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दुर्ग में पत्नी की जलाकर हत्या: 12 साल पुराने केस में पति को उम्रकैद, कोर्ट ने मौत की सजा से किया इनकार

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पत्नी को जिंदा जलाने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। नेवई थाना क्षेत्र के इस 12 साल पुराने प्रकरण में सत्र न्यायालय ने आरोपी पति को आजीवन कारावास की सजा दी है। हालांकि, अदालत ने इसे “विरल से विरलतम” अपराध की श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया। घरेलू विवाद बना हत्या की वजह अभियोजन पक्ष के मुताबिक यह घटना 15 जनवरी 2012 की रात की है। नेवई के मिनीमाता पारा निवासी ममता (25) अपने पति घांसू उर्फ झांसूराम के साथ रहती थी। आरोपी अपनी पहली पत्नी सुमन का पक्ष लेता था, जिससे पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। घटना की रात करीब 9:30 बजे आरोपी शराब के नशे में घर पहुंचा और ममता से गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद उसने जान से मारने की धमकी देते हुए एक प्लास्टिक बोतल में रखा मिट्टी का तेल ममता पर डाल दिया। आग लगाने के बाद भी नहीं रुका आरोपी अभियोजन के अनुसार, भय और तनाव की स्थिति में ममता ने खुद को आग लगा ली। इसके बावजूद आरोपी नहीं रुका और उसने जलती हुई पत्नी पर दोबारा केरोसिन डाल दिया, जिससे आग और तेज हो गई। ममता गंभीर रूप से झुलस गई। उसकी चीखें सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। मरणासन्न बयान में पति पर लगाए आरोप घटना की जानकारी नेवई थाना को रात 9:40 बजे मिली, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ममता को दुर्ग के शासकीय अस्पताल के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। अगले दिन कार्यपालिक मजिस्ट्रेट डी.आर. मरकाम ने ममता का मरणासन्न कथन दर्ज किया। अपने बयान में ममता ने साफ कहा कि उसके पति ने जान से मारने की नीयत से उस पर मिट्टी का तेल डाला और आग लगने के बाद भी केरोसिन डालता रहा। इलाज के दौरान मौत, हत्या में बदला केस पहले पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन 22 जनवरी 2012 को इलाज के दौरान ममता की मौत हो गई। इसके बाद केस को धारा 302 (हत्या) में बदल दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल से जले कपड़े, जली साड़ी और मिट्टी तेल की बोतल जब्त की। 12 साल फरार रहा आरोपी, 2024 में गिरफ्तारी घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। वर्ष 2014 में अदालत ने उसे फरार घोषित करते हुए स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किया। करीब 12 साल बाद, 17 नवंबर 2024 को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। कोर्ट का निर्णय सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने गवाहों, साक्ष्यों और मरणासन्न बयान के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने कहा कि अपराध बेहद गंभीर है, लेकिन इसे विरल से विरलतम श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपी घांसू उर्फ झांसूराम को आजीवन कारावास, ₹1000 का अर्थदंड और अर्थदंड नहीं देने पर 6 माह अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

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सुबह पुलिस की रेड, शाम को फिर नशे का कारोबार: 10 रुपये में बिक रहा गोगो पेपर, चिलम भी आसानी से उपलब्ध

