Raipur

रायपुर रेप केस: 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी की अवैध दुकान ढही, नगर निगम ने चलाया बुलडोजर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। आरोपी अब्दुल सज्जाद अंसारी (65) की अवैध रूप से बनी दुकान को नगर निगम ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने नाबालिग बच्ची के साथ लगातार पांच दिनों तक दुष्कर्म किया। यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। गिरफ्तारी के बाद नगर निगम प्रशासन ने भी आरोपी के अवैध निर्माण पर कार्रवाई की। चॉकलेट का लालच देकर बुलाता था घर पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने 7 से 11 जनवरी के बीच अपने ही मोहल्ले में रहने वाली 9 साल की बच्ची को चॉकलेट और खाने-पीने की चीजों का लालच देकर कई बार अपने घर बुलाया। इसी दौरान उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। 12 जनवरी की सुबह बच्ची असहनीय दर्द के कारण रोती हुई जमीन पर पड़ी थी। जब उसकी चाची उसे नहलाने ले गई और दर्द की वजह पूछी, तब बच्ची ने पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया गया। धमकी देकर चुप रहने को कहता था आरोपी बच्ची ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आरोपी हर बार गलत काम के बाद उसे धमकाता था कि अगर किसी को बताया तो मार देगा। इसी डर की वजह से वह कई दिनों तक चुप रही। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अवैध निर्माण पर नगर निगम की कार्रवाई रेप के आरोपी के खिलाफ नगर निगम ने भी सख्त रुख अपनाया। रायपुर की मेयर मीनल चौबे के निर्देश पर आरोपी की दुकान को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किया गया था। 16 जनवरी को दुकान पर नोटिस चस्पा कर जवाब देने का समय दिया गया, लेकिन तय अवधि में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद नगर निगम की टीम ने बुलडोजर चलाकर दुकान को ढहा दिया। निगम अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की दुकान नगर निगम के नियमों का उल्लंघन कर बनाई गई थी। नगर निगम प्रशासन ने साफ किया है कि गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है और अवैध निर्माण पर किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी। रायपुर में बढ़ते अपराध चिंता का विषय रायपुर पुलिस द्वारा पेश किए गए वार्षिक अपराध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जिले में कुल 15,896 अपराध दर्ज किए गए। इनमें 280 रेप के मामले सामने आए, जबकि 92 हत्याएं दर्ज की गईं। बीते तीन वर्षों में अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के मुताबिक रायपुर में 543 चाकूबाजी की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं। सबसे अधिक एफआईआर खमतराई थाना क्षेत्र में दर्ज की गईं, जहां एक साल में 1,013 मामले सामने आए।

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साहू समाज का बड़ा फैसला: प्री-वेडिंग शूट पर पूर्ण प्रतिबंध, तलाक रोकने पारिवारिक काउंसलिंग होगी शुरू

छत्तीसगढ़ में साहू समाज ने सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में अहम निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश साहू संघ ने प्री-वेडिंग शूट पर पूरी तरह रोक लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला समाज में बढ़ते दिखावे, अनावश्यक खर्च और बदलते संस्कारों पर नियंत्रण के उद्देश्य से लिया गया है। शनिवार को आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीरेंद्र साहू ने की। बैठक में प्रदेश के सभी जिलों से आए जिला अध्यक्षों और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। दिखावे और फिजूलखर्ची पर रोक का प्रयास बैठक के दौरान समाज की वर्तमान स्थिति, सामाजिक परंपराओं में आ रहे बदलाव और बढ़ती दिखावटी संस्कृति पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश संयुक्त सचिव प्रदीप साहू ने बताया कि लंबे विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से प्री-वेडिंग शूट को समाजहित में बंद करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश साहू संघ का मानना है कि साहू समाज की पहचान सादगी, संस्कार और सामाजिक सौहार्द से रही है, लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति समाज की परंपरागत जड़ों को कमजोर कर रही है। इस निर्णय के जरिए समाज को अपनी मूल संस्कृति की ओर लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। तलाक के मामलों पर चिंता, फैमिली काउंसलिंग की पहल बैठक में समाज के भीतर बढ़ते तलाक के मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। इस पर निर्णय लिया गया कि पारिवारिक विवादों को सुलझाने और रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए फैमिली काउंसलिंग की व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करना और दांपत्य जीवन में संतुलन बनाए रखना है। सामाजिक अनुशासन और एकता पर जोर प्रदेश स्तरीय बैठक में सामाजिक एकता, अनुशासन और संस्कार विकास को सशक्त करने के लिए संगठित रूप से कार्य करने का संकल्प लिया गया। प्रदेश साहू संघ ने स्पष्ट किया कि जो परंपराएं समाज को कमजोर करती हैं, उन्हें आगे स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघ ने समाज के सभी सदस्यों से इन निर्णयों का पालन करने और समाजहित में सक्रिय सहयोग देने की अपील की है।

