February 2026

रायपुर में मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट की मांग तेज: 350 सिटी बसें और मेट्रो जैसी सेवा से बदल सकती है तस्वीर

रायपुर। राजधानी की तेजी से बढ़ती आबादी और शहर के फैलते दायरे के बीच बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब बुनियादी जरूरत बन चुका है। कई योजनाएं बनीं, बस सेवाएं शुरू भी हुईं, लेकिन आज भी आम लोगों को सस्ती और नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसी मुद्दे को लेकर ‘रायपुर मांगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट’ अभियान के तहत आयोजित फोकस ग्रुप डिस्कशन (FGD) में शहर के जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने खुलकर अपनी बात रखी। 350 बसें चलें तो बढ़े भरोसा पूर्व महापौर और वर्तमान विधायक सुनील सोनी ने कहा कि नवा रायपुर और सचिवालय क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त बस सुविधा नहीं है। आम लोगों को मंत्री या अधिकारियों से मिलने के लिए 400–500 रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं। उनका सुझाव है कि कम से कम 350 सिटी बसें अलग-अलग रूट पर चलाई जाएं। उन्होंने निजी भागीदारी (PPP मॉडल) के तहत बस संचालन को व्यावहारिक विकल्प बताया, ताकि सरकारी फंड की देरी से बचा जा सके। मिनी बसें और लंबी दूरी के रूट जरूरी पुरंदर मिश्रा ने कहा कि शहर के अंदरूनी इलाकों के लिए मिनी सिटी बसें शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2008 में 40 बसों से शुरू हुई सेवा 100 बसों तक पहुंची थी, लेकिन कोरोना काल के बाद सेवा लगभग ठप हो गई। ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू का मानना है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को सफल बनाने के लिए लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। लंबी दूरी के रूट पर समयबद्ध बस सेवा शुरू होने से लोगों का भरोसा बढ़ेगा। जाम से राहत का समाधान राजेश मूणत ने कहा कि शहर में कई बस स्टॉप बने हैं, लेकिन बसें नियमित नहीं चल रहीं। जब तक सिटी बस सेवा व्यवस्थित नहीं होगी, तब तक ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म नहीं होगी। वहीं महापौर मीनल चौबे ने कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में मेंटेनेंस और रूट प्लानिंग की कमी रही। अब केंद्र की योजनाओं के तहत सुधार की कोशिश की जा रही है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि सस्ती और भरोसेमंद बस सेवा जनता का अधिकार है। सरकार को किराया और रूट निर्धारण पर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। परिवहन विभाग की स्थिति परिवहन उपायुक्त कृष्णा पटेल ने बताया कि 30 सिटी बसों के परमिट जारी हैं, लेकिन कितनी बसें संचालित हो रही हैं, इसकी जानकारी निगम के पास है। ऑटो और ई-रिक्शा के लिए किराया निर्धारित है, शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। पीएम ई-बस योजना पर फोकस केंद्र सरकार की पीएम ई-बस योजना के तहत रायपुर को 100 इलेक्ट्रिक बसें मिलने वाली हैं। जरवाय में करीब 2 हेक्टेयर में बस डिपो का निर्माण किया जा रहा है, जो चार महीने में तैयार होने की संभावना है। इलेक्ट्रिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए सरोना से 33 केवी लाइन बिछाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समयबद्ध, सस्ती और पर्याप्त संख्या में बसें चलाई जाएं तो रायपुर में निजी वाहनों की निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी।

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सुपेबेड़ा में फिर किडनी मरीज की मौत: एम्स रायपुर में उपचार के दौरान तोड़ा दम, मृतकों की संख्या 133 पहुंची

