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तीसरे बजट सत्र की तैयारी में साय सरकार, आज से मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू

छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तीसरे बजट की तैयारियों को रफ्तार दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार इस बजट के जरिए विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में वित्त विभाग ने मंत्री-स्तरीय बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। 6 से 9 जनवरी तक चलने वाली इन बैठकों की अध्यक्षता वित्त मंत्री ओपी चौधरी करेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा कर उनके विभागों के बजट प्रस्तावों और प्राथमिकताओं की समीक्षा करेंगे। पहले दिन 4 मंत्री रखेंगे विभागीय प्रस्ताव मंगलवार को पहले दिन चार मंत्री अपने-अपने विभागों के बजट प्रस्ताव वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। 📅 6 जनवरी की बैठक का कार्यक्रम 📅 7 जनवरी का शेड्यूल 📅 8 जनवरी की बैठक 8 जनवरी को उप मुख्यमंत्री अरुण साव की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण तथा नगरीय प्रशासन विभागों के बजट प्रस्तावों पर चर्चा होगी।इसके बाद दोपहर 2.30 बजे स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग और विधि-विधायी विभागों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। 📅 9 जनवरी का कार्यक्रम सरकार का उद्देश्य इन बैठकों के माध्यम से बजट को ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि राज्य के विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा दी जा सके।

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छत्तीसगढ़ की वोटर लिस्ट में फिर बढ़ेगी मतदाताओं की संख्या, 2.74 लाख से ज्यादा लोगों ने दोबारा आवेदन किया

छत्तीसगढ़ में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम पूरा होने के बाद मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जहां 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग अपने नाम दोबारा जुड़वाने के लिए सामने आ रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद प्रदेश में कुल 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 मतदाता दर्ज किए गए थे। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जिन मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हो गए थे, उनके लिए दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत अब तक 2 लाख 74 हजार से ज्यादा लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन फॉर्म भरे हैं। 45 दिन चला घर-घर सत्यापन अभियान यह विशेष अभियान 7 नवंबर से करीब 45 दिनों तक चला, जिसमें बूथ लेवल अधिकारियों ने प्रदेशभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, दोहरी प्रविष्टि वाले नाम और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाया गया। किन कारणों से हटे नाम निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए कुल 27,34,817 नामों में शामिल हैं— दावा-आपत्ति की समय-सीमा जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हैं, उन्हें चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी कर दोबारा नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। अब तक फार्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनकी जांच और स्क्रूटनी के बाद योग्य पाए गए मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। निर्वाचन आयोग का बयान निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सभी जिलों के कलेक्टरों और निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी रखा जाए। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम अवश्य जांचें। अंतिम सूची जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ में मतदाताओं की संख्या में एक बार फिर बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर: बच्चा चोरी के शक में महिला के साथ मारपीट, कॉलोनी में मचा हंगामा; पुलिस ने भीड़ से बचाया

रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत पार्वती नगर कॉलोनी में बच्चा चोरी के संदेह को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। कॉलोनी में घूम रही एक महिला पर स्थानीय लोगों ने बच्चा चोरी का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला कॉलोनी में संदिग्ध अवस्था में घूम रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उस पर शक जताया, जिसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। बिना किसी पुष्टि के लोगों ने महिला से पूछताछ शुरू की और बाद में उसके साथ हाथापाई करने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घटना के दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली सूचना मिलते ही खम्हारडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने भीड़ से महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। बच्चा चोरी की पुष्टि नहीं, जांच जारी पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक बच्चा चोरी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है कि महिला किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल थी या नहीं। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और किसी संदिग्ध स्थिति में सीधे पुलिस को सूचना दें।

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रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत, फांसी लगाने का आरोप; जेल के बाहर परिजनों और समाज का धरना

