Chhattisgarh

हाईकोर्ट वकील की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल: बिलासपुर में अधिवक्ताओं ने कलेक्टर-एसएसपी से की मुलाकात, स्पेशल जांच टीम की मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिजन और वकील साथी इसे संदिग्ध मृत्यु मान रहे हैं। सोमवार को अधिवक्ताओं ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की। वकीलों ने कहा कि राहुल अग्रवाल एक होनहार अधिवक्ता थे। घटना की रात करीब 1 बजे वे अपने सहयोगी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। कुछ घंटे बाद उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास खड़ी मिली, जबकि राहुल लापता थे। 22 घंटे बाद मिला शव, शरीर पर चोट के निशान करीब 22 घंटे बाद राहुल का शव अरपा नदी में मिला। शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए, जिससे यह मामला और अधिक संदिग्ध हो गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती — संभव है कि राहुल की मौत किसी अप्राकृतिक या आपराधिक कारण से हुई हो। निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों की पड़ताल की मांग अधिवक्ताओं ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात के दौरान कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्पेशल टीम गठित की जाए। उन्होंने मांग की कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और घटनास्थल से मिले सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच हो। वकीलों ने यह भी कहा कि जांच में लापरवाही से न केवल मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे। जानिए पूरा घटनाक्रम भाटापारा निवासी राहुल अग्रवाल (30) पिता सुरेश अग्रवाल, पिछले 7-8 साल से मंगला के ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। गुरुवार को वे रोज की तरह हाईकोर्ट में पेशी के बाद अपने दोस्तों मुकेश राठिया और अभिषेक आचार्य से मिले। तीनों ने पहले ट्रांसपोर्ट नगर में पार्टी की, फिर मुकेश के मोपका स्थित घर पहुंचे। देर रात तक सब साथ थे, लेकिन अगले दिन सुबह तक राहुल अपने घर नहीं लौटे। अगले दिन उनकी बाइक पुल के पास मिली और 22 घंटे बाद उनका शव नदी से बरामद किया गया। अब अधिवक्ताओं और परिवार का कहना है कि घटना के पीछे साजिश की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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रायपुर में ड्रिंक एंड ड्राइव का मामला: ब्रीथ एनालाइजर में 61 एमजी शराब, कोर्ट ने लगाया ₹60 हजार का जुर्माना

रायपुर। राजधानी रायपुर में देर रात नशे में डीजे वाहन चलाना एक चालक को महंगा पड़ गया। पुलिस की कार्रवाई में चालक की सांस की जांच के दौरान 61 एमजी शराब पाए जाने पर अदालत ने चालक और वाहन स्वामी दोनों पर कुल ₹60 हजार का जुर्माना लगाया है। घटना लाखे नगर चौक की है, जहां पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने एक माजदा डीजे वाहन को लहराते हुए चलते देखा। रोकने पर चालक की हालत संदिग्ध लगी, जिसके बाद ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया गया। रिपोर्ट में शराब की मात्रा कानूनी सीमा से कहीं अधिक पाई गई। वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन भी पाया गया पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि वाहन को बिना अनुमति मॉडिफाई किया गया था। डीजे सिस्टम को गाड़ी की बॉडी के बाहर वेल्डिंग से फिट किया गया था। इतना ही नहीं, वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण प्रमाणपत्र भी समाप्त हो चुका था। पुलिस ने चालक गोपीराम मनहरे और वाहन स्वामी बीना कौशिक के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने चालक पर ₹55 हजार और वाहन स्वामी पर ₹5 हजार का जुर्माना लगाया। पुलिस की चेतावनी रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे नशे में वाहन न चलाएं। पुलिस ने कहा कि शराब के नशे में गाड़ी चलाना सड़क हादसों का बड़ा कारण है। साथ ही, बिना अनुमति वाहन में तकनीकी बदलाव या असुरक्षित डीजे फिटिंग करवाना भी कानूनी अपराध है।

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रायपुर में आधी रात धरना: अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर शिक्षाकर्मियों के परिजन बैठे कलेक्ट्रेट के बाहर

