Raipur Nagar Nigam

रायपुर में सड़क चौड़ीकरण अभियान तेज, गोगांव मार्ग से हटाए गए 17 अवैध निर्माण

रायपुर नगर निगम ने शहर में सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण कार्य को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में गोगांव अंडरब्रिज से गोगांव पानी टंकी तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण कार्य में बाधा बन रहे अवैध निर्माणों को हटाया गया। निगम की टीम ने अभियान चलाकर करीब 17 छोटी और बड़ी दुकानों समेत कई अस्थायी कब्जों को हटाया। नगर निगम के अनुसार इस मार्ग पर 15वें वित्त आयोग मद से सड़क चौड़ीकरण और नाली निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है। लेकिन सड़क किनारे बनी दीवारें, पाटा, सीढ़ियां, ठेले और गुमटियां निर्माण कार्य में रुकावट पैदा कर रही थीं। इसके बाद निगम प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान नगर निगम जोन-1 की टीम और अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इस अभियान में कार्यपालन अभियंता द्रोणी कुमार पैकरा, सहायक अभियंता शरद देशमुख और शैलेंद्र पटेल, उप अभियंता अर्जिता दीवान, अंकिता सोनवर्षा और इम्तियाज अहमद सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे। इससे पहले नगर निगम ने गोंदवारा क्षेत्र में होटल पैराडाइज से गोंदवारा अंडरब्रिज तक भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। उस दौरान करीब 20 अवैध कब्जे हटाए गए थे और 15 अवैध पाटों को तोड़ा गया था। निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़क किनारे किए गए अवैध कब्जों को हटाने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को आने-जाने में राहत मिलेगी। साथ ही नालियों पर बने अवैध पाटों को हटाने से सफाई कार्य में भी आसानी होगी, जिससे जलभराव और गंदगी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान के तहत शहर में आगे भी अवैध कब्जों और यातायात बाधाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

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रायपुर कलेक्ट्रेट पार्किंग में अवैध वसूली का खुलासा, बिना टेंडर चल रहा खेल

रायपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मल्टीलेवल पार्किंग में अवैध वसूली और संदिग्ध गतिविधियों का मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की उड़नदस्ता टीम और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए छापेमारी की। जांच में पाया गया कि पार्किंग के लिए कोई वैध टेंडर जारी नहीं किया गया था, इसके बावजूद यहां शुल्क वसूला जा रहा था। कार्रवाई के दौरान यह सामने आया कि पार्किंग का संचालन भले ही नगर निगम के पास है, लेकिन वसूली निजी लोगों द्वारा की जा रही थी। मौके पर बिना सीरियल नंबर और बिना सील की पर्चियों के जरिए पैसे वसूले जा रहे थे। कुछ मामलों में क्यूआर कोड के माध्यम से निजी खातों में भुगतान लिया जा रहा था, जिसकी जांच जारी है। छापेमारी के दौरान टीम को कई संदिग्ध दस्तावेज भी मिले। इनमें पूर्व ठेकेदार मोहम्मद शोएब के नाम पर मासिक पास से जुड़े कागजात और एक आर्म्स लाइसेंस मिला, जिस पर किसी प्रकार की आधिकारिक मुहर नहीं थी। पुलिस ने इन दस्तावेजों को जब्त कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। मामले में लापरवाही सामने आने पर निगम के चार कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले यहां पार्किंग निशुल्क थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से दोपहिया और चारपहिया वाहनों से जबरन शुल्क वसूला जा रहा है। कई बार विरोध करने पर बहस की स्थिति भी बन जाती है। बताया जा रहा है कि यह पार्किंग पहले भी विवादों में रह चुकी है, जहां अवैध गतिविधियों और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालिया कार्रवाई के बाद पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है।

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रायपुर में भीषण जल संकट: गिरता भूजल, कई वार्डों में सूखे नल, टैंकर के भरोसे शहर

छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur में इन दिनों गंभीर जल संकट की स्थिति बनी हुई है। लगातार गिरते भूजल स्तर और पाइपलाइन में लो-प्रेशर की समस्या के कारण शहर के कई इलाकों में नलों से पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे आम लोग काफी परेशान हैं। नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति सुधारने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन के इंटर-कनेक्शन से राहत मिली है, लेकिन बढ़ती गर्मी और पानी की मांग ने हालात को और मुश्किल बना दिया है। कई वार्डों में अब पूरी तरह टैंकर के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मार्च से ही शहर के कई हिस्सों में टैंकर नियमित रूप से दौड़ रहे हैं। जहां पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, वहां भी टैंकर के जरिए सप्लाई की जा रही है। अब निजी सोसायटियों से भी पानी के लिए टैंकर की मांग बढ़ने लगी है, जो आने वाले दिनों में प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। जोनवार हालात:जोन-1 के ठक्कर बापा वार्ड के गुलाब नगर, दीक्षानगर और विनायक विहार जैसे इलाके पूरी तरह टैंकर पर निर्भर हैं, जहां रोजाना कई ट्रिप में पानी पहुंचाया जा रहा है। जोन-3 में खम्हारडीह क्षेत्र की स्थिति बेहद खराब है। यहां करीब 30 हजार की आबादी में से अधिकांश लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। कई जगह पाइपलाइन नहीं है और जहां है भी, वहां से पानी नहीं आ रहा। जोन-4 के रविशंकर शुक्ल और ब्राह्मण पारा वार्ड के कई हिस्सों में लो-प्रेशर के कारण जल आपूर्ति प्रभावित है। जोन-5 के चंगोराभाठा क्षेत्र के कई वार्डों में टेल एंड तक पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे लोग परेशान हैं। जोन-6 में महामाया मंदिर वार्ड के कई मोहल्लों में आधे हिस्से तक ही पानी पहुंच पा रहा है। जोन-9 के मोवा, दलदल सिवनी, जोरा-लाभांडी, कचना और सड्‌डू जैसे इलाकों में भीषण जल संकट है। यहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है और कई सोसायटियां टैंकर पर निर्भर हैं। कचना स्थित जीएडी कॉलोनी में हालात ऐसे हैं कि लोगों को टैंकर से पानी लाकर बाल्टी से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचाना पड़ रहा है। बोरवेल की मोटर खराब होने से समस्या और बढ़ गई है, जबकि कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो पाया। नगर निगम का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों को पहले से चिन्हित किया गया है और लो-प्रेशर की समस्या दूर करने के लिए पाइपलाइन इंटर-कनेक्शन का काम जारी है। साथ ही टैंकरों के जरिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

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रायपुर वीआईपी एरिया में जमीन घोटाले का आरोप: होटल और क्लब पर अतिक्रमण के दावे, नाला निर्माण रुका

रायपुर के वीआईपी इलाके में चल रहे नाला निर्माण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आरोप लगाया है कि नाला निर्माण के नाम पर जिस जमीन पर काम शुरू किया गया था, वहां सीमांकन के बाद शासकीय भूमि पर कब्जे का मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है। मामला केवल नाला निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर की सार्वजनिक जमीन और करदाताओं के पैसे के उपयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इलाके के कुछ प्रभावशाली संस्थानों ने नाले की जमीन पर अतिक्रमण कर रखा है, जिससे शहर की जल निकासी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। जानकारी के अनुसार, 9 अप्रैल को नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी और स्थानीय पार्षद रेणु जयंत साहू ने मौके का निरीक्षण किया था और बिना सीमांकन काम शुरू करने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद नगर निगम आयुक्त के निर्देश पर 17 अप्रैल को सीमांकन कराया गया। सीमांकन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई संस्थानों द्वारा शासकीय जमीन पर कब्जा किया गया है। इनमें बेबीलोन होटल पर 0.0100 हेक्टेयर, क्वींस क्लब पर 0.0060 हेक्टेयर और रामस्वरूप निरंजन चैरिटेबल ट्रस्ट पर 0.1100 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण के आरोप सामने आए हैं। वहीं, पार्षद रेणु जयंत साहू ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जोन-9 के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखने के बावजूद सीमांकन जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आसपास चल रहे एक आवासीय प्रोजेक्ट की जमीन को लेकर भी संदेह की स्थिति बनी हुई है। अब नेता प्रतिपक्ष और पार्षद की मांग है कि पारदर्शिता के लिए दोबारा सीमांकन कराया जाए और जांच पूरी होने तक नाला निर्माण शुरू न किया जाए। पूरे मामले में अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है।

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सड़क निर्माण को लेकर कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर का धरना: 11 लाख की मंजूरी न मिलने पर निगम मुख्यालय में अनिश्चितकालीन विरोध

