Raipur

रायपुर में युवक पर चाकू से हमला, पुराने विवाद में रिश्तेदार निकला आरोपी – घायल एम्स में भर्ती, पुलिस ने दर्ज किया केस

रायपुर। राजधानी रायपुर के न्यू चंगोराभाठा इलाके में रविवार देर रात एक युवक पर चाकू से जानलेवा हमला हुआ। पुरानी रंजिश के चलते रिश्तेदार ने वारदात को अंजाम दिया। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना डीडी नगर थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, घायल युवक मोंटू देवांगन रविवार रात करीब 11:40 बजे अपने दोस्त पिंटू पटवा के साथ अलमारी फैक्ट्री के पास बैठा था। इसी दौरान आरोपी राहुल देवांगन अपने साथियों रोहित विश्वकर्मा, चिंकी पटनायक उर्फ चीकू और अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचा। 🔪 पुरानी रंजिश में वारदात, युवक को कई जगह आईं गंभीर चोटें बताया जा रहा है कि पुरानी दुश्मनी के चलते आरोपियों ने मोंटू देवांगन से गाली-गलौज की और जान से मारने की नीयत से चाकू से हमला कर दिया। वारदात में युवक के बाएं आंख, दाहिने कान, गाल और कमर पर गहरे घाव हुए हैं। हमले के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने बीच-बचाव किया। इसके बाद मोंटू के बड़े भाई सुभाष देवांगन ने घायल को तुरंत एम्स पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। 👮 एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी घटना से कुछ घंटे पहले शाम 7 बजे भी राहुल और मोंटू के बीच झगड़ा हुआ था, जिसे उस समय शांत करा दिया गया था। लेकिन रात में फिर से हमला कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी राहुल देवांगन समेत अन्य पर हत्या के प्रयास (हाफ मर्डर) का मामला दर्ज किया है। एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है, बाकी की तलाश जारी है।

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रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में, चार अफसर रेस में – 1 नवंबर से लागू होने की संभावना

रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। गृह विभाग ने इस व्यवस्था से जुड़ी लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। दिवाली के बाद होने वाली राज्य कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो 1 नवंबर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाएगा। गृह विभाग ने कुछ समय पहले पुलिस मुख्यालय (PHQ) से रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई। इसमें आईजी अजय यादव, आईजी अमरेश मिश्रा, डीआईजी ओपी पाल, एसपी अभिषेक मीणा और एसपी संतोष सिंह सदस्य थे। समिति ने विभिन्न राज्यों में लागू कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर पद के लिए चार सीनियर आईपीएस अधिकारी दावेदारी में हैं। इसी तरह एडिशनल पुलिस कमिश्नर के लिए भी चार नामों पर चर्चा चल रही है। ⚖️ कमेटी के सुझाव और विकल्प एडीजी प्रदीप गुप्ता की कमेटी ने कमिश्नर की रैंक को लेकर तीन विकल्प सुझाए हैं —1️⃣ एडीजी रैंक के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर बनाया जाए।2️⃣ आईजी रैंक के अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाए।3️⃣ डीआईजी रैंक के अधिकारी को नियुक्त किया जाए। कैबिनेट बैठक में तय किया जाएगा कि इनमें से कौन-सा विकल्प अपनाया जाए। इसके साथ ही, शीर्ष पद के अनुसार जॉइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और एसीपी के पदों की संख्या भी तय होगी। शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार, इस नई प्रणाली में 60 से अधिक अधिकारी काम करेंगे। 🌐 इन राज्यों की स्टडी की गई ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के पुलिस कमिश्नर सिस्टम का अध्ययन किया गया है। 🔍 कमिश्नर प्रणाली से पुलिस को मिलेंगे अधिक अधिकार इस व्यवस्था में पुलिस को कलेक्टर जैसी कुछ प्रशासनिक शक्तियां मिलेंगी। कमिश्नर को मजिस्ट्रेट की तरह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने, गुंडा एक्ट, रासुका और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार होगा। इसके अलावा होटल, बार, हथियारों के लाइसेंस, धरना-प्रदर्शन की अनुमति और दंगे-झगड़ों में फौरन कार्रवाई जैसे निर्णय पुलिस स्तर पर ही लिए जा सकेंगे। 🏢 पुलिस कमिश्नरेट संरचना (Structure) इस सिस्टम में प्रमुख पद होंगे – पुलिस कमिश्नर (CP), संयुक्त पुलिस आयुक्त (Jt. CP), अपर पुलिस आयुक्त (Addl. CP), पुलिस उपायुक्त (DCP), सहायक पुलिस आयुक्त (ACP), पुलिस निरीक्षक (PI/SHO), उप-निरीक्षक (SI) और कॉन्स्टेबल। 🗺️ अन्य राज्यों में उदाहरण राजस्थान में एसीपी को कुछ मामलों में न्यायिक अधिकार प्राप्त हैं।महाराष्ट्र में पुलिस कमिश्नर को जुलूस, आतिशबाजी, सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति देने का अधिकार है।उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में पुलिस को प्रशासनिक और एहतियाती कार्रवाई के 14 एक्ट्स के तहत अधिकार दिए गए हैं।