रायपुर। राजधानी रायपुर में शनिवार देर रात अनुकंपा नियुक्ति संघ की महिलाएं कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरने पर बैठ गईं। यह प्रदर्शन रात करीब 11 बजे से शुरू हुआ और देर रात तक चलता रहा। धरने में शामिल महिलाएं उन दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिवार से हैं, जिनकी मृत्यु के बाद भी उनके परिजनों को अब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी गई है। धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद सभी पात्र परिजनों को जल्द अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। लेकिन सरकार बने महीनों बीत जाने के बावजूद अब तक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रदेश में लगभग 1200 दिवंगत शिक्षाकर्मियों के परिजन इस नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री से हुई थी मुलाकात अक्टूबर में अनुकंपा नियुक्ति संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिला था। उस दौरान मुख्यमंत्री ने जल्द प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। धरने पर बैठी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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अमित बघेल पर 5 हजार का इनाम घोषित: हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर कैविएट, रायपुर में लगातार छापेमारी

छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रमुख अमित बघेल की गिरफ्तारी के लिए रायपुर पुलिस ने 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया है। पुलिस लगातार उनके ठिकानों पर छापेमारी कर रही है और दावा किया है कि वह जल्द गिरफ्त में होंगे। बताया जा रहा है कि बघेल रायपुर में अपने परिचितों के घरों में छिपे हुए हैं ताकि गिरफ्तारी से बच सकें। इसी बीच पुलिस ने हाईकोर्ट में एक कैविएट याचिका दाखिल की है, ताकि अगर अमित बघेल अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करें, तो कोर्ट बिना सरकारी पक्ष को सुने कोई राहत न दे। 🔸 राजनीतिक बयानबाजी तेज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अब तक सरकार या किसी मंत्री की ओर से अमित बघेल की गिरफ्तारी पर कोई बयान नहीं आया है। इस पर बीजेपी विधायक अजय चंद्राकर ने पलटवार करते हुए कहा कि भूपेश बघेल क्षेत्रीयता का जहर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और अपना एजेंडा चला रहे हैं। 🔸 पुलिस रेड और जांच अभियान 9 अक्टूबर को पुलिस ने छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ता शिवेंद्र वर्मा (सड्डू) और अजय यादव (धरमनगर, टिकरापारा) के घर पर छापे मारे थे। पुलिस उनसे पूछताछ कर चुकी है। रायपुर सहित दुर्ग, धमतरी, इंदौर, नोएडा, प्रयागराज और महाराष्ट्र में भी पुलिस टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। ⚖️ मूर्ति विवाद से शुरू हुआ मामला 26 अक्टूबर को रायपुर के VIP चौक में छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति तोड़फोड़ की घटना हुई थी। आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, जिसने नशे की हालत में यह वारदात की थी। घटना के बाद छत्तीसगढ़ क्रांति सेना ने विरोध प्रदर्शन किया और अगले दिन उनके प्रमुख अमित बघेल ने विवादित बयान दिया। 27 अक्टूबर को बघेल ने अग्रसेन महाराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उनके बयान में कहा गया – “कौन है अग्रसेन महाराज, चोर या झूठा?” इस बयान के बाद अग्रवाल समाज और सिंधी समाज ने प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया। रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा में समाज के प्रतिनिधियों ने FIR दर्ज कराई। 🔸 समाजों का आक्रोश और बयान अग्रवाल समाज के केंद्रीय अध्यक्ष दाऊ अनुराग अग्रवाल ने कहा कि अग्रसेन महाराज का अपमान असहनीय है। उन्होंने बघेल से माफी की मांग की और समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के कई प्रतिष्ठान और संस्थान अग्रवाल परिवारों के सहयोग से बने हैं। सिंधी समाज के नेताओं ने भी बघेल के बयान पर नाराजगी जताई। रायपुर सिटी कोतवाली में FIR दर्ज की गई है। 🔸 हिंदुस्तानी भाऊ का रिएक्शन ‘बिग बॉस 13’ फेम हिंदुस्तानी भाऊ (विकास पाठक) ने भी वीडियो जारी कर बघेल के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा, “अमित बघेल जैसे लोग हिंदू धर्म की छवि खराब करते हैं। सिंधी समाज शांतिप्रिय है, उन्हें पाकिस्तान जाने की बात कहना शर्मनाक है।” 🕉️ छत्तीसगढ़ महतारी प्रतिमा की पृष्ठभूमि तेलीबांधा तालाब के पास स्थित छत्तीसगढ़ महतारी उद्यान में मुख्य प्रतिमा 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्थापित की थी। यह मातृत्व, गौरव और राज्य की संस्कृति का प्रतीक मानी जाती है। इस प्रतिमा से प्रेरित होकर राज्य के 33 जिलों में ऐसी ही मूर्तियां लगाने की घोषणा की गई थी।

