January 2026

रायपुर हेलीपैड के पास मेडिकल वेस्ट का ढेर: सैकड़ों PPE किट खुले में फेंकी गईं, कोरोना काल की खरीद होने की आशंका

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मेडिकल वेस्ट के लापरवाह निपटान का एक गंभीर मामला सामने आया है। हेलीपैड के पास स्थित खाली जमीन पर सैकड़ों की संख्या में PPE किट खुले में फेंकी गई हैं। स्थानीय लोगों ने जब मौके पर बड़ी मात्रा में बिखरी PPE किट देखीं, तब इस मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ये PPE किट कोरोना महामारी के दौरान खरीदी गई हो सकती हैं। घटनास्थल पर कई किट पैक हालत में तो कुछ खुले और पुराने रूप में पाई गई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मेडिकल सामग्री लंबे समय से यहां पड़ी थी, लेकिन हाल के दिनों में इसकी मात्रा अचानक बढ़ गई है। मेडिकल वेस्ट जलाने की भी सूचना स्थानीय लोगों का दावा है कि इनमें से कुछ PPE किट को मेडिकल कचरे के साथ जलाए जाने की भी जानकारी मिली है। यदि यह बात सही पाई जाती है, तो यह पर्यावरण नियमों का गंभीर उल्लंघन है। नियमों के अनुसार, मेडिकल वेस्ट को खुले स्थान पर जलाना प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे जहरीली गैसें निकलती हैं और सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा होता है। प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल राजधानी के एक संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र के पास इस तरह से PPE किट का खुले में पड़ा होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। हेलीपैड जैसे महत्वपूर्ण स्थान के नजदीक बड़ी मात्रा में मेडिकल सामग्री का डंप होना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये PPE किट किस विभाग या संस्था से संबंधित हैं। यह भी जांच का विषय है कि यह सरकारी खरीदी का हिस्सा थीं या किसी निजी एजेंसी द्वारा यहां लाकर फेंकी गईं। स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि PPE किट प्लास्टिक और सिंथेटिक पदार्थों से बनी होती हैं, जिन्हें खुले में छोड़ना या जलाना पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है। यदि इनमें से कोई किट पहले इस्तेमाल की गई हो, तो संक्रमण फैलने का खतरा भी पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। जांच और कार्रवाई की मांग तेज मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि कोरोना काल की मेडिकल सामग्री को इस तरह खुले में फेंकना या जलाना नियमों के साथ-साथ जनता के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और यह स्पष्ट हो पाता है या नहीं कि सैकड़ों PPE किट आखिर यहां कैसे और किसके निर्देश पर डंप की गईं।

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खरोरा पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 4 किलो से अधिक गांजा जब्त, ओडिशा से ला रहे दो अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान के तहत खरोरा पुलिस ने 5 जनवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए 4.256 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। इस मामले में दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो ओडिशा से गांजा लेकर छत्तीसगढ़ आ रहे थे। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 1.65 लाख रुपए आंकी गई है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम तुलसी डहरिया निवासी राकेश सिंह ठाकुर एक ओडिशा के गांजा तस्कर के साथ नीले रंग की बिना नंबर वाली स्कूटी से कोसरंगी रोड होते हुए घिवरा पुलिया की ओर आ रहा है। सूचना मिलते ही खरोरा पुलिस टीम ने ग्राम घिवरा नहर पुलिया के पास घेराबंदी कर दी। नुवापाड़ा, ओडिशा का रहने वाला आरोपी कुछ समय बाद एक स्कूटी पर दो युवक आते हुए दिखाई दिए, जिन्हें पुलिस ने मौके पर रोका। पूछताछ में स्कूटी चला रहे युवक ने अपना नाम राकेश सिंह ठाकुर (38 वर्ष) बताया, जबकि पीछे बैठे युवक की पहचान पिंटू सतनामी (21 वर्ष), निवासी भलेसर भूतकायरा, बेलटुकरी, जिला नुवापाड़ा, ओडिशा के रूप में हुई। सफेद प्लास्टिक बैग से मिला गांजा तलाशी के दौरान स्कूटी की डिक्की में रखे सफेद प्लास्टिक के झोले से खाकी टेप से लिपटा गांजा का पैकेट बरामद किया गया। वहीं दूसरे आरोपी पिंटू सतनामी के हाथ में रखे सफेद प्लास्टिक बैग से भी इसी तरह पैक किया हुआ गांजा मिला। 1.65 लाख रुपए का माल जब्त दोनों आरोपियों के पास से कुल 4.256 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया, जिसकी कीमत करीब 85,120 रुपए बताई जा रही है। इसके साथ ही गांजा परिवहन में इस्तेमाल की गई स्कूटी भी जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 80,000 रुपए है। इस तरह कुल जब्त संपत्ति का मूल्य 1,65,120 रुपए आंका गया है। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(बी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।