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रायपुर में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार बस की टक्कर से स्कूटी सवार युवक की मौत

रायपुर। राजधानी रायपुर के घड़ी चौक में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार बस ने स्कूटी सवार युवक को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान प्रवीन मसीह (20) के रूप में हुई है, जो रायपुर का ही रहने वाला था। जानकारी के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 6 बजे हुआ जब प्रवीन स्कूटी से घर की ओर लौट रहा था। तभी तेलीबांधा दिशा से आ रही बस ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रवीन सड़क पर गिर गया और उसका सिर फट गया। आसपास मौजूद लोगों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी दीपक पासवान ने बताया कि पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपी चालक की पहचान की जा सके।

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छत्तीसगढ़ में महिला कैदियों के साथ जेल में रह रहे 60 बच्चे, प्रभावित हो रहा उनका बचपन

छत्तीसगढ़ की जेलों में 60 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य इस मामले में देश में छठे स्थान पर है। नियम के अनुसार, जेल में छह साल से छोटे बच्चों को अपनी मां के साथ रखा जाता है, जिससे ये बच्चे भी जेल की परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 311, उसके बाद पश्चिम बंगाल में 170, बिहार में 167, मध्य प्रदेश में 126 और झारखंड में 84 महिला कैदी अपने बच्चों के साथ बंद हैं। छत्तीसगढ़ में 60 महिला कैदी बच्चों के साथ जेल में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जेल का वातावरण बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास के लिए चुनौतीपूर्ण है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के लिए सुरक्षित पालन-पोषण, शिक्षा और खेल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हालांकि कुछ जेलों में आंगनबाड़ी और प्राथमिक शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, फिर भी यह पर्याप्त नहीं है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2023 तक भारत में कुल 1,318 महिला कैदी अपने 1,492 बच्चों के साथ जेल में थीं। इनमें से 1,049 महिलाएं विचाराधीन बंदी थीं, जिनके साथ 1,191 बच्चे जेल में थे, जबकि 249 महिला कैदियों को दोष सिद्ध किया जा चुका था और वे अपने 272 बच्चों के साथ जेल में थीं। बाल अधिकार विशेषज्ञ सुनील श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार को महिला कैदियों के बच्चों के लिए वैकल्पिक देखभाल और शिक्षा की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि उनका बचपन जेल की सलाखों में न गुजरे और वे समाज की मुख्यधारा से कट न जाएं।

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रायपुर में पटाखा खरीदने के विवाद ने लिया हिंसक रूप, दुकानदार घायल

रायपुर के रावणभांठा क्षेत्र में पटाखा खरीदने को लेकर एक विवाद हिंसक मोड़ ले गया। जानकारी के अनुसार, एक युवक पहले दुकान पर आया और दुकानदार से बहस करने लगा। कुछ देर बाद वह अपने एक साथी के साथ वापस आया और दोनों ने मिलकर मारपीट शुरू कर दी। दुकानदार मनीष चक्रधारी ने बताया कि रात करीब 8:30 बजे युवक दुकान पर आया था, लेकिन खरीदारी के दौरान कुछ बात को लेकर विवाद हो गया। थोड़ी देर बाद वह युवक अपने साथी के साथ लौट आया और गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देने लगा। मनीष ने बताया कि हमला दोनों ने अलग-अलग तरीके से किया। एक युवक ने हाथ में पहना कड़ा इस्तेमाल किया और दूसरा युवक हाथ-मुक्कों से हमला करता रहा। इस मारपीट में मनीष को सिर पर चोट आई। घटना के समय वहां मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति को काबू में किया। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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राज्य में वार्षिक रिजल्ट का नया फार्मूला: तिमाही-छमाही के अंक भी जुड़ेंगे

