Chhattisgarh

कवर्धा में 1 लाख से अधिक का गांजा बरामद, ग्राहक की तलाश में घूम रहा तस्कर गिरफ्तार

कबीरधाम जिले में पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 1 लाख रुपये से अधिक कीमत का गांजा जब्त किया है। एसपी धर्मेंद्र सिंह के निर्देश पर जिले भर में चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना पिपरिया पुलिस ने यह कार्रवाई की। पुलिस को 13 मार्च को मुखबिर से सूचना मिली कि ग्राम दशरंगपुर का एक व्यक्ति काले बैग में गांजा लेकर दुधिया रोड की ओर पैदल जा रहा है और बिक्री के लिए ग्राहक की तलाश में है। सूचना मिलते ही पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और गवाहों के साथ मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। कुछ देर बाद मुखबिर के बताए हुलिये का व्यक्ति कंधे पर काला बैग लटकाए आता दिखा, जिसे रोककर पूछताछ की गई। उसने अपना नाम अजय गणवीर निवासी दशरंगपुर बताया। संदेह के आधार पर एनडीपीएस एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई करते हुए बैग की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बैग में रखी दो पॉलिथीन में कुल 2.821 किलोग्राम गांजा मिला, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1,05,350 रुपये बताई गई। इसके अलावा आरोपी के पास से 67,150 रुपये नकद और लगभग 15,000 रुपये कीमत का एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी बरामद किया गया। कुल मिलाकर 1,87,500 रुपये का सामान जब्त किया गया। इस मामले में आरोपी के खिलाफ थाना पिपरिया में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी)(2)(बी) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया कर रही है और मामले की आगे जांच जारी है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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Chhattisgarh

दुर्ग: जिला अस्पताल के पीछे नाली में मिला नवजात का शव, फेंके जाने की आशंका

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल परिसर में शनिवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब मातृत्व-शिशु (मदर एंड चाइल्ड) यूनिट के पीछे स्थित नाली से एक नवजात शिशु का शव बरामद हुआ। कचरा बीनने वाली एक महिला ने नाली में कुछ बहता देखा और पास जाकर जांच करने पर उसे बच्चे का शव दिखाई दिया। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों को सूचना दी। मौके पर जुटे लोगों ने तुरंत पुलिस को जानकारी दी। सूचना मिलते ही दुर्ग सिटी कोतवाली पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और शव को नाली से बाहर निकलवाकर अपने कब्जे में लिया। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मरच्युरी में रखवा दिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, नवजात का शरीर काफी विकसित था और अनुमान लगाया जा रहा है कि भ्रूण लगभग 6 महीने का हो सकता है। घटना की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ लग गई और मामले को लेकर नाराजगी भी देखी गई। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम रविवार को पोस्टमार्टम करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे की मौत कैसे हुई और वह जन्म के समय जीवित था या नहीं। पुलिस को आशंका है कि किसी ने प्रसव के बाद नवजात को नाली में फेंक दिया होगा, क्योंकि शव अस्पताल के मदर एंड चाइल्ड यूनिट के ठीक पीछे मिला है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घटना कब और कैसे हुई। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और अस्पताल कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक गैस एजेंसी के ऑफिस के अंदर घुसकर युवक द्वारा डिलीवरी बॉय की पिटाई का मामला सामने आया है

घटना चक्रधरनगर थाना क्षेत्र की है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। 🚔 मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित राजा अग्रवाल प्रियदर्शिनी एचपी गैस एजेंसी में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता है। 11 मार्च की सुबह वह गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए जा रहा था। रास्ते में सुभाष चौक के पास एक बाइक सवार युवक से साइड देने को लेकर उसकी मामूली कहासुनी हो गई। कुछ देर बाद जब डिलीवरी बॉय अपने ऑफिस पहुंचा, तो वही युवक उसका पीछा करते हुए वहां भी पहुंच गया। गुस्से में युवक ऑफिस के अंदर घुस आया और स्टाफ के सामने ही डिलीवरी बॉय से बहस करने लगा। जैसे ही पीड़ित सामने आया, आरोपी ने उसे थप्पड़ मार दिया, जिसके बाद दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। 😠 ऑफिस में मौजूद कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराने की कोशिश की, लेकिन आरोपी दोबारा अंदर घुस आया और फिर से मारपीट करने लगा। इस दौरान उसने धमकी भी दी कि उसके खिलाफ शिकायत करने से कुछ नहीं होगा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है। 📹 पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपी रिहान खान (23 वर्ष) को छोटा अतरमुड़ा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने मारपीट की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर‑चांपा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है

