे फ्लाईओवर और अंडरपास को भी दर निर्धारण में शामिल किया जाता है। नए नियमों के अनुसार सभी टोल प्लाजा पर FASTag के जरिए ही भुगतान अनिवार्य रहेगा। बिना FASTag वाले वाहनों को दोगुना शुल्क देना होगा।

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नीतीश कुमार ने MLC पद छोड़ा, अशोक चौधरी हुए भावुक; विपक्ष ने लगाया दबाव का आरोप

बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनका त्यागपत्र एमएलसी संजय गांधी के माध्यम से सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा गया, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया। मंत्री विजय चौधरी ने बताया कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए यह इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दिया गया है। इस्तीफे के बाद भावुक हुए मंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मंत्री अशोक चौधरी भावुक हो गए और सार्वजनिक रूप से रोते नजर आए। यह दृश्य राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। विपक्ष का आरोप वहीं नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस कदम को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से दबाव में इस्तीफा दिलवाया गया है। BJP नेता का भी इस्तीफा इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उनका त्यागपत्र प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के जरिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को सौंपा गया। दिनभर चला घटनाक्रम आगे क्या? राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, खरमास खत्म होने के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन संभव है। ऐसी अटकलें हैं कि मुख्यमंत्री पद को लेकर नई रणनीति बन सकती है। हालांकि संवैधानिक प्रावधान के अनुसार नीतीश कुमार 6 महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। भावुक पोस्ट भी चर्चा में इस्तीफे के बीच नितिन नवीन का एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आया, जिसमें उन्होंने अपनी मां को याद करते हुए निजी भावनाएं साझा कीं।

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जनगणना 2026 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू, 33 सवाल तय; लिव-इन कपल को भी मिलेगा शादीशुदा दर्जा

देश में होने वाली जनगणना की प्रक्रिया का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस चरण के लिए कुल 33 सवाल निर्धारित किए हैं। खास बात यह है कि स्थायी संबंध में रहने वाले लिव-इन कपल्स को भी इस जनगणना में शादीशुदा की श्रेणी में रखा जाएगा, बशर्ते वे अपने रिश्ते को स्थिर मानते हों। इस बार जनगणना प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया है, जहां लोग स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। पोर्टल पर आम नागरिकों की मदद के लिए FAQ सेक्शन भी उपलब्ध रहेगा। पहला चरण: हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना जनगणना का पहला फेज ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहलाता है। इसमें देशभर के घरों, उनकी स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, ताकि सरकार भविष्य की योजनाओं को बेहतर तरीके से तैयार कर सके। रेफरेंस डेट का महत्व भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के अनुसार, जनगणना की संदर्भ तिथि (रेफरेंस डेट) 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि तय की गई है। इसी आधार पर सभी आंकड़े दर्ज किए जाएंगे, इसलिए इसे जनगणना 2027 कहा जा रहा है। प्रक्रिया और समयसीमा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरा किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को यह कार्य लगभग 30 दिनों में पूरा करना होगा। इसके अलावा, हाउस लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ यानी खुद जानकारी भरने का विकल्प भी दिया जाएगा। दरअसल, यह जनगणना पहले 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब यह प्रक्रिया 2027 में पूरी होगी।

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हादसे और चोटों के बावजूद जीता गोल्ड: मिजोरम के इसाक ने हौसले से बदल दी कहानी

कुछ कहानियां मेडल से बड़ी होती हैं और हौसले की नई परिभाषा देती हैं। मिजोरम के 18 वर्षीय वेटलिफ्टर इसाक मलसोमल्गा की कहानी भी ऐसी ही है। जीवन के सबसे कठिन दौर में भी उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि अपने दर्द को ताकत बनाकर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में 235 किलोग्राम उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। स्नैच में पिछड़ने के बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी की और यह जीत सिर्फ पोडियम की नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों पर मिली जिसमें ज्यादातर लोग हार मान लेते। जिंदगी ने दिए कई झटके 2018 में इसाक ने अपने पिता को सड़क हादसे में खो दिया। उसी साल उन्होंने वेटलिफ्टिंग शुरू की थी। घर की जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता के बीच उन्होंने खेल छोड़ने का मन बनाया, लेकिन कोच और परिवार ने उन्हें संभाला और आगे बढ़ने का हौसला दिया। 2024 में यूथ नेशनल में सिल्वर जीतकर उन्होंने खुद को साबित किया, लेकिन उसी समय उनकी मां कैंसर से जूझने लगीं। आर्थिक और मानसिक दबाव के बीच उनके चाचा-चाची ने उन्हें सहारा दिया। मां के निधन के बाद भी इसाक ने हार नहीं मानी। चोट के बावजूद संघर्ष जारी खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से पहले उन्हें पीठ में चोट लगी थी। कोच ने आराम की सलाह दी, लेकिन इसाक ने खुद पर भरोसा किया। रायपुर के मंच पर उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और गोल्ड जीतकर सभी को प्रेरित किया। इसाक वर्तमान में साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इम्फाल में ट्रेनिंग कर रहे हैं और पढ़ाई भी जारी है। उनका लक्ष्य अब बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता हासिल करना है।