रायपुर नगर निगम में सड़क निर्माण को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। शहीद हवलदार अब्दुल हमीद वार्ड से कांग्रेस पार्षद शेख मुशीर ने मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए राशि स्वीकृत न होने पर नगर निगम मुख्यालय में गांधी जी की प्रतिमा के नीचे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। पार्षद शेख मुशीर का कहना है कि वे पिछले 11 महीनों से अपने वार्ड की जर्जर सड़क के निर्माण के लिए नगर निगम के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की हालत बेहद खराब हो चुकी है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नगर निगम प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। धरने पर बैठे पार्षद ने साफ ऐलान किया है कि जब तक मौदहापारा के मुख्य मार्ग के डामरीकरण के लिए मात्र 11 लाख रुपए की राशि स्वीकृत नहीं की जाती, तब तक वे रोजाना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक गांधी प्रतिमा के नीचे बैठकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते रहेंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि वार्ड में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा हुआ है। धरने को समर्थन देने नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी भी निगम मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि 11 लाख रुपए जैसी छोटी राशि के लिए एक जनप्रतिनिधि को 11 महीनों तक भटकना पड़ रहा है, तो इससे निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि जब छोटे विकास कार्यों की यह स्थिति है, तो शहर के बड़े प्रोजेक्ट्स का हाल समझा जा सकता है।

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शासकीय जमीन पर बने अवैध मकान-दुकानों पर निगम का बुलडोजर, दो जोनों में बड़ी कार्रवाई

रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर ने अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी कार्रवाई की है। निगम आयुक्त विश्वदीप के निर्देश पर शासकीय भूमि पर कब्जा कर बनाए गए मकानों और व्यावसायिक दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया। यह कार्रवाई जोन-9 और जोन-5 क्षेत्र में की गई। जोन-9 में 3000 वर्गफीट सरकारी जमीन कराई गई मुक्त नगर निगम के नगर निवेश विभाग की टीम ने जोन-9 अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 में अभियान चलाकर करीब 3000 वर्गफीट शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। जांच में सामने आया था कि यहां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकान और मकान का निर्माण किया गया था। जोन कमिश्नर अंशुल शर्मा सीनियर के निर्देश पर कार्यपालन अभियंता शरद ध्रुव, सहायक अभियंता सैय्यद जोहेब और उप अभियंता अतुल बंसल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से अवैध निर्माण को तोड़ा गया। जोन-5 में नियमों के विपरीत निर्माण पर चला हथौड़ा इसी तरह जोन-5 क्षेत्र में भी नगर निगम ने अनुमति के विपरीत किए जा रहे निर्माण पर कार्रवाई की। कुशालपुर रिंग रोड नंबर-1 इलाके में निर्माणाधीन भवन को नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तोड़कर हटाया गया। यह कार्रवाई जोन कमिश्नर खीरसागर नायक के निर्देश पर की गई, जिसमें कार्यपालन अभियंता लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता नागेश रामटेके और उप अभियंता टिकेन्द्र चंद्राकर मौजूद रहे। अवैध निर्माण पर आगे भी जारी रहेगा अभियान नगर निगम प्रशासन ने साफ कहा है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण या नियमों के खिलाफ निर्माण किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसे अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

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रायपुर में धरना-प्रदर्शन पर अब लगेगा शुल्क: संगठनों ने बताया लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश

रायपुर में अब सार्वजनिक स्थानों पर धरना-प्रदर्शन या पंडाल लगाने के लिए लोगों को शुल्क देना होगा। रायपुर नगर निगम ने नया आदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी धरना या प्रदर्शन के आयोजन के लिए 500 रुपए का शुल्क देना अनिवार्य होगा। वहीं, पंडाल लगाने पर 5 रुपए प्रति वर्ग फुट की दर से राशि वसूली जाएगी। पहले से ही नवा रायपुर के तूता धरनास्थल पर प्रदर्शन पर रोक लगी हुई है, ऐसे में नगर निगम के इस फैसले का कई संगठनों और नेताओं ने विरोध किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है और जनता की आवाज दबाने की कोशिश है। महापौर मीनल चौबे ने बताया कि नगर निगम को धरना या प्रदर्शन के दौरान सफाई और व्यवस्थाओं पर खर्च उठाना पड़ता है, इसलिए यह शुल्क लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान रूट की जानकारी निगम को पहले देनी होगी ताकि सुरक्षा और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। वहीं, किसान नेता तेजराम विद्रोही ने इस फैसले को “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया और कहा कि अगर जनता की आवाज को दबाने की कोशिश की गई तो विरोध और तेज होगा। उन्होंने आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल 500 रुपए शुल्क तय किया गया है, लेकिन आने वाले समय में इसे बढ़ाकर 1000 रुपए तक किया जा सकता है। निगम की सामान्य सभा ने इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी है। इधर, नवा रायपुर के अटल नगर में रखरखाव कार्यों के चलते दो महीने तक धरना-प्रदर्शन पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस संबंध में आदेश जारी किया है और अन्य किसी भी स्थल पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है।