जहां एक पिता ने अपने ही 6 साल के बेटे की नहर में डुबोकर हत्या कर दी। मामला पामगढ़ थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने आरोपी पिता रेशम यादव को गिरफ्तार कर लिया है। 🚔 जानकारी के अनुसार, रेशम यादव शराब का आदी था और इसी बात को लेकर उसकी पत्नी से अक्सर झगड़ा और मारपीट होती रहती थी। परेशान होकर पत्नी अपनी दो बेटियों को लेकर मायके भिलौनी में रहने लगी, जबकि बेटा आयुष पिता के पास ही रह गया। बताया जा रहा है कि आरोपी पत्नी को बार-बार फोन कर धमकी देता था कि वह पहले बेटे को मार देगा और फिर खुद भी जान दे देगा। 13 मार्च की शाम वह बेटे को साथ लेकर निकला और देर रात उसे नहर में डुबो दिया। कुछ घंटे बाद वह बच्चे का शव लेकर पत्नी के घर पहुंचा और पहले दावा किया कि नशे की हालत में साइकिल समेत नहर में गिरने से हादसा हुआ। पुलिस की पूछताछ में सच्चाई सामने आ गई। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने कबूल किया कि पत्नी के वापस न आने से वह गुस्से में था और उसी गुस्से में उसने बेटे की हत्या कर दी। 😢 पुलिस के मुताबिक पति-पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पत्नी ने भी बयान में बताया कि पति शराब पीकर गाली-गलौज और मारपीट करता था, जिससे तंग आकर वह मायके में रह रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया, मामला दर्ज किया और अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। ⚖️

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दुर्ग में पुलिस पर मारपीट का आरोप: बीजेपी नेता के भाई को बंदूक के बट से मारा, CCTV सामने

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिसकर्मियों पर एक युवक से मारपीट करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह युवक भाजपा किसान मोर्चा राजनांदगांव के जिला उपाध्यक्ष आनंद साहू का छोटा भाई नागेश साहू है। घटना पावर हाउस रेलवे स्टेशन के पास की बताई जा रही है, जिसका CCTV वीडियो भी सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, 12 मार्च की रात नागेश साहू अपने कुछ साथियों के साथ स्टेशन के पास खड़े थे। इसी दौरान छावनी थाने में पदस्थ दो कॉन्स्टेबल वहां पहुंचे और आसपास खड़े लोगों को हटाने लगे। अधिकतर लोग पुलिस को देखकर वहां से चले गए, लेकिन नागेश और उनके साथी वहीं खड़े रहे। आरोप है कि इस पर एक कॉन्स्टेबल ने बंदूक को उल्टा कर उसके बट से नागेश पर वार किया और उनका कॉलर पकड़कर पीछे धकेल दिया। इसके बाद उन्हें वहां से भगा दिया गया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि पुलिसकर्मी कुछ अन्य लोगों से सामान्य तरीके से बात करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि नागेश साहू अपने एक पूर्व कर्मचारी से बकाया पैसे लेने के सिलसिले में भिलाई आए थे। उनका राजनांदगांव में ढाबा है, जिसे वे संचालित करते हैं। आनंद साहू ने पुलिस पर गुंडागर्दी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भाई ने कोई गलत काम नहीं किया था, इसलिए वहां से हटने की कोई वजह नहीं थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित पुलिसकर्मी संभवतः नशे में थे। इस मामले में वे पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की मांग करेंगे। सूत्रों के अनुसार, घटना में शामिल दोनों कॉन्स्टेबल की उस रात ड्यूटी पावर हाउस के सराफा बाजार में लगाई गई थी, लेकिन वे रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पहुंच गए थे। हालांकि इस मामले में अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान या शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh

2 लाख पौधों से बनेगा ‘बी कॉरिडोर’: हाईवे किनारे फूलों की हरियाली, मधुमक्खियों के लिए खास पहल

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) अब सड़कों के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रहा है। योजना के तहत हाईवे किनारे मधुमक्खियों के लिए विशेष “बी कॉरिडोर” विकसित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में फूलदार पौधे लगाए जाएंगे। इस पहल की शुरुआत छत्तीसगढ़ से की जा रही है। सबसे पहले नेशनल हाईवे‑53 के आरंग से सरायपाली मार्ग पर यह कॉरिडोर बनाया जाएगा। अन्य हाईवे भी होंगे शामिल इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रमुख मार्गों पर भी परियोजना लागू होगी, जिनमें — सालभर मिलेगा मधुमक्खियों को भोजन कॉरिडोर में विभिन्न प्रजातियों के फूलदार पौधे लगाए जाएंगे ताकि मधुमक्खियों को पूरे वर्ष पराग और मधुरस मिलता रहे। इससे शहद उत्पादन, परागण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। हाईवे किनारे विकसित हरित पट्टी में करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश और जामुन जैसे पेड़ लगाए जाएंगे। अनुमान है कि इस परियोजना के तहत करीब 2 लाख पौधे लगाए जाएंगे, जिससे सड़क किनारे फूलों की हरियाली भी बढ़ेगी। गांवों से दूरी पर बनाया जाएगा कॉरिडोर अधिकारियों के अनुसार इन कॉरिडोर को गांवों से औसतन 5 से 6 किलोमीटर दूर विकसित किया जाएगा, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और मधुमक्खियों के लिए सुरक्षित वातावरण बन सके। जल्द होगी अधिकारियों की बैठक परियोजना को लेकर रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में संबंधित जिलों के अधिकारियों और प्रोजेक्ट डायरेक्टरों की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें कार्ययोजना तय की जाएगी।

