January 2026

दुर्ग में शिवनाथ नदी पर ठेकेदार का 30 साल पुराना अवैध एनीकट ध्वस्त, पुलिस बल की मौजूदगी में चली बुलडोजर कार्रवाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिवनाथ नदी पर वर्षों से चल रही एक बड़ी अनियमितता सामने आई है। ईंट-भट्टा व्यवसाय से जुड़े ठेकेदार ने अपने निजी फायदे के लिए नदी पर अवैध एनीकट (अस्थायी पुल) का निर्माण कर लिया था, जिसकी जानकारी प्रशासन को करीब 30 साल बाद मिली। मामला सामने आते ही प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सोमवार (5 जनवरी) को पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को हटवा दिया। जानकारी के मुताबिक, ठेकेदार नीलकंठ पांडे ने अपने ईंट-भट्टे के लिए कच्चा माल लाने-ले जाने की सुविधा के उद्देश्य से शिवनाथ नदी पर मिट्टी और पाइप डालकर अस्थायी पुल बना लिया था। यह पुल पथरिया और रवेलीडीह पंचायत के बीच बनाया गया था, जबकि इस क्षेत्र में पहले से ही वैकल्पिक पुल मौजूद हैं। 10 किलोमीटर की दूरी बचाने बनाया निजी रास्ता स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार ने करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर बचाने के लिए नदी के ऊपर ही निजी रास्ता तैयार कर लिया था। हैरानी की बात यह है कि उसी क्षेत्र में एक पुराना एनीकट और एक नया पक्का पुल पहले से बना हुआ है, इसके बावजूद ठेकेदार ने अपने फायदे के लिए अवैध निर्माण कर लिया। बताया जा रहा है कि इसी तरह पिछले लगभग तीन दशकों से शिवनाथ नदी पर अस्थायी बांध बनाकर ईंट-भट्टे का संचालन किया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने किया विरोध सोमवार को जब प्रशासन ने एनीकट हटाने की कार्रवाई शुरू की, तो दो थानों की पुलिस फोर्स मौके पर तैनात की गई थी। कार्रवाई के दौरान ठेकेदार ने विरोध शुरू कर दिया और जेसीबी मशीन को भी बंद करवा दिया। इसके बाद पुलिस और तहसीलदार की मौजूदगी में दोबारा मशीन चालू कर एक छोर से पुल तोड़ने की कार्रवाई की गई। दोनों पंचायतों के सरपंचों ने जताया विरोध पथरिया पंचायत के सरपंच मीत कुमार निषाद ने बताया कि ईंट-भट्टा ठेकेदार ने पंचायत से किसी तरह की अनुमति नहीं ली थी। वर्षों से मिट्टी का बांध बनाकर नदी का उपयोग किया जा रहा था, जिससे ठेकेदार को लाखों रुपये का फायदा हो रहा था। वहीं रवेलीडीह पंचायत के सरपंच माधोलाल देवांगन ने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने अपने निजी लाभ के लिए नदी पर बांध बनाया। इससे ईंट और मिट्टी के परिवहन में उसे सुविधा मिलती थी। उन्होंने यह भी कहा कि ठेकेदार ने पंचायत की जमीन किराए पर ली है, लेकिन उसका किराया भी नहीं दिया जा रहा है। ठेकेदार का दावा, प्रशासन का सख्त रुख ठेकेदार नीलकंठ पांडे का कहना है कि नदी में बनाए गए बांध में पानी के बहाव के लिए पाइप लगाए गए थे और इसका उपयोग ग्रामीण किसान भी करते थे। उनका दावा है कि नियमों के तहत ही यह व्यवस्था की गई थी और इससे सभी को फायदा हो रहा था। हालांकि प्रशासन ने इस दावे को खारिज करते हुए कार्रवाई जारी रखी। कलेक्टर बोले—बिना अनुमति नदी में निर्माण गलत दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि शिवनाथ नदी में मिट्टी डालकर रास्ता बनाना नियमों के खिलाफ है। इस निर्माण के लिए किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी। जल संसाधन विभाग और एसडीएम की टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की है। जो हिस्सा अभी बचा है, उसे भी हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि नदी पर इस तरह के अवैध बांध से कभी भी गंभीर दुर्घटना हो सकती थी, इसलिए कार्रवाई जरूरी थी।

