March 2026

कथावाचक का आरोप: 15 लाख न मिलने पर विधानसभा के बाहर आत्मदाह की चेतावनी

छत्तीसगढ़ के कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज ने वीडियो जारी कर विधानसभा के बाहर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। उनका आरोप है कि मंत्री राजेश अग्रवाल ने उनसे श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करवाया, लेकिन लगभग 15 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले को कांग्रेस नेता धनंजय ठाकुर ने सोशल मीडिया पर उठाते हुए कथावाचक का वीडियो वायरल किया है। कथावाचक का दावा महाराज के अनुसार, 2 से 9 जनवरी 2026 के बीच अंबिकापुर के लखनपुर गांव में भव्य भागवत कथा का वाचन उन्होंने मंत्री के कहने पर किया था। भुगतान मांगने पर उन्हें लगातार टाला गया, जिसके बाद उन्होंने आत्मदाह की चेतावनी दी। मंत्री ने आरोपों को बताया गलत मंत्री राजेश अग्रवाल ने आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि कथावाचक ने स्वयं आयोजन के लिए संस्कृति विभाग में आवेदन दिया था, जिस पर उन्होंने सामान्य प्रक्रिया के तहत टिप्पणी की थी। विभाग ने अनुदान देने से इंकार कर आवेदन खारिज कर दिया। मंत्री के अनुसार, इसके बाद कथावाचक उनसे निजी तौर पर पैसे मांगने लगे। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में विधानसभा के बाहर उनसे मुलाकात हुई थी, लेकिन व्यस्तता के कारण बात नहीं हो पाई, जिसके बाद यह वीडियो वायरल हुआ। कांग्रेस का आरोप कांग्रेस नेता धनंजय ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बाहर से आने वाले कथावाचकों—जैसे धीरेंद्र शास्त्री—को विशेष सुविधा देकर बुलाया जाता है, जबकि स्थानीय कथावाचकों को भुगतान तक नहीं मिलता। अलग मुद्दा: छत्तीसगढ़ में अपराध के आंकड़े राज्य में पिछले तीन वर्षों में 1013 दुष्कर्म और 73 हत्या के मामले दर्ज हुए। SC-ST एक्ट के तहत 2455 केस दर्ज हुए, जिनमें 2269 मामलों में चालान पेश किया गया और पीड़ितों को लगभग 28 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी गई।

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रायपुर के औद्योगिक इलाकों में छापा: 7 नाबालिग बाल श्रमिक मुक्त, चार संस्थानों पर मामला दर्ज

राजधानी रायपुर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और एनजीओ की संयुक्त टीम ने सात नाबालिग बच्चों को काम से मुक्त कराया है। उरला, सिलतरा और खमतराई स्थित कारखानों में छापेमारी कर इन बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जहां उनसे उम्र से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। जांच के दौरान सामने आया कि बच्चों से भारी मशीनों और रसायनों के बीच वेल्डिंग, लोडिंग और पैकिंग जैसे काम कराए जा रहे थे। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें सोनी प्लाईवुड इंडस्ट्री, शैमरॉक ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड, इंद्राक्षी पाली प्लास्टर एलएलपी प्लांट तथा सन लॉजिस्टिक एंड डिस्ट्रीब्यूटर शामिल हैं। पुलिस ने कंपनी संचालकों के साथ एक ठेकेदार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन छत्तीसगढ़ (AVA) के अनुसार इन इलाकों में नाबालिगों से काम कराए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। सूचना मिलने के बाद पुलिस के साथ संयुक्त टीम ने चार अलग-अलग स्थानों पर छापा मारा। कार्रवाई में उरला से तीन और खमतराई से चार बच्चों को मुक्त कराया गया। कुछ बच्चों से उद्योगों के अलावा बेकरी में भी काम कराया जा रहा था। मेडिकल जांच के बाद बाल गृह भेजे गए रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और फिर उन्हें बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। फिलहाल बच्चों को सुरक्षित बाल गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक बच्चों के परिवारों से संपर्क स्थापित किया जा रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पहले भी सामने आ चुका है बड़ा मामला रायपुर में बाल मजदूरी का यह पहला मामला नहीं है। करीब पांच महीने पहले खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 नाबालिगों को मुक्त कराया गया था। उस कार्रवाई में 68 लड़कियां और 41 लड़के शामिल थे। हालांकि उस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई न होने की बात सामने आ रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए निगरानी और छापेमारी अभियान लगातार जारी रहेंगे।

