Raipur

रायपुर में मिलावटी पनीर पर बड़ी कार्रवाई: 1700 किलो पनीर जब्त, सैंपल जांच के लिए भेजे गए

रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मिलावटी और अस्वास्थ्यकर पनीर के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने भाठागांव क्षेत्र से 1700 किलो लूज पनीर जब्त किया है, जो खुले और गंदे हालात में रखा गया था। जब्त पनीर की अनुमानित कीमत करीब 4.76 लाख रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक कुमार अग्रवाल (आईएएस) के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई। 🧪 अस्वच्छ हालत में हो रहा था पनीर का निर्माण 7 जनवरी 2026 कोफूड विभाग के अधिकारी विनोद कुमार गुप्ता के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम नेभाठागांव स्थित मेसर्स के.एल.पी. डेयरी एवं मिल्क प्रोडक्ट का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि टीम ने मौके से भारी मात्रा में पनीर जब्त कर लिया और उसके नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं। साथ ही संबंधित फर्म को सुधार नोटिस भी जारी किया गया है। 📊 2025 में 9700 किलो नकली पनीर और खोवा हुआ था जब्त खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार,जनवरी 2025 से अब तक अमानक पाए जाने पर इन सभी खाद्य पदार्थों को नष्ट कराया गया।अब तक इस मामले में 10 प्रकरण न्यायालय में पेश किए जा चुके हैं, जिन पर सुनवाई जारी है। 📞 जनता से अपील, जारी रहेगी सख्ती खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है किअगर कहीं भी मिलावटी या संदिग्ध खाद्य पदार्थ बिकने की जानकारी मिले,तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 9340597097 पर शिकायत दर्ज कराएं। अधिकारियों ने साफ किया है कि पर आगे भी लगातार और सख्त कार्रवाई की जाती रहेगी।

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महादेव सट्टा ऐप मामला: ED ने 92 करोड़ की संपत्ति की सीज, दुबई से चल रहा था रिग्ड बेटिंग नेटवर्क