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डिप्टी सीएम अरुण साव पर टिप्पणी को लेकर भूपेश बघेल घिरे, साहू समाज ने जताया विरोध, 10 दिन में माफी की मांग

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा उप मुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। भूपेश बघेल के बयान से साहू समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज के विभिन्न संगठनों ने इसे अपमानजनक बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। बिलासपुर में साहू समाज ने इस मामले को लेकर एसएसपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि भूपेश बघेल ने 10 दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी, तो प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन किया जाएगा। जंगल की कहानी से कसा था तंज दरअसल, बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने एक कथित उदाहरण देते हुए उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि जंगल में राजा चुनने की प्रक्रिया में सभी जानवरों ने मिलकर बंदर को राजा बना दिया। यह टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हुई, जिसे साहू समाज ने सीधे तौर पर अरुण साव का अपमान बताया। बयान सामने आने के बाद प्रदेश के कई जिलों में साहू समाज के लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किए और कुछ जगहों पर पुतला दहन भी किया गया। 29 दिसंबर को बिलासपुर में दिया गया था बयान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 29 दिसंबर 2025 को बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र पहुंचे थे। यहां वे बस्ती हटाने के विरोध में चल रहे आंदोलन के समर्थन में शामिल हुए थे। इसी दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विधायक अमर अग्रवाल पर तीखी टिप्पणियां की थीं। उन्होंने लिंगियाडीह क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे और स्थानीय लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की थी। इसी भाषण के दौरान उन्होंने अरुण साव को लेकर विवादित टिप्पणी की, जिसे अब समाज विशेष के अपमान के रूप में देखा जा रहा है। जशपुर में सौंपा गया ज्ञापन जशपुर जिले में भी साहू समाज ने पूर्व मुख्यमंत्री के बयान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने जशपुरनगर में एसएसपी शशि मोहन सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए 10 दिनों के भीतर माफी की मांग की है। जिला साहू संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र गुप्ता ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव साहू समाज के प्रतिनिधि हैं और एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत बल्कि पूरे समाज का अपमान है। सक्ती जिले में भी आक्रोश सक्ती जिले में भी 5 जनवरी को जिला साहू संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। जिला अध्यक्ष डॉ. खिलावन साहू ने प्रेस वार्ता में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की टिप्पणी असंवेदनशील और निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहू समाज अपनी गरिमा से समझौता नहीं करेगा और यदि माफी नहीं मांगी गई तो संगठित रूप से आंदोलन किया जाएगा।

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Bhilai / Durg, Chhattisgarh, Political, Raipur, Religion

जिला अस्पतालों में चार गुना बढ़ेगा दवाओं का स्टॉक, अब गांव के अस्पतालों में भी मिलेंगी शुगर-थायराइड की दवाएं

राज्य सरकार ने ग्रामीण और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में सर्दी-जुकाम, बुखार और उल्टी-दस्त के साथ-साथ शुगर, थायराइड और खून पतला करने वाली दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। अभी तक ये दवाएं केवल जिला अस्पतालों या मेडिकल कॉलेजों में ही मिलती थीं, जिससे ग्रामीण मरीजों को बार-बार शहर जाना पड़ता था। स्वास्थ्य विभाग ने आवश्यक दवाओं की सूची में बड़ी बढ़ोतरी की है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं की संख्या 146 से बढ़ाकर 247 कर दी गई है, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में यह संख्या 196 से बढ़कर 365 हो जाएगी। इससे गांवों में रहने वाले मरीजों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर इलाज मिल सकेगा। जिला अस्पतालों में 208 से बढ़कर 807 होंगी दवाएं जिला अस्पतालों में भी दवाओं के स्टॉक में बड़ा इजाफा किया गया है। वर्तमान में जहां जिला अस्पतालों में 208 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़ाकर 807 की जा रही है। इसका मतलब यह है कि जो दवाएं अब तक केवल मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में मिलती थीं, वे सुविधा अब जिला अस्पतालों में भी मरीजों को मिलेंगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने के बावजूद दवाओं की कमी के कारण गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता था। दवाओं की उपलब्धता बढ़ने से अब अधिकतर मरीजों का इलाज जिला अस्पतालों में ही संभव हो सकेगा, जिससे मेडिकल कॉलेजों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा। केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत लिया गया फैसला यह निर्णय केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इंडियन प्राइमरी हेल्थ सिस्टम के तहत लिया गया है। इस प्रणाली के अनुसार गांव-गांव के अस्पतालों में अधिकतम दवाएं उपलब्ध कराना अनिवार्य है। राज्य सरकार ने इसी दिशा में कदम उठाते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का फैसला किया है। उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी बढ़ेंगी सुविधाएं अब उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी केवल सामान्य दवाओं तक सीमित व्यवस्था नहीं रहेगी। यहां 146 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें एंटीबायोटिक और दर्द निवारक इंजेक्शन भी शामिल होंगे। इससे उप स्वास्थ्य केंद्रों में वही सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित थीं। सीएचओ देंगे दवाएं, जांच जरूरी राज्य के सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) मरीजों को शुगर और थायराइड जैसी बीमारियों की दवाएं देंगे। हालांकि, मरीज को कम से कम एक बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना अनिवार्य होगा। ग्रामीण मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत स्वास्थ्य संचालक संजीव झा ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में दवाओं की कमी से मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब गंभीर बीमारियों की दवाएं नजदीक मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी। इस नई व्यवस्था की नियमित समीक्षा भी की जाएगी और यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर किया जाएगा, ताकि यह सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर सके।