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बिजली खंभों पर बेतरतीब केबल का जाल, मामूली किराये के बदले शहर की सुरक्षा खतरे में

शहर में बिजली के खंभों पर फैले इंटरनेट और टीवी केबलों का जाल अब नागरिकों के लिए खतरा बनता जा रहा है। जगह-जगह बिना मानक के लगाए गए तार न केवल अव्यवस्था पैदा कर रहे हैं, बल्कि हादसों की आशंका भी बढ़ा रहे हैं। कई इलाकों में खंभे पूरी तरह केबल से ढके नजर आते हैं। बिजली विभाग के आंकड़ों के अनुसार शहर के लगभग 51 हजार पोलों पर निजी कंपनियों और स्थानीय केबल ऑपरेटरों के तार लगे हुए हैं। इसके बदले विभाग प्रति पोल सालाना करीब 100 रुपये किराया वसूल रहा है, लेकिन सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हो रहा। कई स्थानों पर ये केबल जमीन से काफी कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं। इससे बड़े वाहनों के फंसने और दोपहिया चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। नागरिकों का कहना है कि लटकते तारों के कारण कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। योजनाएं बनीं, अमल नहीं बिजली विभाग ने पुराने तार हटाकर सुरक्षित एबी केबल लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा है। इसी तरह केबलों को व्यवस्थित करने की योजना भी फाइलों तक सीमित बताई जा रही है। प्रमुख बाजार क्षेत्रों में स्थिति खराब शहर के कारोना चौक, सदर बाजार, गोल बाजार, सिविल लाइन और बृहस्पति बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में खंभों पर तारों का जाल साफ देखा जा सकता है, जहां पैदल चलना भी जोखिम भरा हो जाता है। नियमों की हो रही अनदेखी नियमों के अनुसार जमीन से 3–4 मीटर तक खंभे पर खुले तार नहीं होने चाहिए और केबल को पाइप से ढंकना जरूरी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर बिना सुरक्षा के तार लगाए गए हैं। विभाग ने जांच के दिए निर्देश अधिकारियों का कहना है कि कम ऊंचाई वाले केबलों की जांच कराई जाएगी। जहां जरूरत होगी वहां तार बदले जाएंगे और अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबल हटाए जाएंगे, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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रायगढ़ में बकाया किराया न चुकाने पर निगम की कार्रवाई, कबीर चौक की दुकान सील

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर में बकाया कर और किराया नहीं चुकाने वाले दुकानदारों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कबीर चौक स्थित एक दुकान को निगम की राजस्व टीम ने सील कर दिया। निगम अधिकारियों के अनुसार दुकान संचालक पर करीब 87 हजार रुपये से अधिक का किराया बकाया था। कई बार नोटिस जारी कर भुगतान करने को कहा गया, लेकिन राशि जमा नहीं होने पर यह कार्रवाई की गई। राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और नियमानुसार दुकान को बंद कर सील कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि शहर के अन्य बड़े बकायादारों की भी पहचान की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से नगर निगम ने टैक्स वसूली अभियान तेज कर दिया है। नागरिकों की सुविधा के लिए अब छुट्टी के दिनों में भी राजस्व कार्यालय खुला रहेगा, जहां लोग संपत्ति कर, जलकर, यूजर चार्ज, दुकान किराया समेत अन्य देय राशि जमा कर सकेंगे। महापौर ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे समय पर करों का भुगतान करें, ताकि शहर के विकास कार्य बाधित न हों। निगम कमिश्नर ने चेतावनी दी है कि बकाया नहीं चुकाने वालों के खिलाफ आगे भी सीलिंग और अन्य कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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रायगढ़ में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई, 5 उद्योगों पर 13.96 लाख का जुर्माना

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में औद्योगिक इकाइयों में हो रही दुर्घटनाओं और मजदूरों की मौत के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने पर औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पांच उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन पर कुल 13 लाख 96 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में विभिन्न फैक्ट्रियों में हुए हादसों के बाद निरीक्षण अभियान चलाया गया था। जांच के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा उपकरणों की कमी, कार्यस्थल पर जोखिमपूर्ण परिस्थितियां और नियमों की अनदेखी सामने आई। इन उल्लंघनों को गंभीर मानते हुए संबंधित उद्योगों के खिलाफ कारखाना अधिनियम 1948 तथा अन्य श्रम कानूनों के तहत प्रकरण दर्ज किए गए। मामलों की सुनवाई श्रम न्यायालय में हुई, जहां अदालत ने दोषी पाए जाने पर पांचों उद्योगों पर आर्थिक दंड लगाया। जिन उद्योगों पर जुर्माना लगाया गया उनमें नवदुर्गा फ्यूल प्राइवेट लिमिटेड (सराईपाली), अग्रोहा स्टील प्राइवेट लिमिटेड (ग्राम पाली), विष्णु ब्रिक्स (उपरकछार, जशपुर), इंड सिनर्जी (कोटमार) और एजी कंस्ट्रक्शन (महापल्ली) शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिले में उद्योगों की नियमित जांच जारी रहेगी, ताकि कार्यस्थलों पर श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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दुर्ग में वाहन चेकिंग के दौरान हंगामा, जिला पंचायत सदस्य के पति पर पुलिस से दुर्व्यवहार का आरोप