रायपुर / नई दिल्ली।महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 92 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई PMLA कानून के तहत की गई है और इसे अब तक की सबसे अहम कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। ED की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके सहयोगियों का संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जो भारत से अवैध तरीके से करोड़ों रुपये विदेश भेज रहा था। 💰 किन संपत्तियों पर ED की कार्रवाई ED के अनुसार, इसके अलावा, 🌍 दुबई से संचालित हो रहा था महादेव ऐप जांच एजेंसी के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) ऐप को सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल प्रमोट कर रहे थे। दोनों छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और फिलहाल UAE (दुबई) में मौजूद बताए जा रहे हैं।भारत सरकार उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। 🎰 रिग्ड गेम्स से होती थी ग्राहकों की लूट ED की जांच में खुलासा हुआ है किMahadev Online Book और Skyexchange जैसे प्लेटफॉर्म पर रिग्ड गेम्स चलाए जा रहे थे,जहां इस तरह लाखों यूजर्स से अवैध तरीके से रकम वसूली जाती थी। 💸 हवाला, क्रिप्टो और FPI से विदेश पहुंचा पैसा जांच में सामने आया कि सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को के जरिए विदेश भेजा गया।बाद में इसी पैसे को FPI (Foreign Portfolio Investment) के नाम पर भारतीय शेयर बाजार में निवेश किया गया। 🔁 कैशबैक रैकेट का भी खुलासा ED ने एक बड़े कैशबैक रैकेट का भी पर्दाफाश किया है।जांच में पता चला कि ED का दावा है कि गगन गुप्ता कोSalasar Techno Engineering और Tiger Logistics से जुड़े सौदों में करीब 98 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। 📂 अब तक की कार्रवाई ED के अनुसार, इस नेटवर्क में छत्तीसगढ़ के कई हाई-प्रोफाइल नेता और अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी का कहना है कि महादेव ऐप एक ‘अंब्रेला सिंडिकेट’ की तरह काम कर रहा था। 💎 सर्राफा कारोबारी के जरिए पहुंची प्रोटेक्शन मनी EOW की जांच में यह भी सामने आया है किमहादेव बुक प्रमोटर्स ने कार्रवाई से बचने के लिएराजनेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अफसरों तक प्रोटेक्शन मनी पहुंचाई। इसमें छत्तीसगढ़ के सर्राफा कारोबारी सुनील कुमार दम्मानी (श्री आभूषण ज्वैलर्स) की भूमिका सामने आई है।हवाला के जरिए पैसा कलेक्ट करचंद्रभूषण वर्मा और राहुल वक्टे के माध्यम से आगे पहुंचाया जाता था। 👥 पैनल चलाने वाले नाम सामने आए जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं: ⚠️ चालान में अफसरों के नाम गायब EOW द्वारा कोर्ट में पेश किए गए चालान मेंकिसी भी ब्यूरोक्रेट या पुलिस अधिकारी को नामजद आरोपी नहीं बनाया गया है।चालान में केवल पदनामों का उल्लेख किया गया है। 🔍 जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद ED और EOW का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल सट्टा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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दावरा यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप, छात्र ने लगाया भविष्य बर्बाद करने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ की दावरा यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। यूनिवर्सिटी में फार्मेसी कोर्स में एडमिशन लेने वाले छात्र सागर गुप्ता ने संस्थान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उन्हें पीसीआई (Pharmacy Council of India) की मान्यता होने का भरोसा देकर एडमिशन कराया, लेकिन बाद में यह सामने आया कि कोर्स को पीसीआई की स्वीकृति ही नहीं मिली थी। छात्र सागर गुप्ता ने बताया कि उन्होंने एडमिशन से पहले कई बार यूनिवर्सिटी से PCI अप्रूवल को लेकर स्पष्ट सवाल किए थे। हर बार उन्हें यही बताया गया कि कोर्स पूरी तरह से अप्रूव्ड है। इसके बाद उन्होंने तय फीस जमा कर फार्मेसी कोर्स में एडमिशन ले लिया। 5 दिसंबर को किया गया बड़ा खुलासा सागर का आरोप है कि एडमिशन के काफी समय बाद, 5 दिसंबर को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अचानक यह जानकारी दी कि पीसीआई अप्रूवल रिजेक्ट हो चुका है, जबकि इससे पहले दो बार इंस्पेक्शन होने के बावजूद छात्रों को आश्वासन दिया जाता रहा कि सब कुछ ठीक है। फ्रॉड जैसे विकल्प दिए गए छात्र का कहना है कि जब अप्रूवल न होने की बात सामने आई तो यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार द्वारा तीन विकल्प दिए गए, जो पूरी तरह से भ्रामक और धोखेबाज़ी से भरे थे। इन विकल्पों में न तो पढ़ाई की उचित व्यवस्था थी और न ही भविष्य की कोई गारंटी। शिक्षकों और पढ़ाई की भारी कमी सागर ने बताया कि यूनिवर्सिटी में न तो ठीक से बैठने की व्यवस्था थी, न नियमित क्लासेज़। कई दिनों तक शिक्षक ही नहीं आते थे। 17 अगस्त से 3 अक्टूबर तक छात्र लगातार शिक्षकों और प्रशासन से संघर्ष करते रहे। दो महीने बाद एक शिक्षक आईं, लेकिन वे भी अनुभवहीन बताई जा रही हैं। कंपनसेशन से भी इनकार जब छात्रों ने अपने बर्बाद हुए समय और भविष्य को देखते हुए यूनिवर्सिटी से कंपनसेशन की मांग की, तो प्रबंधन ने इस पर भी सहमति नहीं जताई। छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी को बच्चों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। छात्र का आरोप सागर गुप्ता का कहना है, “हमने पूरी जानकारी लेकर एडमिशन लिया था। यूनिवर्सिटी ने झूठ बोला। हमारा कीमती समय, पैसा और भविष्य बर्बाद कर दिया गया।” ⚠️ प्रशासन से कार्रवाई की मांग इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि बिना पीसीआई अप्रूवल के छात्रों को एडमिशन कैसे दिया गया। छात्रों और उनके परिजनों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। Note- इस पूरे मामले में लगाए गए सभी आरोप छात्र सागर गुप्ता के हैं। खबर लिखे जाने तक दावरा यूनिवर्सिटी प्रबंधन से इस विषय पर कोई लिखित या मौखिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका है।