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NDPS मामलों में सख्ती: रायपुर कोर्ट ने तीन दोषियों को सुनाई कड़ी सजा, कैप्सूल तस्करों को 10-10 साल जेल

नशीले पदार्थों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए रायपुर की विशेष अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। ट्रामाडोल कैप्सूल की अवैध तस्करी के मामले में दो आरोपियों को 10-10 वर्ष की सश्रम कैद दी गई है, जबकि 7 किलो से अधिक गांजा रखने के दोषी एक युवक को 7 साल की सजा सुनाई गई है। मामला-1: ट्रामाडोल कैप्सूल बेचते पकड़े गए दो आरोपी विशेष लोक अभियोजक के.के. चंद्राकर के अनुसार, 19 अक्टूबर 2022 को थाना टिकरापारा क्षेत्र में सहायक उपनिरीक्षक विजय नेताम को सूचना मिली थी कि हनुमान नगर, पुराने धमतरी रोड पर दो युवक नशीली कैप्सूल की बिक्री के लिए खड़े हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने स्वतंत्र गवाहों के साथ मौके पर दबिश दी और घेराबंदी कर दोनों संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ में उनकी पहचान एहसान खान उर्फ एहसान और सरफराज खान उर्फ शाहरुख के रूप में हुई। तलाशी के दौरान दोनों के पास से काले रंग के बैग में रखे ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए गए। प्रत्येक आरोपी के कब्जे से 144-144 कैप्सूल मिले। आरोपियों के पास न तो किसी तरह का लाइसेंस था और न ही डॉक्टर का कोई वैध पर्चा। पुलिस ने मौके पर ही कैप्सूल को सील कर जब्त किया और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 साल की सश्रम कैद की सजा सुनाई। मामला-2: 7.206 किलो गांजा के साथ युवक गिरफ्तार दूसरा मामला थाना सरस्वती नगर क्षेत्र से जुड़ा है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने परशुराम चौक, कोटा स्टेडियम के सामने रेड कार्रवाई की। यहां एक संदिग्ध युवक को रोका गया, जिसने अपना नाम भार्गव तांडी उर्फ चीकू तांडी बताया। एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए तलाशी ली गई। आरोपी की मोटरसाइकिल से खाकी पॉलीथिन में पैक गांजा बरामद हुआ, जिसका कुल वजन 7.206 किलोग्राम पाया गया। मौके पर ही सैंपलिंग और सीलिंग की गई। एफएसएल रायपुर की रिपोर्ट में गांजा होने की पुष्टि के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई।