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रायपुर में शुरू हुई जनगणना की तैयारी: वार्ड 52 बना देश का ट्रायल जोन, हर घर को दिया जा रहा यूनिक नंबर

रायपुर नगर निगम का वार्ड क्रमांक 52 (डॉ. राजेन्द्र प्रसाद वार्ड) अब देश के लिए जनगणना का ट्रायल जोन बन गया है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और जनगणना निदेशालय के निर्देश पर यहां प्री-टेस्ट जनगणना का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया आने वाली राष्ट्रीय जनगणना की तैयारी के तौर पर की जा रही है। निगरानी में हो रहा काम जनगणना निदेशालय के अधिकारी हीरेन्द्र सिंहा ने खुद रायपुर पहुंचकर प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। नगर निगम आयुक्त विश्वदीप, जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, और नोडल अधिकारी योगेश यदु भी इस निरीक्षण के दौरान मौजूद रहे। 8000 घरों में से 2500 की नंबरिंग पूरी नगर निगम की राजस्व और नगर निवेश विभाग की टीम ने वार्ड के लगभग 8000 भवनों की सूचीबद्धता और नंबरिंग का काम शुरू किया है। अब तक 2500 से अधिक भवनों को यूनिक नंबर दिए जा चुके हैं। यह काम निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जनता से सहयोग की अपील नगर निगम ने वार्ड 52 के नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना टीम का पूरा सहयोग करें। अधिकारियों ने बताया कि भवनों की पहचान और नंबरिंग का कार्य पूरी सुरक्षा और सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है। क्या है प्री-टेस्ट जनगणना? प्री-टेस्ट जनगणना एक ट्रायल प्रक्रिया है, जिसमें सीमित क्षेत्र में घरों की गिनती, मैपिंग और डेटा कलेक्शन किया जाता है। इसका उद्देश्य असली जनगणना के दौरान आने वाली तकनीकी और प्रायोगिक चुनौतियों की पहचान करना और उन्हें दूर करना होता है।

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रायपुर में इंदौर मॉडल पर सफाई व्यवस्था लागू करने की तैयारी, गौरवपथ-2 बनेगा शहर का नया आकर्षण

रायपुर नगर निगम अब सफाई व्यवस्था में इंदौर मॉडल को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है। निगम की अगली सामान्य सभा 29 अक्टूबर को बुलाई गई है, जिसमें कुल 14 एजेंडों पर चर्चा होगी। बैठक की अध्यक्षता सभापति सूर्यकांत राठौर करेंगे। यह बैठक महापौर मीनल चौबे के कार्यकाल की बजट के बाद दूसरी सामान्य सभा होगी। इसमें कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के पार्षदों के बीच हंगामे की संभावना भी जताई जा रही है, क्योंकि कई पार्षदों ने पिछले छह महीनों के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। 🏗️ गौरवपथ-2 निर्माण का प्रस्ताव बैठक में प्रमुख प्रस्ताव 37.61 करोड़ रुपये की लागत से पचपेड़ीनाका से बूढ़ापारा तक गौरवपथ-2 के निर्माण का है। इस मार्ग को चौड़ा कर आधुनिक स्वरूप में विकसित किया जाएगा ताकि शहर की यातायात व्यवस्था और सौंदर्य दोनों में सुधार हो सके। ♻️ सफाई व्यवस्था में इंदौर मॉडल सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए निगम इंदौर मॉडल को अपनाने की योजना पर विचार करेगा। इसमें जीपीएस आधारित कचरा गाड़ियों की मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और निगरानी में सुधार होगा। साथ ही, रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन का कार्यकाल दो वर्ष और बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। 🗓️ पार्षदों की तैयारी सभापति राठौर ने बताया कि सामान्य सभा से पहले 27 और 28 अक्टूबर को दोनों राजनीतिक दलों के पार्षदों के साथ अलग-अलग बैठक की जाएगी। इसमें कार्यप्रणाली समझाने के साथ अनुशासन से जुड़ी धाराओं की जानकारी भी दी जाएगी। 📋 सामान्य सभा के प्रमुख एजेंडे

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