गरियाबंद। सुपेबेड़ा गांव में किडनी बीमारी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक और मरीज की मौत के बाद गांव में शोक और चिंता का माहौल है। 49 वर्षीय प्रेमजय क्षेत्रपाल ने एम्स रायपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। साल 2005 से अब तक गांव में किडनी रोग से मरने वालों की संख्या बढ़कर 133 हो गई है। पांच साल से घर पर करवा रहे थे डायलिसिस जानकारी के मुताबिक, प्रेमजय पिछले पांच वर्षों से घर पर पेरिटोनियल डायलिसिस करा रहे थे। करीब 20 दिन पहले उनके पेट में लगा डायलिसिस फिस्टुला ब्लॉक हो गया, जिससे नियमित उपचार बाधित हो गया। हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें एक सप्ताह पहले एम्स रायपुर में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने उनके हाथ में नया फिस्टुला लगाने की कोशिश की, लेकिन मरीज की सहमति नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। बीएमओ प्रकाश साहू ने मौत की पुष्टि की है। परिवार में पहले भी कई मौतें प्रेमजय के परिवार पर इस बीमारी का गहरा असर पड़ा है। उनके माता-पिता और एक भाई समेत परिवार के आठ से अधिक सदस्य पहले ही किडनी रोग से जान गंवा चुके हैं। गांव में अब भी 40 से ज्यादा मरीज पंचायत रिकॉर्ड के अनुसार, 2005 से अब तक 133 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में यह संख्या 70 से 80 बताई जाती है। वर्तमान में गांव में 40 से अधिक मरीज किडनी रोग से जूझ रहे हैं, जिनमें से तीन का इलाज एम्स में जारी है। आधे से अधिक मरीज बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक ग्रामीणों में बीमारी का डर इतना बढ़ गया है कि कई लोगों ने खून की जांच कराना बंद कर दिया है। पिछले दो वर्षों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में किसी विशेषज्ञ टीम के साथ स्वास्थ्य शिविर नहीं लगाया गया है। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्वीकृत होने के बावजूद भवन का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। यहां भेजी गई डायलिसिस मशीन भी स्थापित नहीं हो पाई है। दो स्वीकृत डॉक्टरों में से केवल एक ही कार्यरत है और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञ की सुविधा उपलब्ध नहीं है। स्वच्छ पेयजल की योजना भी अधूरी पड़ी है।

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बदमाश “मम्मा” की रंगदारी: पैसे नहीं देने पर मैकेनिक समेत 4 से मारपीट, फतेशाह मार्केट में देर रात हंगामा

रायपुर। राजधानी रायपुर के फतेशाह मार्केट में मंगलवार देर रात रंगदारी को लेकर जमकर बवाल हुआ। कोतवाली थाना क्षेत्र में आने वाले इस बाजार में एक निगरानी बदमाश ने पैसे नहीं देने पर मैकेनिक और अन्य लोगों के साथ मारपीट कर दी। घटना के बाद घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया और देर रात थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। क्या है पूरा मामला? शिकायतकर्ता इमरान खान ने पुलिस को बताया कि वह फतेशाह मार्केट में “न्यू प्रीमियर ऑटो रिपेयरिंग वर्कशॉप” नाम से दुकान संचालित करता है। 18 फरवरी की रात करीब 9:20 बजे वसीम खान उर्फ “मम्मा” नशे की हालत में दुकान पर पहुंचा और शराब खरीदने के लिए 500 से 1000 रुपए की मांग की। इमरान द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर आरोपी ने उसे धक्का दिया और दुकान में काम कर रहे फैजान से भी पैसों की मांग की। फैजान के मना करने पर आरोपी ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। हथौड़ी से हमला करने की कोशिश मारपीट के दौरान दुकान पर अपनी गाड़ी ठीक कराने आए ग्राहक मोईन से भी आरोपी ने पैसे मांगे। मना करने पर उसने कथित रूप से हथौड़ी उठाकर हमला करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद राहगीरों ने बीच-बचाव किया, लेकिन आरोपी ने वहां मौजूद अन्य लोगों—मोहम्मद फैजान खान, मोहम्मद जुबैर और वसीम अहमद—के साथ भी मारपीट की। घायलों को इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया। थाने में शिकायत, कार्रवाई की मांग घटना के बाद पीड़ित इमरान खान और अन्य लोग देर रात कोतवाली थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों का आरोप है कि विवाद के बाद आरोपी दोबारा पहुंचा और जान से मारने की धमकी दी। कोतवाली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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वैलेंटाइन डे पर दुर्ग में हाई अलर्ट: 33 पेट्रोलिंग टीमें तैनात, पार्क और मॉल में विशेष निगरानी