छत्तीसगढ़ में पहली से नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों के वार्षिक रिजल्ट का सिस्टम बदल दिया गया है। अब तिमाही और छमाही परीक्षाओं के अंक वार्षिक परीक्षा में शामिल किए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि यदि तिमाही या छमाही में किसी छात्र के अंक कम आए, तो वार्षिक परीक्षा का परिणाम भी प्रभावित होगा। शिक्षा विभाग ने इस नई प्रणाली को चालू शिक्षा सत्र से लागू कर दिया है। हालांकि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में यह बदलाव लागू नहीं होगा। इस बदलाव से राज्य के लगभग 45 लाख छात्र सीधे प्रभावित होंगे। नए फार्मूले के अनुसार रिजल्ट तैयार होगा इस नई व्यवस्था का उद्देश्य है कि छात्रों की सतत पढ़ाई और परीक्षा की गंभीरता बढ़े। कई बार छात्र तिमाही-छमाही में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद वार्षिक परीक्षा में सही प्रदर्शन नहीं कर पाते। इस प्रणाली से उनके पिछले अंकों के आधार पर रिजल्ट में मदद मिलेगी। फेल होने का नियम और बदलाव राज्य में 2010 में आरटीई कानून लागू होने के बाद कक्षा 1 से 8 तक सभी छात्रों को अनिवार्य रूप से पास कर दिया गया था। पहले भी तिमाही-छमाही के अंक जोड़े जाते थे, लेकिन अब इसे व्यापक और व्यवस्थित रूप में लागू किया जा रहा है। भास्कर एक्सपर्ट का विचार शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सतत मूल्यांकन का बेहतर फार्मूला है। यदि इसका पालन ईमानदारी और गंभीरता से किया जाए, तो छात्रों के वार्षिक रिजल्ट में सुधार होगा और उन्हें पिछले अंकों के आधार पर वार्षिक परीक्षा में फायदा मिलेगा।

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रायपुर में दिवाली की तैयारियों ने बढ़ाया ट्रैफिक का दबाव

रायपुर। धनतेरस (18 अक्टूबर) से शुरू होने वाले दिवाली पर्व को लेकर राजधानी सज-धज कर तैयार है। बाजारों में खरीदारी का माहौल देखने को मिल रहा है, जिससे सड़कें भीड़-भाड़ और ट्रैफिक जाम से प्रभावित हो रही हैं। राजधानी के सभी प्रमुख बाजारों में दुपहिया और चार पहिया वाहनों की संख्या बढ़ गई है। खासतौर पर एमजी रोड, राम सागर पारा, जीई रोड, आमापारा, पुरानी बस्ती, लाखे नगर, शंकर नगर, समता कॉलोनी, संतोषी नगर, पंडरी, गोलबाजार, मालवीय रोड, सदर बाजार, कंकाली पारा रोड, बूढ़ापारा और नालंदा परिसर में सुबह से शाम तक सड़कें जाम जैसी स्थिति में हैं। पुलिस ने किया ट्रैफिक प्रबंध और पार्किंग की सुविधा सुनिश्चित राजधानी पुलिस ने इन व्यस्त बाजारों के आसपास विशेष पार्किंग स्थल चिन्हित किए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बाजार में पहुंचने पर निर्धारित पार्किंग का ही उपयोग करें, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके और खरीदारी का माहौल सुचारू रहे।

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रायपुर सेंट्रल जेल से वीडियो वायरल: NDPS आरोपी ने की वीडियो कॉल, कसरत करते और दोस्तों संग सेल्फी लेते दिखा