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बोर्ड परीक्षा से पहले छात्रों को मानसिक संबल: CBSE ने शुरू की साइको-सोशल काउंसलिंग सेवा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए निःशुल्क साइको-सोशल काउंसलिंग सेवा के पहले चरण की शुरुआत कर दी है। यह सेवा 6 जनवरी 2026 से 1 जून 2026 तक जारी रहेगी। CBSE के मुताबिक, इस पहल का मुख्य उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों में होने वाले तनाव, चिंता और भावनात्मक दबाव को कम करना है। ताकि 17 फरवरी 2026 से शुरू होने वाली परीक्षाओं में छात्र आत्मविश्वास और सकारात्मक मानसिकता के साथ शामिल हो सकें। इस योजना का लाभ रायपुर के 86 CBSE स्कूलों के छात्रों को भी मिलेगा। 📞 24×7 टोल-फ्री हेल्पलाइन उपलब्ध छात्र और अभिभावक किसी भी समय 1800-11-8004 पर कॉल कर सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यह IVRS आधारित सेवा हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। इसके तहत— 🧠 टेली-काउंसलिंग: विशेषज्ञों से सीधी बातचीत सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक, छात्र और उनके अभिभावक टेली-काउंसलिंग का लाभ ले सकते हैं। इस सेवा में कुल 73 प्रशिक्षित विशेषज्ञ शामिल हैं, जिनमें CBSE स्कूलों के प्राचार्य, काउंसलर, विशेष शिक्षक और प्रोफेशनल मनोवैज्ञानिक शामिल हैं। ये विशेषज्ञ भारत के साथ-साथ नेपाल, जापान, कतर, ओमान और यूएई से भी जुड़े हुए हैं। 🌐 ऑनलाइन स्टडी और स्ट्रेस मैनेजमेंट सामग्री CBSE की आधिकारिक वेबसाइट www.cbse.gov.in पर छात्रों के लिए स्ट्रेस मैनेजमेंट, प्रभावी अध्ययन तकनीक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा डिजिटल कंटेंट उपलब्ध कराया गया है, जिसे सरल भाषा में तैयार किया गया है। 📢 CBSE की अपील बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे परीक्षा अवधि के दौरान इन सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि परीक्षा के दबाव को सकारात्मक रूप से संभाला जा सके और बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

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शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा: रायपुर में 2 करोड़ की ठगी, ओडिशा के कारोबारी से कैश लेकर फरार हुए ठग

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 2 करोड़ रुपए की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। ओडिशा के कालाहांडी जिले के एक कारोबारी से आरोपियों ने कैश में यह रकम हासिल की और फिर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर देवेंद्र नगर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित कारोबारी नेमीचंद जैन के मुताबिक, नवंबर 2025 में उनके मोबाइल फोन पर एक टेलीग्राम ग्रुप का लिंक आया था। ग्रुप में दावा किया गया था कि टाटा कंसलटेंसी के नाम पर निवेश करने पर मात्र 10 दिनों में भारी मुनाफा मिलेगा। 1 लाख रुपए के निवेश पर 30 हजार रुपए प्रॉफिट का लालच दिया गया। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए आरोपियों ने कारोबारी को 30 हजार रुपए का मुनाफा भी दिखाया। इसके बाद उससे बड़ी रकम निवेश करने के लिए लगातार कॉल आने लगे। ठगों के झांसे में आकर कारोबारी ने अपने साले से 2 करोड़ रुपए उधार लिए और रायपुर आकर एक होटल में आरोपियों को कैश सौंप दिया। रकम मिलने के बाद आरोपी लगातार टालमटोल करने लगे और कुछ दिनों बाद अचानक संपर्क तोड़कर फरार हो गए। खुद को ठगा महसूस होने पर पीड़ित ने रायपुर के देवेंद्र नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि मामला संगठित साइबर और निवेश फ्रॉड से जुड़ा हो सकता है। आरोपियों की तलाश की जा रही है और बैंकिंग व डिजिटल लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

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शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप, DEO ने किया निलंबित

मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। लोरमी विकासखंड के लखासर स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में पदस्थ सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलम के शराब के नशे में स्कूल पहुंचने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया और मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल सख्त कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। वीडियो में शिक्षक की हालत नशे में होने जैसी नजर आ रही है। वायरल वीडियो के बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने मामले की प्राथमिक जांच कर इसकी पुष्टि की और तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली एल.पी. डाहिरे को सूचना देते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। सरकारी सेवा नियमों का उल्लंघन प्रारंभिक जांच में सामने आया कि शराब के नशे में स्कूल आना न केवल शासकीय सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन है, बल्कि इससे छात्रों की सुरक्षा, अनुशासन और शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर भी सीधा असर पड़ता है। शिक्षा विभाग ने इस कृत्य को विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है। नियमों के तहत किया गया निलंबन जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 (1), (2) और (3) का उल्लंघन करार दिया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (नियंत्रण, वर्गीकरण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(ए) के तहत सहायक शिक्षक लक्ष्मण कोलम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में अनुशासन और बच्चों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इस तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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कवासी लखमा से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल का हमला, ईडी–ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर उठाए सवाल

रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद पूर्व आबकारी मंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता कवासी लखमा से मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ठोस सबूतों के लखमा और अन्य लोगों को परेशान किया जा रहा है और यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि फिलहाल कवासी लखमा का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें जेल में जरूरी दवाइयां मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछली मुलाकात के दौरान लखमा को सीने और पैर में दर्द की शिकायत थी, जिसके बाद उन्होंने डीजीपी को पत्र लिखकर मेडिकल जांच की मांग की थी। इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा जांच कर इलाज कराया गया। जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव का आरोप भूपेश बघेल ने कहा कि सबसे गंभीर विषय यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस और तथ्यात्मक सबूतों का अभाव है, इसके बावजूद लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे केवल परेशान करने और दबाव बनाने की रणनीति बताया। पूर्व मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत के निर्देश पर अपनी फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, लेकिन आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि बार-बार प्रोडक्शन वारंट जारी कर कवासी लखमा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि आदिवासी नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश का हिस्सा है। ‘एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर समझ रही हैं’ भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कुछ जांच एजेंसियां खुद को अदालत से ऊपर मानने लगी हैं, जो लोकतंत्र और कानून व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया जाएगा, तो यह न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर तंज डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं के मुंह से अनजाने में सच्चाई निकल रही है। उन्होंने कहा कि अरुण साव, केदार कश्यप और रामविचार नेताम जैसे नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि कवासी लखमा एक निर्दोष आदिवासी नेता हैं, जो पिछले एक साल से जेल में बंद हैं। भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि जब खुद भाजपा नेता उन्हें निर्दोष मान रहे हैं, तो फिर ईओडब्ल्यू की कार्रवाई आखिर किस आधार पर जारी है। आदिवासी राजनीति से जुड़ा मामला राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कवासी लखमा का मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। भूपेश बघेल के लगातार आक्रामक बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक विषय बना सकती है। आदिवासी समाज में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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बिलासपुर के मोपका सब स्टेशन में भीषण आग, आधे शहर की बिजली आपूर्ति ठप, मची अफरा-तफरी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में सोमवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मोपका क्षेत्र स्थित शहर के सबसे बड़े और पुराने बिजली सब स्टेशन में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेज थी कि उसकी लपटें दूर-दूर तक दिखाई दीं। घटना के चलते शहर के बड़े हिस्से की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई, जिससे आधे शहर में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। बिजली विभाग के अधिकारी और प्रशासनिक अमला भी मौके पर मौजूद है। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं मिली है। आग से प्रभावित हुई बिजली आपूर्ति प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 25 साल पुराना यह सब स्टेशन 480 मेगावॉट क्षमता का है। इसमें से लगभग 320 मेगावॉट बिजली बिलासपुर शहर के बड़े हिस्से को सप्लाई की जाती है। आग लगते ही सुरक्षा के मद्देनजर बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई, जिससे आवासीय इलाकों, बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में अचानक अंधेरा छा गया। बिजली गुल होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। दुकानों में काम ठप हो गया, वहीं घरों में भी अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, बिजली विभाग और प्रशासन की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद नुकसान का आकलन किया जाएगा और जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे।

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रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे भूपेश बघेल, बोले– अगर मेरे हाथ में होता तो बेटा जेल ही नहीं जाता