वैलेंटाइन डे के मद्देनजर दुर्ग जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। शनिवार को जिलेभर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि, हुड़दंग या असामाजिक तत्वों की हरकतों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। वरिष्ठ अधिकारियों की विशेष ड्यूटी वैलेंटाइन डे को देखते हुए 1 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 5 नगर पुलिस अधीक्षक और 30 थाना प्रभारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। ये अधिकारी पार्क, गार्डन, मॉल, प्रमुख बाजार, पर्यटन स्थलों और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहेंगे और स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे। 33 अतिरिक्त पेट्रोलिंग पार्टियां सक्रिय पुलिस ने जिले के विभिन्न थाना और चौकी क्षेत्रों में 33 अतिरिक्त पेट्रोलिंग टीमें लगाई हैं। ये टीमें सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गश्त करेंगी। इसके अलावा 21 प्रमुख स्थानों पर फिक्स प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां पुलिस बल स्थायी रूप से मौजूद रहेगा। महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील स्थानों पर विशेष महिला सुरक्षा टीम तैनात की गई है। पार्क और सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं व युवतियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डायल-112, कंट्रोल रूम और रिजर्व बल को भी अलर्ट पर रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया दी जा सके। ट्रैफिक विभाग को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। भीम आर्मी ने सौंपा ज्ञापन वैलेंटाइन डे के दौरान प्रेमी युगलों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर भीम आर्मी ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मांग की है कि मोरल पुलिसिंग या संस्कृति के नाम पर हिंसा करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रेमी युगलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कानून हाथ में लेने वालों पर होगी कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणिशंकर चंद्रा ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी तरह की अव्यवस्था फैलाने, हुड़दंग करने या कानून हाथ में लेने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: ट्रक की चपेट में आने से युवती की मौत, युवक गंभीर

भिलाई में शुक्रवार रात नेशनल हाईवे पर हुए एक भीषण सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके साथ बाइक पर सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना रायपुर से भिलाई आने वाले मार्ग पर चरोदा जीआरपी चौकी के पास रात करीब 10 से 11 बजे के बीच हुई। मृतका की पहचान गूंजा चतुर्वेदी निवासी सुभाष मार्केट, जोन-2, वार्ड 31, बापू नगर खुर्सीपार के रूप में हुई है। घायल युवक 41 वर्षीय दीपक मोंगराज बताया गया है, जो ओडिया मोहल्ला, वार्ड 33, खुर्सीपार भिलाई का रहने वाला है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह प्राथमिक जानकारी के अनुसार दोनों रायपुर से भिलाई लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बाइक तेज गति में थी और संतुलन बिगड़ने के बाद एक ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। यह घटना भिलाई-3 थाना क्षेत्र में हुई। पुलिस ने शुरू की जांच सूचना मिलते ही भिलाई-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। हादसे के कारणों की पुष्टि के लिए आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की जा रही है। साथ ही क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन विस्तृत जांच जारी है।

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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव: रजनीश सिंह बघेल अध्यक्ष निर्वाचित, अनिल त्रिपाठी बने सचिव

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 2026-2028 कार्यकाल के लिए संपन्न हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर एडवोकेट रजनीश सिंह बघेल ने जीत हासिल की है। उन्होंने सीनियर एडवोकेट राजीव श्रीवास्तव को 137 मतों के अंतर से पराजित किया। सचिव पद पर अनिल त्रिपाठी निर्वाचित हुए हैं। वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में गौतम खेत्रपाल और महिला उपाध्यक्ष के रूप में मांडवी भारद्वाज ने जीत दर्ज की। परिणाम घोषित होते ही अधिवक्ताओं के बीच उत्साह का माहौल रहा और समर्थकों ने जश्न मनाया। 85 प्रतिशत से अधिक मतदान गुरुवार को हुए मतदान में कुल 1418 पंजीकृत मतदाताओं में से 1213 अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। इस प्रकार कुल मतदान प्रतिशत 85.54 रहा, जो बार एसोसिएशन चुनाव के लिए उल्लेखनीय माना जा रहा है। चुनाव में 17 पदों के लिए 61 उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान के बाद शुक्रवार सुबह 11 बजे से मतगणना शुरू हुई और देर शाम तक परिणाम घोषित कर दिए गए। अन्य पदों पर भी घोषित हुए परिणाम अध्यक्ष पद के लिए इस बार कुल 7 प्रत्याशी मैदान में थे। संयुक्त सचिव पद पर एडवोकेट विजय साहू, संयुक्त सचिव (महिला) पद पर आस्था शुक्ला विजयी रहीं। पुस्तकालय सचिव के रूप में राहुल मिश्रा, खेल सचिव (पुरुष) पद पर अमन पांडेय और खेल सचिव (महिला) पद पर प्रज्ञा पांडेय ने जीत दर्ज की। कार्यकारिणी सदस्य पद के परिणाम कार्यकारिणी के पांच पदों पर एडवोकेट अभिषेक पांडेय, त्रिवेणी शंकर साहू, आशुतोष मिश्रा, शरद मिश्रा और उज्ज्वल चौबे निर्वाचित हुए। नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा, बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा वकीलों के लिए सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