रायपुर। राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल एक बार फिर विवादों में है। जेल के अंदर बंद NDPS एक्ट के आरोपी मोहम्मद रशीद अली उर्फ राजा बैजड़ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में राजा बैजड़ बैरक नंबर 15 में मोबाइल फोन से अपने परिवार को वीडियो कॉल करता नजर आ रहा है। आरोप है कि इस वीडियो को खुद आरोपी ने बनवाया और सोशल मीडिया पर वायरल किया ताकि जेल के अंदर अपनी पहुंच और दबदबा दिखा सके। यह वीडियो 13 से 15 अक्टूबर के बीच का बताया जा रहा है। जेल में करता है कसरत, सोशल मीडिया पर भी सक्रिय वायरल फुटेज में राजा बैजड़ को कसरत करते और अपने साथियों के साथ सेल्फी लेते हुए भी देखा जा सकता है। जानकारी के अनुसार, वह पिछले तीन महीने से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है, लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर एक्टिव बना हुआ है। जेल सूत्रों के मुताबिक, राजा बैजड़ जेल के अंदर से ही नशे के नेटवर्क और वसूली रैकेट को संचालित कर रहा है, जिसमें कुछ जेल कर्मियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। रिश्तेदार से की थी वीडियो कॉल, फिर खुद बनाया क्लिप बताया जा रहा है कि आरोपी ने पहले अपने किसी रिश्तेदार को वीडियो कॉल किया और उसके बाद खुद का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे बाहर भेजा। इसमें वह यह संदेश देने की कोशिश करता दिख रहा है कि जेल के अंदर उसी का राज चलता है और किसी का उस पर नियंत्रण नहीं। जुलाई में हुआ था गिरफ्तार पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, क्राइम नंबर 317/25 के तहत राजा बैजड़ को 11 जुलाई 2025 को थाना टिकरापारा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस पर NDPS एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज है। तब से वह रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। पहले भी विवादों में रही रायपुर जेल यह पहला मौका नहीं जब रायपुर सेंट्रल जेल विवादों में आई हो। इससे पहले गैंगस्टर अमन साव का फोटोशूट भी जेल के अंदर से वायरल हुआ था। बाद में अमन साव को झारखंड पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। उस घटना के बाद भी जेल प्रशासन पर मिलीभगत और सुरक्षा चूक के गंभीर आरोप लगे थे।

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नान घोटाला केस: रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को जमानत, 7 दिसंबर को ED पेश करेगी चार्जशीट

छत्तीसगढ़ के चर्चित नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला मामले में रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को राहत मिली है। रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी है। दोनों अधिकारियों ने 22 सितंबर को ईडी (ED) कोर्ट में सरेंडर किया था। कोर्ट ने उन्हें 16 अक्टूबर तक ED की कस्टडी में भेजा था। रिमांड अवधि खत्म होने पर दोनों को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें जमानत मिल गई। अब 7 दिसंबर को ED (प्रवर्तन निदेशालय) इस मामले में चार्जशीट पेश करेगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। ED ने दिल्ली में की थी पूछताछ सरेंडर से पहले दोनों अफसर करीब 5 दिन तक ED कोर्ट के चक्कर लगाते रहे। आखिरकार उन्होंने अधिकारियों की मौजूदगी में कोर्ट में सरेंडर किया। इसके बाद ED ने उन्हें दिल्ली मुख्यालय ले जाकर पूछताछ की थी। क्या है नान घोटाला? यह मामला नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) में चावल, नमक और अन्य खाद्य सामग्री के परिवहन और भंडारण में भारी गड़बड़ी से जुड़ा है। 12 फरवरी 2015 को ACB और EOW की टीमों ने नान मुख्यालय रायपुर सहित 28 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। कार्रवाई में करीब 1.75 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए, जबकि कुल 3.50 करोड़ रुपए की जब्ती हुई। टीमों ने कई अहम दस्तावेज भी कब्जे में लिए। जांच पूरी होने के बाद नान के तत्कालीन मैनेजर समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया। बाद में केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद IAS आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा के खिलाफ पूरक चालान दाखिल किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था? ED ने हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। एजेंसी ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। सुनवाई के बाद जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए ED को दोनों अधिकारियों की कस्टडी लेने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि उन्हें 4 हफ्ते ED की हिरासत में रहना होगा, उसके बाद ही जमानत दी जा सकेगी। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को तय समय सीमा में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए — IAS आलोक शुक्ला की भूमिका IAS आलोक शुक्ला डॉक्टर से अफसर बने अधिकारी हैं। 2015 में जब नान घोटाले का खुलासा हुआ, उस समय वे खाद्य विभाग के प्रमुख सचिव थे, जबकि अनिल टुटेजा नान के MD के पद पर थे। दोनों पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

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दिवाली पर मिलावटी खाने का खतरा बढ़ा: दूध, पनीर और खोए में केमिकल की मिलावट, ऐसे करें घर पर जांच