राजधानी रायपुर में नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर के सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट जोन के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में पुलिस की छापेमारी जारी है। अवैध शराब, गांजा, ड्रग्स और नशीली दवाइयों के तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे का सामान खुलेआम बिकता नजर आ रहा है। कई इलाकों में नशीले पदार्थ सरेआम बेचे जा रहे हैं, जबकि कुछ जगहों पर चोरी-छिपे पुड़िया बनाकर सप्लाई की जा रही है। तस्कर पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए अब होम डिलीवरी जैसे तरीकों का भी सहारा ले रहे हैं। कई इलाकों में आसानी से मिला गोगो पेपर पुलिस की सख्ती के बीच शाम के समय राजातालाब, सड्डू, डंगनिया, टिकरापारा और रायपुरा क्षेत्रों में नशे से जुड़ा सामान खरीदने की कोशिश की गई, जहां गोगो पेपर आसानी से उपलब्ध मिला। इसका इस्तेमाल गांजा पीने के साथ-साथ अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में भी किया जा रहा है। बाजार में गोगो पेपर 10 से 25 रुपये तक में बेचा जा रहा है। पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ी कीमतें पुलिस की लगातार कार्रवाई के चलते पहले 10 रुपये में मिलने वाला गोगो पेपर अब 25 से 30 रुपये में बिकने लगा है। पहले पान ठेलों और दुकानों में गांजा लपेटकर गोगो दिया जाता था, लेकिन अब कार्रवाई के डर से केवल पेपर ही बेचा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, गोगो बेचने वालों को पुलिस की रेड की जानकारी पहले ही मिल जाती है। पुलिस के पहुंचते ही दुकानें बंद कर दी जाती हैं और कार्रवाई खत्म होते ही फिर से खोल दी जाती हैं। चिलम और हुक्का सामान भी खुलेआम गोगो पेपर के अलावा कुम्हारों के पास आज भी मिट्टी की चिलम आसानी से मिल रही है। वहीं गोलबाजार क्षेत्र में चीनी मिट्टी और प्लास्टिक की चिलम भी खुलेआम बिक रही है। प्रतिबंध के बावजूद हुक्का का सामान और फ्लेवर भी कई दुकानों पर उपलब्ध है। रायपुर नॉर्थ जोन में बड़ी कार्रवाई, 9 दुकानें सील पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद रायपुर में नशे के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। बुधवार सुबह रायपुर नॉर्थ जोन में पुलिस ने एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान 9 दुकानों और पान ठेलों से गांजा सेवन में उपयोग होने वाला गोगो पेपर और हुक्का सामग्री बरामद की गई। पुलिस ने करीब 2 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त कर संबंधित दुकानों को सील कर दिया है। उरला-बीर्गांव और अन्य इलाकों में भी छापेमारी इसी तरह उरला-बीर्गांव क्षेत्र में पुलिस ने चार पान ठेलों और दुकानों पर कार्रवाई करते हुए गोगो पेपर जब्त किया। दुकानों को सील कर संचालकों पर कोटपा एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। खमतराई, उरला समेत अन्य इलाकों में भी कार्रवाई जारी है। पुलिस का कहना है कि गोगो पेपर के जरिए गांजा सेवन और तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है। नशेड़ी इसमें बीड़ी की तरह गांजा लपेटकर कश लगाते हैं। इसी वजह से पुलिस इस पर सख्ती से रोक लगाने में जुटी है।