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मैनपाट में पारा 4 डिग्री पर पहुंचा: ओस की बूंदें बनीं बर्फ, छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों में शीतलहर का असर

छत्तीसगढ़ में ठंड ने दस्तक दे दी है। मैनपाट में तापमान घटकर 4°C तक पहुंच गया, जहां घास पर जमी ओस की बूंदें बर्फ में तब्दील हो गई हैं। राज्य के उत्तरी हिस्सों — पेंड्रा और अंबिकापुर में भी लोगों को सुबह-शाम अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। मैदानी इलाकों में दुर्ग सबसे ठंडा रहा, जहां रात का तापमान सामान्य से करीब 7 डिग्री कम होकर 10.2°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले पांच दिनों तक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा और मौसम शुष्क रहेगा। राज्य में अधिकतम तापमान 30.8°C (दुर्ग) और न्यूनतम 8.6°C (अंबिकापुर) रिकॉर्ड किया गया। 🌫️ मलेरिया का खतरा बढ़ा, डॉक्टरों ने दी चेतावनी मौसम विशेषज्ञों ने कहा कि तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण मलेरिया का खतरा बढ़ गया है। मेडिकल एक्सपर्ट डॉ. विकास अग्रवाल (एमडी, मेडिसिन) ने बताया कि ऐसे मौसम में मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जिससे संक्रमण की संभावना अधिक रहती है। डॉक्टरों ने लोगों को सलाह दी है कि शाम के बाद घर के आसपास मच्छरदानी, कॉइल या लिक्विड का उपयोग करें और पानी जमा न होने दें। बच्चों और बुजुर्गों को पूरी बांह के कपड़े पहनने चाहिए। सावधानी के उपाय: 🌾 किसानों और आम जनता के लिए मौसम संकेत 🦟 मलेरिया संक्रमण का बढ़ता खतरा मौसम विभाग की हेल्थ एडवाइजरी के मुताबिक, 7 से 11 नवंबर के बीच भारत के कई राज्यों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ है।छत्तीसगढ़ में भी तापमान 14–19°C (रात) और 33–39°C (दिन) के बीच बना हुआ है — जो मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल परिस्थिति है। राज्य में Plasmodium Vivax प्रकार के मलेरिया के बढ़ने की संभावना अधिक बताई गई है। ग्रामीण और जंगल क्षेत्रों में यह खतरा ज्यादा है। 🌧️ बारिश का रिकॉर्ड इस साल अक्टूबर में छत्तीसगढ़ में औसत से 59% अधिक बारिश दर्ज की गई।1 से 26 अक्टूबर के बीच 89.4 मिमी वर्षा हुई है, जबकि सामान्य औसत इससे काफी कम होता है।

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दिल्ली ब्लास्ट के बाद छत्तीसगढ़ में हाई अलर्ट: एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर बढ़ाई गई सुरक्षा

दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राजधानी रायपुर सहित सभी जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल, होटल और धार्मिक स्थलों पर जांच अभियान चलाया है। रायपुर में एसएसपी लखन पटले ने बताया कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक मॉनिटरिंग तेज कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या गलत सूचना को फैलने से रोका जा सके। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिल्ली धमाके की घटना पर शोक जताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार को जवाब देना होगा और जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। सुरक्षा एजेंसियों को कंट्रोल रूम और कमांड सेंटर के माध्यम से रीयल-टाइम निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सभी जिलों के एसपी और डीसीपी को अपने-अपने क्षेत्रों में फुट पेट्रोलिंग और चेकिंग बढ़ाने को कहा गया है। बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई और जगदलपुर में भी पुलिस ने देर रात तक सघन जांच अभियान चलाया। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, टैक्सी स्टैंड और बाजारों में सर्च ऑपरेशन किया गया। वाहनों की नाकेबंदी कर जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है और यह अभियान फिलहाल जारी रहेगा।