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मई 2026 से शुरू होगी डिजिटल जनगणना, 2027 तक प्रक्रिया पूरी, 2028 में जारी होंगे अंतिम आंकड़े

देश में अगली जनगणना मई 2026 से शुरू होकर 2027 तक पूरी की जाएगी, जबकि अंतिम आंकड़े वर्ष 2028 में जारी किए जाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के अपनी सही जानकारी उपलब्ध करा सकें। पिछली जनगणना के दौरान यह सामने आया था कि कई लोग निजी जानकारी साझा करने में संकोच करते हैं। डेटा की सुरक्षा और दुरुपयोग की आशंका के कारण कुछ परिवारों ने अधूरी या गलत जानकारी दी थी। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए जनगणना-2026-27 को मोबाइल एप आधारित बनाया जा रहा है। मोबाइल एप और जियो-टैगिंग का उपयोग इस बार गणक (एन्यूमरेटर) स्मार्टफोन एप के माध्यम से सीधे डेटा दर्ज करेंगे। जानकारी तत्काल केंद्रीय सर्वर पर भेजी जाएगी। एप हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। अधिकांश प्रश्नों के लिए पूर्वनिर्धारित विकल्प दिए जाएंगे, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होगी और डेटा प्रोसेसिंग तेज होगी। पहली बार नागरिकों को “सेल्फ-एन्यूमरेशन” की सुविधा भी मिलेगी। वे वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। साथ ही जियो-टैगिंग तकनीक से मकानों और स्थानों की सटीक पहचान सुनिश्चित की जाएगी। दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी।पहला चरण (मई 2026): मकानों की सूची तैयार की जाएगी और प्रत्येक घर के सदस्यों की मूल जानकारी एकत्र की जाएगी। यह चरण दूसरे चरण के लिए आधार तैयार करेगा। दूसरा चरण (फरवरी 2027): इसमें व्यक्ति आधारित विस्तृत जानकारी ली जाएगी, जैसे नाम, उम्र, लिंग, जाति, शिक्षा, रोजगार और आय आदि। अधिकारियों के अनुसार पहला चरण किसी ढांचे की तरह होगा, जबकि दूसरे चरण में विस्तृत विवरण जोड़ा जाएगा। सर्वे टीम को विशेष प्रशिक्षण जनगणना से पहले तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सर्वे टीम को यह सिखाया जाएगा कि लोगों से सही और स्पष्ट जानकारी कैसे प्राप्त की जाए। कई बार लोग गोपनीयता के डर से गलत उत्तर दे देते हैं, जैसे पक्के मकान को कच्चा बताना या बेरोजगार होने के बावजूद खुद को कार्यरत बताना। ऐसी स्थिति में टीम को तथ्यों की पुष्टि कर विवेकपूर्ण ढंग से जानकारी दर्ज करनी होगी। गलत जानकारी से योजनाओं पर असर जनगणना निदेशालय छत्तीसगढ़ के ज्वाइंट डायरेक्टर अशोक मिश्रा के अनुसार जनगणना केवल जनसंख्या गणना नहीं है, बल्कि यही आंकड़े सरकार की नीतियों और विकास योजनाओं की आधारशिला होते हैं। शिक्षा, रोजगार, गरीबी और साक्षरता से जुड़े गलत आंकड़े भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। निदेशक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि तकनीकी दक्षता को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को जनगणना कार्य में शामिल किया जाता है। उन्हें एप संचालन और डेटा एंट्री से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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हर एफआईआर की डिजिटल मॉनिटरिंग से तेज हुई कार्रवाई: उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए गृह विभाग ने कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रेस वार्ता में बताया कि अब प्रदेश में दर्ज होने वाली हर एफआईआर की डिजिटल निगरानी की जा रही है। पहले मामलों की समीक्षा मैन्युअल तरीके से होती थी, जिससे विवेचना में देरी होती थी। अब एक विशेष अपराध समीक्षा एप्लीकेशन के माध्यम से एफआईआर का विश्लेषण, समय-सीमा में जांच और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित पर्यवेक्षण सुनिश्चित किया जा रहा है। ऑनलाइन शिकायत प्रणाली से त्वरित कार्रवाई संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस मुख्यालय में ऑनलाइन कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है, जो देश में अपनी तरह की अनूठी पहल है। किसी भी शिकायत के पीएचक्यू पहुंचते ही वह संबंधित एसपी, डीएसपी और थाने तक तत्काल प्रेषित हो जाती है। उन्होंने बताया कि यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का निराकरण नहीं होता, तो सिस्टम में स्वतः अलार्म सक्रिय हो जाता है। इससे लंबित मामलों की मॉनिटरिंग और कार्रवाई की रफ्तार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नशे और ऑनलाइन जुए के खिलाफ कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई जारी है। इसके साथ ही अनधिकृत ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स पर पहली बार व्यापक कार्रवाई करते हुए 255 ऑनलाइन लिंक और पोर्टल्स को ब्लॉक किया गया है। साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने कई संदिग्ध खातों को सीज किया है। फर्जी सिम कार्ड जारी करने वाले 165 पीओएस संचालकों को गिरफ्तार किया गया है। गौ-वंश तस्करी पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई उपमुख्यमंत्री ने बताया कि गौ-वंश तस्करों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जहां गौ-वंश वध, अवैध परिवहन और व्यापार से जुड़े आदतन आरोपियों की सूची तैयार की गई है। ऐसे 19 आरोपियों की लगातार निगरानी की जा रही है। गौ-वंश वध और अवैध परिवहन के मामलों में 142 वाहनों को राजसात किया गया है, जिनमें से 27 वाहनों की नीलामी भी की जा चुकी है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ और डीजी (जेल) हिमांशु गुप्ता भी उपस्थित रहे।