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मजदूरों का आरोप: ठेकेदार ने बंधक बनाकर की मारपीट, 3.85 लाख की मजदूरी हड़पी; गोली मारने की धमकी, हिसाब की डायरी जलाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के चेटवा गांव में राजस्थान से कपास तोड़ने आए मजदूरों के साथ गंभीर उत्पीड़न का मामला सामने आया है। मजदूरों ने आरोप लगाया है कि ठेकेदारों ने उन्हें खेत में बंधक बनाकर रखा, बेरहमी से पीटा और उनकी पूरी मजदूरी देने से इनकार कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें गोली मारने की धमकी दी गई और काम का पूरा लेखा-जोखा रखने वाली डायरी भी जला दी गई। मामला कुम्हारी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। राजस्थान के अलवर जिले से करीब 15 मजदूर—जिनमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं—करीब दो महीने पहले दुर्ग जिले में कपास तोड़ने के लिए लाए गए थे। मजदूरों के अनुसार, नरेश नामक व्यक्ति ने उन्हें रोजगार दिलाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद उन्हें जोगेंद्र और उसके भाई गोरा मलिक के खेत में काम पर लगाया गया। मजदूरों का कहना है कि कपास तोड़ने का सौदा 10 रुपए प्रति किलो तय हुआ था, यानी 100 किलो पर 1000 रुपए मजदूरी तय की गई थी। मजदूर राजकुमार के मुताबिक, तीन महीने की मेहनत के बाद कुल मजदूरी करीब 4 लाख 35 हजार रुपए बनती है। हालांकि, 9 जनवरी को ठेकेदार ने सिर्फ 50 हजार रुपए दिए, जबकि 3 लाख 85 हजार रुपए अब भी बकाया हैं। आरोप है कि जब मजदूरों ने अपनी मजदूरी की मांग की, तो ठेकेदार जोगेंद्र और गोरा मलिक ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। मजदूरों का दावा है कि 22 जनवरी को ठेकेदारों ने वह डायरी जला दी, जिसमें पूरे काम का हिसाब लिखा हुआ था। इसी दिन कई मजदूरों के साथ मारपीट भी की गई। मजदूरों का कहना है कि करीब 10 मजदूरों और 2 बच्चों को खेत में जबरन रोककर रखा गया और किसी को बाहर जाने नहीं दिया जा रहा था। डर के कारण कुछ मजदूर किसी तरह वहां से भागे और कुम्हारी थाने पहुंचे। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी मदद करने के बजाय ठेकेदारों का पक्ष लिया और पुलिस की मौजूदगी में भी उन्हें धमकाया गया। मजदूरों के अनुसार, जान के खतरे को देखते हुए वे देर रात करीब 3 बजे खेत से निकलकर चरोदा स्थित एक मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने रात गुजारी। मजदूरों ने घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी बनाए हैं, जिनमें बातचीत रिकॉर्ड है, हालांकि वीडियो में चेहरे साफ नजर नहीं आ रहे हैं। 24 जनवरी को मजदूर भिलाई-3 स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की लिखित शिकायत सौंपी। दूसरी ओर, ठेकेदार जोगेंद्र ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उसका कहना है कि मजदूरों से उसका कोई विवाद नहीं है और पूरे मामले की जानकारी पुलिस ही दे सकती है। इस मामले में सीएसपी प्रशांत कुमार ने बताया कि मजदूरों को बातचीत के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे सामने नहीं आए। ठेकेदार के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस ने मजदूरों को भगाने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि दोनों पक्षों को दोबारा बुलाकर मामले का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।

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भिलाई में हिट एंड रन: तेज रफ्तार अज्ञात सफेद कार की टक्कर से महिला की मौत, पुलिस सीसीटीवी खंगालने में जुटी

दुर्ग जिले के भिलाई शहर में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। सुपेला थाना क्षेत्र में अज्ञात सफेद कार की टक्कर से बाइक सवार महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने हिट एंड रन का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना 22 जनवरी की सुबह करीब 8:15 बजे की है। नेहरू नगर अग्रसेन चौक स्थित कल्याण ज्वेलर्स के सामने एक तेज रफ्तार सफेद कार ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में भिलाई निवासी मोहना मेश्राम (52 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गईं। वे अपने भाई मुकेश कुमार गजभिये के साथ बाइक क्रमांक CG 07 AG 4135 से नेहरू नगर की ओर जा रही थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अज्ञात कार चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए बाइक को टक्कर मारी और हादसे के बाद मौके से फरार हो गया। टक्कर इतनी तेज थी कि मोहना मेश्राम के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल स्पर्श अस्पताल, सुपेला ले जाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक होने के कारण निगरानी में रखा गया। इलाज के दौरान 23 जनवरी की सुबह करीब 8 बजे मोहना मेश्राम ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद सुपेला थाना पुलिस ने मर्ग क्रमांक 09/2026 धारा 194 बीएनएसएस के तहत जांच शुरू की। मर्ग जांच के दौरान मृतिका के परिजनों और पंचों—मुकेश कुमार, विवेक कुमार मेश्राम, नितेश ताण्डी, अमित खोब्रागढ़े और जयंत खोब्रागढ़े—के बयान दर्ज किए गए। जांच में सभी ने पुष्टि की कि हादसा अज्ञात सफेद कार से हुआ था। मर्ग जांच पूर्ण होने के बाद पुलिस ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ धारा 106 (1) बीएनएस एवं 184 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर आरोपी चालक की तलाश में जुटी हुई है।