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छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले तीन दिनों तक राज्य के उत्तरी और मध्य हिस्सों के आठ जिलों में शीतलहर का असर बना रहेगा। राजधानी रायपुर में रात का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। वहीं प्रदेश के सबसे ठंडे इलाकों में शामिल मैनपाट में तापमान 1.8 डिग्री तक गिर गया। अंबिकापुर में पारा 3.3 डिग्री, पेंड्रा में 7.6 डिग्री, दुर्ग और राजनांदगांव में 8 डिग्री तथा जगदलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री (जगदलपुर) और न्यूनतम तापमान 3.3 डिग्री (अंबिकापुर) रहा। ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। ❄️ ठंड के कारण स्कूल बंद कड़ाके की ठंड को देखते हुए सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल खुले रहेंगे, लेकिन दो पालियों में चलने वाले स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब पहली पाली सुबह 9:30 से 12:30 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक संचालित होगी। ⚠️ ठंड से जान का खतरा अंबिकापुर के श्रीगढ़ इलाके में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई। कम कपड़ों में खुले में सोने के कारण वे हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए। यह अंबिकापुर में ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले 11 दिसंबर को बस स्टैंड में सो रहे एक व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। 🏥 बच्चों की सेहत पर असर तेज ठंड का असर बच्चों पर भी साफ दिख रहा है। रायपुर के सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक महीने में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक नवजात और छोटे बच्चों का शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है, जिससे उन्हें NICU और SNCU तक में भर्ती कराना पड़ रहा है। 🤒 अस्पतालों की OPD में बढ़ी भीड़ ठंड के चलते वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ गए हैं। अंबेडकर अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 2000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में सबसे ज्यादा भीड़ है। 🧊 क्या है हाइपोथर्मिया? हाइपोथर्मिया एक गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान सामान्य 37 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार ठंडी हवा या पानी के संपर्क में आने से शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक साबित हो सकती है। 🔥 नगर निगम ने जलवाए अलाव शीतलहर के बढ़ते असर को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर के 12 से अधिक स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। मेयर मीनल चौबे और निगम कमिश्नर विश्वदीप के निर्देश पर अधिकारियों को रात में फील्ड में रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करने को कहा गया है। 🦟 बदलते मौसम में मलेरिया का खतरा मौसम विशेषज्ञों के अनुसार दिन में अधिक और रात में कम तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है। अगले कुछ दिनों में ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरदानी के उपयोग, पानी जमा न होने देने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है। 🛡️ ठंड से बचाव के उपाय डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में भाप लेना, नमक-पानी से गरारे करना, विटामिन-C युक्त आहार, अदरक-तुलसी की चाय और गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और सर्दी-जुकाम व वायरल संक्रमण से बचाव होता है।

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खारून नदी में बिना ट्रीटमेंट छोड़ा जा रहा औद्योगिक गंदा पानी, बीरगांव की जल आपूर्ति पर बड़ा संकट

रायपुर।खारून नदी लगातार प्रदूषण की चपेट में आती जा रही है। कारा क्षेत्र में स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए उरला औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला केमिकल युक्त और जहरीला पानी बिना किसी शुद्धिकरण के सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बीरगांव नगर निगम की पेयजल व्यवस्था पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। जानकारी के अनुसार, कारा एसटीपी में पिछले कई महीनों से ट्रीटमेंट सिस्टम लगभग बंद पड़ा है। मशीनें निष्क्रिय हैं, फिल्टर काम नहीं कर रहे और दूषित पानी नालियों व खुली पाइप लाइनों के माध्यम से सीधे खारून नदी में बहाया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान ट्रीटमेंट टैंकों के आसपास काले रंग का झाग, तेज दुर्गंध और केमिकल युक्त पानी जमा पाया गया। मंगलवार को बीरगांव नगर निगम के महापौर नंदलाल देवांगन, निगम आयुक्त युगल किशोर उर्वशा और अधिकारियों की टीम ने कारा स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया। मौके पर कई पाइपलाइनें सीधे नदी की ओर खुली मिलीं, जिनसे बिना ट्रीटमेंट किया गया गंदा पानी लगातार बह रहा था। इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए महापौर ने इसे जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ बताया और तत्काल सुधार के निर्देश दिए। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि एसटीपी से कुछ ही दूरी पर बीरगांव नगर निगम का इंटकवेल स्थित है, जहां से हजारों घरों में पीने का पानी सप्लाई किया जाता है। खारून नदी में मिल रहा यह जहरीला पानी भू-जल को भी प्रभावित कर सकता है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में जल जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए महापौर और निगम आयुक्त ने बेंद्री स्थित इंटकवेल का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी हालत में दूषित पानी जल स्रोत तक न पहुंचने पाए। गौरतलब है कि कारा एसटीपी का संचालन नगर निगम रायपुर के अधीन है, जबकि इसका सीधा असर बीरगांव नगर निगम क्षेत्र पर पड़ रहा है। दोनों निकायों के बीच जिम्मेदारी तय न होने से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। निरीक्षण के दौरान एमआईसी सदस्य इकराम अहमद, संतोष साहू, कार्यपालन अभियंता डी.एल. देवांगन सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। महापौर नंदलाल देवांगन ने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी रायपुर कलेक्टर को दी जाएगी और दोषी अधिकारियों व एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।