दुर्ग जिले में वाहन जांच के दौरान बुधवार रात उस समय विवाद की स्थिति बन गई जब एक जिला पंचायत सदस्य के पति ने पुलिस कार्रवाई में हस्तक्षेप करते हुए हंगामा किया। आरोप है कि उन्होंने पुलिसकर्मियों से अभद्रता की, धमकी दी और नशे में पकड़े गए चालक को छुड़ाने की कोशिश की। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला पुलगांव थाना क्षेत्र का है, जहां यातायात पुलिस रात के समय चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक कार चालक को रोका गया, जो शराब के नशे में वाहन चलाता पाया गया। पुलिस टीम ब्रीथ एनालाइजर से जांच कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि इसी बीच स्थानीय निवासी विक्की मिश्रा अपनी पत्नी के साथ मौके पर पहुंचे और पुलिस कार्रवाई रोकने का प्रयास किया। उन्होंने स्वयं को जनप्रतिनिधि से जुड़ा बताते हुए चालक को छोड़ने की मांग की, जिससे पुलिस और उनके बीच बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद बढ़ते-बढ़ते गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान ड्यूटी पर तैनात एक जवान को धमकी भी दी गई। हंगामे के बीच नशे में पकड़े गए चालक को वाहन सहित मौके से जाने दिया गया, जिसके कारण नियमानुसार कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। यातायात प्रभारी की शिकायत पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

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अफीम बीज सप्लायर जोधपुर से गिरफ्तार, दुर्ग पुलिस ने अवैध खेती मामले में चौथे आरोपी को पकड़ा

दुर्ग जिले में सामने आए अवैध अफीम खेती मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने चौथे आरोपी को राजस्थान के जोधपुर से गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि अफीम की खेती के लिए बीज बाहर से मंगाए गए थे और आरोपी छोटू राम इन्हें उपलब्ध कराता था। पुलिस के अनुसार आरोपी घटना के बाद राजस्थान भाग गया था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपना मोबाइल फोन बंद रखकर छिपा हुआ था। 12 मार्च को पुलिस ने उसे जोधपुर से हिरासत में लिया। मामले में एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश जारी है। इस केस में पुलिस पहले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें एक स्थानीय नेता समेत अन्य सहयोगी शामिल हैं। सभी आरोपियों को 7 मार्च को पकड़ा गया था और फिलहाल उनकी न्यायिक रिमांड समाप्त होने वाली है। पुलिस को आगे की पूछताछ के लिए दोबारा रिमांड की जरूरत पड़ सकती है। यह पूरा मामला पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा, झेनझरी और सिरसा गांवों के बीच स्थित खेतों से जुड़ा है, जहां 6 मार्च को सूचना मिलने पर पुलिस ने छापा मारा था। जांच में मक्का की फसल के बीच छिपाकर अफीम के पौधे लगाए गए मिले। पुलिस ने करीब 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली फसल को जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई गई। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से नकद राशि और मोबाइल फोन भी बरामद किया गया है। पुलिस इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है। इससे पहले की कार्रवाई में खेती में उपयोग किए गए ट्रैक्टर, जेसीबी, मोटरसाइकिल और अन्य उपकरण भी जब्त किए जा चुके हैं, जिनकी कुल कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों को जल्द पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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दुर्ग में ट्रैफिक सख्ती का असर, चालान 85% बढ़े तो सड़क हादसों में मौतें घटीं