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सड़क सुरक्षा माह में मंत्री की बिना हेलमेट बाइक सवारी, सोशल मीडिया पर उठा सवाल—क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए?

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में इन दिनों सड़क सुरक्षा माह के तहत ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर सख्ती बरती जा रही है। पुलिस और प्रशासन लगातार अभियान चलाकर आम लोगों को हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दे रहे हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसने पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, शुक्रवार को मंत्री गजेंद्र यादव बिना हेलमेट बाइक चलाते नजर आए। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने खुद इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो में न केवल मंत्री, बल्कि उनके साथ चल रहे अन्य लोग भी बिना हेलमेट दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब जिले में बिना हेलमेट वाहन चलाने पर आम नागरिकों के चालान काटे जा रहे हैं और पेट्रोल पंपों पर भी बिना हेलमेट दोपहिया चालकों को ईंधन नहीं दिया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। यूजर्स ने सवाल उठाया कि जब आम जनता पर ट्रैफिक नियम सख्ती से लागू किए जा रहे हैं, तो मंत्री और जनप्रतिनिधि इन नियमों से ऊपर कैसे हो सकते हैं। कई यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा कि हेलमेट पहनेंगे तो “बाहुबली का मुखड़ा” कैसे दिखेगा। वहीं, कुछ ने यह भी पूछा कि क्या अब मंत्री का चालान होगा या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए ही है। दुर्ग पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। जहां आम लोगों के चालान तुरंत काटे जा रहे हैं, वहीं मंत्री के मामले में पुलिस की चुप्पी लोगों को खटक रही है। वीडियो ने यह बहस छेड़ दी है कि सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर उदाहरण पेश करने की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की भी होती है। अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में कार्रवाई होगी या सड़क सुरक्षा के नियम एक बार फिर दोहरे मापदंड का शिकार बनेंगे।

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भिलाई सिसकोल प्लांट में क्रेन हादसा, मजदूर की मौत

दुर्ग जिले के भिलाई में शनिवार सुबह सिसकोल कंपनी के प्लांट में एक दुखद हादसा सामने आया। हथखोज औद्योगिक क्षेत्र में क्रेन ऑपरेशन के दौरान भारी लोहे का प्लेट मजदूर के ऊपर गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान 35 वर्षीय लेखूराम कौशल के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, लेखूराम कौशल अपनी नियमित ड्यूटी पर कार्यरत थे और ओवरहेड क्रेन की मदद से भारी लोहे के प्लेट को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर कर रहे थे। हादसे के समय वह क्रेन खुद ही ऑपरेट कर रहे थे। अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण प्लेट स्लिप हो गए और सीधे उनके ऊपर गिर पड़े। प्लेट का अत्यधिक वजन होने के कारण लेखूराम को गंभीर चोटें आईं और वह घटनास्थल पर ही जीवन की जंग हार गए। हादसे की सूचना मिलते ही भिलाई-3 थाना और पुरानी भिलाई पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटना स्थल का मुआयना किया और वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ कर हादसे के कारणों का पता लगाने की कोशिश की। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही या तकनीकी खामी के कारण यह दुर्घटना हुई। प्लांट में अचानक हुई यह घटना अफरा-तफरी का कारण बनी। कर्मचारी हादसे से सदमे में हैं और पूरे प्लांट में शोक का माहौल है। पुलिस और कंपनी प्रशासन मिलकर मामले की पूरी जांच कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों। अधिकारियों ने सभी कर्मचारियों को सुरक्षा नियमों का पालन करने और क्रेन संचालन के दौरान अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी है।