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आरटीई सीट निर्धारण में गड़बड़ी: अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में हिंदी के आधार पर भर दी सीटें, 11 अधिकारियों को नोटिस

राजधानी रायपुर में आरटीई (Right to Education) कोटे की सीटों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। निजी स्कूलों में सीट निर्धारण प्रक्रिया में अनियमितता पाए जाने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने 11 स्कूलों के नोडल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जांच में पाया गया कि कई स्कूलों में वास्तविक छात्र संख्या और माध्यम (हिंदी/अंग्रेजी) के अनुसार सीटें तय नहीं की गईं। कुछ स्कूल अंग्रेजी माध्यम के होने के बावजूद हिंदी माध्यम के आधार पर सीटें सुरक्षित कर दी गईं। क्या है मुख्य गड़बड़ी जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार, सीट प्रोटेक्शन प्रक्रिया में गलत आधार अपनाया गया। कई मामलों में छात्र संख्या कम या ज्यादा होने के बावजूद सीटें पुराने आंकड़ों के अनुसार भर दी गईं। बाद में समीक्षा के बाद संशोधित सूची जारी की गई और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। डीईओ हिमांशु भारतीय ने बताया कि जहां-जहां त्रुटियां मिली हैं, वहां जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। जिन क्षेत्रों के स्कूलों में मामला सामने आया मामला मंदिर हसौद, उरला, फुंडहर, रामनगर बस्ती, पारसदा, अमलीडीह और अन्य इलाकों के निजी स्कूलों से जुड़ा है। मंदिर हसौद और उरला क्षेत्र के कई स्कूलों में माध्यम के आधार पर गलत सीट निर्धारण पाया गया। सीट संख्या में भी बदलाव जांच के बाद कई स्कूलों में सीट संख्या भी बदली गई। उदाहरण के तौर पर कहीं 26 सीटों के स्थान पर 30, 86 के स्थान पर 89 और 12 के स्थान पर 13 सीटें तय की गईं। प्रमुख स्कूल जहां त्रुटियां मिलीं आरटीई सीटों को लेकर पहले से विवाद प्रदेश में आरटीई कोटे की सीटों की संख्या कम होने को लेकर पहले से ही अभिभावकों में नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में सीट निर्धारण में गड़बड़ी का मामला सामने आने से विवाद और बढ़ सकता है।

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महुआ बीनने के लिए जंगलों में लगाई जा रही आग, हर साल झुलस रही छत्तीसगढ़ की हरियाली

छत्तीसगढ़ में गर्मियों के दौरान जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं। ताजा मामला बलरामपुर जिले के लमना चोटिया गांव के पास का है, जहां बिलासपुर-अंबिकापुर मार्ग के आसपास पहाड़ियों पर महुआ के फूल बीनने के लिए जंगल में आग लगा दी गई। स्थानीय लोगों द्वारा सूखी पत्तियां जलाई जाती हैं ताकि जमीन पर गिरे महुआ के फूल साफ दिखाई दें और उन्हें आसानी से इकट्ठा किया जा सके। लेकिन इस प्रक्रिया से हर साल जंगलों को भारी नुकसान पहुंचता है। वन्यजीव और जैव विविधता पर खतरा वन विभाग और सैटेलाइट निगरानी के अनुसार, ऐसी आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं बल्कि छोटे जीव-जंतु, पक्षी और संपूर्ण जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरगुजा संभाग के कई पहाड़ी क्षेत्रों में हर वर्ष बड़े इलाके इस आग की चपेट में आ जाते हैं। मार्च से मई के बीच बढ़ते हैं मामले गर्मी के मौसम में, खासकर मार्च से मई के बीच जंगल की आग की घटनाएं सबसे ज्यादा सामने आती हैं। राज्य में हर साल औसतन 2000 से 2500 दावानल की घटनाएं दर्ज होती हैं, जिनमें अधिकांश आग मानव गतिविधियों के कारण लगती है। इस साल भी बढ़े फायर अलर्ट प्रदेश में इस वर्ष अब तक करीब 205 स्थानों पर जंगल में आग के अलर्ट दर्ज किए जा चुके हैं, जो आने वाले महीनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका को दर्शाते हैं।