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बिलासपुर में कोचिंग स्टाफ की गुंडागर्दी: ट्यूटर को बीच सड़क पर पीटा, पत्नी बच्चे को लेकर बचाने की करती रही कोशिश — वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक ट्यूटर और उसकी पत्नी के साथ आचार्य इंस्टीट्यूट के स्टाफ द्वारा सरेआम मारपीट करने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। विवाद का कारण सिर्फ इतना था कि ट्यूटर ने कोचिंग सेंटर के सामने पम्पलेट बांटे, जिससे नाराज होकर इंस्टीट्यूट के दो स्टाफ ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। पम्पलेट बांटने पर शुरू हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, क्रांति नगर निवासी अभय अग्रवाल अपनी पत्नी सेफाली कला मौर्य के साथ बच्चों को घर पर कोचिंग पढ़ाते हैं। 6 नवंबर को दोनों अपने दो साल के बच्चे को साथ लेकर सीएमडी कॉलेज के पास अपनी कोचिंग का प्रचार करने पहुंचे थे। जब वे आचार्य इंस्टीट्यूट के सामने पम्पलेट बांट रहे थे, तभी वहां मौजूद दो टीचर — आदिल और सर्वेश — उनसे बहस करने लगे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने ट्यूटर को गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। पत्नी अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर पति को बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक न सुनी। FIR दर्ज, पुलिस ने शुरू की जांच पीड़ित ट्यूटर अभय अग्रवाल ने इस मामले की शिकायत तारबाहर थाने में दर्ज कराई है। टीआई कृष्णचंद सिदार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मारपीट और धमकी देने का केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब दोनों की तलाश में जुटी है। वायरल वीडियो में दिखी हिंसा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दोनों आरोपी शिक्षक ट्यूटर को गाली-गलौज करते हुए थप्पड़ और मुक्के मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान अभय की पत्नी बच्चे को लेकर बीच-बचाव करती दिखती है, जबकि आरोपी स्टाफ उसे भी धमकाते हैं। कोचिंग सेंटर्स की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से उपजा विवाद शहर में दर्जनों कोचिंग सेंटर्स एक-दूसरे से छात्रों को आकर्षित करने की होड़ में लगे हुए हैं। मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार को लेकर कई बार कोचिंग संचालकों के बीच टकराव की स्थिति बनती रहती है। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे भी यही प्रतिस्पर्धा एक बड़ी वजह है। वहीं, शहर में कोचिंग संस्थानों के संचालन को लेकर प्रशासन की कोई ठोस निगरानी नहीं है, जिसके कारण ऐसे विवाद लगातार सामने आ रहे हैं।

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त्योहार बीते, भीड़ नहीं घटी: रायपुर से वाराणसी-हावड़ा तक की ट्रेनों में दिसंबर तक ‘नो रूम’

दीपावली और छठ जैसे प्रमुख त्यौहार खत्म हो चुके हैं, लेकिन ट्रेनों में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही। रायपुर से उत्तर भारत की ओर जाने वाली अधिकतर ट्रेनों में अब भी यात्रियों की भारी भीड़ है। वाराणसी, प्रयागराज और हावड़ा रूट की ट्रेनों में 6 दिसंबर तक “नो रूम” या लंबी वेटिंग लिस्ट दिखाई दे रही है। रेलवे की वेबसाइट पर लगभग हर ट्रेन में सीटें फुल हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं, दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर और दरभंगा जाने वाली एक्सप्रेस व सुपरफास्ट ट्रेनों की स्थिति भी इसी तरह की है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि त्यौहार खत्म होने के बाद भी बड़ी संख्या में छात्र, कामकाजी लोग और परिवार अपने गृहनगरों से लौट रहे हैं, जिसके कारण ट्रेनों में भीड़ बरकरार है। रायपुर स्टेशन से हर दिन 70 हजार से ज्यादा यात्री रायपुर रेलवे स्टेशन से रोजाना लगभग 70 हजार यात्री यात्रा करते हैं, जबकि त्योहारी सीजन या गर्मियों की छुट्टियों में यह संख्या एक लाख के करीब पहुंच जाती है। छत्तीसगढ़ में उत्तर भारत के लोगों की बड़ी आबादी होने के कारण इस दिशा की ट्रेनों में हमेशा दबाव बना रहता है। त्योहारी सीजन में लगभग सभी ट्रेनें एडवांस बुकिंग में फुल हो जाती हैं। जिन यात्रियों को टिकट नहीं मिल पा रही, वे बसों को विकल्प के रूप में चुन रहे हैं। बस ऑपरेटरों के मुताबिक, रायपुर से उत्तर प्रदेश के लिए दो वैध रूट पर बसें संचालित की जा रही हैं। ट्रेनों के फुल रहने के कारण इन बस रूटों में भी अब यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। तत्काल टिकट भी सेकेंडों में हो रही बुक रेलवे की ओर से हावड़ा और उत्तर प्रदेश रूट की ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाए जा रहे हैं, लेकिन यह कदम भी भीड़ को कम करने में पर्याप्त साबित नहीं हो रहा। यात्रियों के पास अब केवल तत्काल टिकट ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि, तत्काल कोटे में सीमित सीटें होती हैं, जो कुछ ही सेकेंडों में बुक हो जाती हैं। इसके कारण आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलना लगभग असंभव हो गया है।