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होटल में जबरन घुसी पुलिस, हाईकोर्ट ने ठोका ₹1 लाख का जुर्माना; बिना FIR होटल मालिक को भेजा था जेल

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस की कथित मनमानी पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। एक होटल में बिना अनुमति घुसकर कार्रवाई करने, होटल संचालक से मारपीट करने और बिना एफआईआर के जेल भेजने के मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए राज्य सरकार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही अदालत ने सरकार को यह छूट दी है कि जांच के बाद दोषी पुलिस अधिकारियों के वेतन से यह राशि वसूल की जा सकती है। होटल में ठहरे थे आधार कार्ड देकर मेहमान मामला कोहका इलाके में संचालित एक होटल से जुड़ा है। होटल में ठहरे लोगों ने वैध पहचान दस्तावेज (आधार कार्ड) जमा किए थे। इसके बावजूद पुलिस ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के होटल में घुसकर कमरों की तलाशी ली और महिला-पुरुष को बाहर निकाल दिया। होटल संचालक ने हाईकोर्ट में दी चुनौती होटल संचालक आकाश कुमार साहू (30), जो भिलाई के अवंतीबाई चौक के निवासी और लॉ स्टूडेंट हैं, ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया कि वह विधिवत लाइसेंस लेकर होटल का संचालन कर रहे हैं और यही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार में आता है। 8 सितंबर 2025 को हुई थी पूरी घटना याचिकाकर्ता के अनुसार, 8 सितंबर 2025 को पुलिस अधिकारी होटल पहुंचे और गुमशुदा लड़की की तलाश के नाम पर रजिस्टर और पहचान पत्रों की जांच की। इसके बाद बिना महिला पुलिस की मौजूदगी एक कमरे में जबरन घुस गए, जहां महिला और पुरुष ठहरे हुए थे। मैनेजर के साथ बदसलूकी की गई और धमकाकर पुलिस वहां से चली गई। कुछ देर बाद पुलिस फिर होटल पहुंची और कर्मचारियों पर सोने के गहनों की चोरी का झूठा आरोप लगाया। जब कर्मचारियों ने CCTV कैमरे दिखाने की बात कही, तो पुलिस जांच के बजाय कमरों की तलाशी लेने लगी। मैनेजर की पिटाई, मालिक को बिना FIR किया गिरफ्तार आरोप है कि पुलिस ने होटल मैनेजर की बेरहमी से पिटाई की। इसके बाद होटल मालिक आकाश साहू को बुलाया गया। खुद को संचालक बताने पर पुलिस अफसर भड़क गए और गाली-गलौज करते हुए मारपीट की। बिना किसी वैध कारण और बिना एफआईआर दर्ज किए आकाश साहू को हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया और बाद में जेल भेज दिया गया। पुलिस का दावा: सरकारी काम में डाली बाधा पुलिस का पक्ष था कि वे गुमशुदा लड़की की तलाश में होटल गए थे। उनका दावा था कि होटल संचालक ने सरकारी काम में बाधा डाली, पुलिस वाहन की चाबी छीनी और ड्राइवर से हाथापाई की, जिससे कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका थी। इसी आधार पर बीएनएस की धारा 170 के तहत हिरासत में लिया गया। हाईकोर्ट का सख्त रुख मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि: अदालत ने कहा कि ऐसी कार्रवाई मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाती है और यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। एसडीएम की भूमिका पर भी सवाल हाईकोर्ट ने इस मामले में एसडीएम की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। कहा कि मजिस्ट्रेट को न्यायिक प्रहरी की भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बिना सोच-विचार किए पुलिस की रिपोर्ट पर मुहर लगाकर युवक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सभी आपराधिक कार्रवाई रद्द हाईकोर्ट ने: हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस की अवैध कार्रवाई और गैरकानूनी रिमांड से आपराधिक न्याय प्रणाली पर जनता का भरोसा कमजोर होता है। अदालत ने गृह विभाग के सचिव को निर्देश दिए कि पुलिस बल को मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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दुर्ग में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने खुद को किया आग के हवाले, 95% झुलसी; कोर्ट के आदेश पर खाली कराया जा रहा था मकान