दुर्ग जिले में यातायात पुलिस की कड़ी कार्रवाई का सकारात्मक असर अब सड़क सुरक्षा के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। नियम तोड़ने वालों पर सख्त चालानी कार्रवाई के चलते सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 10 मार्च के बीच सड़क हादसों में 89 लोगों की मौत हुई थी। वहीं वर्ष 2026 में इसी अवधि में यह संख्या घटकर 62 रह गई है। इस तरह पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 27 कम लोगों की जान गई है। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में जनवरी में 36, फरवरी में 23 और मार्च में 10 मार्च तक 3 लोगों की मौत दर्ज की गई। पुलिस का मानना है कि यह कमी लगातार चल रहे सघन जांच अभियान और नियमों के कड़ाई से पालन कराने का परिणाम है। चालानी कार्रवाई में भी इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2025 में 1 जनवरी से 10 मार्च तक कुल 14,162 चालान काटे गए थे, जबकि 2026 में इसी अवधि में यह संख्या बढ़कर 26,234 हो गई है, जो लगभग 85 प्रतिशत अधिक है। यातायात पुलिस ने दुर्ग-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग, सेंट्रल एवेन्यू, सुपेला चौक, नेहरू नगर चौक और पावर हाउस जैसे व्यस्त क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया है। यहां हेलमेट जांच, ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग और तेज या लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस वाहन चालकों से हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करने, शराब पीकर वाहन न चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील कर रही है।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, State

बिलासपुर में LPG की जमाखोरी का भंडाफोड़, किचन केयर व किराना स्टोर से 126 सिलेंडर जब्त

बिलासपुर में गैस सिलेंडरों की कथित किल्लत के बीच कालाबाजारी और जमाखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की टीम ने कोनी और सिरगिट्टी क्षेत्र में छापेमारी कर किचन केयर और किराना दुकानों से कुल 126 घरेलू गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। कार्रवाई के दौरान सिलेंडरों से गैस निकालने वाले उपकरण भी मिले, जिसके बाद संबंधित लोगों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम लगातार दूसरे दिन भी कार्रवाई करती रही। इससे पहले एक अन्य छापे में 72 सिलेंडर जब्त किए जा चुके थे। प्रशासन का कहना है कि जिले में गैस की कमी नहीं है, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण बुकिंग और वितरण प्रभावित होने से लोगों को परेशानी हो रही है। कोनी क्षेत्र में एक मकान से 55 खाली घरेलू सिलेंडर बरामद हुए। जांच में पता चला कि यह मकान सुनील सोनवानी का है, जिसे एक किचन केयर संचालक को किराए पर दिया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार इस अवैध कारोबार में परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं। वहीं सिरगिट्टी के बन्नाक चौक स्थित एक दुकान से खाली सिलेंडर और गैस निकालने के उपकरण मिले। टीम को वहां वजन मशीन और विशेष यंत्र भी मिला, जिसका उपयोग सिलेंडर से गैस निकालने में किया जाता है। देर शाम एक बंद दुकान में छापेमारी के दौरान 61 सिलेंडर और बरामद किए गए, जिनमें घरेलू, व्यावसायिक और छोटे सिलेंडर शामिल थे। यह दुकान एक प्राथमिक स्कूल के पास स्थित है, जिससे सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ था। सभी सिलेंडरों को जब्त कर संबंधित प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, बकाया बिल पर पेनल्टी माफ और मूल राशि में 75% तक छूट

छत्तीसगढ़ में लंबे समय से बिजली बिल बकाया रखने वाले उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार ने नई समाधान योजना शुरू की है। इस योजना के तहत बकाया बिल पर लगे जुर्माने को पूरी तरह माफ किया जाएगा, जबकि मूल बिल की राशि में भी 75 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य पुराने बकायादार उपभोक्ताओं को राहत देना और उनके बिजली कनेक्शन फिर से बहाल करना है। अधिकारियों के अनुसार बकाया राशि जमा करने के बाद उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना का लाभ भी मिलने लगेगा, जो पहले बकाया होने के कारण नहीं मिल पाता था। योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ताओं को 30 जून तक पंजीयन कराना होगा। इसके लिए ‘मोर बिजली’ मोबाइल एप या नजदीकी बिजली वितरण केंद्रों में आवेदन किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष शिविर लगाकर लोगों को योजना से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी उपभोक्ता का मूल बिल 10 हजार रुपये है और जुर्माना बढ़कर 40 हजार हो गया है, तो योजना के तहत 40 हजार रुपये का पूरा जुर्माना समाप्त हो जाएगा। वहीं मूल राशि भी घटकर लगभग 2500 रुपये तक रह सकती है। भुगतान करने के बाद उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन पुनः चालू कर दिया जाएगा। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह योजना आम लोगों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए काफी राहतभरी साबित होगी।

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