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रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत

रायपुर हिट एंड रन मामला: रेणुका सिंह के बेटे की कार से बाइक सवार को टक्कर, गिरफ्तारी के बाद मिली जमानत छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हिट एंड रन का एक हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है। बीजेपी विधायक और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह के बेटे बलवंत सिंह पर बाइक सवार युवक को कार से टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल करने का आरोप है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया, लेकिन थाने से ही उसे जमानत मिल गई। हादसे में घायल युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। यह घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अग्रसेन धाम चौक के पास 5 जनवरी की देर रात करीब 1:15 बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार कार ने बाइक सवार को जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घायल युवक की हालत गंभीर हादसे में घायल युवक की पहचान त्रिभुवन सिंह ठाकुर (34) के रूप में हुई है, जो डीजे और इवेंट से जुड़ा काम करता है। वह काम खत्म कर सेरीखेड़ी से बाइक से तेलीबांधा लौट रहा था। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और घायल को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। कार छोड़कर फरार हुआ आरोपी पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां दुर्घटनाग्रस्त कार मौजूद थी, लेकिन चालक फरार था। जांच में सामने आया कि कार (CG 04 PC 0853) बलवंत सिंह चला रहा था। वाहन मालिक जयप्रकाश उपाध्याय, निवासी रामानुज नगर, कुशालपुर (सरगुजा) के नाम पर कार रजिस्टर्ड है, जिसने नोटिस के जवाब में पुष्टि की कि घटना के समय वाहन बलवंत सिंह के पास था। पीड़ित के भाई राज नारायण सिंह की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125(a) के तहत मामला दर्ज कर वाहन को जब्त कर लिया। गिरफ्तारी के बाद तुरंत मिली जमानत पुलिस ने 6 जनवरी की रात आरोपी बलवंत सिंह (33) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जोरा मॉल से तेलीबांधा की ओर लौट रहा था, तभी अचानक बाइक सामने आने से कार का संतुलन बिगड़ गया और हादसा हो गया। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही आरोपी को थाने से जमानत दे दी गई। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। सड़क हादसों के बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सड़क सुरक्षा से जुड़े सरकारी आंकड़ों के अनुसार— राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। 2023 में सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं तमिलनाडु में दर्ज की गईं, जबकि सबसे अधिक मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। सड़क हादसों के प्रमुख कारण हादसों से बचाव के उपाय