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दर्दनाक घटना सामने आई है। गुरुवार को महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने पुलिस और कोर्ट स्टाफ के सामने खुद पर केरोसिन डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की, जिसमें वह गंभीर रूप से झुलस गई। पीड़िता को इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की घटना यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के पचरीपारा इलाके का है। पीड़िता की पहचान शबाना निशा उर्फ रानी (37 वर्ष) के रूप में हुई है, जो यहां एक किराए के मकान में रहती थी। कोर्ट के आदेश पर पहुंची थी टीम जानकारी के अनुसार, मकान मालिक और किराएदार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला जिला न्यायालय तक पहुंचा, जहां से मकान मालिक के पक्ष में फैसला आया। कोर्ट के आदेश के बाद गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे पुलिस और कोर्ट स्टाफ मकान खाली कराने पहुंचे थे। इसी दौरान शबाना निशा अचानक घर के अंदर गई और मिट्टी तेल डालकर खुद को आग लगा ली। आग लगते ही बाहर निकली, लोगों ने चादर से बुझाई प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के बाद शबाना जलती हालत में घर से बाहर निकली। स्थिति को देखकर पुलिस और कोर्ट स्टाफ पीछे हट गए। मौके पर मौजूद लोगों ने चादर की मदद से किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक वह करीब 95 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी। जिला अस्पताल से रायपुर रेफर घटना के तुरंत बाद शबाना को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। 40-45 साल से उसी मकान में रह रही थी पीड़िता के मामा लियाकत अली ने बताया कि शबाना बचपन से ही उस मकान में रह रही थी और करीब 40 से 45 वर्षों से किराएदार थी। पिछले कुछ महीनों से मकान खाली करने को लेकर उस पर दबाव बनाया जा रहा था। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी रही शबाना निशा कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही हैं। उन्होंने पिछले दुर्ग नगर निगम चुनाव में वार्ड क्रमांक 28 (पचरीपारा) से कांग्रेस के टिकट पर पार्षद पद का चुनाव भी लड़ा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को खंगाला जा रहा है।

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भिलाई में हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड पर जीएसटी की कार्रवाई दूसरे दिन भी जारी

दुर्ग जिले के भिलाई में स्थित हरिओम इंगोट्स एंड पावर लिमिटेड कंपनी पर जीएसटी विभाग की जांच दूसरे दिन भी लगातार जारी रही। मंगलवार देर रात तक विभागीय अधिकारियों की टीम कंपनी परिसर में मौजूद रही और बीते पांच वर्षों से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों की गहन पड़ताल की गई। यह कार्रवाई टैक्स चोरी की आशंका को लेकर शुरू की गई है। भिलाई के लाइट इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित कंपनी के स्टॉक, उत्पादन, बिक्री और आयात-निर्यात से संबंधित रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है। सोमवार शाम शुरू हुई जांच, दो दिन चली कार्रवाई जानकारी के अनुसार, जीएसटी विभाग की 7 से 8 अधिकारियों की टीम सोमवार शाम करीब 4 बजे कंपनी परिसर में जांच के लिए पहुंची थी। इसके बाद से लगातार दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है, जो दूसरे दिन भी देर रात तक चलता रहा। कंपनी में तीन निदेशक बताए जा रहे हैं, जिनमें संदीप अग्रवाल, संतोष अग्रवाल और भगवानदास अग्रवाल शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी का संबंध पूर्व साडा अध्यक्ष सत्यनारायण अग्रवाल के परिवार से है, हालांकि कंपनी के कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्तमान में परिसर में नहीं आ रहे हैं। बिल, रिटर्न और इनवॉइस की बारीकी से जांच जांच के दौरान विभागीय अधिकारी कंपनी के बिल, जीएसटी रिटर्न, इनवॉइस और अन्य लेखा दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं। खासतौर पर टैक्स भुगतान, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और संभावित अनियमितताओं से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कंपनी का सालाना टर्नओवर लगभग 400 से 500 करोड़ रुपए के बीच बताया जा रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से जुड़े लेनदेन भी जांच के दायरे में कंपनी का व्यावसायिक लेनदेन महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश तक फैला हुआ है। इसी वजह से दोनों राज्यों से जुड़े ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों का भी मिलान किया जा रहा है। विभाग का फोकस इस बात पर है कि कहीं गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा तो नहीं किया गया या टैक्स भुगतान में कोई गड़बड़ी तो नहीं है। रिकॉर्ड के मूल्यांकन के बाद सामने आएगी स्थिति जांच के दौरान टैक्स जमा करने से संबंधित कई दस्तावेज सामने आए हैं, जिनका अन्य रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सभी दस्तावेजों की जांच और मूल्यांकन पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टैक्स चोरी हुई है या नहीं और यदि हुई है तो उसकी वास्तविक राशि कितनी है।