दिवाली नजदीक है और बाजारों में मिठाइयों की रौनक बढ़ गई है। लेकिन त्योहार के मौसम में जहां मिठाइयों की मांग तेज़ होती है, वहीं मुनाफा कमाने की लालच में कुछ व्यापारी नकली और मिलावटी खाद्य उत्पाद बेचने से नहीं चूकते। ये प्रोडक्ट्स न सिर्फ सेहत के लिए हानिकारक हैं बल्कि गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। रायपुर में इस साल खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब तक 8,000 किलो से अधिक नकली पनीर जब्त किया है। शहर में दो बड़ी फैक्ट्रियों पर छापेमारी कर विभाग ने मिलावटी पनीर बनाने वाले गिरोहों का भंडाफोड़ किया। रायपुर में दो नकली पनीर फैक्ट्रियों का खुलासा केस 1:31 जुलाई को भाठागांव इलाके में फूड डिपार्टमेंट की टीम ने छापा मारकर 700 किलो से ज्यादा नकली पनीर बरामद किया। फैक्ट्री में सस्ते पाम ऑयल और मिल्क पाउडर से पनीर तैयार किया जा रहा था। यह फैक्ट्री मुरैना (मध्य प्रदेश) के हुकुमचंद बंसल और उनके बेटे अंकुर बंसल चला रहे थे। केस 2:5 अगस्त को शंकर नगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में नाले के ऊपर बनी एक अवैध यूनिट में नकली पनीर तैयार होता पाया गया। यहां बेहद गंदगी के बीच पाम ऑयल और फैट से पनीर बनाया जा रहा था। इस फैक्ट्री से 300 किलो से अधिक नकली पनीर बरामद हुआ। मिलावटी पनीर की पहचान कैसे करें? नकली पनीर आमतौर पर खराब दूध, मैदा, अरारोट, पाम ऑयल और मिल्क पाउडर से बनाया जाता है। यह दिखने में असली लगता है, लेकिन शरीर के लिए बेहद हानिकारक है। घरेलू जांच का तरीका:थोड़ा पनीर पानी में डालकर कुछ बूंदें टिंचर आयोडीन की मिलाएं। अगर पनीर का रंग बैंगनी हो जाए, तो इसमें स्टार्च या मिलावट है। अगर रंग पीला ही रहे तो पनीर शुद्ध है। एनालॉग चीज क्या है और क्यों खतरनाक है? एनालॉग चीज (Analog Cheese) असली दूध से नहीं बनता, बल्कि पाम ऑयल, फैट और मिल्क पाउडर से तैयार किया जाता है। इसमें पौष्टिकता नहीं होती और ज्यादा सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है।हालांकि इसे बेचना गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इसे ‘पनीर’ के नाम पर बेचना नियमों के खिलाफ है। उपभोक्ता इन बातों का रखें ध्यान: मिलावटी खोया और मिठाई की पहचान सस्ता खोया अक्सर खराब मिल्क पाउडर, मैदा और स्टार्च से बनाया जाता है। इससे स्वाद तो कम होता ही है, साथ ही यह अपच, एसिडिटी, डायरिया और लीवर-किडनी से जुड़ी बीमारियों का कारण बन सकता है। जांच का तरीका:थोड़ा खोया पानी में घोलें और उसमें टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। अगर रंग नीला या बैंगनी हो जाए तो उसमें स्टार्च मिला है। असली और नकली दूध की पहचान आजकल दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए उसमें स्टार्च, यूरिया, डिटर्जेंट या कास्टिक सोडा मिलाया जाता है। जांच करें ऐसे:दूध को हल्का गर्म करें और टिंचर आयोडीन डालें। अगर रंग नीला या बैंगनी हो जाए तो उसमें मिलावट है। मिठाइयों की चमक भी नकली सिर्फ दूध या खोया ही नहीं, मिठाई पर लगाई जाने वाली चांदी की परत (Silver Foil) भी कई बार असली नहीं होती।कई दुकानदार असली चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉइल का उपयोग करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। त्योहारों में बिकने वाली रंगीन मिठाइयों में नकली सिंथेटिक फूड कलर भी डाले जाते हैं, जो पेट और लिवर पर बुरा असर डालते हैं। शिकायत कहां करें? अगर आपको किसी उत्पाद में मिलावट का संदेह है, तो सीधे शिकायत करें:

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