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NEET PG कट-ऑफ विवाद: छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति से की NMC को भंग करने की मांग

देश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। NEET PG परीक्षा का कट-ऑफ घटाकर ‘माइनस 40’ किए जाने के फैसले के बाद विवाद और गहरा गया है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को तत्काल भंग करने की मांग की है। सोसाइटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने इस निर्णय को चिकित्सा क्षेत्र के इतिहास का एक चिंताजनक अध्याय बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले न केवल योग्यता आधारित चयन प्रणाली को कमजोर करते हैं, बल्कि भविष्य में आम जनता की स्वास्थ्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। योग्यता से समझौते का आरोप राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि NMC का गठन चिकित्सा शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन हालिया नीतिगत निर्णय इसके उलट परिणाम दे रहे हैं। डॉ. सोलंकी का आरोप है कि कट-ऑफ को शून्य से नीचे ले जाना पेशे की गरिमा के साथ समझौता है और इससे कम योग्य डॉक्टरों के विशेषज्ञ बनने का रास्ता खुल सकता है। NMC पर गंभीर आरोप छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने केंद्र सरकार से NMC अधिनियम 2019 की धारा 55 के तहत आयोग को भंग करने की मांग की है। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आयोग चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय निजी मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने को प्राथमिकता दे रहा है। सोसाइटी ने सुझाव दिया है कि जब तक नया आयोग गठित न हो, तब तक ईमानदार स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रख्यात शिक्षाविदों की एक बोर्ड ऑफ गवर्नर्स नियुक्त की जाए, जो पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित कर सके। ब्रेन ड्रेन और सिस्टम फेल होने का आरोप ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि गलत नीतियों के चलते मेधावी छात्र विदेशों में पढ़ाई और करियर बनाने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे देश को दीर्घकालिक नुकसान हो रहा है। साथ ही, NMC पर बुनियादी ढांचे की कमी, फैकल्टी संकट और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे अहम मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया गया है। इस मांग के बाद अब चिकित्सा जगत और छात्रों की निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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रायपुर में क्रिप्टो और शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 1.35 करोड़ की ठगी

6वीं पास युवक ने 26 लोगों को बनाया शिकार, पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार रायपुर में क्रिप्टो करेंसी और शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कुलदीप भतपहरी के रूप में हुई है, जिसने खुद को शेयर मार्केट एक्सपर्ट बताकर 26 लोगों से करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपए से अधिक की ठगी की। मामला मोवा-पंडरी थाना क्षेत्र का है। पीड़ितों की शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ लिया। आरोपी की शैक्षणिक योग्यता महज 6वीं तक बताई जा रही है। ऐसे फंसाता था लोगों को पुलिस को दी गई शिकायत में पंडरी निवासी अमित दास ने बताया कि वर्ष 2021-22 के दौरान उनकी पहचान देवपुरी निवासी कुलदीप भतपहरी से हुई थी। आरोपी खुद को शेयर मार्केट, IPO, NSE, MSEI और CDSL से जुड़ा निवेश सलाहकार बताता था। उसने “मासिक के.बी. प्लान” के नाम से निवेश योजना बताकर अमित दास और उसके भाई से ऑनलाइन और नकद माध्यम से करीब 15.60 लाख रुपए ले लिए। शुरुआत में कुछ महीनों तक नियमित ब्याज की रकम दी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद कई अन्य लोग भी आरोपी के जाल में फंसते चले गए। दिसंबर 2024 में हुआ फरार दिसंबर 2024 में आरोपी अचानक संपर्क से बाहर हो गया। जब निवेशकों को पैसे वापस नहीं मिले, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पंडरी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तारी पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिर तंत्र और लगातार दबिश के जरिए लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी को एसीसीयू और पंडरी थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसने इसी तरीके से कुल 26 लोगों से 1.35 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी की है। इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक कंप्यूटर सिस्टम, एक लैपटॉप और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी से जुड़े लेन-देन और संपर्क के लिए किया जा रहा था। पहले भी जा चुका है जेल पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी कुलदीप भतपहरी इससे पहले भी इसी तरह के ठगी के मामले में थाना टिकरापारा से जेल जा चुका है। पुलिस को आशंका है कि ठगी का नेटवर्क और भी बड़ा हो सकता है। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