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ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर महिला से 7.76 लाख की ठगी, टेलीग्राम के जरिए दिया गया दोगुने मुनाफे का झांसा

दुर्ग जिले में ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। भिलाई भट्ठी थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला से सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए 7 लाख 76 हजार 600 रुपए की धोखाधड़ी की गई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुआ संपर्क पुलिस के अनुसार सेक्टर-1 भिलाई निवासी तरन्नूम राशिद (36) ने बताया कि 8 जनवरी 2026 को उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऑनलाइन पार्ट-टाइम जॉब से जुड़ा एक विज्ञापन दिखाई दिया। विज्ञापन में कम समय में ज्यादा कमाई का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से संपर्क हुआ, जहां ऑनलाइन जॉब करने का प्रस्ताव दिया गया। टेलीग्राम अकाउंट बनवाकर मांगी गई रकम आरोपियों ने महिला को टेलीग्राम पर अकाउंट बनाने के लिए कहा और वहीं से आगे बातचीत की गई। इसके बाद गूगल-पे के जरिए दिए गए यू-पीआई आईडी पर 9 और 10 जनवरी 2026 को अलग-अलग किश्तों में कुल 1 लाख 80 हजार 600 रुपए ट्रांसफर करवाए गए। कुछ समय बाद आरोपियों ने दावा किया कि यह रकम शेयर मार्केट में निवेश कर दी गई है और अब दोगुना मुनाफा हो चुका है। पैसे निकालने के बहाने और ट्रांसफर करवाए पीड़िता से कहा गया कि मुनाफे की राशि निकालने के लिए और पैसे जमा करने होंगे। इसके बाद 12 जनवरी को एसबीआई बैंक, सम्पूर्ण नगर शाखा के एक खाते में 2 लाख 46 हजार रुपए और 13 जनवरी को एसबीआई बैंक, करलपुरा शाखा के खाते में 3 लाख 50 हजार रुपए जमा कराए गए। इस तरह कुल रकम 7 लाख 76 हजार 600 रुपए हो गई। दोबारा रकम मांगने पर हुआ ठगी का खुलासा जब महिला ने अपना पैसा वापस मांगना शुरू किया तो @CFO_WITHDRAW_SERVICE नामक टेलीग्राम अकाउंट से उनसे फिर 6 लाख रुपए जमा करने की मांग की गई। इसी दौरान पीड़िता को ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने भिलाई भट्ठी थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस कर रही डिजिटल लेन-देन की जांच पुलिस ने बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन, व्हाट्सऐप नंबर और टेलीग्राम अकाउंट्स की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले आक

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