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रायपुर में संदिग्ध हालात में युवक का शव बरामद, हादसे से मौत की आशंका

राजधानी रायपुर के विधानसभा थाना क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक झारखंड का रहने वाला बताया जा रहा है और मजदूरी के सिलसिले में रायपुर आया हुआ था। युवक के पैर में गंभीर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे पुलिस को आशंका है कि उसकी मौत सड़क दुर्घटना में हुई हो सकती है। हालांकि, मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने मृतक की पहचान शुभम राणा (25) के रूप में की है, जो झारखंड के देवघर जिले का निवासी था। वह रायपुर में एक निर्माणाधीन मकान में कारपेंटरी का काम कर रहा था और अन्य मजदूरों के साथ वहीं रह रहा था। जानकारी के मुताबिक, शुभम बीती रात करीब 11 बजे अपने कमरे से बाहर निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। अगले दिन जब उसके साथ काम करने वाले मजदूरों ने आसपास तलाश शुरू की, तो पास ही स्थित एक निर्माणाधीन मकान के नजदीक उसका शव पड़ा मिला। शव देखते ही साथी मजदूर घबरा गए और तत्काल पुलिस को सूचना दी। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस सूचना मिलते ही विधानसभा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में मामला दुर्घटना से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, क्योंकि शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। परिजनों ने जताई संदेह, जांच की मांग घटना की जानकारी मिलते ही मृतक के परिजन झारखंड से रायपुर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि शुभम का किसी से कोई विवाद नहीं था और उसकी मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। विधानसभा थाना पुलिस ने बताया कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है। इसके साथ ही शुभम के साथ काम करने वाले साथियों और परिचितों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।

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रायपुर में स्विगी डिलीवरी बॉय से चाकू की नोक पर लूट, ऑर्डर कैंसल के बहाने दिया वारदात को अंजाम

राजधानी रायपुर में देर रात फूड डिलीवरी बॉय के साथ लूट की सनसनीखेज घटना सामने आई है। सडडू बाजार चौक के पास दो युवकों ने स्विगी डिलीवरी कर्मचारी को चाकू दिखाकर डराया और उसका मोबाइल फोन व नकदी लूटकर मौके से फरार हो गए। मामले में विधानसभा थाना पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित की पहचान तोष यादव के रूप में हुई है, जो मूल रूप से महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छोटे टेमरी का निवासी है। वर्तमान में वह रायपुर के भैरव नगर, संतोषी नगर इलाके में किराए पर रहकर स्विगी में डिलीवरी का काम करता है। पीड़ित के मुताबिक, 4 जनवरी की रात करीब 1:30 बजे उसे शंकर नगर स्थित बर्गर किंग से एक पार्सल डिलीवरी का ऑर्डर मिला था। निर्धारित समय पर वह करीब 2 बजे सडडू बाजार चौक स्थित लोकेशन पर पहुंचा, जहां दो युवक उसका इंतजार कर रहे थे। पार्सल देने के बाद आरोपियों में से एक युवक ने ऑर्डर कैंसल कराने की बात कहते हुए अचानक जेब से बटनदार चाकू निकाल लिया और उसे डराने लगा। इसी दौरान दूसरे आरोपी ने पीछे से पकड़ लिया। दोनों ने मिलकर उसका मोबाइल फोन छीन लिया और जेब में रखे 500 रुपये भी लूट लिए। धमकी देकर फरार हुए आरोपी, सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस लूट के बाद आरोपियों ने पुलिस में शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी और मौके से फरार हो गए। घटना से डरा-सहमा डिलीवरी बॉय किसी तरह परिचितों की मदद से घर पहुंचा और बाद में थाने जाकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