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22,466 करोड़ का स्कूल शिक्षा बजट पास: पहली कक्षा से योग-वैदिक गणित, खेल पीरियड अनिवार्य, मार्कशीट डिजिटल

राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22,466 करोड़ रुपये का बजट पारित कर दिया है। विधानसभा में इसे ध्वनिमत से मंजूरी मिली। सरकार का कहना है कि यह बजट शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि अब सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से ही योग की पढ़ाई शुरू होगी और वैदिक गणित को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही हर स्कूल में अंतिम पीरियड खेल गतिविधियों के लिए अनिवार्य होगा। पीएम श्री योजना के तहत आधुनिक स्कूल पीएम श्री योजना के अंतर्गत स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसके लिए बजट में 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब, खेल सुविधाएं, ग्रीन कैंपस और करियर काउंसिलिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शिक्षकों को भी उच्च शिक्षण संस्थानों से प्रशिक्षण दिया जाएगा। 150 उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये स्कूल प्रत्येक ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में संचालित होंगे। नवा रायपुर में बनेगा प्रशासनिक भवन नवा रायपुर में शिक्षा विभाग का आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक तौर पर 5.90 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यहां लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा, संस्कृत विद्या मंडल, मदरसा बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे कार्यालय संचालित होंगे। दस्तावेज होंगे पूरी तरह डिजिटल छात्रों की मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक दस्तावेज पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी होगी, जिससे उसकी डिजिटल सत्यता तुरंत जांची जा सकेगी। तीसरी कक्षा की परीक्षा टैबलेट पर देशभर में बुनियादी साक्षरता और गणना क्षमता मापने के लिए तीसरी कक्षा के छात्रों की परीक्षा अब टैबलेट पर ली जाएगी। पहले यह परीक्षा ओएमआर शीट पर होती थी। यह सर्वे सीबीएसई द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें तकनीकी मार्गदर्शन एनसीईआरटी की इकाई परख दे रही है। इस अभियान में देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 776 जिलों के 10 हजार से अधिक स्कूल और एक लाख से ज्यादा छात्र शामिल होंगे। स्कूलों के लिए निर्देश जिन स्कूलों का चयन किया गया है, उन्हें सर्वे की निर्धारित तारीख पर विद्यालय खुला रखना और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। सर्वे टीम को प्रशासनिक और तकनीकी सहयोग भी देना होगा।

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दंगों के बाद बेघर 15 परिवार: 40 दिन से राहत शिविर में जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर संकट

छत्तीसगढ़ के खपरी दूधकईया गांव में 1 फरवरी की रात हुए हिंसक घटनाक्रम के बाद 15 परिवारों के 52 लोग पिछले 40 दिनों से घर से दूर शरण लेने को मजबूर हैं। ये सभी लोग फिलहाल बैजनाथपारा स्थित मुस्लिम हॉल में रह रहे हैं और राहत पर निर्भर जीवन जी रहे हैं। दंगों में इनके घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे बिजली-पानी की व्यवस्था खत्म हो गई और वापस लौटना संभव नहीं हो पा रहा है। सुरक्षा में रायपुर लाए गए घटना के बाद प्रशासन ने भारी सुरक्षा के बीच प्रभावित परिवारों को गांव से निकालकर रायपुर पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ रखने के लिए समाज के हॉल में ठहराया गया, जहां किराया नहीं लिया जा रहा है। मदद पर चल रही जिंदगी राहत शिविर में रह रहे परिवारों को भोजन, कपड़े और जरूरी सामान सामाजिक संगठनों व आम लोगों की मदद से मिल रहा है। अलग-अलग धर्म और समुदाय के लोग सहायता के लिए आगे आए हैं। फिर भी लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह मदद कब तक मिलेगी और वे अपने घर कब लौट पाएंगे। जीवनभर की कमाई खत्म प्रभावित लोगों का कहना है कि दंगों में उनकी जमा-पूंजी, जेवर और जरूरी सामान चोरी या नष्ट हो गया। कई परिवारों के आधार कार्ड और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी जल गए, जिससे पहचान और भविष्य दोनों संकट में पड़ गए हैं। उनका आरोप है कि अब तक मुआवजे को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। बच्चों की पढ़ाई ठप राहत शिविर में रह रहे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई है। कई छात्र-छात्राओं की वार्षिक परीक्षाएं छूट गईं क्योंकि उन्हें अचानक गांव छोड़ना पड़ा। किताबें, बैग और स्कूल ड्रेस जल जाने से वे पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं। बच्चों का कहना है कि पूरे साल की मेहनत बेकार हो गई और उन्हें नहीं पता कि वे अगली कक्षा में कैसे पहुंचेंगे। घर वापसी को लेकर अनिश्चितता हॉल में रह रही महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मानसिक तनाव में हैं। वे दिनभर एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हैं, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है।

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