July 2026

छत्तीसगढ़ के 16 हजार कोटवारों का सरकार को अल्टीमेटम, 15 अगस्त तक मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन

छत्तीसगढ़ के कोटवारों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सरकार को अंतिम चेतावनी दी है। कोटवार एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ ने कहा है कि यदि 15 अगस्त तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 16 हजार से अधिक कोटवार पूरे प्रदेश में आंदोलन शुरू करेंगे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम किशोर बाघ ने बताया कि कई बार शासन और प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना है कि दशकों से राजस्व विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य करने के बावजूद कोटवारों को नियमित कर्मचारी का दर्जा, पर्याप्त मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संघ का आरोप है कि वर्तमान में मिलने वाला पारिश्रमिक बेहद कम है, जिससे कोटवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता, झूठी शिकायतों के आधार पर कार्रवाई और सेवा के दौरान परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता नहीं दिए जाने जैसी समस्याएं भी लगातार बनी हुई हैं। कोटवार संघ की प्रमुख मांगों में राजस्व विभाग के अधीन नियमितीकरण, न्यूनतम 15 हजार रुपये मासिक मानदेय, नियुक्ति में परिवार के योग्य सदस्य को प्राथमिकता, बेबुनियाद शिकायतों पर कार्रवाई रोकना, बेगार प्रथा समाप्त करना तथा नगर निगम और नगरपालिका क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को हटाना शामिल है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो प्रदेशभर के करीब 16 हजार कोटवार एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपने अधिकारों की मांग करेंगे।

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक वाले छात्रों को प्रवेश से इनकार? शिक्षक संघ ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिक्षक संघ का कहना है कि बोर्ड परीक्षा के कमजोर परिणामों के बाद कई प्राचार्यों के तबादले और प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। इसी दबाव के कारण कुछ स्कूल अब कम अंक लाने वाले विद्यार्थियों का दाखिला लेने से बच रहे हैं। संघ के अनुसार, कुछ सरकारी स्कूल पिछले वर्ष के बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर छात्रों का चयन कर रहे हैं। इससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश से वंचित किया जा रहा है, जबकि सरकारी स्कूल सभी छात्रों के लिए खुले होने चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि बेहतर परीक्षा परिणाम दिखाने के दबाव का असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। संघ का दावा है कि कार्रवाई के डर से कुछ स्थानों पर बोर्ड परीक्षाओं में नकल जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि केवल अच्छे रिजल्ट पर जोर देने से शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। शिक्षक संघ ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार एक ओर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि पढ़ने के इच्छुक छात्रों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। संघ ने सरकार से मांग की है कि सभी सरकारी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं ताकि हर पात्र विद्यार्थी को बिना किसी भेदभाव के प्रवेश मिल सके और किसी भी छात्र को केवल कम अंक होने के आधार पर दाखिले से वंचित न किया जाए।

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