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बलौदाबाजार में स्कॉर्पियो-ट्रेलर की भीषण भिड़ंत, 6 लोग घायल

रायपुर सत्संग में शामिल होने जा रहा था परिवार, टायर फटने से हुआ हादसा बलौदाबाजार जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जहां स्कॉर्पियो और ट्रेलर की आमने-सामने टक्कर में 6 लोग घायल हो गए। इस दुर्घटना में 2 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा बलौदाबाजार–रायपुर मुख्य मार्ग पर मल्लिन नाला के पास डोटोपाड इलाके में हुआ। मामला लवन थाना क्षेत्र का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कसडोल नगर के वार्ड क्रमांक 8 के रहने वाले पांच पुरुष और एक महिला स्कॉर्पियो वाहन में सवार होकर रायपुर में आयोजित एक सत्संग कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। सुबह करीब 8 बजे मल्लिन नाला के पास पहुंचते ही स्कॉर्पियो का अगला बायां टायर अचानक फट गया, जिससे चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। नियंत्रण बिगड़ने के बाद स्कॉर्पियो सामने से आ रहे एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चालक वाहन में फंसा, ग्रामीणों ने की मदद हादसे के बाद स्कॉर्पियो का चालक वाहन के अंदर फंस गया था। मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए चालक को बाहर निकाला। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को दी गई। सूचना मिलते ही लवन थाना पुलिस और 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी सभी 6 घायलों को तुरंत बलौदाबाजार जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 2 लोगों को बेहतर इलाज के लिए लवन स्थित उन्नत चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया है। अन्य 4 घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

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रायपुर में गांजा तस्करी मामले में 6 दोषियों को 10-10 साल की सजा

कालीबाड़ी चौक से 10 किलो गांजा बरामद, एनडीपीएस कोर्ट का सख्त फैसला रायपुर की एनडीपीएस कोर्ट ने गांजा तस्करी के एक बड़े मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 6 आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2024 का है, जब रायपुर पुलिस ने कालीबाड़ी चौक इलाके से गांजा बेचते हुए तीन युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से कुल 10 किलो गांजा बरामद किया गया था। तलाशी के समय किसी भी आरोपी के पास गांजा रखने या बेचने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं पाए गए थे। कैसे हुआ खुलासा विशेष न्यायाधीश किरण थवाईत ने यह फैसला पुलिस द्वारा की गई ठोस विवेचना, बरामदगी और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर सुनाया। विशेष लोक अभियोजक भुवनलाल साहू के अनुसार, 7 दिसंबर 2024 को थाना कोतवाली रायपुर के सहायक उपनिरीक्षक को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कालीबाड़ी चौक क्षेत्र में तीन युवक बैग में गांजा रखकर ग्राहकों की तलाश कर रहे हैं। सूचना को रोजनामचा में दर्ज कर एनडीपीएस एक्ट के सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में पुलिस टीम ने घेराबंदी की और तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया। इतनी मात्रा में मिला गांजा तलाशी के दौरान गणेश बागर्ती के पास से 4 किलो, विक्रम शाह से 4 किलो और अनिल उर्फ अली जुल्फेकार से 2 किलो गांजा बरामद हुआ। इस तरह कुल 10 किलो गांजा जब्त किया गया। तीनों के पास किसी प्रकार का वैध दस्तावेज नहीं था। जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क आरोपियों के मेमोरण्डम कथन के आधार पर पुलिस ने प्रियवंत कुम्हार को गिरफ्तार किया, जिसके कब्जे से 6 किलो 800 ग्राम गांजा बरामद किया गया। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो गांजा तस्करी की पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ। पूछताछ में सामने आया कि रवि साहू इस अवैध नेटवर्क का मुख्य संचालक था। पुलिस ने रवि साहू के पास से 1 किलो 200 ग्राम गांजा बरामद किया। वहीं संजय उर्फ लेंडी को गांजा सप्लाई और बिक्री में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। एफएसएल रायपुर की रिपोर्ट में सभी जब्त नमूने गांजा पाए गए, जिसकी पुष्टि हुई। कोर्ट का सख्त निर्णय पुलिस ने सभी 6 आरोपियों के खिलाफ धारा 20(बी) और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने गणेश बागर्ती, विक्रम शाह, अनिल उर्फ अली जुल्फेकार, प्रियवंत कुम्हार, रवि साहू और संजय उर्फ लेंडी को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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रायपुर में सेप्टिक टैंक के खुले गड्ढे में गिरने से 5 साल की बच्ची की मौत