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राजधानी में 10 साल से 8 करोड़ का डायवर्सन शुल्क बकाया, कार्रवाई शून्य

राजधानी Raipur में बीते दस वर्षों के दौरान करीब 8 करोड़ रुपये का डायवर्सन शुल्क वसूल नहीं हो पाया है। हर साल की तरह इस बार भी तहसील कार्यालयों ने दो हजार से अधिक भू-स्वामियों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन वसूली की रफ्तार अब भी बेहद धीमी है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सालाना डायवर्सन शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं। पिछले डेढ़ दशक में किसी बड़े बकायादार के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोग नोटिस को गंभीरता से नहीं ले रहे। बड़े बकायादारों में कौन? जांच में सामने आया है कि शुल्क न चुकाने वालों में अस्पताल संचालक, राइस मिलर, निजी स्कूल संचालक, पेट्रोल पंप संचालक और नए उद्योग स्थापित करने वाले व्यवसायी शामिल हैं। इन सभी ने कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक श्रेणी में परिवर्तित कराया, लेकिन इसके बाद नियमित वार्षिक शुल्क जमा नहीं किया। बकाया के बावजूद हो रही रजिस्ट्री सबसे बड़ी समस्या यह है कि किस जमीन पर कितना डायवर्सन शुल्क बकाया है, इसकी जानकारी अब तक पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है। पंजीयन कार्यालय के पास ऐसा कोई एकीकृत सॉफ्टवेयर नहीं है, जिससे जमीन की रजिस्ट्री के समय बकाया राशि की जांच की जा सके। इसी कारण लाखों रुपये बकाया होने के बावजूद जमीन की खरीदी-बिक्री होती रही है। कई मामलों में नोटिस मिलने पर संबंधित व्यक्ति यह कहकर पल्ला झाड़ लेता है कि जमीन पहले ही बेची जा चुकी है। नया डिजिटल सिस्टम लागू करने की तैयारी राजस्व विभाग का दावा है कि डायवर्सन प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए नया एप और सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसके जरिए आवेदन करते ही संबंधित जमीन पर लंबित शुल्क की जानकारी सामने आ जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि जब तक बकाया शुल्क जमा नहीं किया जाएगा, तब तक नई डायवर्सन प्रक्रिया को स्वीकृति नहीं दी जाएगी। हालांकि यह व्यवस्था फिलहाल परीक्षण चरण में है और पूरी तरह लागू होना बाकी है। क्या हो सकती है कार्रवाई? तहसील अधिकारियों के मुताबिक, नियमों के तहत बकाया शुल्क न चुकाने पर— हालांकि, अब तक राजधानी के किसी भी तहसील क्षेत्र में इस प्रकार की सख्त कार्रवाई सामने नहीं आई है। नियम क्या कहते हैं? कृषि भूमि का उपयोग बदलने के लिए डायवर्सन कराना अनिवार्य है। पहली बार लैंड यूज परिवर्तन के समय शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद हर वर्ष निर्धारित शुल्क देना अनिवार्य है, जब तक कि जमीन पर निर्माण पूर्ण न हो जाए या वह नगरीय निकाय के रिकॉर्ड में दर्ज न हो जाए। नियमों में वार्षिक शुल्क से छूट का कोई प्रावधान नहीं है। प्रशासन का दावा राजस्व विभाग ने सभी तहसीलदारों को वसूली तेज करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बार-बार नोटिस के बाद भी शुल्क जमा न करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और बकाया राशि हर हाल में वसूल की जाएगी।