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कानपुर-वाराणसी मॉडल पर रायपुर में लागू होगा पुलिस कमिश्नरी सिस्टम, एक जिले में दोहरी पुलिस व्यवस्था की तैयारी

छत्तीसगढ़ में पहली बार राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी से प्रभावी हो सकती है। इसे लेकर गृह विभाग द्वारा विस्तृत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। मंत्री परिषद की बैठक के बाद सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 22 शहरी थानों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जाएगा। वहीं, ग्रामीण इलाकों के 15 थानों के लिए अलग से ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति की जाएगी। इस तरह एक ही जिले में दो अलग-अलग पुलिस व्यवस्थाएं लागू होंगी। यह मॉडल पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर और वाराणसी में लागू किया गया था, लेकिन वहां इसे व्यावहारिक कठिनाइयों और समन्वय की कमी के चलते असफल माना गया। बाद में यूपी सरकार ने पूरे जिले में एक समान कमिश्नरी सिस्टम लागू कर दिया था। अब इसी मॉडल को रायपुर में लागू करने की तैयारी को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी पुलिस व्यवस्था से अपराध नियंत्रण, वीआईपी सुरक्षा और जांच प्रक्रिया में कई तरह की जटिलताएं सामने आ सकती हैं। शहरी-ग्रामीण विभाजन से सामने आ सकती हैं ये समस्याएं 1. वीआईपी मूवमेंट में बढ़ेगी जटिलताअगर कमिश्नरी सिस्टम केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहता है, तो पुराने रायपुर से नवा रायपुर के बीच वीआईपी मूवमेंट के दौरान दो अलग-अलग कारकेड लगाने पड़ेंगे। नगर निगम सीमा तक कमिश्नरी पुलिस और उसके आगे ग्रामीण पुलिस द्वारा सुरक्षा संभालने की व्यवस्था करनी होगी। 2. प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बंटेगी दो हिस्सों मेंइस प्रस्तावित सिस्टम में एयरपोर्ट ग्रामीण एसपी के अधिकार क्षेत्र में रहेगा। वहीं सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास, राजभवन और मंत्री बंगलों की सुरक्षा पुलिस कमिश्नर के जिम्मे होगी। दूसरी ओर, नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास, विधानसभा, मंत्रालय और सचिवालय की सुरक्षा ग्रामीण एसपी के अधीन रहेगी। 3. अपराध की जांच में सीमा विवादहत्या, लूट, डकैती जैसी गंभीर वारदातों में शहरी और ग्रामीण सीमा को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है। सीमावर्ती इलाकों में घटना होने पर जांच एजेंसी तय करने में देरी और आपसी समन्वय की समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रशासनिक अनुमतियों के लिए शासन स्तर पर निर्भरता बढ़ेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ओपी सिंह के अनुसार, कमिश्नरी सिस्टम तभी प्रभावी होता है जब पूरे जिले में एक समान व्यवस्था लागू हो। पुलिस कमिश्नर को धारा 144 लागू करने, हथियार लाइसेंस, जिला बदर और आबकारी से जुड़े अधिकार मिलने चाहिए। उनका मानना है कि आईजी या एडीजी रैंक के अधिकारियों को ही पुलिस कमिश्नर बनाया जाना चाहिए, ताकि अनुभव के आधार पर बेहतर निर्णय लिए जा सकें। एक शहर, दो पुलिसिंग पर सवाल स्थानीय विशेषज्ञों और पत्रकारों का कहना है कि एक ही शहर में दो तरह की पुलिसिंग व्यवस्था प्रशासनिक भ्रम और जवाबदेही का संकट पैदा कर सकती है। नवा रायपुर जैसे आधुनिक और विकसित क्षेत्र को ग्रामीण श्रेणी में रखना व्यावहारिक रूप से उचित नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का तर्क है कि जब राजधानी, कलेक्टर और प्रशासनिक ढांचा एक है, तो पुलिस व्यवस्था भी एक समान होनी चाहिए। अन्यथा पुलिस सुधार के नाम पर यह व्यवस्था आधा-अधूरा प्रयोग साबित हो सकती है। भारत में पुलिसिंग के दो प्रमुख मॉडल भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो प्रणालियों पर आधारित है—सुपरिटेंडेंट सिस्टम, जो छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लागू होता है, जहां कानून-व्यवस्था के अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास होते हैं।वहीं कमिश्नरेट सिस्टम बड़े शहरों में लागू होता है, जिसमें पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर भी दी जाती है और वे सीधे कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखते हैं।