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित सेंट्रल जेल में एक विचाराधीन कैदी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान सुनील महानंद (30) के रूप में हुई है, जो पॉक्सो प्रकरण में 11 नवंबर 2025 से जेल में बंद था। घटना की जानकारी मिलते ही मृतक की पत्नी ललिता महानंद जेल परिसर के बाहर बेहोश हो गईं। इसके बाद परिजन, समाज के लोग और कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता जेल के बाहर धरने पर बैठ गए और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप परिजनों का आरोप है कि सुनील महानंद को जेल में लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि वह कई बार फोन और मुलाकात के दौरान अपनी परेशानी बता चुका था। इसी के विरोध में परिजनों और समाज के लोगों ने जेल के बाहर प्रदर्शन करते हुए जेलर पर कार्रवाई की मांग की और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कैसे हुई घटना? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 6:45 बजे सुनील महानंद जेल परिसर में टहलते हुए पीपल के पेड़ के पास पहुंचा। वहां उसने गमछे से फंदा बनाकर पेड़ की टहनी पर फांसी लगा ली। मौके पर मौजूद जेल प्रहरी ने उसे तुरंत नीचे उतारा। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। इसके बाद उसे तत्काल मेकाहारा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। यह पूरी घटना जेल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। फुटेज में कैदी को फांसी लगाते हुए देखा गया है, जिसके आधार पर पुलिस फिलहाल इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। बिना सूचना दिए भेजा गया शव? परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद बिना जानकारी दिए शव को चोरी-छिपे मॉर्चुरी भेज दिया गया। उन्हें इस घटना की सूचना काफी देर बाद दी गई। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते उन्हें जानकारी दी जाती, तो वे मौके पर पहुंच सकते थे। उन्होंने जेल प्रशासन पर जानबूझकर सूचना देने में देरी करने का आरोप लगाया है। सामान और पैसे छीनने के आरोप मृतक के परिजनों ने बताया कि सुनील पिछले दो महीनों से जेल में बंद था और वे नियमित रूप से उससे मिलने जाते थे। सुनील ने उन्हें बताया था कि जेल में उसके कपड़े, खाने-पीने का सामान और पैसे छीन लिए जाते थे। परिजनों का दावा है कि उन्होंने उसे स्वेटर, कपड़े और खाने का सामान दिया था, जो उसे नहीं मिलता था। इसके अलावा पेटीएम के जरिए भेजी गई राशि भी उसे नहीं दी गई। जेल प्रशासन का पक्ष इस मामले पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने बताया कि घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। फिलहाल मामले ने तूल पकड़ लिया है और जेल प्रशासन की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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रायपुर: मांगों को लेकर सड़क पर उतरीं बिहान योजना की महिलाएं, मंत्री से मुलाकात तक धरना जारी रखने का ऐलान

रायपुर में एनआरएलएम (बिहान योजना) से जुड़ी महिलाएं अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़क पर उतर आईं। प्रदेश के विभिन्न जिलों से राजधानी पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं राजीव गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक संबंधित विभाग के मंत्री से सीधी बातचीत नहीं होती, वे सड़क से नहीं हटेंगी। महिलाएं अपनी 7 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले कई घंटों से प्रदर्शन कर रही हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकार की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का काम कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न तो उचित मानदेय मिल रहा है और न ही नौकरी की कोई सुरक्षा दी गई है। बेहद कम मानदेय, बढ़ता आर्थिक दबाव धरने में शामिल महिलाओं ने बताया कि उन्हें वर्तमान में मात्र 1910 रुपए मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। महिलाओं का कहना है कि इतनी कम राशि में न तो परिवार का खर्च चल पाता है और न ही काम से जुड़े जरूरी खर्च पूरे हो पाते हैं। उन्होंने मांग की कि उनका मानदेय छत्तीसगढ़ शासन के न्यूनतम वेतन अधिनियम के अनुरूप बढ़ाया जाए। महिलाओं ने यह भी कहा कि पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में इसी तरह कार्यरत महिलाओं को 6000 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की समान हिस्सेदारी होती है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में बेहद कम मानदेय देना उनके साथ अन्याय है। निजी संसाधनों से कराया जा रहा सरकारी काम बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनसे लगातार ऑनलाइन कार्य कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए न तो सरकारी मोबाइल उपलब्ध कराया गया है और न ही इंटरनेट खर्च दिया जाता है। महिलाएं अपने निजी मोबाइल और स्वयं के पैसे से रिचार्ज कर सरकारी काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी कैडर को सरकारी मोबाइल या मोबाइल-इंटरनेट भत्ता देने की मांग की। यात्रा और बैठक भत्ते की भी मांग प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि उन्हें नियमित रूप से मीटिंग, प्रशिक्षण और फील्ड विजिट के लिए बुलाया जाता है, लेकिन इसके बदले न तो यात्रा भत्ता दिया जाता है और न ही कोई मीटिंग या दैनिक भत्ता मिलता है, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है। जबरन हटाने और भुगतान में देरी के आरोप महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई जगहों पर वर्षों से काम कर रही सक्रिय महिलाओं को जबरदस्ती काम से हटाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कई ब्लॉकों में मानदेय 5 से 6 महीने देरी से मिलता है और कई बार बिना कारण राशि काट ली जाती है। महिलाओं की मांग है कि मानदेय हर महीने समय पर और सीधे बैंक खाते में दिया जाए। नियमितीकरण और नियुक्ति पत्र की मांग प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें आज तक नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया है। उन्होंने अपने नियमितीकरण की भी मांग की है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मंत्री स्तर पर बातचीत नहीं हुई और मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।

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20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन एक मां की आंखों से इंतज़ार खत्म नहीं हुआ