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छत्तीसगढ़ में रसोई गैस पाइपलाइन अब होगी तेज़: ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेगी अनुमति

छत्तीसगढ़ के शहरी क्षेत्रों में घरों तक प्राकृतिक गैस (पीएनजी) पाइपलाइन पहुंचाने के प्रोजेक्ट में लंबे समय से आ रही अड़चनों को राज्य सरकार ने समाप्त करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सभी कलेक्टरों और संबंधित निकायों को केंद्र सरकार के ‘प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश 2026’ का पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं। अब पाइपलाइन बिछाने की अनुमति अनिश्चितकाल के लिए नहीं रोकी जाएगी। सड़क खुदाई और तकनीकी अनुमतियों के लिए निश्चित समय-सीमा तय की गई है। निजी या गैर-सरकारी भूमि पर पाइपलाइन के लिए मुआवजे की दरें स्पष्ट कर दी गई हैं। व्यावसायिक भूमि पर प्रचलित सर्कल रेट का 30% भुगतान अनिवार्य होगा, और यदि 24 घंटे के भीतर अनुमति दी जाती है, तो अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का प्रावधान भी है। पीएनजी कनेक्शन मिलने से नागरिकों को एलपीजी सिलेंडर की तुलना में 20-30% सस्ती गैस, घर पर मीटर आधारित सप्लाई और रिफिलिंग के झंझट से मुक्ति मिलेगी। पिछड़ी मंजूरी प्रक्रिया का समाधान पहले स्थानीय प्रशासन और विभिन्न विभागों (जैसे लोक निर्माण विभाग, नगर निगम) से अनुमतियां न मिलने के कारण पाइपलाइन का काम अधर में अटका हुआ था। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि भूमिगत पाइपलाइन अधिनियम 2004 के तहत सभी अनुमतियां तुरंत दी जाएंगी। इससे पाइपलाइन बिछाने का काम जल्द पूरा होगा और नागरिकों को कनेक्शन मिल सकेगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लिए 5 प्रमुख निर्णय राज्य सरकार ने सभी विभागों, कलेक्टरों और निकायों को निर्देश दिए हैं कि सिटी गैस वितरण योजना को जल्द से जल्द लागू किया जाए और पाइपलाइन बिछाने में किसी तरह की बाधा न आए।

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गोंदिया स्टेशन पर ट्रैक सुधार पूरा, रद्द ट्रेनें बहाल; समर स्पेशल भी शुरू

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR), नागपुर मंडल ने गोंदिया स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 (लाइन नंबर 5) पर ‘वॉशेबल एप्रन’ को हटाकर बैलस्टेड ट्रैक में बदलने का काम पूरा कर लिया है। इस काम के पूरा होने के बाद अब यात्रियों की सुविधा के लिए पहले रद्द की गई कई एक्सप्रेस ट्रेनें बहाल कर दी गई हैं। साथ ही, गर्मियों की छुट्टियों में बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी (नागपुर) – शालीमार (कोलकाता) के बीच साप्ताहिक समर स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी। बहाल हुई प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनें समर स्पेशल ट्रेन विवरण 08865 (इतवारी → शालीमार) 08866 (शालीमार → इतवारी) कोच संरचना: 02 SLRD, 04 जनरल, 10 शयनयान (SL), 03 एसी-3 टियर, 01 एसी-2 टियर, 01 पैंट्री कार, 01 VPU, कुल 21 ICF कोच। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे यात्रा से पहले पीएनआर स्टेटस और ट्रेन समय की पुष्टि 139 नंबर, NTES ऐप, RailYatri ऐप या आधिकारिक वेबसाइट indianrailways.gov.in से जरूर करें। इस सुधार और नई सुविधाओं से छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र-कोलकाता रूट पर यात्रा करने वाले हजारों मुसाफिरों को राहत मिलेगी।

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रायपुर में शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर बड़ी कार्रवाई, 159 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संडे नाइट विशेष चेकिंग अभियान चलाया। शहर के 8 प्रमुख पॉइंट्स पर सरप्राइज रैंडम चेकिंग के दौरान 159 वाहन चालक नशे की हालत में ड्राइव करते हुए पकड़े गए। यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है, इससे पहले अधिकतम 154 केस दर्ज हुए थे। साल 2026 के पहले तीन महीनों में ही रायपुर पुलिस ने नशे में वाहन चलाने के 1,580 मामलों में कार्रवाई की, जो साल 2025 के पूरे 1,537 मामलों के रिकॉर्ड को पार कर गया। पुलिस अब सभी आरोपियों के ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड कराने के लिए RTO को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है। इस अभियान का निर्देशन पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला और डीसीपी विकास कुमार कर रहे हैं। चेकिंग के दौरान ब्रीथ एनालाइजर से जांच की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि शराब पीकर वाहन न चलाएं। वाहन चालकों को हमेशा सीट बेल्ट और दोपहिया पर हेलमेट का उपयोग करना चाहिए। बच्चों को किसी भी हालत में वाहन न चलाने दें। आने वाले दिनों में इस अभियान को लगातार जारी रखने की योजना है।

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