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राज्य में आबकारी नीति में बदलाव की तैयारी, फिर लौट सकती है ठेका पद्धति

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की मौजूदा शराब नीति में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार एक बार फिर से ठेका पद्धति (Liquor Contract System) लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। आबकारी विभाग ने इसका प्रारंभिक मसौदा तैयार कर लिया है, जिस पर जल्द ही राज्य सरकार के स्तर पर चर्चा होगी। सहमति बनने के बाद यह प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया जाएगा। दरअसल, आबकारी विभाग पिछले वित्त वर्ष में अपने निर्धारित राजस्व लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाया था। वित्त वर्ष 2024-25 में शराब से 11 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था, जबकि वास्तविक आय इससे करीब 3 हजार करोड़ रुपये कम रही। बावजूद इसके, सरकार ने इस साल राजस्व लक्ष्य बढ़ाकर 12,500 करोड़ रुपये तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब सरकार शराब नीति में बदलाव को आवश्यक मान रही है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति को और पारदर्शी व व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए पिछले महीने आबकारी सचिव एवं आयुक्त आर. संगीता की अध्यक्षता में उद्योग प्रतिनिधियों और लाइसेंस धारकों की बैठक भी हो चुकी है। 2017 से लागू है सरकारी बिक्री व्यवस्था राज्य में शराब की सरकारी बिक्री प्रणाली वर्ष 2017 में डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इसके बाद भूपेश बघेल सरकार ने भी इस प्रणाली को जारी रखा और आबकारी शुल्क हटाकर अवैध बिक्री पर रोक लगाने की कोशिश की थी। साथ ही होम डिलीवरी एप भी शुरू किया गया था। वर्तमान सरकार ने भी इसी व्यवस्था को जारी रखा, लेकिन पिछले वर्षों में अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो सका। अब ठेका पद्धति को फिर से लागू करने के पीछे सरकार का मकसद राजस्व बढ़ाना और अवैध बिक्री पर नियंत्रण पाना है। ठेका पद्धति से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा जानकारों का मानना है कि ठेका पद्धति लागू होने से शराब बिक्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे सरकार को ज्यादा लाइसेंस शुल्क मिलेगा और अवैध शराब कारोबार पर अंकुश लगेगा। अभी तक कई प्रयासों के बावजूद राज्य में मध्य प्रदेश से आने वाली अवैध शराब पर रोक नहीं लग पाई है। व्यापारियों से लिए गए सुझाव नई नीति तैयार करने से पहले आबकारी विभाग ने बॉटलिंग यूनिट्स, उत्पादन कंपनियों, बार और क्लब संचालकों सहित सभी हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। इनमें लाइसेंस शुल्क, काउंटरवेलिंग ड्यूटी, बॉटलिंग फीस, आयात-निर्यात टैक्स, गोदाम संचालन, और ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं। विभाग का कहना है कि सभी सुझावों को अंतिम नीति में ध्यान में रखा जाएगा ताकि नई आबकारी नीति पारदर्शी, संतुलित और राजस्व बढ़ाने वाली साबित हो सके।

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रायपुर में 10 करोड़ की चौपाटी पर बुलडोजर की तैयारी: डेढ़ साल में ही तुड़वाने का फैसला, नालंदा-2 प्रोजेक्ट के लिए रास्ता साफ