मकान मालिक पर FIR, 2025 में ऐसे हादसों में 3 बच्चों की जा चुकी है जान रायपुर में एक दर्दनाक हादसे में 5 साल की बच्ची की जान चली गई। बाथरूम में खोदे गए सेप्टिक टैंक के खुले गड्ढे में गिरने से बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और उसे बाहर निकालकर निजी अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामला मोवा थाना क्षेत्र का है। मृत बच्ची की पहचान रिया महिलांग के रूप में हुई है। वह महासमुंद जिले के पटेवा गांव की रहने वाली थी और अपनी मौसी की गोदभराई कार्यक्रम में माता-पिता के साथ रायपुर आई थी। हादसे के वक्त वह टॉयलेट गई थी, जहां यह दुर्घटना हो गई। कैसे हुआ हादसा शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे रिया टॉयलेट गई थी। उस समय उसकी नानी भी पास में मौजूद थी, लेकिन पानी लाने के लिए बाहर चली गई। इसी दौरान बच्ची बाथरूम में पहुंची, जहां सेप्टिक टैंक के लिए खोदा गया गड्ढा बोरी से ढंका हुआ था। बच्ची का पैर बोरी में फंस गया और वह सीधे गड्ढे में गिर गई। आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची को बाहर निकाला गया और तुरंत निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लापरवाही का आरोप, मकान मालिक पर केस पुलिस के अनुसार, मकान मालिक जीवनलाल कुर्रे ने किराएदारों की शिकायत पर चार दिन पहले बाथरूम में टॉयलेट का गंदा पानी निकालने के लिए गड्ढा खुदवाया था। इसके बाद गड्ढे को सुरक्षित रूप से बंद करने के बजाय केवल एक बोरी से ढक दिया गया था। बाथरूम में दरवाजा भी नहीं था, जिससे जगह खुली हुई थी। परिजनों की शिकायत पर मकान मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मौके पर जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बाथरूम के बाहर एक और गड्ढा खोदा गया था, जिसे बिना ढके छोड़ दिया गया था। 2025 में ऐसे हादसों में 3 बच्चों की मौत रायपुर में खुले गड्ढों की वजह से बच्चों की जान जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। प्रशासन और सुरक्षा पर सवाल लगातार हो रही इन घटनाओं ने खुले गड्ढों और निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए कड़े नियमों की मांग कर रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में रविवार को ही क्यों बढ़ते हैं हिंदू-ईसाई टकराव?