“रायपुर से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक खबर… रायपुर के बिरगांव इलाके से 23 वर्षीय युवक विष्णु गोऱाई पिछले 20 दिनों से लापता हैं।जानकारी के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 की शाम करीब 8 बजे विष्णु गोऱाई घर से निकले थे,लेकिन उसके बाद से न उनका कोई पता चला है, न कोई संपर्क। विष्णु गोऱाई के पिता सुनील गोऱाई हैं।परिवार और परिजन लगातार थाने, रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में तलाश कर रहे हैं,लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। 📌 20 दिन… 480 घंटे…हर गुजरता पल परिवार की चिंता और दर्द बढ़ा रहा है। 👉 अब परिवार ने जनता से सीधी अपील की है।जो भी व्यक्ति विष्णु गोऱाई के बारे में पुख्ता जानकारी देगा,उसे ₹20,000 का इनाम देने की घोषणा की गई है। अगर आपने विष्णु गोऱाई को कहीं देखा होया उनके बारे में कोई भी जानकारी हो,तो बिना देर किए इन नंबरों पर संपर्क करें👇 📞 8109896876📞 7477228704 🙏 आपकी एक सूचनाएक बेटे को उसके घरऔर एक परिवार को उसकी खुशियाँ लौटा सकती है। 👉 ऐसी ज़मीनी, संवेदनशील और ज़रूरी खबरों के लिएजुड़े रहें News 22 Bharat के साथ।

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रायपुर की सड़कों पर उतरे विधायक और महापौर, खारुन नदी में नाला मिलने पर अफसरों को फटकार; 5 दिन में सुधार के निर्देश

रायपुर पश्चिम के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा की जमीनी हकीकत परखने के लिए सड़कों पर उतरे। निरीक्षण के दौरान वे सरोना और चंदनडीह क्षेत्रों में चल रहे और पूर्ण हो चुके विकास कार्यों का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ महापौर मीनल चौबे, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान चंदनडीह में 80 करोड़ रुपये की लागत से बने एसटीपी प्लांट की स्थिति सामने आने पर विधायक मूणत खासे नाराज नजर आए। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार चिंगरी नाले का दूषित और बदबूदार पानी अब भी सीधे खारुन नदी में मिल रहा है, जिस पर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए 5 दिन का अल्टीमेटम दिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि तत्काल ठोस कार्ययोजना बनाकर प्रस्तुत की जाए। सरोना को विकास की दोहरी सौगात निरीक्षण के दौरान विधायक मूणत ने बताया कि अमृत मिशन 2.0 के तहत भारत सरकार से स्वीकृत 9 करोड़ रुपये की राशि से सरोना क्षेत्र में एक भव्य उद्यान विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने शीतला मंदिर के पीछे स्थित रिक्त भूमि का निरीक्षण किया और राजस्व अधिकारियों को पटवारियों के साथ तुरंत सीमांकन कर लेआउट प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही चंदनडीह से सरोना होते हुए महादेव घाट तक नए बायपास रोड के निर्माण का प्रस्ताव आगामी बजट में भेजने के निर्देश दिए गए। विधायक ने कहा कि इससे क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने ट्रेंचिंग ग्राउंड की सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया और कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद निरीक्षण कार्यक्रम में महापौर मीनल चौबे, नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जोन अधिकारी, योजना शाखा के अधिकारी, भू-राजस्व निरीक्षक, पटवारी, लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अभियंता और भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स: 6 से 8 जनवरी तक चयन ट्रायल, रायपुर और बिलासपुर में होंगे आयोजन

छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए खिलाड़ियों के चयन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। राज्य की टीमों के चयन हेतु 6 से 8 जनवरी 2026 तक रायपुर और बिलासपुर में चयन ट्रायल आयोजित किए जाएंगे। रायपुर में वेट-लिफ्टिंग, कुश्ती, फुटबॉल और हॉकी, जबकि बिलासपुर में तीरंदाजी, एथलेटिक्स और तैराकी के लिए ट्रायल होंगे। इन ट्रायल्स के माध्यम से विभिन्न खेलों में प्रतिभावान आदिवासी खिलाड़ियों का चयन किया जाएगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अनुसार, इच्छुक खिलाड़ी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन कर सकते हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए खिलाड़ी विभागीय वेबसाइट sportsyw.cg.gov.in पर उपलब्ध रजिस्ट्रेशन लिंक और क्यूआर कोड का उपयोग कर सकते हैं। वहीं, सभी ट्रायल स्थलों पर ऑफलाइन पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

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शराब घोटाला मामला: चैतन्य बघेल की रिहाई पर सियासत तेज, BJP ने उठाए सवाल, सिंहदेव बोले– बिना दोष सिद्ध किए दी जा रही सजा