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छत्तीसगढ़ में पहली बार सामने आया दुर्लभ मामला: ब्रश करते समय फट गई गर्दन की नस, 6 घंटे की जटिल सर्जरी से बची जान

छत्तीसगढ़ की राजधानी में मेडिकल साइंस का एक अत्यंत दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां 40 वर्षीय युवक की गर्दन की प्रमुख धमनी कैरोटिड आर्टरी अचानक फट गई। हैरानी की बात यह रही कि यह घटना किसी दुर्घटना या बीमारी से नहीं, बल्कि साधारण रूप से ब्रश करते समय हल्का स्ट्रेन पड़ने से हुई। घटना के दौरान युवक को अचानक गले में तेज दर्द हुआ और गर्दन तेजी से सूजने लगी। कुछ ही देर में उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। परिजन उसे तुरंत मेकाहारा अस्पताल के इमरजेंसी विभाग लेकर पहुंचे। प्राथमिक जांच के बाद मरीज को हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में रेफर किया गया। जांच में सामने आई गंभीर स्थिति डॉक्टरों ने मरीज की तत्काल सीटी एंजियोग्राफी कराई, जिसमें पता चला कि उसकी दाईं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी है और उसके आसपास गुब्बारे जैसी संरचना बन गई है। इस स्थिति को कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म कहा जाता है, जिसमें कुछ ही मिनटों में मरीज की जान जा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार यह मामला स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर का है, जो पूरी दुनिया में अब तक गिने-चुने मामलों में दर्ज किया गया है। यह दुनिया का लगभग 10वां और छत्तीसगढ़ का पहला मामला बताया जा रहा है। हर पल जोखिम भरा था ऑपरेशन मरीज को बचाने के लिए डॉक्टरों ने बिना देरी किए सर्जरी का फैसला लिया। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गर्दन में अत्यधिक रक्तस्राव के कारण फटी धमनी को पहचानना था। जरा सी चूक से स्ट्रोक या ब्रेन डेड होने का खतरा बना हुआ था। करीब 6 घंटे तक चली अत्यंत जटिल सर्जरी में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की मदद से धमनी की सफल मरम्मत की गई। राहत की बात यह रही कि सर्जरी के बाद मरीज को लकवे का कोई लक्षण नहीं हुआ और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। डॉक्टरों की टीम ने रचा मेडिकल इतिहास इस सफल ऑपरेशन का नेतृत्व मुख्य सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू ने किया। टीम में कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. संकल्प दीवान, डॉ. बालस्वरूप साहू, जूनियर डॉक्टर आयुषी, अंशिका, ख्याति, आकांक्षा साहू, डॉ. संजय, डॉ. ओमप्रकाश समेत नर्सिंग स्टाफ और तकनीशियन शामिल रहे। सभी के समन्वित प्रयास से मरीज को नई जिंदगी मिल सकी। क्या है स्पॉन्टेनियस कैरोटिड आर्टरी रप्चर? कैरोटिड आर्टरी गर्दन की मुख्य धमनी होती है, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाती है। सामान्यतः यह धमनी दुर्घटना, संक्रमण, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर या एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण फटती है। लेकिन बिना किसी स्पष्ट कारण के इसका फटना मेडिकल दुनिया में बेहद दुर्लभ माना जाता है और यह जानलेवा हो सकता है।

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तीसरे बजट सत्र की तैयारी में साय सरकार, आज से मंत्रियों के साथ वन-टू-वन बैठकें शुरू

छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तीसरे बजट की तैयारियों को रफ्तार दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार इस बजट के जरिए विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में वित्त विभाग ने मंत्री-स्तरीय बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया है। 6 से 9 जनवरी तक चलने वाली इन बैठकों की अध्यक्षता वित्त मंत्री ओपी चौधरी करेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग मंत्रियों से वन-टू-वन चर्चा कर उनके विभागों के बजट प्रस्तावों और प्राथमिकताओं की समीक्षा करेंगे। पहले दिन 4 मंत्री रखेंगे विभागीय प्रस्ताव मंगलवार को पहले दिन चार मंत्री अपने-अपने विभागों के बजट प्रस्ताव वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। 📅 6 जनवरी की बैठक का कार्यक्रम 📅 7 जनवरी का शेड्यूल 📅 8 जनवरी की बैठक 8 जनवरी को उप मुख्यमंत्री अरुण साव की अध्यक्षता में लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खेल एवं युवा कल्याण तथा नगरीय प्रशासन विभागों के बजट प्रस्तावों पर चर्चा होगी।इसके बाद दोपहर 2.30 बजे स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग और विधि-विधायी विभागों के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। 📅 9 जनवरी का कार्यक्रम सरकार का उद्देश्य इन बैठकों के माध्यम से बजट को ज़मीनी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि राज्य के विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को नई दिशा दी जा सके।

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छत्तीसगढ़ की वोटर लिस्ट में फिर बढ़ेगी मतदाताओं की संख्या, 2.74 लाख से ज्यादा लोगों ने दोबारा आवेदन किया

छत्तीसगढ़ में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कार्यक्रम पूरा होने के बाद मतदाता सूची को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जहां 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग अपने नाम दोबारा जुड़वाने के लिए सामने आ रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR प्रक्रिया के बाद प्रदेश में कुल 2 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 मतदाता दर्ज किए गए थे। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जिन मतदाताओं के नाम लिस्ट से बाहर हो गए थे, उनके लिए दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके तहत अब तक 2 लाख 74 हजार से ज्यादा लोगों ने अपने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए आवेदन फॉर्म भरे हैं। 45 दिन चला घर-घर सत्यापन अभियान यह विशेष अभियान 7 नवंबर से करीब 45 दिनों तक चला, जिसमें बूथ लेवल अधिकारियों ने प्रदेशभर में घर-घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान मृत मतदाता, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोग, दोहरी प्रविष्टि वाले नाम और अपात्र मतदाताओं को सूची से हटाया गया। किन कारणों से हटे नाम निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए कुल 27,34,817 नामों में शामिल हैं— दावा-आपत्ति की समय-सीमा जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं हैं, उन्हें चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी कर दोबारा नाम जुड़वाने का अवसर दिया जा रहा है। अब तक फार्म-7 के जरिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनकी जांच और स्क्रूटनी के बाद योग्य पाए गए मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। निर्वाचन आयोग का बयान निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि SIR अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट गए हैं, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। सभी जिलों के कलेक्टरों और निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी रखा जाए। आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम अवश्य जांचें। अंतिम सूची जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ में मतदाताओं की संख्या में एक बार फिर बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।

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रायपुर: बच्चा चोरी के शक में महिला के साथ मारपीट, कॉलोनी में मचा हंगामा; पुलिस ने भीड़ से बचाया

रायपुर के खम्हारडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत पार्वती नगर कॉलोनी में बच्चा चोरी के संदेह को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। कॉलोनी में घूम रही एक महिला पर स्थानीय लोगों ने बच्चा चोरी का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला कॉलोनी में संदिग्ध अवस्था में घूम रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने उस पर शक जताया, जिसके बाद मौके पर भीड़ जमा हो गई। बिना किसी पुष्टि के लोगों ने महिला से पूछताछ शुरू की और बाद में उसके साथ हाथापाई करने लगे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घटना के दौरान मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली सूचना मिलते ही खम्हारडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने भीड़ से महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वह खतरे से बाहर है। बच्चा चोरी की पुष्टि नहीं, जांच जारी पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक बच्चा चोरी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है कि महिला किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल थी या नहीं। साथ ही पुलिस ने यह भी कहा है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और किसी संदिग्ध स्थिति में सीधे पुलिस को सूचना दें।

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