पिछले 5 साल में 200 से ज्यादा विवाद, 19 जिले प्रभावित, बस्तर बना हॉटस्पॉट छत्तीसगढ़ में हिंदू और ईसाई समुदाय के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इन घटनाओं में एक समान पैटर्न देखने को मिलता है—धर्मांतरण, मतांतरण और प्रार्थना सभाएं। खास बात यह है कि अधिकांश विवाद रविवार के दिन ही होते हैं। इसी आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन शुक्रवार व शनिवार से ही हाई अलर्ट पर रहता है। भास्कर डिजिटल की पड़ताल में सामने आया कि बीते 5 वर्षों में प्रदेश में हिंदू-ईसाई समुदायों के बीच 200 से अधिक विवाद दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में 60 से ज्यादा FIR हुई हैं। सबसे ज्यादा टकराव बस्तर संभाग सहित 19 जिलों में देखने को मिला है। इन घटनाओं में कांकेर में शव दफनाने को लेकर हिंसा, दुर्ग रेलवे स्टेशन से मिशनरी सिस्टर्स की गिरफ्तारी, रायपुर में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप, बिलासपुर में प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण जैसे कई मामले शामिल हैं। किन जिलों में सबसे ज्यादा विवाद छत्तीसगढ़ में ईसाई समाज की गतिविधियां 19 जिलों में अधिक सक्रिय बताई जाती हैं। इन इलाकों में चर्च और प्रार्थना सभाएं संचालित होती हैं, जिनमें कुछ पंजीकृत हैं तो कई घरों से संचालित हो रही हैं। इसी को लेकर धर्मांतरण और मतांतरण के आरोपों पर विवाद की स्थिति बनती है। सबसे ज्यादा तनाव बस्तर संभाग में देखने को मिला है। बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर और सुकमा जिले धर्मांतरण और अंतिम संस्कार (दफनाने) से जुड़े विवादों के प्रमुख केंद्र रहे हैं। इसके अलावा कोरबा, बलरामपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में भी बार-बार टकराव हुआ है। वहीं सरगुजा और सूरजपुर में अपेक्षाकृत कम विवाद सामने आए हैं। रविवार को ही क्यों होती हैं घटनाएं दरअसल, रविवार को ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं। इनमें यीशु मसीह की आराधना, धार्मिक उपदेश और कथाएं सुनाई जाती हैं। इन सभाओं में कई बार हिंदू समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। अनेक मामलों में जब हिंदू संगठनों को इन सभाओं में धर्मांतरण की आशंका होती है, तो वे विरोध दर्ज कराने पहुंचते हैं। इसी दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ जाते हैं और तनाव की स्थिति बन जाती है। कई बार पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात कर हालात संभालने पड़ते हैं। वरिष्ठ पत्रकार की राय वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार का कहना है कि हर रविवार को स्वतः दो समुदायों के बीच टकराव होना कहना सही नहीं है। उनके अनुसार, कुछ आक्रामक समूहों द्वारा दूसरे समुदायों की प्रार्थना सभाओं पर हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हालात न बिगड़ें। पिछले वर्षों की प्रमुख घटनाएं पिछले कुछ वर्षों में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, बालोद और कांकेर जैसे जिलों में धर्मांतरण, प्रार्थना सभा, अवैध चर्च और अंतिम संस्कार को लेकर कई बड़े विवाद हुए। कई मामलों में पुलिस ने गिरफ्तारी की, FIR दर्ज हुई और प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई। धर्मांतरण और मतांतरण क्या है धर्मांतरण का अर्थ है एक धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाना। छत्तीसगढ़ में इसके लिए जिला प्रशासन को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है।मतांतरण में व्यक्ति अपने विश्वास और आस्था में बदलाव करता है, लेकिन इसका सरकारी रिकॉर्ड आवश्यक नहीं होता। छत्तीसगढ़ का धार्मिक स्वतंत्रता कानून प्रदेश में छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है। इसके तहत जबरन, प्रलोभन या धोखे से धर्मांतरण कराना अपराध है। राज्य सरकार इसे और सख्त करने के लिए नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें धर्म परिवर्तन से पहले और बाद में घोषणा और सत्यापन की प्रक्रिया को अनिवार्य किया जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 19 सीटों पर ईसाई मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। जशपुर जैसे जिलों में चुनावी परिणामों पर ईसाई मतदाताओं का प्रभाव निर्णायक माना जाता है।

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चाइनीज मांझे से बढ़ते हादसे: रायपुर में छात्र के गाल कटे, 34 टांके लगे, भिलाई में मजदूर गंभीर घायल