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को करीब 170 दिन बाद रायपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा कर दिया गया है। उनकी रिहाई के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता देवीलाल ठाकुर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को जमानत मिल जाती है, उसी मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा अब भी जेल में बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भूपेश बघेल ने लखमा की कभी पैरवी नहीं की और कांग्रेस शासनकाल में आदिवासी नेताओं को साजिश के तहत निशाना बनाया गया। ठाकुर ने कहा कि कवासी लखमा के अनपढ़ होने का फायदा उठाकर उनके खिलाफ मामला गढ़ा गया। अगर जांच निष्पक्ष है, तो फिर एक को राहत और दूसरे को जेल क्यों? उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय शराब घोटाले को सत्ता का संरक्षण मिला। सिंहदेव का पलटवार— जांच एजेंसियों का दुरुपयोग वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर बिना अपराध सिद्ध हुए ही लोगों को सजा दे रही है, जो कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सिंहदेव ने कहा कि चैतन्य बघेल ही नहीं, बल्कि कवासी लखमा, देवेंद्र यादव, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के कई नेताओं के साथ भी यही रवैया अपनाया गया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है। भूपेश बघेल बोले— राजनीतिक बदले की कार्रवाई चैतन्य बघेल की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बेटे की गिरफ्तारी राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ED, IT और EOW जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल बदले की भावना से किया गया। भूपेश बघेल ने कहा कि चैतन्य को हाईकोर्ट से जमानत मिलना इस बात का सबूत है कि कार्रवाई गलत थी। उन्होंने बताया कि चैतन्य की रिहाई उनके बेटे के जन्मदिन के दिन हुई, जबकि ED ने जन्मदिन के दिन ही गिरफ्तारी कर खुशी में खलल डालने की कोशिश की थी। ED के आरोप क्या हैं? ED के मुताबिक शराब घोटाले की जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनमें चैतन्य बघेल पर करीब 1000 करोड़ रुपए की लेयरिंग और मनी ट्रांजैक्शन का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि शराब घोटाले की रकम विभिन्न चैनलों से होते हुए चैतन्य बघेल तक पहुंचाई गई। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला? ED की जांच में 3200 करोड़ रुपए से अधिक के शराब घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी, आबकारी विभाग के अफसर और कारोबारियों के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया। इस मामले में कई राजनेताओं, अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ FIR दर्ज है।

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छत्तीसगढ़ RI प्रमोशन परीक्षा रद्द: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 216 पटवारियों की पदोन्नति होगी निरस्त

छत्तीसगढ़ में पटवारी से राजस्व निरीक्षक (RI) पदोन्नति परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एन.के. व्यास ने अपने अहम फैसले में RI प्रमोशन परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि परीक्षा में भारी अनियमितताएं पाई गईं, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। पटवारी से RI पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षा 7 जनवरी 2024 को आयोजित की गई थी, जिसमें 2600 से अधिक पटवारियों ने भाग लिया था। 29 फरवरी 2024 को जारी परिणाम में 216 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए चयनित किया गया, हालांकि अंतिम रूप से केवल 13 अभ्यर्थियों को चयनित किया जाना था। इसके बावजूद 22 लोगों को नियुक्ति दे दी गई, जिसके बाद विवाद गहराता चला गया। हाईकोर्ट में पहुंचा मामला प्रमोशन से वंचित पटवारियों ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को भी पदोन्नति के लिए चुन लिया गया, जबकि अधिक अंक लाने वाले योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया। उन्होंने चयन प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण और नियमों के विरुद्ध बताया। पेपर लीक और भाई-भतीजावाद के आरोप जांच के दौरान सामने आया कि परीक्षा में प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो गया था। आरोप है कि कुछ केंद्रों पर पति-पत्नी, भाई-भाई और रिश्तेदारों को जानबूझकर साथ बैठाया गया। एक मामले में फेल हुए पटवारी को बाद में पास दिखाया गया। कई उम्मीदवारों को समान अंक मिलने पर भी संदेह गहराया। EOW-ACB की कार्रवाई RI प्रमोशन घोटाले को लेकर पटवारी संघ और शासन के पत्र के आधार पर EOW-ACB ने 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें से दो को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस घोटाले में 18 से अधिक लोगों की संलिप्तता सामने आई है। 216 पदोन्नतियां होंगी रद्द हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद कहा कि चयन प्रक्रिया दूषित, अपारदर्शी और पक्षपात से ग्रस्त थी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा की पवित्रता से समझौता किया गया है। इस फैसले के बाद 216 पटवारियों को दी गई पदोन्नति स्वतः निरस्त हो जाएगी। नई परीक्षा कराने की अनुमति हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पटवारी से RI पदोन्नति के लिए नई परीक्षा आयोजित करने की छूट दी है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कराई जाए, ताकि योग्य उम्मीदवारों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।

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