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को रायपुर सेंट्रल जेल पहुंचे, जहां उन्होंने शराब घोटाले के मामले में बंद पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा से मुलाकात की। जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए भूपेश बघेल ने जांच एजेंसियों और भाजपा पर तीखा हमला बोला। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियां राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने अपने बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि उन्होंने अपने बेटे को जेल से छुड़वा लिया, जबकि हकीकत यह है कि उसे अदालत से जमानत मिली है। पूर्व सीएम ने कहा, “अगर मेरे हाथ में होता, तो मेरा बेटा जेल जाता ही नहीं। कोर्ट ने जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई, तभी जाकर उसे जमानत मिली।” कवासी लखमा को लंबे समय तक जेल में रखने की कोशिश भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि कवासी लखमा को जानबूझकर लंबे समय तक जेल में रखने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में समय पर जवाब दाखिल नहीं किया, जिससे मामले का फैसला टल गया। उन्होंने दावा किया कि यदि एजेंसी समय पर जवाब पेश करती, तो 17 दिसंबर को ही निर्णय आ सकता था। लेकिन जवाब रोका गया ताकि लखमा को जेल में रखा जा सके। भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि उनके बयानों से सच्चाई सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब कवासी लखमा को निर्दोष बताया जा रहा है, तो फिर EOW और ED की कार्रवाई क्यों जारी है। साथ ही भाजपा नेताओं को “घड़ियाली आंसू” न बहाने की सलाह दी। कौन हैं कवासी लखमा कवासी लखमा बस्तर अंचल के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। वे सुकमा जिले की कोंटा विधानसभा सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2013 के दरभा घाटी नक्सली हमले में वे उन नेताओं में शामिल थे, जो जीवित बच पाए थे। 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद उन्हें आबकारी मंत्री बनाया गया था। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों में से गिने-चुने नेता ही अपनी सीट बचा पाए, जिनमें कवासी लखमा भी शामिल रहे। क्या है छत्तीसगढ़ शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी का दावा है कि करीब 3,200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। इस मामले में एसीबी में दर्ज FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों के नाम शामिल हैं। ED के अनुसार, पूर्ववर्ती भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

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रायगढ़ में बंद मकानों को बनाया निशाना, दो घरों से नकदी व जेवरात समेत 2.10 लाख की चोरी

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में चोरों ने त्योहार के दौरान सूने पड़े मकानों को निशाना बनाते हुए दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम दिया है। अज्ञात चोरों ने दोनों घटनाओं में कुल 2 लाख 10 हजार रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया। दोनों ही परिवार घर में ताला लगाकर त्योहार मनाने बाहर गए हुए थे। मामलों में संबंधित थानों में अपराध दर्ज कर पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। जूटमिल थाना क्षेत्र में पहली वारदात पहली घटना जूटमिल थाना क्षेत्र के मिट्ठुमुड़ा इलाके की है। पीड़ित शिव कुमार साव (42) ने पुलिस को बताया कि वे पीडी कॉमर्स कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं। शनिवार सुबह वे अपने परिवार के साथ बड़े भंडार पर्व मनाने के लिए घर बंद कर बाहर गए थे। सोमवार को घर लौटने पर उन्होंने देखा कि कमरे का ताला टूटा हुआ है और घर का सामान बिखरा पड़ा है। अलमारी का लॉकर भी तोड़ दिया गया था, जिसमें रखे 80 हजार रुपये नकद और करीब 1 लाख 20 हजार रुपये कीमत के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो चुके थे। आसपास पूछताछ के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो उन्होंने जूटमिल थाने में शिकायत दर्ज कराई। कोतवाली थाना क्षेत्र में दूसरी चोरी दूसरी चोरी की घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के रामभांठा इलाके में सामने आई है। यहां रहने वाले अनिल कुजूर (52) जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कार्यरत हैं। वे 26 दिसंबर को अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए अपने गृह ग्राम बासाडीह, जिला जशपुर चले गए थे। अगले दिन मकान मालिक से उन्हें सूचना मिली कि घर का ताला टूटा हुआ है। रायगढ़ लौटने पर उन्होंने पाया कि अलमारी का लॉकर तोड़ा गया है और उसमें रखे करीब 90 हजार रुपये के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो गए हैं। इसके बाद अनिल कुजूर ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में जुटी दोनों मामलों में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। घटनास्थलों के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही चोरों को गिरफ्तार कर चोरी का खुलासा किया जाएगा।

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