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CM विष्णुदेव साय का दावा: G-RAM-G योजना मनरेगा से अधिक प्रभावी, 125 दिन रोजगार और हफ्तेभर में भुगतान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विकसित भारत गारंटी के अंतर्गत शुरू की गई रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) – G RAM G योजना को मनरेगा की तुलना में ज्यादा असरदार बताया है। उन्होंने कहा कि नई योजना में न सिर्फ काम के दिन बढ़ाए गए हैं, बल्कि मजदूरी भुगतान को लेकर भी सख्त समय-सीमा तय की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जहां मनरेगा में प्रति परिवार 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, वहीं G-RAM-G योजना में यह सीमा बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इससे ग्रामीण परिवारों को साल में 25 दिन अतिरिक्त रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी में सीधा लाभ होगा। सीएम ने कहा कि इस योजना का सबसे अहम पहलू यह है कि मजदूरी भुगतान एक सप्ताह के भीतर श्रमिकों के खातों में पहुंचाने का प्रावधान किया गया है। देरी पर मिलेगा अतिरिक्त भुगतान सीएम विष्णुदेव साय ने बताया कि यदि मजदूरी भुगतान में तय समय-सीमा से देरी होती है, तो श्रमिकों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि अब भुगतान में अनावश्यक विलंब को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण मजदूरों की आर्थिक असुरक्षा कम होने का दावा किया गया है। खेती के मौसम में योजना अस्थायी रूप से बंद मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि G-RAM-G योजना पूरे साल लागू नहीं रहेगी। भारत और छत्तीसगढ़ को कृषि प्रधान राज्य बताते हुए उन्होंने कहा कि जब खेतों में काम अधिक रहेगा, खासकर धान कटाई के मौसम में, तब यह योजना अस्थायी रूप से बंद की जाएगी। वर्ष में करीब दो महीने योजना लागू नहीं होगी, ताकि किसान और खेतिहर मजदूर कृषि कार्यों में जुट सकें। योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज मनरेगा के विकल्प के रूप में लाई गई G-RAM-G योजना को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे “नाम बदलने वाली योजना” बताते हुए कहा कि इससे जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। उन्होंने फंडिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मनरेगा की पूरी राशि केंद्र सरकार देती थी, जबकि अब राज्य सरकार को 40 प्रतिशत हिस्सा वहन करना होगा, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर संदेह है। क्या है G-RAM-G योजना? G RAM G (विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) अधिनियम 2025 के तहत शुरू की गई नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना है, जिसे मनरेगा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस योजना में— शामिल है। हालांकि, इसमें कृषि सीजन के दौरान लगभग 60 दिनों तक कार्य विराम और फंडिंग पैटर्न में बदलाव का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का दावा है कि इस योजना का लक्ष्य 2047 तक ग्रामीण आय और विकास को नई दिशा देना है।

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रायपुर हेलीपैड के पास मेडिकल वेस्ट का ढेर: सैकड़ों PPE किट खुले में फेंकी गईं, कोरोना काल की खरीद होने की आशंका

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मेडिकल वेस्ट के लापरवाह निपटान का एक गंभीर मामला सामने आया है। हेलीपैड के पास स्थित खाली जमीन पर सैकड़ों की संख्या में PPE किट खुले में फेंकी गई हैं। स्थानीय लोगों ने जब मौके पर बड़ी मात्रा में बिखरी PPE किट देखीं, तब इस मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ये PPE किट कोरोना महामारी के दौरान खरीदी गई हो सकती हैं। घटनास्थल पर कई किट पैक हालत में तो कुछ खुले और पुराने रूप में पाई गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मेडिकल सामग्री लंबे समय से यहां पड़ी थी, लेकिन हाल के दिनों में इसकी मात्रा अचानक बढ़ गई है। मेडिकल वेस्ट जलाने की भी सूचना स्थानीय लोगों का दावा है कि इनमें से कुछ PPE किट को मेडिकल कचरे के साथ जलाए जाने की भी जानकारी मिली है। यदि यह बात सही पाई जाती है, तो यह पर्यावरण नियमों का गंभीर उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट को खुले स्थान पर जलाना प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे जहरीली गैसें निकलती हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा होता है। प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल राजधानी के एक संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र के पास इस तरह से PPE किट का खुले में पड़ा होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। हेलीपैड जैसे महत्वपूर्ण स्थान के नजदीक बड़ी मात्रा में मेडिकल सामग्री का डंप होना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये PPE किट किस विभाग या संस्था से संबंधित हैं। यह भी जांच का विषय है कि यह सरकारी खरीदी का हिस्सा थीं या किसी निजी एजेंसी द्वारा यहां लाकर फेंकी गईं। स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि PPE किट प्लास्टिक और सिंथेटिक पदार्थों से बनी होती हैं, जिन्हें खुले में छोड़ना या जलाना पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। यदि इनमें से कोई किट पहले इस्तेमाल की गई हो, तो संक्रमण फैलने का खतरा भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। जांच और कार्रवाई की मांग तेज मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि कोरोना काल की मेडिकल सामग्री को इस तरह खुले में फेंकना या जलाना नियमों के साथ-साथ जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और यह स्पष्ट हो पाता है या नहीं कि सैकड़ों PPE किट आखिर यहां कैसे और किसके निर्देश पर डंप की गईं।