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शराब कारोबारी के बेटे शोएब ढेबर फरार, रोडरेज में स्कूल संचालक को धमकी का आरोप

रायपुर के तेलीबांधा इलाके में रोडरेज के एक मामले में आरोपी शोएब ढेबर फरार हो गया है। स्कूल संचालक आरबी मिश्रा को कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। FIR दर्ज होने के बाद से ही आरोपी अंडरग्राउंड बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के घर पर अब तक चार बार दबिश दी जा चुकी है, लेकिन वह गिरफ्त में नहीं आया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि उसका मोबाइल फोन बंद है और वह लगातार ठिकाना बदल रहा है। पुलिस टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है। क्या है पूरा मामला पीड़ित आरबी मिश्रा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 6 फरवरी की रात करीब 10 बजे वे विधायक कॉलोनी से वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर दर्शन के लिए गए थे। मंदिर से लौटते समय उनकी कार (CG-04-PY-5003) के पास एक तेज रफ्तार कार आकर टकरा गई, जिससे वाहन में स्क्रैच आ गया। मिश्रा का आरोप है कि जब उन्होंने चालक को सावधानी से गाड़ी चलाने की बात कही, तो उसने बीच सड़क पर वाहन रोक दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद मिश्रा ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला कायम किया। पुलिस का बयान तेलीबांधा थाना प्रभारी अविनाश सिंह ने बताया कि आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज है और उसे पकड़ने के लिए टीम रवाना की गई है। कई बार दबिश के बावजूद आरोपी हाथ नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कौन है शोएब ढेबर शोएब ढेबर कथित शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर का बेटा है और रायपुर नगर निगम के पूर्व महापौर एजाज ढेबर का भतीजा बताया जा रहा है। 8 फरवरी को दर्ज शिकायत के बाद से ही वह चर्चा में है। पहले भी विवादों में रहा नाम बताया जाता है कि शोएब ढेबर का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। 7 अगस्त 2025 को वह बिना अनुमति जेल के मुलाकात कक्ष में प्रवेश कर गया था, जहां अभद्र व्यवहार की शिकायत के बाद जेल प्रशासन ने उस पर तीन महीने तक मुलाकात पर रोक लगा दी थी। इस मामले में गंज थाने में भी प्रकरण दर्ज हुआ था। इसके अलावा क्लब में मारपीट और कोरोना काल के दौरान पुलिसकर्मियों से बहस के वीडियो भी वायरल हो चुके हैं।

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