रायपुर।राजधानी रायपुर की चर्चित साइंस कॉलेज चौपाटी, जिस पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे, अब तोड़ने की तैयारी शुरू हो चुकी है। डेढ़ साल पहले बनी यह चौपाटी जल्द ही जमींदोज हो जाएगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर निगम को पत्र भेजकर चौपाटी को 15 नवंबर तक हटाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि चौपाटी को हटाकर नालंदा-2 प्रोजेक्ट को यहां शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का टेंडर पूरा हो चुका है और अब कंपनी को अनुबंध सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। 10 करोड़ की लागत से बनी थी आधुनिक चौपाटी रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 2023 में साइंस कॉलेज मैदान के सामने 60 दुकानों वाली चौपाटी तैयार की थी। उद्देश्य था कि इसे “यूथ हब” के रूप में विकसित किया जाए, जहां युवाओं को रोजगार और मनोरंजन दोनों के अवसर मिलें। निर्माण पूरा होने के बाद इसे रायपुर के एक होटल कारोबारी को ठेके पर सौंपा गया, जिन्होंने आगे दुकानों को अलग-अलग लोगों को बेच दिया। वर्तमान में चौपाटी पर कारोबार सुचारू रूप से चल रहा था और पार्किंग व्यवस्था भी सुव्यवस्थित थी। लेकिन अब नगर निगम ने व्यापारी और दुकानदारों को ब्रिज के नीचे वैकल्पिक जगह देने का प्रस्ताव रखा है। सवालों के घेरे में सरकार का फैसला अब यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चलती चौपाटी को इतनी जल्दी तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?क्या इसे इसलिए हटाया जा रहा है क्योंकि यह कांग्रेस शासनकाल में बनी थी?जब आसपास ही खाली जमीन मौजूद है, तो नालंदा-2 के लिए यही जगह क्यों चुनी गई?अगर निर्माण या आवंटन प्रक्रिया में गड़बड़ी थी, तो जांच होनी चाहिए, न कि करोड़ों की संरचना को तोड़ा जाना चाहिए — ऐसे तर्क भी सामने आ रहे हैं। कैसे बनी चौपाटी विवाद का कारण साइंस कॉलेज चौपाटी का निर्माण कांग्रेस शासनकाल में हुआ था। उस समय नगर निगम में कांग्रेस का महापौर था और राज्य में भी कांग्रेस की सरकार थी।पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने चौपाटी के विरोध में 14 दिन तक धरना दिया था, उनका आरोप था कि “यूथ हब” के नाम पर इसे व्यावसायिक केंद्र बना दिया गया है।हालांकि तब रायपुर स्मार्ट सिटी ने निर्माण नहीं रोका और चौपाटी पूरी हुई। भाजपा सरकार में चौपाटी तोड़ने की तैयारी 2023 में भाजपा सरकार के आने के बाद रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक राजेश मूणत ने इस चौपाटी को हटाने का प्रस्ताव रखा।दोनों नेताओं ने दावा किया कि चौपाटी के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ रही हैं और यह “यूथ हब” के मूल उद्देश्य से भटक चुकी है। इसके बाद नालंदा-2 प्रोजेक्ट की रूपरेखा बनी, जिसे सूडा (SUDA) के तहत मंजूरी दी गई। अब इस प्रोजेक्ट का टेंडर फाइनल हो चुका है और कंपनी चयन की प्रक्रिया पूरी हो रही है। राजेश मूणत का बयान पूर्व लोक निर्माण मंत्री और विधायक राजेश मूणत ने कहा — “चौपाटी का निर्माण नियमों के विरुद्ध हुआ था। यूथ हब के नाम पर व्यावसायिक काम शुरू कर दिए गए। अफसरों की लापरवाही से जनता का पैसा बर्बाद हुआ, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।” मूणत ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार कांग्रेस शासन की गलतियों को सुधारना चाहती है और क्षेत्र को फिर से शैक्षणिक जोन के रूप में बहाल करेगी। जनता के बीच विरोध और समर्थन दोनों जहां कुछ लोग चौपाटी हटाने के फैसले को राजनीतिक बदले की भावना बता रहे हैं, वहीं अन्य लोग इसे शहर की योजनाबद्ध पुनर्विकास की प्रक्रिया कह रहे हैं।फिलहाल, रायपुर की 10 करोड़ की चौपाटी अब राजनीतिक और प्रशासनिक tug-of-war का केंद्र बन चुकी है।

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