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खरोरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 4 किलो से अधिक गांजा जब्त, ओडिशा से ला रहे दो अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान के तहत खरोरा पुलिस ने 5 जनवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए 4.256 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। इस मामले में दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो ओडिशा से गांजा लेकर छत्तीसगढ़ आ रहे थे। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 1.65 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम तुलसी डहरिया निवासी राकेश सिंह ठाकुर एक ओडिशा के गांजा तस्कर के साथ नीले रंग की बिना नंबर वाली स्कूटी से कोसरंगी रोड होते हुए घिवरा पुलिया की ओर आ रहा है। सूचना मिलते ही खरोरा पुलिस टीम ने ग्राम घिवरा नहर पुलिया के पास घेराबंदी कर दी। नुवापाड़ा, ओडिशा का रहने वाला आरोपी कुछ समय बाद एक स्कूटी पर दो युवक आते हुए दिखाई दिए, जिन्हें पुलिस ने मौके पर रोका। पूछताछ में स्कूटी चला रहे युवक ने अपना नाम राकेश सिंह ठाकुर (38 वर्ष) बताया, जबकि पीछे बैठे युवक की पहचान पिंटू सतनामी (21 वर्ष), निवासी भलेसर भूतकायरा, बेलटुकरी, जिला नुवापाड़ा, ओडिशा के रूप में हुई। सफेद प्लास्टिक बैग से मिला गांजा तलाशी के दौरान स्कूटी की डिक्की में रखे सफेद प्लास्टिक के झोले से खाकी टेप से लिपटा गांजा का पैकेट बरामद किया गया। वहीं दूसरे आरोपी पिंटू सतनामी के हाथ में रखे सफेद प्लास्टिक बैग से भी इसी तरह पैक किया हुआ गांजा मिला। 1.65 लाख रुपए का माल जब्त दोनों आरोपियों के पास से कुल 4.256 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 85,120 रुपए बताई जा रही है। इसके साथ ही गांजा परिवहन में इस्तेमाल की गई स्कूटी भी जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 80,000 रुपए है। इस तरह कुल जब्त संपत्ति का मूल्य 1,65,120 रुपए आंका गया है। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

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NDPS मामलों में सख्ती: रायपुर कोर्ट ने तीन दोषियों को सुनाई कड़ी सजा, कैप्सूल तस्करों को 10-10 साल जेल

नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर की विशेष अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। ट्रामाडोल कैप्सूल की अवैध तस्करी के मामले में दो आरोपियों को 10-10 वर्ष की सश्रम कैद दी गई है, जबकि 7 किलो से अधिक गांजा रखने के दोषी एक युवक को 7 साल की सजा सुनाई गई है। मामला-1: ट्रामाडोल कैप्सूल बेचते पकड़े गए दो आरोपी विशेष लोक अभियोजक के.के. चंद्राकर के अनुसार, 19 अक्टूबर 2022 को थाना टिकरापारा क्षेत्र में सहायक उपनिरीक्षक विजय नेताम को सूचना मिली थी कि हनुमान नगर, पुराने धमतरी रोड पर दो युवक नशीली कैप्सूल की बिक्री के लिए खड़े हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने स्वतंत्र गवाहों के साथ मौके पर दबिश दी और घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ में उनकी पहचान एहसान खान उर्फ एहसान और सरफराज खान उर्फ शाहरुख के रूप में हुई। तलाशी के दौरान दोनों के पास से काले रंग के बैग में रखे ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए गए। प्रत्येक आरोपी के कब्जे से 144-144 कैप्सूल मिले। आरोपियों के पास न तो किसी तरह का लाइसेंस था और न ही डॉक्टर का कोई वैध पर्चा। पुलिस ने मौके पर ही कैप्सूल को सील कर जब्त किया और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। मामला-2: 7.206 किलो गांजा के साथ युवक गिरफ्तार दूसरा मामला थाना सरस्वती नगर क्षेत्र से जुड़ा है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने परशुराम चौक, कोटा स्टेडियम के सामने रेड कार्रवाई की। यहां एक संदिग्ध युवक को रोका गया, जिसने अपना नाम भार्गव तांडी उर्फ चीकू तांडी बताया। एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए तलाशी ली गई। आरोपी की मोटरसाइकिल से खाकी पॉलीथिन में पैक गांजा बरामद हुआ, जिसका कुल वजन 7.206 किलोग्राम पाया गया। मौके पर ही सैंपलिंग और सीलिंग की गई। एफएसएल रायपुर की रिपोर्ट में गांजा होने की पुष्टि के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई।

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