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे के इस्तेमाल से रायपुर और भिलाई में कई गंभीर हादसे सामने आए हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन की कार्रवाई और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर में छात्र गंभीर रूप से घायल रायपुर के पंडरी एक्सप्रेस-वे पर एक दर्दनाक घटना हुई, जहां छात्र संकल्प द्विवेदी चलती गाड़ी में चाइनीज मांझे की चपेट में आ गया। वह अपनी बड़ी बहन को स्कूल छोड़ने जा रहा था, तभी मांझा सीधे उसके चेहरे में फंस गया। हादसे में छात्र के गाल गहराई से कट गए और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। डॉक्टरों को उसके चेहरे पर 34 टांके लगाने पड़े। हादसे में छात्र की बहन के हाथ भी कट गए। डॉक्टरों के अनुसार, चाइनीज मांझे से बने घाव स्थायी निशान छोड़ सकते हैं, इसलिए छात्र को प्लास्टिक सर्जरी कराने की सलाह दी गई है। मंदिर जाते समय महिला घायल रविवार शाम रायपुर के लाखेनगर इलाके में एक महिला भी चाइनीज मांझे का शिकार हो गई। ब्राह्मणपारा निवासी नेहा यादव पैदल मंदिर जा रही थीं, तभी अचानक मांझा उनके चेहरे में उलझ गया। मांझा हटाने की कोशिश में उनके होंठ और अंगूठे में गहरे कट लग गए। महिला को तत्काल इलाज के लिए डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उनके होंठ पर 10 टांके लगाए गए। भिलाई में मजदूर के गले में फंसा मांझा भिलाई में मकर संक्रांति के दिन साइकिल से घर लौट रहे एक ठेका श्रमिक के गले में चाइनीज मांझा उलझ गया। घायल की पहचान असलम (42 वर्ष), निवासी चांदनी चौक, कोहका के रूप में हुई है। असलम भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका मजदूर के रूप में कार्यरत है। घटना के बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। नेता प्रतिपक्ष से मिला पीड़ित छात्र रायपुर की घटना के बाद घायल छात्र संकल्प द्विवेदी नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी से मिला और मांग की कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए। छात्र का कहना है कि निगम स्तर पर शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि पीड़ित को हरसंभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने नगर निगम आयुक्त और जिला कलेक्टर से चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रतिबंध के बावजूद बिक्री जारी गौरतलब है कि रायपुर नगर निगम की टीम ने 27 दिसंबर को शहर के कई इलाकों में छापेमारी कर प्रतिबंधित चाइनीज मांझा जब्त किया था। इसके बावजूद मकर संक्रांति पर हुए हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अवैध बिक्री अब भी जारी है। कानून में सख्त सजा का प्रावधान अधिवक्ता विपिन अग्रवाल के अनुसार, चाइनीज या नायलोन मांझे के उपयोग और बिक्री पर एक साल तक की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2017 में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, फिर भी लापरवाही के चलते आम लोगों की जान खतरे में पड़ रही है।

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अभनपुर में सनसनीखेज हत्या, NH-30 पर सड़क किनारे मिला युवक का शव

रायपुर जिले के अभनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम केंद्री, NH-30 स्थित पुराने प्रयतन स्थल के पास सड़क किनारे एक युवक का शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही अभनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को भी बुलाया गया। मृतक की पहचान कैलाश तिवारी (28 वर्ष) के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कैलाश तिवारी बीती रात मेले से घूमकर लौट रहे थे। इस दौरान वे इनोवा क्रिस्टा कार में सवार थे। बताया जा रहा है कि कार में कैलाश के साथ उनके दो दोस्त भी मौजूद थे, जबकि इनोवा में कुल 7 से 8 लोग सवार थे। सूत्रों के मुताबिक कैलाश के पास हथियार भी था। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गया। आरोप है कि इनोवा में सवार अन्य लोगों ने कैलाश तिवारी और उनके साथियों पर हमला कर दिया। इस हमले में कैलाश और उनके दोनों दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए। किसी तरह दोनों दोस्त मौके से जान बचाकर भाग निकले, जिनमें से एक युवक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। घायल युवक ने ही पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। घटना की जानकारी मिलने पर जब कैलाश तिवारी के परिजन उस स्थान पर पहुंचे जहां विवाद हुआ था, तो उन्होंने कैलाश का शव सड़क किनारे बुरी हालत में पड़ा देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। FSL टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त इनोवा क्रिस्टा कार को जब्त कर लिया है और हमले में शामिल आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच हत्या, आपसी विवाद और अन्य संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

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